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                <title>टेक और ऑटाे - Khabarchhe Hindi</title>
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                <description>टेक और ऑटाे RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>2026 डुकाटी मॉन्स्टर लॉन्च, 13 लाख 99 हजार से शुरू होती है इसकी कीमत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>डुकाटी मॉन्स्टर भारत में एक नए अवतार और शक्तिशाली 890cc V2 इंजन के साथ प्रवेश कर चुकी है। इसकी एक्स-शोरूम कीमत रु. 13.99 लाख है, जबकि मॉन्स्टर प्लस(+) की कीमत रु. 14.34 लाख से शुरू होती है। नए मॉन्स्टर में 110.7 hp पावर, अपडेटेड डिजाइन, लाइटवेट चेसिस और एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स पैकेज है.। तो चलिए हम इसके दोनों वेरिएंट के लिए सुविधाओं, प्रदर्शन, विशिष्टताओं और कीमत के बारे में जान लेते हैं।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/216.webp" alt="216" width="1200" height="720" />
jagran.com

<p>इटालियन बाइक निर्माता डुकाटी ने भारत में अपनी लोकप्रिय मॉन्स्टर श्रृंखला का पांचवां आधिकारिक रूप से अनावरण किया है। नई 2026 डुकाटी मॉन्स्टर की एक्स-शोरूम कीमत रु. 13.99</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/tech/2026-ducati-monster-launch-its-price-starts-from-rs-13/article-2717"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-08/203.webp" alt=""></a><br /><p>डुकाटी मॉन्स्टर भारत में एक नए अवतार और शक्तिशाली 890cc V2 इंजन के साथ प्रवेश कर चुकी है। इसकी एक्स-शोरूम कीमत रु. 13.99 लाख है, जबकि मॉन्स्टर प्लस(+) की कीमत रु. 14.34 लाख से शुरू होती है। नए मॉन्स्टर में 110.7 hp पावर, अपडेटेड डिजाइन, लाइटवेट चेसिस और एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स पैकेज है.। तो चलिए हम इसके दोनों वेरिएंट के लिए सुविधाओं, प्रदर्शन, विशिष्टताओं और कीमत के बारे में जान लेते हैं।</p>
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jagran.com

<p>इटालियन बाइक निर्माता डुकाटी ने भारत में अपनी लोकप्रिय मॉन्स्टर श्रृंखला का पांचवां आधिकारिक रूप से अनावरण किया है। नई 2026 डुकाटी मॉन्स्टर की एक्स-शोरूम कीमत रु. 13.99 लाख से शुरू होती है। यह बाइक दो वर्जन में उपलब्ध है, स्टैंडर्ड मॉन्स्टर और मॉन्स्टर+. दोनों में नया 890cc V2 इंजन, लाइटवेट चेसिस, अपडेटेड स्टाइलिंग और बेहतर इलेक्ट्रॉनिक्स पैकेज दिया गया है। डुकाटी रेड में बेस मॉडल की कीमत रु. 13.99 लाख है, जबकि आइसबर्ग व्हाइट और स्पोर्ट लिवरी की कीमत रु. 14.23 लाख होगी। मॉन्स्टर+ रु. 14.34 लाख से शुरू होता है, जिसमें टॉप कलर ऑप्शन रु. 14.45 लाख तक जाता है।</p>
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<p>यह लॉन्च प्रीमियम नेकेड बाइक सेगमेंट में डुकाटी की मौजूदगी को और मजबूत करता है। बाइक आधुनिक तकनीक को मूल 1992 मॉडल से प्रेरित डिजाइन के साथ जोड़ती है, जो इसे युवा और अनुभवी राइडर्स दोनों के लिए आकर्षक बनाती है। डुकाटी डीलरशिप पर डिलीवरी तुरंत शुरू हो गई है। इसके डिजाइन से लेकर प्रदर्शन तक की जानकारियों पर एक नजर डालते हैं।</p>
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<p>नए मॉन्स्टर के क्लासिक नेकेड लुक को बरकरार रखते हुए इसे नया रूप दिया गया है। बाइसन-बैक स्टाइल फ्यूल टैंक को फिर से डिजाइन किया गया है। हेडलाइट फुल-LED है और इसमें रोबोटिक दिखने वाला डिजाइन है। साइड पैनल सीट की ओर फैले हुए हैं, जिन पर डुकाटी शील्ड और बोर्गो पानिगाले फैक्ट्री कोऑर्डिनेट्स के निशान हैं। इस डिजाइन ने रेड डॉट डिजाइन अवॉर्ड 2026 भी जीता। मॉन्स्टर+ वर्जन में हेडलाइट काउल और पैसेंजर सीट कवर भी मिलता है।</p>
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<p>सुविधाओं में 800x400 रिजॉल्यूशन के साथ 5-इंच फुल-TFT इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर शामिल है। इसमें डुकाटी मल्टीमीडिया सिस्टम, टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन और क्रूज कंट्रोल शामिल हैं। पंखुड़ी के आकार वाली जॉयस्टिक का उपयोग करके राइडिंग मोड्स आसानी से चुने जा सकते हैं। 4 राइडिंग मोड्स उपलब्ध हैं, स्पोर्ट, रोड, अर्बन और वेट. कीलेस गो और बाय-डायरेक्शनल क्विक शिफ्टर भी मानक हैं।</p>
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<p>सुरक्षा के मोर्चे पर, 6-एक्सिस IMU-आधारित इलेक्ट्रॉनिक्स पैकेज काम करता है, जिसमें कॉर्नरिंग ABS, डुकाटी ट्रैक्शन कंट्रोल, व्हीली कंट्रोल, इंजन ब्रेक कंट्रोल और डुकाटी क्विक शिफ्ट 2.0 शामिल हैं। ब्रेकिंग सिस्टम में ब्रेम्बो M4.32 रेडियल कैलिपर्स और रेडियल मास्टर सिलेंडर के साथ ट्विन 320 mm फ्रंट डिस्क भी दिया गया है। टायरों में आगे का 120/70 और पीछे का 180/55 दिया गया है।</p>
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<p>इसके अंदर सबसे बड़ा बदलाव नया 890 cc V2 इंजन है, जो 9,000 rpm पर 110.7 हॉर्सपावर और 7,250 rpm पर 91.1 Nm टॉर्क उत्पन्न करता है। इंजन में इनटेक वेरिएबल टाइमिंग (IVT) सिस्टम है, जो आसान लो-स्पीड रिस्पॉन्स, मजबूत मिड-रेंज और हाई rpm पर ज्यादा पावर देता है. 4,000 से 10,000 rpm के बीच 80 प्रतिशत से अधिक टॉर्क उपलब्ध रहता है।</p>
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<p>मोनोकॉक फ्रेम में इंजन स्ट्रेस्ड मेंबर के रूप में काम करता है। सस्पेंशन 43 mm शोवा अपसाइड-डाउन फोर्क और प्रीलोड-एडजस्टेबल शोवा मोनोशॉक द्वारा दिया जाता है। सीट की ऊंचाई 815 mm है, जो 5 mm कम है. हैंडलबार को ऊपर उठाया गया है और आगे की ओर बढ़ाया गया है. वाल्व क्लियरेंस चेक इंटरवल को 45,000 Km तक बढ़ाया गया है, जिससे मेंटेनेंस लागत कम होती है। कुल मिलाकर, नई 2026 डुकाटी मॉन्स्टर एक हल्की, चुस्त और तकनीक से लैस नेकेड बाइक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक और ऑटाे</category>
                                    

                <link>https://hindi.khabarchhe.com/tech/2026-ducati-monster-launch-its-price-starts-from-rs-13/article-2717</link>
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                <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 18:25:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>7050mAh बैटरी और DSLR जैसे कैमरे के साथ Vivo S2 लॉन्च, जानें कीमत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अगर आप भी नया प्रीमियम स्मार्टफोन खरीदने की सोच रहे हैं, तो बाजार में एक नया और शानदार विकल्प आ गया है! Vivo ने भारतीय टेक मार्केट में अपनी S-सीरीज़ की वापसी कराई है। कंपनी ने अपना नवीनतम और शक्तिशाली स्मार्टफोन, Vivo S2, भारत में लॉन्च किया है। 7,050mAh बैटरी, 4K वीडियो रिकॉर्डिंग को सपोर्ट करने वाले कैमरे और दमदार डाइमेंसिटी 7360-टर्बो प्रोसेसर के साथ यह फोन प्रीमियम मिड-रेंज सेगमेंट में गेम-चेंजर साबित हो सकता है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/vivo-s21.webp" alt="vivo-s21" width="1200" height="720" />
vivo.com

<p>Vivo का नया Vivo S2 स्मार्टफोन दमदार फीचर्स के साथ लॉन्च हुआ है। Vivo का यह फोन प्रीमियम मिड-रेंज सेगमेंट में पेश किया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/tech/vivo-s2-launch-with-7050mah-battery-and-dslr-like-camera/article-2689"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-08/vivo-s2.webp" alt=""></a><br /><p>अगर आप भी नया प्रीमियम स्मार्टफोन खरीदने की सोच रहे हैं, तो बाजार में एक नया और शानदार विकल्प आ गया है! Vivo ने भारतीय टेक मार्केट में अपनी S-सीरीज़ की वापसी कराई है। कंपनी ने अपना नवीनतम और शक्तिशाली स्मार्टफोन, Vivo S2, भारत में लॉन्च किया है। 7,050mAh बैटरी, 4K वीडियो रिकॉर्डिंग को सपोर्ट करने वाले कैमरे और दमदार डाइमेंसिटी 7360-टर्बो प्रोसेसर के साथ यह फोन प्रीमियम मिड-रेंज सेगमेंट में गेम-चेंजर साबित हो सकता है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/vivo-s21.webp" alt="vivo-s21" width="1280" height="720"></img>
vivo.com

