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                <title>धर्म ज्योतिष - Khabarchhe Hindi</title>
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                <description>धर्म ज्योतिष RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सावन शुक्ल पक्ष शुरू…दुर्लभ संयोग के साथ अगले 15 दिन रहेंगे खास; हरियाली तीज से रक्षाबंधन तक कई व्रत-पर्व</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>सूरत। </strong>सावन महीने का शुक्ल पक्ष शुरू हो गया है। यह 28 अगस्त सावन पूर्णिमा तक रहेगा। सावन शुक्ल पक्ष की शुरुआत के साथ ही अब त्योहारों और व्रतों का सिलसिला तेज हो जाएगा। अगले कुछ दिनों में हरियाली तीज, दूर्वा गणपति चतुर्थी, नाग पंचमी, पुत्रदा एकादशी, भौम प्रदोष और रक्षाबंधन जैसे प्रमुख पर्व मनाए जाएंगे। धार्मिक मान्यताओं में सावन को भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष महीना माना गया है। इस दौरान शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और अन्य पूजन सामग्री चढ़ाने की परंपरा है।</p>
<p>इस साल सावन में चार सोमवार पड़ रहे हैं। इनमें 17 अगस्त का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/religion-astrology/sawan-shukla-paksha-begins%E2%80%A6with-rare-coincidence-there-will-be-special/article-2728"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-08/111.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>सूरत। </strong>सावन महीने का शुक्ल पक्ष शुरू हो गया है। यह 28 अगस्त सावन पूर्णिमा तक रहेगा। सावन शुक्ल पक्ष की शुरुआत के साथ ही अब त्योहारों और व्रतों का सिलसिला तेज हो जाएगा। अगले कुछ दिनों में हरियाली तीज, दूर्वा गणपति चतुर्थी, नाग पंचमी, पुत्रदा एकादशी, भौम प्रदोष और रक्षाबंधन जैसे प्रमुख पर्व मनाए जाएंगे। धार्मिक मान्यताओं में सावन को भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष महीना माना गया है। इस दौरान शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और अन्य पूजन सामग्री चढ़ाने की परंपरा है।</p>
<p>इस साल सावन में चार सोमवार पड़ रहे हैं। इनमें 17 अगस्त का तीसरा सोमवार विशेष माना जा रहा है, क्योंकि इसी दिन नाग पंचमी भी है। पंचांग गणना के अनुसार 17 अगस्त को श्रावण शुक्ल पंचमी और तीसरा सावन सोमवार एक ही दिन पड़ रहे हैं। ये बड़ा ही दुर्लभ संयोग है। इससे पहले 2003 में भी नागपंचमी सोमवार को पड़ी थी।</p>
<p>आइए जानते हैं कि सावन शुक्ल पक्ष कौन-कौन से व्रत-त्योहार हैं और क्या यह माह इतना खास क्यों है…</p>
<p><strong>15 अगस्त को ही स्वतंत्रता दिवस और हरियाली तीज</strong></p>
<p>सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया 15 अगस्त, शनिवार को हरियाली तीज के रूप में मनाई जाएगी। इसी दिन पूरे देश में स्वतंत्रता दिवस भी मनाया जाएगा। इसलिए इस बार का 15 अगस्त काफी महत्वपूर्ण हो जाता है। यह पर्व विशेष रूप से महिलाओं के लिए काफी खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं शिव-पार्वती की पूजा कर पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। पूजा में माता पार्वती को मेहंदी, लाल चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर और सुहाग की अन्य वस्तुएं अर्पित करने की परंपरा है। भगवान शिव को जल और बेलपत्र चढ़ाए जाते हैं। कई जगह महिलाएं झूला झूलती हैं और तीज की कथा सुनती-पढ़ती हैं। </p>
<p><strong>16 अगस्त को दूर्वा गणपति चतुर्थी, सारी बाधाएं दूर होंगी</strong></p>
<p>16 अगस्त को दूर्वा गणपति चतुर्थी का व्रत रहेगा। इस दिन भगवान गणेश की पूजा कर उन्हें दूर्वा, फूल, मौसमी फल और मोदक अर्पित किए जाते हैं। मान्यता है कि गणेश जी की पूजा से बाधाएं दूर होती हैं और शुभ कार्यों में सफलता मिलती है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रखकर गणेश मंत्रों का जाप कर सकते हैं।</p>
<p><strong>17 अगस्त को नाग पंचमी और सावन सोमवार</strong></p>
<p>17 अगस्त का दिन इस पक्ष का सबसे महत्वपूर्ण दिन रहेगा। इस दिन नाग पंचमी के साथ सावन का तीसरा सोमवार भी है। पंचांग के अनुसार 17 अगस्त को श्रावण शुक्ल पंचमी और तीसरा श्रावण सोमवार है। इसी दिन सिंह संक्रांति भी रहेगी। नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा करने की परंपरा है। इस दिन भगवान शिव का जलाभिषेक कर शिवलिंग पर बेलपत्र, फूल आदि चढ़ाए जा सकते हैं। नाग देवता की प्रतिमा का पूजन किया जाता है। <br />रक्षा बंधन से पहले पुत्रदा एकादशी भी मनाई जाएगी</p>
<p>सावन शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी 23-24 अगस्त को होगी। पंचांगों में सामान्य श्रावण पुत्रदा एकादशी 23 अगस्त और वैष्णव पुत्रदा एकादशी 24 अगस्त दर्ज है। इसलिए व्रत रखने वाले अपने क्षेत्र के पंचांग और स्थानीय परंपरा के अनुसार तिथि तय कर सकते हैं। इस व्रत में भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान संबंधी मनोकामनाओं के लिए फलदायी होता है। भक्त फलाहार करते हुए भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप और पूजा-अर्चना कर सकते हैं।</p>
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<p><strong>28 अगस्त को रक्षाबंधन और सावन पूर्णिमा</strong></p>
<p>28 अगस्त शुक्रवार को सावन पूर्णिमा और रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधकर उसके सुख, स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना करती हैं। भाई भी बहन की रक्षा और सुख-समृद्धि का संकल्प लेता है। परिवार में पूजा-अर्चना के बाद राखी बांधने और मिठाई खिलाने की परंपरा है। पंचांग के अनुसार 28 अगस्त को रक्षाबंधन के साथ श्रावण पूर्णिमा, राखी और गायत्री जयंती जैसे पर्व भी दर्ज हैं।</p>
<p><strong>सावन शुक्ल पक्ष में </strong><strong>क्या करें?</strong></p>
<p>इस पूरे पक्ष में श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश जी और भगवान विष्णु की पूजा कर सकते हैं। शिव पूजा में जल और बेलपत्र चढ़ाना, मंत्र जाप, ध्यान और जरूरतमंदों को दान करना शुभ माना जाता है। व्रत रखने वाले व्यक्ति अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार ही उपवास करें। अलग-अलग क्षेत्रों में तिथि और पूजा की विधि में थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए व्रत की सही तिथि और पूजा का समय स्थानीय पंचांग से मिलाना बेहतर रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 14:18:24 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>भोले की भक्ति से बीमारी भी हारी! 80 साल के परशुराम ऑक्सीजन सिलिंडर के सहारे स्कूटी से निकले कांवड़ यात्रा पर</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>मुजफ्फरनगर।</strong> भक्ति के आगे उम्र और बीमारी भी छोटी पड़ जाती है। इसका अनूठा उदाहरण 80 वर्षीय शिवभक्त परशुराम शर्मा ने पेश किया। ऑक्सीजन सिलिंडर के सहारे सांस ले रहे परशुराम डॉक्टरों के मना करने के बावजूद कांवड़ यात्रा पर निकल पड़े। उन्होंने स्कूटी से करीब 93 किलोमीटर की यात्रा की और शिव चौक पहुंचकर भगवान आशुतोष का जलाभिषेक किया।</p>
<p>मुजफ्फरनगर के नरा गांव के रहने वाले परशुराम वर्तमान में उत्तराखंड के ज्वालापुर में रहते हैं। वह अब तक 13 बार कांवड़ यात्रा कर चुके हैं। इस बार उनकी तबीयत खराब है और सांस लेने में उन्हें दिक्कत हो रही</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/religion-astrology/due-to-the-devotion-of-bhole-the-disease-was-also/article-2710"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-08/18.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुजफ्फरनगर।</strong> भक्ति के आगे उम्र और बीमारी भी छोटी पड़ जाती है। इसका अनूठा उदाहरण 80 वर्षीय शिवभक्त परशुराम शर्मा ने पेश किया। ऑक्सीजन सिलिंडर के सहारे सांस ले रहे परशुराम डॉक्टरों के मना करने के बावजूद कांवड़ यात्रा पर निकल पड़े। उन्होंने स्कूटी से करीब 93 किलोमीटर की यात्रा की और शिव चौक पहुंचकर भगवान आशुतोष का जलाभिषेक किया।</p>
<p>मुजफ्फरनगर के नरा गांव के रहने वाले परशुराम वर्तमान में उत्तराखंड के ज्वालापुर में रहते हैं। वह अब तक 13 बार कांवड़ यात्रा कर चुके हैं। इस बार उनकी तबीयत खराब है और सांस लेने में उन्हें दिक्कत हो रही है। जिसके कारण कांवड़ यात्रा के दौरान उन्हें ऑक्सीजन सिलिंडर लेने की जरूरत पड़ी। डॉक्टरों ने उन्हें घर से दूर जाने से मना किया था, लेकिन भगवान शिव के प्रति उनकी आस्था ने उन्हें यात्रा के लिए प्रेरित किया।</p>
