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सूरत मनपा का अब तक का सबसे बड़ा 10,593 करोड़ का ड्राफ्ट बजट पेश, जनता पर नया कर का कोई बोझ नहीं
सूरत। सूरत महानगरपालिका ने मंगलवार को वर्ष 2026-27 के लिए ड्राफ्ट बजट पेश किया। मनपा के इतिहास अब तक का सबसे बड़ा 10,593 करोड़ रुपये का ड्राफ्ट बजट प्रस्तुत किया गया है। निकाय चुनाव को ध्यान में रखते हुए इस बजट आम जन पर किसी भी प्रकार का नया कर नहीं लगाया गया है। यह सूरतवासियों के लिए बड़ी राहत की बात है। बता दें कि पिछले वर्ष के 10,004 करोड़ के बजट की तुलना में इस वर्ष 589 करोड़ की वृद्धि दर्ज की गई है। इस बार बजट में विकास और सुविधाओं पर विशेष ध्यान रखा गया है। शहर के बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने के लिए 5,073 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है, जो सूरत को ग्लोबल सिटी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे, इसके लिए बजट में खास प्रावधान रखा गया है। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और आधुनिक सुविधाओं पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। भिक्षावृत्ति करने वाले बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में लाने के लिए सूरत मनपा और लीगल सर्विसेज के सहयोग से ‘भिक्षा नहीं शिक्षा’ दृष्टिकोण के तहत ‘सिग्नल स्कूल’ शुरू करने की महत्वपूर्ण घोषणा की गई है।
‘फिट सूरत’ अभियान की शुरुआत
सूरत शहर को खेल और स्वास्थ्य के हब के रूप में विकसित करने की योजना है। इस पहल के तहत शहर की प्रतिष्ठित तापी मैराथन और भव्य स्पोर्ट्स कार्निवल जैसे आयोजनों के माध्यम से नागरिकों में फिटनेस के प्रति जागरूकता लाने का लक्ष्य है। एक मोबाइल एप लॉन्च किया जाएगा। इसके जरिए सूरतवासी अपनी फिटनेस गतिविधियों को ट्रैक कर सकेंगे और शहर-स्तर की विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग ले सकेंगे।
आंगनबाडियों की संख्या बढ़ेगी, नए बनाए जाएंगे
10 नए आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण किया जाएगा। करीब 40,000 बच्चों को सप्ताह में तीन बार फोर्टिफाइड फ्लेवर्ड दूध देने के लिए 5.00 करोड़ रुपये का खर्च आवंटित किया गया है। इसके अलावा, 389 आंगनवाड़ी केंद्रों को ‘सक्षम आंगनबाड़ी’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इसमें टीवी, रेनवॉटर हार्वेस्टिंग और किचन गार्डन जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
इस बार फेरीवालों के लिए खास प्रावधान
सूरत महानगरपालिका द्वारा वर्ष 2026-27 के बजट लक्ष्यों में शहरी फेरीवालों के सर्वांगीण विकास के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं। निगम ने 16,000 छोटे फेरीवालों को बैंकों के माध्यम से कुल 3.50 करोड़ रुपये का ऋण देने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही लगभग 500 फेरीवालों को क्रेडिट कार्ड प्राप्त करने में सहायता दी जाएगी, ताकि वे साहूकारों के ब्याज चक्र से मुक्त हो सकें।

