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मोदी के 25 साल की जनसेवा, अक्टूबर 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे, तब से लेकर अब तक के सफर पर क्या बोले…
मोदी बोले- भारत के विकसित होने तक न थकूंगा और न रुकूंगा
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनसेवा में 25 साल पूरे होने के मौके पर अपने राजनीतिक सफर और देश के भविष्य को लेकर अपने विचार साझा किए। उन्होंने देश के बड़े लक्ष्यों को हासिल करने का संकल्प दोहराया। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने तक वह न थकेंगे और न रुकेंगे। मोदी ने कहा कि उनके लिए सत्ता या पद कभी लक्ष्य नहीं रहा। उनका जीवन देश के लिए काम करने और जिम्मेदारी निभाने पर केंद्रित रहा है। उन्होंने कहा कि मैं महत्वाकांक्षा नहीं, मिशन के लिए जीता हूं। अपने राजनीतिक जीवन के अनुभवों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मुश्किल परिस्थितियों और विरोध ने भी उन्हें बहुत कुछ सिखाया। उनके मुताबिक, जिसने उन्हें गिराया, उसी ने दोबारा खड़े होने का तरीका बताया और जिसने विरोध किया, उसने लोकतंत्र की ताकत समझने का अवसर दिया। नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। इसके बाद 26 मई 2014 को उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इस तरह मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने जनसेवा के 25 साल पूरे कर लिए हैं।
बोले- जीवन में सीखने की इच्छा कभी खत्म न हो
प्रधानमंत्री ने कहा कि 25 साल पीछे मुड़कर देखने पर उनके मन में उपलब्धियों से ज्यादा कृतज्ञता का भाव पैदा होता है। इस दौरान हुई हर घटना ने उन्हें कोई न कोई सीख दी और उन्हें विनम्र बनाया। उन्होंने कहा कि वह ईश्वर से यही प्रार्थना करते हैं कि जीवन में सीखने की इच्छा कभी खत्म न हो। मोदी ने देश के प्रति अपने भाव को भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि भारत की धरती पर जन्म लेना ही अपने आप में अमृत जैसा अनुभव है। इसके सामने सत्ता और पद का सुख बहुत छोटा है। उन्होंने कहा कि पद और प्रतिष्ठा कहीं भी हासिल की जा सकती है, लेकिन भारत जैसी पुण्यभूमि मिलना संभव नहीं है।
भारत ने कठिन दौर में भी दुनिया को मानवीय मूल्यों की रोशनी दी
उन्होंने कहा कि जिस भारत ने कठिन दौर में भी दुनिया को ज्ञान और मानवीय मूल्यों की रोशनी दी, उसकी सेवा करने का अवसर बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए उनके 25 साल के सफर का मूल्यांकन इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि वह खुद कहां पहुंचे, बल्कि इस आधार पर होना चाहिए कि देश कहां पहुंचा है।
कर्म को बताया जीवन का आधार
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके जीवन का मूल उद्देश्य देश के लिए निस्वार्थ भाव से काम करना रहा है। उन्होंने कहा कि मेरे लिए कर्म ही सबकुछ है। कर्म ही मेरा धर्म है। गीता के कर्मयोग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा अपने कर्म को प्राथमिकता दी है और आगे भी हर जिम्मेदारी पूरी क्षमता के साथ निभाने की कोशिश करेंगे। मोदी ने देश के विकास के लक्ष्यों को लेकर कहा कि भारत को तकनीक, खेल और उद्योग सहित हर क्षेत्र में आगे बढ़ना है। दुनिया में भारत का तिरंगा हर क्षेत्र में दिखाई देना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया में भारतीय पायलटों की चर्चा होती है। आने वाला समय ऐसा भी होगा, जब दुनिया ‘मेड इन इंडिया’ विमानों की चर्चा करेगी।
दूरदर्शी नीतियों के साथ कड़ी मेहनत जरूरी है
उन्होंने कहा कि इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए केवल इच्छाएं पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए दूरदर्शी नीतियों के साथ कड़ी मेहनत जरूरी है। मोदी ने युवाओं से जुड़े अवसर का जिक्र करते हुए कहा कि देश में बड़ी संख्या में युवा हैं और यह इतिहास से मिला महत्वपूर्ण मौका है। इसे गंवाना नहीं चाहिए।