<p>परशुराम अपनी स्कूटी पर ऑक्सीजन के दो सिलिंडर लेकर यात्रा पर निकले। जब वह शहर के रुड़की रोड स्थित सेवा शिविर में पहुंचे तो वहां मौजूद लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गए। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की भक्ति में अनूठी शक्ति है। जब भी उनके जीवन में मुश्किलें आईं, भोलेनाथ ने उनका साथ दिया। इसी विश्वास के चलते वह बीमारी के बावजूद यात्रा पर निकले।</p>
<p><strong>पुरा महादेव जाने की थी इच्छा</strong></p>
<p>परशुराम की इच्छा ज्वालापुर से बागपत स्थित पुरा महादेव मंदिर तक जाने की थी। वह वहां के लिए निकले भी थे, लेकिन स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के कारण आगे की यात्रा मुश्किल हो गई। उन्होंने बताया कि पुरा महादेव मंदिर ऊंचाई पर स्थित है और वहां ऑक्सीजन सिलिंडर लेकर जाना उनके लिए आसान नहीं था। इसलिए उन्होंने शिव चौक पर ही जलाभिषेक कर अपनी यात्रा पूरी की। उनका कहना है कि शिव के दरबार तक पहुंचने की उनकी इच्छा पूरी हो गई।</p>
<p>परशुराम के इस जज्बे का क्रांति सेना के संस्थापक अध्यक्ष ललित मोहन शर्मा ने भी सम्मान किया। उन्होंने कहा कि 80 साल की उम्र में इस तरह यात्रा करना आसान नहीं है। परशुराम की आस्था और हिम्मत लोगों को प्रेरणा देने वाली है। समिति की ओर से उनका अभिनंदन भी किया गया।</p>
<p><strong>पुरा महादेव में उमड़ा आस्था का सैलाब</strong></p>
<p>उधर, बागपत के पुरा महादेव स्थित परशुरामेश्वर महादेव मंदिर में सावन के दूसरे सोमवार को श्रद्धालुओं और कांवड़ियों की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह तीन बजे से ही जलाभिषेक के लिए करीब तीन किलोमीटर लंबी कतार लग गई थी। श्रद्धालुओं को अपनी बारी के लिए करीब पांच घंटे तक इंतजार करना पड़ा।</p>
<p>मंदिर के मुख्य पुजारी जयभगवान शर्मा के अनुसार, सोमवार रात 12 बजे तक 10 लाख से ज्यादा कांवड़ियों और श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया। मंगलवार तक यह संख्या 15 लाख तक पहुंचने का अनुमान जताया गया।</p>
<p>भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मंदिर परिसर में अर्धसैनिक बल और पीएसी के जवान तैनात किए गए, जबकि बाहर पुलिसकर्मियों की तैनाती रही। डीएम अस्मिता लाल, एसपी सूरज कुमार राय और एडीजी भानु भास्कर ने भी मंदिर पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया और अधिकारियों को कांवड़ियों के साथ अच्छा व्यवहार करने के निर्देश दिए।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 12:46:20 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>आस्था से अर्थव्यवस्था तक... कांवड़ यात्रा सिर्फ श्रद्धा का प्रतीक ही नहीं, चलता है ₹10,000 करोड़ का कारोबार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>कांवड़ यात्रा के महत्व के बारे में, शिव पुराण में बताया गया है कि जो कोई शिवलिंग का गंगा जल से अभिषेक करता है वह पापों से मुक्त हो जाता है और शिवलोक में उसका सम्मान होता है। भगवान शिव का गंगा जल से अभिषेक करने की परंपरा प्राचीन है और पुराणों में इसका विस्तृत उल्लेख है। आज, आपको यह भी जानना चाहिए कि, कांवड़ यात्रा कब शुरू हुई थी और पृथ्वी पर पहले कांवड़िया कौन थे। पौराणिक ग्रंथों में, कांवड़ यात्रा की उत्पत्ति त्रेता युग की 3 घटनाओं को माना गया है।</p>
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<p>पहली मान्यता के अनुसार, भगवान परशुराम</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/religion-astrology/%E0%A4%86%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%85%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%B5%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%B5%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE-%E0%A4%A4%E0%A4%95----%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%B5%E0%A4%A1%E0%A4%BC-%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AB-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%95-%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82--%E0%A4%9A%E0%A4%B2%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E2%82%B910-000-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A1%E0%A4%BC-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B0/article-2688"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-08/kawar-yatra3.webp" alt=""></a><br /><p>कांवड़ यात्रा के महत्व के बारे में, शिव पुराण में बताया गया है कि जो कोई शिवलिंग का गंगा जल से अभिषेक करता है वह पापों से मुक्त हो जाता है और शिवलोक में उसका सम्मान होता है। भगवान शिव का गंगा जल से अभिषेक करने की परंपरा प्राचीन है और पुराणों में इसका विस्तृत उल्लेख है। आज, आपको यह भी जानना चाहिए कि, कांवड़ यात्रा कब शुरू हुई थी और पृथ्वी पर पहले कांवड़िया कौन थे। पौराणिक ग्रंथों में, कांवड़ यात्रा की उत्पत्ति त्रेता युग की 3 घटनाओं को माना गया है।</p>
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<p>पहली मान्यता के अनुसार, भगवान परशुराम को पहला कांवड़िया माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि त्रेता युग में, वे गढ़मुक्तेश्वर से गंगा जल लाए थे और उत्तर प्रदेश के बागपत में पुरा महादेव में भगवान शिव का जलाभिषेक किया था। दूसरी कथा भी त्रेता युग से संबंधित है। इस कथा में, लंका के राजा रावण को पहला कांवड़िया माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि समुद्र मंथन के बाद हलाहल विष पीने के बाद भगवान शिव का गला नीला हो गया था। शिवभक्त रावण सुल्तानगंज से गंगाजल लाया था और देवघर के वैद्यनाथ धाम में भगवान शिव के अभिषेक की विधि की थी। इसलिए, रावण को भी पहला कांवड़िया माना जाता है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/kawar-yatra1.webp" alt="kawar-yatra1" width="1280" height="720"></img>
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<p>कुछ दंतकथाएं त्रेतायुग में श्रवणकुमार द्वारा की गई कांवड़ यात्रा की शुरुआत का उल्लेख करती हैं। ऐसा माना जाता है कि श्रवणकुमार अपने अंधे माता-पिता को कांवड़ में हरिद्वार ले गए थे, उन्हें गंगा में स्नान कराया था और गंगाजल लेकर वापस लौटे थे। पहला कांवड़िया कौन था यह तय करना कठिन है। हालांकि, वैदिक दंतकथाएँ स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि, कांवड़ यात्रा की परंपरा हजारों वर्ष पुरानी और पवित्र है। पहले की कांवड़ यात्रा बहुत ही सादगी और पवित्रता के साथ मनाई जाती थी। प्रौद्योगिकी के आगमन के साथ, कांवड़ यात्रा में भगवान शिव से संबंधित स्तोत्रों और संगीत का भी समावेश होने लगा। आपने सामान्यतः कांवड़ यात्रा के दौरान शिवभक्तों को 'बोल बम', 'बम बम भोले', और 'हर हर महादेव' के नारे लगाते हुए सुना होगा। आज, हम आपको उन 3 मंत्रों के बारे में बताएँगे जिन्हें शास्त्रों के अनुसार, कांवड़ यात्रा के दौरान प्रत्येक कांवड़ियों के लिए अनिवार्य माना गया है।</p>
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<p>पहला मंत्र पंचाक्षरी मंत्र है, जिसका अर्थ 'ॐ नमः शिवाय' होता है। शास्त्रों में पंचाक्षरी मंत्र को भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सबसे सरल और सबसे शक्तिशाली मंत्र के रूप में वर्णित किया गया है। इसमें बताया गया है कि, कांवड़ यात्रा के दौरान इस मंत्र का जाप करने से एकाग्रता बनाए रखने में मदद मिलती है और भक्त का पूरा ध्यान शिव की भक्ति में डूब जाता है। दूसरा महत्वपूर्ण मंत्र महामृत्युंजय मंत्र है। प्राचीन काल से, कांवड़ यात्रा को अत्यंत कठिन, दुष्कर और बहुत अधिक परिश्रम माँगने वाली माना जाता है। इसलिए, प्रत्येक कांवड़ियों के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप अनिवार्य माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह मंत्र भगवान शिव को प्रसन्न करता है और कांवड़ यात्रा के दौरान आने वाली आपदाओं से उनके भक्तों की रक्षा करता है। तीसरा महत्वपूर्ण मंत्र रुद्र गायत्री मंत्र है। कांवड़ यात्रा के दौरान इस मंत्र का जाप करने से मानसिक और शारीरिक शक्ति तथा प्रतिकूलताओं से सुरक्षा मिलती है। गायत्री छंद में होने के कारण, यह मंत्र मन को केंद्रित करने में मदद करता है।'</p>
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<p>वर्तमान में, कांवड़िए 'बोल बम', 'बम बम भोले', और 'हर हर महादेव' के मंत्रों का जाप करते हैं। हालांकि, शास्त्रीय शास्त्रों के अनुसार, कांवड़ यात्रा के दौरान इन 3 मंत्रों का जाप इस पवित्र यात्रा के पुण्य में और अधिक वृद्धि करता है। कांवड़ यात्रा में आए परिवर्तनों के साथ, एक पूरी आर्थिक व्यवस्था उससे जुड़ी हुई है, इसलिए आपको आज की कांवड़ यात्रा के अर्थशास्त्र को समझना चाहिए। CAIT (कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स) की रिपोर्ट के अनुसार, पवित्र कांवड़ यात्रा रु. 5,000 करोड़ से अधिक का व्यापार उत्पन्न करती है। CAIT द्वारा यह आँकड़ा केवल प्रारंभिक अनुमान है। श्रावण महीने में, कांवड़, केसरिया T-शर्ट, पूजा सामग्री, फल और गंगा जल संग्रह करने के लिए प्लास्टिक और पीतल की बोतलों की माँग रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच जाती है।</p>