<p>Vivo का नया Vivo S2 स्मार्टफोन दमदार फीचर्स के साथ लॉन्च हुआ है। Vivo का यह फोन प्रीमियम मिड-रेंज सेगमेंट में पेश किया गया है, इसमें 120Hz कर्व्ड AMOLED डिस्प्ले, मीडियाटेक डाइमेंसिटी 7360-टर्बो प्रोसेसर, बड़ी 7,050mAh बैटरी और कई AI फीचर्स दिए गए हैं।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/vivo-s22.webp" alt="vivo-s22" width="1280" height="720"></img>
vivo.com

<p>Vivo S2 में 6.83-इंच 1.5K कर्व्ड AMOLED डिस्प्ले है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट, HDR10+ सपोर्ट और 3,000 nits तक की पीक ब्राइटनेस के साथ आता है। फोन में MediaTek Dimensity 7360-Turbo प्रोसेसर है, जिसके साथ एक विशाल वेपर चेंबर कूलिंग सिस्टम मिलता है, जो लंबे समय तक गेमिंग और मल्टीटास्किंग के दौरान बेहतरीन प्रदर्शन देने में मदद करता है। फोटोग्राफी के लिए, फोन में 50MP सोनी प्राइमरी कैमरा और 2MP सेकेंडरी सेंसर है, जबकि सेल्फी और वीडियो कॉल्स के लिए 32MP फ्रंट कैमरा मिलता है। फोन में फ्रंट और रियर दोनों कैमरों से 4K वीडियो रिकॉर्डिंग, ड्यूल व्यू वीडियो और AI Erase 2.0 जैसे फीचर्स भी दिए गए हैं।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/vivo-s23.webp" alt="vivo-s23" width="1280" height="720"></img>
vivo.com

<p>बार-बार चार्जिंग की झंझट को दूर करने के लिए Vivo ने अपने नए फोन में 7,050mAh बैटरी दी है जो 44W फ्लैशचार्ज फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है। यह स्मार्टफोन एंड्रॉइड 16 पर आधारित OriginOS 6 पर चलता है। इसमें AI क्रिएशन, AI कैप्शन, AI स्मार्ट कॉल असिस्टेंट, सर्कल टू सर्च, गूगल जेमिनी, प्राइवेट स्पेस और Vivo ऑफिस किट जैसे AI फीचर्स भी दिए गए हैं। कंपनी इस फोन के लिए 3 साल Android OS अपडेट्स और 5 साल सुरक्षा अपडेट्स का वादा कर रही है। Vivo S2 दो स्टोरेज वेरिएंट में लॉन्च किया गया है। 8GB + 128GB मॉडल की कीमत ₹39,999 है, जबकि 8GB + 256GB मॉडल की कीमत ₹49,999 है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक और ऑटाे</category>
                                    

                <link>https://hindi.khabarchhe.com/tech/vivo-s2-launch-with-7050mah-battery-and-dslr-like-camera/article-2689</link>
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                <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 21:35:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>JioTag 2 भारत में लॉन्च, एंड्रॉयड और आईफोन दोनों में करेगा काम; जानें कीमत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अगर आप अक्सर अपनी चाबियाँ, बैग या अन्य ज़रूरी सामान कहीं रखकर भूल जाते हैं, तो Jio ने आपके लिए नया JioTag 2 लॉन्च किया है। यह स्मार्ट ट्रैकर अब एंड्रॉयड और आईफोन दोनों के साथ काम करता है। इसकी शुरुआती कीमत ₹1,249 रखी गई है। कंपनी ने इसे नई डिज़ाइन और पहले से बेहतर ट्रैकिंग फीचर्स के साथ पेश किया है।</p>
<p><strong>कीमत और </strong><strong>नई डिज़ाइन</strong></p>
<p>JioTag 2 को भारत में ₹1,249 की कीमत पर लॉन्च किया गया है। बैंक ऑफर्स के साथ इसकी कीमत ₹1,199 तक कम हो सकती है। यह काले, लाल और हरे, तीन रंग विकल्पों में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/tech/jiotag-2-launched-in-india-will-work-on-both-android/article-2679"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-08/121.webp" alt=""></a><br /><p>अगर आप अक्सर अपनी चाबियाँ, बैग या अन्य ज़रूरी सामान कहीं रखकर भूल जाते हैं, तो Jio ने आपके लिए नया JioTag 2 लॉन्च किया है। यह स्मार्ट ट्रैकर अब एंड्रॉयड और आईफोन दोनों के साथ काम करता है। इसकी शुरुआती कीमत ₹1,249 रखी गई है। कंपनी ने इसे नई डिज़ाइन और पहले से बेहतर ट्रैकिंग फीचर्स के साथ पेश किया है।</p>
<p><strong>कीमत और </strong><strong>नई डिज़ाइन</strong></p>
<p>JioTag 2 को भारत में ₹1,249 की कीमत पर लॉन्च किया गया है। बैंक ऑफर्स के साथ इसकी कीमत ₹1,199 तक कम हो सकती है। यह काले, लाल और हरे, तीन रंग विकल्पों में उपलब्ध है। कंपनी ने इसे नई डिज़ाइन और नए आकार के साथ पेश किया है। ग्राहक इसे Amazon India से खरीद सकते हैं।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/111.webp" alt="111" width="1280" height="720"></img>
jio.com/jiotag

<p>JioTag 2 की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह एंड्रॉयड और iOS दोनों डिवाइसों के साथ काम करता है; पिछला JioTag दोनों प्लेटफ़ॉर्म को सपोर्ट नहीं करता था। नया मॉडल Google के Find My Device नेटवर्क और Apple के Find My नेटवर्क के साथ जुड़कर काम करता है। इससे उपयोगकर्ता अपनी खोई हुई वस्तुओं की सेमी-रियल-टाइम लोकेशन देख सकते हैं और यदि वस्तु ब्लूटूथ रेंज से बाहर भी हो, तो भी मैप के ज़रिए दिशा प्राप्त कर सकते हैं।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/101.webp" alt="101" width="1280" height="720"></img>
jio.com/jiotag

<p>JioTag 2 पॉलीकार्बोनेट मटेरियल से बनाया गया है और इसे IP64 रेटिंग मिली है, जो इसे धूल और पानी के छींटों से सुरक्षित बनाती है। इसमें 120dB का इन-बिल्ट स्पीकर है, जो ब्लूटूथ रेंज के भीतर मौजूद वस्तुओं को तेज़ आवाज़ के ज़रिए ढूँढ़ने में मदद करता है। इसमें नॉन-स्टैंडर्ड बैटरी का उपयोग किया गया है और इसका उद्देश्य उपयोगकर्ताओं के लिए रोज़मर्रा की ज़रूरी वस्तुओं को आसानी से ट्रैक करना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक और ऑटाे</category>
                                    

                <link>https://hindi.khabarchhe.com/tech/jiotag-2-launched-in-india-will-work-on-both-android/article-2679</link>
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                <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 17:11:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>होंडा ZR-V नई SUV लॉन्च; 23 KMPL माइलेज, 8 एयरबैग्स की सुरक्षा भी मिलेगी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>होंडा ने भारत में अपनी नई SUV लॉन्च की है। हालांकि, कंपनी पहले ही इस SUV से पर्दा उठा चुकी थी। अब कंपनी ने इसकी कीमतों की घोषणा कर दी है। हम Honda ZR-V की बात कर रहे हैं, जिसने CBU यूनिट के रूप में भारत में प्रवेश किया है।</p>
<p>यह SUV भारत में कंपनी की फ्लैगशिप कार है। कंपनी ने ₹48 लाख (एक्स-शोरूम) की शुरुआती कीमत पर Honda ZR-V लॉन्च की है। यह कार केवल एक ही वेरिएंट में आएगी और पूरी तरह से फीचर-लोडेड होगी। इस कार का सीधा मुकाबला स्कोडा कोडियाक, फॉक्सवैगन टेरोन और टिगुआन से होगा।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/tech/honda-zr-v-new-suv-launched-23-kmpl-mileage-safety-of/article-2649"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/915.webp" alt=""></a><br /><p>होंडा ने भारत में अपनी नई SUV लॉन्च की है। हालांकि, कंपनी पहले ही इस SUV से पर्दा उठा चुकी थी। अब कंपनी ने इसकी कीमतों की घोषणा कर दी है। हम Honda ZR-V की बात कर रहे हैं, जिसने CBU यूनिट के रूप में भारत में प्रवेश किया है।</p>
<p>यह SUV भारत में कंपनी की फ्लैगशिप कार है। कंपनी ने ₹48 लाख (एक्स-शोरूम) की शुरुआती कीमत पर Honda ZR-V लॉन्च की है। यह कार केवल एक ही वेरिएंट में आएगी और पूरी तरह से फीचर-लोडेड होगी। इस कार का सीधा मुकाबला स्कोडा कोडियाक, फॉक्सवैगन टेरोन और टिगुआन से होगा।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/1016.webp" alt="1016" width="1280" height="720"></img>
frontiergroup.co.in

<p>Honda ZR-V भारत में एक मजबूत हाइब्रिड पेट्रोल इंजन के साथ आती है। इसमें 2.0-लीटर, चार-सिलेंडर डायरेक्ट इंजेक्शन पेट्रोल इंजन दिया गया है। यह इंजन और बैटरी सेटअप मिलकर 184 HP की पावर और 315 Nm का टॉर्क जनरेट करते हैं। कार फ्रंट-व्हील ड्राइव के साथ आती है और इसमें e-CVT गियरबॉक्स मिलता है।</p>
<p>होंडा कंपनी का कहना है कि यह कार 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार केवल 7.9 सेकंड में पकड़ लेती है। कार की टॉप स्पीड इलेक्ट्रॉनिक रूप से 171 किलोमीटर प्रति घंटा सीमित है। यह कार 22.8 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देती है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/1120.webp" alt="1120" width="1280" height="720"></img>
autox.com