बोले- अब आराम का समय नहीं
मोदी ने कहा कि देश के सामने बड़े लक्ष्य हैं और उन्हें हासिल करने के लिए अब आराम करने का समय नहीं है। उन्होंने कहा कि यह समय नई सोच के साथ आगे बढ़ने और देश के लिए खुद को पूरी तरह समर्पित करने का है। उनके मुताबिक, जब देश के करोड़ों लोगों के भीतर आगे बढ़ने का आत्मविश्वास पैदा होता है, तो बड़े से बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उन्होंने भारत के पुराने गौरव का भी उल्लेख किया। मोदी ने कहा कि एक समय भारत दुनिया की अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करता था, लेकिन समय बदला और देश को गुलामी के लंबे दौर से गुजरना पड़ा। इस दौरान भारत को लूटा गया और उसकी समृद्धि को नुकसान पहुंचाया गया। उन्होंने कहा कि जिस देश ने दुनिया को दिशा दिखाई, उसके पुस्तकालय तक जला दिए गए। मोदी ने कहा कि देश ने अकाल और दूसरी कई विभीषिकाओं का सामना किया, लेकिन इन परिस्थितियों के बावजूद भारत की जनता का हौसला नहीं टूटा।
गुजरात से दिल्ली तक का सफर
प्रधानमंत्री ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत के दौर को याद करते हुए कहा कि जब वह गुजरात पहुंचे, तब उन्हें प्रशासनिक व्यवस्था की बहुत ज्यादा जानकारी नहीं थी। उनके पास केवल जनता की ताकत पर भरोसा था। उन्होंने इसी जनशक्ति को अपना सबसे बड़ा सामर्थ्य बनाया। मोदी ने कहा कि जनता को साथ लेकर फैसले लिए, नीतियां तैयार कीं और उन्हें जमीन पर लागू किया। उनका मानना था कि जब जनता साथ हो तो परिणाम जरूर मिलते हैं। उन्होंने गुजरात के अनुभव को इसी सोच का उदाहरण बताया और कहा कि गुजरात ने इसे करके दिखाया।
देश गंभीर चुनौतियों से घिर हुआ था, नए रास्ते की तलाश थी
उन्होंने 2014 की स्थिति का भी जिक्र किया। मोदी के अनुसार, उस समय देश कई गंभीर चुनौतियों से घिरा था और लोगों को नए रास्ते की तलाश थी। भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर दुनिया में निराशा का माहौल था और यहां तक कहा जाने लगा था कि भारत की स्थिति सुधारना मुश्किल है। ऐसे समय में देश को उम्मीद और भरोसे की जरूरत थी। मोदी ने कहा कि उन्होंने वही किया जो उन्हें आता था- लोगों के साथ मिलकर काम किया और इसी विश्वास के साथ आगे बढ़ते रहे कि भारत यह कर सकता है।
‘विकसित भारत-2047, वी विल डू इट’
अपने संबोधन में मोदी ने भविष्य के कई लक्ष्यों को इसी नारे से जोड़ा। उन्होंने कहा- विकसित भारत बाय 2047, वी विल डू इट। दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना है, वी विल डू इट। आत्मनिर्भर भारत बनाना है, वी विल डू इट। ओलिंपिक की मेजबानी करनी है, वी विल डू इट। अंतरिक्ष के क्षेत्र में आगे बढ़ना है, वी विल डू इट। उन्होंने कहा कि यह ऊर्जा और आत्मविश्वास देश की सबसे बड़ी ताकत है। जब यही भावना लोगों के भीतर गहराई से मौजूद हो और उनके खून में दौड़ रही हो, तो कोई ताकत उन्हें रोक नहीं सकती।
बोले- मैं चुनावी राजनीति में चमकने नहीं आया था
मोदी ने अपने संगठनात्मक जीवन को याद करते हुए कहा कि उनका मूल काम संगठन के लिए काम करने वाले व्यक्ति का था। उन्होंने चुनाव जरूर लड़ाए, लेकिन खुद एक भी चुनाव नहीं लड़ा था। उनके मुताबिक, अगर उन्हें चुनावी राजनीति में चमकने की इच्छा होती तो वह बहुत पहले मैदान में उतर सकते थे, लेकिन उनका स्वभाव ऐसा नहीं था। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी यह नहीं सोचा कि उनका अपना भविष्य क्या होगा। बचपन से मिली शिक्षा ने उन्हें देश के लिए काम करने की दिशा दी। इसी कारण वह खुद को महत्वाकांक्षा के बजाय मिशन के लिए जीने वाला व्यक्ति मानते हैं।