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<p>कांवड़ यात्रा के दौरान एक व्यक्ति लगभग रु. 4,000 खर्च करता है। यह खर्च ढाबा मालिकों और मार्ग पर स्थित अन्य स्थानीय व्यवसायों को लाभ पहुँचाता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 240 किलोमीटर लंबे कांवड़ मार्ग से हर महीने लगभग रु. 1,000 करोड़ का व्यापार उत्पन्न होता है। लखनऊ में गिरी इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज़ द्वारा किए गए शोध के अनुसार, इस यात्रा ने केवल उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में लगभग रु. 1,000 करोड़ का योगदान दिया है। 2025 में, 4.5 करोड़ से अधिक शिवभक्त गंगाजल लेकर हरिद्वार से रवाना हुए।</p>
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<p>यह कांवड़ यात्रा दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, बिहार, ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश तक फैली हुई है। इसलिए, कुछ रिपोर्टों के अनुसार इस पवित्र यात्रा में भाग लेने वाले भक्तों की संख्या 6 करोड़ से अधिक है। इस आँकड़े के आधार पर, आर्थिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि, कांवड़ यात्रा के दौरान होने वाले व्यापार का परिमाण रु. 10,000 करोड़ से अधिक हो सकता है। यह राशि सिक्किम, मिजोरम, नागालैंड, मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा जैसे राज्यों के वार्षिक बजट से भी अधिक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 12:32:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चंदा चोरी विवाद के बीच राम मंदिर में भक्तों के लिए बदल गई दर्शन व्यवस्था, क्या-क्या बदलाव हुए, अयोध्या जाने से पहले जान लें…</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>अयोध्या।</strong> अयोध्या के राम मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बड़ा बदलाव किया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इसके लिए विशेष गाइडलाइन जारी की है। दरअसल दर्शन और आरती से जुड़ी व्यवस्था में अहम बदलाव किया है, ताकि श्रद्धालुओं को रामलला का दर्शन सुगम तरीके से कर सकें। नई व्यवस्था के तहत अब राम दरबार के दर्शन के लिए किसी भी प्रकार के पास की जरूरत नहीं होगी। श्रद्धालु बिना पास के सीधे राम दरबार के दर्शन कर सकेंगे। वहीं, रामलला की आरती में शामिल होने के इच्छुक भक्तों के लिए</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/religion-astrology/amidst-donation-theft-controversy-the-darshan-system-for-devotees-changed/article-2678"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-08/ram-mandir.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>अयोध्या।</strong> अयोध्या के राम मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बड़ा बदलाव किया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इसके लिए विशेष गाइडलाइन जारी की है। दरअसल दर्शन और आरती से जुड़ी व्यवस्था में अहम बदलाव किया है, ताकि श्रद्धालुओं को रामलला का दर्शन सुगम तरीके से कर सकें। नई व्यवस्था के तहत अब राम दरबार के दर्शन के लिए किसी भी प्रकार के पास की जरूरत नहीं होगी। श्रद्धालु बिना पास के सीधे राम दरबार के दर्शन कर सकेंगे। वहीं, रामलला की आरती में शामिल होने के इच्छुक भक्तों के लिए पहली बार तत्काल पास की सुविधा शुरू कर दी गई है। इसके लिए बिड़ला धर्मशाला के सामने स्थित यात्री सुविधा केंद्र में अलग काउंटर बनाया गया है। यहां फिलहाल सीमित संख्या में तत्काल पास जारी किए जा रहे हैं। ट्रस्ट का कहना है कि श्रद्धालुओं की संख्या और मांग को देखते हुए भविष्य में तत्काल पासों का कोटा बढ़ाया भी जा सकता है।</p>
<p><strong>चढ़ावा चोरी विवाद के बीच नई व्यवस्था लागू की गई</strong></p>
<p>यह नई व्यवस्था ऐसे समय लागू की गई है, जब हाल ही में मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद दर्शन पास जारी करने की प्रक्रिया प्रभावित हो गई थी। ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय तथा सदस्य गोपाल राव और अनिल मिश्रा की आईडी बंद किए जाने के कारण पास जारी करने में तकनीकी और प्रशासनिक दिक्कतें आ रही थीं। इसका असर यह हुआ कि प्रतिदिन बहुत कम संख्या में दर्शन पास बन पा रहे थे। श्रद्धालुओं की बढ़ती परेशानी को देखते हुए ट्रस्ट ने व्यवस्था की समीक्षा की और तत्काल प्रभाव से नई प्रणाली लागू कर दी।</p>
<p><strong>आरती दर्शन के लिए अलग-अलग श्रेणी के पास जारी किए जाएंगे</strong></p>
<p>नई व्यवस्था के तहत आरती दर्शन के लिए अलग-अलग श्रेणी के पास जारी किए जाएंगे। पास व्यवस्था प्रभारी नरेंद्र के अनुसार, बिड़ला धर्मशाला के सामने स्थित यात्री सुविधा केंद्र पर प्रतिदिन सुबह 9 बजे से तत्काल पास बनाए जा रहे हैं। यहां रोजाना रामलला की आरती के लिए 45 तथा राम परिवार की आरती के लिए 15 तत्काल पास उपलब्ध कराए जाएंगे। रामलला की मंगला आरती सुबह 4 बजे और शृंगार आरती सुबह 6 बजे होती है। इन दोनों आरतियों में शामिल होने के लिए पास एक दिन पहले जारी किए जाएंगे, जबकि रात 9 बजे होने वाली शयन आरती के लिए उसी दिन पास उपलब्ध कराया जाएगा। इससे श्रद्धालुओं को आरती में शामिल होने के लिए पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक व्यवस्था मिलेगी।</p>
<p><strong>ऑनलाइन पास व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी</strong></p>
<p>ट्रस्ट ने ऑनलाइन पास व्यवस्था को भी यथावत रखा है। आरती दर्शन के लिए पहले से प्रतिदिन 100 ऑनलाइन पास जारी किए जा रहे हैं। इसके अलावा 75 रेफरल पास की व्यवस्था भी जारी रहेगी। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि रेफरल पासों का कोई अलग कोटा जिला प्रशासन, सैनिक सदन या किसी अन्य संस्था के लिए निर्धारित नहीं किया गया है। यदि किसी विशेष अतिथि के लिए आवश्यकता होगी तो संबंधित व्यक्ति सीधे ट्रस्ट से संपर्क कर सकेगा। इससे पास वितरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और नियंत्रित बनाए रखने का प्रयास किया गया है।</p>
<p><strong>नियमित दर्शन के लिए जारी पास की भी समीक्षा की जा रही</strong></p>
<p>नियमित दर्शन व्यवस्था की भी समीक्षा जारी है। रामलला के नियमित दर्शन के लिए अब तक 2,743 दैनिक पास जारी किए जा चुके हैं। ट्रस्ट इन सभी पासों की समीक्षा कर रहा है ताकि व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित बनाया जा सके। छह महीने की वैधता वाले पासों का नवीनीकरण भी लगातार किया जा रहा है। जिन श्रद्धालुओं के पास की अवधि समाप्त होने वाली है, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसका नवीनीकरण करा सकते हैं। हालांकि, फिलहाल नए दैनिक पास जारी करने पर रोक लगाई गई है। ट्रस्ट का कहना है कि समीक्षा पूरी होने के बाद ही इस संबंध में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।</p>
<p><strong>भक्त आरती दर्शन के लिए ऐसे बनवा सकते हैं तत्काल पास</strong></p>
<ul>
<li>बिड़ला गेट स्थित तीर्थ क्षेत्र के यात्री सुविधा केंद्र के काउंटर पर आवेदन करना होगा। ध्यान रखें कि मंगला और श्रृंगार आरती का पास एक दिन पहले, जबकि शयन आरती का पास उसी दिन जारी होगा।</li>
<li> पास बनना प्रतिदिन सुबह 9 बजे से शुरू होगा।, लेकिन काउंटर से केवल वरिष्ठ नागरिकों तथा गोद में दूधमुंहे शिशु के साथ आने वाले माता-पिता का पास बनाया जाएगा।</li>
<li>अपने पास आधार कार्ड तथा शिशु के साथ माता-पिता की फोटो दिखानी होगी।</li>
</ul>
<p><strong>नई व्यवस्था से राम दरबार तक पहुंचना आसान हो जाएगा</strong></p>
<p>राम मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। भीड़ बढ़ने के साथ दर्शन और आरती व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना ट्रस्ट के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। इसी कारण समय-समय पर व्यवस्थाओं में बदलाव किए जा रहे हैं। ट्रस्ट का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने से एक ओर श्रद्धालुओं को राम दरबार के दर्शन के लिए अतिरिक्त औपचारिकताओं से राहत मिलेगी, वहीं आरती में शामिल होने के इच्छुक लोगों के लिए तत्काल पास की सुविधा भी अधिक उपयोगी साबित होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 13:37:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कल से शुरू हो रहे चातुर्मास के दौरान क्या करें और क्या न करें, अब चार माह शुभ कार्यों पर विराम, भगवान विष्णु रहेंगे योगनिद्रा में</title>
