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                <title>Khabarchhe Hindi</title>
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                <title>यूट्यूब पर वीडियो देखकर घर पर ही करवा दी डिलीवरी, प्रसूता की बिगड़ी तबीयत, फिर…</title>
                                    <description><![CDATA[<p>वीडियो प्लेटफ़ॉर्म यूट्यूब पर वीडियो देखकर डिलीवरी कराना एक महिला के लिए जानलेवा साबित हुआ। ऐसे वीडियो देखने के बाद उसके परिवार के सदस्यों ने घर पर ही उसकी डिलीवरी करा दी। डिलीवरी के बाद उसकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी। हालांकि, परिजन उसे मेडिकल कॉलेज और अस्पताल ले गए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और उसकी मौत हो गई।</p>
<p>यह घटना तमिलनाडु के तिरुप्पुर ज़िले की है। बताया जाता है कि तिरुप्पुर ज़िले के उथुकुली के पास थलावायपलयम की रहने वाली शशिकला गर्भवती थी। जब उसे प्रसव पीड़ा शुरू हुई, तो उसके परिवार ने उसे अस्पताल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/got-the-delivery-done-at-home-after-watching-the-video/article-2496"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/photo-(2)2.webp" alt=""></a><br /><p>वीडियो प्लेटफ़ॉर्म यूट्यूब पर वीडियो देखकर डिलीवरी कराना एक महिला के लिए जानलेवा साबित हुआ। ऐसे वीडियो देखने के बाद उसके परिवार के सदस्यों ने घर पर ही उसकी डिलीवरी करा दी। डिलीवरी के बाद उसकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी। हालांकि, परिजन उसे मेडिकल कॉलेज और अस्पताल ले गए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और उसकी मौत हो गई।</p>
<p>यह घटना तमिलनाडु के तिरुप्पुर ज़िले की है। बताया जाता है कि तिरुप्पुर ज़िले के उथुकुली के पास थलावायपलयम की रहने वाली शशिकला गर्भवती थी। जब उसे प्रसव पीड़ा शुरू हुई, तो उसके परिवार ने उसे अस्पताल ले जाने के बजाय घर पर ही डिलीवरी कराने की कोशिश शुरू कर दी। उन्होंने यूट्यूब वीडियो देखकर सफलतापूर्वक सामान्य प्रसव भी करा दिया, लेकिन इसके बाद शशिकला की तबीयत बिगड़ने लगी।</p>
<p>अधिक रक्तस्राव के कारण उसकी हालत और गंभीर हो गई, जिसके बाद परिजन उसे इलाज के लिए पेरुन्दुरई सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले गए। वहां भी उसकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए कोयंबटूर रेफर कर दिया। कोयंबटूर के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।</p>
<p>बताया जाता है कि यह घटना 24 जून को हुई थी। यूट्यूब वीडियो के जरिए डिलीवरी कराने का यह मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन सक्रिय हो गया है। स्वास्थ्य विभाग ने अपनी जांच शुरू कर दी है और उथुकुली पुलिस ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/pregnant-women2.webp" alt="pregnant-women2" width="1280" height="720"/></p>
<p>जांच में पता चला कि शशिकला और उसके पति ने पहले से ही घर पर 'नेचुरल डिलीवरी' कराने की योजना बनाई थी। परिवार के अनुसार, वर्ष 2020 में पहली बेटी के जन्म के समय शशिकला का सी-सेक्शन हुआ था, जिसके बाद उसे लंबे समय तक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और मानसिक आघात का सामना करना पड़ा था। इसी अनुभव के कारण दंपति ने अपने दूसरे बच्चे की अस्पताल के बजाय प्राकृतिक तरीके से घर पर डिलीवरी कराने का फैसला किया। इस मामले में, कुन्नाथुर के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर की शिकायत पर उथुकुली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 के तहत कोलंदचामी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। यह धारा गैर-इरादतन हत्या से संबंधित है। हालांकि, मृतका के परिजनों ने इस संबंध में कोई शिकायत दर्ज कराने से इनकार किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 21:57:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
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                <title>हार्दिक को खरीदने के लिए CSK-KKR समेत 7 IPL टीमों ने दिखाई दिलचस्पी... जानिए कौन मारेगा बाज़ी?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई इंडियंस (MI) के कप्तान हार्दिक पंड्या IPL 2026 के लिए सबसे ज़्यादा चर्चा में रहने वाले खिलाड़ियों में से एक बन गए हैं। पाँच बार की चैंपियन टीम के IPL 2026 में निराशाजनक अभियान के बाद, उन्हें खरीदने की अटकलें तेज़ हो गई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, 7 IPL फ्रेंचाइज़ियाँ इस स्टार ऑलराउंडर को साइन करने में रुचि रखती हैं। फिलहाल, सबसे दिलचस्प मुकाबला चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) और कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के बीच माना जा रहा है। यहाँ सबसे बड़ा सवाल यह है कि हार्दिक पंड्या अगले सीज़न में किस टीम की ओर से खेलेंगे?</p>
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ndtv.in

<p>IPL</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/sports/7-ipl-teams-including-csk-kkr-showed-interest-in-buying-hardik/article-2494"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/hardik-pandya1.webp" alt=""></a><br /><p>मुंबई इंडियंस (MI) के कप्तान हार्दिक पंड्या IPL 2026 के लिए सबसे ज़्यादा चर्चा में रहने वाले खिलाड़ियों में से एक बन गए हैं। पाँच बार की चैंपियन टीम के IPL 2026 में निराशाजनक अभियान के बाद, उन्हें खरीदने की अटकलें तेज़ हो गई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, 7 IPL फ्रेंचाइज़ियाँ इस स्टार ऑलराउंडर को साइन करने में रुचि रखती हैं। फिलहाल, सबसे दिलचस्प मुकाबला चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) और कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के बीच माना जा रहा है। यहाँ सबसे बड़ा सवाल यह है कि हार्दिक पंड्या अगले सीज़न में किस टीम की ओर से खेलेंगे?</p>
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ndtv.in

<p>IPL 2026 में मुंबई इंडियंस के खराब प्रदर्शन के बाद जब से हार्दिक पंड्या ने टीम छोड़ने का फैसला किया है, तब से वह सबसे ज़्यादा मांग वाले खिलाड़ियों में शामिल हो गए हैं। 32 वर्षीय खिलाड़ी को अपनी टीम में शामिल करने के लिए होड़ तेज़ हो गई है। मीडिया सूत्रों की रिपोर्ट के मुताबिक, 7 IPL फ्रेंचाइज़ियों ने इस ऑलराउंडर को अपने साथ जोड़ने में रुचि दिखाई है। केवल रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) इस दौड़ से बाहर हैं।</p>
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livehindustan.com

<p>चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) ने इस रेस में देर से एंट्री की थी, लेकिन अब कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के साथ रोमांचक मुकाबला शुरू हो गया है, जबकि राजस्थान रॉयल्स (RR) भी इस दौड़ में शामिल है। हार्दिक पंड्या CSK के लिए बिल्कुल उपयुक्त हैं, खासकर MS धोनी के बाद के दौर में, लेकिन इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि उन्हें कप्तानी दी जाएगी। वहीं, कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) भी कप्तान की तलाश में है, और राजस्थान रॉयल्स (RR) भी नेतृत्व के साथ-साथ लंबी अवधि की भूमिका देने के लिए तैयार है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि MI खुद को किस तरह पेश करता है, क्योंकि उनके कप्तान में कई टीमों की गहरी दिलचस्पी है।</p>
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x.com

<p>मुंबई इंडियंस, चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच बातचीत चल रही है। हालांकि, तीनों पक्षों में से किसी ने भी अभी तक कोई पुष्टि नहीं की है, जबकि कई विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) किसे जाने देगी? क्या यह पूरी तरह नकद सौदा होगा? क्या KKR के पास ट्रेड करने का कोई ठोस कारण है? या फिर पिछले साल KL राहुल के मामले की तरह कोई अड़चन आएगी? हार्दिक पंड्या के ट्रांसफर को लेकर चर्चाएँ तेज़ हो गई हैं, और चेन्नई सुपर किंग्स धैर्यपूर्वक इस स्थिति पर नज़र बनाए हुए है।</p>
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instagram.com

<p>मुंबई इंडियंस पिछले सीज़न में संजू सैमसन, रविंद्र जडेजा और सैम करन के साथ हुए बड़े सौदों के दौरान जिस तरह मैदान में उतरी थी, उसी तरह अब भी अपनी एंट्री की योजना बना रही है। चेन्नई सुपर किंग्स के पास फिलहाल हार्दिक पंड्या को साइन करने का अच्छा मौका है, लेकिन आख़िरी समय में कोई रुकावट आ सकती है, क्योंकि IPL में खिलाड़ियों की अदला-बदली करना एक कठिन काम है।</p>
<p>CSK टीम में एक प्रभावशाली व्यक्ति ही इस ट्रेड को आगे बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि खिलाड़ी की सहमति होनी चाहिए। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या हार्दिक पंड्या कप्तानी के बिना दूसरी टीम में जाने के लिए तैयार होंगे या नहीं। दो बेहद सम्मानित पूर्व अंतरराष्ट्रीय कप्तानों ने भी रुचि दिखाई है, जिनमें से एक ने कप्तानी की पेशकश भी की थी, लेकिन शुरुआती चर्चाओं का कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category> खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 20:08:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बारिश ने फिर प्रशासन की पोल खोल दी, सूरत के डिंडोली में सड़क धंस गई, द्वारका में हाई अलर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p>गुजरात में बारिश को लेकर जून का महीना सूखा रहने के बाद जुलाई में मेघराजा ने जोरदार दस्तक दी है। पिछले 24 घंटों में राज्य के 107 तालुकों में बारिश दर्ज की गई है, जिसमें सबसे अधिक सूरत के पलसाणा में 7.99 इंच वर्षा हुई है। जूनागढ़, नवसारी, राजकोट, अमरेली सहित कई जिलों में मूसलाधार बारिश के कारण अनेक स्थानों पर जलभराव के दृश्य देखने को मिले। राजुला की रायडी नदी में बाढ़ आने से 35 बकरियां और कुछ महिलाएँ बह गई थीं। हालांकि, स्थानीय लोगों ने महिलाओं को सुरक्षित बचा लिया।</p>
<p>दिव्य भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, आज सुबह</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/national/6a460ed04fd63/article-2492"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/photo-(2)3.webp" alt=""></a><br /><p>गुजरात में बारिश को लेकर जून का महीना सूखा रहने के बाद जुलाई में मेघराजा ने जोरदार दस्तक दी है। पिछले 24 घंटों में राज्य के 107 तालुकों में बारिश दर्ज की गई है, जिसमें सबसे अधिक सूरत के पलसाणा में 7.99 इंच वर्षा हुई है। जूनागढ़, नवसारी, राजकोट, अमरेली सहित कई जिलों में मूसलाधार बारिश के कारण अनेक स्थानों पर जलभराव के दृश्य देखने को मिले। राजुला की रायडी नदी में बाढ़ आने से 35 बकरियां और कुछ महिलाएँ बह गई थीं। हालांकि, स्थानीय लोगों ने महिलाओं को सुरक्षित बचा लिया।</p>
<p>दिव्य भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, आज सुबह 6:00 से 8:00 बजे तक 34 तालुकों में बारिश दर्ज की गई, जिसमें गिर सोमनाथ के सूत्रापाड़ा में सबसे अधिक 2.36 इंच बारिश हुई। विश्वप्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर के दिग्विजय द्वार के पास घुटनों तक बारिश का पानी भर जाने से श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर, सूरत में आज भी सड़क धंसने की घटनाओं के कारण सड़कों पर मौत के कुएँ जैसे गहरे गड्ढे बन गए हैं, जिससे स्थानीय लोगों में नगर निगम की कार्यप्रणाली के प्रति रोष देखा जा रहा है।</p>
<p>गिर सोमनाथ जिले में एक बार फिर मेघराजा ने जोरदार बारिश शुरू कर दी है। वेरावल और सूत्रापाड़ा क्षेत्र में बारिश तेज होने से कई इलाकों में वर्षा का माहौल छा गया है। सूत्रापाड़ा फाटक क्षेत्र बारिश के पानी से पूरी तरह जलमग्न हो गया है। भारी बारिश के कारण सड़कों पर पानी भर जाने से वाहन चालकों और स्थानीय लोगों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। निचले इलाकों में जलभराव के दृश्य सामने आ रहे हैं।</p>
<p>गिर सोमनाथ के विश्वप्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर के दिग्विजय द्वार के पास बारिश का पानी भर जाने से श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रभास पाटन को जोड़ने वाले मार्ग पर बारिश के पानी के साथ नाले का पानी भी मिल जाने से दुर्गंध फैल गई है। स्थानीय लोगों ने मंदिर ट्रस्ट और नगर पालिका पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। नगर पालिका के कर्मचारियों के अनुसार, बारिश के पानी की निकासी में बाधा आने के कारण बार-बार ऐसी स्थिति बनती है, लेकिन कई शिकायतों के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया है।</p>
<p>वेरावल शहर में भी बारिश की जोरदार शुरुआत होने से मुख्य सड़कों पर पानी भरने लगा है। जिले में आने वाले घंटों में भी बारिश जारी रहने की संभावना के बीच स्थानीय प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।</p>
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divyabhaskar.co.in

<p>सूरत शहर में देर रात से हल्की बारिश हो रही है। सुबह भी बारिश जारी रहने के कारण लोगों को रेनकोट और छाता लेकर कार्यालय तथा स्कूल जाना पड़ा। वहीं, सूरत के डिंडोली क्षेत्र में जी-नाइन सर्कल पर लगभग 40 मीटर सड़क धँस गई है। घटना की जानकारी मिलते ही डिप्टी मेयर सुधाकर चौधरी मौके पर पहुँचे, लेकिन वे इस संबंध में संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। उन्होंने गोलमोल जवाब देते हुए केवल इतना कहा कि जिम्मेदार अधिकारी और एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p>इतना ही नहीं, सड़क धँसने के बाद क्षेत्राधिकार को लेकर भी कर्मचारियों के बीच विवाद खड़ा हो गया। नगर निगम के कर्मचारी इस क्षेत्र को SUDA का बता रहे थे, जबकि SUDA के अधिकारी इसे नगर निगम का क्षेत्र बता रहे थे। इस संबंध में सुधाकर चौधरी ने कहा कि आधा क्षेत्र SUDA का और आधा नगर निगम का है, फिर भी यहाँ मरम्मत का कार्य नगर निगम द्वारा किया जा रहा है।</p>
<p>सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सुधाकर चौधरी ने स्वीकार किया है कि सूरत में गड्ढे भी पड़ रहे हैं और सड़कें भी धँस रही हैं। लेकिन इसमें भ्रष्टाचार है या नहीं, इस बारे में कुछ कहने में उन्हें कठिनाई होती दिखाई दी। उन्होंने केवल कार्रवाई किए जाने की बात कही।</p>
<p>सूरत में उधना साउथ ज़ोन के पास नाले की सफाई के दौरान कल सुबह से नाले में फँसी पोकलेन मशीन को भारी मशक्कत के बाद देर रात दूसरी क्रेन की मदद से बाहर निकाला गया। बाहर निकाली गई इस पोकलेन मशीन में नाले का पानी और कचरा बड़ी मात्रा में जमा हो गया था। उल्लेखनीय बात यह है कि नाले की सफाई के दौरान हुई इस घटना के समय मौके पर SMC का कोई भी अधिकारी मौजूद नहीं था।</p>
<p>मौसम विभाग ने 5 जुलाई तक राज्य में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की संभावना के साथ अलर्ट जारी किया है। आज चार जिलों में रेड अलर्ट और पाँच जिलों में ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार, हवा की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा रहने की संभावना है और बिजली गिरने की भी आशंका है। कल की तरह आज भी अहमदाबाद में एक-दो बार बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।</p>
<p>मौसम विभाग के अनुसार, अगले तीन दिनों में अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट हो सकती है। इसके बाद पूरे क्षेत्र में तापमान में कोई विशेष परिवर्तन होने की संभावना नहीं है। वर्तमान में राज्य में ट्रफ, अपर एयर साइक्लोनिक सर्कुलेशन, वेस्टर्न डिस्टर्बेंस और लो प्रेशर एरिया बनने के कारण बारिश की गतिविधि बढ़ गई है।</p>
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gujaratsamachar.com

<p>अहमदाबाद में आज सामान्यतः आसमान बादलों से घिरा रहने की संभावना है। एक-दो बार बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। अधिकतम तापमान लगभग 39 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है।</p>
<p>आज दक्षिण गुजरात के जिलों सूरत, डांग, नवसारी, वलसाड तथा दमन, दादरा और नगर हवेली में भारी से अत्यधिक भारी बारिश तथा कुछ स्थानों पर रेड अलर्ट के साथ अत्यंत भारी वर्षा होने की प्रबल संभावना है। दक्षिण गुजरात के नर्मदा, भरूच और तापी जिलों तथा सौराष्ट्र के अमरेली और भावनगर जिलों में कुछ स्थानों पर ऑरेंज अलर्ट के साथ भारी से अत्यधिक भारी बारिश की संभावना है। दक्षिण गुजरात के वडोदरा और छोटाउदेपुर जिलों तथा सौराष्ट्र के राजकोट, जूनागढ़, गिर सोमनाथ, बोटाद और दीव में कुछ स्थानों पर येलो अलर्ट के साथ भारी बारिश की संभावना है।</p>
<p>3 जुलाई को दक्षिण गुजरात के डांग, तापी, नवसारी और वलसाड जिलों तथा दमन, दादरा और नगर हवेली में भारी से अत्यधिक भारी बारिश तथा कुछ स्थानों पर रेड अलर्ट के साथ अत्यंत भारी वर्षा होने की प्रबल संभावना है।</p>
<p>दक्षिण गुजरात के नर्मदा, भरूच और सूरत जिलों तथा सौराष्ट्र के अमरेली और भावनगर जिलों में कुछ स्थानों पर ऑरेंज अलर्ट के साथ भारी से अत्यधिक भारी बारिश की संभावना है। गुजरात के आनंद, पंचमहल, दाहोद, वडोदरा और छोटाउदेपुर जिलों तथा सौराष्ट्र के राजकोट, पोरबंदर, जूनागढ़, गिर सोमनाथ और दीव में कुछ स्थानों पर येलो अलर्ट के साथ भारी बारिश की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय </category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 16:40:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ग्वालियर में 5 माह से लापता लड्डू गोपाल को ढूंढेगी SIT, तीन थानों की पुलिस करेगी तलाश</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="isSelectedEnd">मध्य प्रदेश के ग्वालियर से एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां 5 माह से लापता भगवान लड्डू गोपाल की मूर्ति को तलाशने के लिए पुलिस ने SIT का गठन किया है। ग्वालियर के आईजी के निर्देश पर बनाई गई इस टीम में तीन थानों की पुलिस को शामिल किया गया है, जो अब मूर्ति की तलाश करेंगे। यह मामला 29 जनवरी का है। अलकापुरी निवासी विजया शर्मा, जो हमेशा अपने साथ भगवान लड्डू गोपाल की छोटी मूर्ति रखती हैं, उस दिन खरीदारी करने माधवगंज बाजार गई थीं। शॉपिंग के दौरान उनकी लड्डू गोपाल की मूर्ति एक ठेले पर छूट</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/religion-astrology/-draft--add-your-title/article-2497"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/12.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">मध्य प्रदेश के ग्वालियर से एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां 5 माह से लापता भगवान लड्डू गोपाल की मूर्ति को तलाशने के लिए पुलिस ने SIT का गठन किया है। ग्वालियर के आईजी के निर्देश पर बनाई गई इस टीम में तीन थानों की पुलिस को शामिल किया गया है, जो अब मूर्ति की तलाश करेंगे। यह मामला 29 जनवरी का है। अलकापुरी निवासी विजया शर्मा, जो हमेशा अपने साथ भगवान लड्डू गोपाल की छोटी मूर्ति रखती हैं, उस दिन खरीदारी करने माधवगंज बाजार गई थीं। शॉपिंग के दौरान उनकी लड्डू गोपाल की मूर्ति एक ठेले पर छूट गई। जब उन्हें इसका पता चला तो उन्होंने तुरंत आसपास के इलाकों में  तलाश शुरू की, लेकिन मूर्ति का कोई पता नहीं चला।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/laddu-gopal-missing3.jpg" alt="Laddu-Gopal-Missing3" width="1280" height="720"/></p>
<p class="isSelectedEnd">विजया शर्मा ने इसके बाद स्थानीय पुलिस से भी मदद मांगी। उनका कहना है कि शुरुआती दौर में पुलिस ने उनकी शिकायत पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं की। लेकिन 5 महीने गुजर जाने के बाद भी जब मूर्ति का कोई पता नहीं चला, तब यह मामला वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुंचा। इसके बाद ग्वालियर आईजी ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसआईटी गठित करने का फैसला लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">अब यह विशेष जांच दल तीन अलग-अलग थाना क्षेत्रों में खोजेगा और उस दिन बाजार में मौजूद लोगों, दुकानदारों और अन्य संभावित गवाहों से पूछताछ करेगा। साथ ही, उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी समीक्षा की जाएगी, ताकि मूर्ति का पता लगाया जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/laddu-gopal-missing4.jpg" alt="Laddu-Gopal-Missing4" width="1280" height="720"/></p>
<p class="isSelectedEnd">विजया शर्मा का कहना है कि उनके लिए यह सिर्फ एक मूर्ति नहीं, बल्कि उनके आराध्य भगवान हैं। उन्होंने बताया कि लड्डू गोपाल के गायब होने के बाद से उनका पूरा परिवार मानसिक रूप से परेशान है। परिवार का कोई भी सदस्य पहले की तरह ठीक से खाना नहीं खा पा रहा है और सभी लगातार भगवान की वापसी की प्रार्थना कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">लड्डू गोपाल की सुरक्षित वापसी के लिए विजया शर्मा ने ₹5,000 के नकद इनाम की भी घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि जो भी व्यक्ति उनके लड्डू गोपाल को ढूंढकर वापस लाएगा, उसे यह इनाम दिया जाएगा।यह मामला अब पूरे ग्वालियर में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों की नजरें एसआईटी की जांच पर टिकी हैं कि आखिर 5 माह से लापता लड्डू गोपाल की मूर्ति को कब तक खोज पाएंगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 15:47:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>RBI रिपोर्ट: भारत का विदेशी कर्ज ₹72 लाख करोड़ के पार, फिर भी क्यों घबराने की जरूरत नहीं? जानिए...</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। हालांकि, RBI के हालिया आंकड़ों ने देश की विदेशी देनदारियों की नई तस्वीर पेश की है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, देश का कुल विदेशी कर्ज बढ़कर 762.8 अरब डॉलर यानी लगभग ₹72.15 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। मार्च 2026 के अंत तक भारत का विदेशी कर्ज पिछले वर्ष की तुलना में 26.3 अरब डॉलर बढ़ा था। हालांकि, इस बढ़ोतरी की वास्तविक तस्वीर इससे भी बड़ी है।</p>
<p>RBI के अनुसार, अमेरिकी डॉलर के मज़बूत होने से विदेशी कर्ज में वास्तविक बढ़ोतरी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/business/rbi-report-indias-foreign-debt-crosses-%E2%82%B972-lakh-crore-still/article-2495"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/foreign-debt2.webp" alt=""></a><br /><p>भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। हालांकि, RBI के हालिया आंकड़ों ने देश की विदेशी देनदारियों की नई तस्वीर पेश की है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, देश का कुल विदेशी कर्ज बढ़कर 762.8 अरब डॉलर यानी लगभग ₹72.15 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। मार्च 2026 के अंत तक भारत का विदेशी कर्ज पिछले वर्ष की तुलना में 26.3 अरब डॉलर बढ़ा था। हालांकि, इस बढ़ोतरी की वास्तविक तस्वीर इससे भी बड़ी है।</p>
<p>RBI के अनुसार, अमेरिकी डॉलर के मज़बूत होने से विदेशी कर्ज में वास्तविक बढ़ोतरी आंशिक रूप से छिप गई है। यदि मूल्यांकन प्रभाव (वैल्यूएशन इफ़ेक्ट) को हटा दिया जाए, तो विदेशी कर्ज में बढ़ोतरी 26.3 अरब डॉलर के बजाय 51 अरब डॉलर होती। दूसरे शब्दों में कहें तो, डॉलर के मुकाबले अन्य प्रमुख मुद्राओं के कमज़ोर पड़ने से उन मुद्राओं में लिए गए ऋणों का डॉलर आधारित मूल्य घट गया, जिससे कुल विदेशी कर्ज का आंकड़ा अपेक्षाकृत कम दिखाई देता है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/foreign-debt4.webp" alt="foreign-debt4" width="1280" height="720"/>
aajtak.in

