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आसाराम आश्रम से 45 हजार वर्ग मीटर जमीन वापस लेने को हाईकोर्ट ने उचित ठहराया, कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियों में इस्तेमाल होगा
अहमदाबाद। गुजरात हाईकोर्ट से आसाराम को बड़ा झटका लगा है। दरअसल, आसाराम आश्रम से 45,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र की सार्वजनिक जमीन वापस लेने को हाईकोर्ट ने सही ठहराया है। राज्य सरकार इस जमीन को खाली करवाकर 2030 में अहमदाबाद में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियों में इस्तेमाल करना चाहती है। बता दें कि विवादित जमीन अहमदाबाद के एक महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है। इसलिए राज्य सरकार इस जमीन को वापस पाना चाहती है। भारत लंबे समय से ओलिंपिक के सपने संजो रहा है, ऐसे में इस जमीन का वापस मिलना महत्वपूर्ण है। कोर्ट के समक्ष राज्य अधिकारियों ने अपनी दलील रखते हुए कहा कि दशकों पहले केवल सीमित धार्मिक उपयोग के लिए दी गई जमीन धीरे-धीरे अपनी कानूनी सीमाओं से आगे बढ़ती चली गई।
जांच के दौरान यह सामने आया कि आवंटित जमीन से कहीं अधिक क्षेत्र में व्यापक निर्माण और कब्जा किया गया था। इसके लिए आश्रम को कई बार नोटिस दिए भी गए थे। राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक जमीन पर इंच-इंच करके अतिक्रमण करने के बाद में उसे वैध बनाने का प्रयास स्वीकार्य नहीं हो सकता।
30 से अधिक अवैध निर्माणों को वैध करने के आवेदन नामंजूर
बता दें कि आसाराम आश्रम की ओर से कई अवैध निर्माणों को वैध करवाने का प्रयास किया गया। लेकिन 30 से अधिक अवैध निर्माणों को नियमित करने के आवेदन नामंजूर कर दिये गए। यह स्पष्ट किया गया कि विशेष रूप से ऐसे संवेदनशील शहरी क्षेत्र में अवैध निर्माण को वैध नहीं बनाया जा सकता। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद लंबे समय से कानूनी उलझन में फंसी विशाल जमीन अब राज्य सरकार के नियंत्रण में जल्द आ सकती है।
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने नरेंद्र मोदी स्टेडियम के पास ओलंपिक विलेज बनाने की तैयारी के तहत कराए गए सर्वे में पाया कि आसाराम आश्रम के अलावा भारतीय सेवा समाज और सदाशिव आश्रम ने सरकारी जमीन पर कब्जा किया हुआ है।

