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                <title>चर्चा पत्र - Khabarchhe Hindi</title>
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                <description>चर्चा पत्र RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अगर आपको अच्छी नींद नहीं आती, तो दांत भी चेक करवा लीजिए!</title>
                                    <description><![CDATA[<p>यह हेडलाइन पढ़कर शायद आपको लगे कि नींद और दांत का क्या संबंध है। लेकिन दोनों के बीच सीधा संबंध है। कई लोगों के दांत घिसे हुए होते हैं और टूट जाते हैं। उन्हें पता नहीं चलता कि ऐसा क्यों होता है। क्योंकि वे दांतों की बहुत देखभाल करते हैं। नियमित ब्रश करते हैं, फिर भी दांत क्यों घिसते या टूट जाते हैं। तो इसके पीछे का कारण है नींद। जिन लोगों को अच्छी नींद नहीं आती, उनके दांत घिसने की पूरी संभावना होती है। <br />क्योंकि कई बार नींद की समस्या का मूल कारण यही हो सकता है।</p>
<p>तो चलिए</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/charcha-patra/if-you-dont-sleep-well-get-your-teeth-checked/article-2117"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-04/420.jpg" alt=""></a><br /><p>यह हेडलाइन पढ़कर शायद आपको लगे कि नींद और दांत का क्या संबंध है। लेकिन दोनों के बीच सीधा संबंध है। कई लोगों के दांत घिसे हुए होते हैं और टूट जाते हैं। उन्हें पता नहीं चलता कि ऐसा क्यों होता है। क्योंकि वे दांतों की बहुत देखभाल करते हैं। नियमित ब्रश करते हैं, फिर भी दांत क्यों घिसते या टूट जाते हैं। तो इसके पीछे का कारण है नींद। जिन लोगों को अच्छी नींद नहीं आती, उनके दांत घिसने की पूरी संभावना होती है। <br />क्योंकि कई बार नींद की समस्या का मूल कारण यही हो सकता है।</p>
<p>तो चलिए समझते हैं कि समस्या क्या होती है। मेडिकल साइंस में एक शब्द है ब्रुक्सिज़्म (Bruxism)। यह समस्या मतलब नींद के दौरान दांत पीसने की आदत। अब सवाल यह उठता है कि कोई व्यक्ति नींद में दांत क्यों पीसता है। तो इसका जवाब है कि </p>
<p>जब हम रात में सोते हैं, तब हमारी चेतना में बदलाव होता है। हम चेतना की ऐसी अवस्था में होते हैं जब हमारी इंद्रियां शांत होती हैं, लेकिन शरीर और मस्तिष्क लगातार काम कर रहे होते हैं। उस दौरान कई बार मस्तिष्क सामान्य से थोड़ा अधिक सक्रिय हो जाता है, जिसे माइक्रो अराउज़ल (micro-arousals) कहा जाता है। जब थोड़े समय के लिए मस्तिष्क अचानक जागता है—तो जबड़े की मांसपेशियां सक्रिय हो जाती हैं। इस स्थिति को स्लीप ब्रुक्सिज़्म (Sleep bruxism) कहा जाता है। इसके परिणामस्वरूप दांत कटकटाने लगते हैं, जबड़े में तनाव आता है और नींद बार-बार टूटती रहती है।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-04/510.jpg" alt="5" width="1280" height="720"></img></p>
<p>जब आप नींद से उठते हैं, तो सुबह जबड़े में दर्द, दांत संवेदनशील लगना, सिरदर्द रहना, नींद पूरी होने के बावजूद थकान महसूस होना—ये सिर्फ नींद की समस्या नहीं हैं, बल्कि दांत और जबड़े की समस्या के संकेत हैं।</p>
<p>कई मामलों में ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया (Obstructive Sleep Apnea) भी जिम्मेदार होता है। इस समस्या में शरीर में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती, जिससे नींद में सांस कुछ समय के लिए रुक जाती है। शरीर तुरंत प्रतिक्रिया देता है—जबड़े को हिलाकर हवा के रास्ते को खोलने की कोशिश करता है। इस प्रक्रिया के दौरान दांत पीसने की समस्या बढ़ती है और नींद और खराब हो जाती है।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-04/63.jpg" alt="6" width="1280" height="720"></img></p>
<p>ऐसा होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, लेकिन आम तौर पर माना जाता है कि मानसिक तनाव भी एक कारण हो सकता है। चिंता, गुस्सा, दबे हुए भाव—यह सब सीधे जबड़े पर असर करते हैं। जब मन शांत नहीं होता, तो शरीर रात में उसका प्रभाव दिखाता है।</p>
<p>अगर आपको अच्छी नींद नहीं आती, तो केवल स्लीपिंग पिल्स की ओर न भागें। डेंटिस्ट के पास जाकर दांत और जबड़े की जांच भी करवा लें। क्योंकि अगर ब्रुक्सिज़्म समय पर पकड़ में आ जाए, तो दांत बच सकते हैं और नींद भी बेहतर हो सकती है।</p>
<p>तो इस समस्या का समाधान कैसे हो? निश्चित समाधान तो वही डेंटल एक्सपर्ट बता सकता है जिसने नींद के बारे में भी अध्ययन किया हो। हालांकि, कुछ ऐसे उपकरण हैं जो उपयोगी होते हैं। इन उपकरणों में स्लीप एप्लायंसेस या डेंटल गार्ड शामिल हैं। इससे दांत बचने के साथ-साथ नींद में भी सुधार होता है।</p>
<p>कभी-कभी शरीर छोटे संकेत देता है-सवाल यह है कि क्या हम उन्हें समझते हैं या नहीं। अगर अच्छी नींद नहीं आती… तो दांत चेक करवाना मत भूलिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चर्चा पत्र</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 13:30:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dr. Risshi Bhatt]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होम्योपैथी: सफेद गोलियां वास्तव में कैसे असर करती हैं, विज्ञान क्या कहता है?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>होम्योपैथी को लेकर वर्षों पुराना एक विवाद चलता आ रहा है। क्या यह उपचार पद्धति वास्तव में असर करती है, क्या इसमें कोई वास्तविक वैज्ञानिक प्रभाव भी है? तो इन सवालों के जवाब के लिए देखें कि इस बारे में वैज्ञानिक अध्ययन क्या कहते हैं?</p>
<p>दुनियाभर में किए गए कुछ महत्वपूर्ण अध्ययनों में पाया गया है कि होम्योपैथी का प्रभाव कई अध्ययनों में मानसिक की तुलना में शारीरिक रूप से अधिक देखा गया। यह अंतर सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण था। खासकर व्यक्तिगत रूप से दी गई उपचार में सकारात्मक परिणाम देखने को मिले।</p>
<p>दुनिया में अब तक 300 से अधिक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/charcha-patra/how-homeopathy-white-pills-really-work-what-the-science-says/article-2116"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-04/146.jpg" alt=""></a><br /><p>होम्योपैथी को लेकर वर्षों पुराना एक विवाद चलता आ रहा है। क्या यह उपचार पद्धति वास्तव में असर करती है, क्या इसमें कोई वास्तविक वैज्ञानिक प्रभाव भी है? तो इन सवालों के जवाब के लिए देखें कि इस बारे में वैज्ञानिक अध्ययन क्या कहते हैं?</p>
<p>दुनियाभर में किए गए कुछ महत्वपूर्ण अध्ययनों में पाया गया है कि होम्योपैथी का प्रभाव कई अध्ययनों में मानसिक की तुलना में शारीरिक रूप से अधिक देखा गया। यह अंतर सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण था। खासकर व्यक्तिगत रूप से दी गई उपचार में सकारात्मक परिणाम देखने को मिले।</p>
<p>दुनिया में अब तक 300 से अधिक क्लिनिकल ट्रायल्स और 100 से अधिक रोगों में होम्योपैथी का परीक्षण हो चुका है। इनमें से कई अध्ययन एलोपैथी दवाएं बनाने की पद्धतियों जैसे रैंडमाइज्ड और डबल-ब्लाइंड तरीकों से किए गए हैं, जिन्हें आधुनिक वैज्ञानिक मानकों के अनुसार विश्वसनीय माना जाता है।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-04/236.jpg" alt="2" width="1280" height="720"></img></p>
<p>हालांकि, एलोपैथी और होम्योपैथी में बड़ा अंतर यह है कि एलोपैथी हर मरीज को एक शरीर के रूप में देखती है। एलोपैथी में रोग के लक्षणों के आधार पर दवा दी जाती है। जबकि होम्योपैथी हर मरीज को एक अलग व्यक्ति के रूप में देखती है। हर मरीज को व्यक्तिगत लक्षणों के आधार पर अलग दवा दी जाती है। इसलिए अगर एलोपैथी के मानकों से होम्योपैथी को जांचा जाए तो उसके परिणाम अलग ही आएंगे।</p>
<p>आइए एक सामान्य उदाहरण से समझते हैं। मरीजों का एक समूह है। सभी को एक ही प्रकार की अस्थमा की समस्या है। सभी की उम्र, वजन और बाकी सब कुछ समान है। अब इनका इलाज करना हो तो एलोपैथी में सभी को लगभग एक ही प्रकार की दवा दी जाएगी क्योंकि सभी के लक्षण एक जैसे दिखेंगे। हालांकि, होम्योपैथी की पद्धति अलग है। होम्योपैथी पहले सभी मरीजों में क्या अंतर है, यह देखेगी। संभव है कि सभी मरीजों को अलग-अलग दवाएं दी जाएं।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-04/331.jpg" alt="3" width="1280" height="720"></img></p>
<p>इस तरह, एलोपैथी और होम्योपैथी दोनों ही अलग-अलग पद्धतियां हैं। दोनों की अपनी विशेषताएं हैं। दोनों की अपनी सीमाएं हैं। हालांकि, बहस वर्षों से चल रही है और आगे भी चलेगी। अंत में मरीज को क्या परिणाम मिलता है, वही महत्वपूर्ण है। जहां होम्योपैथी काम करती है वहां उसका उपयोग किया जाए और जहां एलोपैथी प्रभावी है वहां एलोपैथी का उपयोग किया जाए। भारत जैसे देश में होम्योपैथी से उपचार कराने वाले लाखों लोग हैं। अगर उन्हें फायदा होता है तभी वे इसका उपयोग करते होंगे। इस तरह, आज के समय में पूरी दुनिया में इंटीग्रेटिव अप्रोच अपनाया जा रहा है, जिसमें जो पद्धति जिस रोग में अधिक प्रभावी हो, उसका उपयोग करने का चलन बढ़ रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चर्चा पत्र</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 13:29:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dr. Sunil Shah]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अक्षय कुमार ने अपने पिता को खोया, पुरुषों को PSA टेस्ट करवाने की सलाह दी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>जाने-माने फिल्म अभिनेता और स्वास्थ्य कार्यकर्ता अक्षय कुमार ने अपने पिता का उदाहरण देते हुए सभी पुरुषों से नियमित रूप से PSA टेस्ट करवाने की अपील की है। भारत में प्रोस्टेट कैंसर के बारे में जागरूकता की कमी अभी भी एक गंभीर समस्या है। हाल ही में बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार ने अपने पिता की मृत्यु का ज़िक्र करते हुए पुरुषों से नियमित रूप से PSA टेस्ट करवाने की अपील की है। उनका कहना है कि सही समय पर टेस्ट न करवाने के कारण उनके परिवार को भारी नुकसान उठाना पड़ा।</p>