<p>किसी भी देश के लिए केवल कुल कर्ज की राशि ही महत्वपूर्ण नहीं होती; यह भी देखा जाता है कि अर्थव्यवस्था की तुलना में कर्ज कितना है। इस पैमाने पर भारत का विदेशी कर्ज-GDP अनुपात बढ़कर 20.8 प्रतिशत हो गया है, जो एक वर्ष पहले 19.8 प्रतिशत था। यानी आर्थिक विस्तार के साथ-साथ विदेशी कर्ज का अनुपात भी बढ़ रहा है। हालांकि, राहत की बात यह है कि यह अनुपात अभी भी कई अन्य उभरती और विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में नियंत्रित दायरे में माना जाता है।</p>
<p>RBI की रिपोर्ट में एक दिलचस्प बात यह भी सामने आई है कि सरकारी विदेशी कर्ज घटा है, जबकि निजी क्षेत्र की विदेशी उधारी बढ़ी है। यानी हालिया बढ़ोतरी में निजी क्षेत्र ने प्रमुख भूमिका निभाई है। कुल विदेशी कर्ज का 36.4 प्रतिशत हिस्सा अकेले गैर-वित्तीय कॉर्पोरेट संस्थाओं का है। कंपनियां विदेशी बाज़ारों से अपेक्षाकृत कम लागत पर पूंजी जुटाने के लिए विदेशी उधार पर लगातार अधिक निर्भर होती जा रही हैं।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, एक वर्ष या उससे कम अवधि वाले अल्पकालिक (शॉर्ट टर्म) विदेशी कर्ज का हिस्सा बढ़कर 19.6 प्रतिशत हो गया है, जो एक वर्ष पहले 18.3 प्रतिशत था। अल्पकालिक कर्ज को अधिक संवेदनशील माना जाता है क्योंकि उसका भुगतान कम समय में करना पड़ता है। यदि वैश्विक परिस्थितियां बिगड़ती हैं, डॉलर और मज़बूत होता है, या विदेशी फंडिंग महंगी हो जाती है, तो ऐसे कर्ज का दबाव तेज़ी से बढ़ सकता है। वहीं, अल्पकालिक कर्ज और विदेशी मुद्रा भंडार का अनुपात भी पिछले वर्ष के 20.1 प्रतिशत की तुलना में बढ़कर 21.6 प्रतिशत हो गया है।</p>
<p>भारत के कुल विदेशी कर्ज का सबसे बड़ा हिस्सा अमेरिकी डॉलर में है। मार्च 2026 तक 55.5 प्रतिशत बाहरी कर्ज डॉलर में था। इसके बाद भारतीय रुपये की हिस्सेदारी 29.4 प्रतिशत रही। जापानी येन में 6.4 प्रतिशत, स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) में 4.3 प्रतिशत और यूरो में 3.7 प्रतिशत हिस्सा था। इसका मतलब है कि डॉलर के मूल्य में उल्लेखनीय उतार-चढ़ाव भारत की विदेशी देनदारियों पर सीधा असर डाल सकता है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/foreign-debt1.webp" alt="foreign-debt1" width="1280" height="720"/>
moneycontrol.com

<p>विदेशी कर्ज में बढ़ोतरी के बावजूद कुछ संकेत ऐसे हैं जो थोड़ी राहत देते हैं। RBI के अनुसार, मार्च 2026 के अंत में दीर्घकालिक (लॉन्ग टर्म) कर्ज 613.5 अरब डॉलर था। कुल विदेशी कर्ज का बड़ा हिस्सा दीर्घकालिक होने के कारण तत्काल भुगतान का दबाव कुछ हद तक कम रहता है। इसके अलावा, डेट सर्विस अनुपात में भी सुधार देखा गया है; विदेशी कर्ज पर मूलधन और ब्याज भुगतान का अनुपात एक वर्ष पहले के 6.6 प्रतिशत से घटकर 5.8 प्रतिशत हो गया है, जो कर्ज चुकाने के बोझ में कुछ कमी दर्शाता है। सबसे राहत की बात यह है कि भारत के पास मज़बूत विदेशी मुद्रा भंडार है, जो वैश्विक अनिश्चितताओं और बाहरी झटकों के खिलाफ सुरक्षा कवच का काम करता है।</p>
<p>विदेशी कर्ज में बढ़ोतरी का मतलब यह नहीं है कि देश कर्ज संकट की ओर बढ़ रहा है। हालांकि, यह निश्चित रूप से एक ऐसा संकेत है जिस पर कड़ी नज़र रखने की ज़रूरत है। यदि डॉलर मज़बूत होता है, वैश्विक ब्याज दरें ऊंची बनी रहती हैं, या विदेशी बाज़ारों से पूंजी जुटाना महंगा हो जाता है, तो इसका असर कॉर्पोरेट लागत पर पड़ सकता है। आगे चलकर यह दबाव निवेश, रोज़गार और आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल भारत की बाहरी स्थिति मज़बूत मानी जाती है और विदेशी मुद्रा भंडार पर्याप्त स्तर पर है। हालांकि, RBI के आंकड़े संकेत देते हैं कि भविष्य में विदेशी उधारी की गति और प्रकृति पर कड़ी नज़र रखने की आवश्यकता होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://hindi.khabarchhe.com/business/rbi-report-indias-foreign-debt-crosses-%E2%82%B972-lakh-crore-still/article-2495</link>
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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 14:25:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>व्हाट्सएप का यूजरनेम फीचर: सरकार को नए फीचर से किस बात का डर सता रहा है, क्या इससे साइबर फ्रॉड बढ़ जाएगा?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> भारत में व्हाट्सएप का नया यूजरनेम फीचर फिलहाल लॉन्च नहीं होगा। केंद्र सरकार ने मेटा को निर्देश दिया है कि जब तक इस फीचर से जुड़े सभी पहलुओं पर चर्चा और जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक इसे देश में लागू न किया जाए। इसके साथ ही सरकार ने कंपनी को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब भी मांगा है। दरअसल, सरकार की मुख्य चिंता यह है कि इस फीचर के जरिए मोबाइल नंबर छिपाकर फर्जी पहचान बनाना आसान हो सकता है, जिससे साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी के मामले बढ़ने की आशंका है। बहरहाल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/tech/whatsapps-username-feature-what-is-the-government-afraid-of-with/article-2493"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/11.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> भारत में व्हाट्सएप का नया यूजरनेम फीचर फिलहाल लॉन्च नहीं होगा। केंद्र सरकार ने मेटा को निर्देश दिया है कि जब तक इस फीचर से जुड़े सभी पहलुओं पर चर्चा और जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक इसे देश में लागू न किया जाए। इसके साथ ही सरकार ने कंपनी को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब भी मांगा है। दरअसल, सरकार की मुख्य चिंता यह है कि इस फीचर के जरिए मोबाइल नंबर छिपाकर फर्जी पहचान बनाना आसान हो सकता है, जिससे साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी के मामले बढ़ने की आशंका है। बहरहाल सरकार इस फीचर के सुरक्षा मानकों और इसके संभावित दुरुपयोग की विस्तृत जांच करना चाहती है। </p>
<p>बता दें कि WhatsApp ने 29 जून से दुनियाभर में यूजरनेम रजिस्ट्रेशन की शुरुआत की है। यह सुविधा एक साथ सभी यूजर्स को नहीं मिलेगी, बल्कि आने वाले कुछ महीनों में चरणबद्ध तरीके से अलग-अलग देशों में रोलआउट की जाएगी। जिस क्षेत्र में यह फीचर उपलब्ध होगा, वहां यूजर्स को WhatsApp के भीतर नोटिफिकेशन मिलेगा।<br />वहीं, WhatsApp के हेड कुणाल शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस फीचर की घोषणा करते हुए लिखा था कि सही समय बहुत महत्वपूर्ण है। दुनिया भर में फीचर उपलब्ध होने से पहले अपना यूजरनेम सुरक्षित कर लें। जल्द ही लोगों से जुड़ने का एक अधिक निजी तरीका WhatsApp पर उपलब्ध होगा।</p>
<p><strong>आखिर भारत सरकार को क्यों है चिंता</strong></p>
<p>दरअसल, सरकार का मानना है कि यूजरनेम फीचर लागू होने के बाद कई स्थितियों में लोगों का मोबाइल नंबर सामने नहीं आएगा। ऐसे में कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे के नाम से मिलता-जुलता यूजरनेम बनाकर लोगों को गुमराह कर सकता है। इससे फर्जी प्रोफाइल के जरिए ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर अपराध की आशंका बढ़ सकती है।<br />भारत WhatsApp का सबसे बड़ा बाजार है। भारत में करीब 50 करोड़ से अधिक यूजर्स हैं। इतने बड़े यूजर बेस को देखते हुए सरकार सुरक्षा व्यवस्था और फेक प्रोफाइल से जुड़े जोखिमों का आकलन करना चाहती है।</p>
<p><strong>क्या है WhatsApp का यूजरनेम फीचर</strong></p>
<p>मेटा ने WhatsApp में ऐसा फीचर पेश किया है, जिसकी मदद से लोग मोबाइल नंबर साझा किए बिना भी किसी नए व्यक्ति से बातचीत कर सकेंगे। इसके लिए केवल यूजरनेम का इस्तेमाल होगा। यह सुविधा खासतौर पर उन लोगों के लिए लाई गई है, जो अपनी निजी जानकारी साझा किए बिना नए संपर्कों से जुड़ना चाहते हैं।</p>
<p><strong>WhatsApp यह फीचर क्यों ला रहा है?</strong></p>
<p>कंपनी का कहना है कि कई बार लोग किसी नए व्यक्ति से संपर्क करना चाहते हैं, लेकिन अपना मोबाइल नंबर साझा नहीं करना चाहते। जैसे किसी नेटवर्किंग इवेंट में मिले व्यक्ति, नए क्लासमेट, पड़ोसी या बच्चों के स्कूल अथवा स्पोर्ट्स ग्रुप के अन्य अभिभावकों से बातचीत के दौरान प्राइवेसी बनाए रखना जरूरी होता है। ऐसे मामलों में अब मोबाइल नंबर की जगह केवल यूजरनेम साझा किया जा सकेगा।</p>
<p><strong>क्या यूजरनेम बनाना जरूरी होगा या वैकल्पिक होगा</strong></p>
<p>WhatsApp ने स्पष्ट किया है कि यूजरनेम पूरी तरह वैकल्पिक सुविधा है। यूजर चाहें तो अपना यूजरनेम बना सकते हैं और चाहें तो बिना यूजरनेम के भी पहले की तरह WhatsApp का इस्तेमाल कर सकते हैं। यानी किसी पर भी यूजरनेम बनाने की बाध्यता नहीं होगी।</p>
<p><strong>अपने पसंद का यूजरनेम चाहिए तो क्या करें</strong></p>
<p>दुनियाभर में करोड़ों लोग इस फीचर का इस्तेमाल करेंगे। ऐसे में एक जैसे या मिलते-जुलते नामों की मांग अधिक रहने की संभावना है। इसलिए जो यूजर पहले अपना यूजरनेम रिजर्व करेंगे, उन्हें अपनी पसंद का नाम मिलने की संभावना भी ज्यादा रहेगी।</p>
<p><strong>मोबाइल नंबर तभी दिखेगा जब आप साझा करना चाहेंगे</strong></p>
<p>यूजरनेम फीचर लागू होने के बाद कुछ परिस्थितियों में मोबाइल नंबर अपने-आप सामने नहीं आएगा। यानी जब किसी बड़े ग्रुप चैट में आपको जोड़ा जाएगा अथवा जब आप पहली बार किसी नए व्यक्ति से बातचीत शुरू करेंगे। ऐसी स्थिति में सामने वाले व्यक्ति को आपका यूजरनेम दिखाई देगा, जबकि मोबाइल नंबर तभी दिखाई देगा जब आप स्वयं उसे साझा करना चाहेंगे।</p>
<p><strong>तो क्या मोबाइल नंबर पूरी तरह गायब रहेगा</strong></p>
<p>इसका जवाब है नहीं। अगर आपने यूजरनेम बनाया है तो केवल नए व्यक्ति को आपका नंबर दिखाई नहीं देगा। हालांकि WhatsApp अकाउंट बनाने और उसे चलाने के लिए मोबाइल नंबर पहले की तरह अनिवार्य रहेगा। जिन लोगों के पास पहले से आपका नंबर सेव है, वे पहले की तरह ही आपसे चैट कर सकेंगे।</p>
<p><strong>जरूरी बात: अपराधी</strong><strong> इस फीचर का फायदा न उठाए, यह ध्यान रखना होगा</strong></p>
<p>साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ लंबे समय से यह मानते रहे हैं कि किसी भी ऐसे फीचर, जिसमें वास्तविक पहचान सीमित दिखाई देती हो, उसके साथ मजबूत वेरिफिकेशन और रिपोर्टिंग सिस्टम भी जरूरी होता है। WhatsApp पहले से एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, टू-स्टेप वेरिफिकेशन, अकाउंट रिपोर्टिंग और स्पैम डिटेक्शन जैसे सुरक्षा फीचर उपलब्ध कराता है। अब सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि यूजरनेम फीचर भी इन्हीं सुरक्षा मानकों के अनुरूप हो और इसके जरिए साइबर अपराधियों को किसी तरह का अतिरिक्त फायदा न मिले।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक और ऑटाे</category>
                                    

                <link>https://hindi.khabarchhe.com/tech/whatsapps-username-feature-what-is-the-government-afraid-of-with/article-2493</link>
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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 13:12:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजा रघुवंशी केस: पति को खाई में फेंकने की आरोपी सोनम को मिली जमानत, जानिए किस कानून के तहत मिली राहत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पिछले एक हफ्ते से सबकी नजर पुणे के केतन अग्रवाल हत्या मामले और आरोपी सिया पर थी। हर कोई सिया और उसके रहस्य की कहानी में खोया हुआ था। इसी दौरान, चुपचाप मेघालय से एक ऐसी खबर आई, जिस पर किसी का ध्यान ही नहीं गया। यह खबर इंदौर की सोनम के बारे में थी, जिसकी कहानी की नकल पुणे की सिया ने की थी। सिया फिलहाल पुणे पुलिस की हिरासत में है, जबकि सोनम जमानत पर रिहा हो चुकी है।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/6.webp" alt="6" width="1200" height="720" /></p>
<p>हत्या जैसे गंभीर अपराध में 11 महीने के भीतर आरोपी हत्यारे को जमानत मिल जाना बहुत ही दुर्लभ होता</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/national/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%98%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%82%E0%A4%B6%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%B8--%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AB%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%AA%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%A4--%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%82%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A4%E0%A4%B9%E0%A4%A4-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%A4/article-2491"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/5.webp" alt=""></a><br /><p>पिछले एक हफ्ते से सबकी नजर पुणे के केतन अग्रवाल हत्या मामले और आरोपी सिया पर थी। हर कोई सिया और उसके रहस्य की कहानी में खोया हुआ था। इसी दौरान, चुपचाप मेघालय से एक ऐसी खबर आई, जिस पर किसी का ध्यान ही नहीं गया। यह खबर इंदौर की सोनम के बारे में थी, जिसकी कहानी की नकल पुणे की सिया ने की थी। सिया फिलहाल पुणे पुलिस की हिरासत में है, जबकि सोनम जमानत पर रिहा हो चुकी है।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/6.webp" alt="6" width="1280" height="720"/></p>
<p>हत्या जैसे गंभीर अपराध में 11 महीने के भीतर आरोपी हत्यारे को जमानत मिल जाना बहुत ही दुर्लभ होता है। लेकिन यहां लोग इस बात पर विश्वास ही नहीं कर पा रहे हैं कि सोनम ने जो किया, उसके बावजूद भी उसे इतनी आसानी से और इतनी जल्दी जमानत मिल सकती है। हैरानी की बात तो यह है कि अदालत भी सोनम को निर्दोष नहीं मानती। फिर भी अदालत ने सोनम को जमानत पर क्यों रिहा किया? जब आप इसका जवाब जानेंगे तो हैरान रह जाएंगे।</p>
<p>शायद यह देश का पहला मामला है, जहां कानून की गलत धारा और मेघालय पुलिस की एक छोटी-सी गलती के कारण सोनम जेल से बाहर आ गई। दरअसल, मेघालय पुलिस ने हत्या के मामले में गिरफ्तारी के बाद सोनम पर नई भारतीय न्याय संहिता (BNS) की जो धारा लगाई थी, वह कानून की किताबों में तो है ही नहीं, बल्कि किसी भी अदालत या पुलिस थाने के रिकॉर्ड में भी मौजूद नहीं है।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/3.webp" alt="3" width="1280" height="720"/></p>
<p>इसका मतलब यह हुआ कि राजा रघुवंशी हत्या मामले में मेघालय पुलिस ने सोनम पर जो धारा लगाई, वह अस्तित्व में ही नहीं है। अब जब यह धारा अस्तित्व में ही नहीं है, तो अदालत को कैसे पता चलेगा कि पुलिस ने सोनम को किस अपराध में गिरफ्तार किया था? और जब पुलिस खुद ही नहीं जानती, तो वह सोनम को कैसे बताएगी कि उसे किस अपराध में गिरफ्तार किया गया है? ये शब्द मेघालय हाईकोर्ट के हैं, जिसने सोनम को जमानत दी थी। अगर आपको अभी भी पूरी कहानी समझ में नहीं आ रही है, तो आइए इसे आसान शब्दों में समझते हैं।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/4.webp" alt="4" width="1280" height="720"/></p>
<p>पिछले साल मई महीने में राजा रघुवंशी की हत्या के बाद मेघालय पुलिस ने सोनम सहित 5 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें 3 सुपारी किलर थे और एक सोनम का प्रेमी था। इसके बाद मेघालय पुलिस ने अदालत में चार्जशीट दाखिल की, जिसमें सोनम को अपने ही पति की हत्या का मुख्य आरोपी बनाया गया। चार्जशीट दाखिल होने के बाद मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई। सुनवाई शुरू होते ही सोनम ने शिलांग की निचली अदालत में जमानत के लिए आवेदन किया। यहीं से पूरा मामला बदल गया।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/7.webp" alt="7" width="1280" height="720"/></p>
<p>दरअसल, 1 जुलाई 2024 से ब्रिटिश काल से चले आ रहे CrPC और IPC में बड़े बदलाव किए गए। सिर्फ उनके नाम ही नहीं बदले गए, बल्कि कई धाराएं भी हटाई गईं या उन्हें मिलाकर नई धाराएं बनाई गईं। भारतीय दंड संहिता (IPC) की जगह अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू कर दी गई। इस BNS के तहत देश में होने वाले सभी अपराधों को कुल 358 धाराओं में शामिल किया गया।</p>
<p>BNS के तहत देश में होने वाले हर प्रकार के अपराध के लिए कुल 358 धाराएं ही हैं। अब यह साफ है कि आजादी के बाद से चली आ रही IPC की धाराओं की जगह BNS और उसकी नई धाराओं ने ले ली है। ऐसे में सिर्फ आम लोगों को ही नहीं, बल्कि पुलिस और कानून लागू करने वाली एजेंसियों को भी इन्हें समझने और याद रखने में दिक्कत हो रही है। उदाहरण के तौर पर पहले IPC की धारा 300 का मतलब हत्या और धारा 302 का मतलब हत्या की सजा होता था। BNS में धारा 300 की जगह धारा 101 आ गई है। अब 101 का मतलब हत्या है। जबकि BNS में 302 की जगह नई धारा 103 बनाई गई है। धारा 103 हत्या की सजा का प्रावधान बताती है।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/8.webp" alt="8" width="1280" height="720"/></p>
<p>सोनम के मामले में गलती यह हुई कि मेघालय पुलिस ने BNS की धारा 103 की जगह धारा 403 लिख दी, जिसे हत्या की धारा बताया गया। जबकि BNS तो धारा 358 पर ही समाप्त हो जाती है, इसलिए यह साफ है कि कानून की किताब में धारा 403 का कोई अस्तित्व ही नहीं है। शिलांग की निचली अदालत ने इसी एक गलती को पकड़ लिया। अदालत ने कहा कि अगर धारा 403 अस्तित्व में ही नहीं है, तो वह कैसे जान सकती है कि सोनम को किस अपराध में गिरफ्तार किया गया था? इसका मतलब यह भी हुआ कि पुलिस ने सोनम को उसके अपराध की जानकारी भी नहीं दी होगी। इसलिए निचली अदालत ने इसी साल 27 अप्रैल को सोनम को जमानत दे दी।</p>
<p>स्वाभाविक रूप से, सोनम को जमानत मिलना सभी के लिए हैरानी की बात थी। मेघालय पुलिस भी चौंक गई। इसके बाद मेघालय पुलिस ने सोनम को जमानत देने के निचली अदालत के फैसले को मेघालय हाईकोर्ट में चुनौती दी। मेघालय हाईकोर्ट में लंबी बहस चली। उम्मीद की जा रही थी कि हाईकोर्ट निचली अदालत का फैसला पलट देगा और सोनम की जमानत रद्द कर देगा। लेकिन मेघालय हाईकोर्ट ने भी सभी को चौंका दिया।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/9.webp" alt="9" width="1280" height="720"/></p>
<p>मेघालय हाईकोर्ट ने भी सोनम के मामले में BNS की उसी धारा 403 वाली गलती को पकड़ लिया, जिसका कोई अस्तित्व ही नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि BNS की धारा 403, जो अस्तित्व में ही नहीं है, वह यह स्पष्ट नहीं करती कि सोनम के खिलाफ आरोप क्या हैं। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि गलत धारा लगाए जाने से ऐसा प्रतीत होता है कि शायद सोनम खुद भी नहीं जानती होगी, या फिर पुलिस ने भी उसे यह नहीं बताया होगा कि उसे किस अपराध के तहत गिरफ्तार किया गया है।</p>
<p>इसलिए निचली अदालत का फैसला सही है और सोनम जमानत पाने की हकदार है। 29 जून को मेघालय हाईकोर्ट ने इसी आधार पर सोनम की जमानत रद्द करने की मेघालय पुलिस की याचिका खारिज कर दी। अब सोचिए कि एक छोटी-सी कानूनी गलती ने सोनम को वह आजादी दे दी, जो शायद उसे वर्षों तक नहीं मिल पाती। जमानत पर रिहा होने के बाद सोनम शिलांग में रह रही है। सोनम को जमानत मिलने के बाद राजा रघुवंशी के माता-पिता भी हैरान हैं।</p>
<p>हालांकि, मेघालय पुलिस ने घोषणा की है कि वह अब देश की सर्वोच्च अदालत, सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करेगी। मेघालय पुलिस ने यह भी कहा है कि उनसे धारा लिखने में गलती हुई थी और बाद में उन्होंने अदालत के सामने इस गलती को स्वीकार भी कर लिया था। लेकिन मेघालय पुलिस का मानना है कि केवल इस एक गलती के कारण सोनम को जमानत मिल जाना उचित नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय </category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 12:14:39 +0530</pubDate>
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                <title>पिता का सपना था कि बेटा IAS बने, लेकिन बेटा फॉर्म भरना ही भूल गया; फिर उसने ऐसा क्या किया कि जेल पहुंच गया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>उदयपुर में एक युवक को UPSC परीक्षा देने के लिए नकली आईडी कार्ड का इस्तेमाल करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। आरोपी, जयेश जाट, को परीक्षा केंद्र में प्रवेश करते समय पुलिस ने पकड़ लिया। शहर के सूरजपोल पुलिस थाने में उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। हैरानी की बात यह है कि आरोपी किसी दूसरे उम्मीदवार की जगह परीक्षा देने नहीं आया था। यह डमी उम्मीदवार का मामला नहीं था, बल्कि पुलिस जांच में कुछ और ही सामने आया।</p>
<p>सूरजपोल पुलिस थाने के अधिकारी रतन सिंह ने बताया कि दूसरी शिफ्ट दोपहर 2:30 बजे से 4:30 बजे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/national/the-fathers-dream-was-that-his-son-should-become-an/article-2489"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/248.webp" alt=""></a><br /><p>उदयपुर में एक युवक को UPSC परीक्षा देने के लिए नकली आईडी कार्ड का इस्तेमाल करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। आरोपी, जयेश जाट, को परीक्षा केंद्र में प्रवेश करते समय पुलिस ने पकड़ लिया। शहर के सूरजपोल पुलिस थाने में उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। हैरानी की बात यह है कि आरोपी किसी दूसरे उम्मीदवार की जगह परीक्षा देने नहीं आया था। यह डमी उम्मीदवार का मामला नहीं था, बल्कि पुलिस जांच में कुछ और ही सामने आया।</p>
<p>सूरजपोल पुलिस थाने के अधिकारी रतन सिंह ने बताया कि दूसरी शिफ्ट दोपहर 2:30 बजे से 4:30 बजे तक आयोजित की गई थी। जयेश भी शहर के फतेह उच्च माध्यमिक विद्यालय में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था। उसके प्रवेश पत्र पर मौजूद बारकोड स्कैन नहीं हो पाया, जिसके बाद वह पकड़ा गया। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर तलाशी ली। अधिकारी ने यह भी बताया कि आरोपी नशे का आदी है। तलाशी के दौरान उसकी जेब से एक ग्राम अफीम बरामद हुई।</p>
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bhaskar.com