                                    <description><![CDATA[<p>आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी, इसे देवशयनी एकादशी भी कहा जाता है। यह कल से यानी 25 जुलाई से शुरू हो रहा है। इसी दिन से चातुर्मास का भी शुभारंभ होता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु चार माह के लिए पाताल लोक में राजा बलि के यहां योगनिद्रा में चले जाते हैं और कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी को जागते हैं। इस बार चातुर्मास की समाप्ति 20 नवंबर को होगी। बता दें कि सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु के योगनिद्रा में रहने के कारण चार महीनों में विवाह, सगाई, मुंडन, जनेऊ संस्कार, गृहप्रवेश सहित</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/religion-astrology/what-to-do-and-what-not-to-do-during-chaturmas/article-2618"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/10.jpg" alt=""></a><br /><p>आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी, इसे देवशयनी एकादशी भी कहा जाता है। यह कल से यानी 25 जुलाई से शुरू हो रहा है। इसी दिन से चातुर्मास का भी शुभारंभ होता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु चार माह के लिए पाताल लोक में राजा बलि के यहां योगनिद्रा में चले जाते हैं और कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी को जागते हैं। इस बार चातुर्मास की समाप्ति 20 नवंबर को होगी। बता दें कि सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु के योगनिद्रा में रहने के कारण चार महीनों में विवाह, सगाई, मुंडन, जनेऊ संस्कार, गृहप्रवेश सहित सभी शुभ एवं मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं।</p>
<p><strong>चातुर्मास का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व माना गया है</strong></p>
<p>देवशयनी एकादशी को देवशयन पर्व भी कहा जाता है। इसी दिन से शुरू होने वाले चातुर्मास का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व माना गया है। इस दौरान श्रद्धालु विभिन्न प्रकार के व्रत, नियम और संयम का पालन करते हैं तथा अधिक से अधिक भगवान का स्मरण, भजन, जप और पूजा-अर्चना करते हैं। जैन धर्म में भी चातुर्मास का विशेष महत्व है। इस अवधि में श्रद्धालु दैरासर जाकर मंत्रजाप, अनुष्ठान और धार्मिक साधना करते हैं। जैन साधु-संत एक ही स्थान पर रहकर आराधना एवं अध्ययन करते हैं तथा पूरे चातुर्मास में भ्रमण पूरी तरह त्याग देते हैं।</p>
<p><strong>आइए जानते हैं कि चातुर्मास का वैज्ञानिक महत्व क्या है</strong></p>
<p>चातुर्मास का अधिकांश समय वर्षा ऋतु में आता है। इस दौरान बादलों और लगातार वर्षा के कारण सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पाता। धार्मिक मान्यता में इसे देवताओं के विश्राम का प्रतीक माना गया है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी इस समय शरीर की पाचन शक्ति अपेक्षाकृत कमजोर हो जाती है, जिससे स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ सकता है। आधुनिक विज्ञान के अनुसार, वर्षा ऋतु में विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया और वायरस अधिक सक्रिय हो जाते हैं। इसलिए इस मौसम में खानपान और दिनचर्या में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।</p>
<p><strong>चातुर्मास में क्या करें</strong></p>
<ul>
<li>भगवान विष्णु का नियमित पूजन, नामस्मरण और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।</li>
<li>इस दौरान व्रत, उपवास और सात्विक जीवनशैली अपनाएं।</li>
<li>चार माह तक संतुलित एवं सुपाच्य भोजन करें।</li>
<li>पानी को उबालकर ठंडा करके पीएं।</li>
<li>दूध पीना हो तो उसे अच्छी तरह गर्म करने के बाद ही सेवन करें।</li>
<li>प्रतिदिन सीमित मात्रा में शहद का सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना गया है।</li>
<li>जप, तप, दान, धार्मिक अध्ययन और सत्संग में समय दें।</li>
<li>संयम, सदाचार और आत्मचिंतन को जीवन का हिस्सा बनाएं।</li>
</ul>
<p><strong>चातुर्मास में क्या न करें</strong></p>
<ul>
<li>विवाह, सगाई, गृहप्रवेश, मुंडन और जनेऊ जैसे मांगलिक कार्य न करें।</li>
<li>अत्यधिक मसालेदार और भारी भोजन से बचें।</li>
<li>कच्ची हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन न करें, क्योंकि वर्षा ऋतु में इनमें कीटाणु होने की आशंका रहती है।</li>
<li>कच्चा दूध, दही और छाछ का सेवन करने से बचें।</li>
<li>बहुत अधिक ठंडा पानी न पीएं।</li>
<li>ऐसी खाद्य वस्तुएं न खाएं जो पचने में कठिन हों।</li>
</ul>
<p><strong>चातुर्मास में खानपान में क्यों जरूरी है सावधानी</strong></p>
<p>चातुर्मास की अवधि में मसालेदार और भारी भोजन से परहेज करने की सलाह दी जाती है। ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए जो आसानी से पच जाएं। विशेष रूप से कच्ची हरी पत्तेदार सब्जियों से बचना चाहिए, क्योंकि वर्षा और धूप की कमी के कारण इनमें सूक्ष्म जीव या कीटाणु पनपने की संभावना रहती है। यदि सब्जियां खानी हों तो उन्हें अच्छी तरह पकाकर या उबालकर खाना बेहतर माना गया है।</p>
<p><strong>संयमित भोजन और विष्णु का पाठ मन-तन दोनों के लिए लाभदायक</strong></p>
<p><strong>चातुर्मास व्रत: </strong>प्रतिदिन एक समय भोजन या उपवास। ब्राह्मण भोजन कराना। श्रावण में शाक, भाद्रपद में दही, आश्विन में दूध तथा कार्तिक में द्विदल अन्न का त्याग। प्रतिदिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ अक्षय सुखदायक माना गया है।<br /><strong>कुच्छपाद व्रत:</strong> तीन दिन का व्रत। पहले दिन एक समय भोजन, दूसरे दिन बिना मांगे प्राप्त भोजन का एक समय सेवन और तीसरे दिन पूरे दिन-रात उपवास।<br /><strong>चंद्रायण व्रत:</strong> दिन में तीन बार स्नान। पूर्णिमा से आरंभ। पूर्णिमा के बाद प्रतिदिन एक-एक मुट्ठी अन्न कम करते हुए अमावस्या को पूर्ण उपवास। फिर प्रतिपदा से प्रतिदिन एक-एक मुट्ठी बढ़ाते हुए अगली पूर्णिमा तक व्रत।<br /><strong>प्रजापत्य व्रत:</strong> 12 दिन का व्रत। पहले तीन दिन एक समय भोजन, अगले तीन दिन रात्रि में एक समय भोजन, फिर तीन दिन थाली में परोसा गया सीमित भोजन तथा अंतिम तीन दिन पूर्ण उपवास।<br /><strong>पराक व्रत:</strong> 12 दिन तक केवल जल ग्रहण किया जाता है।<br /><strong>अखंड एकादशी व्रत:</strong> चातुर्मास की प्रत्येक एकादशी को पूर्ण उपवास, संध्या में बिना नमक का फलाहार, रात्रि जागरण और भगवान के नाम का स्मरण।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 13:42:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
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                <title>सावन में महिलाएं क्यों पहनती हैं हरी चूड़ियां? जानिए इसका धार्मिक महत्व</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="isSelectedEnd">सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए सबसे पवित्र महीना माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह महीना विशेष रूप से सुहागन महिलाओं के लिए सुख, समृद्धि और अखंड सौभाग्य के लिए होता है। यही कारण है कि सावन के दौरान हरे रंग के वस्त्र पहनने और हरी चूड़ियां धारण करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। चारों ओर फैली हरियाली के कारण भी इस महीने में हरे रंग को प्रकृति, नई ऊर्जा और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">  धार्मिक परंपराओं में सावन के महीने में माता पार्वती की पूजा</p>
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aajtak.in...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/religion-astrology/-draft--add-your-title/article-2598"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/110.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए सबसे पवित्र महीना माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह महीना विशेष रूप से सुहागन महिलाओं के लिए सुख, समृद्धि और अखंड सौभाग्य के लिए होता है। यही कारण है कि सावन के दौरान हरे रंग के वस्त्र पहनने और हरी चूड़ियां धारण करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। चारों ओर फैली हरियाली के कारण भी इस महीने में हरे रंग को प्रकृति, नई ऊर्जा और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd"> धार्मिक परंपराओं में सावन के महीने में माता पार्वती की पूजा के साथ हरी चूड़ियां पहनने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम और मधुरता बनी रहती है तथा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। भारतीय संस्कृति में चूड़ियां केवल श्रृंगार का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि इन्हें सुहाग, मंगल का प्रतीक भी माना जाता है। इसलिए सावन में हरी चूड़ियां पहनने की परंपरा महिलाओं के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन से गहराई से जुड़ी हुई है।</p>
