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महंगाई से बिगड़ा आम आदमी के घर का बजट, थाली से लेकर सफर तक हुआ महंगा, फिलहाल राहत के आसार नहीं
पेट्रोल के बाद अब घरेलू गैस सिलेंडर 29 रुपये महंगा, मार्च में ही 60 रुपये की वृद्धि की गई थी
नई दिल्ली। देश में महंगाई एक बार फिर आम लोगों की चिंता बढ़ाने लगी है। घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) सिलेंडर के दाम में 29 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है। इसके साथ ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हाल के सप्ताहों में हुई बढ़ोतरी ने आम परिवारों के मासिक बजट पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया है। बढ़ती ईंधन लागत का असर केवल रसोई तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवहन, खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की जरूरतों की वस्तुओं पर भी दिखाई देने लगा है।
सरकारी तेल कंपनियों ने 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की वृद्धि की है। सूरत में अब एक सिलेंडर की कीमत 950 रुपये के करीब हो गई है। यह पिछले तीन महीनों में घरेलू गैस की दूसरी बढ़ोतरी है, जिससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है। इससे पहले मार्च में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में लगभग 60 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई थी। अब जून में 29 रुपये की नई वृद्धि के बाद रसोई गैस की कीमतें पिछले कुछ महीनों में काफी ऊपर पहुंच गई हैं। तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी ऊर्जा लागत और घरेलू बिक्री पर नुकसान के कारण कीमतें बढ़ानी पड़ी हैं।
दरअसल, महंगाई का सबसे बड़ा कारण ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती लागत को माना जा रहा है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी पिछले एक महीने के दौरान लगातार इजाफा हुआ है। विभिन्न शहरों में दरें अलग-अलग हैं, लेकिन मई के अंतिम सप्ताह तक पेट्रोल करीब 7 से 8 रुपये प्रति लीटर और डीजल भी लगभग इतनी ही मात्रा में महंगा हुआ है। रिपोर्टों के मुताबिक पिछले कुछ सप्ताह में चार बार ईंधन कीमतों में वृद्धि की गई, जिसमें पेट्रोल लगभग 2.6 रुपये और डीजल 2.7 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ा, जबकि कुल मासिक बढ़ोतरी 7 रुपये से अधिक पहुंच चुकी है।
माल ढुलाई महंगा होने से फल-सब्जियों के दाम बढ़ गए
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर माल ढुलाई और परिवहन लागत पर पड़ता है। ट्रकों, बसों और अन्य व्यावसायिक वाहनों का परिचालन महंगा होने से फल-सब्जियों, दूध, अनाज और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी की आशंका बढ़ जाती है। यही वजह है कि ईंधन महंगा होने के बाद आम तौर पर बाजार में काफी महंगाई देखने को मिलती है। खासकर खाने-पीने की चीजों पर सीधा इसका असर दिखता है।
आम लोगों की बड़ी चुनौती: घरेलू खर्चों को कैसे संतुलित करें
आम लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती घरेलू खर्चों को संतुलित रखना बन गया है। मध्यम वर्गीय परिवारों का मासिक बजट पहले से ही शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास पर बढ़ते खर्चों के काण दबाव में है। अब गैस सिलेंडर, पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने से रसोई का खर्च और यात्रा लागत दोनों बढ़ गई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसका असर दिखाई दे रहा है, जहां परिवहन महंगा होने से कृषि उत्पादों की लागत बढ़ रही है। वहीं शहरी क्षेत्रों में निजी वाहन चलाने और सार्वजनिक परिवहन दोनों पर खर्च बढ़ने की संभावना है।
रिजर्व बैंक भी कह चुका- और बढ़ सकती है महंगाई
इस बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी महंगाई को लेकर चिंता जताई है। हाल ही में केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए अपने मुद्रास्फीति (इन्फ्लेशन) अनुमान को बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है। आरबीआई का कहना है कि पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, आपूर्ति शृंखला पर दबाव और ऊर्जा लागत में वृद्धि आने वाले महीनों में महंगाई को ऊपर ले जा सकती है। इसी वजह से केंद्रीय बैंक ने विकास दर के अनुमान में भी कटौती की है।
यानी महंगाई की मार आगे भी जारी रहेगी…
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो ईंधन और रसोई गैस की कीमतों में आगे भी दबाव बना रह सकता है। ऐसे में खाद्य वस्तुओं, परिवहन और अन्य सेवाओं की लागत बढ़ने से खुदरा महंगाई दर पर असर पड़ सकता है। फिलहाल गैस सिलेंडर में 29 रुपये की ताजा बढ़ोतरी और पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों ने आम लोगों को राहत मिलने की उम्मीदों को झटका दिया है, जबकि आने वाले महीनों में महंगाई और बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