<p>शुरुआत में शक था कि उम्मीदवार किसी दूसरे युवक की जगह डमी उम्मीदवार बनकर परीक्षा देने आया था। हालांकि, यह संदेह जल्द ही दूर हो गया। पुलिस पूछताछ के दौरान युवक ने खुलासा किया कि इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी करने के बाद उसने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की थी। वह UPSC आवेदन फॉर्म भरना भूल गया था क्योंकि अंतिम तिथि निकल चुकी थी। लेकिन डर के कारण उसने अपने पिता को इस बारे में नहीं बताया। उसने झूठ बोल दिया कि उसका परीक्षा केंद्र उदयपुर में आया है और वह परीक्षा देने वहां पहुंच गया।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/2611.webp" alt="2611" width="1280" height="720"/>
bhaskar.com

<p>जब उसके पिता भी उसके साथ जाने पर अड़ गए, तब स्थिति और बिगड़ गई। अपने झूठ को छिपाने के लिए जयेश ने अपने मोबाइल फोन की मदद से नकली प्रवेश पत्र तैयार किया और अपने पिता के साथ परीक्षा देने पहुंच गया। पहली पाली में वह अपने पिता से बचने में सफल रहा, लेकिन दूसरी पाली में उसके पिता उसके ठीक पीछे खड़े रहे। यहीं वह पकड़ा गया, क्योंकि अपने झूठ को सच साबित करने के लिए वह परीक्षा केंद्र तक पहुंच गया था। केंद्र में प्रवेश करते ही पुलिस ने उसे पकड़ लिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय </category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 21:07:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका में पुजारी कितना कमाते हैं? जानिए एक पूजा के लिए उन्हें कितने डॉलर मिलते हैं</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अमेरिका में रहने वाले भारतीय समुदाय में धार्मिक परंपराओं और धार्मिक अनुष्ठानों को आज भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है जितना भारत में। यही कारण है कि मंदिरों और धार्मिक कार्यक्रमों में पंडितों की मांग लगातार बढ़ रही है। कई लोगों के मन में यह सवाल भी आता है कि अमेरिका में पूजा कराने वाले पंडित कितनी कमाई करते हैं और वे वहां कैसे पहुंचते हैं।</p>
<p>दरअसल, अमेरिका में पंडितों को किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के लिए काफी बड़ी फीस मिलती है। उदाहरण के तौर पर, भगवान सत्यनारायण की कथा और पूजा कराने के लिए आमतौर पर 300 डॉलर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/world/how-much-do-priests-earn-in-america-know-how-many/article-2486"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/hindu-priests-america1.webp" alt=""></a><br /><p>अमेरिका में रहने वाले भारतीय समुदाय में धार्मिक परंपराओं और धार्मिक अनुष्ठानों को आज भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है जितना भारत में। यही कारण है कि मंदिरों और धार्मिक कार्यक्रमों में पंडितों की मांग लगातार बढ़ रही है। कई लोगों के मन में यह सवाल भी आता है कि अमेरिका में पूजा कराने वाले पंडित कितनी कमाई करते हैं और वे वहां कैसे पहुंचते हैं।</p>
<p>दरअसल, अमेरिका में पंडितों को किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के लिए काफी बड़ी फीस मिलती है। उदाहरण के तौर पर, भगवान सत्यनारायण की कथा और पूजा कराने के लिए आमतौर पर 300 डॉलर से 350 डॉलर के बीच शुल्क लिया जाता है। इसके अलावा, कई मंदिरों में पूजा कराने के लिए 100 डॉलर से 150 डॉलर तक का मंदिर शुल्क अलग से देना पड़ सकता है। श्रद्धालु अपनी पूजा सामग्री (फल, फूल, प्रसाद, कलश आदि) स्वयं ला सकते हैं, या फिर पंडित अथवा मंदिर प्रबंधन अतिरिक्त शुल्क लेकर इसकी व्यवस्था भी कर देता है।</p>
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hindi.news18.com

<p>जब अमेरिका में रहने वाले भारतीय नई कार, नया घर खरीदते हैं या नया व्यवसाय शुरू करते हैं, तो वे शुभ शुरुआत के लिए पूजा करवाना पसंद करते हैं। नई कार की पूजा, गृह प्रवेश, नामकरण संस्कार, विवाह, मुंडन संस्कार और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पंडितों को अलग-अलग शुल्क दिया जाता है। गृह प्रवेश पूजा जैसे धार्मिक अनुष्ठानों का खर्च कभी-कभी सैकड़ों डॉलर तक हो सकता है। वहीं विवाह जैसे बड़े कार्यक्रमों के लिए यह शुल्क इससे भी अधिक हो सकता है।</p>
<p>नवरात्रि, श्रावण, जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी, राम नवमी और दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान अमेरिका में पुजारियों की मांग काफी बढ़ जाती है। इस समय मंदिरों में विशेष पूजा, हवन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। पंडितों को अक्सर एक ही दिन में कई कार्यक्रमों में शामिल होना पड़ता है। बढ़ते भारतीय समुदाय के कारण धार्मिक सेवाओं की आवश्यकता भी बढ़ रही है, जिसके चलते कई मंदिरों और धार्मिक संस्थाओं को प्रशिक्षित पुजारियों की जरूरत पड़ती है।</p>
<p>पंडित आमतौर पर R-1 वीज़ा पर धार्मिक सेवाएं देने के लिए अमेरिका जाते हैं। यह वीज़ा उन लोगों के लिए बनाया गया है जो किसी मान्यता प्राप्त धार्मिक संगठन के लिए धार्मिक सेवाएं देने या धार्मिक कर्तव्यों का पालन करने के उद्देश्य से संयुक्त राज्य अमेरिका की यात्रा करते हैं। R-1 वीज़ा प्राप्त करने के लिए आवेदक को यह साबित करना आवश्यक होता है कि वे किसी धार्मिक संगठन से जुड़े हुए हैं और उनके पास पर्याप्त धार्मिक शिक्षा, प्रशिक्षण तथा अनुभव है। कई मामलों में, संबंधित धार्मिक संगठन या मंदिर को यह भी साबित करना पड़ता है कि उन्हें उस व्यक्ति की सेवाओं की आवश्यकता है।</p>
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hindi.news18.com

<p>धार्मिक सेवाओं के लिए यात्रा करने वाले लोगों को अपनी योग्यता और प्रशिक्षण की पुष्टि करने वाले दस्तावेज़ जमा करने होते हैं। कई संस्थाएं उम्मीदवार के ज्ञान, संस्कृत उच्चारण, वेदपाठ, धार्मिक अनुष्ठानों और धार्मिक प्रक्रियाओं की भी जांच करती हैं। इसके बाद वीज़ा प्रक्रिया पूरी की जाती है। हालांकि, यह प्रक्रिया प्रत्येक संस्था और परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। अमेरिका जाने वाले पुजारियों के लिए धार्मिक ज्ञान के साथ-साथ अंग्रेज़ी का ज्ञान और स्थानीय संस्कृति की समझ भी लाभदायक साबित होती है।</p>
<p>कमाई इस बात पर निर्भर करती है कि वे किसी मंदिर में कार्यरत हैं या स्वतंत्र रूप से सेवाएं देते हैं। बड़े शहरों और अधिक भारतीय आबादी वाले क्षेत्रों में नियमित पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों के कारण उनकी आय काफी अधिक हो सकती है। कई पुजारी मंदिर से मिलने वाले वेतन के अलावा निजी पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों से भी अतिरिक्त आय अर्जित करते हैं।</p>
<p>संयुक्त राज्य अमेरिका में भारतीय समुदाय के बीच धार्मिक परंपराओं को बनाए रखने में पंडित महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सत्यनारायण कथा से लेकर गृह प्रवेश, विवाह और त्योहारों तक, उनकी सेवाओं की काफी मांग रहती है। R-1 वीज़ा पर अमेरिका आने वाले ये पंडित अपने धार्मिक ज्ञान और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से भारतीय प्रवासियों को उनकी संस्कृति और परंपराओं से जोड़े रखने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विश्व</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 19:30:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चाइल्ड इन्वेस्टमेंट अकाउंट में ताइवान सरकार बच्चों के लिए निवेश खाते खोलेगी, सरकार खुद 5,000 डॉलर जमा करेगी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>ताइवान सरकार ने एक बड़ी घोषणा की है कि 6 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए निवेश खाते खोले जाएंगे। ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने इस नीति पैकेज की घोषणा की है। इस योजना के तहत सरकार प्रत्येक बच्चे को मासिक 5,000 ताइवानी डॉलर (लगभग 15,000 भारतीय रुपये) का भत्ता देगी। आइए जानते हैं कि आखिर ताइवान सरकार को ऐसा निर्णय क्यों लेना पड़ा।</p>
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aajtak.in

<p>एक समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, यह पहल राष्ट्रपति लाई चिंग-ते और उनके प्रशासन द्वारा बुधवार को घोषित 18-सूत्रीय नीति पैकेज का एक हिस्सा है। इसका उद्देश्य ताइवान में घटती</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/world/taiwan-government-will-open-investment-accounts-for-children-in-child/article-2485"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/taiwan-child-investment-plan.webp" alt=""></a><br /><p>ताइवान सरकार ने एक बड़ी घोषणा की है कि 6 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए निवेश खाते खोले जाएंगे। ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने इस नीति पैकेज की घोषणा की है। इस योजना के तहत सरकार प्रत्येक बच्चे को मासिक 5,000 ताइवानी डॉलर (लगभग 15,000 भारतीय रुपये) का भत्ता देगी। आइए जानते हैं कि आखिर ताइवान सरकार को ऐसा निर्णय क्यों लेना पड़ा।</p>
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aajtak.in

<p>एक समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, यह पहल राष्ट्रपति लाई चिंग-ते और उनके प्रशासन द्वारा बुधवार को घोषित 18-सूत्रीय नीति पैकेज का एक हिस्सा है। इसका उद्देश्य ताइवान में घटती जन्म दर पर नियंत्रण पाकर परिवारों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। हालांकि, अब तक ताइवान में बचत खाते केवल निम्न और मध्यम वर्ग के परिवारों के बच्चों के लिए ही उपलब्ध थे, लेकिन नए कार्यक्रम के तहत यह सुविधा 18 वर्ष से कम आयु के सभी बच्चों तक विस्तारित कर दी गई है।</p>
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<p>ताइवान सरकार की चाइल्ड इन्वेस्टमेंट अकाउंट योजना के तहत, 18 वर्ष से कम आयु के नाबालिगों को मासिक 5,000 नए ताइवानी डॉलर (ताइवान मासिक बाल भत्ता) का बाल भत्ता मिलेगा। रिपोर्ट के अनुसार, 6 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए खोले जाने वाले निवेश खातों में 2,500 ताइवानी डॉलर सीधे जमा किए जाएंगे, और यह प्रक्रिया स्वतः होगी।</p>
<p>सरकार इन निवेश खातों के संचालन के लिए पेशेवर लोगों की नियुक्ति करेगी, जिनकी निगरानी फंड मैनेजरों द्वारा की जाएगी। इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि ये खाते दो वर्ष की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर मिलने वाली ब्याज दरों के बराबर गारंटीकृत ब्याज दर प्रदान करेंगे, जो बच्चों के भविष्य के लिए लाभदायक होगी।</p>
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<p>ताइवान में घटती जन्म दर सरकार के लिए एक बड़ी चिंता बनती जा रही है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में देश की प्रजनन दर केवल 0.86 थी, जिससे ताइवान दुनिया के सबसे कम प्रजनन दर वाले देशों में शामिल हो सकता है। राष्ट्रपति द्वारा की गई घोषणा के अनुसार, यह चाइल्ड इन्वेस्टमेंट अकाउंट योजना नवंबर 2026 में होने वाले चुनावों से पहले लागू की जाएगी।</p>
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taipeitimes.com

<p>भारत में भी ऐसी योजनाएं शुरू करने को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि, सुकन्या समृद्धि योजना और सार्वजनिक भविष्य निधि (PPF) जैसी बचत योजनाएं पहले से मौजूद हैं, लेकिन सरकार द्वारा सीधे निवेश पर आधारित बाल निधि मॉडल अभी तक व्यापक रूप से लागू नहीं किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत जैसे बड़े देश में बच्चों के भविष्य के लिए ऐसे मॉडल को लागू किया जाए, तो यह मध्यम वर्ग और निम्न-मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए एक बड़ा सहारा साबित हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विश्व</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 17:43:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कच्चे तेल की कीमतें आधी हो गईं, फिर भी सरकार पेट्रोल-डीज़ल के दाम क्यों नहीं घटा रही? निजी कंपनी ने भी कीमतें कम कीं!</title>
                                    <description><![CDATA[<p>1 जुलाई को भारत की सबसे बड़ी निजी रिटेलर, नायरा एनर्जी ने पेट्रोल की कीमत में ₹5 और डीज़ल की कीमत में ₹3 की कटौती की। दूसरी ओर, भारत की सरकारी तेल कंपनियों ने वाणिज्यिक गैस सिलेंडर की कीमत में ₹183 की कमी की। खाड़ी युद्ध शुरू होने के बाद तेल और गैस की कीमतों में यह पहली राहत थी। हालांकि, यह राहत सीमित थी, क्योंकि सरकारी तेल कंपनियों, जिनका घरेलू गैस सिलेंडर बाज़ार और देश के स्थानीय बाज़ार में 90 प्रतिशत हिस्सा है, ने पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें कम नहीं कीं। इसका मतलब यह हुआ कि 90 प्रतिशत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/business/crude-oil-prices-halved-still-why-is-the-government-not/article-2490"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/petrol-diesel-price.webp" alt=""></a><br /><p>1 जुलाई को भारत की सबसे बड़ी निजी रिटेलर, नायरा एनर्जी ने पेट्रोल की कीमत में ₹5 और डीज़ल की कीमत में ₹3 की कटौती की। दूसरी ओर, भारत की सरकारी तेल कंपनियों ने वाणिज्यिक गैस सिलेंडर की कीमत में ₹183 की कमी की। खाड़ी युद्ध शुरू होने के बाद तेल और गैस की कीमतों में यह पहली राहत थी। हालांकि, यह राहत सीमित थी, क्योंकि सरकारी तेल कंपनियों, जिनका घरेलू गैस सिलेंडर बाज़ार और देश के स्थानीय बाज़ार में 90 प्रतिशत हिस्सा है, ने पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें कम नहीं कीं। इसका मतलब यह हुआ कि 90 प्रतिशत पेट्रोल पंप अभी भी बढ़ी हुई कीमतों पर पेट्रोल और डीज़ल बेचेंगे। सवाल यह है कि तेल कंपनियाँ पेट्रोल और डीज़ल के दाम कब कम करेंगी?</p>
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jagran.com

<p>भारत की कई बड़ी तेल कंपनियां, जैसे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), ONGC, हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL), और भारत पेट्रोलियम (BPCL) ने अभी तक पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें कम नहीं की हैं। ये कंपनियां भारत के 90 प्रतिशत बाज़ार को नियंत्रित करती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर से घटकर 70 डॉलर से 73 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। ईरान युद्ध के बाद पहली बार भारत का क्रूड बास्केट भी 68.86 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया है। अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद यह पहली बार है जब कच्चा तेल इस स्तर पर पहुँचा है। यह कीमत 23 मार्च को दर्ज किए गए 157.04 डॉलर प्रति बैरल के सर्वकालिक उच्च स्तर से 56 प्रतिशत से भी अधिक कम है, लेकिन फिलहाल पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में कमी की उम्मीद नहीं है।</p>
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<p>कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत के आयात बिल में कमी आई है और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम हुआ है। सरकार का राजकोषीय घाटा भी कम हुआ है। लेकिन, यदि आप उम्मीद कर रहे हैं कि पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें घटाकर आम लोगों को राहत मिलेगी, तो इसके लिए आपको थोड़ा और इंतज़ार करना होगा। सरकार और तेल कंपनियां फिलहाल अपने नुकसान की भरपाई करने में लगी हुई हैं। वे अपने नुकसान की भरपाई करने के बाद ही ग्राहकों को यह राहत देंगी।</p>
<p>हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद होने के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर तक पहुंच गईं और शिपिंग लागत बढ़ गई, जिससे तेल कंपनियों को बहुत बड़ा नुकसान हुआ। उन्हें पेट्रोल पर प्रति लीटर लगभग ₹5.5 और डीज़ल पर प्रति लीटर ₹4.5 की अंडर-रिकवरी का सामना करना पड़ा। LPG सिलेंडरों के कारण प्रति सिलेंडर ₹650 से ₹720 तक का नुकसान हुआ। तेल कंपनियों पर बोझ कम करने के लिए सरकार ने पेट्रोल और डीज़ल पर विशेष उत्पाद शुल्क (एक्साइज़ ड्यूटी) में ₹10 की कटौती की, जिसके परिणामस्वरूप चालू वित्तीय वर्ष में सरकारी खजाने पर लगभग ₹30,000 करोड़ का सीधा बोझ पड़ा। अब जब वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें घट गई हैं, तो सरकार और सरकारी स्वामित्व वाली तेल कंपनियाँ इस नुकसान की भरपाई कर रही हैं।</p>
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jagran.com

