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मस्क ने ट्विटर पर यह क्यों कह दिया कि- क्या मुकेश अंबानी भारत के बॉस हैं? राहुल को थैंक्यू कहा, क्या मस्क Jio की 1600-सैटेलाइट वाली तैयारी से नाराज हैं?
दुनिया के सबसे अमीर इंसान एलन मस्क की Starlink न सिर्फ इंटरनेट सेवा शुरू करने की तैयारी कर रही है, बल्कि अब वह एक ऐसी होड़ में है जहां समय बहुत महत्वपूर्ण है। एक तरफ Starlink भारत में व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने के लिए अंतिम मंजूरियों का इंतजार कर रही है, तो दूसरी तरफ Reliance Jio ने भारतीय सैटेलाइट इंटरनेट मार्केट के लिए लगभग 1600 सैटेलाइट और 23 ग्राउंड स्टेशनों की एक विशाल योजना सामने रखी है।
मस्क पहले भारत में Starlink की देरी को लेकर ओलिगार्क्स (अभिजात वर्ग/उद्योगपतियों) पर गुस्सा हुए थे। इसके बाद सरकार ने उनके आरोपों को खारिज कर दिया था। उसके कुछ ही घंटों बाद, मस्क ने सीधा सवाल किया कि, क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं?
सवाल यह है कि, मस्क इतने गुस्से में क्यों हैं? क्या उन्हें लगता है कि मंजूरियों में देरी सिर्फ एक नियामक (regulatory) प्रक्रिया है, या फिर इसमें व्यावसायिक हित भी काम कर रहे हैं? सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि, क्या Starlink की देरी से Jio को फायदा हो रहा है, और क्या मस्क को डर है कि भारत उन्हें 'फर्स्ट-मूवर एडवांटेज' (पहला कदम उठाने का फायदा) नहीं देगा?
इसका कोई सटीक जवाब अभी तक किसी के पास नहीं है। लेकिन घटनाक्रमों को एक साथ देखें तो तस्वीर काफी दिलचस्प हो जाती है।
इस विवाद में राहुल गांधी की भी एंट्री हुई थी। मस्क ने ट्वीट करके पूछा था कि, Starlink को पहले ही 165 से अधिक देशों में लाइसेंस मिल चुका है और कंपनी पिछले पांच सालों से भारत के सभी कानूनों और आवश्यकताओं का पालन करने का प्रयास कर रही है, तो फिर अभी तक मंजूरी क्यों नहीं दी गई? राहुल ने ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा था कि 'भारत में आपका स्वागत है एलन, दूसरे व्यक्ति से मिलने तक इंतजार कीजिए'। मस्क ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए 'थैंक्यू' लिखा था और कहा था कि 'यह वास्तव में परेशान करने वाला है'।
इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में, Reliance Jio ने पहली बार बड़े पैमाने पर अपना सैटेलाइट इंटरनेट विजन पेश किया। कंपनी लगभग 1600 लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट्स का एक नेटवर्क बनाने की योजना बना रही है, और साथ ही देशभर में 23 ग्राउंड स्टेशन स्थापित करने की योजना भी है।
Jio का दावा है कि इस नेटवर्क का उपयोग भारत के ज़मीनी और समुद्री दोनों क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए किया जा सकता है। कंपनी की नज़र 6 लाख से अधिक गांवों में कनेक्टिविटी पहुंचाने पर है, जिसमें दूर-दराज के गांवों, द्वीपों और सीमावर्ती क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।लेकिन, Jio की योजना सिर्फ आसमान से इंटरनेट पहुंचाने तक सीमित नहीं है; कंपनी अपने मौजूदा मोबाइल और फाइबर नेटवर्क को सैटेलाइट नेटवर्क से जोड़ना चाहती है। यानी जहां Jio के टावर और फाइबर पहले से पहुंच चुके हैं वहां जमीनी नेटवर्क काम करेगा और जहां ऐसा करना मुश्किल या अत्यधिक खर्चीला है, वहां सैटेलाइट मदद करेगा।
Jio ने इसके उपयोग की कल्पना एंटरप्राइज, एविएशन (उड्डयन), समुद्री सेवाओं, सरकार, रक्षा और आपदा के समय कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में भी की है। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 'डायरेक्ट-टू-डिवाइस' कॉलिंग भी उसके विज़न में शामिल है। स्पष्ट है कि Jio की महत्वाकांक्षाएं बड़ी हैं; कंपनी सैटेलाइट टेक्नोलॉजी को अपने मौजूदा टेलीकॉम नेटवर्क का अभिन्न अंग बनाना चाहती है।
