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क्या 2030 में अहमदाबाद में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए आसाराम के आश्रम पर चलेगा बुल्डोजर? 500 करोड़ की जमीन पर बना है
अहमदाबाद। 2030 में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स को लेकर अहमदाबाद में बड़े पैमाने पर डिमोलिशन का काम चल रहा है। अवैध निर्माण को तोड़कर जगह खाली कराया जा रहा है। दुनिया के सबसे बड़े नरेंद्र मोदी स्टेडियम के आसपास मौजूद अतिक्रमण को तेजी से हटाया जा रहा है और विकास के काम किये जा रहे हैं। इसी बीच, मोदी स्टेडियम के पास साबरमती क्षेत्र में स्थित आसाराम आश्रम पर भी गाज गिरने वाला है। राज्य सरकार की जमीन पर होने के कारण नगर निगम द्वारा नोटिस जारी किया गया है। बताया जाता है कि 500 करोड़ रुपये की जमीन पर बने आसाराम आश्रम में 32 अवैध निर्माण किए गए हैं, जिन्हें हटाने के लिए अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (एएमसी) ने नोटिस दिया है। यही नहीं, एएमसी ने आश्रम की इम्पैक्ट फीस की अर्जी भी नामंजूर कर दी है और मामले को अपीलेट अथॉरिटी में निपटाने का निर्देश दिया है। इसलिए अब पूरी संभावना है कि आने वाले समय में 500 करोड़ रुपये की जमीन पर बना आसाराम आश्रम पर जल्द बुल्डोजर चल सकता है।
आसाराम के आश्रम के साथ कई आश्रम पर भी चलेगा बुल्डोजर
बता दें कि राज्य सरकार नरेंद्र मोदी स्टेडियम के पास ओलंपिक विलेज बनाने की योजना पर काम कर रही है। इसी के तहत कराए गए सर्वे में आसाराम आश्रम, भारतीय सेवा समाज और सदाशिव आश्रम द्वारा करोड़ों रुपये की जमीन पर कब्जा किए जाने का खुलासा हुआ। सरकार ने इन तीनों आश्रमों के साथ-साथ लगभग 150 आवासीय मकानों को भी नोटिस जारी किया है। वर्षों से विवाद में रहे आसाराम के आश्रम के अतिक्रमण हटाने के प्रशासनिक फैसले के बाद कभी भी डिमोलिशन की कार्रवाई शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।

आश्रम में निर्माण को लेकर शर्तों का किया गया उल्लंघन!
सिटी मामलतदार द्वारा जारी नोटिस में बताया गया है कि आसाराम आश्रम ने सर्वे नंबर 282-A की 6,489 वर्ग मीटर, गांव ताल की 3,185 वर्ग मीटर और साबरमती नदी की 6,104 वर्ग मीटर यानी कुल 15,778 वर्ग मीटर जमीन पर अवैध कब्जा किया है। करीब चार दशक पहले सरकार ने मोटेरा में आसाराम आश्रम को लगभग 33,980 वर्ग मीटर जमीन आवंटित की थी। लेकिन पिछले साल के अंत में कराए गए नए सर्वे में आश्रम की कुल जमीन 49,758 वर्ग मीटर पाई गई। इसी को लेकर नोटिस जारी की गई है।
क्या आसाराम आश्रम के अवैध निर्माण हटेंगे या नहीं?
बता दें कि नोटिस मिलने के बाद आश्रम ने इम्पैक्ट फीस के तहत मंजूरी के लिए आवेदन किया था, जिसे नगर निगम ने खारिज कर दिया है। अब यह मामला कोर्ट की अपीलेट अथॉरिटी के समक्ष रखा गया है। अब लीगल कमिटी की बैठक में नगर निगम की ओर से वकील की नियुक्ति कर जल्द से जल्द मामले का निपटारा करने के निर्देश दिए गए हैं।

