बंगाल: अगर NOTA को मिल जाएं सबसे ज्यादा वोट तो कौन जीतेगा? जानिए क्या कहता है चुनाव आयोग का नियम

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पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। विभिन्न पार्टियों के उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं, लेकिन मतदान के दिन EVM में उम्मीदवार का नाम और पार्टी के चुनाव चिन्ह के साथ एक विकल्प NOTA (उपरोक्त में से कोई नहीं) भी होता है। NOTA को लेकर लोगों में काफी उत्सुकता है, खासकर तब क्या होगा अगर NOTA को किसी निर्वाचन क्षेत्र के सभी उम्मीदवारों से अधिक वोट मिल जाएं? क्या उस क्षेत्र में कोई MLA नहीं होगा? अगर NOTA को सभी उम्मीदवारों से अधिक वोट मिलते हैं तो इसके कानूनी परिणाम क्या होंगे? क्या उस क्षेत्र के सभी उम्मीदवार हार जाएंगे? या फिर से चुनाव होगा?

NOTA क्या है?

NOTA को भारतीय चुनावों में पहली बार 2013 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पेश किया गया था। इसका उद्देश्य मतदाताओं को राजनीतिक पार्टियों को ईमानदार उम्मीदवार देने के लिए ‘राइट टू रिजेक्ट’ का विकल्प देना और पार्टियों पर दबाव बनाना है कि वे योग्य उम्मीदवार उतारें। इस प्रतीक के रूप में बैलेट पेपर पर काला क्रॉस होता है।

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thehindu.com

अगर NOTA जीत जाए तो क्या होगा?

कई लोग मानते हैं कि अगर NOTA जीतता है तो चुनाव रद्द हो जाता है; लेकिन वर्तमान कानूनी ढांचे के तहत स्थिति थोड़ी अलग है। भारतीय चुनाव आयोग (ECI) और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के अनुसार फिलहाल भारत में NOTA को एक काल्पनिक उम्मीदवार माना जाता है। अगर NOTA को 100,000 वोट मिलते हैं और दूसरे स्थान पर रहने वाले उम्मीदवार को 50,000 वोट मिलते हैं, तो 50,000 वोट पाने वाले उम्मीदवार को विजेता घोषित किया जाएगा।

ऐसा क्यों है?

कानून कहता है कि NOTA आपके या मेरे जैसा कोई व्यक्ति नहीं है। यह सिर्फ एक मतदान का विकल्प है। इसलिए, सबसे अधिक वैध वोट पाने वाला उम्मीदवार MLA बनेगा।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला और कानूनी विवाद

तो NOTA को वोट देने का क्या फायदा? यहां PUCL बनाम भारत संघ (2013) केस का संदर्भ आता है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि NOTA मतदाताओं की भावना व्यक्त करने का एक माध्यम है। हालांकि, हाल के वर्षों में महाराष्ट्र और हरियाणा जैसे कुछ राज्यों के राज्य चुनाव आयोगों ने स्थानीय चुनावों (पंचायत या नगर पालिका) के नियमों में बदलाव किए हैं। वहां, अगर NOTA जीतता है, तो दोबारा चुनाव कराने का आदेश दिया जाता है। हालांकि, विधानसभा या लोकसभा चुनावों के मामले में केंद्रीय चुनाव आयोग अभी भी पुराने नियमों का पालन करता है, यानी अगर NOTA जीत भी जाए, तब भी दूसरे स्थान पर रहने वाला उम्मीदवार विजेता बनता है।

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क्या NOTA का नियम बदलेगा? उठ रही है यह मांग

वर्तमान में अलग-अलग जगहों से यह मांग उठ रही है कि अगर NOTA जीतता है, तो उस निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव रद्द कर देना चाहिए। पहले के उम्मीदवारों को फिर से चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। पश्चिम बंगाल में वर्तमान नियमों के अनुसार, अगर NOTA प्रतीकात्मक रूप से जीतता भी है, तो इसका सरकार के गठन या उम्मीदवार के चयन पर कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ता। हालांकि, यह राजनीतिक पार्टियों के लिए एक मजबूत संदेश है। आपका वोट आपका अधिकार है, इसलिए समझदारी से मतदान करें।

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