<p><strong>PSA टेस्ट क्या है और यह क्यों ज़रूरी है?</strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/charcha-patra/akshay-kumar-urges-men-to-get-regular-psa-tests-after-losing-his-father/article-2012"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-04/01.jpg" alt=""></a><br /><p>जाने-माने फिल्म अभिनेता और स्वास्थ्य कार्यकर्ता अक्षय कुमार ने अपने पिता का उदाहरण देते हुए सभी पुरुषों से नियमित रूप से PSA टेस्ट करवाने की अपील की है। भारत में प्रोस्टेट कैंसर के बारे में जागरूकता की कमी अभी भी एक गंभीर समस्या है। हाल ही में बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार ने अपने पिता की मृत्यु का ज़िक्र करते हुए पुरुषों से नियमित रूप से PSA टेस्ट करवाने की अपील की है। उनका कहना है कि सही समय पर टेस्ट न करवाने के कारण उनके परिवार को भारी नुकसान उठाना पड़ा।</p>
<p><strong>PSA टेस्ट क्या है और यह क्यों ज़रूरी है?</strong></p>
<p>PSA (प्रोस्टेट-स्पेसिफिक एंटीजन) एक तरह का प्रोटीन है जो प्रोस्टेट ग्रंथि द्वारा बनाया जाता है। इसका स्तर एक साधारण ब्लड टेस्ट के ज़रिए मापा जा सकता है। इस टेस्ट से प्रोस्टेट कैंसर का शुरुआती चरणों में ही पता लगाना संभव हो जाता है। अगर शुरुआती चरणों में ही इसका पता चल जाए, तो इसको ठीक किया जा सकता है। एक कैंसर विशेषज्ञ के तौर पर, मेरा मानना ​​है कि प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती दौर में अक्सर कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। इसलिए, लक्षण दिखने से पहले ही स्क्रीनिंग करवा लेने से जान बचाई जा सकती है।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-04/02.jpg" alt="02" width="1280" height="720"></img></p>
<p><strong>50 साल की उम्र के बाद खास ध्यान देने की क्यों ज़रूरत है?</strong></p>
<p>अध्ययन और क्लिनिकल अनुभव बताते हैं कि 50 साल से ज़्यादा उम्र के पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। अक्षय कुमार ने भी इसी बात पर ज़ोर दिया है कि इस उम्र के बाद हर साल PSA टेस्ट करवाना ज़रूरी है। अगर परिवार में किसी को कैंसर हुआ हो, तो कम उम्र में ही जांच शुरू कर देना ज़रूरी है।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-04/03.jpg" alt="03" width="1280" height="720"></img></p>
<p><strong>जागरूकता की कमी सबसे बड़ा खतरा</strong></p>
<p>भारत में पुरुष आमतौर पर अपने स्वास्थ्य को वह महत्व नहीं देते जिसके वे हकदार हैं। खासकर प्रोस्टेट जैसी समस्याओं में, शर्म, अज्ञानता और "कुछ नहीं होगा" जैसी सोच के कारण उनका पता देर से चल पाता है।</p>
<p>अक्षय कुमार ने कहा है कि अगर उन्हें समय पर PSA टेस्ट के बारे में पता होता, तो शायद वे अपने पिता को बचा पाते।</p>
<p>इसलिए एक कैंसर विशेषज्ञ के तौर पर मैं साफ तौर पर कहता हूं कि:</p>
<p>50 साल की उम्र के बाद नियमित रूप से PSA टेस्ट करवाएं</p>
<p>अगर परिवार में कैंसर का इतिहास रहा हो, तो कम उम्र में ही स्क्रीनिंग शुरू कर दें</p>
<p>पेशाब से जुड़े लक्षणों (बार-बार पेशाब आना, दर्द होना) को नज़रअंदाज़ न करें</p>
<p>सही समय पर पता चलना इलाज के बेहतर नतीजे</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चर्चा पत्र</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 15:50:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dr. Dinky Gajiwala]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कैंसर की mRNA वैक्सीन के बारे में अफवाहें क्यों फैलती हैं?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><span lang="hi" xml:lang="hi">कैंसर वैक्सीन ऐसी चिकित्सा पद्धति है जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) को कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और नष्ट करने के लिए प्रशिक्षित करती है। </span>mRNA <span lang="hi" xml:lang="hi">वैक्सीन तकनीक शरीर में एक प्रकार का संदेश (</span>mRNA) <span lang="hi" xml:lang="hi">भेजती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे शरीर प्रोटीन बनाता है और फिर रोग के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार हो जाता है। यह तकनीक </span>COVID-19<span lang="hi" xml:lang="hi"> के दौरान सफल रही थी और अब इसका उपयोग कैंसर उपचार में किया जा रहा है।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">साधारण भाषा में समझें तो जैसे घर बनाने से पहले उसका एक नक्शा तैयार किया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी प्रकार हमारे शरीर में </span>DNA </p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/charcha-patra/why-do-rumors-spread-about-cancer-mrna-vaccine/article-1995"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-03/0111.jpg" alt=""></a><br /><p><span lang="hi" xml:lang="hi">कैंसर वैक्सीन ऐसी चिकित्सा पद्धति है जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) को कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और नष्ट करने के लिए प्रशिक्षित करती है। </span>mRNA <span lang="hi" xml:lang="hi">वैक्सीन तकनीक शरीर में एक प्रकार का संदेश (</span>mRNA) <span lang="hi" xml:lang="hi">भेजती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे शरीर प्रोटीन बनाता है और फिर रोग के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार हो जाता है। यह तकनीक </span>COVID-19<span lang="hi" xml:lang="hi"> के दौरान सफल रही थी और अब इसका उपयोग कैंसर उपचार में किया जा रहा है।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">साधारण भाषा में समझें तो जैसे घर बनाने से पहले उसका एक नक्शा तैयार किया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी प्रकार हमारे शरीर में </span>DNA <span lang="hi" xml:lang="hi">होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो एक नक्शे की तरह काम करता है। इस नक्शे की जानकारी शरीर तक एक संदेशवाहक के माध्यम से पहुंचती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे </span>RNA <span lang="hi" xml:lang="hi">कहा जाता है। यह संदेशवाहक जो जानकारी देता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके आधार पर शरीर नई कोशिकाएं बनाता है। अब यदि बाहर से इस संदेशवाहक में कोई विशेष संदेश डालकर शरीर में भेजा जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो शरीर उसी के अनुसार काम करने लगता है। कैंसर की स्थिति में कुछ कोशिकाएं नियंत्रण से बाहर हो जाती हैं। ऐसे में </span>mRNA <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीक शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को फिर से सक्रिय कर उन्हें लड़ने के लिए तैयार करती है। इस प्रकार यह तकनीक बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।</span></p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-03/0211.jpg" alt="02" width="1280" height="720"></img></p>
<p><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">क्यों ला सकती है क्रांति</span>?</strong></p>
<p>mRNA <span lang="hi" xml:lang="hi">वैक्सीन व्यक्तिगत (पर्सनलाइज्ड) उपचार प्रदान कर सकती है। यह शरीर को सीधे कैंसर कोशिकाओं से लड़ने के लिए तैयार करती है। भविष्य में यह कैंसर को होने से पहले रोकने की संभावना भी पैदा कर सकती है। इसी कारण इसे चिकित्सा विज्ञान में एक बड़ा बदलाव (गेम-चेंजर) माना जा रहा है।</span></p>
<p><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अफवाहें क्यों फैलती हैं</span>?</strong></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">कैंसर उपचार की इस नई तकनीक के साथ एक बड़ी चुनौती भी सामने आई है—अफवाहें (</span>misinformation)<span lang="hi" xml:lang="hi">। लोगों में </span>mRNA <span lang="hi" xml:lang="hi">वैक्सीन को लेकर डर और भ्रम बढ़ रहा है।</span></p>
<p><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">विषय नया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन डर पुराना है</span></strong></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">नई तकनीक होने के कारण लोगों में स्वाभाविक रूप से शंका और डर पैदा होता है।</span></p>
<p><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया का प्रभाव</span></strong></p>