<p>कार के फ्रंट में स्लिम LED हेडलैंप्स दिए गए हैं, जो L-आकार के DRL के साथ आते हैं। इस कार की लंबाई 4,567 मिमी, चौड़ाई 1,840 मिमी, ऊंचाई 1,621 मिमी और व्हीलबेस 2,655 मिमी है। कार में 18-इंच के डुअल-टोन अलॉय व्हील्स दिए गए हैं।</p>
<p>Honda ZR-V में क्लियर-लेंस टेललैंप्स दिए गए हैं। इसमें रूफ-माउंटेड स्पॉइलर भी मिलता है। कार में सिल्वर फिनिश के साथ डुअल एग्जॉस्ट टिप्स दिए गए हैं। यह कार 4 रंग विकल्पों में उपलब्ध है: ट्वाइलाइट मिस्ट ब्लैक पर्ल, क्रिस्टल ब्लैक पर्ल, मेटियोरॉइड ग्रे मेटालिक और प्लेटिनम व्हाइट पर्ल।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/1314.webp" alt="1314" width="1280" height="720"></img>
news18.com

<p>कार में 9-इंच की टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम दी गई है। इसके अलावा 10-इंच का डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, डुअल-ज़ोन क्लाइमेट कंट्रोल, 12-स्पीकर बोस साउंड सिस्टम भी उपलब्ध है। इस कार में वायरलेस फोन चार्जिंग, इलेक्ट्रिक टेलगेट, फ्रंट और रियर एम्बिएंट लाइट्स, इंटीग्रेटेड वॉशर्स वाले वाइपर्स, 8 एयरबैग्स और ADAS जैसी सुविधाएं भी दी गई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक और ऑटाे</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 21:17:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>परियोजना को बीच में छोड़कर ISRO से इस्तीफा देने वाले वैज्ञानिकों को लेकर सरकार का बड़ा फैसला, इस्तीफा या VRS स्वीकार नहीं किया जाएगा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग ने 14 जुलाई, 2026 को एक बड़ा आदेश जारी किया। इसमें कहा गया है कि गगनयान मिशन और देश की अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल वैज्ञानिक और इंजीनियर समय से पहले इस्तीफा नहीं दे सकेंगे और न ही समय से पहले सेवानिवृत्त हो सकेंगे। यदि इस प्रकार का कोई भी आवेदन आता है, तो उसे सीधे उच्च विभाग को भेजा जाना चाहिए। इस खबर से ISRO में एक बड़ी समस्या सामने आई है। ISRO कभी सपनों की संस्था हुआ करती थी, लेकिन अब यहां से अच्छे लोग नौकरी छोड़कर जा रहे हैं।</p>
<p>सरकार ने सभी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/tech/big-decision-of-the-government-regarding-the-scientists-who-resigned/article-2570"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/isro-brain-drain.webp" alt=""></a><br /><p>भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग ने 14 जुलाई, 2026 को एक बड़ा आदेश जारी किया। इसमें कहा गया है कि गगनयान मिशन और देश की अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल वैज्ञानिक और इंजीनियर समय से पहले इस्तीफा नहीं दे सकेंगे और न ही समय से पहले सेवानिवृत्त हो सकेंगे। यदि इस प्रकार का कोई भी आवेदन आता है, तो उसे सीधे उच्च विभाग को भेजा जाना चाहिए। इस खबर से ISRO में एक बड़ी समस्या सामने आई है। ISRO कभी सपनों की संस्था हुआ करती थी, लेकिन अब यहां से अच्छे लोग नौकरी छोड़कर जा रहे हैं।</p>
<p>सरकार ने सभी ISRO केंद्रों को निर्देश दिया है कि गगनयान और अन्य बड़ी परियोजनाओं में शामिल वैज्ञानिकों के इस्तीफे या सेवानिवृत्ति के अनुरोध सीधे स्वीकार न किए जाएं। प्रत्येक मामले को अंतरिक्ष विभाग को भेजा जाना चाहिए, जहां उस पर निर्णय लिया जाएगा। सरकार ने स्वयं स्वीकार किया है कि ऐसे कई मामले देश के प्रमुख मिशनों को प्रभावित कर रहे हैं। यह आदेश दिखाता है कि समस्या छोटी नहीं है।</p>
<p>ISRO ने पहले देश के प्रतिभाशाली युवाओं को आकर्षित किया था। यहां काम करने वाले लोग देश के लिए कुछ बड़ा करना चाहते थे। लेकिन अब कई युवा वैज्ञानिक इसे छोड़कर बाहर जा रहे हैं। कारण बिल्कुल स्पष्ट हैं—बाहर अधिक वेतन, तेज़ पदोन्नति, बेहतर कार्य वातावरण, कम नौकरशाही और बेहतर कार्य-जीवन संतुलन।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/isro-brain-drain1.webp" alt="isro-brain-drain1" width="1280" height="720"></img>
aajtak.in

<p>निजी अंतरिक्ष कंपनियां बेहतर पैकेज दे रही हैं। ISRO में कुछ लोगों का मानना है कि नए विचारों को पर्याप्त प्रोत्साहन नहीं मिलता, निर्णय लेने में देरी होती है और उनकी मेहनत की पूरी सराहना नहीं की जाती। जब उनका मन नहीं लगता, तो वे संस्था छोड़ देते हैं।</p>
<p>सरकार ने IN-SPACe की स्थापना की और निजी कंपनियों को अंतरिक्ष क्षेत्र में काम करने की अनुमति दी। यह अच्छी बात है। निजी कंपनियां रॉकेट, उपग्रह और सेवाएं विकसित कर रही हैं। लेकिन यह सब तभी सफल होगा जब ISRO मजबूत रहेगा। यदि अनुभवी ISRO अधिकारी ही संस्था छोड़ते रहेंगे, तो नई तकनीक कौन विकसित करेगा? गगनयान मिशन में इंसानों को अंतरिक्ष में भेजना शामिल है। इसके लिए अत्यधिक सावधानी और कुशल कर्मचारियों की आवश्यकता होती है। यदि वही लोग चले जाएंगे, तो मिशन कठिन हो जाएगा।</p>
<p>ISRO की सफलता का रहस्य यह था कि वैज्ञानिकों को स्वतंत्रता मिलती थी, वे अपनी गलतियों से सीखते थे और टीम बनाकर काम करते थे। विक्रम साराभाई और सतीश धवन जैसे महान व्यक्तित्व वहां एक मजबूत कार्य-संस्कृति स्थापित करके गए थे। लोग इसलिए टिके रहे क्योंकि उन्हें लगता था कि वे देश के एक बड़े मिशन का हिस्सा हैं। अब कुछ लोगों का कहना है कि संस्था की संस्कृति बदल गई है। नेतृत्व, निर्णय लेने की क्षमता और युवाओं के लिए अवसर कम होते जा रहे हैं। यही कारण है कि ऐसा प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करना पड़ा।</p>
<p>गगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है। इसमें अत्याधुनिक तकनीक की आवश्यकता है। यदि इसमें शामिल वैज्ञानिक ही चले जाएंगे, तो काम पर असर पड़ेगा। सरकार ने इस समस्या की सही पहचान की और आदेश जारी किया। हालांकि, यह केवल एक अस्थायी समाधान है। लंबे समय तक केवल देरी करके इस समस्या का समाधान नहीं होगा।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/photo_2026-07-16_14-10-39.webp" alt="photo_2026-07-16_14-10-39" width="859" height="1280"></img>
aajtak.in