<p>रेडोक्यू के CEO दीपल दत्ता का मानना है कि सस्ता कच्चा तेल निश्चित रूप से भारत की अर्थव्यवस्था को राहत देगा, लेकिन यह राहत तुरंत आम जनता तक नहीं पहुँचेगी। सरकारी स्वामित्व वाली तेल विपणन कंपनियां (OMCs) पहले अपने पिछले नुकसान की भरपाई करेंगी और अपने मुनाफे को मज़बूत करेंगी। आम जनता को राहत देने से पहले तेल कंपनियां फिलहाल अपनी वित्तीय स्थिति को मज़बूत बनाने को प्राथमिकता दे रही हैं। इसलिए, आने वाले दिनों या हफ्तों में भारत में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में कमी आने की संभावना कम है। इसके अलावा, भू-राजनीतिक तनाव अभी भी बना हुआ है और ऊर्जा एक संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर से बढ़ सकता है। इस अनिश्चितता को देखते हुए तेल कंपनियां पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में जल्दबाज़ी में कटौती करने से बच रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 15:49:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में हर रोज हो रहे चौंकाने वाले खुलासे, आमजन भी सुनकर हैरान, अब मिला ‘रामराज्य कोष’ वाला संदूक</title>
                                    <description><![CDATA[<p>राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले नए खुलासे हो रहे हैं। इस पूरे खेल की कड़ी एसआईटी सुलझाने में लगी हुई है। लोग भी अब जानने को इच्छुक हैं कि चढ़ावा चोरी के पीछे किन-किन लोगों का हाथ है। इस बीच जेल में बंद मुख्य आरोपियों में शामिल अविनाश शुक्ला से जुड़े एक नए खुलासे ने जांच को नया मोड़ दिया है। पुलिस ने अयोध्या स्थित उसके योग केंद्र से एक संदूक बरामद किया है, जिस पर लाल रंग से 'रामराज्य कोष' लिखा हुआ था। संदूक पर पेटीएम का QR कोड</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/religion-astrology/common-people-are-also-surprised-to-hear-the-shocking-revelations/article-2488"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/1.jpg" alt=""></a><br /><p>राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले नए खुलासे हो रहे हैं। इस पूरे खेल की कड़ी एसआईटी सुलझाने में लगी हुई है। लोग भी अब जानने को इच्छुक हैं कि चढ़ावा चोरी के पीछे किन-किन लोगों का हाथ है। इस बीच जेल में बंद मुख्य आरोपियों में शामिल अविनाश शुक्ला से जुड़े एक नए खुलासे ने जांच को नया मोड़ दिया है। पुलिस ने अयोध्या स्थित उसके योग केंद्र से एक संदूक बरामद किया है, जिस पर लाल रंग से 'रामराज्य कोष' लिखा हुआ था। संदूक पर पेटीएम का QR कोड भी चिपका मिला। इस कार्रवाई का वीडियो सामने आने के बाद हंगामा मच गया है। बताया जा रहा है कि इसी परिसर से पहले दान गबन से जुड़े करीब पांच लाख रुपये भी बरामद किए गए थे।</p>
<p>मामले की जांच कर रही एसआईटी (SIT) को अब 15 दिन का अतिरिक्त समय दिया गया है। वहीं, एसआईटी ने फैजाबाद जेल पहुंचकर मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों से पूछताछ की। इनमें सबसे लंबी पूछताछ अविनाश शुक्ला से हुई। करीब दो घंटे चली पूछताछ में उससे 5 जून को बरामद 20 लाख रुपये नकद और आभूषणों के संबंध में विस्तार से सवाल किए गए।</p>
<p>अविनाश शुक्ला प्रतापगढ़ जिले का रहने वाला है। पुलिस इससे पहले उसके पैतृक घर पर भी छापेमारी कर चुकी है। जांच में सामने आया है कि वह राम मंदिर के नाम पर इस्तेमाल होने वाले दान बक्से में ही कथित गबन की रकम रखता था। पुलिस ने 5 जून की शाम करीब 7:30 बजे अयोध्या में उसके किराए के मकान पर छापा मारकर 20 लाख रुपये नकद बरामद किए थे। इसी कार्रवाई में कुछ आभूषण भी मिले थे।</p>
<p><strong>अविनाश शुक्ला डेढ़ साल पहले ही अयोध्या आया था</strong></p>
<p>जानकारी के अनुसार, अविनाश करीब डेढ़ साल पहले अयोध्या आया था। वह अपने बड़े भाई अभिषेक शुक्ला के साथ श्याम साधनालय में रहता था। बताया जाता है कि अभिषेक ने ही उसकी राम मंदिर ट्रस्ट में नौकरी लगवाने में मदद की थी। जांच एजेंसियों का कहना है कि अविनाश मंदिर के निमित्त दान में इस्तेमाल होने वाले बक्से में कथित गबन की रकम छिपाकर रखता था। 5 जून को बरामद किए गए 20 लाख रुपये से अधिक की नकदी इसी तरह के एक दान बक्से से मिलने की बात सामने आई थी।</p>
<p><strong>जांच के दायरे में अब मंदिर में तैनात 400 निजी सुरक्षाकर्मी भी</strong></p>
<p>जांच का दायरा अब राम मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था तक भी पहुंच गया है। मंदिर में तैनात करीब 400 निजी सुरक्षाकर्मियों की ड्यूटी, रोस्टर, सीसीटीवी फुटेज और एंट्री-एग्जिट रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, मंदिर की सुरक्षा का जिम्मा जिस निजी सुरक्षा कंपनी के पास था, वह बिहार के एक पूर्व सांसद से जुड़ी बताई जा रही है। ट्रस्ट इस सुरक्षा व्यवस्था पर हर महीने लगभग एक करोड़ रुपये खर्च करता था, यानी सालाना करीब 12 करोड़ रुपये निजी सुरक्षा पर खर्च किए जा रहे थे।</p>
<p><strong>पूरे मामले की रिपोर्ट अब आरएसएस प्रमुख भागवत तक पहुंची</strong></p>
<p>उधर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत को भी पूरे मामले की रिपोर्ट भेजी गई है। यह रिपोर्ट पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र प्रचारक अनिल कुमार ने तैयार की है। बताया गया है कि संघ प्रमुख के निर्देश पर उन्होंने अयोध्या में तीन दिन तक रहकर मंदिर की व्यवस्थाओं, ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और चढ़ावा गबन प्रकरण का अध्ययन किया। सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में पूरे घटनाक्रम का विस्तृत विवरण शामिल किया गया है। 6 जुलाई को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की प्रस्तावित बैठक में इस रिपोर्ट के आधार पर महत्वपूर्ण फैसले लिए जाने की संभावना जताई जा रही है।</p>
<p><strong>अविनाश शांत रहता था, कभी उसके व्यवहार से किसी को शक नहीं हुआ</strong></p>
<p>योग केंद्र में कार्यरत शिवसुंदर लाल ने बताया कि अभिषेक शुक्ला पिछले लगभग दस वर्षों से संस्थान से जुड़ा हुआ था और गुरुजी के समय से सेवा कार्य करता था। करीब डेढ़ साल पहले उसका भाई अविनाश भी वहीं रहने आ गया था। उन्होंने कहा कि जब पता चला कि अविनाश की नौकरी राम मंदिर में लग गई है तो सभी लोग खुश थे। वह रोज समय पर ड्यूटी के लिए जाता था और शाम को लौट आता था। उसका व्यवहार सामान्य और शांत था, इसलिए किसी को उस पर कभी संदेह नहीं हुआ।</p>
<p>शिवसुंदर लाल ने बताया कि 5 जून को पुलिस जब योग केंद्र पहुंची और तलाशी के दौरान वहां से पैसों से भरे बैग बरामद होने की बात सामने आई तो सभी लोग हैरान रह गए। घटना सार्वजनिक होने के बाद संस्थान ने अगले ही दिन उसके परिवार से साफ कह दिया कि वे वहां से दूसरी जगह रहने की व्यवस्था कर लें। उन्होंने कहा कि जो भी दोषी है, उसे कानून के अनुसार कड़ी सजा मिलनी चाहिए और संस्थान जांच में पूरा सहयोग कर रहा है।</p>
<p><strong>अविनाश और उसके भाई ने गांव में बनाया नया पक्का मकान</strong></p>
<p>प्रतापगढ़ जिले के महेशगंज थाना क्षेत्र के बाबूपुर नारियावा गांव के रहने वाले अविनाश शुक्ला के परिवार के बारे में भी नई जानकारी सामने आई है। उसके पिता राम सजीवन शुक्ला किसान हैं। गांव वालों के अनुसार परिवार का पुराना मकान कच्चा है, जहां माता-पिता रहते हैं। हालांकि कुछ महीने पहले अविनाश और उसके भाई अभिषेक ने गांव में नया पक्का मकान बनवाया था। दोनों भाई गांव आने पर उसी नए मकान में ठहरते थे।</p>
<p><strong>चंपत राय से तीन घंटे तक पूछताछ, आरएमओ का भी तबादला</strong></p>
<p>इस मामले में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से भी पुलिस लगभग तीन घंटे तक पूछताछ कर चुकी है। उनसे पूछा गया कि चढ़ावा गबन की जानकारी उन्हें पहली बार कब मिली और उसके बाद उन्होंने क्या कदम उठाए। वहीं, कोर्ट ने गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों की न्यायिक हिरासत 14 दिन के लिए बढ़ा दी है। जांच के दौरान एक और प्रशासनिक कार्रवाई भी हुई है। राम मंदिर में पिछले 17 वर्षों से तैनात रेडियो ऑपरेशन अधिकारी (RMO) अर्जुन देव का तबादला गोरखपुर कर दिया गया है। एसआईटी उनकी भूमिका की भी जांच कर रही है। मंदिर परिसर में लगे करीब 1600 सीसीटीवी कैमरों और चढ़ावे की गिनती वाले काउंटिंग रूम की निगरानी की जिम्मेदारी उनके पास थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 13:52:19 +0530</pubDate>
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                <title> पश्चिम बंगाल: क्या ममता बनर्जी का 36 साल पुराना रिकॉर्ड फिर होगा ताज़ा? आखिर क्या था 1990 का वो किस्सा जो आज बन गया हथियार?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर पथराव और अंडे फेंकने की घटना के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। TMC इसे राजनीतिक हमला बताते हुए इसे संगठनात्मक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है। ममता बनर्जी खुद अस्पताल गई थीं और इस घटना को गंभीरता से लेते हुए विपक्ष पर हमला बोला था। लेकिन सवाल यह है कि क्या 36 साल पहले हाजरा मोड़ के पास अपनी बुआ ममता बनर्जी पर हुए हमले की तरह अभिषेक भी इस घटना का इस्तेमाल अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाने के लिए कर पाएंगे?</p>
<p>दरअसल, 1990 में कांग्रेस</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/%C2%A0%E0%A4%AA%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%AE-%E0%A4%AC%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%B2--%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A4%AE%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-36-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%89%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A1-%E0%A4%AB%E0%A4%BF%E0%A4%B0-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A5%9B%E0%A4%BE--%E0%A4%86%E0%A4%96%E0%A4%BF%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%A5%E0%A4%BE-1990-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A5%8B-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A5%8B-%E0%A4%86%E0%A4%9C-%E0%A4%AC%E0%A4%A8-%E0%A4%97%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A4%A5%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B0/article-2487"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/001.webp" alt=""></a><br /><p>तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर पथराव और अंडे फेंकने की घटना के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। TMC इसे राजनीतिक हमला बताते हुए इसे संगठनात्मक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है। ममता बनर्जी खुद अस्पताल गई थीं और इस घटना को गंभीरता से लेते हुए विपक्ष पर हमला बोला था। लेकिन सवाल यह है कि क्या 36 साल पहले हाजरा मोड़ के पास अपनी बुआ ममता बनर्जी पर हुए हमले की तरह अभिषेक भी इस घटना का इस्तेमाल अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाने के लिए कर पाएंगे?</p>
<p>दरअसल, 1990 में कांग्रेस की नेता के रूप में आंदोलन कर रहीं युवा ममता बनर्जी पर कोलकाता के हाजरा मोड़ के पास हमला किया गया था। उस घटना ने उन्हें सत्ता के खिलाफ डटकर मुकाबला करने वाली एक बेहद आक्रामक नेता की पहचान दिलाई थी। उस हमले की तस्वीरें आज भी TMC कार्यालय की दीवारों पर इस तरह लगी हैं कि हर किसी की नजर उन पर पड़े। इस हमले के बाद कांग्रेस से समर्थन न मिलने पर ममता अलग हो गईं और तृणमूल कांग्रेस का गठन किया, और आगे का इतिहास सबके सामने है। व्यक्तिगत चोट को राजनीतिक लाभ में बदलने की यह रणनीति ममता बनर्जी के राजनीतिक करियर का अहम हिस्सा रही है। 2021 के विधानसभा चुनाव में व्हीलचेयर पर प्रचार करना और BJP पर जानलेवा हमले का आरोप लगाना भी उनके लिए प्रभावी साबित हुआ था।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/0239.webp" alt="0239" width="1280" height="720"/></p>
<p>ऐसी खबर है कि शनिवार की घटना के बाद TMC इस बार भी वही फॉर्मूला आजमाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक इसे 1990 जितना आसान नहीं मानते। इसकी वजह भी साफ है...</p>
<p>सत्ता में रहने के बाद संघर्ष की छवि बनाना मुश्किल: कुछ समय पहले तक ममता बनर्जी मुख्यमंत्री थीं और TMC डेढ़ दशक से राज्य की सत्ता में थी। अब विपक्षी नेता की तरह सड़क पर संघर्ष करने वाली छवि बनाना लोगों को विश्वसनीय नहीं लगता।</p>
<p>अभिषेक की छवि अलग है: ममता बनर्जी ने आंदोलनों और जनसंघर्षों के जरिए अपनी पहचान बनाई, जबकि विपक्ष लगातार अभिषेक बनर्जी पर वंशवाद की राजनीति, परिवारवाद और भ्रष्टाचार के आरोप लगाता रहा है। इन आरोपों ने उनकी सार्वजनिक छवि को काफी नुकसान पहुंचाया है। उन्हें अक्सर घमंडी व्यक्ति के रूप में देखा जाता है, जिसके कारण 1990 जैसी जनसहानुभूति फिर से हासिल करना चुनौतीपूर्ण लगता है।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/0335.webp" alt="0335" width="1280" height="720"/></p>
<p>राजनीतिक परिदृश्य बदल चुका है: 1990 में बंगाल की राजनीति कांग्रेस और वाम मोर्चे के बीच द्विध्रुवीय थी। तीसरे विकल्प के लिए जगह थी, जिसका फायदा ममता बनर्जी ने उठाया। 2026 में BJP एक मजबूत राष्ट्रीय पार्टी के रूप में प्रभावशाली मौजूदगी रखती है, जिसके पास संसाधन और संगठन दोनों हैं। वामपंथी दल अब पहले जितने प्रभावशाली नहीं रहे हैं।</p>
<p>ममता बनर्जी अभिषेक बनर्जी को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी स्थापित करने की कोशिश कर रही हैं। अस्पताल जाकर उन्होंने इस घटना का इस्तेमाल पार्टी के भविष्य के नेतृत्व पर चर्चा को आगे बढ़ाने के लिए करने की कोशिश की है। INDIA ब्लॉक के समर्थन के साथ वे इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाना चाहती हैं। लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि अभिषेक, ममता नहीं हैं, और 2026 का बंगाल अब 1990 के बंगाल जैसा बिल्कुल नहीं रहा है।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/0513.webp" alt="0513" width="1280" height="720"/></p>
<p>दूसरी ओर, BJP ने पहले ही इस तुलना को खारिज कर दिया है और इसे TMC की पुरानी चाल बताया है। अब देखना यह है कि बंगाल के लोग इस 'हमले की राजनीति' पर कितना भरोसा करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 13:08:50 +0530</pubDate>
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                <title>वैभव सूर्यवंशी का डेब्यू क्यों अटका? जानिए क्या है वजह</title>
                                    <description><![CDATA[<p>776 रन... 72 छक्के... 230 से अधिक का स्ट्राइक रेट... IPL का सबसे बड़ा स्टार... फिर भी, भारतीय टीम की जर्सी पहनने का इंतज़ार। अब सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि वैभव सूर्यवंशी कब डेब्यू करेगा, बल्कि अगर टीम मैनेजमेंट खुद मानता है कि यह युवा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए पूरी तरह तैयार है, तो उसे आखिर रोका क्यों जा रहा है?</p>
<p>आयरलैंड के खिलाफ 0-2 से शर्मनाक सीरीज़ हारने के बाद यह सवाल और बड़ा हो गया है। भारतीय टीम के सहायक कोच रयान टेन डोशेट ने साफ़ तौर पर कहा कि, वैभव अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/sports/why-vaibhav-suryavanshis-debut-got-stuck-know-the-reason/article-2484"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/2513.webp" alt=""></a><br /><p>776 रन... 72 छक्के... 230 से अधिक का स्ट्राइक रेट... IPL का सबसे बड़ा स्टार... फिर भी, भारतीय टीम की जर्सी पहनने का इंतज़ार। अब सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि वैभव सूर्यवंशी कब डेब्यू करेगा, बल्कि अगर टीम मैनेजमेंट खुद मानता है कि यह युवा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए पूरी तरह तैयार है, तो उसे आखिर रोका क्यों जा रहा है?</p>
<p>आयरलैंड के खिलाफ 0-2 से शर्मनाक सीरीज़ हारने के बाद यह सवाल और बड़ा हो गया है। भारतीय टीम के सहायक कोच रयान टेन डोशेट ने साफ़ तौर पर कहा कि, वैभव अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए पूरी तरह तैयार है। इसमें कोई संदेह नहीं है। लेकिन, उसे भी उसी प्रक्रिया का पालन करना होगा जिससे अन्य खिलाड़ी गुज़रे हैं।</p>
<p><strong>तैयार... लेकिन खेलेगा नहीं! यह कैसा तर्क है?</strong></p>
<p>क्रिकेट में आमतौर पर इसके केवल दो ही कारण होते हैं, या तो खिलाड़ी तैयार नहीं है, या फिर टीम में उसके लिए कोई जगह नहीं है। लेकिन यहां कहानी पूरी तरह अलग है। टीम मैनेजमेंट खुद कह रहा है कि वैभव तैयार है। दूसरी ओर, टीम लगातार मैच हार रही है। फिर भी, उसे मौका नहीं मिल रहा... ऐसे में स्वाभाविक रूप से सवाल उठता है कि आखिर बाधा कहां है?</p>
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x.com/KKRWeRule

<p>क्या यह सिर्फ 'प्रक्रिया' है? या टीम मैनेजमेंट अपने शुरुआती फैसले से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है? टेन डोशेट ने संजू सैमसन का बचाव भी किया। उन्होंने कहा कि संजू ने तीन महीने पहले भारत की T20 विश्व कप जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और टीम खिलाड़ियों को लगातार अवसर देना चाहती है। यह दलील सुनने में उचित लगती है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट सिर्फ अतीत के योगदान के आधार पर नहीं चल सकता।</p>
<p>हर सीरीज़ नए सवाल खड़े करती है। यदि प्रदर्शन लगातार गिर रहा हो और बेंच पर बैठा खिलाड़ी देश का सबसे चर्चित किशोर बल्लेबाज़ हो, तो चर्चा होना स्वाभाविक है। जब हार के बावजूद टीम नहीं बदले, तो सवाल कप्तान पर नहीं, बल्कि मानसिकता पर उठते हैं।</p>
<p>भारत आयरलैंड के खिलाफ सीरीज़ हार गया। दूसरी मैच सिर्फ एक रन से गंवा दी। ऐसे मैचों के बाद टीमें अक्सर प्रयोग करती हैं। फिर भी, भारत ने वैभव को बाहर रखा। यानी संदेश साफ़ था कि मौजूदा प्रदर्शन से ज़्यादा भरोसा स्थापित खिलाड़ियों पर है। यही फैसला अब आलोचकों के निशाने पर है।</p>
<p><strong>क्या 'प्रक्रिया' प्रति</strong><strong>भा से बड़ी हो गई है?</strong></p>
<p>हर खिलाड़ी को अपनी बारी का इंतज़ार करना चाहिए। यह सिद्धांत सही है। लेकिन हर सिद्धांत के कुछ अपवाद भी होते हैं। अगर 16 साल की उम्र में सचिन तेंदुलकर सिर्फ 'प्रक्रिया' का इंतज़ार करते, तो भारतीय क्रिकेट का इतिहास बहुत अलग होता। अगर 15 साल का बल्लेबाज़ IPL में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज़ों की धुनाई करते हुए 776 रन बना सकता है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि उसे खुद को साबित करने के लिए और क्या करना बाकी है?</p>
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x.com/ThePitchTalks