<p>WhatsApp, Facebook <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>YouTube <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे प्लेटफॉर्म पर अधूरी या भ्रामक जानकारी तेजी से फैलती है।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-03/0312.jpg" alt="03" width="1280" height="720"></img></span></p>
<p><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">विज्ञान की जटिलता</span></strong></p>
<p>mRNA <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसी तकनीक को समझना आसान नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे गलत जानकारी ज्यादा विश्वसनीय लगने लगती है।</span></p>
<p><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">विश्वास का संकट</span></strong></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार और दवा कंपनियों के प्रति अविश्वास भी अफवाहों को बढ़ावा देता है।</span></p>
<p><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वार्थ के लिए फैलती अफवाहें</span></strong></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ लोग लाभ के लिए डर फैलाते हैं।</span></p>
<p><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक मान्यताएं</span></strong></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">लोग अक्सर सुनी-सुनाई बातों पर भरोसा करते हैं।</span></p>
<p><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">विज्ञान बनाम गति</span></strong></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">जहां विज्ञान को समय लगता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं अफवाहें तेजी से फैलती हैं।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">अफवाहों का मुख्य कारण डर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जानकारी की कमी और तेज संचार है। इसका समाधान है—सही और सरल जानकारी का प्रसार।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"> मेरी लोगों को सलाह है कि किसी भी जानकारी को स्वीकार करने से पहले यह जांचें कि:</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"> क्या स्रोत विश्वसनीय है</span>?</p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"> क्या उसमें किसी का स्वार्थ है</span>?</p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"> क्या यह जनहित में है</span>?</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चर्चा पत्र</category>
                                    

                <link>https://hindi.khabarchhe.com/charcha-patra/why-do-rumors-spread-about-cancer-mrna-vaccine/article-1995</link>
                <guid>https://hindi.khabarchhe.com/charcha-patra/why-do-rumors-spread-about-cancer-mrna-vaccine/article-1995</guid>
                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 17:43:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dr. Dinky Gajiwala]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>26 साल की महिला के मुंह में 38 दांतों का वर्ल्ड रिकॉर्ड, क्या ऐसे दांत निकलवा देने चाहिए?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भारत में एक अनोखा विश्व रिकॉर्ड बना है। कल्पना बालन नाम की 26 वर्षीय महिला के मुंह में कुल 38 दांत हैं, जो एक सामान्य व्यक्ति से 6 अधिक हैं। इस उपलब्धि के कारण उनका नाम Guinness World Records में दर्ज किया गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि किसी व्यक्ति के मुंह में अतिरिक्त दांत हों, तो क्या उन्हें निकलवा देना चाहिए या रहने देना ठीक है?</p>
<p>सामान्यतः एक वयस्क व्यक्ति के मुंह में 32 दांत होते हैं। लेकिन कल्पना बालन के मुंह में नीचे के जबड़े में 4 और ऊपर के जबड़े में 2 अतिरिक्त दांत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/charcha-patra/world-record-of-38-teeth-in-indian-woman-s-mouth--should-extra-teeth-be-extracted/article-1951"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-03/019.jpg" alt=""></a><br /><p>भारत में एक अनोखा विश्व रिकॉर्ड बना है। कल्पना बालन नाम की 26 वर्षीय महिला के मुंह में कुल 38 दांत हैं, जो एक सामान्य व्यक्ति से 6 अधिक हैं। इस उपलब्धि के कारण उनका नाम Guinness World Records में दर्ज किया गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि किसी व्यक्ति के मुंह में अतिरिक्त दांत हों, तो क्या उन्हें निकलवा देना चाहिए या रहने देना ठीक है?</p>
<p>सामान्यतः एक वयस्क व्यक्ति के मुंह में 32 दांत होते हैं। लेकिन कल्पना बालन के मुंह में नीचे के जबड़े में 4 और ऊपर के जबड़े में 2 अतिरिक्त दांत हैं। ये दांत किशोरावस्था में धीरे-धीरे उगने लगे थे। उन्हें विशेष दर्द तो नहीं होता, लेकिन खाना खाते समय अक्सर भोजन दांतों के बीच फंस जाता है।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-03/photo-(2)3.jpg" alt="Photo-(2)" width="1280" height="720"></img></p>
<p><strong>अतिरिक्त दांत क्यों होते हैं?</strong></p>
<p>इस स्थिति को Hyperdontia या supernumerary teeth कहा जाता है। इसमें सामान्य से अधिक दांत विकसित होते हैं। दुनिया में लगभग 3–4% लोगों में यह समस्या देखी जाती है।</p>
<p><strong>इसके कारण:</strong></p>
<p>दांतों के टुथ बड्स का अधिक विकास<br />आनुवंशिक कारण<br />टुथ बड्स का दो भागों में विभाजित हो जाना</p>
<p>क्या अतिरिक्त दांत रखना चाहिए या निकलवाना चाहिए?</p>
<p><strong>इसका निर्णय कई बातों पर निर्भर करता है। यदि अतिरिक्त दांत:</strong></p>
<p> दर्द नहीं देते<br /> चबाने में बाधा नहीं डालते<br /> अन्य दांतों को प्रभावित नहीं करते<br /> संक्रमण या सड़न का खतरा नहीं बढ़ाते</p>
<p>तो उन्हें रहने दिया जा सकता है, लेकिन नियमित चेक-अप जरूरी है।</p>
<p><strong>कब निकलवाना जरूरी होता है?</strong></p>
<p><strong><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-03/0310.jpg" alt="03" width="1280" height="720"></img></strong></p>
<p><strong>डॉक्टर आमतौर पर दांत निकालने की सलाह देते हैं यदि:</strong></p>
<p> खाने में दिक्कत हो<br /> दांतों की लाइन बिगड़ने लगे<br /> चबाने में समस्या हो<br /> संक्रमण या सड़न का खतरा बढ़ जाए</p>
<p>कई मामलों में सर्जरी के जरिए अतिरिक्त दांत आसानी से निकाले जा सकते हैं, अतिरिक्त दांत होना दुर्लभ है, लेकिन हर मामले में उन्हें निकालना जरूरी नहीं होता। यदि वे कोई समस्या नहीं कर रहे हैं, तो डॉक्टर की निगरानी में रखा जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चर्चा पत्र</category>
                                    

                <link>https://hindi.khabarchhe.com/charcha-patra/world-record-of-38-teeth-in-indian-woman-s-mouth--should-extra-teeth-be-extracted/article-1951</link>
                <guid>https://hindi.khabarchhe.com/charcha-patra/world-record-of-38-teeth-in-indian-woman-s-mouth--should-extra-teeth-be-extracted/article-1951</guid>
                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 13:07:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dr. Rachana Dave Bhatt]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डेंटल ट्रीटमेंट के लिए भारत क्यों आ रहे हैं विदेशी मरीज? खर्च में कितना अंतर</title>
                                    <description><![CDATA[<p><span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया भर में दांतों की चिकित्सा तेजी से महंगी होती जा रही है और इसी वजह से भारत डेंटल टूरिज्म का एक बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है। आज केवल एनआरआई ही नहीं बल्कि अमेरिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यूरोप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मध्य-पूर्व और अफ्रीका के हजारों विदेशी मरीज भी डेंटल ट्रीटमेंट के लिए भारत आ रहे हैं।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">ताजा मार्केट रिसर्च के अनुसार भारत का डेंटल टूरिज्म उद्योग अगले दशक में तेजी से बढ़ने वाला है। वर्ष </span>2024<span lang="hi" xml:lang="hi"> में भारत का डेंटल टूरिज्म बाजार लगभग </span>1.33<span lang="hi" xml:lang="hi"> अरब डॉलर (करीब </span>₹11,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़) का था। अनुमान है कि वर्ष </span>2033<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक यह बाजार बढ़कर लगभग </span>7.16</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/charcha-patra/why-are-foreign-patients-coming-to-india-for-dental-treatment--what-is-the-difference-in-cost/article-1899"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-03/014.jpg" alt=""></a><br /><p><span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया भर में दांतों की चिकित्सा तेजी से महंगी होती जा रही है और इसी वजह से भारत डेंटल टूरिज्म का एक बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है। आज केवल एनआरआई ही नहीं बल्कि अमेरिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यूरोप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मध्य-पूर्व और अफ्रीका के हजारों विदेशी मरीज भी डेंटल ट्रीटमेंट के लिए भारत आ रहे हैं।