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राजकोट के मटकीफोड़ कार्यक्रम में 15 लाख की पेटी ‘खा’ ली गई? कांग्रेस नेता का सनसनीखेज आरोप
राजकोट महानगरपालिका का एक और विवाद सामने आया है। इससे पहले जंगलेश्वर क्षेत्र में किए गए मेगा डिमोलिशन के खर्च में बड़े घोटाले के आरोप लगे थे, वहीं अब राजकोट महानगरपालिका द्वारा आयोजित जन्माष्टमी के मटकी फोड़ कार्यक्रम को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद सामने आया है। 4 सितंबर को शहर के चौधरी हाईस्कूल ग्राउंड पर आयोजित इस कार्यक्रम में भारी वित्तीय गड़बड़ी और घोटाला होने का गंभीर आरोप कांग्रेस नेता हेमांग वसावड़ा ने लगाया है। इस मुद्दे पर महानगरपालिका के शासकों के सामने सवाल खड़े होने से राजकोट की राजनीति गरमा गई है।
कांग्रेस नेता हेमांग वसावड़ा ने आरोप लगाते हुए कहा था कि, मटकी फोड़ के इस आयोजन के दौरान करीब 25 लाख रुपये का भ्रष्टाचार किया गया है। शुरुआत में इस कार्यक्रम के लिए 17 लाख रुपये का टेंडर मंजूर किया गया था, जिसमें 2 लाख रुपये ऑन में दिए गए थे। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस पूरे आयोजन के बाद महानगरपालिका के समक्ष कुल 32 लाख रुपये का बिल पेश किया गया है।
इतनी बड़ी रकम का बिल बढ़ने के पीछे मुख्य कारण बताते हुए हेमांग वसावड़ा ने दावा किया था कि कार्यक्रम के दौरान 15 लाख रुपये की पेटीस खा ली गई है। इसके अलावा टेंडर की शर्तों का भी खुलेआम उल्लंघन हुआ होने की बात उन्होंने कही थी। टेंडर में तय की गई स्टेज की साइज की तुलना में स्थल पर आधी साइज का ही स्टेज बनाया गया था और दर्शकों के लिए कुर्सियों की संख्या भी मंजूर संख्या से काफी कम रखी गई थी।
इस विवाद के साथ हेमांग वसावड़ा ने राजकोट महानगरपालिका के पिछले चर्चित जंगलेश्वर बिलकांड को लेकर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने बताया था कि जंगलेश्वर में हुए अलग-अलग खर्च के बिलों को लेकर पहले पूरे राज्य में विवाद की गूंज उठी थी। उस मामले में जांच कमेटी का गठन किए जाने के बावजूद अभी तक उसकी कोई रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। पिछले जंगलेश्वर कांड और अब मटकी फोड़ कार्यक्रम में बिल घोटाले के आरोप सामने आने पर कांग्रेस ने मांग की है कि राजकोट के मेयर इन सभी बातों पर चुप्पी तोड़कर जनता के सामने स्पष्ट जवाब दें।
उल्लेखनीय है कि, प्राप्त विवरण के अनुसार, जंगलेश्वर डिमोलिशन की कार्रवाई के दौरान 200 ml की करीब 2,87,500 पानी की बोतलों का उपयोग दर्शाया गया है। जिस पानी की बोतल थोक बाजार में केवल 2.40 से 3 रुपये में आसानी से मिलती है, उसका बिल मनपा द्वारा प्रति बोतल 8 रुपये के हिसाब से मंजूर किया गया होने की व्यापक चर्चा है। इसके अलावा भोजन, नाश्ता, नींबू पानी, मंडप सर्विस, लाइटिंग तथा जेसीबी (JCB), डंपर और ट्रैक्टर जैसी मशीनरी का खर्च भी लाखों रुपये में दर्शाया गया है, जिससे भ्रष्टाचार की आशंका और गहरी हो गई है।
अब देखना यह रहेगा कि इस मटकी फोड़ कार्यक्रम के बिल घोटाले को लेकर तंत्र की ओर से कोई उचित जांच या जवाब मिलेगा या फिर इस मुद्दे पर भी अतीत की तरह मामला दबा दिया जाएगा।