<p>अहंकार नहीं... लेकिन फैसले पर निश्चित रूप से सवाल उठाए जा सकते हैं। टीम मैनेजमेंट पर 'अहंकार' का सीधा आरोप लगाना जल्दबाज़ी होगी। हालांकि, यह कहना उचित है कि यह मुद्दा अब सिर्फ चयन का रह गया है। हर प्रेस कॉन्फ्रेंस में वैभव को लेकर सवाल पूछे जाते हैं; हर जवाब में उसी 'प्रक्रिया' का ज़िक्र किया जाता है; और हर मैच के बाद बहस और तेज़ हो जाती है। क्योंकि जब मैनेजमेंट खुद मानता है कि कोई खिलाड़ी तैयार है, तब उसे बार-बार बाहर बैठाना उसके फैसलों को सवालों के घेरे में ज़रूर खड़ा करता है।</p>
<p>अब इंग्लैंड दौरे पर सबकी नज़र रहेगी। भारत इंग्लैंड के खिलाफ T20 सीरीज़ खेलने के लिए तैयार है। अगर वहां भी वैभव सूर्यवंशी को मौका नहीं मिलता, तो 'प्रक्रिया' वाली दलील शायद और कमज़ोर पड़ जाएगी। क्योंकि तब सवाल सिर्फ यह नहीं रहेगा कि वैभव कब खेलेगा, बल्कि यह होगा: क्या भारतीय क्रिकेट में असाधारण प्रतिभा को भी सिर्फ अपनी बारी का इंतज़ार करना पड़ेगा? और अगर टीम मैनेजमेंट पहले ही मान चुका है कि खिलाड़ी तैयार है, तो उसके डेब्यू के रास्ते में आखिर क्या बाधा है, प्रक्रिया, रणनीति... या पहले से लिए गए फैसले को बदलने की अनिच्छा?</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category> खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 12:40:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>AG स्वयं सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, तत्काल सुनवाई की मांग... एथेनॉल को लेकर क्या अड़चन है?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करते हुए अटॉर्नी जनरल ने एथेनॉल आवंटन को लेकर कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ तत्काल सुनवाई की मांग की है। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने सुप्रीम कोर्ट की वेकेशन बेंच को जानकारी दी कि इस मामले पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है, नहीं तो हाई कोर्ट का फैसला राष्ट्रीय नीति को प्रभावित करेगा। वेंकटरमणि की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया।</p>
<p>कोर्ट ने कहा कि मामले को जल्द ही सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा, तब तक यथास्थिति बनाए रखना आवश्यक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/business/ag-himself-reached-the-supreme-court-demanding-immediate-hearing-what/article-2483"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/supreme-court.webp" alt=""></a><br /><p>केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करते हुए अटॉर्नी जनरल ने एथेनॉल आवंटन को लेकर कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ तत्काल सुनवाई की मांग की है। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने सुप्रीम कोर्ट की वेकेशन बेंच को जानकारी दी कि इस मामले पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है, नहीं तो हाई कोर्ट का फैसला राष्ट्रीय नीति को प्रभावित करेगा। वेंकटरमणि की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया।</p>
<p>कोर्ट ने कहा कि मामले को जल्द ही सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा, तब तक यथास्थिति बनाए रखना आवश्यक है। यह याचिका ऑयल रिफाइनरी कंपनियों की ओर से दायर की गई थी। इस याचिका में हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें तेल कंपनियों को VINP नामक कंपनी के लिए एथेनॉल आवंटन बढ़ाने का निर्देश दिया गया था।</p>
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facebook.com/SupremeCourtOfIndia

<p>पिछले सप्ताह, कर्नाटक हाई कोर्ट ने VINP की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि तेल कंपनियों को VINP से अधिक एथेनॉल खरीदना चाहिए, अर्थात उसके आवंटन को बढ़ाने की आवश्यकता है। कंपनी का कहना था कि उसकी एथेनॉल खरीद कम की जा रही है, जबकि वह एथेनॉल आपूर्ति के सभी मानकों पर खरी उतरती है।</p>
<p>हाई कोर्ट की कार्यवाही में केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता उपस्थित हुए थे। वहीं, एथेनॉल बेचने वाली कंपनी VINP ने इस मामले में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को प्रतिवादी बनाया है। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में OMCs को 99 मिलियन (9.9 करोड़) लीटर एथेनॉल खरीदने का निर्देश दिया था।</p>
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spinny.com

<p><strong>सुप्रीम कोर्ट में एजी ने क्या कहा?</strong></p>
<p>1. आर. वेंकटरमणि ने जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की पीठ को बताया कि तत्काल सुनवाई आवश्यक है क्योंकि यह फैसला एथेनॉल पर राष्ट्रीय नीति को प्रभावित करेगा।</p>
<p>2. वेंकटरमणि ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी कि एथेनॉल आवंटन प्रक्रिया अक्टूबर 2025 में पूरी हो गई थी। इस प्रक्रिया के तहत, 378 आपूर्तिकर्ताओं को कुल 1,050 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति के लिए आवंटन की सूचना दी गई थी। इनमें से, हमारे पास पहले ही 680 लीटर की आपूर्ति हो चुकी है।</p>
<p>3. वेंकटरमणि ने कोर्ट में कहा कि यदि एक कंपनी के लिए आवंटन बढ़ाया जाता है, तो दूसरी कंपनियां भी इस प्रकार के दावे करेंगी। इससे जो नीतियां बनाई गई हैं, वे टूट जाएंगी। यह राष्ट्रीय महत्व का मामला है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 21:27:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नागपुर: 'टोल वसूलने के बावजूद खराब सड़क देना 'सेवा में कमी' है...' NHAI को फटकार; कार मालिक को मिलेगा मुआवज़ा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र के नागपुर स्थित उपभोक्ता आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि टोल वसूलने के बावजूद खराब गुणवत्ता वाली सड़क उपलब्ध कराना 'सेवा में कमी' माना जाएगा। आयोग ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) को निर्देश दिया है कि सड़क पर गड्ढों के कारण वाहन चालक को हुए नुकसान का मुआवज़ा दिया जाए।</p>
<p>नागपुर उपभोक्ता आयोग ने इस महीने की शुरुआत में जारी एक आदेश में कहा था कि टोल वसूलने के साथ सुरक्षित और चलने योग्य सड़क उपलब्ध कराना टोल वसूलने वाली कंपनी या प्राधिकरण की जिम्मेदारी है। टोल वसूलने के बाद खराब सड़क उपलब्ध कराना</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/national/nhai-reprimanded-for-providing-bad-roads-despite-collecting-toll-lack/article-2482"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/nhai1.webp" alt=""></a><br /><p>महाराष्ट्र के नागपुर स्थित उपभोक्ता आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि टोल वसूलने के बावजूद खराब गुणवत्ता वाली सड़क उपलब्ध कराना 'सेवा में कमी' माना जाएगा। आयोग ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) को निर्देश दिया है कि सड़क पर गड्ढों के कारण वाहन चालक को हुए नुकसान का मुआवज़ा दिया जाए।</p>
<p>नागपुर उपभोक्ता आयोग ने इस महीने की शुरुआत में जारी एक आदेश में कहा था कि टोल वसूलने के साथ सुरक्षित और चलने योग्य सड़क उपलब्ध कराना टोल वसूलने वाली कंपनी या प्राधिकरण की जिम्मेदारी है। टोल वसूलने के बाद खराब सड़क उपलब्ध कराना सेवा में कमी है। आयोग ने NHAI की छिंदवाड़ा परियोजना कार्यान्वयन इकाई को शिकायतकर्ता को वाहन मरम्मत और टोल रिफंड के लिए ₹1,030 का भुगतान करने का आदेश दिया।</p>
<p>इसके अलावा, उपभोक्ता आयोग ने शिकायतकर्ता को हुई मानसिक और शारीरिक पीड़ा के लिए ₹10,000 तथा मुकदमे के खर्च के लिए ₹5,000 देने का भी आदेश दिया। शिकायतकर्ता के अनुसार, वह 2 अक्टूबर, 2020 को नागपुर से मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जा रहा था और उसने निर्धारित टोल शुल्क का भुगतान किया था। यात्रा के दौरान उसकी कार एक गहरे और तेज गड्ढे से टकरा गई, जिससे स्टील व्हील रिम पूरी तरह मुड़ गई और टायर फट गया।</p>
<p>शिकायतकर्ता ने बताया कि उसे स्पेयर टायर के सहारे यात्रा पूरी करनी पड़ी और कार की मरम्मत कराने के लिए एक अतिरिक्त दिन रुकना पड़ा। उसने यह भी आरोप लगाया कि वापसी के दौरान टोल प्लाज़ा के कर्मचारियों ने शिकायत पुस्तिका देने से इनकार कर दिया और कहा कि संबंधित अधिकारी उपलब्ध नहीं हैं। शिकायतकर्ता ने शुरुआत में NHAI को केवल वाहन मरम्मत के खर्च का मुआवज़ा मांगते हुए नोटिस भेजा था, लेकिन उसका आरोप था कि अधिकारियों ने लोगों की शिकायतों को नज़रअंदाज़ करने की अपनी आदत के चलते उसकी शिकायत पर भी ध्यान नहीं दिया।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/nhai.webp" alt="nhai" width="1280" height="720"/>
news18.com

<p>इसके बाद उसने उपभोक्ता आयोग का रुख किया और NHAI पर सेवा में कमी का आरोप लगाते हुए मुआवज़े की मांग की। जवाब में NHAI की छिंदवाड़ा इकाई ने सड़क पर गड्ढे होने की बात स्वीकार की, लेकिन कहा कि भारी बारिश और अधिक यातायात के दबाव के कारण गड्ढे बने थे। प्राधिकरण ने यह भी बताया कि उस समय मरम्मत का कार्य चल रहा था। हालांकि, NHAI ने यह दलील भी दी कि शिकायतकर्ता ने वाहन के नियमित रखरखाव का कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया है, इसलिए शिकायत खारिज कर दी जानी चाहिए।</p>
<p>उपभोक्ता आयोग ने NHAI की इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत उपभोक्ता के लिए वाहन के नियमित रखरखाव का रिकॉर्ड प्रस्तुत करना कानूनी रूप से आवश्यक नहीं है। गड्ढों के कारण वाहन को नुकसान हुआ, यही पर्याप्त है। आयोग ने NHAI की छिंदवाड़ा परियोजना इकाई को सड़क के लिए पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया और NHAI तथा उसके नागपुर कार्यालय के खिलाफ शिकायत को खारिज कर दिया।</p>
<p>उपभोक्ता आयोग ने कहा कि टोल वसूली और सड़क के रखरखाव की प्राथमिक जिम्मेदारी NHAI की छिंदवाड़ा इकाई की है; इसलिए मुआवज़ा देने की जिम्मेदारी भी उसी की है। वसूले गए टोल के बदले सुरक्षित और अच्छी तरह से रखरखाव की गई सड़क उपलब्ध कराना संबंधित प्राधिकरण की जिम्मेदारी है। सड़क की खराब स्थिति के कारण वाहन को हुआ नुकसान सेवा में कमी है। आयोग ने NHAI को 45 दिनों के भीतर मुआवज़े की राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय </category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 20:28:54 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मध्य प्रदेश: मंत्री बनने के बाद नेता ही नहीं, परिवार के सदस्य भी नहीं कर सकते ये काम! जानिए सरकारी नियम</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="flex max-w-full flex-col gap-4 grow">
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<p>मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ज़मीन के सौदों को लेकर चर्चा में हैं। एक अंग्रेज़ी अख़बार ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार के सदस्यों ने सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए बड़े पैमाने पर ज़मीन खरीदी थी। इसके बाद मंत्रियों की संपत्ति से जुड़े नियमों पर चर्चा चल रही है। आइए देखते हैं कि मंत्री बनने के बाद राजनेताओं को किन नियमों का पालन करना चाहिए और अपने व्यवसाय में उन्हें किन सावधानियों का ध्यान रखना चाहिए।</p>
<p>सरकार की आचार संहिता के अनुसार, सभी राज्य मंत्रियों को हर वर्ष मुख्यमंत्री को और केंद्रीय</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/after-becoming-a-minister-not-only-the-leaders-but-even/article-2479"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/photo-(2)16.webp" alt=""></a><br /><div class="flex max-w-full flex-col gap-4 grow">
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<p>मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ज़मीन के सौदों को लेकर चर्चा में हैं। एक अंग्रेज़ी अख़बार ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार के सदस्यों ने सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए बड़े पैमाने पर ज़मीन खरीदी थी। इसके बाद मंत्रियों की संपत्ति से जुड़े नियमों पर चर्चा चल रही है। आइए देखते हैं कि मंत्री बनने के बाद राजनेताओं को किन नियमों का पालन करना चाहिए और अपने व्यवसाय में उन्हें किन सावधानियों का ध्यान रखना चाहिए।</p>
<p>सरकार की आचार संहिता के अनुसार, सभी राज्य मंत्रियों को हर वर्ष मुख्यमंत्री को और केंद्रीय मंत्रियों को प्रधानमंत्री को अपनी संपत्ति की जानकारी देना आवश्यक है। वहीं, मुख्यमंत्री को अपनी संपत्ति की जानकारी प्रधानमंत्री या गृह मंत्री को देना आवश्यक है। मंत्रियों को अचल संपत्ति, शेयर और डिबेंचर, नकद और आभूषणों का अनुमानित विवरण देना अनिवार्य है। इसके अलावा, मंत्री बनने के बाद उन्हें अपने व्यवसायों के संचालन और प्रबंधन से जुड़े सभी संबंध समाप्त कर देने चाहिए। जब तक वे मंत्री पद पर रहें, उन्हें हर वर्ष 31 अगस्त तक प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री को अपनी संपत्ति और पिछले वित्तीय वर्ष की देनदारियों की जानकारी देना अनिवार्य है।</p>
<p>मंत्री को अपने प्रबंधन में हिस्सेदारी भी हस्तांतरित करनी होगी, लेकिन उसे अपने जीवनसाथी के नाम नहीं करना चाहिए। किसी भी ऐसे व्यवसाय से स्वयं को अलग करना होगा जिसमें सरकार के साथ काम करना पड़ता हो, जैसे लाइसेंस, परमिट, लीज़, कोटा या टेंडर आदि।</p>
<p>इसके अलावा, उन्हें सरकार से किसी भी अचल संपत्ति की खरीद या बिक्री से दूर रहना होगा। यदि संपत्ति सामान्य प्रक्रिया के तहत प्राप्त की गई हो, तो वह अलग बात है। साथ ही, मंत्री बनने के बाद उन्हें कोई नया व्यवसाय शुरू करने या किसी नए व्यवसाय से जुड़ने से भी बचना होगा।</p>
<p>उनके परिवार के सदस्य भी ऐसा कोई व्यवसाय नहीं कर सकते जो सरकार या परमिट, लाइसेंस, लीज़ आदि से संबंधित हो। यदि परिवार का कोई सदस्य कोई नया व्यवसाय स्थापित करता है या उसके संचालन और प्रबंधन में भाग लेता है, तो मंत्री को इसकी जानकारी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को देनी होगी।</p>
<p>उन्हें किसी भी उद्देश्य के लिए, चाहे वह राजनीतिक हो, परोपकारी हो या कोई अन्य, स्वयं या अपने परिवार के किसी सदस्य के माध्यम से किसी भी प्रकार का योगदान (दान) स्वीकार नहीं करना चाहिए। यदि किसी पंजीकृत संस्था, परोपकारी संस्था, सार्वजनिक प्राधिकरण द्वारा मान्यता प्राप्त संस्था या राजनीतिक दल के लिए उन्हें कोई धनराशि या चेक दिया जाता है, तो उसे संबंधित संस्था को भेज देना चाहिए, जिसके उद्देश्य से वह राशि दी गई है। उन्हें किसी भी प्रकार की धन संग्रह गतिविधि में स्वयं को शामिल नहीं करना चाहिए।</p>
<p>इसके अलावा, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री और राज्य सरकार के मंत्री तथा उनके सहयोगी प्रधानमंत्री की अनुमति के बिना भारत या विदेश में किसी भी विदेशी सरकार या विदेशी संस्था के अधीन कार्य नहीं कर सकते। यदि ऐसा कोई संबंध पहले से मौजूद हो, तो उसका खुलासा करना चाहिए। किसी भी विदेशी मिशन में रोजगार पर सख्त प्रतिबंध होना चाहिए।</p>
<p>मंत्री को निकट संबंधियों से प्राप्त उपहारों को छोड़कर कोई भी मूल्यवान उपहार स्वीकार नहीं करना चाहिए। साथ ही, उनके परिवार के किसी भी सदस्य को भी ऐसे किसी व्यक्ति से उपहार स्वीकार नहीं करना चाहिए जिसका मंत्री के साथ आधिकारिक संबंध या लेन-देन हो। मंत्री या उनके परिवार के किसी भी सदस्य को ऐसी कोई ऋण नहीं लेना चाहिए और न ही लेने की अनुमति देनी चाहिए, जिससे उनके आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में असुविधा हो या पक्षपात की आशंका उत्पन्न हो।</p>
<p>मंत्री विदेश यात्रा पर हों या भारत में, वे विदेशी गणमान्य व्यक्तियों से उपहार प्राप्त कर सकते हैं। ऐसे उपहार दो श्रेणियों में आते हैं। पहली श्रेणी में वे उपहार शामिल हैं जो प्रतीकात्मक प्रकृति के होते हैं, जैसे तलवारें, पारंपरिक पोशाक आदि, जिन्हें वे अपने पास रख सकते हैं। दूसरी श्रेणी में वे उपहार शामिल हैं जो प्रतीकात्मक प्रकृति के नहीं होते। यदि ऐसे उपहार का मूल्य ₹5,000 से कम हो, तो मंत्री उसे अपने पास रख सकते हैं। यदि उसका मूल्य इससे अधिक हो, तो मंत्री को उसे सरकार को सौंपना होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://hindi.khabarchhe.com/politics/after-becoming-a-minister-not-only-the-leaders-but-even/article-2479</link>
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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 19:55:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'मैं 48 लाख कमाता हूं, वह 8 लाख... फिर भी मेरी गर्लफ्रेंड तेवर दिखाती है!' माइक्रोसॉफ्ट के इंजीनियर का छलका दर्द</title>
                                    <description><![CDATA[<p>कहा जाता है कि प्यार में अमीरी-गरीबी या पैसों का कोई महत्व नहीं होता; लेकिन जब व्यावहारिक जीवन और लिव-इन रिश्तों की बात आती है, तो हकीकत बिल्कुल अलग कहानी दिखाती है। माइक्रोसॉफ्ट के एक इंजीनियर का दर्द इन दिनों सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म 'ग्रेपवाइन' पर वायरल हो रहा है। इस टेक इंजीनियर का दावा है कि उसके और उसकी गर्लफ्रेंड की सैलरी में जमीन-आसमान का अंतर है, जो अब उनके खुशहाल रिश्ते को धीरे-धीरे दीमक की तरह खा रहा है। पैसों की वजह से होने वाले रोज़ के झगड़ों ने उनके प्यार को खत्म कर दिया है।</p>
<p>माइक्रोसॉफ्ट में सीनियर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/national/i-earn-48-lakhs-she-earns-8-lakhs-yet-my/article-2478"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/11.webp" alt=""></a><br /><p>कहा जाता है कि प्यार में अमीरी-गरीबी या पैसों का कोई महत्व नहीं होता; लेकिन जब व्यावहारिक जीवन और लिव-इन रिश्तों की बात आती है, तो हकीकत बिल्कुल अलग कहानी दिखाती है। माइक्रोसॉफ्ट के एक इंजीनियर का दर्द इन दिनों सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म 'ग्रेपवाइन' पर वायरल हो रहा है। इस टेक इंजीनियर का दावा है कि उसके और उसकी गर्लफ्रेंड की सैलरी में जमीन-आसमान का अंतर है, जो अब उनके खुशहाल रिश्ते को धीरे-धीरे दीमक की तरह खा रहा है। पैसों की वजह से होने वाले रोज़ के झगड़ों ने उनके प्यार को खत्म कर दिया है।</p>
<p>माइक्रोसॉफ्ट में सीनियर प्रोडक्ट डिज़ाइनर के रूप में काम करने वाले एक शख्स ने 'गूफीपांडा' नाम से ऑनलाइन पर अपनी कहानी साझा की है। उसने बताया कि इस साल की शुरुआत में उसने और उसकी गर्लफ्रेंड ने साथ रहने का फैसला किया। शुरुआत में सब कुछ बहुत परिपक्व और व्यवस्थित लग रहा था। दोनों ने मिलकर अपने ऑफिस के पास एक सुंदर फ्लैट किराए पर लिया और खुशी-खुशी साथ रहने लगे। लेकिन यह हनीमून पीरियड ज़्यादा समय तक टिक नहीं पाया।</p>
<p>टेक इंजीनियर ने बताया कि जब फ्लैट का किराया, भारी सिक्योरिटी डिपॉज़िट और किराने के असली बिल आने लगे, तब उसे आर्थिक असमानता का एहसास हुआ। टेक प्रोफेशनल की वार्षिक सैलरी ₹48 लाख (₹48 LPA) है, जबकि उसकी गर्लफ्रेंड की सैलरी केवल ₹8 लाख (₹8 LPA) है। इस बड़े अंतर को संभालने के लिए इंजीनियर ने अपने वरिष्ठ सहकर्मियों से सलाह भी ली और एक संयुक्त बैंक खाता खुलवाया। उसने ज़िम्मेदारी दिखाते हुए घर के कुल खर्च का 85 प्रतिशत हिस्सा खुद उठाना शुरू कर दिया, ताकि उसकी गर्लफ्रेंड पर बोझ न पड़े।</p>
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facebook.com/DKShivakumar.official