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">ताजा मार्केट रिसर्च के अनुसार भारत का डेंटल टूरिज्म उद्योग अगले दशक में तेजी से बढ़ने वाला है। वर्ष </span>2024<span lang="hi" xml:lang="hi"> में भारत का डेंटल टूरिज्म बाजार लगभग </span>1.33<span lang="hi" xml:lang="hi"> अरब डॉलर (करीब </span>₹11,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़) का था। अनुमान है कि वर्ष </span>2033<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक यह बाजार बढ़कर लगभग </span>7.16<span lang="hi" xml:lang="hi"> अरब डॉलर (करीब </span>₹59,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़) तक पहुंच सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि </span>2025<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>2033<span lang="hi" xml:lang="hi"> के बीच इस क्षेत्र में लगभग </span>20.7<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज हो सकती है।</span></p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-03/052.jpg" alt="05" width="1280" height="720"></img></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में आधुनिक डेंटल क्लीनिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल स्कैनिंग तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता के इम्प्लांट सिस्टम और अनुभवी डॉक्टर उपलब्ध होने के कारण विदेशी मरीज यहां भरोसे के साथ इलाज कराते हैं। कम खर्च</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेहतर तकनीक और कम समय में इलाज मिलना भारत को डेंटल ट्रीटमेंट के लिए आकर्षक बनाता है।</span></p>
<p><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">खर्च में कितना अंतर</span></strong></p>
<p><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">डेंटल इम्प्लांट</span></strong></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिका या यूरोप में एक डेंटल इम्प्लांट का खर्च आमतौर पर </span>₹2.5<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख से </span>₹5<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख तक होता है। भारत में यही इलाज लगभग </span>₹30,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>₹55,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> में हो जाता है। यानी एक इम्प्लांट में ही मरीज लाखों रुपये की बचत कर सकते हैं।</span></p>
<p><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">रूट कैनाल ट्रीटमेंट</span></strong></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिका और ब्रिटेन में रूट कैनाल का खर्च </span>₹80,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>₹1.2<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख तक होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि भारत में यह इलाज लगभग </span>₹8,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>₹12,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> में किया जा सकता है।</span></p>
<p><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">डेंटल क्राउन</span></strong></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिमी देशों में पोर्सिलेन या सिरेमिक क्राउन का खर्च लगभग </span>₹1<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख से </span>₹1.5<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख होता है। भारत में यही उपचार लगभग </span>₹10,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>₹25,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> में उपलब्ध है।</span></p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-03/081.jpg" alt="08" width="1280" height="720"></img></p>
<p><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्माइल मेकओवर</span></strong></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिका में स्माइल मेकओवर के लिए </span>₹8<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख से </span>₹20<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख तक खर्च हो सकता है। भारत में यह उपचार लगभग </span>₹1.2<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख से </span>₹3.5<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख के बीच उपलब्ध है।</span></p>
<p><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">दांत सफेद करना</span></strong></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिमी देशों में दांत सफेद करने की प्रक्रिया </span>₹50,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>₹80,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक हो सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि भारत में यह इलाज </span>₹8,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>₹12,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> के बीच किया जा सकता है।</span></p>
<p><strong>TMJ <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>TMD <span lang="hi" xml:lang="hi">उपचार के लिए भी भारत बना केंद्र</span></strong></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">दांतों के इलाज के अलावा भारत अब </span>TMJ (Temporomandibular Joint) <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>TMD <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी जबड़े से जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए भी एक बड़ा वैश्विक केंद्र बन रहा है। इन समस्याओं के कारण जबड़े में दर्द</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुंह खोलने में दिक्कत और सिरदर्द जैसी समस्याएं होती हैं।</span></p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-03/071.jpg" alt="07" width="1280" height="720"></img></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया की तुलना में भारत में </span>TMJ <span lang="hi" xml:lang="hi">उपचार का खर्च लगभग </span>60<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>80<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत तक कम होता है। उदाहरण के तौर पर भारत में स्प्लिंट थेरेपी लगभग </span>₹5,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>₹25,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> में हो सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि आर्थ्रोस्कोपी जैसी सर्जरी लगभग </span>₹80,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>₹1.5<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख में हो सकती है। गंभीर मामलों में जबड़े के जॉइंट रिप्लेसमेंट की लागत लगभग </span>₹4<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख से </span>₹8<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख तक हो सकती है।</span></p>
<p> </p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में </span>CBCT <span lang="hi" xml:lang="hi">स्कैन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल बाइट एनालिसिस (</span>T-Scan) <span lang="hi" xml:lang="hi">और इलेक्ट्रोमायोग्राफी जैसी आधुनिक जांच तकनीकों के कारण मरीजों को सटीक निदान और उपचार मिल पाता है।</span></p>
<p><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">विदेशी मरीज भारत क्यों चुनते हैं</span></strong></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में इलाज सस्ता होने का मतलब यह नहीं है कि गुणवत्ता कम है। देश में बड़ी संख्या में ऐसे डेंटिस्ट हैं जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण प्राप्त किया है। कई क्लीनिकों में विश्वस्तरीय उपकरण उपलब्ध हैं। इसके अलावा पश्चिमी देशों में इलाज के लिए कई महीनों तक इंतजार करना पड़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि भारत में अक्सर कुछ ही दिनों में जांच और उपचार दोनों संभव हो जाता है।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-03/061.jpg" alt="06" width="1280" height="720"></img></span></p>
<p><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">डेंटल टूरिज्म के प्रमुख शहर</span></strong></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुंबई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेंगलुरु</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हैदराबाद और चेन्नई जैसे शहर डेंटल टूरिज्म के बड़े केंद्र बन चुके हैं। गुजरात में भी अहमदाबाद और सूरत जैसे शहर इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक डेंटल टूरिज्म का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चर्चा पत्र</category>
                                    

                <link>https://hindi.khabarchhe.com/charcha-patra/why-are-foreign-patients-coming-to-india-for-dental-treatment--what-is-the-difference-in-cost/article-1899</link>
