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अन्ना हजारे रालेगण सिद्धि में फिर आमरण अनशन पर, सरकार से की यह मांग
देश के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और गांधीवादी नेता अन्ना हजारे आज महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के रालेगण सिद्धि गांव में आमरण अनशन शुरू करेंगे। हजारे ने कहा कि सरकार ने भ्रष्टाचार मिटाने, लोकपाल को मजबूत करने और लोकायुक्त कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने का वादा किया था, लेकिन इन वादों को सही तरीके से पूरा नहीं किया गया है। हजारे ने बताया कि लोकायुक्त कानून का उद्देश्य राज्यों में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना है, लेकिन कई जगहों पर यह कानून या तो कमजोर है या ठीक से लागू नहीं किया गया है। उन्होंने मांग की कि लोकायुक्त को पूरी तरह स्वतंत्र बनाया जाए ताकि वह बिना किसी दबाव के भ्रष्ट अधिकारियों और नेताओं के खिलाफ कार्रवाई कर सके।
रालेगण सिद्धि में अनशन स्थल पर उनके समर्थकों की भीड़ जुटने लगी है। कई सामाजिक संगठन और किसान संगठन भी अन्ना हजारे के समर्थन में आगे आए हैं। प्रशासन ने सुरक्षा और उनके स्वास्थ्य की निगरानी के पुख्ता इंतजाम किए हैं। डॉक्टरों की एक टीम अन्ना हजारे के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रख रही है, क्योंकि उनकी उम्र के कारण सेहत का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। अन्ना हजारे ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यवस्थागत सुधार के लिए है। उन्होंने युवाओं से भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने और देश को ईमानदार नेतृत्व प्रदान करने में भूमिका निभाने की अपील की। अन्ना हजारे ने यह भी कहा कि उन्होंने सरकार को अपनी मांगें बताते हुए कई पत्र लिखे हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला है। उनका आरोप है कि सरकार ने भ्रष्टाचार, किसानों की समस्याओं और जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता नहीं दी है।
यह पहली बार नहीं है जब अन्ना हजारे अनशन पर बैठे हों। 2011 में उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर और रामलीला मैदान में ऐतिहासिक अनशन किया था, जिससे देशभर में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बहुत बड़ा आंदोलन शुरू हुआ था। इसके बाद उन्होंने 2012 में लोकपाल के लिए अनशन किया। 2018 में अन्ना हजारे ने किसानों और लोकपाल से जुड़े मुद्दों पर दिल्ली में अनशन किया था। 2019 में भी जब सरकार ने अपने वादे पूरे नहीं किए, तब उन्होंने मुंबई में भूख हड़ताल की थी।