<p>इंजीनियर का कहना है कि वह किराए से लेकर जीवनशैली से जुड़े बड़े खर्चों तक सब कुछ संभाल रहा था, लेकिन हाल ही में आई एक परेशानी ने सब कुछ बदल दिया। इस हफ्ते उसकी कार खराब हो गई, जिसके मरम्मत का बिल बहुत ज़्यादा आया। जब उसने इस खर्च को साझा करने की बात कही, तो उसकी गर्लफ्रेंड नाराज़ हो गई और तुरंत रक्षात्मक रवैया अपना लिया। बात करने के बजाय उसने इस मुद्दे से बचना ही बेहतर समझा। इंजीनियर ने लिखा कि पैसों को लेकर होने वाली हर छोटी लड़ाई मेरे दिल में उसके लिए बची हुई भावनाओं को भी खत्म करती जा रही है।</p>
<p>यह पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया उपयोगकर्ता दो हिस्सों में बंट गए हैं। कुछ लोगों का कहना है कि अगर इंजीनियर उस युवती को अपना जीवनसाथी मानता है, तो उसे खुशी-खुशी खर्च का बड़ा हिस्सा उठाना चाहिए और लड़की के करियर के विकास में भी मदद करनी चाहिए। दूसरी ओर, कई उपयोगकर्ताओं का मानना है कि महिला का रवैया गलत है। अगर वह वास्तव में इस रिश्ते को लेकर गंभीर होती, तो पैसों की बात पर इस तरह मुंह नहीं छिपाती; बल्कि अपनी क्षमता के अनुसार जितना संभव हो, उतना योगदान देने की कोशिश करती।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय </category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 17:47:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आषाढ़ मास शुरू: कब से लगेगा मांगलिक कार्यों पर ब्रेक, यह चार महीने तक क्यों रहता है? जानिए इसके पीछे मुख्य कारण क्या है?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>आषाढ़ मास की शुरुआत हो चुकी है। इसी माह से चातुर्मास की शुरुआत भी हो जाएगी। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से इसकी शुरुआत होती है। यह 25 जुलाई को है। इसके बाद से मांगलिक कार्यों पर ब्रेक लग जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन से भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और देवउठनी एकादशी तक विश्राम करते हैं। इसलिए हिंदू धर्म में इन चार महीनों को पूजा-पाठ, जप, तप, व्रत, सत्संग और आत्मचिंतन का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इसलिए चातुर्मास की अवधि में विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन, सगाई और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/religion-astrology/when-will-the-month-of-ashadh-start-there-will-be/article-2481"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/123.jpg" alt=""></a><br /><p>आषाढ़ मास की शुरुआत हो चुकी है। इसी माह से चातुर्मास की शुरुआत भी हो जाएगी। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से इसकी शुरुआत होती है। यह 25 जुलाई को है। इसके बाद से मांगलिक कार्यों पर ब्रेक लग जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन से भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और देवउठनी एकादशी तक विश्राम करते हैं। इसलिए हिंदू धर्म में इन चार महीनों को पूजा-पाठ, जप, तप, व्रत, सत्संग और आत्मचिंतन का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इसलिए चातुर्मास की अवधि में विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन, सगाई और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। चातुर्मास 25 जुलाई से शुरू होकर 20 नवंबर तक रहेगा। </p>
<p>वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल एकादशी तिथि 24 जुलाई को सुबह 9:12 बजे से प्रारंभ होकर 25 जुलाई को सुबह 11:34 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी मनाई जाएगी और इसी दिन से चातुर्मास का आरंभ होगा। चार माह बाद कार्तिक शुक्ल एकादशी यानी देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु के जागरण के साथ चातुर्मास का समापन होगा। इस वर्ष देवउठनी एकादशी 20 नवंबर को है।</p>
<p>धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं। उनके विश्राम काल के दौरान देवी-देवताओं की सक्रियता भी कम मानी जाती है। इसलिए इस अवधि में नए शुभ और मांगलिक कार्यों को टालने की परंपरा है। देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु के जागने के बाद ही विवाह, गृहप्रवेश, यज्ञोपवीत, मुंडन और अन्य शुभ संस्कारों के लिए फिर से शुभ मुहूर्त शुरू होते हैं।</p>
<p><strong>चातुर्मास आत्मसंयम और आध्यात्मिक साधना का भी पर्व</strong></p>
<p>चातुर्मास केवल धार्मिक नियमों का समय नहीं, बल्कि आत्मसंयम और आध्यात्मिक साधना का भी पर्व माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु नियमित पूजा, मंत्र जाप, कथा श्रवण, दान-पुण्य और सेवा कार्यों में अधिक समय देते हैं। कई लोग चार महीने तक किसी एक भोजन का त्याग, उपवास या विशेष नियम का पालन करते हैं। संत-महात्मा भी इस अवधि में एक ही स्थान पर रहकर प्रवचन, सत्संग और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। प्राचीन समय में वर्षा ऋतु के कारण यात्रा कठिन होती थी, इसलिए साधु-संत एक स्थान पर ठहरकर लोगों को धर्म और अध्यात्म का संदेश देते थे। यही परंपरा आज भी चातुर्मास के रूप में निभाई जाती है।</p>
<p><strong>देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की विशेष पूजा</strong></p>
<p>देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा का विधान है। श्रद्धालु व्रत रखते हैं और भगवान को पीले वस्त्र, तुलसी दल, पंचामृत तथा मौसमी फल अर्पित करते हैं। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। शाम के समय तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाने और विष्णु सहस्रनाम या विष्णु मंत्र का जाप करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।</p>
<p><strong>चातुर्मास यानी जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का अवसर</strong></p>
<p>धर्मशास्त्रों में चातुर्मास को मन और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का अवसर माना गया है। इस दौरान क्रोध, लोभ और अहंकार जैसी बुराइयों से दूर रहने, सात्विक भोजन करने, संयमित जीवन अपनाने और अधिक से अधिक समय ईश्वर भक्ति में लगाने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इन चार महीनों में किए गए जप, तप, दान और सेवा का फल सामान्य दिनों की तुलना में अधिक प्राप्त होता है।</p>
<p><strong>देवउठनी एकादशी पर होगा चातुर्मास का समापन</strong></p>
<p>चातुर्मास का समापन देवउठनी एकादशी पर होता है। इस दिन भगवान विष्णु के जागरण के साथ ही मंदिरों और घरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इसके बाद विवाह सहित सभी मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त फिर से शुरू हो जाते हैं। यही कारण है कि हिंदू धर्म में चातुर्मास को केवल चार महीनों का धार्मिक काल नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम, सेवा और भक्ति का विशेष पर्व माना जाता है।</p>
<p><strong>भक्ति और ध्यान का महीना है आषाढ़ मास</strong></p>
<p>चातुर्मास की शुरुआत आषाढ़ मास में होती है, जिसे भक्ति और ध्यान का महीना माना जाता है। वर्षा ऋतु के आगमन के साथ प्रकृति में नई ऊर्जा का संचार होता है और धार्मिक दृष्टि से भी यह समय साधना के लिए अनुकूल माना जाता है। इसी महीने में योगिनी एकादशी, गुप्त नवरात्रि, देवशयनी एकादशी और गुरु पूर्णिमा जैसे महत्वपूर्ण पर्व आते हैं।</p>
<p><strong>आषाढ़ पूर्णिमा का विशेष म</strong><strong>हत्व क्यों हैं? जानिए</strong></p>
<p>आषाढ़ पूर्णिमा को मनाई जाने वाली गुरु पूर्णिमा इस वर्ष 29 जुलाई को होगी। इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। उन्होंने वेदों का संकलन किया तथा महाभारत और श्रीमद्भागवत जैसे महान ग्रंथों की रचना की। इस अवसर पर गुरु, शिक्षक और जीवन में मार्गदर्शन देने वाले व्यक्तियों का सम्मान किया जाता है। आश्रमों, मंदिरों और धार्मिक संस्थानों में विशेष पूजा, सत्संग और भंडारों का आयोजन होता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 14:03:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'अयोध्या में जो हुआ वह शर्मनाक', राम मंदिर दान चोरी विवाद के बीच VHP ने चंपत राय से बनाई दूरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अयोध्या में राम मंदिर में दान की चोरी को लेकर बढ़ते सवालों के बीच विश्व हिन्दू परिषद (VHP) ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रमुख चंपत राय से खुद को अलग कर लिया है। VHP ने अब चोरी की घटना की पूरी जांच की मांग की है। इंडिया टुडे को दिए गए इंटरव्यू में, VHP के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट के हालिया फैसलों के लिए संगठन कोई जिम्मेदारी नहीं लेता। उन्होंने स्पष्ट किया कि राम जन्मभूमि आंदोलन में VHP की भूमिका उसी समय समाप्त हो गई थी, जब उस स्थान पर मंदिर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/national/what-happened-in-ayodhya-was-shameful-vhp-distanced-itself-from/article-2480"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/champat-rai.webp" alt=""></a><br /><p>अयोध्या में राम मंदिर में दान की चोरी को लेकर बढ़ते सवालों के बीच विश्व हिन्दू परिषद (VHP) ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रमुख चंपत राय से खुद को अलग कर लिया है। VHP ने अब चोरी की घटना की पूरी जांच की मांग की है। इंडिया टुडे को दिए गए इंटरव्यू में, VHP के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट के हालिया फैसलों के लिए संगठन कोई जिम्मेदारी नहीं लेता। उन्होंने स्पष्ट किया कि राम जन्मभूमि आंदोलन में VHP की भूमिका उसी समय समाप्त हो गई थी, जब उस स्थान पर मंदिर बनाने का उद्देश्य पूरा हो गया था।</p>
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deccanherald.com

<p>आलोक कुमार ने कहा, हमारी भूमिका समाप्त हो गई है। देश में कहीं भी मंदिरों का निर्माण करना या उनका संचालन करना VHP का काम नहीं है। ट्रस्ट ही उसका संचालन करेगा, और ट्रस्ट में जो कुछ भी होगा, उसकी जिम्मेदारी भी ट्रस्ट की ही होगी। इन मामलों के लिए RSS या सरकार को जिम्मेदार ठहराना गलत होगा। उन्होंने आगे कहा, ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव के रूप में मैं चंपत राय के कार्यों से स्वयं को अलग कर रहा हूँ।’ यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के सबसे महत्वपूर्ण स्थलों में से एक की देखरेख करने वाले ट्रस्ट के कामकाज और श्रद्धालुओं के दान के उपयोग को लेकर जांच तेज हो गई है।</p>
<p>श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव बनने से पहले लंबे समय तक VHP से जुड़े रहे चंपत राय ने वित्तीय अनियमितताओं के बढ़ते आरोपों के बीच नैतिक आधार पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उल्लेखनीय है कि स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) द्वारा की गई प्रारंभिक जांच से बने दबाव के चलते ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने भी इस्तीफा दे दिया है।</p>
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dailypioneer.com

<p>संगठन के साथ चंपत राय के लंबे समय के जुड़ाव को लेकर उठे सवालों के बीच, आलोक कुमार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंदिर निर्माण का रास्ता साफ किए जाने के बाद से ट्रस्ट स्वतंत्र रूप से काम कर रहा है। अयोध्या में जो हुआ वह वास्तव में शर्मनाक और अपमानजनक है। दुनिया भर के हिन्दू, खासकर दान देने वाले कारसेवक और उनके परिवार इस घटना से बेहद दुखी हैं।</p>
<p>कुमार ने तर्क दिया कि मंदिर के प्रशासन की जिम्मेदारी ट्रस्ट की है, VHP की नहीं। राम जन्मभूमि पर फैसले के बाद संगठन के रुख को याद करते हुए उन्होंने कहा कि संगठन ने स्पष्ट रूप से कहा था कि वह न तो मंदिर का निर्माण करेगा और न ही उसका संचालन करेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय </category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 13:42:01 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार को HDFC बैंक ने दिया बड़ा पद</title>
                                    <description><![CDATA[<p>HDFC बैंक ने अपने चेयरमैन की नियुक्ति को लेकर बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेला है। बैंक के बोर्ड ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार को नया चेयरमैन नियुक्त करने की घोषणा की है, अब केवल भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मंज़ूरी बाकी है। एक नियामक फाइलिंग में HDFC बैंक ने बताया कि बोर्ड ने 30 जून, 2026 से प्रभावी चार वर्ष के कार्यकाल के लिए राजीव कुमार की स्वतंत्र निदेशक के रूप में नियुक्ति को मंज़ूरी दे दी है। बैंक ने कहा कि यह नियुक्ति RBI की मंज़ूरी के अधीन है। केंद्रीय बैंक से मंज़ूरी मिलने के बाद कुमार को तीन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/business/hdfc-bank-gave-big-post-to-former-chief-election-commissioner/article-2477"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/rajiv-kumar.webp" alt=""></a><br /><p>HDFC बैंक ने अपने चेयरमैन की नियुक्ति को लेकर बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेला है। बैंक के बोर्ड ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार को नया चेयरमैन नियुक्त करने की घोषणा की है, अब केवल भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मंज़ूरी बाकी है। एक नियामक फाइलिंग में HDFC बैंक ने बताया कि बोर्ड ने 30 जून, 2026 से प्रभावी चार वर्ष के कार्यकाल के लिए राजीव कुमार की स्वतंत्र निदेशक के रूप में नियुक्ति को मंज़ूरी दे दी है। बैंक ने कहा कि यह नियुक्ति RBI की मंज़ूरी के अधीन है। केंद्रीय बैंक से मंज़ूरी मिलने के बाद कुमार को तीन वर्ष के लिए बैंक का पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त किया जाएगा, जिसका कार्यकाल RBI की मंज़ूरी की तारीख से शुरू होगा। कुमार इससे पहले भारत के 25वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में सेवा दे चुके हैं।</p>
<p>पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार अतनु चक्रवर्ती का स्थान लेंगे, जिन्होंने मार्च में नैतिक चिंताओं का हवाला देते हुए अचानक इस्तीफ़ा दे दिया था। बैंक ने कहा कि वित्तीय सेवा विभाग के सचिव के रूप में अपने कार्यकाल (2017-2020) के दौरान राजीव कुमार ने ऐसे समय में कार्यभार संभाला था जब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कई चुनौतियों का सामना कर रहे थे। इनमें बड़ी मात्रा में छिपी हुई गैर-निष्पादित परिसंपत्तियाँ (NPA), पूंजी की कमी और इक्विटी एवं ऋण के दुरुपयोग जैसे मुद्दे शामिल थे। बैंक ने कहा कि मजबूत नीति निर्माण और उसके प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से कुमार ने बैंकों की बैलेंस शीट को साफ़ और मज़बूत बनाने का कार्य किया।</p>
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navbharattimes.indiatimes.com

<p>उन्होंने NPA की स्पष्ट पहचान और उनके लिए आवश्यक प्रावधान करना अनिवार्य बनाया, साथ ही दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) के तहत उधारकर्ताओं की जवाबदेही भी सुनिश्चित की। एक्सचेंज फाइलिंग में बैंक ने बताया कि 1984 बैच के पूर्व IAS अधिकारी और भारत के पूर्व वित्त सचिव (फ़रवरी 2020) 66 वर्षीय कुमार को 30 जून, 2026 से प्रभावी चार वर्षों के लिए अतिरिक्त निदेशक (स्वतंत्र) के रूप में भी नियुक्त किया गया है। इस बीच, HDFC बैंक के प्रबंध निदेशक (MD) और CEO शशिधर जगदीशन का वर्तमान कार्यकाल 26 अक्टूबर, 2026 को समाप्त होने वाला है। उन्होंने 27 अक्टूबर, 2020 को यह पद संभाला था। RBI ने 2023 में उनके वर्तमान तीन वर्षीय कार्यकाल (27 अक्टूबर, 2023 से 26 अक्टूबर, 2026 तक) को मंज़ूरी दी थी। उम्मीद की जा रही है कि बोर्ड RBI की मंज़ूरी के अधीन MD और CEO के रूप में तीसरे कार्यकाल के लिए जगदीशन के नाम की सिफारिश करेगा। बाहरी कानूनी समीक्षा के कारण रुकी हुई पुनर्नियुक्ति प्रक्रिया अब आगे बढ़ सकती है क्योंकि कानूनी फर्मों ने बैंक को क्लीन चिट देते हुए अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।</p>
<p>कुमार ने कुछ समय के लिए पब्लिक एंटरप्राइज़ सेलेक्शन बोर्ड (PESB) के चेयरमैन के रूप में भी सेवा दी थी। उन्होंने 2017 से 2020 तक वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव के रूप में कार्यभार संभाला, जब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कई चुनौतियों का सामना कर रहे थे। इनमें बड़ी मात्रा में छिपी हुई गैर-निष्पादित परिसंपत्तियाँ (NPA), पूंजी की कमी, नए ऋण वितरण में बाधाएँ तथा नए ऋणों के लिए इक्विटी और कर्ज़ का दुरुपयोग (जैसे 'गोल्ड-प्लेटिंग' और धन का डायवर्जन) शामिल थे। यह क्षेत्र बड़े ऋण कंसोर्टियम, नोटबंदी के बाद माइक्रो-क्रेडिट की मांग पूरी करने के लिए संघर्ष कर रही NBFCs और धोखाधड़ी वाली पोंजी योजनाओं से जुड़े प्रशासनिक मुद्दों का भी सामना कर रहा था।</p>
<p>DFS में शामिल होने के केवल दो सप्ताह के भीतर लगभग 3.38 लाख शेल कंपनियों (डमी फर्मों) के खाते फ्रीज़ कर दिए गए थे। इसके बाद, 'अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध' कानून, 2019 लागू करके पोंजी योजनाओं पर अंकुश लगाया गया। मजबूत नीति निर्माण और प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की बैलेंस शीट के स्वास्थ्य को बहाल करने का कार्य किया। इसके लिए उन्होंने गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) की पारदर्शी पहचान और उनके लिए प्रावधान करना अनिवार्य बनाया तथा दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता के तहत उधारकर्ताओं की जवाबदेही स्थापित की।</p>
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rajiv kumar

<p>उन्होंने देश की वित्तीय संरचना को आकार देने वाली कई प्रमुख संस्थाओं का नेतृत्व किया, जिनमें रिज़र्व बैंक का केंद्रीय बोर्ड, वित्तीय स्थिरता एवं विकास परिषद, वित्तीय क्षेत्र के नियामकीय पदों के लिए सर्च कमेटी, मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (सचिव के रूप में), पब्लिक एंटरप्राइज़ सेलेक्शन बोर्ड, बैंक बोर्ड ब्यूरो तथा SBI और NABARD के बोर्ड शामिल हैं। वे केंद्रीय बैंक के आर्थिक पूंजी ढाँचे पर विशेषज्ञ समिति और नीति आयोग के पुनर्गठन पर समिति के सदस्य भी रहे हैं।</p>
<p>कुमार ने बैंकिंग क्षेत्र को साफ़-सुथरा बनाने के लिए कई कदम उठाए—जैसे अवैध वित्तीय गतिविधियों पर कड़ी कार्रवाई, सहकारी बैंकों की नियामकीय निगरानी को मज़बूत करना और बड़े डिफॉल्ट मामलों में जवाबदेही लागू करना। ₹50 करोड़ और उससे अधिक के ऋण के लिए पासपोर्ट विवरण देना अनिवार्य कर दिया गया, ताकि बड़े उधारकर्ता किसी कार्रवाई से पहले देश छोड़कर भाग न सकें।</p>
<p>धोखाधड़ी की जांच, ₹250 करोड़ से अधिक के ऋणों पर निगरानी बढ़ाना और 34 से अधिक कारकों पर आधारित IT-संचालित जोखिम स्कोरिंग जैसे उपायों ने उन कमजोर संकेतों और ढीले नियंत्रणों की जगह ली, जो अक्सर बड़े बैंकिंग कंसोर्टियम (कभी-कभी 25 बैंकों तक को शामिल करने वाले) की ऋण प्रक्रिया की विशेषता थे। ऋणदाता-उधारकर्ता संबंध को पूरी तरह से फिर से परिभाषित किया गया, जिसमें स्पष्ट संदेश दिया गया कि ऋण विवेकपूर्ण ढंग से दिए जाने चाहिए और उधारकर्ताओं का उन्हें चुकाना अनिवार्य है।</p>
<p>इस परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) का पुनर्पूंजीकरण था, जिसमें ₹3 लाख करोड़ से अधिक का निवेश शामिल था, ताकि उनकी वित्तीय मजबूती और ऋण देने की क्षमता को फिर से बहाल किया जा सके। इसके साथ ही, एक बड़े विलय अभियान के तहत 27 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को मिलाकर 12 मज़बूत संस्थानों में परिवर्तित किया गया। साथ ही, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) का पुनर्गठन करके उन्हें अधिक कुशल 'एक राज्य–एक RRB' ढाँचे में लाया गया। उन्होंने PSB विलय की इस पूरी प्रक्रिया का नेतृत्व किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://hindi.khabarchhe.com/business/hdfc-bank-gave-big-post-to-former-chief-election-commissioner/article-2477</link>
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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 12:43:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपी ने बनवाया ₹25 लाख का मकान, लेकिन आय सिर्फ ₹12,000</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="isSelectedEnd">जैसे-जैसे अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की जांच आगे बढ़ रही है, गिरफ्तार आरोपियों में शामिल लवकुश मिश्रा की संपत्तियों को लेकर नए खुलासे हो रहे हैं। जांच में सामने आया है कि मंदिर ट्रस्ट में नौकरी मिलने के कुछ ही समय बाद उसने लाखों रुपये की जमीन खरीदी और उस पर मकान बनवाना शुरू कर दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">दस्तावेजों के अनुसार, यह जमीन लवकुश मिश्रा की पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम पर खरीदी गई थी। बताया जा रहा है कि लवकुश करीब एक साल पहले राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े थे।</p>
<p>यह प्लॉट अयोध्या-लखनऊ हाईवे के पास</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/national/accused-of-theft-of-ram-temple-offering-built-a-house/article-2476"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/luv-kush-mishra.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">जैसे-जैसे अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की जांच आगे बढ़ रही है, गिरफ्तार आरोपियों में शामिल लवकुश मिश्रा की संपत्तियों को लेकर नए खुलासे हो रहे हैं। जांच में सामने आया है कि मंदिर ट्रस्ट में नौकरी मिलने के कुछ ही समय बाद उसने लाखों रुपये की जमीन खरीदी और उस पर मकान बनवाना शुरू कर दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">दस्तावेजों के अनुसार, यह जमीन लवकुश मिश्रा की पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम पर खरीदी गई थी। बताया जा रहा है कि लवकुश करीब एक साल पहले राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े थे।</p>
<p>यह प्लॉट अयोध्या-लखनऊ हाईवे के पास सहादतगंज-बनबीरपुर इलाके में स्थित है। रजिस्ट्री में इसकी कीमत 8.8 लाख रुपये दर्ज है, जबकि मौजूदा बाजार मूल्य और निर्माणाधीन मकान की कुल कीमत करीब 25 लाख रुपये आंकी जा रही है। जांच एजेंसियां अब लवकुश मिश्रा के वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों की पड़ताल कर रही हैं, क्योंकि ये उनकी आय के मुकाबले असामान्य मानी जा रही हैं l</p>
<p>करीब <strong>1,000 वर्गफुट</strong> के इस प्लॉट पर <strong>दो मंजिला मकान</strong> बनाया जा रहा है। मकान का अधिकांश निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और फिलहाल उसमें <strong>बिजली फिटिंग (इलेक्ट्रिफिकेशन)</strong> का काम चल रहा है</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/pxmloddjg-qjxvzz.jpg" alt="pxmlodDJg-QJxvzZ" width="1200" height="675"/></p>
<p>इलाके के स्थानीय लोगों ने <strong>इंडिया टुडे</strong> को बताया कि मकान का निर्माण <strong>पिछले साल फरवरी</strong> में शुरू हुआ था। उनका कहना है कि निर्माण के शुरुआती दिनों में लवकुश मिश्रा और उनके परिवार के सदस्य अक्सर निर्माण स्थल पर आते थे। काम शुरू होने से पहले आयोजित <strong>भूमि पूजन</strong> में भी पूरा परिवार शामिल हुआ था।</p>
<p class="isSelectedEnd">पड़ोसी राजकुमार पांडेय ने बताया कि यह मकान लवकुश मिश्रा के परिवार का है। उन्होंने कहा, "निर्माण कार्य पिछले साल फरवरी के आसपास शुरू हुआ था। लवकुश यहां अक्सर आया करते थे और समय-समय पर उनसे मुलाकात भी हो जाती थी।"</p>
<p class="isSelectedEnd">स्थानीय लोगों के मुताबिक, कुछ दिन पहले तक यहां मजदूर काम कर रहे थे। लेकिन जैसे ही राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला सामने आया और लवकुश मिश्रा की गिरफ्तारी की खबर फैली, निर्माण कार्य अचानक बंद हो गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">एक स्थानीय निवासी ने बताया, "दो-तीन दिन पहले तक मजदूर यहां काम कर रहे थे, लेकिन रविवार के बाद से न तो कोई मजदूर दिखा और न ही परिवार का कोई सदस्य।"</p>
<p class="isSelectedEnd">इस पूरे मामले ने इलाके में चर्चा का विषय बना दिया है। लोगों का कहना है कि राम मंदिर ट्रस्ट में काम करने के दौरान लवकुश मिश्रा की मासिक सैलरी सिर्फ 12 से 15 हजार रुपये बताई जाती थी।</p>
<p class="isSelectedEnd">पड़ोसियों के अनुसार, लवकुश और उनका परिवार बेहद साधारण जीवन जीता था। वे आमतौर पर मोटरसाइकिल से आते-जाते थे और उनके रहन-सहन से कभी नहीं लगा कि उनके पास इतनी बड़ी संपत्ति हो सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा, "उनकी जीवनशैली देखकर कभी नहीं लगा कि उनके पास इतना पैसा होगा। इतना बड़ा मकान कैसे बन गया, इसका जवाब वही दे सकते हैं।"</p>
<p class="isSelectedEnd"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/luv-kush-3.jpg" alt="LUV kush 3" width="1280" height="720"/></p>
<p class="isSelectedEnd">27 वर्षीय लवकुश मिश्रा राम मंदिर में चढ़ावे और नकदी की गिनती करने वाली टीम का हिस्सा था। पुलिस इस मामले में उसे और अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। हाल ही में उसके घर पर छापेमारी के दौरान करीब 12 लाख रुपये नकद भी बरामद किए गए थे।</p>
<p>हाल ही में अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे के गबन का मामला सामने आया है। आरोप है कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए नकद और आभूषणों में कम से कम 7 करोड़ रुपये के गबन की आशंका है, जबकि कुछ दावों में यह रकम इससे भी अधिक बताई जा रही है। मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। अब तक इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और करीब 80 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं। इस विवाद के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में भी बड़े बदलाव हुए हैं। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय </category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 21:30:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>वैभव को मौका नहीं मिला, गावस्कर-कैफ ने टीम मैनेजमेंट पर उठाए सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>आयरलैंड दौरे पर वैभव सूर्यवंशी को डेब्यू का मौका नहीं मिला। टीम मैनेजमेंट का कहना है कि वह मौजूदा विश्व विजेता टीम में कोई बदलाव नहीं करना चाहता था। हालांकि, इस फैसले पर पूर्व क्रिकेटरों ने सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि टीम मैनेजमेंट सभी खिलाड़ियों के साथ एक जैसी नीति नहीं अपना रहा। पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने BCCI पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया, जबकि सुनील गावस्कर ने भी वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में शामिल किए जाने का समर्थन किया l</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>वैभव को डेब्यू दिलाने के पक्ष में थे मोहम्मद कैफ</strong></p>
<p>टीम इंडिया के असिस्टेंट</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/sports/vaibhav-did-not-get-a-chance-gavaskar-kaif-raised-questions-on/article-2475"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/6201715953049997711.jpg" alt=""></a><br /><p>आयरलैंड दौरे पर वैभव सूर्यवंशी को डेब्यू का मौका नहीं मिला। टीम मैनेजमेंट का कहना है कि वह मौजूदा विश्व विजेता टीम में कोई बदलाव नहीं करना चाहता था। हालांकि, इस फैसले पर पूर्व क्रिकेटरों ने सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि टीम मैनेजमेंट सभी खिलाड़ियों के साथ एक जैसी नीति नहीं अपना रहा। पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने BCCI पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया, जबकि सुनील गावस्कर ने भी वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में शामिल किए जाने का समर्थन किया l</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>वैभव को डेब्यू दिलाने के पक्ष में थे मोहम्मद कैफ</strong></p>
<p>टीम इंडिया के असिस्टेंट कोच रेयान टेन डोएशे ने कहा था कि वैभव सूर्यवंशी एक ओपनर हैं और टीम फिलहाल अपनी मौजूदा ओपनिंग जोड़ी—संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा के साथ ही आगे बढ़ना चाहती है। हालांकि, सीरीज में दोनों बल्लेबाज उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सके। ऐसे में पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद कैफ का मानना है कि इन दोनों में से किसी एक की जगह वैभव सूर्यवंशी को मौका दिया जाना चाहिए था।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/images.jpg" alt="images" width="739" height="415"/>
criczine.cricdiction.com