                <guid>https://hindi.khabarchhe.com/charcha-patra/why-are-foreign-patients-coming-to-india-for-dental-treatment--what-is-the-difference-in-cost/article-1899</guid>
                <pubDate>Sat, 14 Mar 2026 17:03:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dr. Risshi Bhatt]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत में कैंसर की स्थिति क्या है, सरकार क्या कर रही है?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में कैंसर के मामलों में पिछले कुछ वर्षों में चिंताजनक वृद्धि देखी जा रही है। हाल ही में संसद में दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष </span>2021<span lang="hi" xml:lang="hi"> के बाद से हर साल औसतन लगभग </span>28,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> नए कैंसर के मामले और लगभग </span>15,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> अतिरिक्त मौतें दर्ज हो रही हैं। ये आंकड़े देश की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती को दर्शाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसके साथ ही केंद्र सरकार और स्वास्थ्य तंत्र कैंसर से लड़ने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम भी उठा रहे हैं।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे कई कारण बताए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/charcha-patra/what-is-the-status-of-cancer-in-india--and-what-is-the-government-doing/article-1898"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-03/014.jpg" alt=""></a><br /><p><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में कैंसर के मामलों में पिछले कुछ वर्षों में चिंताजनक वृद्धि देखी जा रही है। हाल ही में संसद में दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष </span>2021<span lang="hi" xml:lang="hi"> के बाद से हर साल औसतन लगभग </span>28,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> नए कैंसर के मामले और लगभग </span>15,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> अतिरिक्त मौतें दर्ज हो रही हैं। ये आंकड़े देश की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती को दर्शाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसके साथ ही केंद्र सरकार और स्वास्थ्य तंत्र कैंसर से लड़ने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम भी उठा रहे हैं।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे कई कारण बताए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार लोगों की औसत आयु बढ़ना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बुजुर्ग आबादी का बढ़ना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेहतर जांच तकनीकों का उपलब्ध होना और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ना भी इन आंकड़ों में वृद्धि का कारण है। इसका अर्थ यह भी है कि अब पहले की तुलना में अधिक मामलों की समय पर पहचान हो पा रही है।</span></p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-03/024.jpg" alt="02" width="1280" height="720"></img></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष </span>2019<span lang="hi" xml:lang="hi"> में भारत में लगभग </span>13.5<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख कैंसर के मामले दर्ज किए गए थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो </span>2024<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक बढ़कर लगभग </span>15.3<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख से अधिक हो गए हैं। इसी तरह कैंसर से होने वाली मौतों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। वर्ष </span>2023<span lang="hi" xml:lang="hi"> में करीब </span>8.2<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख लोगों की मौत कैंसर के कारण होने का अनुमान है।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">इस बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने कई स्वास्थ्य कार्यक्रम और योजनाएं शुरू की हैं। इनमें प्रमुख कार्यक्रम **नेशनल प्रोग्राम फॉर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ कैंसर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डायबिटीज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कार्डियोवैस्कुलर डिजीज एंड स्ट्रोक (</span>NPCDCS) <span lang="hi" xml:lang="hi">है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य कैंसर सहित गैर-संचारी रोगों की रोकथाम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समय पर जांच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उपचार और जागरूकता बढ़ाना है।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार के अनुसार इस योजना के तहत देशभर में </span>700<span lang="hi" xml:lang="hi"> से अधिक जिला स्तरीय </span>NCD <span lang="hi" xml:lang="hi">क्लीनिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लगभग </span>268<span lang="hi" xml:lang="hi"> डे-केयर सेंटर और हजारों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेष क्लीनिक स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों पर लोगों को कैंसर सहित विभिन्न रोगों की जांच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परामर्श और उपचार के लिए मार्गदर्शन दिया जाता है।</span></p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-03/034.jpg" alt="03" width="1280" height="720"></img></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">कैंसर की समय पर पहचान सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कई स्क्रीनिंग कार्यक्रम भी शुरू किए हैं। विशेष रूप से महिलाओं में पाए जाने वाले स्तन कैंसर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सर्वाइकल कैंसर और मुंह के कैंसर की जांच के लिए गांव और शहर दोनों स्तरों पर अभियान चलाए जा रहे हैं। यह कार्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत किया जा रहा है ताकि आम लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से पहुंच सकें।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके अलावा आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के माध्यम से गरीब और कमजोर वर्गों को मुफ्त या कम लागत में इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इस योजना के जरिए लाखों मरीजों को महंगे अस्पतालों में उपचार मिल पाया है।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार देशभर में आधुनिक कैंसर उपचार सुविधाओं का विस्तार भी कर रही है। कई सरकारी मेडिकल कॉलेजों और सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में रेडियोथेरेपी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कीमोथेरेपी और अन्य आधुनिक उपचार सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">विशेष रूप से महिलाओं में स्तन कैंसर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सर्वाइकल कैंसर और ओवेरियन कैंसर के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है। इसे देखते हुए सरकार ने महिलाओं के लिए विशेष जांच कार्यक्रम भी शुरू किए हैं।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">कैंसर के खिलाफ लड़ाई में शोध और आंकड़ों का भी महत्वपूर्ण योगदान है। भारत सरकार इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (</span>ICMR)  <span lang="hi" xml:lang="hi">के माध्यम से नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्रा  चला रही है। इसके तहत देशभर में कैंसर से जुड़े मामलों का डेटा एकत्र किया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे स्वास्थ्य नीतियों और योजनाओं के निर्माण में मदद मिलती है।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कैंसर से लड़ाई में तीन बातें सबसे महत्वपूर्ण हैं — समय पर जांच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सही उपचार और लोगों में जागरूकता। सरकार इन तीनों क्षेत्रों में प्रयास बढ़ा रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन बढ़ती आबादी और बदलती जीवनशैली के कारण चुनौतियां भी लगातार बढ़ रही हैं।</span></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चर्चा पत्र</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Mar 2026 15:09:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dr. Dinky Gajiwala]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकार लड़कियों को मुफ़्त एंटी-कैंसर HPV वैक्सीन देगी, PM मोदी 28 को लॉन्च करेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 फरवरी को अजमेर से HPV (ह्यूमन पैपिलोमावायरस) के खिलाफ़ देश भर में वैक्सीनेशन कैंपेन शुरू करने वाले हैं। इसका मुख्य मकसद महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर को कम करना है। सर्वाइकल कैंसर भारत में महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है और इसके लगभग 90% मामले HPV इन्फेक्शन की वजह से होते हैं। यह वैक्सीन न सिर्फ़ सर्वाइकल कैंसर बल्कि एनल कैंसर, पेनाइल कैंसर, वैजाइनल कैंसर, वल्वर कैंसर, गले के कैंसर में भी असरदार है। HPV एक आम तौर पर फैलने वाला वायरस है, जो ज़्यादातर फिजिकल कॉन्टैक्ट से फैलता है।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-02/024.jpg" alt="02" width="1200" height="720" /></p>
