हरिद्वार: घाटों पर 4000 मीट्रिक टन कचरा; गंगा तो हमारी आस्था है फिर इसमें कचरा क्यों डाल रहे, जिम्मेदारी तो हमारी भी बनती है…

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हरिद्वार। यहां गंगनहर का पानी रोके जाने के बाद गंगा घाटों पर फैली गंदगी ने सबको चौंका दिया है। गंगा में इतनी बड़ी मात्रा में कचरा ने हम सबको सोचने पर मजबूर कर दिया है। क्या सफाई के मामले में हमारी सोच अब भी वर्षों पुरानी ही है। हम साफ-सफाई को लेकर अपने विचार क्यों नहीं बदल पा रहे हैं। साथ ही हरिद्वार जैसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों पर कचरा प्रबंधन को लेकर एक ठोस प्रणाली क्यों नहीं तैयार हो रहे हैं। गंगा नदी तो आस्था की जगह है, इसमें कचरा हमें क्यों डालना चाहिए, ये हम सब को भी विचार करना चाहिए। 

बता दें कि घाटों और किनारों पर पुराने कपड़े, प्लास्टिक और पॉलीथिन का ढेर जमा है। जिला प्रशासन के मुताबिक, हर साल करीब 17 करोड़ लोगों के आने-जाने के बीच गंगा में लगभग 4,000 मीट्रिक टन कचरा जमा हो गया है। इसे हटाने के लिए नगर निगम ने दिन-रात सफाई अभियान शुरू किया है। सफाई के लिए उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग से भी मदद मांगी जा रही है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से दीपावली तक हरिद्वार में गंगा स्नान का कार्यक्रम टालने की अपील की है। 

20 अक्टूबर से चल रही है साफ-सफाई

बता दें कि गंगनहर की वार्षिक बंदी 20 अक्टूबर की रात से शुरू हुई। हर साल दशहरे के आसपास नहर का पानी रोका जाता है और दीपावली से पहले इसे दोबारा चालू किया जाता है। इस अवधि में नहर की सफाई और मरम्मत के साथ जरूरी काम किए जाते हैं। पानी का प्रवाह कम होने से घाटों, रेगुलेटरों और किनारे के उन हिस्सों में जमा कचरा दिखाई देने लगता है, जो सामान्य दिनों में पानी के नीचे रहते हैं। इस बार भी बड़ी मात्रा में गंदगी सामने आई है।

60 कर्मचारियों ने आठ टन कचरा निकाला

सफाई अभियान के तहत नगर निगम की टीम ने डाम कोठी के पास स्थित मायापुर हेड रेगुलेटर पर बड़े स्तर पर सफाई की। इस काम में करीब 60 सफाई कर्मचारी जुटे और लगभग आठ टन कूड़ा-कचरा एकत्र किया गया। नगर निगम ने कचरे को उचित निस्तारण के लिए अपने प्लांट में भेज दिया है। प्रशासन के सामने चुनौती केवल घाटों पर दिखाई दे रही गंदगी हटाने की नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों और रेगुलेटरों में जमा कचरे को भी निकालने की है। इसके लिए सफाई अभियान को तेज किया गया है। नगर निगम की टीमें 7 नवंबर तक दिन-रात काम करेंगी। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग से भी सफाई में सहयोग मांगा जा रहा है।

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गंगा में प्लास्टिक के ढेर ने बढ़ाई चिंता

हरकी पैड़ी हरिद्वार में गंगा स्नान और आरती के लिए आने वाले श्रद्धालुओं का प्रमुख स्थल है। इसी कारण नगर निगम ने सबसे पहले इस क्षेत्र की सफाई पर ध्यान दिया है। हालांकि, आसपास के घाटों पर अभी भी काफी कचरा जमा है। पुराने कपड़े, प्लास्टिक और पॉलीथिन की मौजूदगी से गंगा की स्वच्छता को लेकर चिंता बढ़ गई है। सफाई अभियान के दौरान इन सामग्रियों को हटाकर एकत्र किया जा रहा है, ताकि घाटों को साफ किया जा सके।

सराय प्लांट में अलग होगा कचरा, उपयोगी सामग्री बिकेगी

घाटों से निकाले गए कचरे को ज्वालापुर के सराय कूड़ा ट्रीटमेंट प्लांट में भेजा जा रहा है। यहां कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाएगा। इसमें से उपयोगी सामग्री निजी कंपनियों को बेची जाएगी। पुराने कपड़ों से भी उपयोगी उत्पाद तैयार करने की योजना है। इससे कचरे के निस्तारण के साथ दोबारा इस्तेमाल होने वाली सामग्री को अलग करने में मदद मिलेगी।

हरिद्वार में देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं, पर कचरा यहीं छोड़ जाते हैं

हरिद्वार में देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु गंगा स्नान और पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। धार्मिक गतिविधियों के दौरान कई लोग पुराने कपड़े और दूसरी अनुपयोगी सामग्री नदी में छोड़ देते हैं। समय के साथ यह सामग्री घाटों और किनारों पर जमा होती रहती है। पानी में पहुंचने वाली प्लास्टिक और पॉलीथीन जलीय जीवों के लिए भी खतरा पैदा कर सकती हैं। नहरबंदी के दौरान पानी कम होने पर इस समस्या का बड़ा हिस्सा दिखाई देने लगता है।

सामाजिक संस्थाएं भी अभियान में लेंगी हिस्सा

गंगनहर की सफाई के लिए कई सामाजिक संस्थाओं ने भी इसमें भाग लेने पर सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि गंगा को साफ रखना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए आम लोगों का सहयोग भी जरूरी है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे पुराने कपड़े और अन्य कचरा गंगा में न डालें। इसके बजाय निर्धारित स्थानों पर ही कचरा जमा करें। प्रशासन का मानना है कि सफाई अभियान को सफल बनाने के लिए नगर निगम और सरकारी विभागों के साथ सामाजिक संस्थाओं, धार्मिक संगठनों तथा श्रद्धालुओं की भागीदारी जरूरी है।

दीपावली तक गंगा स्नान का कार्यक्रम टालने की अपील

हरकी पैड़ी और आसपास के घाटों पर जल प्रवाह सुचारु करने के लिए समतलीकरण का काम भी किया जाना है। इसका उद्देश्य पानी के बहाव को व्यवस्थित रखना और हरकी पैड़ी तक जल पहुंचने की व्यवस्था बनाए रखना है, ताकि श्रद्धालुओं को स्नान के दौरान परेशानी न हो। इसी वजह से देशभर के श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे दीपावली तक हरिद्वार में गंगा स्नान का कार्यक्रम स्थगित रखें। बहुत जरूरी होने पर ही स्नान के लिए हरिद्वार आएं। नहरबंदी के दौरान अर्धकुंभ से जुड़े काम भी किए जाने हैं। नहर में पानी का प्रवाह 7 और 8 नवंबर की मध्यरात्रि के आसपास फिर शुरू होना निर्धारित है। इस दौरान प्रशासन के सामने घाटों की सफाई पूरी करने और जल प्रवाह को सुचारु बनाने की चुनौती है।

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