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जंतर-मंतर को प्रोटेस्ट वेन्यू की लिस्ट से क्यों हटाया गया? सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से उस पिटीशन पर जवाब मांगा, जिसमें जंतर-मंतर को डेजिग्नेटेड प्रोटेस्ट वेन्यू के तौर पर हटाने को चैलेंज किया गया है। कोर्ट जंतर-मंतर को ऑथराइज्ड प्रोटेस्ट वेन्यू के तौर पर डी-नोटिफाई करने के मामले की सुनवाई कर रहा था।
इस पिटीशन पर सुनवाई के दौरान, पूर्व जज और सीनियर एडवोकेट मुक्ता गुप्ता ने दलील दी कि प्रोटेस्ट वेन्यू ऐसा होना चाहिए कि प्रोटेस्ट करने वालों की आवाज पावर में बैठे लोगों को सुनाई दे। इस पर जस्टिस ज्योत्सामलय बागची ने ओरल कमेंट करते हुए कहा कि 'सुनना' शब्द को टेक्नोलॉजी के नजरिए से भी समझना चाहिए।

इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी की लीडरशिप में विपक्षी नेताओं की पिटीशन पर इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ECI) और दूसरी पार्टियों को भी नोटिस भेजा है। कोर्ट ने पिटीशन पर इलेक्शन एजेंसी, चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) ज्ञानेश कुमार और इलेक्शन कमिश्नर सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी से जवाब मांगा है।

कोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और अन्य नेताओं को भी वोटर रोल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में कथित गड़बड़ियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च के खिलाफ दायर याचिका पर नोटिस जारी किया है।
कोर्ट ने चुनाव आयोग द्वारा वोटर रोल के SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के कामकाज को चुनौती देने वाले 13 याचिकाकर्ताओं में से एक के व्यवहार पर गहरी नाराजगी और कड़ी आपत्ति जताई।