<p><strong>कैंपेन की खास बातें</strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/charcha-patra/pm-narendra-modi-to-launch-hpv-vaccination-drive/article-1829"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-02/013.jpg" alt=""></a><br /><p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 फरवरी को अजमेर से HPV (ह्यूमन पैपिलोमावायरस) के खिलाफ़ देश भर में वैक्सीनेशन कैंपेन शुरू करने वाले हैं। इसका मुख्य मकसद महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर को कम करना है। सर्वाइकल कैंसर भारत में महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है और इसके लगभग 90% मामले HPV इन्फेक्शन की वजह से होते हैं। यह वैक्सीन न सिर्फ़ सर्वाइकल कैंसर बल्कि एनल कैंसर, पेनाइल कैंसर, वैजाइनल कैंसर, वल्वर कैंसर, गले के कैंसर में भी असरदार है। HPV एक आम तौर पर फैलने वाला वायरस है, जो ज़्यादातर फिजिकल कॉन्टैक्ट से फैलता है।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-02/024.jpg" alt="02" width="1280" height="720"></img></p>
<p><strong>कैंपेन की खास बातें</strong></p>
<p>इस नेशनल कैंपेन के तहत, 14 साल की लड़कियों को HPV वैक्सीन की एक डोज़ दी जाएगी। हर साल लगभग 1.15 करोड़ लड़कियों को यह वैक्सीन देने का टारगेट है। अगर यह वैक्सीन टीनएज में दी जाए, तो ज़्यादा मज़बूत और लंबे समय तक चलने वाली सुरक्षा मिलती है।</p>
<p><strong>कौन सी वैक्सीन दी जाएगी?</strong></p>
<p>अभी के नेशनल कैंपेन में गार्डासिल वैक्सीन का इस्तेमाल किया जाएगा। भारत में बनाया गया Cervavac (Serum Institute) अभी इस्तेमाल नहीं हो रहा है क्योंकि इसे अभी WHO की मंज़ूरी का इंतज़ार है। मंज़ूरी के बाद इसे भविष्य में शामिल किया जा सकता है। GAVI वैक्सीन अलायंस भारत को 26 मिलियन डोज़ देगा, जिसमें से 10 मिलियन डोज़ पहले ही आ चुकी हैं।</p>
<p><strong>क्या एक डोज़ काफ़ी है?</strong></p>
<p>हाँ। WHO के एक्सपर्ट्स के मुताबिक, 9 से 20 साल की लड़कियों को एक डोज़ भी असरदार सुरक्षा देती है।<br />जबकि 21 साल से ज़्यादा उम्र की महिलाओं के लिए 2 डोज़ रिकमेंड की जाती हैं। कम इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए 3 डोज़ की सलाह दी जाती है।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-02/036.jpg" alt="03" width="1280" height="720"></img></p>
<p><strong>क्या यह भारत में पहली बार हो रहा है, क्या यह किसी और देश में दिया जा रहा है?</strong></p>
<p>ऑस्ट्रेलिया में HPV वैक्सीनेशन शुरू होने के बाद, जवान महिलाओं में HPV का फैलाव 22.7% से घटकर 1.5% हो गया। भारत में कुछ राज्यों ने पहले ही शुरू कर दिया है। सिक्किम ने 2018 में शुरू किया, जिसमें 95% से ज़्यादा लड़कियों को कवर किया गया। जबकि पंजाब ने 2016 में शुरू किया और 97% को वैक्सीन लगाई गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चर्चा पत्र</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 15:09:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dr. Dinky Gajiwala]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्या है मल्टीपल मायलोमा? जिसके कारण एक्ट्रेस प्रवीणा देशपांडे का 61 वर्ष की उम्र में निधन हुआ</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बॉलीवुड और टीवी की वरिष्ठ अभिनेत्री प्रवीणा देशपांडे का </span><span lang="gu" style="font-family:Shruti, sans-serif;" xml:lang="gu">61</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> वर्ष की उम्र में मंगलवार को निधन हो गया। यह जानकारी उनके परिवार ने उनके आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट के माध्यम से दी। मंगलवार दोपहर मुंबई के अंधेरी स्थित श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया। अभिनेत्री लंबे समय से कैंसर से जूझ रही थीं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">साल </span><span lang="gu" style="font-family:Shruti, sans-serif;" xml:lang="gu">2019</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> में उन्हें मल्टीपल मायलोमा का निदान हुआ था। बोन मैरो ट्रांसप्लांट के दौरान वे </span><span lang="gu" style="font-family:Shruti, sans-serif;" xml:lang="gu">17</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> दिनों तक आइसोलेशन में रहीं। कैंसर का पता चलने के बाद भी वे सक्रिय रहीं</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन उन्होंने बताया था कि उनकी ताकत लगातार कम हो रही थी</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/charcha-patra/what-is-multiple-myeloma/article-1777"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-02/dinky.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बॉलीवुड और टीवी की वरिष्ठ अभिनेत्री प्रवीणा देशपांडे का </span><span lang="gu" style="font-family:Shruti, sans-serif;" xml:lang="gu">61</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> वर्ष की उम्र में मंगलवार को निधन हो गया। यह जानकारी उनके परिवार ने उनके आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट के माध्यम से दी। मंगलवार दोपहर मुंबई के अंधेरी स्थित श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया। अभिनेत्री लंबे समय से कैंसर से जूझ रही थीं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">साल </span><span lang="gu" style="font-family:Shruti, sans-serif;" xml:lang="gu">2019</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> में उन्हें मल्टीपल मायलोमा का निदान हुआ था। बोन मैरो ट्रांसप्लांट के दौरान वे </span><span lang="gu" style="font-family:Shruti, sans-serif;" xml:lang="gu">17</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> दिनों तक आइसोलेशन में रहीं। कैंसर का पता चलने के बाद भी वे सक्रिय रहीं</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन उन्होंने बताया था कि उनकी ताकत लगातार कम हो रही थी और काम करने की क्षमता घटती जा रही थी। अंततः </span><span lang="gu" style="font-family:Shruti, sans-serif;" xml:lang="gu">17</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> फरवरी को उनका निधन हो गया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-02/021.jpg" alt="02" width="1280" height="720"></img></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रवीणा देशपांडे ने </span>Ready <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">में शालिनी चौधरी की भूमिका निभाई थी। इसके अलावा उन्होंने </span>Ek Villain,Gabbar Is Back <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">और </span>Parmanu: The Story of Pokhran <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जैसी फिल्मों में भी काम किया था। हाल ही में वे इमरान हाशमी की वेब सीरीज़ ‘तस्करी: द स्मगलर्स वेब’ में कैमियो रोल में नजर आई थीं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">क्या है मल्टीपल मायलोमा</span>?</p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मल्टीपल मायलोमा एक प्रकार का ब्लड कैंसर है। यह बोन मैरो की प्लाज़्मा कोशिकाओं में शुरू होता है। यह सामान्य रक्त कोशिकाओं को नष्ट करता है और असामान्य प्रोटीन बनाता है। इससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और किडनी को नुकसान हो सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-02/033.jpg" alt="03" width="1280" height="720"></img></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यह एक गंभीर लेकिन उपचार योग्य बीमारी है। कीमोथेरेपी और स्टेम सेल ट्रांसप्लांट के माध्यम से इसका इलाज किया जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लक्षण:</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><span> </span>रीढ़</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">छाती या कूल्हे में हड्डियों का दर्द</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><span> </span>थकान</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><span> </span>बार-बार संक्रमण</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><span> </span>किडनी की समस्या</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><span> </span>वजन कम होना</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कारण और जोखिम:</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सटीक कारण अज्ञात है</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन यह </span><span lang="gu" style="font-family:Shruti, sans-serif;" xml:lang="gu">60</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> वर्ष से अधिक उम्र के लोगों और पुरुषों में अधिक पाया जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">निदान:</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><span> </span>ब्लड और यूरिन टेस्ट (</span>M-spike <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">की जांच)</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><span> </span>बोन मैरो बायोप्सी</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><span> </span>हड्डियों का स्कैन</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">समय पर निदान और विशेषज्ञ ऑन्कोलॉजिस्ट की सलाह से इस रोग का प्रभावी प्रबंधन संभव है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चर्चा पत्र</category>
                                    