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<p class="isSelectedEnd">धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती को हरा रंग बहुत प्रिय है। सावन के महीनों में महिलाओं को हरी चूड़ियां पहनने से भगवान शिव और माता पार्वती की की कृपा प्राप्त होती है। हरे रंग को शांति, समृद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और मंगल का प्रतीक माना जाता है। ऐसा भी कहा जाता है कि यह रंग मानसिक तनाव और क्रोध को कम कर मन को शांति करता है।</p>
<p>हरी चूड़ियां पहनते समय कुछ नियमों का पालन करना भी आवश्यक माना गया है। सावन की शुरुआत के बाद सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के पश्चात श्रद्धा और विश्वास के साथ हरी चूड़ियां पहननी चाहिए। चूड़ियां धारण करते समय भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करते हुए दांपत्य जीवन की खुशहाली, परिवार की सुख-समृद्धि और सभी के कल्याण की प्रार्थना करनी चाहिए। साथ ही इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि कोई भी चूड़ी टूटी हुई न हो, क्योंकि इसे शुभ नहीं माना जाता। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 15:22:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
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                <title>आगरा: घर के फ्रिज में दिखी बर्फ की शिवलिंग जैसी आकृति, दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="isSelectedEnd">यूपी के आगरा में एक अनोखी घटना इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। शहर के खेरिया मोड़ स्थित नगला भुजा इलाके में एक घर के फ्रिज के अंदर बर्फ से शिवलिंग जैसी आकृति बन गया है। इस आकृति की जानकारी जैसे ही आसपास के लोगों को मिली, देखते ही देखते बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंचने लगे, और घर में पूजा-अर्चना शुरू हो गई और पूरा इलाका 'हर-हर महादेव' के जयकारों से गूंज उठा।</p>
<p class="isSelectedEnd">परिवार के सदस्यों के अनुसार, सबसे पहले उन्होंने फ्रिज के अंदर बर्फ से बनी इस आकृति को देखा, जो उन्हें शिवलिंग जैसी प्रतीत हुई।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/religion-astrology/-draft--add-your-title/article-2558"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/22.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">यूपी के आगरा में एक अनोखी घटना इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। शहर के खेरिया मोड़ स्थित नगला भुजा इलाके में एक घर के फ्रिज के अंदर बर्फ से शिवलिंग जैसी आकृति बन गया है। इस आकृति की जानकारी जैसे ही आसपास के लोगों को मिली, देखते ही देखते बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंचने लगे, और घर में पूजा-अर्चना शुरू हो गई और पूरा इलाका 'हर-हर महादेव' के जयकारों से गूंज उठा।</p>
<p class="isSelectedEnd">परिवार के सदस्यों के अनुसार, सबसे पहले उन्होंने फ्रिज के अंदर बर्फ से बनी इस आकृति को देखा, जो उन्हें शिवलिंग जैसी प्रतीत हुई। इसके बाद परिवार ने श्रद्धा के साथ पूजा शुरू कर दी। धीरे-धीरे यह बात पूरे मोहल्ले और फिर शहर के अन्य हिस्सों में फैल गई। अब दूर-दूर से लोग इस आकृति के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। यहां आकर महिलाएं भजन-कीर्तन और आरती कर रही हैं और प्रसाद भी चढ़ा रही हैं। घर का माहौल पूरी तरह धार्मिक हो गया है और श्रद्धालु इसे भगवान शिव का आशीर्वाद मानकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/17.jpg" alt="1" width="1280" height="720"></img>
aajtak.in

<p class="isSelectedEnd">इस बीच, मोहल्ले के एक बाबा भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने वहां मौजूद लोगों को अमरनाथ गुफा में रहने वाले अमर कबूतरों की कथा सुनाई। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमरनाथ गुफा में रहने वाले कबूतरों के जोड़े को भगवान शिव से अमरत्व का वरदान मिला था और उन्हें शिवभक्ति का प्रतीक माना जाता है। बाबा ने इस घटना को भी भगवान शिव की कृपा से जोड़कर देखने की बात कही।</p>
<p class="isSelectedEnd">कई श्रद्धालु इस बर्फ की आकृति को अमरनाथ के प्रसिद्ध 'बाबा बर्फानी' से जोड़कर देख रहे हैं। उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर स्थित अमरनाथ गुफा में हर साल प्राकृतिक रूप से बर्फ का शिवलिंग बनता है, जिसे लाखों श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। हालांकि इस वर्ष गर्मी और मौसम के प्रभाव के कारण अमरनाथ का प्राकृतिक बर्फ शिवलिंग यात्रा पूरी होने से पहले ही काफी हद तक पिघल चुका है। रिपोर्टों के अनुसार, 57 दिन की यात्रा समाप्त होने से पहले ही शिवलिंग 90 प्रतिशत से अधिक पिघल गया है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/3.jpg" alt="3" width="1280" height="720"></img>
uttarakhandpost.com

<p>फिलहाल आगरा में फ्रिज के अंदर बनी इस बर्फ की आकृति को लेकर लोगों में गहरी आस्था देखने को मिल रही है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि यह केवल प्राकृतिक रूप से बनी बर्फ की आकृति है या इसे किसी धार्मिक चमत्कार के रूप में देखा जाना चाहिए। इस संबंध में किसी वैज्ञानिक या प्रशासनिक एजेंसी की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 12:26:53 +0530</pubDate>
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                <title>मां वैष्णो देवी मंदिर में ₹500 करोड़ की नकली चांदी चढ़ाई गई? कोर्ट ने मांगा जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[<p>माता वैष्णो देवी मंदिर में ₹500 करोड़ की नकली चांदी चढ़ाए जाने के मामले में कोर्ट ने अब जवाब मांगा है। कोर्ट ने क्राइम ब्रांच के जांच अधिकारी को रिकॉर्ड के साथ अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) जम्मू, मुनीष कुमार मनहास ने सोमवार को अधिवक्ता दीपक शर्मा द्वारा दायर आवेदन पर ये निर्देश जारी किए। कोर्ट ने अगली सुनवाई 29 जुलाई के लिए निर्धारित की है।</p>
<p>इससे पहले, अधिवक्ता दीपक शर्मा ने पुलिस महानिरीक्षक (IGP), क्राइम ब्रांच, जम्मू और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP), क्राइम ब्रांच, आर्थिक अपराध शाखा, जम्मू के समक्ष विस्तृत शिकायत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/religion-astrology/fake-silver-worth-%E2%82%B9-500-crore-was-offered-in-maa/article-2557"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/vaishno-devi-fake-silver.jpg-3.webp" alt=""></a><br /><p>माता वैष्णो देवी मंदिर में ₹500 करोड़ की नकली चांदी चढ़ाए जाने के मामले में कोर्ट ने अब जवाब मांगा है। कोर्ट ने क्राइम ब्रांच के जांच अधिकारी को रिकॉर्ड के साथ अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) जम्मू, मुनीष कुमार मनहास ने सोमवार को अधिवक्ता दीपक शर्मा द्वारा दायर आवेदन पर ये निर्देश जारी किए। कोर्ट ने अगली सुनवाई 29 जुलाई के लिए निर्धारित की है।</p>
<p>इससे पहले, अधिवक्ता दीपक शर्मा ने पुलिस महानिरीक्षक (IGP), क्राइम ब्रांच, जम्मू और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP), क्राइम ब्रांच, आर्थिक अपराध शाखा, जम्मू के समक्ष विस्तृत शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में श्री माता वैष्णो देवी मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई जाने वाली चांदी में कथित मिलावट, असली चांदी की जगह अन्य धातुओं के उपयोग और संभावित गबन की जांच के लिए FIR दर्ज करने तथा विस्तृत जांच की मांग की गई थी।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/vaishno-devi-fake-silver.jpg-4.webp" alt="vaishno-devi-fake-silver.jpg-4" width="1097" height="632"></img></p>
<p>9 मई को दर्ज की गई शिकायत में कई गंभीर अपराधों का आरोप लगाया गया है। इनमें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, गबन, रिकॉर्ड में फर्जी बदलाव और कैडमियम युक्त सामग्री की संभावित खरीद या उपयोग के आरोप शामिल हैं।</p>
