नर्मदा जिले के डेडियापाड़ा की आश्रमशाला के 11 बच्चे अचानक झूमने लगे

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नर्मदा के डेडियापाड़ा तालुका की मोस्कुट आश्रमशाला में चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां अचानक 11 बच्चे झूमने लगे, जिससे स्कूल परिसर में अफरातफरी का माहौल बन गया था। बच्चों की स्थिति देखकर शिक्षकों और स्टाफ में भागदौड़ मच गई थी। घटना की जानकारी मिलते ही तत्काल 108 एम्बुलेंस सेवा को सूचित किया गया था। इसके बाद प्रभावित बच्चों को इलाज के लिए डेडियापाड़ा की सरकारी अस्पताल में ले जाया गया था। आगे की जांच और चिकित्सकीय मूल्यांकन के लिए बच्चों को बाद में राजपीपला की सिविल अस्पताल में ले जाया गया था।

ZEE 24 घंटे की रिपोर्ट के मुताबिक, मोस्कुट आश्रमशाला में यह घटना 9 सितंबर को हुई थी। घटना के बाद तत्काल 108 एम्बुलेंस के जरिए बच्चों को पहले डेडियापाड़ा सरकारी अस्पताल और उसके बाद आगे की जांच के लिए राजपीपला सिविल अस्पताल ले जाया गया था। शुरुआत में फूड पॉइजनिंग की आशंका जताई गई थी, लेकिन बच्चों में दस्त-उल्टी या पेट में दर्द जैसे कोई लक्षण नहीं होने के कारण इस व्यवहार के पीछे मानसिक बीमारी होने की संभावना जताई जा रही है। आज इस घटना का खुलासा होते ही स्कूल के शिक्षकों के बीच का आंतरिक विवाद भी चर्चा में आया है, जिसके कारण बच्चों की पढ़ाई पर विपरीत असर न पड़े, इसे लेकर ग्रामीणों में भारी चिंता देखने को मिल रही है।

शुरुआती चरण में अस्पताल के स्टाफ और डॉक्टरों द्वारा फूड पॉइजनिंग की आशंका जताई गई थी। लेकिन मेडिकल जांच के दौरान बच्चों में दस्त, उल्टी या पेट में दर्द जैसे फूड पॉइजनिंग के कोई लक्षण नहीं पाए गए थे। इसलिए चिकित्सकों के मुताबिक बच्चों के झूमने लगने के पीछे शारीरिक बीमारी की बजाय किसी मानसिक कारण या मनोवैज्ञानिक प्रभाव की संभावना अधिक जताई जा रही है।

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एक के अनुसार, शिक्षकों और ग्रामीणों के अनुसार, एक बच्चे के बाद दूसरा और उसके बाद तीसरा बच्चा भी झूमने लगा था। इस तरह करीब 11 बच्चे एक के बाद एक झूमने लगे, जिससे स्कूल के शिक्षकों में भी चिंता फैल गई थी। घटना की जानकारी मिलते ही तत्काल 108 को सूचित किया गया था। मुख्य शिक्षक द्वारा 108 एम्बुलेंस को फोन कर बच्चों को इलाज के लिए डेडियापाड़ा सरकारी अस्पताल ले जाया गया था। इसके बाद आगे की जांच और इलाज के लिए बच्चों को राजपीपला सिविल अस्पताल ले जाया गया था।

बच्चों में एक के बाद एक समान प्रकार के लक्षण दिखाई देने के कारण घटना के पीछे मानसिक या सामूहिक मानसिक प्रभाव जैसी संभावना को लेकर भी चर्चा हो रही है। हालांकि निश्चित कारण को लेकर आधिकारिक चिकित्सकीय निष्कर्ष सामने नहीं आया है। इसलिए केवल प्रारंभिक आशंकाओं के आधार पर कारण तय करना उचित नहीं होगा।

इस पूरे मामले में एक और चौंकाने वाला मोड़ भी सामने आया है। स्कूल के शिक्षकों के बीच चल रहा आंतरिक विवाद और माहौल भी फिलहाल चर्चा का विषय बन गया है। हैरानी की बात यह है कि यह विचित्र घटना गत 9 तारीख को हुई थी, लेकिन इसकी जानकारी और खुलासे आज सामने आए हैं, जो प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करते हैं।

आश्रमशाला की शिक्षिका कल्पनाबेन वसावा ने बताया था कि, एक लड़की पानी पीने के लिए गई। वहां से धीरे-धीरे चलकर आ रही थी, अचानक ही उसे पवन छूटने लगा, तो हम उसे कमरे में ले गए और पैर भी मालिश किए। जिसके बाद आठवीं कक्षा के एक विद्यार्थी को हनुमान दादा का पवन छूटा। इसलिए उसे भी पेटी रूम में ले गए थे और उसे व्यवस्थित रूप से सुलाया। जिसके बाद वहां मौजूद हम तीन से चार शिक्षक वहां आए थे, पानी और शरबत पिलाकर उसकी अच्छी तरह सेवा की।

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कल्पनाबेन वसावा ने आगे बताया कि, हमारे गांव में मृत्यु का प्रसंग था। माताजी आती हैं तो थोड़ी आवाज बड़ी थी, इसलिए चिल्लाने पर गांव से लोग भी आए। जिसके बाद हमने अभिभावकों को जानकारी दी थी। लेकिन वे लोग बाहर मजदूरी के लिए गए थे। इसलिए हमने उनके रिश्तेदारों को जानकारी दी थी। जो मौके पर आ गए थे। गांव के सरपंच और बुजुर्गों ने बहुत सहयोग दिया और एम्बुलेंस में लेकर हम PHC गए। वहां एक एम्बुलेंस में हमने लड़कियों को बैठाया, जबकि दूसरी एम्बुलेंस में लड़का था जो आठवीं कक्षा का था जिसे थोड़ा ज्यादा पवन था। रात में मेडिकल ऑफिसर आए थे और हमारे जवाब लिए। साथ ही सुबह सभी बच्चों का मेडिकल चेकअप किया गया है। डॉक्टर ने कहा था कि, सभी बच्चों की काउंटिंग अच्छी है और सभी रिपोर्ट भी उनकी अच्छी हैं। कोई फूड पॉइजनिंग नहीं है। यह केवल एक अफवाह थी।

लोगों ने यह अफवाह फैलाई थी कि, इस तंत्र को बिखेर दें, इस मंडल को हम बदनाम करें, इस तरह की एक अफवाह लोगों ने फैलाई थी। अभिभावक बच्चों को अच्छी तरह यहां आने दें और अच्छी तरह पढ़ें, यह मेरी विनती है। हम सबसे अच्छी ऑर्गेनिक सब्जियां खेती में उगाकर खिलाते हैं। आज एक सप्ताह से बच्चे यहां अच्छी कंडीशन में पढ़ रहे हैं। मनोचिकित्सक आए थे और मनोचिकित्सक को भी हमारे बच्चों के जवाब संतोषजनक लगे। मनोचिकित्सक अच्छी रिपोर्ट देकर गए हैं। गांधीनगर तक हमारी सभी रिपोर्ट पहुंची हैं।

आश्रमशाला में हुई इस घटना और शिक्षकों के आपसी विवाद के कारण स्थानीय ग्रामीणों में भारी चिंता देखने को मिल रही है। शिक्षकों के बीच के आंतरिक कलह और अशांत माहौल का सीधा असर निर्दोष बच्चों की पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य पर न पड़े, ऐसी मांग के साथ ग्रामीण इस मामले में उचित जांच चाहते हैं।

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