                <link>https://hindi.khabarchhe.com/charcha-patra/what-is-multiple-myeloma/article-1777</link>
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                <pubDate>Wed, 18 Feb 2026 16:11:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dr. Dinky Gajiwala]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक महीने के भीतर महिला ने दो बच्चों को जन्म कैसे दे दिया? जन्म के दो दिन पहले ही जन्म प्रमाण पत्र जारी हो गया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  </p>
<p>पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का काम अपने आखिरी स्टेज में है। फाइनल वोटर लिस्ट 28 फरवरी तक पब्लिश होनी है। सुनवाई हर हाल में 21 फरवरी तक पूरी होनी है। एक अनुमान के मुताबिक, करीब 32 लाख नाम अनमैप्ड हैं, जिनकी सुनवाई होनी है। ड्यूटी पर मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों को इन लोगों का डेटा सॉर्ट करने में काफी मुश्किल हो रही है। चुनाव आयोग को बंगाल में ऐसे मामले भी मिले हैं जहां दो बच्चों के जन्म के समय में बहुत कम गैप है। एक मामले में तो ऐसा भी मामला सामने आया है जहां जन्म</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/charcha-patra/how-a-woman-gave-birth-to-two-children-within-a/article-1754"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-02/125.jpg" alt=""></a><br /><p> </p>
<p>पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का काम अपने आखिरी स्टेज में है। फाइनल वोटर लिस्ट 28 फरवरी तक पब्लिश होनी है। सुनवाई हर हाल में 21 फरवरी तक पूरी होनी है। एक अनुमान के मुताबिक, करीब 32 लाख नाम अनमैप्ड हैं, जिनकी सुनवाई होनी है। ड्यूटी पर मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों को इन लोगों का डेटा सॉर्ट करने में काफी मुश्किल हो रही है। चुनाव आयोग को बंगाल में ऐसे मामले भी मिले हैं जहां दो बच्चों के जन्म के समय में बहुत कम गैप है। एक मामले में तो ऐसा भी मामला सामने आया है जहां जन्म से दो दिन पहले बर्थ सर्टिफिकेट जारी किया गया है।</p>
<p>एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, कोलकाता के दक्षिणी बाहरी इलाके मेटियाबुरूज इलाके में एक महिला के एक महीने के अंदर 2 बच्चे होने की बात कही गई है। एस.के. इरशाद और शेख नौशाद भाई हैं। SIR प्रोसेस के दौरान जमा किए गए डॉक्यूमेंट्स से पता चलता है कि दोनों भाइयों की उम्र में एक महीने से भी कम का अंतर है।</p>
<p>बड़े भाई के डॉक्यूमेंट में उनकी जन्मतिथि 5 दिसंबर, 1990 और छोटे भाई की जन्मतिथि 1 जनवरी, 1991 दिखाई गई है। इलेक्शन कमीशन के अधिकारियों ने बताया कि परिवार के सभी 10 सदस्यों की पहचान हो गई है। ऐसा लगता है कि उनके माता-पिता एक ही हैं। सुनवाई के दौरान पेश किए गए सभी 10 सेंसस फॉर्म और डॉक्यूमेंट में परिवार के मुखिया एस.के. अब्दुल को उनके पिता के तौर पर दिखाया गया है। मनोवारा बीबी का नाम लगातार मां के तौर पर लिखा गया है। 10 में से 4 बच्चों का जन्म 1 जनवरी को हुआ था।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-02/222.jpg" alt="2" width="1280" height="720"></img>
asianage.com

<p>नॉर्थ 24 परगना जिले के बारानगर से भी ऐसा ही एक मामला सामने आया है। दो दिन पहले एक व्यक्ति का बर्थ सर्टिफिकेट जारी किया गया था। एक वोटर की उम्र 5 साल थी, जबकि दूसरे की उम्र 13 साल पाई गई।</p>
<p>सुनवाई के दौरान कमीशन ने पाया कि पपील सरकार ने जो जन्मतिथि सर्टिफिकेट जमा किया था, उसमें 6 मार्च 1993 लिखा था, लेकिन उनका जन्म सर्टिफिकेट उनके जन्म से दो दिन पहले यानी 4 मार्च 1993 को रजिस्टर हुआ था। SIR के लिए काम करने वाले एक ऑफिसर ने बताया कि ऐसे मामलों में देरी होती है क्योंकि केस वेरिफिकेशन के लिए इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर के पास भेजा जाता है। संबंधित हॉस्पिटल अथॉरिटी से भी वेरिफिकेशन होता है। इन सभी प्रोसेस में बहुत समय लग रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चर्चा पत्र</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Feb 2026 18:22:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रात को मोबाईल देखना आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को नुकसान पहुँचाता है!</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तेज़ रफ़्तार वाली जीवनशैली में लोग अक्सर देर रात तक मोबाइल चलाते हैं या </span>OTT <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पर ‘एक एपिसोड और’ देखने की आदत से नींद से समझौता करते हैं। यह आदत भले ही मामूली लगे</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन लगातार कम नींद शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को गंभीर रूप से कमजोर कर देती है। इससे थकान</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तनाव</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूजन और डायबिटीज़ जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गहरी नींद के दौरान शरीर में मेलाटोनिन जैसे जरूरी हार्मोन बनते हैं और प्रतिरक्षा प्रणाली की मरम्मत व मजबूती की प्रक्रिया सक्रिय रहती है। नींद का पैटर्न बिगड़ने पर शरीर को “रीचार्ज” होने का</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/charcha-patra/watching-mobile-at-night-can-sabotage-your-immunity/article-1375"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2025-12/011.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तेज़ रफ़्तार वाली जीवनशैली में लोग अक्सर देर रात तक मोबाइल चलाते हैं या </span>OTT <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पर ‘एक एपिसोड और’ देखने की आदत से नींद से समझौता करते हैं। यह आदत भले ही मामूली लगे</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन लगातार कम नींद शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को गंभीर रूप से कमजोर कर देती है। इससे थकान</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तनाव</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूजन और डायबिटीज़ जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गहरी नींद के दौरान शरीर में मेलाटोनिन जैसे जरूरी हार्मोन बनते हैं और प्रतिरक्षा प्रणाली की मरम्मत व मजबूती की प्रक्रिया सक्रिय रहती है। नींद का पैटर्न बिगड़ने पर शरीर को “रीचार्ज” होने का समय नहीं मिलता और रोगों तथा कैंसर जैसी गंभीर स्थितियों से बचाव करने वाली कोशिकाएँ कमज़ोर पड़ जाती हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2025-12/031.jpg" alt="03" width="1280" height="720"></img></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नींद को चिकित्सा प्राथमिकता बनाइए</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लंबे समय तक स्वस्थ रहना है — चाहे कैंसर का ख़तरा कम करना हो या अन्य बीमारियाँ टालनी हों — अच्छी नींद बेहद ज़रूरी है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मेरी सलाह:</span></strong></p>
<p class="MsoNormal">-<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हर रात </span>7–8<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> घंटे भरपूर और बिना बाधा की नींद लें</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ताकि प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत रहे।</span></p>
<p class="MsoNormal">- <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल/स्क्रीन का उपयोग बंद करें</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">क्योंकि ब्लू लाइट मेलाटोनिन को बाधित करती है।</span></p>
<p class="MsoNormal">-<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नींद को अपनी दैनिक ज़रूरत और आदत बनाइये —बिल्कुल दवाओं और हेल्थ चेकअप की तरह।</span></p>