<p>शिकायतकर्ता ने कोर्ट को बताया कि क्राइम ब्रांच ने उनकी शिकायत पर अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की है। इसलिए, उन्होंने कोर्ट से कार्रवाई की रिपोर्ट मंगाने, FIR दर्ज करने और जांच का आदेश देने का अनुरोध किया था।</p>
<p>कोर्ट के निर्देश पर, क्राइम ब्रांच ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की। इसमें बताया गया कि शिकायत को प्रारंभ में श्रीनगर स्थित क्राइम मुख्यालय में मंजूरी के लिए भेजा गया था। मंजूरी मिलने के बाद इसे आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए जम्मू जोनल पुलिस मुख्यालय भेज दिया गया।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/vaishno-devi-fake-silver.jpg-2.webp" alt="vaishno-devi-fake-silver.jpg-2" width="1097" height="632"></img></p>
<p>अधिवक्ता दीपक शर्मा ने सोमवार को स्टेटस रिपोर्ट पर आपत्ति जताते हुए दलील दी कि केवल एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय में शिकायत स्थानांतरित कर देने को कानूनी कार्रवाई नहीं माना जा सकता। उन्होंने तर्क दिया कि क्राइम ब्रांच, जम्मू की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) स्वयं एक अधिसूचित पुलिस थाना है और कानून के अनुसार शिकायत पर कार्रवाई की जानी चाहिए थी।</p>
<p>उन्होंने दलील दी कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के तहत, क्राइम ब्रांच शिकायत पर कार्रवाई करने की अपनी कानूनी जिम्मेदारी से केवल उसे दूसरी पुलिस एजेंसी को भेजकर बच नहीं सकती। शर्मा ने यह भी कहा कि स्टेटस रिपोर्ट में मामले से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए उठाए गए किसी भी कदम का उल्लेख नहीं किया गया है।</p>
<p>दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) ने मामले से जुड़े क्राइम ब्रांच के जांच अधिकारी को 29 जुलाई को अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया। उन्होंने अधिकारी को संबंधित रिकॉर्ड के साथ व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का भी आदेश दिया।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/vaishno-devi-fake-silver.webp" alt="vaishno-devi-fake-silver" width="1097" height="632"></img></p>
<p>श्री माता वैष्णो देवी मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई लगभग 20 टन चांदी को परीक्षण, गलाने और प्रसंस्करण के लिए भेजे जाने की खबरों के बाद यह विवाद सामने आया था। इसकी अनुमानित कीमत लगभग ₹550 करोड़ बताई गई थी। रिपोर्टों के अनुसार, सामग्री में केवल 5-6 प्रतिशत ही असली चांदी पाई गई थी।</p>
<p>शिकायतकर्ता ने मांग की है कि जांच के माध्यम से यह निर्धारित किया जाए कि दुकानदारों और ज्वैलर्स ने श्रद्धालुओं को नकली या मिलावटी चांदी बेची थी या मंदिर में चढ़ाई गई असली चांदी को बाद के चरण में बदल दिया गया था। उनका कहना है कि यह जांच होनी चाहिए कि यह सामग्री मिलावटी, चोरी की गई या गबन की गई है या नहीं।</p>
<p>उन्होंने यह भी मांग की कि कथित कैडमियम युक्त सामग्री के स्रोत, उत्पादन, प्राप्ति और आपूर्ति श्रृंखला की जांच की जाए। वे मांग करते हैं कि सभी जिम्मेदार लोगों की पहचान की जाए और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 11:37:47 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>यूपी सरकार का बड़ा ऐलान: कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरी करने वाले श्रद्धालुओं को मिलेगा 1 लाख रुपये का अनुदान, शुरू हुई आवेदन प्रक्रिया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>यूपी सरकार ने कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरी करने वाले प्रदेश के मूल निवासी श्रद्धालुओं के लिए प्रोत्साहन की घोषणा की है। धर्मार्थ कार्य विभाग की ओर से ऐसे तीर्थयात्रियों को एक लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, ताकि यात्रा पूरी कर चुके श्रद्धालु समय रहते इस योजना का लाभ उठा सकें।</p>
<p>धर्मार्थ कार्य विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरी करने वाले पात्र तीर्थयात्री यात्रा समाप्त होने की तिथि से 90 दिनों के भीतर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट <a href="http://www.updharmarthkarya.in">www.updharmarthkarya.in</a> पर किया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/religion-astrology/%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%AA%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE-%E0%A4%90%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%A8--%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%B6-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B5%E0%A4%B0-%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%81%E0%A4%93%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%97%E0%A4%BE-1-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%96-%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%AA%E0%A4%AF%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%A8--%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%82-%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%88-%E0%A4%86%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%A6%E0%A4%A8-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE/article-2534"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/15.jpg" alt=""></a><br /><p>यूपी सरकार ने कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरी करने वाले प्रदेश के मूल निवासी श्रद्धालुओं के लिए प्रोत्साहन की घोषणा की है। धर्मार्थ कार्य विभाग की ओर से ऐसे तीर्थयात्रियों को एक लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, ताकि यात्रा पूरी कर चुके श्रद्धालु समय रहते इस योजना का लाभ उठा सकें।</p>
<p>धर्मार्थ कार्य विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरी करने वाले पात्र तीर्थयात्री यात्रा समाप्त होने की तिथि से 90 दिनों के भीतर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट <a href="http://www.updharmarthkarya.in">www.updharmarthkarya.in</a> पर किया जा सकता है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/21.jpg" alt="2" width="1280" height="720"></img>
amarujala.com

<p>ऑनलाइन आवेदन करते समय श्रद्धालुओं को कुछ जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे। इनमें पासपोर्ट फोटो, आधार कार्ड, पैन कार्ड, यूपी का निवास प्रमाण-पत्र, पासपोर्ट और वीजा की प्रति, बैंक खाते का विवरण तथा कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरी करने का प्रमाण-पत्र शामिल है। धर्मार्थ कार्य विभाग ने बताया है कि आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है, जिससे श्रद्धालुओं को कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और अनुदान की राशि समय पर उनके बैंक खाते में भेजी जा सके।</p>
<p> वर्ष 2026 की कैलाश मानसरोवर यात्रा का पहला जत्था 15 जून को गाजियाबाद के इंदिरापुरम स्थित शिविर से रवाना हुआ था। यात्रा सफलतापूर्वक पूरी करने के बाद यह पहला जत्था 2 जुलाई को वापस लौट आया। अब यात्रा पूरी कर चुके यूपी के  श्रद्धालु राज्य सरकार की इस अनुदान योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं।</p>
<p>सरकार का उद्देश्य धार्मिक यात्राओं को प्रोत्साहित करना और प्रदेश के तीर्थयात्रियों को आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराना है। ऐसे में जो भी श्रद्धालु इस वर्ष कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरी कर चुके हैं, उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन करने की सलाह दी गई है। आवेदन स्वीकृत होने के बाद पात्र लाभार्थियों को एक लाख रुपये की अनुदान राशि प्रदान की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 14:02:17 +0530</pubDate>
