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समस्तीपुर: 8.65 करोड़ रुपये का पुल बना, लेकिन चढ़ने का रास्ता नहीं; फिर लोगों ने चंदा जुटाकर बना दी सीढ़ी
बिहार के समस्तीपुर जिले के खानपुर ब्लॉक और रोसड़ा ब्लॉक में स्थित कलवाड़ा घाट का पुल विकास से अधिक अव्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही की कहानी बयां करता है। सरकारी योजना के तहत बना यह हाईटेक पुल इस क्षेत्र में 'अद्भुत पुल' के नाम से जाना जाने लगा है। पुल का निर्माण तो पूरा हो चुका है, लेकिन दोनों ओर एप्रोच रोड न होने के कारण लोग इसका लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। ग्रामीणों को पुल पार करने के लिए लोहे की सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ता है। यह उच्च स्तरीय आरसीसी पुल वर्ष 2013 में नाबार्ड योजना के तहत बागमती नदी पर डगरुआ और बलाहा के बीच लगभग 865.517 लाख रुपये की लागत से बनाया गया था। पुल का शिलान्यास तत्कालीन विधायक अशोक कुमार मुन्ना द्वारा किया गया था।
निर्माण पूरा हो जाने के बावजूद एप्रोच रोड आज तक तैयार नहीं हो पाया है। इसके कारण खानपुर और रोसड़ा ब्लॉक के दर्जनों गांवों के निवासियों को अब भी लगभग 5 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। लंबे समय तक समाधान न मिलने के बाद ग्रामीणों ने स्वयं पहल की। वे गांव-गांव गए, प्रत्येक घर से 200 से 400 रुपये का योगदान एकत्र किया और पुल पर चढ़ने-उतरने के लिए लोहे की सीढ़ियां लगाईं। अब लोग अपनी जान जोखिम में डालकर इन सीढ़ियों के सहारे पुल पार कर रहे हैं। यह स्थिति न केवल चौंकाने वाली है, बल्कि सरकारी तंत्र और विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि 2013 से पुल की स्थिति ऐसी ही बनी हुई है। गर्मियों के दौरान लोग पुल के नीचे वाले रास्ते से होकर अपने काम पर जाते हैं, लेकिन बरसात के मौसम में स्थिति और भी खराब हो जाती है। रिपोर्टों के अनुसार, भूमि अधिग्रहण और मुआवजे से जुड़े विवादों के कारण एप्रोच रोड का निर्माण लंबे समय से रुका हुआ है।
ग्रामीणों ने पुल की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पुल की सतह को छूने पर उससे रेत झड़ने लगती है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर भी संदेह पैदा होता है। आधा दर्जन से अधिक गांवों और दस हजार से अधिक आबादी के लिए बनाया गया यह पुल आज सुविधा के बजाय संघर्ष का प्रतीक बन गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस पुल से इस क्षेत्र को विकास की राह पर ले जाने की उम्मीद की गई थी, वही अब परेशानी का कारण बन गया है। किसान, छात्र, मरीज और आम लोग रोज़ाना जोखिम उठाने को मजबूर हैं। निवासियों ने मांग की है कि प्रशासन जल्द से जल्द एप्रोच रोड का निर्माण पूरा करे, पुल की गुणवत्ता की जांच कराए और जिम्मेदार अधिकारियों तथा एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई करे।

