बढ़ती मांग से सरकार चिंतित, क्या सोने-चांदी को लेकर बजट में कोई खेल होने वाला है?

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कीमतें बढ़ रही हैं, फिर भी लोग उन्हें खरीद रहे हैं। बात सोने और चांदी की हो रही है, और अब सरकार इन बढ़ती कीमतों को काबू में करना चाहती है। हालांकि, कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय कारण हैं। लेकिन, भारत में सोने और चांदी में तेजी से हो रहा निवेश सरकार के लिए चिंता का विषय है। बजट आ रहा है, जो कुछ ही दिनों में पेश किया जाएगा, जिसमें सरकार सोने और चांदी को लेकर बड़े फैसले ले सकती है।

ऐसी खबरें मिल रही हैं कि सरकार सोने और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाने के विकल्प पर विचार कर रही है। इसका मुख्य कारण यह है कि कीमतों में तेज उछाल के बावजूद सोने और चांदी का आयात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ रहा है और व्यापार घाटा बढ़ रहा है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, ऊंची कीमतों के बावजूद भारत में सोने और चांदी की मांग कम नहीं हो रही है।

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वर्ष 2025 में भारत का सोने का आयात लगभग 59 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि चांदी का आयात सालाना आधार पर 44 प्रतिशत बढ़कर लगभग 9 अरब डॉलर हो गया। इतनी बड़ी मात्रा में आयात से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव आया है और रुपये का मूल्य कमजोर हुआ है। भारत के कुल 750 अरब डॉलर के आयात बिल में इन दोनों कीमती धातुओं की हिस्सेदारी लगभग 9% है। वर्तमान में, देश में सोने और चांदी पर 6 प्रतिशत आयात शुल्क लागू है। पहले यह दर 15 प्रतिशत तक थी।

विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और शेयर बाजार की अस्थिरता के कारण निवेशक सोने और चांदी जैसी सुरक्षित निवेश संपत्तियों की ओर रुख कर रहे हैं। इसके अलावा, सोने और चांदी के ETF में रिकॉर्ड निवेश ने मांग को और मजबूत बना दिया है।

सरकार अब आयात को नियंत्रित करने की चुनौती का सामना कर रही है। इसलिए, आयात शुल्क बढ़ाने को एक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है ताकि अनावश्यक आयात पर अंकुश लगाया जा सके और चालू खाता घाटे को कुछ कम किया जा सके। हालांकि, शुल्क बढ़ाने से तस्करी का जोखिम भी बढ़ जाता है।

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कई रिपोर्टों के अनुसार, बजट 2026 से पहले इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा चल रही है। यदि सरकार शुल्क बढ़ाने का निर्णय लेती है, तो यह घरेलू सोने और चांदी की कीमतों, ज्वेलरी उद्योग और निवेशकों को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल, बाजार और उद्योग की नजर सरकार के अगले कदम पर है।

28 जनवरी, 2026 को सोने की कीमत बढ़कर 1,64,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गई थी, जबकि चांदी की कीमत रिकॉर्ड 3,84,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। हालांकि, इतिहास बताता है कि आयात शुल्क में बढ़ोतरी करने से सोने की मांग पर अंकुश लगाने में कोई खास सफलता नहीं मिली है। अगस्त 2013 में, सोने पर आयात शुल्क 2% से बढ़ाकर 10% कर दिया गया था, फिर भी मांग बरकरार रही थी।

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