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'राष्ट्र निर्माण पर जोर', PM मोदी ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के संबोधन की तारीफ की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के संबोधन की तारीफ की है। नागपुर में संघ के शताब्दी वर्ष के विजयादशमी उत्सव के दौरान मोहन भागवत ने विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके संबोधन को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि इसमें राष्ट्रीय प्रगति, सामाजिक एकता और आत्मनिर्भरता जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विशेष रूप से समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता पर दिए गए जोर का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये मूल्य RSS के हर स्वयंसेवक के कार्य का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। प्रधानमंत्री ने मोहन भागवत के 'पंच परिवर्तन' से जुड़े विचारों का भी जिक्र किया और कहा कि इससे समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद मिल सकती है।
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि पश्चिम से एक ऐसा तूफान आया है, जो हर तरह की व्यवस्था, मर्यादाओं और सांस्कृतिक व मानवीय संस्कारों को नष्ट करना चाहता है। उन्होंने फ्रांस, अल्बानिया, बांग्लादेश और नेपाल का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया भर में अपने स्वार्थ पूरे करने और अपने समर्थकों को प्रभावशाली बनाए रखने के लिए इस तरह की गतिविधियां की जाती हैं।
मोहन भागवत ने कहा कि ऐसा दावा किया जाता है कि सत्ता परिवर्तन यानी 'रिजीम चेंज' से परिस्थितियां बदल जाएंगी, लेकिन पहले भी ऐसा नहीं हुआ और आज भी ऐसा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि एक मजबूत भारत ऐसी गतिविधियों को रोक सकता है। इसलिए भारत उनका परम लक्ष्य है और देश के भीतर भी इस तरह के प्रयास किए जा रहे हैं।
https://twitter.com/narendramodi/status/2112406942153068715
RSS प्रमुख ने कहा कि पिछले कुछ दशकों में भारत ने जिस दृढ़ नीति के साथ काम किया और जिस मजबूत नेतृत्व ने देश को आगे बढ़ाया, उसका असर दिखाई दिया है। उनके मुताबिक, भारत की युवा पीढ़ी में देश के लिए कुछ करने और वैश्विक जिम्मेदारियां उठाने की भावना जागेगी।
उन्होंने कहा कि समाज के इसी पुरुषार्थ के कारण इन ताकतों के उद्देश्य पूरे नहीं हो पा रहे हैं। भागवत के मुताबिक, ये ताकतें जानती हैं कि भारत उनका लक्ष्य है और वे भारत, हिंदू समुदाय तथा संघ को तोड़ने की कोशिश कर रही हैं। इस प्रक्रिया को 'विघटन' (Dismantling) कहा जाता है। उन्होंने आगे कहा कि स्वार्थी सत्ता और विवेकहीनता के कारण महत्वाकांक्षी नेताओं को भी मदद मिलती है।
RSS प्रमुख ने कहा कि भारत अभी विकास कर रहा है और उसका पूर्ण विकास होना बाकी है। ऐसे में समस्याएं बनी रहेंगी और समस्याएं होंगी तो आंदोलन भी होंगे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन होना स्वाभाविक है। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी आंदोलन का मुख्य उद्देश्य समाधान तक पहुंचना होना चाहिए।
भागवत के मुताबिक, आंदोलन करने वाले समूहों से लेकर शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई करने वाले शासन-प्रशासन तथा राजनीतिक नेताओं तक, सभी का उद्देश्य समस्याओं का समाधान करना होना चाहिए।