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                <title>ग्वालियर में 5 माह से लापता लड्डू गोपाल को ढूंढेगी SIT, तीन थानों की पुलिस करेगी तलाश</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="isSelectedEnd">मध्य प्रदेश के ग्वालियर से एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां 5 माह से लापता भगवान लड्डू गोपाल की मूर्ति को तलाशने के लिए पुलिस ने SIT का गठन किया है। ग्वालियर के आईजी के निर्देश पर बनाई गई इस टीम में तीन थानों की पुलिस को शामिल किया गया है, जो अब मूर्ति की तलाश करेंगे। यह मामला 29 जनवरी का है। अलकापुरी निवासी विजया शर्मा, जो हमेशा अपने साथ भगवान लड्डू गोपाल की छोटी मूर्ति रखती हैं, उस दिन खरीदारी करने माधवगंज बाजार गई थीं। शॉपिंग के दौरान उनकी लड्डू गोपाल की मूर्ति एक ठेले पर छूट</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/religion-astrology/-draft--add-your-title/article-2497"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/12.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">मध्य प्रदेश के ग्वालियर से एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां 5 माह से लापता भगवान लड्डू गोपाल की मूर्ति को तलाशने के लिए पुलिस ने SIT का गठन किया है। ग्वालियर के आईजी के निर्देश पर बनाई गई इस टीम में तीन थानों की पुलिस को शामिल किया गया है, जो अब मूर्ति की तलाश करेंगे। यह मामला 29 जनवरी का है। अलकापुरी निवासी विजया शर्मा, जो हमेशा अपने साथ भगवान लड्डू गोपाल की छोटी मूर्ति रखती हैं, उस दिन खरीदारी करने माधवगंज बाजार गई थीं। शॉपिंग के दौरान उनकी लड्डू गोपाल की मूर्ति एक ठेले पर छूट गई। जब उन्हें इसका पता चला तो उन्होंने तुरंत आसपास के इलाकों में  तलाश शुरू की, लेकिन मूर्ति का कोई पता नहीं चला।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/laddu-gopal-missing3.jpg" alt="Laddu-Gopal-Missing3" width="1280" height="720"></img></p>
<p class="isSelectedEnd">विजया शर्मा ने इसके बाद स्थानीय पुलिस से भी मदद मांगी। उनका कहना है कि शुरुआती दौर में पुलिस ने उनकी शिकायत पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं की। लेकिन 5 महीने गुजर जाने के बाद भी जब मूर्ति का कोई पता नहीं चला, तब यह मामला वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुंचा। इसके बाद ग्वालियर आईजी ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसआईटी गठित करने का फैसला लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">अब यह विशेष जांच दल तीन अलग-अलग थाना क्षेत्रों में खोजेगा और उस दिन बाजार में मौजूद लोगों, दुकानदारों और अन्य संभावित गवाहों से पूछताछ करेगा। साथ ही, उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी समीक्षा की जाएगी, ताकि मूर्ति का पता लगाया जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/laddu-gopal-missing4.jpg" alt="Laddu-Gopal-Missing4" width="1280" height="720"></img></p>
<p class="isSelectedEnd">विजया शर्मा का कहना है कि उनके लिए यह सिर्फ एक मूर्ति नहीं, बल्कि उनके आराध्य भगवान हैं। उन्होंने बताया कि लड्डू गोपाल के गायब होने के बाद से उनका पूरा परिवार मानसिक रूप से परेशान है। परिवार का कोई भी सदस्य पहले की तरह ठीक से खाना नहीं खा पा रहा है और सभी लगातार भगवान की वापसी की प्रार्थना कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">लड्डू गोपाल की सुरक्षित वापसी के लिए विजया शर्मा ने ₹5,000 के नकद इनाम की भी घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि जो भी व्यक्ति उनके लड्डू गोपाल को ढूंढकर वापस लाएगा, उसे यह इनाम दिया जाएगा।यह मामला अब पूरे ग्वालियर में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों की नजरें एसआईटी की जांच पर टिकी हैं कि आखिर 5 माह से लापता लड्डू गोपाल की मूर्ति को कब तक खोज पाएंगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 15:47:40 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में हर रोज हो रहे चौंकाने वाले खुलासे, आमजन भी सुनकर हैरान, अब मिला ‘रामराज्य कोष’ वाला संदूक</title>
                                    <description><![CDATA[<p>राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले नए खुलासे हो रहे हैं। इस पूरे खेल की कड़ी एसआईटी सुलझाने में लगी हुई है। लोग भी अब जानने को इच्छुक हैं कि चढ़ावा चोरी के पीछे किन-किन लोगों का हाथ है। इस बीच जेल में बंद मुख्य आरोपियों में शामिल अविनाश शुक्ला से जुड़े एक नए खुलासे ने जांच को नया मोड़ दिया है। पुलिस ने अयोध्या स्थित उसके योग केंद्र से एक संदूक बरामद किया है, जिस पर लाल रंग से 'रामराज्य कोष' लिखा हुआ था। संदूक पर पेटीएम का QR कोड</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/religion-astrology/common-people-are-also-surprised-to-hear-the-shocking-revelations/article-2488"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/1.jpg" alt=""></a><br /><p>राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले नए खुलासे हो रहे हैं। इस पूरे खेल की कड़ी एसआईटी सुलझाने में लगी हुई है। लोग भी अब जानने को इच्छुक हैं कि चढ़ावा चोरी के पीछे किन-किन लोगों का हाथ है। इस बीच जेल में बंद मुख्य आरोपियों में शामिल अविनाश शुक्ला से जुड़े एक नए खुलासे ने जांच को नया मोड़ दिया है। पुलिस ने अयोध्या स्थित उसके योग केंद्र से एक संदूक बरामद किया है, जिस पर लाल रंग से 'रामराज्य कोष' लिखा हुआ था। संदूक पर पेटीएम का QR कोड भी चिपका मिला। इस कार्रवाई का वीडियो सामने आने के बाद हंगामा मच गया है। बताया जा रहा है कि इसी परिसर से पहले दान गबन से जुड़े करीब पांच लाख रुपये भी बरामद किए गए थे।</p>
<p>मामले की जांच कर रही एसआईटी (SIT) को अब 15 दिन का अतिरिक्त समय दिया गया है। वहीं, एसआईटी ने फैजाबाद जेल पहुंचकर मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों से पूछताछ की। इनमें सबसे लंबी पूछताछ अविनाश शुक्ला से हुई। करीब दो घंटे चली पूछताछ में उससे 5 जून को बरामद 20 लाख रुपये नकद और आभूषणों के संबंध में विस्तार से सवाल किए गए।</p>
<p>अविनाश शुक्ला प्रतापगढ़ जिले का रहने वाला है। पुलिस इससे पहले उसके पैतृक घर पर भी छापेमारी कर चुकी है। जांच में सामने आया है कि वह राम मंदिर के नाम पर इस्तेमाल होने वाले दान बक्से में ही कथित गबन की रकम रखता था। पुलिस ने 5 जून की शाम करीब 7:30 बजे अयोध्या में उसके किराए के मकान पर छापा मारकर 20 लाख रुपये नकद बरामद किए थे। इसी कार्रवाई में कुछ आभूषण भी मिले थे।</p>
<p><strong>अविनाश शुक्ला डेढ़ साल पहले ही अयोध्या आया था</strong></p>
<p>जानकारी के अनुसार, अविनाश करीब डेढ़ साल पहले अयोध्या आया था। वह अपने बड़े भाई अभिषेक शुक्ला के साथ श्याम साधनालय में रहता था। बताया जाता है कि अभिषेक ने ही उसकी राम मंदिर ट्रस्ट में नौकरी लगवाने में मदद की थी। जांच एजेंसियों का कहना है कि अविनाश मंदिर के निमित्त दान में इस्तेमाल होने वाले बक्से में कथित गबन की रकम छिपाकर रखता था। 5 जून को बरामद किए गए 20 लाख रुपये से अधिक की नकदी इसी तरह के एक दान बक्से से मिलने की बात सामने आई थी।</p>
<p><strong>जांच के दायरे में अब मंदिर में तैनात 400 निजी सुरक्षाकर्मी भी</strong></p>
<p>जांच का दायरा अब राम मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था तक भी पहुंच गया है। मंदिर में तैनात करीब 400 निजी सुरक्षाकर्मियों की ड्यूटी, रोस्टर, सीसीटीवी फुटेज और एंट्री-एग्जिट रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, मंदिर की सुरक्षा का जिम्मा जिस निजी सुरक्षा कंपनी के पास था, वह बिहार के एक पूर्व सांसद से जुड़ी बताई जा रही है। ट्रस्ट इस सुरक्षा व्यवस्था पर हर महीने लगभग एक करोड़ रुपये खर्च करता था, यानी सालाना करीब 12 करोड़ रुपये निजी सुरक्षा पर खर्च किए जा रहे थे।</p>
<p><strong>पूरे मामले की रिपोर्ट अब आरएसएस प्रमुख भागवत तक पहुंची</strong></p>
<p>उधर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत को भी पूरे मामले की रिपोर्ट भेजी गई है। यह रिपोर्ट पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र प्रचारक अनिल कुमार ने तैयार की है। बताया गया है कि संघ प्रमुख के निर्देश पर उन्होंने अयोध्या में तीन दिन तक रहकर मंदिर की व्यवस्थाओं, ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और चढ़ावा गबन प्रकरण का अध्ययन किया। सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में पूरे घटनाक्रम का विस्तृत विवरण शामिल किया गया है। 6 जुलाई को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की प्रस्तावित बैठक में इस रिपोर्ट के आधार पर महत्वपूर्ण फैसले लिए जाने की संभावना जताई जा रही है।</p>
<p><strong>अविनाश शांत रहता था, कभी उसके व्यवहार से किसी को शक नहीं हुआ</strong></p>
<p>योग केंद्र में कार्यरत शिवसुंदर लाल ने बताया कि अभिषेक शुक्ला पिछले लगभग दस वर्षों से संस्थान से जुड़ा हुआ था और गुरुजी के समय से सेवा कार्य करता था। करीब डेढ़ साल पहले उसका भाई अविनाश भी वहीं रहने आ गया था। उन्होंने कहा कि जब पता चला कि अविनाश की नौकरी राम मंदिर में लग गई है तो सभी लोग खुश थे। वह रोज समय पर ड्यूटी के लिए जाता था और शाम को लौट आता था। उसका व्यवहार सामान्य और शांत था, इसलिए किसी को उस पर कभी संदेह नहीं हुआ।</p>
