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डोनाल्ड ट्रम्प ने क्यों ऐसा दावा किया कि, 'इस्लाम फ्रांस देश पर कब्जा करना चाहता है'
US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फ्रांस में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को प्रवासन और इस्लाम से जोड़ दिया है. उन्होंने बताया था कि, ये विरोध प्रदर्शन स्कूलों के बारे में नहीं हैं, बल्कि इस्लाम द्वारा फ्रांस पर कब्जा करने के प्रयास के बारे में हैं. उन्होंने इसके लिए बड़े पैमाने पर प्रवासन को भी जिम्मेदार ठहराया है. वास्तव में, फ्रांस में लोग स्कूलों को व्यवस्थित रूप से बेहतर करने की मांग कर रहे हैं, और देशभर में जोरदार विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं.
अब, राष्ट्रपति ट्रम्प ने इन विरोध प्रदर्शनों को इस्लाम और प्रवासन से जोड़ा है. मंगलवार, 6 अक्टूबर के दिन, ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट शेयर की. पोस्ट में, उन्होंने लिखा, 'यह फ्रांस में अनियंत्रित बड़े पैमाने पर प्रवासन का प्रभाव है. यह स्कूलों के बारे में नहीं है, बल्कि इस्लाम के बारे में है. इस्लाम इस एक समय के महान देश (फ्रांस) पर कब्जा करने का प्रयास कर रहा है.'
मीडिया सूत्रों की रिपोर्ट के अनुसार, US में मध्यावधि चुनावों के लिए एक महीने से भी कम समय बचा है. इस संदर्भ में, ट्रम्प की टिप्पणियों को महत्वपूर्ण माना जाता है. इस चुनाव में कांग्रेस के दोनों सदनों में उनकी पार्टी की विश्वसनीयता दांव पर लगी है. वे मतदाताओं से प्रवासन और निर्वासन के अपने आक्रामक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए मतदान करने का आग्रह कर रहे हैं.
जबकि, ट्रम्प पहले से ही ईरान के साथ युद्ध छेड़ने को लेकर कई बड़ी शर्मनाक स्थिति का सामना कर रहे हैं. उन्हें अमेरिकी नेताओं और नागरिकों की ओर से भी विरोध का सामना करना पड़ा है. ट्रम्प मध्यावधि चुनावों में अपनी स्थिति मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं. फ्रांस में, लोग स्कूल की स्थिति सुधारने की मांग को लेकर विरोध कर रहे हैं. यह विरोध स्कूल की खराब स्थिति, स्टाफ की कमी, जर्जर इमारतों और भारी भीड़ वाले कक्षाओं के खिलाफ है. ट्रम्प ने इस विरोध को एक अलग मुद्दे से जोड़ दिया है.
यह विरोध फ्रांसीसी राजनीति की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है. विपक्षी दल इमैनुएल मैक्रों को राष्ट्रपति पद से हटाना चाहते हैं. उनकी मध्य-दक्षिणपंथी सरकार सत्ता बनाए रखने की चुनौती का सामना कर रही है.
फ्रांस में इन विरोध प्रदर्शनों के दौरान कुछ इलाकों में हिंसा भी हुई है. 6 अक्टूबर को तीसरा राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन हो रहा है. स्कूल और विश्वविद्यालय के छात्र सड़कों पर उतर रहे हैं, जिसमें असंख्य ट्रेड यूनियन शामिल हुए हैं. फ्रांसीसी गृह मंत्रालय ने इस प्रदर्शन में 266,000 लोगों के भाग लेने की रिपोर्ट दी है, जबकि छात्र संगठन USL का दावा है कि 450,000 लोगों ने भाग लिया था.
फ्रांस के प्रधानमंत्री के अनुसार, 215 छात्र और 85 स्कूल स्टाफ घायल हुए थे. न्याय मंत्रालय ने 6,000 से अधिक गिरफ्तारियों की जानकारी दी है. 100 से अधिक स्कूलों को नुकसान हुआ था. मार्सेली में, आग बुझाने पहुंची फायर ट्रक को भी जला दिया गया था. हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि, केवल कुछ इलाकों में हिंसा हो रही है इसका मतलब यह नहीं है कि पूरा छात्र आंदोलन हिंसक है. सरकार कुछ कट्टरपंथी वामपंथी कार्यकर्ताओं और बाहरी उपद्रवियों की भूमिका की ओर भी इशारा कर रही है, जबकि हजारों छात्र स्कूल की सुविधाओं और स्कूल स्टाफ को लेकर विरोध कर रहे हैं.

