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रिहा हुए पर आज़ाद नहीं, सौरव-आशुतोष... कोर्ट ने इस बार कई शर्तें लगाई हैं
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका तिहाड़ जेल से रिहा हो गए हैं। कोर्ट ने 21 अक्टूबर को उनकी रिहाई का आदेश दिया था। दिल्ली पुलिस ने उनकी ज्यूडिशियल कस्टडी तीन दिन और बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने यह अर्जी खारिज कर दी। दोनों को जमानत देनी होगी और शांति बनाए रखने की शर्तों का पालन करना होगा।
दोनों नेताओं को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में हिरासत में लिया गया था। उन पर बिना इजाजत प्रदर्शन स्थल में घुसने, बैरिकेड तोड़ने और पहले दिए गए शांति बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप था। 14 अक्टूबर को सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट ने उन्हें पांच दिन के लिए तिहाड़ जेल भेज दिया था। 19 अक्टूबर को उनकी कस्टडी दो दिन और बढ़ा दी गई थी। यह समय 21 अक्टूबर को खत्म हो गया।
ज़मानत की शर्तें
दोनों नेताओं ने 50-50 हजार रुपये के पर्सनल बॉन्ड की शर्त पूरी कर ली है। उन्होंने जमानत भी पेश की है। पर्सनल बॉन्ड कोर्ट को दिया गया एक भरोसा होता है; यह कैश जमा करने जैसा नहीं है। दोनों ने लिखकर भरोसा दिया है कि वे शांति भंग नहीं करेंगे और लॉ एंड ऑर्डर बनाए रखेंगे।
दोनों ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि जब तक जंतर-मंतर को कानूनी तौर पर फिर से विरोध प्रदर्शन के लिए ऑथराइज़्ड जगह घोषित नहीं कर दिया जाता, तब तक वे वहां विरोध प्रदर्शन के लिए लोगों को इकट्ठा नहीं करेंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में कोई भी विरोध प्रदर्शन संवैधानिक दायरे में होगा।
इस केस से जुड़ी हर सुनवाई की तारीख पर दोनों नेताओं को कोर्ट में मौजूद रहना होगा। पुलिस को अगली सुनवाई तक ज़मानतदारों की वेरिफिकेशन रिपोर्ट कोर्ट में जमा करनी होगी।
21 अक्टूबर को दोनों नेताओं को एक बार फिर SEM कोर्ट में पेश किया गया। दिल्ली पुलिस ने उनकी ज्यूडिशियल कस्टडी तीन दिन और बढ़ाने की मांग की थी। कोर्ट ने यह मांग खारिज कर दी और ज़मानतदारों की मौजूदगी और लिखे हुए भरोसे के बाद, उन्हें और समय तक कस्टडी में रखना ज़रूरी नहीं समझा। इसके बाद, उन्हें रिहा करने का आदेश दिया गया। SEM कोर्ट में सुनवाई से पहले, सौरव दास और आशुतोष रांका ने अपनी कस्टडी को चैलेंज करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में एक अर्जी दी थी। हाई कोर्ट ने उन्हें SEM कोर्ट में कार्रवाई के नतीजे का इंतज़ार करने और अगर ज़रूरी हो, तो सही लीगल फोरम में जाने की सलाह दी। इसके बाद, दोनों ने अपनी अर्जी वापस ले ली।
मामले की सुनवाई कर रहे मजिस्ट्रेट को कथित तौर पर धमकियां दिए जाने की खबरें आई हैं। मिली जानकारी के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने इस मामले में अनजान लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। दोनों नेताओं को रिहा करने के आदेश का मतलब यह नहीं है कि उन्हें मामले में बरी कर दिया गया है; यह सिर्फ उन्हें कस्टडी से रिहा करने का आदेश है। इस मामले की अगली सुनवाई 23 अक्टूबर, 2026 को दोपहर 3:00 बजे तय है। उस दिन पुलिस को बेलिफ के बारे में जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश करनी होगी।