<p>निजी कंपनियां ISRO की पुरानी तकनीक और ज्ञान के आधार पर काम कर रही हैं। ISRO ने दशकों तक देश के करदाताओं के पैसे से अपनी नींव तैयार की है। यदि ISRO कमजोर पड़ता है, तो निजी क्षेत्र भी प्रभावित होगा। दोनों को मिलकर काम करना चाहिए। ISRO को बड़े अनुसंधान और नए मिशनों पर ध्यान देना चाहिए, जबकि निजी कंपनियों को व्यावसायिक गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए। लेकिन इसके लिए ISRO को फिर से एक आकर्षक कार्यस्थल बनाना आवश्यक है।</p>
<p>इस आदेश से समस्या सामने आई है, लेकिन यह उसका समाधान नहीं है। सरकार को वैज्ञानिकों से बात करनी चाहिए और उनकी शिकायतें सुननी चाहिए। वेतन बढ़ाया जाना चाहिए, पदोन्नति की प्रक्रिया आसान बनाई जानी चाहिए, अनुसंधान के लिए पर्याप्त वित्त उपलब्ध कराया जाना चाहिए और बेहतर कार्य वातावरण बनाया जाना चाहिए। युवा वैज्ञानिकों को आगे बढ़ने के अवसर मिलने चाहिए। तभी वे खुशी-खुशी वहां बने रहेंगे।</p>
<p>भारत 2040 तक एक प्रमुख अंतरिक्ष शक्ति बनना चाहता है। इसके लिए ISRO को एक बार फिर सपनों का केंद्र बनना होगा—ऐसी जगह, जहां लोग आना और काम करना चाहें। केवल आदेशों से नहीं, बल्कि बेहतर वातावरण, अच्छे वेतन और सक्षम नेतृत्व से ही यह संभव होगा। देश के वैज्ञानिक आज भी ISRO में योगदान देना चाहते हैं। उन्हें केवल सही अवसर और प्रोत्साहन की आवश्यकता है।</p>
<p>ISRO का यह नया आदेश दिखाता है कि अच्छे वैज्ञानिक संस्था छोड़ रहे हैं। गगनयान और देश के सपनों के लिए इस मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए। यह प्रतिबंध केवल अस्थायी है। वास्तविक समाधान ISRO को फिर से आकर्षक और मजबूत बनाना है। यदि हम आज इस पर ध्यान देंगे, तो भारत कल अंतरिक्ष में और अधिक आगे बढ़ेगा। वैज्ञानिकों को रोकने के लिए नियमों की नहीं, बल्कि सपनों और प्रेरणा की आवश्यकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक और ऑटाे</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 21:22:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन जींद से सोनीपत के बीच चली, न धुआं न कोई प्रदूषण; आखिर कैसे चलती है यह ट्रेन? जानिए सभी सवालों के जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली/जींद। </strong>भारत ने शुक्रवार को हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली अपनी पहली ट्रेन की शुरुआत कर दी। यह ट्रेन हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच चलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरी झंडी दिखाकर इसे रवाना किया। इस पहल के साथ भारत हाइड्रोजन ट्रेन चलाने वाले दुनिया के पांच देशों में शामिल हो गया है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह ट्रेन आखिर चलती कैसे है? इसमें डीजल नहीं जलता, ऊपर बिजली की तार भी नहीं होती, फिर इसके पहिए किस ताकत से घूमते हैं? इस पूरी तकनीक के पीछे हाइड्रोजन फ्यूल सेल काम करता है, जो</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/tech/the-countrys-first-hydrogen-train-ran-between-jind-and-sonipat/article-2568"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/18.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली/जींद। </strong>भारत ने शुक्रवार को हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली अपनी पहली ट्रेन की शुरुआत कर दी। यह ट्रेन हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच चलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरी झंडी दिखाकर इसे रवाना किया। इस पहल के साथ भारत हाइड्रोजन ट्रेन चलाने वाले दुनिया के पांच देशों में शामिल हो गया है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह ट्रेन आखिर चलती कैसे है? इसमें डीजल नहीं जलता, ऊपर बिजली की तार भी नहीं होती, फिर इसके पहिए किस ताकत से घूमते हैं? इस पूरी तकनीक के पीछे हाइड्रोजन फ्यूल सेल काम करता है, जो गैस की मदद से ट्रेन के भीतर ही बिजली तैयार करता है। यही बिजली मोटरों तक पहुंचती है और ट्रेन आगे बढ़ती है।<br />हाइड्रोजन ट्रेन को आसान भाषा में समझें तो यह ऐसी ट्रेन है, जिसके अंदर ही एक छोटा बिजलीघर लगा होता है। इसमें ईंधन के रूप में हाइड्रोजन गैस का उपयोग किया जाता है। ट्रेन में लगे फ्यूल सेल तक एक ओर से हाइड्रोजन और दूसरी ओर से हवा में मौजूद ऑक्सीजन पहुंचती है। दोनों के बीच रासायनिक प्रक्रिया होती है, जिससे बिजली, पानी और जलवाष्प (भाप) बनते हैं। बनी हुई बिजली सीधे ट्रेन के इलेक्ट्रिक मोटरों तक पहुंचती है और वही मोटर ट्रेन को चलाती है। इस पूरी प्रक्रिया में धुआं या कार्बन डाइऑक्साइड नहीं निकलती। केवल पानी और जलवाष्प बाहर निकलते हैं, इसलिए इसे शून्य-उत्सर्जन (जीरो एमिशन) तकनीक माना जाता है।</p>
<p><strong>फ्यूल सेल कैसे बनाता है बिजली</strong></p>
<p>हाइड्रोजन ट्रेन की सबसे महत्वपूर्ण इकाई फ्यूल सेल है। इसमें हाइड्रोजन गैस भेजी जाती है। दूसरी तरफ से ऑक्सीजन प्रवेश करती है। फ्यूल सेल के भीतर दोनों के बीच होने वाली रासायनिक प्रतिक्रिया से इलेक्ट्रॉन उत्पन्न होते हैं। यही इलेक्ट्रॉन बिजली के रूप में मोटरों तक पहुंचते हैं और ट्रेन चलती है। यही वजह है कि इसे पर्यावरण के लिए सुरक्षित तकनीक माना जाता है।</p>
<p><strong>हाइड्रोजन कहां से आएगी</strong></p>
<p>इस ट्रेन के लिए हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन के पास देश का पहला हाइड्रोजन उत्पादन, स्टोरेज और रीफ्यूलिंग प्लांट बनाया गया है। यहां इलेक्ट्रोलिसिस तकनीक से पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में अलग किया जाएगा। इस प्रक्रिया में रोजाना करीब 430 किलोग्राम हाइड्रोजन तैयार होगी। तैयार गैस को हाई-प्रेशर टैंकों में सुरक्षित रखा जाएगा। स्टेशन पर करीब 3000 किलोग्राम हाइड्रोजन स्टोर करने की क्षमता विकसित की गई है, जबकि ट्रेन में एक बार में लगभग 440 किलोग्राम हाइड्रोजन भरी जा सकेगी। यहीं से ट्रेन में ईंधन भरने की पूरी व्यवस्था होगी।</p>
<p><strong>पानी से हाइड्रोजन बनने की प्रक्रिया</strong></p>
<p>पानी हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से मिलकर बना होता है। जब इसमें बिजली प्रवाहित की जाती है तो इलेक्ट्रोलिसिस नामक प्रक्रिया के जरिए दोनों गैसें अलग हो जाती हैं। अलग हुई हाइड्रोजन को संग्रहित किया जाता है और बाद में ट्रेन के फ्यूल सेल में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इस परियोजना में ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग किया जाएगा।</p>
<p><strong>ग्रीन हाइड्रोजन क्यों खास</strong></p>
<p>ग्रीन हाइड्रोजन नवीकरणीय ऊर्जा, जैसे सौर और पवन ऊर्जा से तैयार की जाती है। इसके उत्पादन में कार्बन उत्सर्जन लगभग शून्य होता है। भारतीय रेल की पहली हाइड्रोजन ट्रेन भी ग्रीन हाइड्रोजन से संचालित होगी। इसी उद्देश्य से जींद में ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट स्थापित किया गया है।</p>
<p><strong>जब बिजली से हाइड्रोजन बनानी पड़ती है तो फायदा क्या</strong></p>
<p>यह सवाल अक्सर उठता है कि यदि हाइड्रोजन बनाने के लिए पहले बिजली खर्च करनी पड़ती है और बाद में उसी हाइड्रोजन से बिजली बनाई जाती है, तो इसमें लाभ क्या है। विशेषज्ञों के अनुसार हाइड्रोजन ऊर्जा का स्रोत नहीं बल्कि ऊर्जा को संग्रहित करने और जरूरत वाली जगह तक पहुंचाने का माध्यम है। उदाहरण के लिए, यदि किसी दिन सौर या पवन ऊर्जा संयंत्र जरूरत से अधिक बिजली बना दें तो उस अतिरिक्त बिजली को लंबे समय तक सीधे उपयोग या बैटरियों में सुरक्षित रखना आसान नहीं होता। ऐसे में उसी अतिरिक्त बिजली से ग्रीन हाइड्रोजन तैयार कर ली जाती है। बाद में जरूरत पड़ने पर यही हाइड्रोजन फ्यूल सेल में बिजली बनाकर ट्रेन चलाने के काम आती है।</p>
<p><strong>सुरक्षा के लिए आधुनिक व्यवस्था</strong></p>
<p>हाइड्रोजन अत्यधिक ज्वलनशील गैस है, इसलिए ट्रेन में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। इसमें ऑटोमैटिक फायर एक्सटिंग्विशिंग सिस्टम लगाया गया है। साथ ही करीब 26 सेंसर लगाए गए हैं, जो आग, अधिक तापमान या हाइड्रोजन गैस के रिसाव का तुरंत पता लगा लेते हैं। किसी भी असामान्य स्थिति में चालक दल को तत्काल सूचना मिल जाती है।</p>
<p><strong>हर दिन कितने किलोमीटर चलेगी ट्रेन, किराया कितना होगा?</strong></p>
<p>भारतीय रेल की पहली हाइड्रोजन ट्रेन करीब 3200 हॉर्सपावर क्षमता की है। इसमें आठ यात्री कोच और आगे-पीछे दो पावर कार लगाई गई हैं। ट्रेन अधिकतम 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी। यह जींद और सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर की दूरी लगभग दो घंटे में तय करेगी। किराया 5 से 25 रुपये के बीच रखा गया है।</p>
<p><strong>जींद-सोनीपत रूट ही क्यों चुना गया</strong></p>
<p>रेलवे ने इस परियोजना के लिए जींद-सोनीपत रूट दो कारणों से चुना। पहला, इस मार्ग पर ट्रैफिक अपेक्षाकृत कम है और यहां प्रतिदिन केवल आठ ट्रेनें चलती हैं। दूसरा, यह दिल्ली के नजदीक है, जिससे तकनीकी निगरानी, परीक्षण और विशेषज्ञों की उपलब्धता आसान रहती है। यह नॉन-इलेक्ट्रिफाइड ब्रॉडगेज रूट भी है, इसलिए नई तकनीक के परीक्षण के लिए इसे उपयुक्त माना गया।</p>
<p><strong>हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना पर कितनी लागत आई</strong></p>
<p>पहली हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना पर करीब 112 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसमें ट्रेन के निर्माण के साथ हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण और रीफ्यूलिंग की पूरी व्यवस्था शामिल है। ट्रेन का डिजाइन और इंटीग्रेशन चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) में किया गया। सरकार की 'हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज' योजना के तहत भविष्य में देश के विभिन्न हेरिटेज और पहाड़ी मार्गों पर ऐसी 35 हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने की योजना है। खासकर उन रूटों पर, जहां बिजली की ओवरहेड लाइन बिछाना कठिन या महंगा है, वहां यह तकनीक एक प्रभावी विकल्प साबित हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक और ऑटाे</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 12:51:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हर दिन आने वाले 51 करोड़ कॉलों का कोई जवाब नहीं देता, Truecaller-TRAI आमने-सामने</title>
                                    <description><![CDATA[<p>कुछ दिन पहले, भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने कॉल मैनेजमेंट ऐप्स और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म जैसे Truecaller, Hiya और Whoscall के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम के तहत कार्रवाई करने के लिए अधिकार मांगे थे। TRAI के अनुसार, ये ऐप्स वाणिज्यिक संचार के लिए निर्धारित विशेष नंबरिंग सीरीज़ (1400 और 1600) से आने वाले कॉलों को स्पैम के रूप में टैग और ब्लॉक कर रही हैं। 1400 से शुरू होने वाले नंबरों का उपयोग कंपनियां अपने उत्पादों के प्रचार के लिए करती हैं, जबकि देश में बैंक 1600 सीरीज़ का उपयोग करते हैं। अब Truecaller ने इस मामले पर (TRAI</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/tech/no-one-answers-51-crore-calls-received-every-day-truecaller-trai/article-2526"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/285.webp" alt=""></a><br /><p>कुछ दिन पहले, भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने कॉल मैनेजमेंट ऐप्स और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म जैसे Truecaller, Hiya और Whoscall के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम के तहत कार्रवाई करने के लिए अधिकार मांगे थे। TRAI के अनुसार, ये ऐप्स वाणिज्यिक संचार के लिए निर्धारित विशेष नंबरिंग सीरीज़ (1400 और 1600) से आने वाले कॉलों को स्पैम के रूप में टैग और ब्लॉक कर रही हैं। 1400 से शुरू होने वाले नंबरों का उपयोग कंपनियां अपने उत्पादों के प्रचार के लिए करती हैं, जबकि देश में बैंक 1600 सीरीज़ का उपयोग करते हैं। अब Truecaller ने इस मामले पर (TRAI द्वारा उसे नियंत्रित करने का प्रयास 'निरर्थक' है) ऐसी प्रतिक्रिया दी है।</p>
<p>Truecaller के CEO ऋषित झुनझुनवाला ने कहा कि कंपनी ने TRAI के उन निर्देशों का पालन किया है, जिनमें विशेष नंबर सीरीज़ को व्हाइटलिस्ट करने को कहा गया था, भले ही इस बात पर सवाल उठे हों कि क्या नियामक के पास इंटरनेट ऐप्स को ऐसे निर्देश जारी करने का अधिकार है। हालांकि, उन्होंने कहा कि इस कदम का अपेक्षा के विपरीत प्रभाव पड़ा है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/294.webp" alt="294" width="1280" height="720"></img>
moneycontrol.com

