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नीट पेपर लीक से कई परिवारों ने अपने बच्चों को खोया, पैरेंट्स का दर्द- पेपर तो दोबारा करवा लोगे, लेकिन बच्चों को दोबारा कैसे लौटा पाओगे?
नई दिल्ली। नीट पेपर लीक ने कई परिवारों को जीवन भर का दुख दे दिया। पेपर लीक की वजह से कई माता-पिता अपने बच्चों को खो चुके हैं। इस लीक ने देश के भविष्य कहे जाने वाले होनहार छात्रों को गहरे अंधकार में धकेल दिया है। दरअसल, परीक्षा दोबारा होने की आशंकाओं और सिस्टम के भ्रष्टाचार से टूटकर देश के अलग-अलग हिस्सों में कई छात्र अपनी जान गंवा चुके हैं। नागपुर में सुसाइड करने वाली मऊगंज की मेधावी छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। इस दर्दनाक घटना पर राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आकांक्षा की मौत को लेकर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधा है। राहुल ने सवाल उठाया है कि आखिर इस भ्रष्ट और टूटी हुई व्यवस्था की बलि चढ़ते इन युवाओं को न्याय कब मिलेगा? वहीं पीड़ित माता-पिता का कहना है कि नीट पेपर तो दोबार करवा लोगे लेकिन जो बच्चे दुनिया को छोड़ चुके हैं, उन्हें कहां से लाओगे।
नीट परीक्षा के विवादों के बीच देश के अलग-अलग राज्यों से आ रही छात्रों की आत्महत्या की खबरें केवल आंकड़े नहीं, बल्कि एक पूरी पीढ़ी के सपनों की हत्या हैं। आइए इस पूरे घटनाक्रम और पीड़ित परिवारों के दर्द को विस्तार से समझते हैं।
मां का दर्द: पेपर दोबारा करा लोगे, मेरी बेटी लौटा पाओगे?
नीट पेपर लीक मामले के बाद नागपुर में आत्महत्या करने वाली मऊगंज की छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी के घर में 11 दिन बाद भी मातम पसरा हुआ है। आकांक्षा की मां नीलम चतुर्वेदी के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। वह फफकते हुए कहती हैं, ‘पेपर तो दोबारा करा लोगे, लेकिन मेरी बेटी को लौटा पाओगे क्या? वह आज भी मेरी आंखों के सामने खड़ी हो जाती है। कहती है- मां मुझे माफ कर देना। मैं डॉक्टर नहीं बन पाई। आपके और पापा के सपने पूरे नहीं कर पाई। मेरी बच्ची का क्या कसूर था? क्या गरीब परिवार में जन्म लेकर डॉक्टर बनने का सपना देखना ही उसका गुनाह था?’
नीलम कहती हैं, उनकी तो पूरी जिंदगी ही उजड़ गई। उनकी इकलौती बेटी इस भ्रष्ट शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक का शिकार हो गई। उन्होंने गुस्से और दर्द में कहा, "सरकार को क्या फर्क पड़ता है कि कोई गरीब जिए या मर जाए। आज अगर पेपर लीक नहीं होता तो मेरी बेटी जिंदा होती। क्या हमारे नुकसान की भरपाई करने की क्षमता तुममें है?"
पिता अस्पताल में भर्ती, बेटी की अंतिम यात्रा में भी शामिल नहीं हो सके
आकांक्षा एक मेधावी छात्रा थी और उसे परीक्षा में 650 से अधिक अंक मिलने की उम्मीद थी। लेकिन जैसे ही नीट परीक्षा में धांधली और पेपर लीक की खबरें आईं, वह गहरे मानसिक तनाव में चली गई। परीक्षा रद्द होने और दोबारा होने की अनिश्चितता ने उसे भीतर से तोड़ दिया। पेपर लीक होते ही उसे अपने पिता पर चढ़े भारी-भरकम कर्ज का बोझ याद आया और उसने यह खौफनाक कदम उठा लिया। बेटी को डॉक्टर बनाने के लिए उसके पिता कृष्णकुमार चतुर्वेदी ने करीब 15 से 20 लाख रुपए का कर्ज ले रखा था। बेटी की मौत की खबर सुनते ही पिता की तबीयत इतनी बिगड़ गई कि वे अपनी लाडली का अंतिम संस्कार तक नहीं देख पाए। उन्हें नागपुर के एक अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है, जहां डॉक्टरों के मुताबिक वे गहरे डिप्रेशन में हैं।
राहुल गांधी हमला: यह आत्महत्या नहीं, भ्रष्ट व्यवस्था की देन
इस संवेदनशील मामले को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल लिखा कि आकांक्षा डॉक्टर बनकर देश और समाज की सेवा करना चाहती थी। आकांक्षा के पिता किसान हैं। बेटी के डॉक्टर बनने के सपने के लिए उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड पर 3 लाख रुपए का कर्ज लिया और नागपुर में खुद कुक की नौकरी कर ली, ताकि बेटी वहां कोचिंग कर सके। फिर नीट पेपर लीक हुआ। परीक्षा रद्द हुई। उस अनिश्चितता में आकांक्षा परिवार को छोड़कर चली गई।
भ्रष्ट और टूटी हुई व्यवस्था के लिए जिम्मेदार कौन?