<p>शिवसुंदर लाल ने बताया कि 5 जून को पुलिस जब योग केंद्र पहुंची और तलाशी के दौरान वहां से पैसों से भरे बैग बरामद होने की बात सामने आई तो सभी लोग हैरान रह गए। घटना सार्वजनिक होने के बाद संस्थान ने अगले ही दिन उसके परिवार से साफ कह दिया कि वे वहां से दूसरी जगह रहने की व्यवस्था कर लें। उन्होंने कहा कि जो भी दोषी है, उसे कानून के अनुसार कड़ी सजा मिलनी चाहिए और संस्थान जांच में पूरा सहयोग कर रहा है।</p>
<p><strong>अविनाश और उसके भाई ने गांव में बनाया नया पक्का मकान</strong></p>
<p>प्रतापगढ़ जिले के महेशगंज थाना क्षेत्र के बाबूपुर नारियावा गांव के रहने वाले अविनाश शुक्ला के परिवार के बारे में भी नई जानकारी सामने आई है। उसके पिता राम सजीवन शुक्ला किसान हैं। गांव वालों के अनुसार परिवार का पुराना मकान कच्चा है, जहां माता-पिता रहते हैं। हालांकि कुछ महीने पहले अविनाश और उसके भाई अभिषेक ने गांव में नया पक्का मकान बनवाया था। दोनों भाई गांव आने पर उसी नए मकान में ठहरते थे।</p>
<p><strong>चंपत राय से तीन घंटे तक पूछताछ, आरएमओ का भी तबादला</strong></p>
<p>इस मामले में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से भी पुलिस लगभग तीन घंटे तक पूछताछ कर चुकी है। उनसे पूछा गया कि चढ़ावा गबन की जानकारी उन्हें पहली बार कब मिली और उसके बाद उन्होंने क्या कदम उठाए। वहीं, कोर्ट ने गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों की न्यायिक हिरासत 14 दिन के लिए बढ़ा दी है। जांच के दौरान एक और प्रशासनिक कार्रवाई भी हुई है। राम मंदिर में पिछले 17 वर्षों से तैनात रेडियो ऑपरेशन अधिकारी (RMO) अर्जुन देव का तबादला गोरखपुर कर दिया गया है। एसआईटी उनकी भूमिका की भी जांच कर रही है। मंदिर परिसर में लगे करीब 1600 सीसीटीवी कैमरों और चढ़ावे की गिनती वाले काउंटिंग रूम की निगरानी की जिम्मेदारी उनके पास थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 13:52:19 +0530</pubDate>
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                <title>आषाढ़ मास शुरू: कब से लगेगा मांगलिक कार्यों पर ब्रेक, यह चार महीने तक क्यों रहता है? जानिए इसके पीछे मुख्य कारण क्या है?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>आषाढ़ मास की शुरुआत हो चुकी है। इसी माह से चातुर्मास की शुरुआत भी हो जाएगी। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से इसकी शुरुआत होती है। यह 25 जुलाई को है। इसके बाद से मांगलिक कार्यों पर ब्रेक लग जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन से भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और देवउठनी एकादशी तक विश्राम करते हैं। इसलिए हिंदू धर्म में इन चार महीनों को पूजा-पाठ, जप, तप, व्रत, सत्संग और आत्मचिंतन का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इसलिए चातुर्मास की अवधि में विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन, सगाई और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/religion-astrology/when-will-the-month-of-ashadh-start-there-will-be/article-2481"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/123.jpg" alt=""></a><br /><p>आषाढ़ मास की शुरुआत हो चुकी है। इसी माह से चातुर्मास की शुरुआत भी हो जाएगी। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से इसकी शुरुआत होती है। यह 25 जुलाई को है। इसके बाद से मांगलिक कार्यों पर ब्रेक लग जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन से भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और देवउठनी एकादशी तक विश्राम करते हैं। इसलिए हिंदू धर्म में इन चार महीनों को पूजा-पाठ, जप, तप, व्रत, सत्संग और आत्मचिंतन का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इसलिए चातुर्मास की अवधि में विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन, सगाई और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। चातुर्मास 25 जुलाई से शुरू होकर 20 नवंबर तक रहेगा। </p>
<p>वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल एकादशी तिथि 24 जुलाई को सुबह 9:12 बजे से प्रारंभ होकर 25 जुलाई को सुबह 11:34 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी मनाई जाएगी और इसी दिन से चातुर्मास का आरंभ होगा। चार माह बाद कार्तिक शुक्ल एकादशी यानी देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु के जागरण के साथ चातुर्मास का समापन होगा। इस वर्ष देवउठनी एकादशी 20 नवंबर को है।</p>
<p>धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं। उनके विश्राम काल के दौरान देवी-देवताओं की सक्रियता भी कम मानी जाती है। इसलिए इस अवधि में नए शुभ और मांगलिक कार्यों को टालने की परंपरा है। देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु के जागने के बाद ही विवाह, गृहप्रवेश, यज्ञोपवीत, मुंडन और अन्य शुभ संस्कारों के लिए फिर से शुभ मुहूर्त शुरू होते हैं।</p>
<p><strong>चातुर्मास आत्मसंयम और आध्यात्मिक साधना का भी पर्व</strong></p>
<p>चातुर्मास केवल धार्मिक नियमों का समय नहीं, बल्कि आत्मसंयम और आध्यात्मिक साधना का भी पर्व माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु नियमित पूजा, मंत्र जाप, कथा श्रवण, दान-पुण्य और सेवा कार्यों में अधिक समय देते हैं। कई लोग चार महीने तक किसी एक भोजन का त्याग, उपवास या विशेष नियम का पालन करते हैं। संत-महात्मा भी इस अवधि में एक ही स्थान पर रहकर प्रवचन, सत्संग और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। प्राचीन समय में वर्षा ऋतु के कारण यात्रा कठिन होती थी, इसलिए साधु-संत एक स्थान पर ठहरकर लोगों को धर्म और अध्यात्म का संदेश देते थे। यही परंपरा आज भी चातुर्मास के रूप में निभाई जाती है।</p>
<p><strong>देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की विशेष पूजा</strong></p>
<p>देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा का विधान है। श्रद्धालु व्रत रखते हैं और भगवान को पीले वस्त्र, तुलसी दल, पंचामृत तथा मौसमी फल अर्पित करते हैं। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। शाम के समय तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाने और विष्णु सहस्रनाम या विष्णु मंत्र का जाप करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।</p>
<p><strong>चातुर्मास यानी जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का अवसर</strong></p>
<p>धर्मशास्त्रों में चातुर्मास को मन और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का अवसर माना गया है। इस दौरान क्रोध, लोभ और अहंकार जैसी बुराइयों से दूर रहने, सात्विक भोजन करने, संयमित जीवन अपनाने और अधिक से अधिक समय ईश्वर भक्ति में लगाने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इन चार महीनों में किए गए जप, तप, दान और सेवा का फल सामान्य दिनों की तुलना में अधिक प्राप्त होता है।</p>
<p><strong>देवउठनी एकादशी पर होगा चातुर्मास का समापन</strong></p>
<p>चातुर्मास का समापन देवउठनी एकादशी पर होता है। इस दिन भगवान विष्णु के जागरण के साथ ही मंदिरों और घरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इसके बाद विवाह सहित सभी मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त फिर से शुरू हो जाते हैं। यही कारण है कि हिंदू धर्म में चातुर्मास को केवल चार महीनों का धार्मिक काल नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम, सेवा और भक्ति का विशेष पर्व माना जाता है।</p>
<p><strong>भक्ति और ध्यान का महीना है आषाढ़ मास</strong></p>
<p>चातुर्मास की शुरुआत आषाढ़ मास में होती है, जिसे भक्ति और ध्यान का महीना माना जाता है। वर्षा ऋतु के आगमन के साथ प्रकृति में नई ऊर्जा का संचार होता है और धार्मिक दृष्टि से भी यह समय साधना के लिए अनुकूल माना जाता है। इसी महीने में योगिनी एकादशी, गुप्त नवरात्रि, देवशयनी एकादशी और गुरु पूर्णिमा जैसे महत्वपूर्ण पर्व आते हैं।</p>
<p><strong>आषाढ़ पूर्णिमा का विशेष म</strong><strong>हत्व क्यों हैं? जानिए</strong></p>
<p>आषाढ़ पूर्णिमा को मनाई जाने वाली गुरु पूर्णिमा इस वर्ष 29 जुलाई को होगी। इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। उन्होंने वेदों का संकलन किया तथा महाभारत और श्रीमद्भागवत जैसे महान ग्रंथों की रचना की। इस अवसर पर गुरु, शिक्षक और जीवन में मार्गदर्शन देने वाले व्यक्तियों का सम्मान किया जाता है। आश्रमों, मंदिरों और धार्मिक संस्थानों में विशेष पूजा, सत्संग और भंडारों का आयोजन होता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 14:03:56 +0530</pubDate>
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