<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><span><strong>कैफ ने BCCI की रणनीति पर उठाए सवाल</strong></span></p>
<p>अपने यूट्यूब चैनल पर मोहम्मद कैफ ने कहा कि अगर टीम की सबसे मजबूत प्लेइंग इलेवन चुनी जाए, तो उसमें वैभव सूर्यवंशी की जगह बनती है।</p>
<p>कैफ के मुताबिक, टीम मैनेजमेंट का कहना है कि वह खिलाड़ियों को लगातार मौके देना चाहता है, लेकिन हर बार इसी नीति पर अमल नहीं किया जाता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि चैंपियंस ट्रॉफी जीतने के बाद रोहित शर्मा को कप्तानी से हटाते समय युवा नेतृत्व की बात कही गई थी। इसी तरह टी20 वर्ल्ड कप के बाद भी भविष्य को ध्यान में रखने की दलील दी गई थी।</p>
<p>कैफ ने सवाल उठाया कि अगर टीम वास्तव में भविष्य की तैयारी कर रही है, तो फिर वैभव सूर्यवंशी को मौका क्यों नहीं दिया गया? उनके मुताबिक, 15 साल की उम्र में वैभव जैसी प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय अनुभव देना टीम के भविष्य के लिए फायदेमंद होता।</p>
<p><span><strong>गावस्कर भी डेब्यू के पक्ष में</strong></span></p>
<p>सुनील गावस्कर ने भी आयरलैंड दौरे पर वैभव सूर्यवंशी को मौका दिए जाने की वकालत की। उनका मानना था कि टीम दोनों मैचों में अपनी ओपनिंग जोड़ी में बदलाव कर सकती थी।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/1746126224642_sunil-gavaskar-and-vaibhav-suryavanshi.jpeg" alt="1746126224642_Sunil-Gavaskar-and-Vaibhav-Suryavanshi" width="960" height="600"/>
crictracker.com

<p>गावस्कर ने कहा कि एक मैच में अभिषेक शर्मा और दूसरे में संजू सैमसन को आराम देकर वैभव को डेब्यू का मौका दिया जा सकता था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वैभव के खेलने से जीत की गारंटी नहीं होती—संभव है कि वह 10-15 रन बनाकर आउट हो जाते—लेकिन उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अनुभव जरूर मिलता।</p>
<p>गावस्कर के अनुसार, युवा खिलाड़ियों को समय-समय पर आजमाना जरूरी है, ताकि भविष्य के लिए टीम की मजबूत तैयारी हो सके।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category> खेल</category>
                                    

                <link>https://hindi.khabarchhe.com/sports/vaibhav-did-not-get-a-chance-gavaskar-kaif-raised-questions-on/article-2475</link>
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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 20:30:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जमीन बेचकर राम मंदिर को दिया ₹1 करोड़ का चंदा, अब हो रहा अफ़सोस</title>
                                    <description><![CDATA[<p>उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के निवासी सियाराम उमरवैश्य ने 2018 में राम मंदिर के निर्माण के लिए 1 करोड़ रुपये का चंदा दिया था, इससे पहले वो 2018 में चर्चा में आये थे, जब उन्होंने मंदिर निर्माण के लिए 1 करोड़ रुपये दान करने का एलान किया था. अब चढ़ावा चोरी के आरोपों के बिच सोशल मीडिया पर उनका एक बयान वायरल हो रहा है. उनका कहना है की राम मंदिर का निर्माण हो रहा है, इसी उम्मीद से उन्होंने अपनी जमीन बेची और चंदा दिया, लेकिन चढ़ावा चोरी की खबर सामने आने के बाद उन्हें पछतावा हो रहा है</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/national/donated-%E2%82%B91-crore-to-ram-temple-by-selling-land-now/article-2474"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/siyaram-case.jpg" alt=""></a><br /><p>उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के निवासी सियाराम उमरवैश्य ने 2018 में राम मंदिर के निर्माण के लिए 1 करोड़ रुपये का चंदा दिया था, इससे पहले वो 2018 में चर्चा में आये थे, जब उन्होंने मंदिर निर्माण के लिए 1 करोड़ रुपये दान करने का एलान किया था. अब चढ़ावा चोरी के आरोपों के बिच सोशल मीडिया पर उनका एक बयान वायरल हो रहा है. उनका कहना है की राम मंदिर का निर्माण हो रहा है, इसी उम्मीद से उन्होंने अपनी जमीन बेची और चंदा दिया, लेकिन चढ़ावा चोरी की खबर सामने आने के बाद उन्हें पछतावा हो रहा है </p>
<p>उमरवैश्य का कहना है की 'मैंने तो यही सोचकर अपनी जमीन बेची कि वह भगवान राम के काम आए। जिंदगी का कोई भरोसा नहीं, इसलिए जीते-जी कुछ अच्छा कर जाना चाहता था l</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/siyaram-case-2-image.jpg" alt="Siyaram case 2 image" width="1280" height="720"/>
msn.com

<p><strong>अब फैसले पर जता रहे हैं पछतावा</strong></p>
<p>कुछ समय पहले तक सियाराम कहते थे कि राम मंदिर का निर्माण देखना उनके जीवन का सबसे बड़ा सपना था। लेकिन हाल में चढ़ावे की चोरी जैसी खबरों के बाद उनका नजरिया बदल गया है। उनका कहना है कि अब उन्हें अपनी जमीन दान करने के फैसले पर अफसोस हो रहा है। हालांकि, उन्होंने इसके पीछे कोई स्पष्ट वजह नहीं बताई।</p>
<p>सियाराम ने यह भी बताया कि 2018 में कई लोगों ने उन्हें आगाह किया था कि अगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला मंदिर के पक्ष में नहीं आया, तो उनका दान व्यर्थ हो जाएगा। इसके बावजूद उन्हें पूरा विश्वास था कि फैसला राम मंदिर के पक्ष में आएगा और मंदिर का निर्माण जरूर होगाl </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय </category>
                                    

                <link>https://hindi.khabarchhe.com/national/donated-%E2%82%B91-crore-to-ram-temple-by-selling-land-now/article-2474</link>
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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 18:32:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>CBSE ने त्रि-भाषा नीति के लिए जारी किए नए दिशानिर्देश: कक्षा 6 से 10 तक के छात्रों के लिए बड़े बदलाव</title>
                                    <description><![CDATA[<p>केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से त्रि-भाषा नीति (Three-Language Policy) को लागू करने के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं।</p>
<p>इस नई नीति के तहत अब छात्रों को तीन भाषाओं का अध्ययन करना होगा, जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं (भारतीय भाषाएं) होनी अनिवार्य हैं। वहीं तीसरी भाषा के रूप में कोई अन्य भारतीय भाषा या फिर अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, स्पैनिश या अरबी जैसी विदेशी भाषा को चुना जा सकता है।<br />विभिन्न कक्षाओं के छात्रों पर इस नीति का क्या असर होगा, इसकी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/national/cbse-issues-new-guidelines-for-three-language-policy-major-changes-for/article-2473"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/6201715953049997658.jpg" alt=""></a><br /><p>केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से त्रि-भाषा नीति (Three-Language Policy) को लागू करने के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं।</p>
<p>इस नई नीति के तहत अब छात्रों को तीन भाषाओं का अध्ययन करना होगा, जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं (भारतीय भाषाएं) होनी अनिवार्य हैं। वहीं तीसरी भाषा के रूप में कोई अन्य भारतीय भाषा या फिर अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, स्पैनिश या अरबी जैसी विदेशी भाषा को चुना जा सकता है।<br />विभिन्न कक्षाओं के छात्रों पर इस नीति का क्या असर होगा, इसकी विस्तृत जानकारी नीचे दी गई है:</p>
<p><strong>कक्षा-वार बदलावों का पूरा विवरण</strong></p>
<p><strong>कक्षा 10 (2026–27):</strong> वर्तमान में कक्षा 10वीं में पढ़ रहे छात्रों के लिए नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वे मौजूदा द्वि-भाषा (दो भाषा) प्रणाली के तहत ही अपनी पढ़ाई जारी रखेंगे और उन्हें कोई तीसरी भाषा पढ़ने की आवश्यकता नहीं होगी।</p>
<p><strong>कक्षा 9 (2026–27):</strong> इस शैक्षणिक सत्र में कक्षा 9वीं में पढ़ने वाले छात्र तीन भाषाओं का अध्ययन करेंगे, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होंगी। जो छात्र पहले से ही दो विदेशी भाषाएं पढ़ रहे हैं, वे उन्हें जारी रख सकते हैं, लेकिन उन्हें अनिवार्य रूप से एक भारतीय भाषा को शामिल करना होगा। इस बैच के लिए, तीसरी भाषा का मूल्यांकन केवल स्कूल स्तर पर ही किया जाएगा और कक्षा 10 में इसके लिए कोई CBSE बोर्ड परीक्षा नहीं होगी।</p>
<p><strong>कक्षा 7 और 8 (2026–27):</strong> वर्तमान में कक्षा 7वीं और 8वीं में पढ़ने वाले छात्रों पर भी यही संरचना लागू होगी जब वे अगली उच्च कक्षाओं में प्रवेश करेंगे। यदि वे पहले से ही दो विदेशी भाषाएं पढ़ रहे हैं, तो उन्हें भी एक भारतीय भाषा जोड़नी होगी, और इस तीसरी भाषा के लिए कोई बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/cbse-2.jpg" alt="CBSE 2" width="1280" height="720"/>
tribuneindia.com

<p><strong>कक्षा 6 (2026–27):</strong> शैक्षणिक वर्ष 2026-27 में कक्षा 6वीं में प्रवेश करने वाले छात्र इस नई व्यवस्था के तहत आने वाले पहले पूर्ण बैच (Full Batch) होंगे। ये छात्र तीन भाषाओं का अध्ययन करेंगे (जिसमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होंगी)। जब यह बैच कक्षा 10वीं में पहुंचेंगे, तो इन्हें तीसरी भाषा के लिए बोर्ड परीक्षा देनी होगी। बोर्ड परीक्षा का यह नियम इस बैच और इसके बाद आने वाले सभी आगामी बैचों पर अनिवार्य रूप से लागू होगा।</p>
<p><strong>इन श्रेणियों को मिलेगी छूट</strong></p>
<p>बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि कुछ विशिष्ट श्रेणियों को इस नीति से छूट दी गई है:</p>
<p>विशेष आवश्यकता वाले बच्चे (Children with Special Needs), भारत से बाहर स्थित CBSE स्कूल और भारत लौटने वाले विदेशी छात्रों को इस नियम से छूट मिलेगी।</p>
<p>एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने वाले (State Shift करने वाले) छात्र अपनी मौजूदा भाषा विकल्पों को जारी रख सकते हैं। स्कूलों को ऐसे छात्रों को आवश्यक सहायता प्रदान करनी होगी।</p>
<p><strong>शिक्षकों की कमी को पूरा करने के उपाय</strong></p>
<p>CBSE के अनुसार, इस नीति को सुचारू रूप से लागू करने के लिए स्कूल अपने मौजूदा शिक्षकों, सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) शिक्षकों, स्नातकोत्तर शिक्षकों (PGTs) का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा, स्कूलों के समूहों (Clusters) और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से साझा शिक्षण मॉडल (Shared teaching models) की मदद भी ली जा सकती है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/35.jpg" alt="3" width="1280" height="720"/>
acer.org

<p><strong>नीति की पृष्ठभूमि और स्कूलों की चिंताएं</strong></p>
<p>इससे पहले 2 अप्रैल को, CBSE ने शैक्षणिक वर्ष 2026-27 में कक्षा 6 से चरणबद्ध तरीके से इस त्रि-भाषा फॉर्मूले को शुरू करने का प्रस्ताव दिया था, जिसे 2030-31 तक कक्षा 10 तक पूरी तरह लागू करने की योजना थी। यह एक क्रमिक बदलाव का संकेत था।</p>
<p>इसके बाद, 15 मई को एक सर्कुलर जारी कर स्कूलों को निर्देश दिया गया कि वे 1 जुलाई से कक्षा 9वीं के छात्रों के लिए तीन भाषाएं (R1, R2 और R3) अनिवार्य करें, जिसमें कम से कम दो भाषाएं भारतीय होनी चाहिए। इस सर्कुलर में अंतरिम व्यवस्था के तौर पर स्कूलों को कक्षा 6 की R3 पाठ्यपुस्तकों का उपयोग करने की सलाह दी गई थी, क्योंकि मिडिल और सेकेंडरी स्टेज के बीच भाषाई क्षमताओं में 75-80% तक की समानता होती है।</p>
<p>हालांकि, मई के इस निर्देश के बाद स्कूलों के भीतर अपनी तैयारियों और शैक्षणिक लॉजिस्टिक्स को लेकर चिंताएं बढ़ गईं। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि यह कदम उन उम्मीदों से पहले उठा लिया गया था, जिसमें माना जा रहा था कि इसे समर्पित NCERT पाठ्यपुस्तकों के आने और अधिक सुव्यवस्थित बुनियादी ढांचे के तैयार होने के बाद ही लागू किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय </category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 17:44:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक माइक्रोसॉफ्ट इंजीनियर ने UPSC पास करने के लिए 45 लाख रुपये की माइक्रोसॉफ्ट की नौकरी छोड़ दी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>45 लाख रुपये का वार्षिक पैकेज, मनचाही नौकरी और माइक्रोसॉफ्ट में अच्छा पद कई लोगों के लिए यह एक बड़ी करियर उपलब्धि है। लेकिन बहुत से लोगों के लिए यह सिर्फ एक सपना है, जिसे वे हासिल करना चाहते हैं। इस युवा इंजीनियर के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उसने नौकरी छोड़कर UPSC की तैयारी करने का फैसला किया। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या केवल पैसा ही वास्तविक करियर संतुष्टि देता है। यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है, जहां लोग सफलता की परिभाषा पर अपने-अपने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/national/a-microsoft-engineer-left-his-rs-45-lakh-microsoft-job/article-2470"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/microsoft-engineer.webp" alt=""></a><br /><p>45 लाख रुपये का वार्षिक पैकेज, मनचाही नौकरी और माइक्रोसॉफ्ट में अच्छा पद कई लोगों के लिए यह एक बड़ी करियर उपलब्धि है। लेकिन बहुत से लोगों के लिए यह सिर्फ एक सपना है, जिसे वे हासिल करना चाहते हैं। इस युवा इंजीनियर के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उसने नौकरी छोड़कर UPSC की तैयारी करने का फैसला किया। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या केवल पैसा ही वास्तविक करियर संतुष्टि देता है। यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है, जहां लोग सफलता की परिभाषा पर अपने-अपने विचार व्यक्त कर रहे हैं।</p>
<p>यूज़र विकास अल्विस की पोस्ट के अनुसार, उनकी एक दोस्त ने 12वीं कक्षा के बाद JEE Main परीक्षा पास की और NIT वारंगल की ECE शाखा में प्रवेश लिया। उसने 2023 में B.Tech पूरा किया और 45 लाख रुपये के वार्षिक पैकेज के साथ माइक्रोसॉफ्ट में नौकरी हासिल की। वह पढ़ाई में बहुत अच्छी थी, लेकिन हाल ही में उसने UPSC की तैयारी पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करने के लिए नौकरी छोड़ दी।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/microsoft-engineer1.webp" alt="microsoft-engineer1" width="1280" height="720"/>
aajtak.in

<p>यह जानकारी साझा करते हुए यूज़र ने लिखा, 'मेरी स्कूल की दोस्त, जिसने 12वीं कक्षा के बाद JEE Main परीक्षा पास की, उसने NIT वारंगल में ECE विभाग में प्रवेश लिया। उसने 2023 में B.Tech की डिग्री प्राप्त की और 45 लाख रुपये वार्षिक वेतन वाली नौकरी हासिल की। वह हमेशा पढ़ाई में बहुत अच्छी रही है।'</p>
<p>हालांकि, उसने हाल ही में माइक्रोसॉफ्ट में अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जहां उसे सालाना 45 लाख रुपये का वेतन मिलता था, और अब उसने UPSC की तैयारी शुरू कर दी है। पोस्ट के अंत में उन्होंने सवाल किया कि अगर सालाना 45 लाख रुपये का वेतन और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनी में नौकरी भी किसी को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है, तो लोगों को वास्तव में शांति और संतोष कहां से मिलता है। यह फैसला मानो सोने के पिंजरे से निकलकर खुले आसमान में उड़ने जैसा है। इससे कई लोग हैरान हुए, लेकिन उसके साहस की भी व्यापक सराहना हुई।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/microsoft-engineer2.webp" alt="microsoft-engineer2" width="1280" height="720"/>
aajtak.in