राहुल गांधी ने सरकार को घेरते हुए कहा कि आकांक्षा की मौत आत्महत्या नहीं, बल्कि मोदी जी की एक भ्रष्ट और टूटी हुई व्यवस्था की देन है। और धर्मेंद्र प्रधान जी आज भी अपनी कुर्सी पर बने हुए हैं। फिर से वही कमेटी बना दी गई है, वही ट्रांसफर हो रहे हैं और वही पुरानी जांच चल रही है। न कोई सुधार दिख रहा है, न ही न्याय। उन्होंने प्रधानमंत्री को चेतावनी देते हुए कहा कि कुर्सी स्थायी नहीं होती, आती-जाती रहती है, लेकिन बीते 12 वर्षों में शिक्षा व्यवस्था को जिस हद तक बर्बाद किया गया है, उसकी कीमत आज भारत की एक पूरी युवा पीढ़ी चुका रही है।
देश के अन्य राज्यों में भी पसरा मातम
नीट परीक्षा के इस विवाद और मानसिक तनाव के कारण केवल आकांक्षा ही नहीं, बल्कि देश के कई अन्य राज्यों में भी छात्र-छात्रा सुसाइड कर चुके हैं।
महाराष्ट्र (लातूर): लातूर जिले में 16 मई को 18 साल की नीट छात्रा मैथिली सोनवाने ने सुसाइड कर लिया। उसके पिता ने बताया कि पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की खबरों से वह मानसिक तनाव में थी।
- • कर्नाटक (कलबुर्गी): कलबुर्गी में 18 साल की भाग्यश्री ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। भाग्यश्री ने हाल ही में 12वीं की परीक्षा में 92 प्रतिशत अंक हासिल किए थे और उसकी नीट परीक्षा भी बहुत अच्छी गई थी।
- मडगांव (गोवा): मडगांव में एक छात्र ने आत्महत्या कर ली। उसने अपने सुसाइड नोट में लिखा था कि वह अब और कॉम्पिटिशन एग्जाम (प्रतियोगी परीक्षाओं) का हिस्सा नहीं बनना चाहता।
- लखीमपुर खीरी (उत्तर प्रदेश): यहां रितिक मिश्रा ने मौत को गले लगा लिया। परिजनों के अनुसार, नीट पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की आशंकाओं से वह बुरी तरह परेशान था।
- आजादपुर (दिल्ली): दिल्ली के आजादपुर में नीट की तैयारी कर रही एक छात्रा ने अपने घर में सुसाइड कर लिया। हालांकि पुलिस को जांच के दौरान कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है।
- राजस्थान: राजस्थान में नीट छात्र प्रदीप मेघवाल ने आत्महत्या कर ली। परिवार का कहना है कि परीक्षा में उसके 650 के आसपास नंबर आने की उम्मीद थी, लेकिन परीक्षा रद्द होने और सिस्टम की अनिश्चितता ने उसे मानसिक रूप से तोड़ दिया था।
बच्चों के साथ यह क्रूर खिलवाड़ है
भ्रष्ट परीक्षा तंत्र लाखों युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य और उनके जीवन के साथ एक क्रूर खिलवाड़ है। पीड़ित परिवारों का केवल एक ही सवाल है कि आखिर इस टूटे हुए सिस्टम को कब सुधारा जाएगा और उनके बच्चों की मौत का इंसाफ कब मिलेगा?

