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वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज जीतने के लिए टीम इंडिया को ये 3 बदलाव करने होंगे
पिछली बार जब भारतीय टीम ने बेंगलुरु में T20 इंटरनेशनल मैच खेला था, तो वह डबल सुपर ओवर वाला मैच था, जिसमें विरोधी टीम अफगानिस्तान थी। हालांकि, टीम इंडिया ने वह मैच रोमांचक तरीके से जीता था। उस मैच के लगभग 2 साल बाद, भारतीय टीम एक बार फिर बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में मैदान पर उतरेगी। इस बार टीम इंडिया का मुकाबला वेस्टइंडीज से होगा, जिसमें सीरीज 2-2 से बराबर होगी। शनिवार (17 अक्टूबर) को खेले जाने वाले मैच से तय होगा कि सीरीज कौन जीतेगा।
भारतीय टीम ने यहां कुल 8 मैच खेले हैं, जिसमें उसने 4 मैच (डबल सुपर ओवर मैच मिलाकर) जीते हैं, 3 हारे हैं और एक मैच ड्रॉ रहा है। अब सवाल यह है कि क्या भारतीय टीम बेंगलुरु में खेलने के लिए मैदान पर उतरते समय अपनी प्लेइंग XI में बदलाव करेगी? क्या सच में कोई बदलाव होना चाहिए? क्या वैभव सूर्यवंशी को मौका मिलना चाहिए? चलिए इसे आसान शब्दों में समझते हैं।
हैदराबाद में चौथा T20I मैच भारत 24 रन से हार गया, जिससे अहम मैच से पहले वेस्टइंडीज का कॉन्फिडेंस बढ़ा होगा। इस सीरीज में श्रेयस अय्यर भारत की कप्तानी कर रहे हैं, जबकि तिलक वर्मा उप-कप्तान हैं।
इससे पहले, भारत ने 3 मैचों की ODI सीरीज 2-1 से जीती थी, लेकिन T20I सीरीज में वेस्टइंडीज ने कड़ी चुनौती पेश की है। इसलिए, टीम इंडिया को आखिरी मैच से पहले 3 खास बातों पर ध्यान देना होगा।
कुलदीप यादव ने सीरीज के पहले 2 T20I खेले, लेकिन तीसरे और चौथे मैच में उन्हें प्लेइंग XI में शामिल नहीं किया गया। अब अहम मैच के लिए टीम में उनकी वापसी पर विचार किया जा सकता है।
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कुलदीप ने इस दौरे पर ODI सीरीज में शानदार गेंदबाजी की। वह 3 मैचों में 7 विकेट लेकर भारत के सबसे सफल गेंदबाज रहे। उन्होंने अपना आखिरी T20 इंटरनेशनल मैच 15 फरवरी, 2026 को पाकिस्तान के खिलाफ खेला था। वह अब तक भारत के लिए 54 T20 इंटरनेशनल मैच खेल चुके हैं। बेंगलुरु की पिच पर स्पिन के जादूगर अहम भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में कुलदीप की बॉलिंग भारत के लिए काम की साबित हो सकती है।
इस सीरीज़ में भारतीय बल्लेबाजों ने कई बार अच्छी शुरुआत की है, लेकिन बीच के ओवरों में रन बनाने की रफ़्तार धीमी हो गई है। टीम अच्छी शुरुआती पोज़िशन को बड़े स्कोर में बदलने में लगातार सफल नहीं रही है।
बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में छोटी बाउंड्री और तेज़ आउटफ़ील्ड बल्लेबाजों के लिए फ़ायदेमंद हो सकती है। ऐसे मैदान पर पारी के बीच के ओवरों में भी रन रेट बनाए रखना ज़रूरी होगा। भारतीय मिडिल ऑर्डर को स्ट्राइक मूव करते रहना होगा और खराब गेंदों पर बड़े शॉट लगाने होंगे। अगर टीम इंडिया इस अहम मैच में मज़बूती से रन बनाना चाहती है, तो बल्लेबाजों को बीच के ओवरों में ज़्यादा रन बनाने के इरादे से खेलना होगा।
सीरीज़ में भारतीय तेज़ गेंदबाज़ों ने मुख्य रूप से पेस और लाइन और लेंथ पर भरोसा किया है। हालांकि, बेंगलुरु के हालात में गेंदबाज़ों को अपनी स्ट्रैटेजी बदलने की ज़रूरत पड़ सकती है।
एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में कटर और हार्ड-स्विंग डिलीवरी काम आ सकती हैं। तेज़ गेंदबाज़ों को धीमी गेंदें और पेस में वेरिएशन जैसी ज़्यादा वैरायटी का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे बल्लेबाज़ों के लिए गेंद की पेस का अंदाज़ा लगाना मुश्किल हो सकता है। सीरीज़ दांव पर होने के कारण, भारत को बेंगलुरु के हालात के हिसाब से अपने बॉलिंग प्लान बनाने होंगे।

