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सूरत के लैंड माफिया ‘महाकाल ग्रुप’ के सूत्रधार पर IT का छापा, बड़े नेता से जुड़ाव की चर्चा
कुछ वर्ष पहले सूरत की तेज़ी से बढ़ती समृद्धि को देखकर सौराष्ट्र के एक बड़े नेता ने लैंड माफियाओं को एकजुट कर एक गिरोह बनाया था, जो ‘महाकाल ग्रुप’ के नाम से जाना गया। अब इसी महाकाल ग्रुप के मुख्य सूत्रधार पर आयकर विभाग की DDI विंग द्वारा सूरत में अचानक छापेमारी किए जाने से हड़कंप मच गया है।
सरकार पहले ही इस गिरोह के कई सहयोगियों को शांत कर चुकी थी। लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या महाकाल गैंग अब भी सक्रिय है या यह उसके अस्तित्व पर अंतिम प्रहार है। क्या इसके सभी बचे हुए सदस्यों को भी अब पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा?
सूरत में ज़मीनों के दाम आसमान छूने लगे थे। इसी दौरान लगभग पाँच वर्ष पहले सौराष्ट्र के एक बड़े नेता ने करीब 30 लोगों का यह गिरोह खड़ा किया था। दिव्य भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस गैंग में 10 भूमि माफिया, 4 पत्रकार, 2 गैंगस्टर, साथ ही राजनेता, वकील और चार्टर्ड अकाउंटेंट भी शामिल थे। इस गिरोह ने सूरत में भारी आतंक फैलाया था, जिससे उद्योगपति बुरी तरह परेशान हो गए थे।
मामला अंततः प्रधानमंत्री तक पहुँच गया, जिसके बाद कड़े कदम उठाए गए। समय के साथ यह गैंग बिखर गई, लेकिन इसके कुछ सदस्य व्यक्तिगत रूप से गतिविधियाँ जारी रखे हुए थे और उन्हें ऊपर से संरक्षण मिलने की भी चर्चा थी। कहा जा रहा है कि गिरोह के कुछ सहयोगियों ने फिर से सिर उठाने की कोशिश की।
मुख्य आरोपी ने 6 लग्ज़री कारें खरीदी थीं। आयकर विभाग की छापेमारी के दौरान करीब ₹1.3 करोड़ नकद, कई लग्ज़री कारें और महत्वपूर्ण दस्तावेज़ ज़ब्त किए गए हैं। बुधवार सुबह से आयकर विभाग की टीम ने अलग-अलग स्थानों पर छापे मारे। इन छापों के बाद महाकाल ग्रुप के अन्य सहयोगियों में भी डर का माहौल फैल गया है।
धीरे-धीरे इनके बारे में कई जानकारियाँ सामने आ रही हैं और इनके कथित घोटालों से जुड़े और भी खुलासे आने वाले समय में होने की संभावना है।