<p class="MsoNormal"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2025-12/021.jpg" alt="02" width="1280" height="720"></img></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">संपूर्ण स्वास्थ्य की चाभी: पर्याप्त नींद</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कैंसर विशेषज्ञों के अनुसार</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आहार</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">व्यायाम और तनाव प्रबंधन जितना महत्वपूर्ण है — वैसी ही प्राथमिकता नींद को भी मिलनी चाहिए। लगातार कम सोने की आदत चुपचाप हमारे शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा को खोखला करती है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यदि आप अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मज़बूत रखना चाहते हैं</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जल्दी स्वस्थ होना चाहते हैं और लंबे समय तक फिट रहना चाहते हैं — रात की क़द्र कीजिए</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नींद को प्राथमिकता दीजिए।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चर्चा पत्र</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Dec 2025 14:40:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dr. Dinky Gajiwala]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बड़ा गोलगप्पा बना मुसीबत: यूपी में महिला का जबड़ा क्यों खिसका?</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">न्यूज रिपोर्ट के अनुसार</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उत्तर प्रदेश की एक महिला ने बड़े गोलगप्पे को एक ही बार में खाने की कोशिश में मुंह बहुत ज्यादा खोल दिया। अचानक और अत्यधिक मुंह खोलने से टेम्पोरोमेंडिब्युलर जॉइंट (</span>TMJ) <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">से मैन्डिबुलर कोंडाइल अपनी सामान्य जगह (ग्लेनोइड फोसा) से फिसल सकता है</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिससे ‘जॉ डिसलोकेशन’ हो जाता है। चेहरा-जबड़ा सर्जरी में जबड़ा खिसकना एक जाना-पहचाना इमरजेंसी केस है</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">खासकर जब मुंह उसकी प्राकृतिक सीमा से ज्यादा खुल जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal">-<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">संभावित कारण</span></p>
<p class="MsoNormal">-<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बहुत ज्यादा मुंह खोलना</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बड़ा गोलगप्पा खाने की जबरन कोशिश में जबड़ा आगे-नीचे की तरफ खिसक सकता है।</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/charcha-patra/gol-gappa-gone-wrong--up-woman-suffers-jaw-dislocation-after-one-big-bite/article-1360"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2025-12/01.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">न्यूज रिपोर्ट के अनुसार</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उत्तर प्रदेश की एक महिला ने बड़े गोलगप्पे को एक ही बार में खाने की कोशिश में मुंह बहुत ज्यादा खोल दिया। अचानक और अत्यधिक मुंह खोलने से टेम्पोरोमेंडिब्युलर जॉइंट (</span>TMJ) <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">से मैन्डिबुलर कोंडाइल अपनी सामान्य जगह (ग्लेनोइड फोसा) से फिसल सकता है</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिससे ‘जॉ डिसलोकेशन’ हो जाता है। चेहरा-जबड़ा सर्जरी में जबड़ा खिसकना एक जाना-पहचाना इमरजेंसी केस है</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">खासकर जब मुंह उसकी प्राकृतिक सीमा से ज्यादा खुल जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal">-<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">संभावित कारण</span></p>
<p class="MsoNormal">-<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बहुत ज्यादा मुंह खोलना</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बड़ा गोलगप्पा खाने की जबरन कोशिश में जबड़ा आगे-नीचे की तरफ खिसक सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal">TMJ <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लिगामेंट्स का कमजोर होना</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कुछ लोगों के जोड़ों में स्वाभाविक रूप से लचक अधिक होती है</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिससे खिसकने का खतरा बढ़ जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अचानक या ज़ोरदार हरकत</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अचानक जम्हाई</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हँसी</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">काटने या खाने की जोरदार कोशिश में जोड़ पर झटका लग सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पहले से मौजूद </span>TMJ <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">की समस्या</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">क्लिकिंग</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पॉपिंग या कठोरता जैसे लक्षण पहले से हों तो जोखिम बढ़ता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मसल स्पैम</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">डिसलोकेशन के बाद जबड़े की मांसपेशियाँ जकड़ जाती हैं और मुंह खुला ही रह जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2025-12/02.jpg" alt="02" width="1280" height="720"></img></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जॉ डिसलोकेशन के लक्षण</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><span> </span>मुंह खुला रह जाना और बंद न हो पाना</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><span> </span>कानों के पास तेज़ दर्द</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><span> </span>बोलने-निगलने में कठिनाई</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><span> </span>लार टपकना</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><span> </span>जबड़ा आगे की ओर खिसक जाना</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><span> </span>चबाने-काटने में असमर्थता</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><span> </span>तत्काल उपचार</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><span> </span>तुरंत डेंटल/मैक्सिलोफेशियल इमरजेंसी विभाग जाएँ</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><span> </span>विशेषज्ञ सर्जन मैनुअल रिडक्शन के द्वारा जबड़ा वापस सेट करते हैं </span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">घर पर जबड़े को जोर से पीछे धकेलने की कोशिश न करें</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उपचार के बाद सावधानी</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ठोड़ी और </span>TMJ <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">क्षेत्र पर सपोर्ट बैंड</span></p>
<p class="MsoNormal">1–2<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> सप्ताह तक नरम आहार</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मुंह ज्यादा न खोलें</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><span> </span>जम्हाई लेते समय ठोड़ी को सहारा दें</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><span> </span>गर्म सेंक से मांसपेशियों को राहत</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><span> </span>डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं का सेवन</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भविष्य में बचाव</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><span> </span>बड़े निवालों से बचें (जैसे बड़ा गोलगप्पा</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बर्गर</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रोल)</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><span> </span>खाने को छोटे टुकड़ों में काटें</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><span> </span>अचानक बड़ी जम्हाई न लें</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><span> </span>सख्त भोजन से परहेज</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><span> </span>यदि </span>TMJ <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ढीला है तो फिजियोथेरेपी या स्टेबलाइजेशन डिवाइस इस्तेमाल करें</span></p>
<p class="MsoNormal"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2025-12/03.jpg" alt="03" width="1280" height="720"></img></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">खाने से जबड़ा खिसकना कभी कभी ही होता है</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पर संभव है — खासकर जब कोई बहुत बड़ा निवाला एक बार में लेने की कोशिश करे। समय पर उपचार से लंबे समय की </span>TMJ <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">क्षति</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पुराना दर्द और बार-बार डिसलोकेशन होने से बचाव संभव है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चर्चा पत्र</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Dec 2025 15:02:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dr. Risshi Bhatt]]></dc:creator>
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