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एक साल बाद मणिपुर से राष्ट्रपति शासन हटेगा, फिर से सरकार बहाल होगी, युमनाम होंगे नए मुख्यमंत्री
नई दिल्ली। मणिपुर में एक बार फिर से सरकार बहाल होने जा रही है। यह पिछले एक साल से राष्ट्रपति शासन लागू है। एनडीए की ओर से युमनाम खेमचंद सिंह को विधायक दल का नेता चुन लिया गया है। सर्वसम्मति के बाद वे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। संभावना जताई जा रही है कि युमनाम खेमचंद राज्यपाल से मुलाकात करके सरकार बनाने का दावा पेश कर सकते हैं। बुधवार को ही वे मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। इसके साथ ही सरकार में दो उप मुख्यमंत्री भी होंगे। इनमें एक महिला भी होंगी। बता दें कि मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदाय के बीच जातीय हिंसा के कारण 9 फरवरी 2025 को तत्कालीन मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने इस्तीफा दे दिया था। इसके 4 दिन बाद 13 फरवरी 2025 से राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था।
उल्लेखनीय है कि मणिपुर की 60 सदस्यीय विधानसभा में अभी भाजपा के 37 विधायक हैं। सरकार का कार्यकाल 2027 तक है। हालांकि, राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद विधानसभा निलंबित कर दी गई थी। 2022 के चुनाव में 32 भाजपा विधायक जीते थे जबकि जदयू ने छह सीटें जीती थीं। इनमें से पांच विधायक बाद में भाजपा में शामिल हो गए।
पूर्व सीएम बीरेन सिंह के नजदीकी हैं युमनाम
युमनाम खेमचंद को पूर्व सीएम बीरेन सिंह का नजदीकी माना जाता है। युमनाम सिंग्जामेई क्षेत्र (इंफाल वेस्ट) से अभी भाजपा विधायक हैं। वे 2017-2022 तक मणिपुर विधानसभा स्पीकर भी रह चुके हैं। 2022 में पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह की दूसरी सरकार में मंत्री रहे। वे मैतेई समुदाय से आते हैं, जो मणिपुर के घाटी क्षेत्र में बहुसंख्यक हैं। हाल के महीनों में वे शांति प्रयासों में सक्रिय रहे। बता दें कि मई 2023 हिंसा के बाद दिसंबर 2025 में कुकी बहुल इलाकों और रिलीफ कैंप का दौरा करने वाले वे पहले मैतेई नेता हैं। युमनाम पर लगभग सभी विधायकों की सहमति है।
नई सरकार में मैतई-कुकी समुदाय को संतुलित करने की कोशिश
नई सरकार बनने से पहले मैतई और कुकी-जो दोनों समुदायों को संतुलित रखने का प्रयास किया जा रहा है। ताकि सरकार बनने के बाद कोई विवाद न हो और स्थाई सरकार मिल सके। यही कारण है कि नेम्चा किप्गेन काे उपमुख्यमंत्री बनाया जा रहा है। नेम्चा 2017 और 2022 में कुकी बहुल कांगपोकपी से भाजपा की विधायक हैं। पूर्व सीएम बीरेन सिंह के पहले कार्यकाल में वे मंत्री भी रह चुकी हैं। बता दें कि मैतेई-कुकी जाति हिंसा के दौरान इम्फाल में उनका सरकारी आवास जला दिया गया था।