मस्क की कंपनी लगभग पांच साल से भारतीय बाजार में प्रवेश करने की कोशिश कर रही है। उसे GMPCS लाइसेंस मिल चुका है और IN-SPACe से जरूरी मंजूरियां भी मिल चुकी हैं। कंपनी ने भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार कर लिया है; Starlink के अनुसार, देशभर में लगभग 20 गेटवे साइट्स बनाई गई हैं और सैकड़ों एंटीना लगाए गए हैं। इसके बावजूद अभी तक इसका कमर्शियल लॉन्च नहीं हुआ है।
यानी एक तरफ Starlink कह रही है कि उसने भारत के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा प्रणालियों पर व्यापक काम कर लिया है, तो दूसरी तरफ Jio अब 1600 सैटेलाइट्स वाले अपने विजन के साथ सामने आई है। इससे 'फर्स्ट-मूवर एडवांटेज' को लेकर सवाल खड़ा होता है।
'फर्स्ट-मूवर एडवांटेज' इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
सैटेलाइट इंटरनेट ऐसा बिजनेस नहीं है जिसमें कोई कंपनी आज सेवा शुरू करे और अगले ही दिन लाखों ग्राहक पा ले। इसके लिए उपग्रहों, ग्राउंड स्टेशनों, स्पेक्ट्रम, स्थानीय इंफ्रास्ट्रक्चर, वितरण नेटवर्क और यूजर टर्मिनल्स जैसी एक पूरी इकोसिस्टम स्थापित करने की आवश्यकता होती है। जो कंपनी बाजार में सबसे पहले प्रवेश करती है, उसे कई फायदे मिलते हैं।
वह पहले ग्राहक जोड़ सकती है और सरकार तथा नियामकों के साथ काम करने का प्रारंभिक अनुभव प्राप्त कर सकती है। वह अपने हार्डवेयर और सर्विस की कीमतों को लेकर बाजार की उम्मीदें तय कर सकती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि, वह उन ग्राहकों और उन क्षेत्रों में अपनी पैठ बना सकती है जहां वर्तमान में हाई-स्पीड इंटरनेट के विकल्प सीमित हैं।
भारत में Starlink के लिए यह खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि कंपनी दुनियाभर के कई देशों में पहले से ही काम कर रही है; उसका नेटवर्क और ब्रांड पहले से तैयार है। अगर भारत में इसका लॉन्च जल्दी हो जाता, तो यह Jio की बड़ी सैटेलाइट योजना पूरी तरह से साकार होने से पहले बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत कर सकती थी। लेकिन, मौजूदा कहानी उल्टी दिशा में आगे बढ़ती दिख रही है।
यह दावा करना जल्दबाजी होगी कि मस्क केवल Jio के कारण नाराज हैं; ऐसा कोई सार्वजनिक सबूत नहीं है। लेकिन, उनके बार-बार आ रहे बयान जरूर दिखाते हैं कि भारत में Starlink को लेकर हो रही देरी से वह बेहद परेशान हैं।
मस्क ने पहले आरोप लगाया था कि कुछ 'ओलिगार्क्स' Starlink को भारत में आने से रोक रहे हैं ताकि उनकी एकाधिकार (monopoly) बनी रहे। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया था। इसके बाद, सरकार ने कहा था कि भारत की सैटेलाइट संचार नीति निष्पक्ष और बिना किसी भेदभाव के है।
https://twitter.com/elonmusk/status/2108221292788981881
सरकार के अनुसार, Starlink, Jio Satcom और भारती समर्थित Eutelsat OneWeb सभी एक ही समान नियामक प्रक्रिया से गुजर रहे हैं और फिलहाल तीनों के लिए सुरक्षा जांच की प्रक्रिया चल रही है। सुरक्षा मंजूरी मिलने के बाद ही स्पेक्ट्रम आवंटन का अगला चरण आगे बढ़ेगा। मस्क इस बात से संतुष्ट नहीं थे; उसके बाद की एक पोस्ट में उन्होंने सीधा सवाल किया कि, Starlink को पहले से ही 165 से ज्यादा देशों में लाइसेंस मिल चुका है और कंपनी पिछले पांच सालों से भारत के सभी नियमों और आवश्यकताओं का पालन करने का प्रयास कर रही है, तो फिर अब तक मंजूरी क्यों नहीं दी गई?

