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जयप्रकाश अग्रवाल उद्योगपति हैं जिन्होंने सूरत शहर का ऋण उतारने में कोई कसर नहीं छोड़ी
(उत्कर्ष पटेल)
गुजरात के टेक्सटाइल जगत में सूरत का रचना ग्रुप अग्रणी नाम है। 1980 में सूरत में जयप्रकाश अग्रवाल (जेपी) द्वारा शुरू की गई मेहनत आज सफलता का रूप ले चुकी है। टेक्सटाइल उद्योग से जुड़ी उनकी कंपनियां आज करोड़ों के टर्नओवर के साथ तीस से अधिक देशों में निर्यात कर रही हैं तथा हजारों परिवारों को रोजगार प्रदान कर रही हैं। यह सब उनकी मेहनत दूरदृष्टि और गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्धता का परिणाम है।
जयप्रकाश अग्रवाल का जीवन केवल व्यावसायिक उपलब्धियों से ही नहीं भरा है। उनका हृदय समाजसेवा के लिए भी धड़कता है। वे मानते हैं कि सफलता तभी सार्थक होती है जब उसे समाज के साथ बांटा जा सके। वे इस भावना को अपने सामाजिक कार्यों से जीवंत रखते हैं।
शिक्षा स्वास्थ्य वृद्धाश्रम गौसेवा धार्मिक ट्रस्ट नारी सुरक्षा और वनवासी कल्याण जैसे क्षेत्रों में वे प्रमुख दाता हैं। ट्रस्टी के रूप में समय देकर सेवा भी करते हैं। सरकारी जनसेवा के किसी भी आह्वान पर वे सबसे पहले योगदान देते हैं। सूरत में पुलिस की सुरक्षा संबंधी गतिविधियों में भी वे तन मन धन से सहयोग करते हैं। टेक्सटाइल उद्योग की किसी समस्या पर वे विवाद से दूर रहकर सकारात्मक समाधान ढूंढने में हमेशा सक्रिय रहते हैं।
वे प्रधानमंत्री नरेंद्रभाई के प्रति विशेष लगाव रखते हैं और उनके आह्वान पर शुरू होने वाले हर सेवा कार्य में आगे रहते हैं।
जयप्रकाश अग्रवाल का जीवन युवाओं को संदेश देता है कि सच्ची सफलता मुनाफा कमाने में नहीं बल्कि समाज को कुछ लौटाने में है। सूरत शहर में सुख समृद्धि पाने के बाद उन्होंने शहर का ऋण चुकाने में कोई कमी नहीं रखी। वे सूरत के सच्चे नगरशेठ कहलाने योग्य हैं जिनकी दोनों हथेलियां हमेशा सेवा के लिए खुली रहती हैं।
(लेखक एक प्रतिष्ठित उद्योगपति, समाजसेवी और khabarchhe.com के संस्थापक हैं।)