<p>झुनझुनवाला ने X पर लिखा, "दोनों सीरीज़ से आने वाले हर दिन 51 करोड़ से अधिक कॉलों का जवाब नहीं दिया जाता।" उन्होंने आगे कहा कि स्पैम और धोखाधड़ी वाले कॉलों की बढ़ती सामुदायिक रिपोर्टों के बावजूद, Truecaller को "अपने उपयोगकर्ताओं को यह बताने से रोक दिया गया कि ये कॉल स्पैम हैं।"</p>
<p>आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 1400 और 1600 नंबरों से शुरू होने वाले कॉल व्हाइटलिस्ट किए जाते हैं। इसका मतलब है कि ऐसे कॉल न तो ब्लॉक किए जाते हैं और न ही स्पैम के रूप में चिह्नित किए जाते हैं। हालांकि, जब ऐसे नंबरों को ऐप पर बड़ी संख्या में उपयोगकर्ता स्पैम के रूप में रिपोर्ट और ब्लॉक करते हैं, तो ऐप उन्हें स्वतः स्पैम के रूप में चिह्नित कर देता है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/304.webp" alt="304" width="1280" height="720"></img>
etvbharat.com

<p>ऐप के प्रीमियम उपयोगकर्ताओं के पास किसी भी नंबर सीरीज़ को ब्लॉक करने का विकल्प होता है। Truecaller के अनुसार, उपयोगकर्ता TRAI द्वारा पेश की गई विशेष नंबर सीरीज़ से आने वाले कॉलों पर भरोसा खो रहे हैं। कंपनी ने बताया है कि पिछले 8 महीनों में, उपयोगकर्ताओं ने 140-सीरीज़ के 81 प्रतिशत और 1600-सीरीज़ के 79 प्रतिशत कॉलों को अनदेखा किया है, जबकि अक्टूबर 2025 से 1600-सीरीज़ के नंबरों को मैन्युअली ब्लॉक करने की घटनाओं में 208 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/318.webp" alt="318" width="1280" height="720"></img>
msn.com

<p>भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) फिलहाल ऐसे प्लेटफ़ॉर्मों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकता, क्योंकि वे मध्यस्थ (इंटरमीडियरी) के रूप में IT कानून के दायरे में आते हैं। दूरसंचार ऑपरेटरों के विपरीत, ये प्लेटफ़ॉर्म दूरसंचार विभाग (DoT) के तहत लाइसेंस प्राप्त नहीं हैं। इसलिए, दूरसंचार ऑपरेटरों को नियामक के निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन करना पड़ता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक और ऑटाे</category>
                                    

                <link>https://hindi.khabarchhe.com/tech/no-one-answers-51-crore-calls-received-every-day-truecaller-trai/article-2526</link>
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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 12:07:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मारुति सुज़ुकी ने इस कार की कीमत में ₹38,900 की कटौती की, देती है 28 Kmpl का माइलेज, सनरूफ और 6 एयरबैग्स!</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मारुति सुज़ुकी ने भारतीय ऑटो बाज़ार में अपनी लोकप्रिय और प्रीमियम हाइब्रिड SUV मारुति विक्टोरिस की कीमत घटाकर ग्राहकों को बड़ी राहत दी है। त्योहारों के सीज़न की शुरुआत और बाज़ार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखते हुए कंपनी का यह रणनीतिक कदम काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मारुति सुज़ुकी विक्टोरिस अपने दमदार लुक, शानदार प्रदर्शन और बेहतरीन माइलेज के कारण ग्राहकों के बीच बेहद लोकप्रिय है।</p>
<p>हालांकि, कंपनी ने सभी वेरिएंट्स की कीमतों में कटौती नहीं की है, बल्कि केवल चुनिंदा वैकल्पिक (ऑप्शनल) वेरिएंट्स की कीमतों में बड़ी कमी की है। इस कटौती के बाद यह SUV</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/tech/maruti-suzuki-has-reduced-the-price-of-this-car-by/article-2524"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/2251.webp" alt=""></a><br /><p>मारुति सुज़ुकी ने भारतीय ऑटो बाज़ार में अपनी लोकप्रिय और प्रीमियम हाइब्रिड SUV मारुति विक्टोरिस की कीमत घटाकर ग्राहकों को बड़ी राहत दी है। त्योहारों के सीज़न की शुरुआत और बाज़ार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखते हुए कंपनी का यह रणनीतिक कदम काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मारुति सुज़ुकी विक्टोरिस अपने दमदार लुक, शानदार प्रदर्शन और बेहतरीन माइलेज के कारण ग्राहकों के बीच बेहद लोकप्रिय है।</p>
<p>हालांकि, कंपनी ने सभी वेरिएंट्स की कीमतों में कटौती नहीं की है, बल्कि केवल चुनिंदा वैकल्पिक (ऑप्शनल) वेरिएंट्स की कीमतों में बड़ी कमी की है। इस कटौती के बाद यह SUV अपने सेगमेंट में और भी अधिक वैल्यू-फॉर-मनी तथा आकर्षक विकल्प बन गई है। यदि आप भी इस समय नई, आधुनिक और फीचर-लोडेड SUV खरीदना चाहते हैं, तो मारुति विक्टोरिस अब कम कीमत में खरीदी जा सकती है। आइए आपको इसकी अपडेटेड कीमतों के बारे में बताते हैं।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/2341.webp" alt="234" width="1280" height="720"></img></p>
<p>इस कीमत कटौती को समझें तो मारुति सुज़ुकी ने केवल विक्टोरिस के (O) (ऑप्शनल) वेरिएंट्स की कीमतों में ही सीधे ₹38,900 की कमी की है। इसमें ZXi (O) मैनुअल, ZXi Plus (O) मैनुअल, ZXi (O) ऑटोमैटिक और ZXi Plus (O) ऑटोमैटिक वेरिएंट शामिल हैं। इसके अलावा बेस मॉडल LXi, मिड-वेरिएंट VXi, CNG और हाई-एंड स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वेरिएंट्स की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है और वे अपनी पुरानी कीमतों पर ही बिकते रहेंगे। आइए जानें किन वेरिएंट्स की कीमतों में कटौती की गई है...</p>
<p><strong>वेरिएंट: </strong>ZXi (O) MT - नई कीमत: ₹13.69 लाख - पुरानी कीमत: ₹14.08 लाख - कटौती: ₹38,900</p>
<p><strong>वेरिएंट:</strong> ZXi Plus (O) MT -नई कीमत: ₹15.43 लाख - पुरानी कीमत: ₹15.82 लाख - कटौती: ₹38,900</p>
<p><strong>वेरिएंट:</strong> ZXi (O) AT - नई कीमत: ₹15.25 लाख - पुरानी कीमत: ₹15.64 लाख - कटौती: ₹38,900</p>
<p><strong>वेरिएंट:</strong> ZXi Plus (O) AT - नई कीमत: ₹17.38 लाख - पुरानी कीमत: ₹17.77 लाख - कटौती: ₹38,900</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/2441.webp" alt="244" width="1280" height="720"></img></p>
<p>मारुति विक्टोरिस का एक्सटीरियर डिज़ाइन काफी मस्क्युलर, आक्रामक और आधुनिक है। इसके फ्रंट में बड़ा क्रोम-फिनिश्ड नेक्स्टवेव ग्रिल, LED हेडलैंप्स, DRLs और स्पोर्टी लुक वाले अलॉय व्हील्स दिए गए हैं, जो इसे सड़क पर एक दमदार SUV का लुक देते हैं। इसके इंटीरियर में प्रीमियम केबिन मिलता है। इसमें डुअल-टोन डैशबोर्ड, बेहतरीन लेदर सीटें, पर्याप्त लेगरूम और बूट स्पेस मिलता है, जो लंबी यात्राओं में भी यात्रियों को आराम और लग्ज़री का अनुभव कराता है।</p>
<p>यह SUV फीचर्स से भरपूर है। इसमें 9-इंच का स्मार्टप्ले प्रो प्लस टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम दिया गया है, जो वायरलेस एंड्रॉयड ऑटो और एप्पल कारप्ले को सपोर्ट करता है। इसके अलावा इसमें पैनोरमिक सनरूफ, हेड-अप डिस्प्ले (HUD), वेंटिलेटेड फ्रंट सीट्स, एम्बिएंट लाइटिंग और वायरलेस चार्जिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं भी दी गई हैं। सुरक्षा के मामले में भी यह बेहद मजबूत है। विक्टोरिस में 6 एयरबैग्स, 360-डिग्री पार्किंग कैमरा, EBD के साथ ABS, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी प्रोग्राम (ESP), हिल होल्ड असिस्ट और सभी पहियों पर डिस्क ब्रेक जैसी सुरक्षा सुविधाएं दी गई हैं।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/2541.webp" alt="254" width="1280" height="720"></img></p>
<p>मारुति सुज़ुकी विक्टोरिस 3 अलग-अलग पावरट्रेन विकल्पों के साथ आती है। पहला 1.5-लीटर 4-सिलेंडर पेट्रोल इंजन है, जो मैनुअल और ऑटोमैटिक दोनों गियरबॉक्स विकल्पों के साथ शानदार पावर देता है। दूसरा विकल्प पर्यावरण-अनुकूल और किफायती CNG वेरिएंट है। तीसरा और सबसे उन्नत विकल्प इसका 'स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड' इंजन है, जो इलेक्ट्रिक मोटर के साथ मिलकर काम करता है।</p>
<p>माइलेज के मामले में यह कार अपने सेगमेंट में सबसे आगे है। इसका सामान्य पेट्रोल वेरिएंट लगभग 19 से 21 Km/L का माइलेज देता है, जबकि CNG वेरिएंट 26 Km/Kg तक की दूरी तय कर सकता है। वहीं, इसका सबसे प्रीमियम स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वेरिएंट 27.97 Km/L का शानदार माइलेज देता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक और ऑटाे</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 20:52:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>E20 को लेकर हो रहे दावे को महिंद्रा ने किया खारिज, कहा इससे को कोई नुकसान नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">देशभर में E20 पेट्रोल (20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण) को लेकर चल रही बहस के बीच वाहन मालिकों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि क्या इस ईंधन के इस्तेमाल से इंजन खराब हो सकता है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई दावों के बाद अब वाहन निर्माता कंपनियां सामने आई हैं। महिंद्रा एंड महिंद्रा ने साफ किया है कि E20 पेट्रोल से इंजन को किसी तरह का नुकसान नहीं होता और कंपनी की सभी पेट्रोल गाड़ियां E20 ईंधन के अनुरूप तैयार की गई हैं।</p>
<p><strong>महिंद्रा ने क्या कहा?</strong></p>
<p>महिंद्रा एंड महिंद्रा के ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/tech/mahindra-rejected-the-claims-regarding-e20-and-said-it-has/article-2512"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/6222021944245162173.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">देशभर में E20 पेट्रोल (20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण) को लेकर चल रही बहस के बीच वाहन मालिकों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि क्या इस ईंधन के इस्तेमाल से इंजन खराब हो सकता है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई दावों के बाद अब वाहन निर्माता कंपनियां सामने आई हैं। महिंद्रा एंड महिंद्रा ने साफ किया है कि E20 पेट्रोल से इंजन को किसी तरह का नुकसान नहीं होता और कंपनी की सभी पेट्रोल गाड़ियां E20 ईंधन के अनुरूप तैयार की गई हैं।</p>
<p><strong>महिंद्रा ने क्या कहा?</strong></p>
<p>महिंद्रा एंड महिंद्रा के ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी एंड प्रोडक्ट डेवलपमेंट के अध्यक्ष आर. वेलुसामी ने कहा कि कंपनी की ओर से पिछले कई वर्षों से E20 ईंधन पर लगातार परीक्षण किए गए हैं। इन परीक्षणों में इंजन, फ्यूल सिस्टम और अन्य मैकेनिकल पार्ट्स पर किसी तरह का असामान्य असर नहीं पाया गया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि महिंद्रा की पेट्रोल गाड़ियां E20 पेट्रोल के साथ सुरक्षित तरीके से चल सकती हैं और ग्राहकों को इसे लेकर घबराने की जरूरत नहीं है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/mahindra,-e20.jpg" alt="Mahindra, E20" width="1280" height="720"></img>
livehindustan.com

