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कांग्रेस 30 साल तक सत्ता से बाहर रहेगी… अमित शाह के इस बात के क्या मायने और विपक्ष के लिए क्या संकेत हैं?
नई दिल्ली। सड़कों पर किए जाने वाले विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक भीड़ के दम पर लोकतंत्र में जनादेश को झुकाया नहीं जा सकता। यदि चुनाव जीतना है तो धरना देने के बजाय जनता के बीच उतरकर उनकी बुनियादी समस्याओं को समझना होगा और विकास कार्यों पर ध्यान देना होगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को देश की राजधानी दिल्ली में विपक्ष, खासकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) पर तीखा जुबानी हमला बोलते हुए यह बात कही। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि कांग्रेस जिस तरह की नकारात्मक राजनीति कर रही है, उसके चलते वह आने वाले 30 वर्षों तक सत्ता में वापसी नहीं कर पाएगी।
अमित शाह के इस कथन को कांग्रेस पार्टी को गंभीरता से लेनी चाहिए। इसमें कई मायने छिपे हुए हैं। अगर देखा जाए तो शाह यह कहना चाहते हैं कि कांग्रेस आज भी जमीन से जुड़कर काम करने के बजाय केवल सड़कों पर विरोध प्रदर्शन, धरने और शॉर्टकट की राजनीति पर निर्भर है। जब तक विपक्षी दल जनता के बीच जाकर जमीनी मुदों को नहीं सुलझाएंगे, तब तक वे लोगों का भरोसा नहीं जीत पाएंगे।
30 साल का आंकड़ा एक माइंड गेम की तरह है
30 साल का आंकड़ा बोलकर गृह मंत्री ने यह मनोवैज्ञानिक संदेश देने की कोशिश की है कि बीजेपी का कैडर-बेस्ड संगठन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियां इतनी मजबूत हैं कि विपक्ष लंबे समय तक उनका मुकाबला नहीं कर पाएगा। यह एक माइंड गेम की तरह है, जिसमें विपक्ष उलझकर रह जाएगा।
वोट चोरी की आड़ में विपक्ष कुछ और खेल कर रहा है: शाह
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का नाम लिए बिना उन पर प्रहार करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि दिल्ली में विभिन्न विरोध प्रदर्शनों को प्रायोजित करने के लिए दूसरे राज्यों से कार्यकर्ताओं को जुटाया जा रहा है। हाल ही में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के विरोध में विपक्ष द्वारा किए गए प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए शाह ने कहा कि कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियां दरअसल 'वोट चोरी' की आड़ लेकर देश में अवैध घुसपैठियों को सुरक्षा कवच प्रदान करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने एक के बाद एक राज्यों और केंद्र में चुनाव जीतना शुरू किया है, तभी से कांग्रेस ने हार से बौखलाकर ‘वोट चोरी' की मनगढ़ंत कहानी गढ़ना शुरू कर दिया है।
हिमाचल, केरल में चुनाव जीतते हैं तो सवाल क्यों नहीं खड़े होते
गृह मंत्री ने विपक्षी खेमे के दोहरे रवैये की पोल खोलते हुए कहा कि जब यही दल हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना या केरल जैसे राज्यों में चुनाव जीतते हैं, तब उन्हें न तो चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर शक होता है और न ही इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में कोई गड़बड़ी नजर आती है। लेकिन देश के किसी अन्य हिस्से में पराजय मिलते ही सारा दोष संवैधानिक संस्थाओं पर मढ़ दिया जाता है। शाह ने तंज कसते हुए कहा कि जब अदालत के फैसले आपके मनमुताबिक आते हैं तो आप न्यायपालिका को निष्पक्ष और सही बताते हैं, लेकिन जैसे ही फैसला आपके खिलाफ जाता है, आप व्यवस्था पर सवाल उठाने लगते हैं। राहुल जी, इस देश में यह दोहरा मापदंड अब ज्यादा दिन नहीं चलने वाला।
अमित शाह ने उस सियासी बहस का भी जवाब दिया, जिसमें उनके भाजपा के लंबे शासनकाल के दावों पर सवाल उठाए जाते हैं। शाह ने कहा, "जब मैं कहता हूं कि भाजपा अगले 30 साल तक सत्ता में बनी रहेगी, तो वे मुझ पर यह कहकर वोट चोरी का आरोप लगाने लगते हैं कि अमित शाह को पहले से नतीजों का कैसे पता चल जाता है। मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि अमित शाह इसी भारत भूमि पर पैदा हुए हैं, यहीं रहते हैं और यहीं अंतिम सांस लेंगे। मुझे हर छह महीने में विदेश यात्राओं पर जाने की जरूरत नहीं पड़ती। मैं इस देश की आम जनता के बीच उनकी नब्ज टटोलते हुए रहता हूं।
राहुल गांधी पर नकारात्मक राजनीति का आरोप
शाह ने कहा कि मुझे पता है कि आप अभी मेरी बात नहीं सुन पा रहे होंगे क्योंकि आप विदेश में कहीं बैठे हैं। आप कभी यह जाहिर भी नहीं करते कि आप क्यों जाते हैं, हालांकि यह आपकी निजी जिंदगी का विषय है। लेकिन यह तय है कि आपकी नकारात्मक राजनीति की वजह से अगले तीस सालों तक सत्ता में आपकी बारी नहीं आने वाली है।
चुनाव धरना प्रदर्शन से नहीं जीते जाते: शाह
चुनाव जीतने का रास्ता सड़कों पर धरना-प्रदर्शन से नहीं, बल्कि जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को हल करने से निकलता है। जहां आपकी सरकारें हैं, वहां जनकल्याणकारी योजनाएं चलाएं, वरना हर जगह सूपड़ा साफ हो जाएगा। भाजपा की जीत के बाद विपक्ष द्वारा धांधली का मुद्दा उठाना महज अपनी राजनीतिक नाकामियों और चुनावी हार को छिपाने का एक बहाना है। भाजपा का लंबे समय तक सत्ता में रहना जनता के विश्वास का प्रतीक है। राजनीतिक विरोधियों की नकारात्मक कार्यशैली ही उन्हें तीन दशकों तक सत्ता से दूर रखेगी।