<p>पोस्ट वायरल होने के बाद कई यूज़र्स अपने-अपने विचार साझा कर रहे हैं। एक यूज़र ने लिखा कि ऐसे फैसले व्यक्ति-व्यक्ति पर निर्भर करते हैं, और पोस्ट करने वाला भी इस बात से सहमत है कि अच्छी नौकरी छोड़ना साहस का काम है। एक अन्य यूज़र का कहना है कि यह फैसला केवल पैसों का नहीं, बल्कि परवरिश का भी है। उनके अनुसार, बचपन से ही माता-पिता और समाज सरकारी नौकरियों को प्राथमिकता देते हैं, जिसके कारण कई लोग अच्छी निजी नौकरी होने के बावजूद सरकारी सेवा को चुनते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय </category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 17:30:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्या कैंसर से पीड़ित बेटे की आखिरी इच्छा पूरी करने के लिए परिवार ने डांसर बुलाकर खर्च किए ₹7 लाख? जानिए क्या है सच्चाई</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सोशल मीडिया पर एक शादी समारोह की तस्वीर वायरल हो रही है, जिसमें एक आदमी पलंग पर लेटा हुआ है और उसके चारों ओर कई लोग खड़े हैं। उनमें महिलाएं भी हैं, जिन पर पलंग पर लेटा व्यक्ति पैसे लुटाता हुआ दिखाई दे रहा है। अब इस तस्वीर को साझा करते हुए दावा किया जा रहा है कि वह व्यक्ति बिहार का रहने वाला है और कैंसर से पीड़ित है। उसका कैंसर अंतिम चरण में है और उसने अपनी आखिरी इच्छा के रूप में ऑर्केस्ट्रा परफॉर्मेंस करवाने की इच्छा जताई थी। दावा किया जा रहा है कि 7 लाख रुपये</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/national/did-the-family-spend-%E2%82%B97-lakh-by-calling-a-dancer/article-2469"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/viral-posts.webp" alt=""></a><br /><p>सोशल मीडिया पर एक शादी समारोह की तस्वीर वायरल हो रही है, जिसमें एक आदमी पलंग पर लेटा हुआ है और उसके चारों ओर कई लोग खड़े हैं। उनमें महिलाएं भी हैं, जिन पर पलंग पर लेटा व्यक्ति पैसे लुटाता हुआ दिखाई दे रहा है। अब इस तस्वीर को साझा करते हुए दावा किया जा रहा है कि वह व्यक्ति बिहार का रहने वाला है और कैंसर से पीड़ित है। उसका कैंसर अंतिम चरण में है और उसने अपनी आखिरी इच्छा के रूप में ऑर्केस्ट्रा परफॉर्मेंस करवाने की इच्छा जताई थी। दावा किया जा रहा है कि 7 लाख रुपये में सात डांसरों को बुलाया गया; वे नाचती रहीं और युवक उन पर पैसे लुटाता रहा।</p>
<p>रंजन सिंह नाम के एक यूज़र ने X पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा था, 'यह लड़का बिहार का है। इसे कैंसर है और यह अंतिम स्टेज में है; इसका बचना असंभव है। इसके परिवार और दोस्तों ने इसकी आखिरी इच्छा पूछी। लड़के ने कहा कि उसकी आखिरी इच्छा ऑर्केस्ट्रा करवाने की है, जिसमें बहुत-सी युवतियां हों, वे नाचें और वह उन पर पैसे लुटाए। उसके दोस्तों और परिवार ने यह इच्छा पूरी की। 7 लाख रुपये में सात ऑर्केस्ट्रा डांसरों को बुलाया गया। महिलाएं नाच रही हैं, ऑर्केस्ट्रा बज रहा है और लड़का उन पर पैसे लुटा रहा है।'</p>
<p>अन्य यूज़र्स ने भी इसी तरह के दावे किए हैं। अब इस मामले की सच्चाई जानने के लिए जांच करना ज़रूरी था। द लल्लनटॉप की रिपोर्ट के अनुसार, सच जानने के लिए वायरल पोस्टों के कैप्शन की जाँच की गई। इसमें आयुष यादव नाम के एक यूज़र की टिप्पणी मिली। आयुष ने वायरल दावे का खंडन किया। उसने बताया कि यह घटना उत्तर प्रदेश के गोरखपुर की है और तस्वीर में दिख रहे युवक को कैंसर नहीं है; बल्कि, यह दृश्य उसकी बहन की शादी का है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/viral-post1.webp" alt="viral-post1" width="1280" height="720"/>
viral post

<p>इस सुराग के आधार पर हमने आयुष से संपर्क किया। उसने बताया कि वायरल तस्वीर में पलंग पर लेटे व्यक्ति का नाम अमन पासवान है और वह गोरखपुर के जानीपुर गाँव का रहने वाला है। यह तस्वीर उसकी बहन की शादी की है और इसे भ्रामक कहानी के साथ साझा किया जा रहा है। उसके माध्यम से हमें पासवान का संपर्क नंबर मिला। हमें उसके इंस्टाग्राम पेज पर 22 जून, 2026 को अपलोड किया गया शादी का एक वीडियो भी मिला। इसी वीडियो का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा है।</p>
<p>अमन पासवान ने बताया कि वायरल दावा पूरी तरह से झूठा है। उसे कैंसर या ऐसी कोई बीमारी नहीं है। उसने कहा, “मेरी बहन की शादी 21 जून को थी। हालांकि, उससे लगभग 20 दिन पहले, 31 मई को मेरा एक्सीडेंट हो गया था। मेरे पैर और कमर में गंभीर चोटें आई थीं, जिसके बाद डॉक्टर ने मुझे आराम करने की सलाह दी थी। लेकिन तब तक शादी की तैयारियाँ पूरी हो चुकी थीं, जिनमें ऑर्केस्ट्रा की व्यवस्था भी शामिल थी। वायरल तस्वीर वास्तव में मेरी बहन की शादी की है, लेकिन इसे भ्रामक तरीके से साझा किया जा रहा है।” अमन के इंस्टाग्राम पेज पर उसकी बहन की शादी की कई तस्वीरें और वीडियो भी मिले। कुल मिलाकर जाँच में पता चला कि गोरखपुर में हुई एक शादी की तस्वीर को भ्रामक तरीके से साझा किया जा रहा है और झूठा दावा किया जा रहा है कि वह व्यक्ति बिहार का रहने वाला है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय </category>
                                    

                <link>https://hindi.khabarchhe.com/national/did-the-family-spend-%E2%82%B97-lakh-by-calling-a-dancer/article-2469</link>
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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:13:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऑपरेशन सिंदूर के शहीदों पर सियासत…कांग्रेस बोली- एक साल तक शहीदों की जानकारी छिपाई गई, जानिए रक्षा मंत्रालय ने क्या सफाई दी?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए छह भारतीय सैनिकों के नाम राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (नेशनल वॉर मेमोरियल) पर दर्ज होने के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि इन जवानों की शहादत की जानकारी एक वर्ष तक सार्वजनिक नहीं की गई और उन्हें समय पर वह सम्मान नहीं मिला, जिसके वे हकदार थे। वहीं, रक्षा मंत्रालय ने इन आरोपों को तथ्यहीन बताते हुए कहा कि शहीदों को पहले ही सार्वजनिक रूप से श्रद्धांजलि दी जा चुकी है। </p>
<p>कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics-over-the-martyrs-of-operation-sindoor%E2%80%A6congress-said-%E2%80%93-information/article-2472"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/122.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए छह भारतीय सैनिकों के नाम राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (नेशनल वॉर मेमोरियल) पर दर्ज होने के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि इन जवानों की शहादत की जानकारी एक वर्ष तक सार्वजनिक नहीं की गई और उन्हें समय पर वह सम्मान नहीं मिला, जिसके वे हकदार थे। वहीं, रक्षा मंत्रालय ने इन आरोपों को तथ्यहीन बताते हुए कहा कि शहीदों को पहले ही सार्वजनिक रूप से श्रद्धांजलि दी जा चुकी है। </p>
<p>कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संसद में दिए गए एक बयान का वीडियो साझा किया। वीडियो में रक्षा मंत्री एक सवाल के जवाब में कहते हुए दिखाई देते हैं कि ऑपरेशन सिंदूर में किसी प्रकार की क्षति नहीं हुई। पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि यदि ऑपरेशन के दौरान छह जवान शहीद हुए थे तो संसद में यह जानकारी क्यों नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि इस मामले में केवल दो संभावनाएं हैं- या तो उस समय रक्षा मंत्री को जवानों की शहादत की जानकारी नहीं थी, या फिर उन्होंने संसद को गुमराह किया। दोनों ही स्थितियां गंभीर हैं और सरकार को इस पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।</p>
<p><strong>आरोप- संसद में पूरी जानकारी साझा नहीं की गई</strong></p>
<p>कांग्रेस का कहना है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ भारत की सैन्य कार्रवाई को लेकर संसद में पूरी जानकारी साझा नहीं की गई। पार्टी ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों के नाम दर्ज होने के बाद ही यह तथ्य व्यापक रूप से सामने आया।<br />उधर, रक्षा मंत्रालय ने विस्तृत बयान जारी कर कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया। मंत्रालय ने कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्ट में यह दावा किया जा रहा है कि छह शहीदों को पहली बार सार्वजनिक सम्मान मिला है, जबकि यह पूरी तरह तथ्यात्मक रूप से गलत है।</p>
<p><strong>बड़ा सवाल: ऑपरेशन सिंदूर के एक साल बाद ही नाम क्यों आए सामने?</strong></p>
<p>ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए छह जवानों के नाम राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर दर्ज होने के बाद यह सवाल उठा कि उनके नाम एक साल बाद ही क्यों सामने आए। कांग्रेस ने इसे जानकारी छिपाने का मामला बताते हुए सरकार पर आरोप लगाया कि शहीदों की शहादत को सार्वजनिक नहीं किया गया।<br />हालांकि, रक्षा मंत्रालय ने इस दावे को खारिज किया है। मंत्रालय के मुताबिक, शहीदों की जानकारी पहले भी अलग-अलग अवसरों पर सार्वजनिक की जा चुकी थी। 11 मई 2025 को तत्कालीन डीजीएमओ ने आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्हें श्रद्धांजलि दी थी। 14 अगस्त 2025 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में उनके वीरता पुरस्कारों की घोषणा की गई। सेना के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी श्रद्धांजलि दी गई, जबकि 8 अक्टूबर 2025 और 15 जनवरी 2026 को उनके परिजनों को सार्वजनिक समारोहों में सम्मानित किया गया।</p>
<p>मंत्रालय का कहना है कि राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों के नाम दर्ज करने की एक निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया और प्रोटोकॉल है। सभी नाम उसी प्रक्रिया के तहत शामिल किए जाते हैं। इसलिए नाम अब दर्ज होने का अर्थ यह नहीं है कि शहीदों की जानकारी पहली बार सार्वजनिक की गई है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार ने शहीदों के परिजनों को शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सभी निर्धारित सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं।</p>
<p><strong>राजनाथ सिंह के दिये बयान के बारे में मंत्रालय ने क्या कहा?</strong></p>
<p>रक्षा मंत्रालय ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संसद में दिए गए बयान पर भी सफाई दी। मंत्रालय के मुताबिक, सोशल मीडिया पर उनके भाषण के एक हिस्से को संदर्भ से अलग कर प्रस्तुत किया गया, जिससे गलत संदेश देने की कोशिश हुई कि उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में किसी भारतीय सैनिक के शहीद नहीं होने की बात कही थी। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि रक्षा मंत्री का बयान उन दावों का जवाब था, जिनमें कहा जा रहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने अपने लड़ाकू पायलट खो दिए थे। मंत्रालय के अनुसार, रक्षा मंत्री का आशय ऐसे दुष्प्रचारों का खंडन करना था। </p>
<p><strong>भाजपा के अमित मालवीय ने इस पूरे मामले पर क्या कहा?</strong></p>
<p>इस पूरे विवाद पर भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने रक्षा मंत्री के बयान की एक बयान को जानबूझकर संदर्भ से काटकर राजनीतिक विवाद खड़ा किया। उनके अनुसार, बयान का उद्देश्य केवल उन झूठे दावों का खंडन करना था जिनके जरिए ऑपरेशन की सफलता पर सवाल उठाने और देश का मनोबल कमजोर करने की कोशिश की जा रही थी।</p>
<p>गौरतलब है कि 6 मई 2025 को भारतीय सशस्त्र बलों ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे। केंद्र सरकार के अनुसार इन हमलों में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए थे। इसके बाद 10 मई को भारत और पाकिस्तान के सैन्य अभियान महानिदेशकों (DGMO) के बीच बातचीत के बाद दोनों देशों ने सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति जताई थी।<br />बता दें कि ऑपरेशन के दौरान भारत ने पाकिस्तान के कई एयरबेस को भी निशाना बनाया था। बाद में निजी सैटेलाइट कंपनी मैक्सर द्वारा जारी तस्वीरों में सरगोधा, नूर खान, भोलारी और सुक्कुर एयरबेस पर हमलों के पहले और बाद की स्थिति दिखाई गई थी, जिनमें नुकसान स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 13:14:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>केंद्रीय मंत्री ने अपने ही विभाग से 1 करोड़ रुपये की सब्सिडी ली, कहा- सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ था</title>
                                    <description><![CDATA[<p>केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी पर अपने ही विभाग से लगभग 1 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्राप्त करने के आरोपों ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। इस मुद्दे पर विपक्ष लगातार उन पर हमला कर रहा है। अब केंद्रीय मंत्री भगिरथ चौधरी ने स्वयं खुलकर इस विषय पर बात की है और विपक्ष के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।</p>
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satyahindi.com

<p>मीडिया सूत्रों के साथ एक बातचीत में भागीरथ चौधरी ने कहा कि वे बचपन से ही खेती से जुड़े हुए हैं और किसान समुदाय से आते हैं। उन्होंने कहा कि खेती उनका पैतृक व्यवसाय है। राजस्थान</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/union-minister-took-subsidy-of-rs-1-crore-from-his/article-2468"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/711.webp" alt=""></a><br /><p>केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी पर अपने ही विभाग से लगभग 1 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्राप्त करने के आरोपों ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। इस मुद्दे पर विपक्ष लगातार उन पर हमला कर रहा है। अब केंद्रीय मंत्री भगिरथ चौधरी ने स्वयं खुलकर इस विषय पर बात की है और विपक्ष के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।</p>
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satyahindi.com

<p>मीडिया सूत्रों के साथ एक बातचीत में भागीरथ चौधरी ने कहा कि वे बचपन से ही खेती से जुड़े हुए हैं और किसान समुदाय से आते हैं। उन्होंने कहा कि खेती उनका पैतृक व्यवसाय है। राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के पेह गांव में उनकी जमीन है। वहां पानी की बहुत अधिक कमी है और भूजल लगभग समाप्त हो चुका है। इसके परिणामस्वरूप उन्होंने वर्षा जल संचयन के लिए 20 मिलियन लीटर क्षमता वाला कृषि तालाब और एक पॉलीहाउस बनवाया।</p>
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ndtv.in

<p>सब्सिडी के मुद्दे पर स्पष्टीकरण देते हुए कृषि राज्य मंत्री ने कहा कि उन्हें यह लाभ किसी विशेष छूट के तहत नहीं, बल्कि सरकारी नियमों के अनुसार मिला है। उन्होंने बताया कि पॉलीहाउस की कुल लागत पर 50 प्रतिशत सब्सिडी देने का प्रावधान है, जिसका लाभ देशभर के हजारों किसानों को मिलता है। उन्होंने वर्ष 2018 में इसके लिए आवेदन किया था, और उचित फोटोग्राफी तथा सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद, पॉलीहाउस स्थापित होने और फसल कटाई के 6 महीने बाद, वर्ष 2025 में उन्हें सब्सिडी प्रदान की गई।</p>
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aajtak.in

<p>चौधरी ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा, 'विपक्ष के पास मेरे खिलाफ कोई मुद्दा ही नहीं है। मेरे राजनीतिक जीवन में आज तक मुझ पर एक रुपये के भी भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगाया जा सका है। मैंने अपने खेत में एक बड़ा बोर्ड लगाया हुआ है, जिसमें ऋण और सब्सिडी का पूरा विवरण दिया गया है। यदि मेरी कोई गलत मंशा होती, तो मैं वहां बोर्ड क्यों लगाता?'</p>
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indiatv.in

<p>मंत्री ने कहा कि वे आधुनिक और उन्नत तकनीकों का उपयोग करके खेती कैसे की जाए, यह सीखने के लिए अन्य किसानों को भी अपने खेत पर आमंत्रित करते हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में इस पॉलीहाउस में खीरा, टमाटर, शिमला मिर्च और धनिया जैसी फसलें उगाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सब्सिडी के बिना पॉलीहाउस स्थापित करना किसी भी सामान्य किसान के लिए घाटे का सौदा है, इसलिए सरकार यह सहायता प्रदान करती है ताकि किसान आत्मनिर्भर और समृद्ध बन सकें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 12:11:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>अंबालाल पटेल की भविष्यवाणी... जानिए गुजरात में कब से शुरू होगी झमाझम बारिश?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>ऐसा लगता है कि इस बार मेघराजा नाराज़ हैं। एल नीनो के कारण किसान अब भी बारिश का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं। राज्य में काफी उमस है, लेकिन अब तक बारिश का नामोनिशान नहीं है। मानसून के राज्य में प्रवेश के बाद भी अधिकांश जिले अब तक सूखे पड़े हैं। इसी बीच अंबालाल पटेल ने अपने पूर्वानुमान में बताया है कि राज्य में कब से व्यापक वर्षा दर्ज होगी। उनके पूर्वानुमान पर बात करने से पहले, आइए एक नज़र डालते हैं कि विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं।</p>
<p>ABP अस्मिता की रिपोर्ट के अनुसार, मौसम विशेषज्ञों का कहना है</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/sports/%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%AA%E0%A4%9F%E0%A5%87%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AD%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A5%80----%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%9C%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A4-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%AC-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%82-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%9D%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%9D%E0%A4%AE-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B6/article-2467"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/ambalal-patel1.webp" alt=""></a><br /><p>ऐसा लगता है कि इस बार मेघराजा नाराज़ हैं। एल नीनो के कारण किसान अब भी बारिश का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं। राज्य में काफी उमस है, लेकिन अब तक बारिश का नामोनिशान नहीं है। मानसून के राज्य में प्रवेश के बाद भी अधिकांश जिले अब तक सूखे पड़े हैं। इसी बीच अंबालाल पटेल ने अपने पूर्वानुमान में बताया है कि राज्य में कब से व्यापक वर्षा दर्ज होगी। उनके पूर्वानुमान पर बात करने से पहले, आइए एक नज़र डालते हैं कि विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं।</p>
<p>ABP अस्मिता की रिपोर्ट के अनुसार, मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अरब सागर में कोई मजबूत लो-प्रेशर सिस्टम सक्रिय न होने के कारण मानसून की गति धीमी पड़ गई है। साथ ही, मानसून ट्रफ के उत्तर की ओर खिसक जाने से गुजरात की ओर आने वाली नमी वाली हवाओं का प्रवाह भी कमजोर पड़ गया है। इसके कारण राज्य में बारिश का माहौल बनने में देरी हो रही है। मानसून की धीमी गति ने किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है।</p>
<p>इन सबके बीच मौसम विशेषज्ञ अंबालाल पटेल ने राहत भरे संकेत दिए हैं। उन्होंने जून के अंतिम दिनों में अच्छी बारिश की संभावना जताई है। उनके अनुसार, 28 जून से राज्य में व्यापक और अच्छी वर्षा हो सकती है। 28 जून के बाद दक्षिण गुजरात, सौराष्ट्र और कच्छ में भारी बारिश की संभावना है, जबकि पूर्व गुजरात, उत्तर गुजरात और मध्य गुजरात में भी जुलाई के पहले सप्ताह में अच्छी वर्षा हो सकती है।</p>
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english.deshabhimani.com

<p>पूर्वानुमानकर्ता अंबालाल पटेल ने 16 जुलाई के बाद बारिश के एक और दौर की संभावना भी जताई है। इस दौरान अच्छी वर्षा के कारण नर्मदा नदी के जलस्तर में भी वृद्धि होने की संभावना है। इसके बाद 2 अगस्त के बाद राज्य में फिर से अच्छी बारिश का एक और दौर आने की संभावना व्यक्त की गई है।</p>
<p>गुजरात में मानसून की शुरुआत के बाद वर्षा गतिविधियों में बड़ी गिरावट देखी जा रही है। मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार, राज्य में रुका हुआ मानसून अगले 3 दिनों में फिर से सक्रिय होकर आगे बढ़ सकता है। हालांकि, अगले पाँच दिनों के दौरान राज्य के अधिकांश क्षेत्रों में केवल हल्की से मध्यम बारिश की ही संभावना जताई गई है।</p>
<p>राज्य में वर्षा के आँकड़े भी चिंताजनक स्थिति दर्शा रहे हैं। 26 जून तक गुजरात में औसतन केवल 2.85 प्रतिशत वर्षा दर्ज की गई है, जो पिछले 10 वर्षों में सबसे कम मानी जा रही है। अब तक राज्य में केवल 1.03 इंच वर्षा हुई है। जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में राज्य में 26.24 प्रतिशत वर्षा दर्ज की गई थी।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/ambalal-patel.webp" alt="ambalal-patel" width="1200" height="675"/>
chitralekha.com

<p>बारिश की कमी के कारण किसानों की चिंता भी बढ़ रही है। कई क्षेत्रों में किसान बुवाई के लिए बारिश का इंतज़ार कर रहे हैं। राज्य के किसी भी तालुका में अब तक 10 इंच तक वर्षा दर्ज नहीं हुई है, जो वर्षा की कमी का स्पष्ट संकेत है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में मानसून फिर से रफ्तार पकड़ सकता है। यदि अरब सागर में अनुकूल प्रणाली विकसित होती है, तो राज्य में वर्षा की तीव्रता बढ़ सकती है। अब यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में बारिश कैसी रहती है। क्या इस बार किसानों को फिर से रोना पड़ेगा? यदि अच्छी बारिश नहीं होती है, तो निश्चित रूप से किसानों के लिए मुश्किलें बढ़ेंगी, क्योंकि तेज धूप और उमस के कारण कई जगहों पर जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category> खेल</category>
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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 21:08:23 +0530</pubDate>
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