<p><strong>क्या पुरानी गाड़ियों को भी नुकसान नहीं होगा?</strong></p>
<p>ऑटोमोबाइल कंपनियों का कहना है कि E20 को लेकर सबसे ज्यादा सवाल पुराने वाहनों को लेकर उठ रहे हैं। हालांकि, वाहन निर्माताओं का दावा है कि उन्होंने E10 (10 प्रतिशत इथेनॉल) के लिए डिजाइन किए गए लाखों वाहनों पर भी E20 का परीक्षण किया और किसी बड़े तकनीकी नुकसान या इंजन फेल होने के प्रमाण नहीं मिले।</p>
<p>हालांकि, कंपनियों ने यह भी माना कि पुराने वाहनों में E20 इस्तेमाल करने पर माइलेज में लगभग 3 से 3.5 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। इसकी वजह इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता (कैलोरिफिक वैल्यू) पेट्रोल से कम होना है।</p>
<p><strong>इंजन खराब होने की खबरों पर क्या बोली कंपनी?</strong></p>
<p>हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो वायरल हुए, जिनमें दावा किया गया कि E20 पेट्रोल की वजह से गाड़ियों के इंजन खराब हो गए। लेकिन वाहन कंपनियों ने इन दावों को खारिज किया है।</p>
<p>टोयोटा ने भी हाल ही में वायरल हुए एक मामले में स्पष्ट किया कि संबंधित वाहन में आई खराबी E20 पेट्रोल की वजह से नहीं, बल्कि दूषित (Contaminated) ईंधन के कारण हुई थी।</p>
<p><strong>सरकार और ऑटो इंडस्ट्री का क्या कहना है?</strong></p>
<p>केंद्र सरकार और ऑटोमोबाइल उद्योग का कहना है कि E20 पेट्रोल पर कई वर्षों तक व्यापक परीक्षण किए गए हैं। कंपनियों के अनुसार, करोड़ों वाहनों के सर्विस डेटा और लैब टेस्ट में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला कि E20 पेट्रोल से इंजन को नुकसान पहुंचता हो।</p>
<p>सरकार का कहना है कि E20 ईंधन से भारत का कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी, कार्बन उत्सर्जन घटेगा और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी क्योंकि इथेनॉल का उत्पादन कृषि उत्पादों से होता है।</p>
<p><strong>E20 पेट्रोल के फायदे</strong></p>
<ul>
<li>कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होती है।</li>
<li>प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है।</li>
<li>इथेनॉल उत्पादन से किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर मिलता है।</li>
<li>भविष्य के हाई-कम्प्रेशन इंजन बेहतर प्रदर्शन दे सकते हैं।</li>
</ul>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/6222021944245162176.jpg" alt="6222021944245162176" width="1032" height="580"></img>
amarujala.com

<p><strong>नुकसान या सीमाएं क्या हैं?</strong></p>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार, E20 का सबसे बड़ा प्रभाव माइलेज पर पड़ सकता है। इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल से कम होने के कारण कुछ वाहनों में 3 से 3.5 प्रतिशत तक माइलेज घट सकता है। हालांकि, कंपनियों का कहना है कि यह इंजन की सुरक्षा या उसकी उम्र पर असर डालने वाला कारक नहीं है।</p>
<p><strong>निष्कर्ष</strong></p>
<p>महिंद्रा समेत देश की प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियों का कहना है कि E20 पेट्रोल से इंजन खराब होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है। कंपनियों के मुताबिक, उनके वाहनों का व्यापक परीक्षण किया जा चुका है और E20 ईंधन सुरक्षित है। हालांकि, वाहन मालिकों को थोड़ा कम माइलेज मिल सकता है, लेकिन इसे इंजन को नुकसान से जोड़ना सही नहीं होगा</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक और ऑटाे</category>
                                    

