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Gen Z के पास ऐसा क्या है कि सबसे शक्तिशाली सरकार को भी झुकना पड़ा?
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को आखिरकार इस्तीफा देना पड़ा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के सबसे शक्तिशाली प्रधानमंत्रियों में रहे हैं। उन्होंने लगातार 12 वर्षों तक शासन करने का रिकॉर्ड भी बनाया था। देश में सभी लोगों को लगने लगा था कि अब विपक्ष खत्म हो गया है। सभी संस्थाओं पर सरकार का कब्जा है। देश में कोई आंदोलन सफल नहीं हो सकता। लेकिन इंस्टाग्राम से शुरू हुए NEET पेपर लीक के खिलाफ एक आंदोलन ने मात्र 35 दिनों में शक्तिशाली सरकार को झुका दिया। ऐसा कैसे हुआ? सरकार को क्यों झुकना पड़ा? इन सवालों के जवाब के लिए Gen Z की मानसिकता को समझना जरूरी है।
Gen Z क्या है?
Gen Z यानी वर्ष 1997 से 2012 के बीच जन्मे बच्चे। ये बच्चे विशेष परिस्थितियों में बड़े हुए हैं। उनकी मानसिकता दूसरी पीढ़ियों से अलग है। इसलिए उन्हें समझना आसान नहीं है। आइए, इस विषय पर हुए कुछ अध्ययनों के आधार पर इसे समझने की कोशिश करते हैं।

टेक्नोलॉजी– ये बच्चे जन्म से ही टेक्नोलॉजी को समझते हुए बड़े हुए हैं। वे टेक्नोलॉजी का उपयोग बहुत सहजता से करते हैं। वे नए-नए तरीकों से टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं। जंतर-मंतर पर इंटरनेट बंद कर दिया गया, तब भी वे ब्लूटूथ और दूसरी तकनीकों का उपयोग करके सोशल मीडिया पर सामग्री अपलोड कर रहे थे।
कम्युनिकेशन– पहले के समय में संचार के साधन बहुत कम थे। लेकिन अब इस पीढ़ी के पास अनेक साधन हैं। वे अपनी बात बहुत तेजी से लाखों लोगों तक पहुंचाने की क्षमता रखते हैं। जंतर-मंतर से उन्होंने पूरे देश में जो संवाद किया, वह ज्यादातर इंस्टाग्राम के माध्यम से ही था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी उन्हें समझाने के लिए इंस्टाग्राम का इस्तेमाल करना पड़ा।

सवाल पूछते हैं– पहले की पीढ़ियां बड़ों की बातों को सीधे स्वीकार कर लेती थीं। लेकिन यह पीढ़ी सवाल पूछती है। जब तक उन्हें तार्किक जवाब नहीं मिलते, वे किसी बात को स्वीकार नहीं करते। यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। इसका कारण यह है कि उनकी सोच वैश्विक है। वे किसी भी अन्य विचारधारा की तुलना में विज्ञान और तकनीक से अधिक प्रभावित हैं। उनके लिए तर्क सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। इस आंदोलन के दौरान भी पारंपरिक मीडिया और सरकार समर्थकों ने उन्हें पाकिस्तानी, चीन से फंडेड और CIA की साजिश का हिस्सा बताने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने ऐसे सवाल उठाए कि ये सभी आरोप टिक नहीं पाए।
जानकारी के अनेक स्रोत हैं– पहले की पीढ़ियां बड़ों की बात इसलिए मान लेती थीं क्योंकि उनके पास जानकारी के स्रोत बहुत सीमित थे। आज की पीढ़ी के पास जानकारी के इतने स्रोत हैं कि वे किसी भी बात पर विश्वास करने से पहले कई तरह की जानकारी जुटा लेते हैं। उन्हें कुछ नया सिखाने के लिए किसी व्यक्ति का विशेषज्ञ होना जरूरी है। इस आंदोलन को चलाने वालों के पास अपने अधिकारों की पूरी जानकारी थी। इसके अलावा क्या करना है और क्या नहीं करना है, इसकी भी पूरी तैयारी करके आए थे। इसलिए वे टीवी मीडिया या अखबारों की जानकारी की बजाय यूट्यूबर्स पर अधिक भरोसा कर रहे थे।

लगातार नया और तेजी से सीखते रहना– उनके लिए डिग्री उतनी महत्वपूर्ण नहीं है, जितना सीखना महत्वपूर्ण है। वे लगातार कुछ-न-कुछ सीखना चाहते हैं। क्योंकि उन्हें पता है कि तकनीक लगातार बदलती रहती है। अगर वे नया नहीं सीखेंगे तो टिक नहीं पाएंगे। इसलिए वे लगातार खुद को अपडेट करते रहते हैं। जैसे मोबाइल में लगातार अपडेट आते रहते हैं, उसी तरह यह पीढ़ी भी लगातार खुद को अपडेट करती रहती है।
साहसी हैं– यह पीढ़ी साहसी है। उन्हें डर नहीं लगता। आंदोलन के दौरान हमने देखा कि वे पुलिस से नहीं डरते थे। यदि पुलिस मारती, तो भी वे मार खाने के लिए तैयार थे। वे खुद जाकर पुलिस से पूछते थे कि "आज मारोगे या...?" ऐसा इसलिए है क्योंकि उनके माता-पिता ने उनका पालन-पोषण अलग तरीके से किया है। उन्हें शायद ही कभी मारा गया हो। उन्हें हमेशा सुरक्षित रखा गया है। इसलिए वे किसी भी अधिकार के सामने आसानी से नहीं झुकते। वे सवाल पूछते हैं और जवाब भी देते हैं। जंतर-मंतर पर यह पीढ़ी न सरकार से डरी और न ही किसी मीडिया से। एक बार सरकार ने बातचीत के लिए उन्हें दो घंटे इंतजार कराया, तो अगली बार उन्होंने अपनी शर्तों पर ही बातचीत करने की बात कह दी।

सामाजिक रूप से जागरूक हैं– उनका पालन-पोषण वैश्विक सोच के साथ हुआ है। वे दुनिया भर में क्या हो रहा है, इसकी जानकारी रखते हैं। उनके अपने स्वतंत्र विचार हैं। वे पर्यावरण के प्रति जागरूक हैं। वे धर्म, लिंग, जाति जैसी लोगों को एक-दूसरे से अलग करने वाली विचारधाराओं का अधिक समर्थन नहीं करते। वे सभी का सम्मान करते हैं, लेकिन किसी की अंधभक्ति में विश्वास नहीं रखते। इसलिए हम देख सकते हैं कि कोई धार्मिक या सामाजिक गुरु अथवा नेता यदि तार्किक बात करता है, तो वे उसका समर्थन करते हैं।
Gen Z के आंदोलन की सफलता के पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि जो लोग आंदोलन कर रहे थे और उसका नेतृत्व कर रहे थे, उनकी औसत उम्र 20 से 30 वर्ष के बीच थी, जबकि जिनके खिलाफ वे आंदोलन कर रहे थे, उनकी औसत उम्र 60 से 70 वर्ष के बीच थी। सीधी बात करें तो सरकार इस पीढ़ी को समझ नहीं पाई। यह भी कहा जा सकता है कि वह उनकी सोच और क्षमता का सही अनुमान नहीं लगा सकी। इसलिए अंततः उसे झुकना पड़ा।