                <link>https://hindi.khabarchhe.com/tech/mahindra-rejected-the-claims-regarding-e20-and-said-it-has/article-2512</link>
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                <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 18:24:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>टेलीग्राम पायरेटेड कंटेंट का बड़ा प्लेटफॉर्म...रिलीज होते ही फिल्में, कुछ घंटों में ही वेब सीरीज उपलब्ध हो जाते हैं; ये कैसे बंद होंगे?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> फिल्मों और वेब सीरीज की ऑनलाइन पायरेसी पर केंद्र सरकार ने अब सख्त रुख अपना लिया है। दरअसल, सरकार को लंबे समय से टेलीग्राम पर नए रिलीज होने वाले फिल्मों, OTT शो और दूसरे कॉपीराइटेड ऑडियो-विजुअल कंटेंट के पायरेटेड वर्जन बड़े पैमाने पर शेयर किए जाने की शिकायतें मिल रही थीं। अब सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह केवल शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करने तक सीमित न रहे, बल्कि अपने सिस्टम को इस तरह मजबूत बनाए कि पायरेटेड कंटेंट की पहचान कर उसे स्वत: हटाया जा सके। मंत्रालय</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/tech/telegram-is-a-big-platform-for-pirated-content-as-soon/article-2511"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/2.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> फिल्मों और वेब सीरीज की ऑनलाइन पायरेसी पर केंद्र सरकार ने अब सख्त रुख अपना लिया है। दरअसल, सरकार को लंबे समय से टेलीग्राम पर नए रिलीज होने वाले फिल्मों, OTT शो और दूसरे कॉपीराइटेड ऑडियो-विजुअल कंटेंट के पायरेटेड वर्जन बड़े पैमाने पर शेयर किए जाने की शिकायतें मिल रही थीं। अब सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह केवल शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करने तक सीमित न रहे, बल्कि अपने सिस्टम को इस तरह मजबूत बनाए कि पायरेटेड कंटेंट की पहचान कर उसे स्वत: हटाया जा सके। मंत्रालय ने कंपनी से 15 दिनों के भीतर उठाए गए कदमों की विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) भी मांगी है।</p>
<p>सरकार ने शनिवार को टेलीग्राम को जारी नोटिस में कहा कि प्लेटफॉर्म पर फिल्मों, OTT कंटेंट और अन्य कॉपीराइटेड ऑडियो-विजुअल सामग्री की अवैध शेयरिंग को रोकने के लिए मौजूदा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। कंपनी को निर्देश दिया गया है कि वह पायरेटेड कंटेंट की पहचान, रिपोर्टिंग, ब्लॉकिंग और हटाने की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित करे कि बार-बार नियम तोड़ने वाले चैनल, ग्रुप, बॉट, अकाउंट, एडमिनिस्ट्रेटर और उनसे जुड़े नेटवर्क के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाए। </p>
<p><strong>सरकार टेलीग्राम से पायरेसी मामले में क्या चाहती है?</strong></p>
<p>सूत्रों के मुताबिक सरकार ने टेलीग्राम से साफ कहा है कि कार्रवाई के लिए केवल शिकायतों का इंतजार करना पर्याप्त नहीं है। यदि प्लेटफॉर्म पर लगातार पायरेटेड सामग्री उपलब्ध रहती है तो यह सूचना प्रौद्योगिकी नियमों के तहत अपेक्षित 'ड्यू डिलिजेंस' यानी जरूरी सावधानी के दायित्व को पूरा नहीं करता। सरकार चाहती है कि कंपनी ऐसी तकनीकी व्यवस्था विकसित करे, जिससे कॉपीराइट उल्लंघन करने वाले कंटेंट को तेजी से चिन्हित कर हटाया जा सके और दोबारा अपलोड होने से भी रोका जा सके। </p>
<p><strong>निर्माताओं, वितरकों और OTT कंपनियों को भारी नुकसान हो रहा था</strong></p>
<p>यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब फिल्म निर्माता, OTT प्लेटफॉर्म और प्रसारण कंपनियां लगातार डिजिटल पायरेसी से होने वाले आर्थिक नुकसान को लेकर चिंता जता रही हैं। नई रिलीज फिल्में और वेब सीरीज कई बार रिलीज के कुछ घंटों के भीतर ही टेलीग्राम के सार्वजनिक चैनलों और ग्रुप्स में उपलब्ध हो जाती हैं। इससे कंटेंट निर्माताओं, निर्माताओं, वितरकों और OTT कंपनियों को भारी राजस्व नुकसान उठाना पड़ता है। इसी वजह से सरकार अब केवल अलग-अलग चैनल हटाने के बजाय पूरे प्लेटफॉर्म की जवाबदेही तय करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। </p>
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economictimes.indiatimes.com

<p><strong>सरकार ने क्या कदम उठाए- 3000 से अधिक टेलीग्राम चैनलों पर कार्रवाई</strong></p>
<p>सरकार ने यह भी याद दिलाया है कि इससे पहले पायरेटेड कंटेंट प्रसारित करने वाले 3000 से अधिक टेलीग्राम चैनलों पर कार्रवाई की जा चुकी है। इसके बावजूद यदि नियमों का लगातार उल्लंघन होता है तो आगे भी ऐसे चैनलों, ग्रुप्स और उनसे जुड़े अकाउंट्स पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।</p>
<p><strong>सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही सख्त बना रही </strong></p>
<p>दरअसल, सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही को सख्त बनाने का प्रयास कर रही है। टेलीग्राम को यह नोटिस तीन दिनों के भीतर दूसरी बार मिला है। इससे पहले 2 जुलाई को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कंपनी को नोटिस भेजकर उसके यूजरनेम फीचर और यूजर्स की प्राइवेसी से जुड़े कई सवालों पर जवाब मांगा था। लगातार दो मंत्रालयों की ओर से भेजे गए नोटिस यह संकेत देते हैं कि सरकार अब बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही को लेकर अधिक सख्त रुख अपना रही है। </p>
<p><strong>नीट एग्जाम के दौरान भी टेलीग्राम पर सरकार ने दिखाई थी सख्ती</strong></p>
<p>इससे पहले जून में भी टेलीग्राम सरकार के निशाने पर आया था। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की सिफारिश पर पेपर लीक मामले के बाद सरकार ने 16 जून से 22 जून तक टेलीग्राम पर बैन लगाया था। इसके अलावा 21 जून को आयोजित NEET 2026 की दोबारा परीक्षा को देखते हुए सरकार ने टेलीग्राम को 30 जून तक अपना 'मैसेज-एडिटिंग' फीचर बंद रखने का भी निर्देश दिया था। अब पायरेटेड फिल्मों और OTT कंटेंट के प्रसार को लेकर जारी ताजा नोटिस के साथ टेलीग्राम पर सरकारी निगरानी और सख्त हो गई है।</p>
<p><strong>आइए जानते हैं कि सरकार पायरेटेड कंटेंट पर सख्ती क्यों कर रही है?</strong></p>
<ul>
<li>फिल्म और OTT इंडस्ट्री को करोड़ों रुपये का नुकसान: नई फिल्में और वेब सीरीज रिलीज होने के कुछ घंटों के भीतर पायरेटेड रूप में टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर पहुंच जाती हैं, जिससे बॉक्स ऑफिस और OTT व्यूअरशिप दोनों प्रभावित होते हैं।</li>
<li>कॉपीराइट कानून का उल्लंघन: बिना अनुमति फिल्मों, वेब सीरीज और दूसरे ऑडियो-विजुअल कंटेंट को शेयर करना भारतीय कॉपीराइट कानून का उल्लंघन है। सरकार ऐसे मामलों में डिजिटल प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी भी तय करना चाहती है।</li>
<li>आईटी नियमों का पालन सुनिश्चित करना: सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म केवल शिकायत मिलने का इंतजार न करें, बल्कि खुद भी अवैध कंटेंट की पहचान कर उसे हटाने के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करें।</li>
<li>बार-बार बनने वाले पायरेसी नेटवर्क पर रोक: कई चैनल और ग्रुप बंद होने के बाद नए नाम से फिर सक्रिय हो जाते हैं। इसलिए सरकार पूरे नेटवर्क, एडमिन, बॉट और संबंधित अकाउंट्स पर कार्रवाई चाहती है।</li>
<li>डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही बढ़ाना: सरकार चाहती है कि बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म अपने प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध अवैध कंटेंट के प्रति अधिक जिम्मेदार बनें और नियमों के अनुरूप सक्रिय निगरानी रखें।</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक और ऑटाे</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 13:41:14 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>व्हाट्सएप का यूजरनेम फीचर: सरकार को नए फीचर से किस बात का डर सता रहा है, क्या इससे साइबर फ्रॉड बढ़ जाएगा?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> भारत में व्हाट्सएप का नया यूजरनेम फीचर फिलहाल लॉन्च नहीं होगा। केंद्र सरकार ने मेटा को निर्देश दिया है कि जब तक इस फीचर से जुड़े सभी पहलुओं पर चर्चा और जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक इसे देश में लागू न किया जाए। इसके साथ ही सरकार ने कंपनी को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब भी मांगा है। दरअसल, सरकार की मुख्य चिंता यह है कि इस फीचर के जरिए मोबाइल नंबर छिपाकर फर्जी पहचान बनाना आसान हो सकता है, जिससे साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी के मामले बढ़ने की आशंका है। बहरहाल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/tech/whatsapps-username-feature-what-is-the-government-afraid-of-with/article-2493"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/11.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> भारत में व्हाट्सएप का नया यूजरनेम फीचर फिलहाल लॉन्च नहीं होगा। केंद्र सरकार ने मेटा को निर्देश दिया है कि जब तक इस फीचर से जुड़े सभी पहलुओं पर चर्चा और जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक इसे देश में लागू न किया जाए। इसके साथ ही सरकार ने कंपनी को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब भी मांगा है। दरअसल, सरकार की मुख्य चिंता यह है कि इस फीचर के जरिए मोबाइल नंबर छिपाकर फर्जी पहचान बनाना आसान हो सकता है, जिससे साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी के मामले बढ़ने की आशंका है। बहरहाल सरकार इस फीचर के सुरक्षा मानकों और इसके संभावित दुरुपयोग की विस्तृत जांच करना चाहती है। </p>
<p>बता दें कि WhatsApp ने 29 जून से दुनियाभर में यूजरनेम रजिस्ट्रेशन की शुरुआत की है। यह सुविधा एक साथ सभी यूजर्स को नहीं मिलेगी, बल्कि आने वाले कुछ महीनों में चरणबद्ध तरीके से अलग-अलग देशों में रोलआउट की जाएगी। जिस क्षेत्र में यह फीचर उपलब्ध होगा, वहां यूजर्स को WhatsApp के भीतर नोटिफिकेशन मिलेगा।<br />वहीं, WhatsApp के हेड कुणाल शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस फीचर की घोषणा करते हुए लिखा था कि सही समय बहुत महत्वपूर्ण है। दुनिया भर में फीचर उपलब्ध होने से पहले अपना यूजरनेम सुरक्षित कर लें। जल्द ही लोगों से जुड़ने का एक अधिक निजी तरीका WhatsApp पर उपलब्ध होगा।</p>
<p><strong>आखिर भारत सरकार को क्यों है चिंता</strong></p>
<p>दरअसल, सरकार का मानना है कि यूजरनेम फीचर लागू होने के बाद कई स्थितियों में लोगों का मोबाइल नंबर सामने नहीं आएगा। ऐसे में कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे के नाम से मिलता-जुलता यूजरनेम बनाकर लोगों को गुमराह कर सकता है। इससे फर्जी प्रोफाइल के जरिए ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर अपराध की आशंका बढ़ सकती है।<br />भारत WhatsApp का सबसे बड़ा बाजार है। भारत में करीब 50 करोड़ से अधिक यूजर्स हैं। इतने बड़े यूजर बेस को देखते हुए सरकार सुरक्षा व्यवस्था और फेक प्रोफाइल से जुड़े जोखिमों का आकलन करना चाहती है।</p>
<p><strong>क्या है WhatsApp का यूजरनेम फीचर</strong></p>
<p>मेटा ने WhatsApp में ऐसा फीचर पेश किया है, जिसकी मदद से लोग मोबाइल नंबर साझा किए बिना भी किसी नए व्यक्ति से बातचीत कर सकेंगे। इसके लिए केवल यूजरनेम का इस्तेमाल होगा। यह सुविधा खासतौर पर उन लोगों के लिए लाई गई है, जो अपनी निजी जानकारी साझा किए बिना नए संपर्कों से जुड़ना चाहते हैं।</p>
<p><strong>WhatsApp यह फीचर क्यों ला रहा है?</strong></p>
<p>कंपनी का कहना है कि कई बार लोग किसी नए व्यक्ति से संपर्क करना चाहते हैं, लेकिन अपना मोबाइल नंबर साझा नहीं करना चाहते। जैसे किसी नेटवर्किंग इवेंट में मिले व्यक्ति, नए क्लासमेट, पड़ोसी या बच्चों के स्कूल अथवा स्पोर्ट्स ग्रुप के अन्य अभिभावकों से बातचीत के दौरान प्राइवेसी बनाए रखना जरूरी होता है। ऐसे मामलों में अब मोबाइल नंबर की जगह केवल यूजरनेम साझा किया जा सकेगा।</p>
<p><strong>क्या यूजरनेम बनाना जरूरी होगा या वैकल्पिक होगा</strong></p>
<p>WhatsApp ने स्पष्ट किया है कि यूजरनेम पूरी तरह वैकल्पिक सुविधा है। यूजर चाहें तो अपना यूजरनेम बना सकते हैं और चाहें तो बिना यूजरनेम के भी पहले की तरह WhatsApp का इस्तेमाल कर सकते हैं। यानी किसी पर भी यूजरनेम बनाने की बाध्यता नहीं होगी।</p>
<p><strong>अपने पसंद का यूजरनेम चाहिए तो क्या करें</strong></p>
<p>दुनियाभर में करोड़ों लोग इस फीचर का इस्तेमाल करेंगे। ऐसे में एक जैसे या मिलते-जुलते नामों की मांग अधिक रहने की संभावना है। इसलिए जो यूजर पहले अपना यूजरनेम रिजर्व करेंगे, उन्हें अपनी पसंद का नाम मिलने की संभावना भी ज्यादा रहेगी।</p>
<p><strong>मोबाइल नंबर तभी दिखेगा जब आप साझा करना चाहेंगे</strong></p>
<p>यूजरनेम फीचर लागू होने के बाद कुछ परिस्थितियों में मोबाइल नंबर अपने-आप सामने नहीं आएगा। यानी जब किसी बड़े ग्रुप चैट में आपको जोड़ा जाएगा अथवा जब आप पहली बार किसी नए व्यक्ति से बातचीत शुरू करेंगे। ऐसी स्थिति में सामने वाले व्यक्ति को आपका यूजरनेम दिखाई देगा, जबकि मोबाइल नंबर तभी दिखाई देगा जब आप स्वयं उसे साझा करना चाहेंगे।</p>
<p><strong>तो क्या मोबाइल नंबर पूरी तरह गायब रहेगा</strong></p>
<p>इसका जवाब है नहीं। अगर आपने यूजरनेम बनाया है तो केवल नए व्यक्ति को आपका नंबर दिखाई नहीं देगा। हालांकि WhatsApp अकाउंट बनाने और उसे चलाने के लिए मोबाइल नंबर पहले की तरह अनिवार्य रहेगा। जिन लोगों के पास पहले से आपका नंबर सेव है, वे पहले की तरह ही आपसे चैट कर सकेंगे।</p>
<p><strong>जरूरी बात: अपराधी</strong><strong> इस फीचर का फायदा न उठाए, यह ध्यान रखना होगा</strong></p>
<p>साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ लंबे समय से यह मानते रहे हैं कि किसी भी ऐसे फीचर, जिसमें वास्तविक पहचान सीमित दिखाई देती हो, उसके साथ मजबूत वेरिफिकेशन और रिपोर्टिंग सिस्टम भी जरूरी होता है। WhatsApp पहले से एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, टू-स्टेप वेरिफिकेशन, अकाउंट रिपोर्टिंग और स्पैम डिटेक्शन जैसे सुरक्षा फीचर उपलब्ध कराता है। अब सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि यूजरनेम फीचर भी इन्हीं सुरक्षा मानकों के अनुरूप हो और इसके जरिए साइबर अपराधियों को किसी तरह का अतिरिक्त फायदा न मिले।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक और ऑटाे</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 13:12:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
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                <title>राजकोट के ग्राहक का दावा: नई OLA शोरूम से निकलते ही उसे सर्विस सेंटर ले जाना पड़ा, 2 महीने से...</title>
                                    <description><![CDATA[<p>ओला के स्कूटर और उनकी खराब सर्विस के बारे में कोई भी टिप्पणी करना समय की बर्बादी है, क्योंकि कंपनी के कई दावों के बावजूद, उसकी सर्विस बदतर होती गई है। लेकिन अब तो बिल्कुल नए स्कूटर भी खराब होने लगे हैं। वे शोरूम से निकलकर कुछ ही मीटर तक चलते हैं। एक बार बंद हो जाएं, तो फिर महीनों तक शुरू नहीं होते। बेचारे ग्राहकों को शोरूम और सर्विस सेंटर के बीच लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।</p>
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rushlane.com

<p>गुजरात के राजकोट से ओला स्कूटर में खराबी का एक नया वीडियो सामने आया है। एक ग्राहक ने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/tech/rajkot-customer-claims-he-had-to-take-the-new-ola/article-2463"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/1313.webp" alt=""></a><br /><p>ओला के स्कूटर और उनकी खराब सर्विस के बारे में कोई भी टिप्पणी करना समय की बर्बादी है, क्योंकि कंपनी के कई दावों के बावजूद, उसकी सर्विस बदतर होती गई है। लेकिन अब तो बिल्कुल नए स्कूटर भी खराब होने लगे हैं। वे शोरूम से निकलकर कुछ ही मीटर तक चलते हैं। एक बार बंद हो जाएं, तो फिर महीनों तक शुरू नहीं होते। बेचारे ग्राहकों को शोरूम और सर्विस सेंटर के बीच लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।</p>
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<p>गुजरात के राजकोट से ओला स्कूटर में खराबी का एक नया वीडियो सामने आया है। एक ग्राहक ने शोरूम से नई EV बाहर निकाली और वह सिर्फ एक किलोमीटर चलने के बाद ही बंद हो गई। शोरूम के कर्मचारी ने ग्राहक से कहा कि यह सिर्फ सॉफ्टवेयर अपडेट का मामला है, एक-दो घंटे का काम है, सर्विस सेंटर चले जाइए, वहां ठीक हो जाएगी।</p>
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rushlane.com

<p>जब बेचारा ग्राहक सर्विस सेंटर पहुंचा, तो स्कूटर तो शुरू नहीं हुआ, बल्कि एक के बाद एक नई समस्याएं सामने आने लगीं। ग्राहक के अनुसार, सर्विस सेंटर ने कहा कि सॉफ्टवेयर अपडेट में समय लगेगा और स्कूटर को यहीं सर्विस सेंटर पर रखना होगा। जब ग्राहक 7 दिन बाद फिर सर्विस सेंटर पहुंचा, तो उसे पता चला कि नए स्कूटर की मोटर में खराबी है। सर्विस सेंटर के स्टाफ ने कहा, 'स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध नहीं हैं, तो हम भी क्या कर सकते हैं? दो महीने बीत चुके हैं, और स्कूटर अभी भी बेकार हालत में पड़ा हुआ है।'</p>
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<p>वीडियो में साफ तौर पर 500 से अधिक स्कूटर कबाड़ की तरह पड़े हुए दिखाई दे रहे हैं। यह कोई पहला वीडियो नहीं है। पिछले अगस्त में, जमशेदपुर का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें असंख्य स्कूटरों पर धूल जमी हुई थी। वीडियो में एक व्यक्ति कहता है, 'भाविश अग्रवाल दुनिया की सबसे बड़ी फैक्ट्री बना रहे हैं। लेकिन यह तो स्कूटरों का कब्रिस्तान है।'</p>
<p>एक दूसरा व्यक्ति कहता है, 'ओला ने अपना नाम बहुत समझदारी से रखा है, क्योंकि यह लोगों को सिर्फ गोल-गोल घुमा रही है। सर्विस सेंटर पर 300-400 स्कूटर ऐसे ही पड़े हुए हैं।'</p>
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rushlane.com

<p>ऐसा ही एक और वीडियो कुछ महीने पहले सूरत से सामने आया था। यदि आप ऑनलाइन 'ओला सर्विस' लिखकर खोजेंगे, तो आपकी स्क्रीन ऐसी खबरों से भर जाएगी। ओला अपने ग्राहकों को सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह भटकाने का काम कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक और ऑटाे</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 16:30:23 +0530</pubDate>
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