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                <title>धर्म ज्योतिष - Khabarchhe Hindi</title>
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                            <item>
                <title>ग्वालियर में 5 माह से लापता लड्डू गोपाल को ढूंढेगी SIT, तीन थानों की पुलिस करेगी तलाश</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="isSelectedEnd">मध्य प्रदेश के ग्वालियर से एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां 5 माह से लापता भगवान लड्डू गोपाल की मूर्ति को तलाशने के लिए पुलिस ने SIT का गठन किया है। ग्वालियर के आईजी के निर्देश पर बनाई गई इस टीम में तीन थानों की पुलिस को शामिल किया गया है, जो अब मूर्ति की तलाश करेंगे। यह मामला 29 जनवरी का है। अलकापुरी निवासी विजया शर्मा, जो हमेशा अपने साथ भगवान लड्डू गोपाल की छोटी मूर्ति रखती हैं, उस दिन खरीदारी करने माधवगंज बाजार गई थीं। शॉपिंग के दौरान उनकी लड्डू गोपाल की मूर्ति एक ठेले पर छूट</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/religion-astrology/-draft--add-your-title/article-2497"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/12.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">मध्य प्रदेश के ग्वालियर से एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां 5 माह से लापता भगवान लड्डू गोपाल की मूर्ति को तलाशने के लिए पुलिस ने SIT का गठन किया है। ग्वालियर के आईजी के निर्देश पर बनाई गई इस टीम में तीन थानों की पुलिस को शामिल किया गया है, जो अब मूर्ति की तलाश करेंगे। यह मामला 29 जनवरी का है। अलकापुरी निवासी विजया शर्मा, जो हमेशा अपने साथ भगवान लड्डू गोपाल की छोटी मूर्ति रखती हैं, उस दिन खरीदारी करने माधवगंज बाजार गई थीं। शॉपिंग के दौरान उनकी लड्डू गोपाल की मूर्ति एक ठेले पर छूट गई। जब उन्हें इसका पता चला तो उन्होंने तुरंत आसपास के इलाकों में  तलाश शुरू की, लेकिन मूर्ति का कोई पता नहीं चला।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/laddu-gopal-missing3.jpg" alt="Laddu-Gopal-Missing3" width="1280" height="720"></img></p>
<p class="isSelectedEnd">विजया शर्मा ने इसके बाद स्थानीय पुलिस से भी मदद मांगी। उनका कहना है कि शुरुआती दौर में पुलिस ने उनकी शिकायत पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं की। लेकिन 5 महीने गुजर जाने के बाद भी जब मूर्ति का कोई पता नहीं चला, तब यह मामला वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुंचा। इसके बाद ग्वालियर आईजी ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसआईटी गठित करने का फैसला लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">अब यह विशेष जांच दल तीन अलग-अलग थाना क्षेत्रों में खोजेगा और उस दिन बाजार में मौजूद लोगों, दुकानदारों और अन्य संभावित गवाहों से पूछताछ करेगा। साथ ही, उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी समीक्षा की जाएगी, ताकि मूर्ति का पता लगाया जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/laddu-gopal-missing4.jpg" alt="Laddu-Gopal-Missing4" width="1280" height="720"></img></p>
<p class="isSelectedEnd">विजया शर्मा का कहना है कि उनके लिए यह सिर्फ एक मूर्ति नहीं, बल्कि उनके आराध्य भगवान हैं। उन्होंने बताया कि लड्डू गोपाल के गायब होने के बाद से उनका पूरा परिवार मानसिक रूप से परेशान है। परिवार का कोई भी सदस्य पहले की तरह ठीक से खाना नहीं खा पा रहा है और सभी लगातार भगवान की वापसी की प्रार्थना कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">लड्डू गोपाल की सुरक्षित वापसी के लिए विजया शर्मा ने ₹5,000 के नकद इनाम की भी घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि जो भी व्यक्ति उनके लड्डू गोपाल को ढूंढकर वापस लाएगा, उसे यह इनाम दिया जाएगा।यह मामला अब पूरे ग्वालियर में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों की नजरें एसआईटी की जांच पर टिकी हैं कि आखिर 5 माह से लापता लड्डू गोपाल की मूर्ति को कब तक खोज पाएंगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 15:47:40 +0530</pubDate>
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                <title>अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में हर रोज हो रहे चौंकाने वाले खुलासे, आमजन भी सुनकर हैरान, अब मिला ‘रामराज्य कोष’ वाला संदूक</title>
                                    <description><![CDATA[<p>राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले नए खुलासे हो रहे हैं। इस पूरे खेल की कड़ी एसआईटी सुलझाने में लगी हुई है। लोग भी अब जानने को इच्छुक हैं कि चढ़ावा चोरी के पीछे किन-किन लोगों का हाथ है। इस बीच जेल में बंद मुख्य आरोपियों में शामिल अविनाश शुक्ला से जुड़े एक नए खुलासे ने जांच को नया मोड़ दिया है। पुलिस ने अयोध्या स्थित उसके योग केंद्र से एक संदूक बरामद किया है, जिस पर लाल रंग से 'रामराज्य कोष' लिखा हुआ था। संदूक पर पेटीएम का QR कोड</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/religion-astrology/common-people-are-also-surprised-to-hear-the-shocking-revelations/article-2488"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/1.jpg" alt=""></a><br /><p>राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले नए खुलासे हो रहे हैं। इस पूरे खेल की कड़ी एसआईटी सुलझाने में लगी हुई है। लोग भी अब जानने को इच्छुक हैं कि चढ़ावा चोरी के पीछे किन-किन लोगों का हाथ है। इस बीच जेल में बंद मुख्य आरोपियों में शामिल अविनाश शुक्ला से जुड़े एक नए खुलासे ने जांच को नया मोड़ दिया है। पुलिस ने अयोध्या स्थित उसके योग केंद्र से एक संदूक बरामद किया है, जिस पर लाल रंग से 'रामराज्य कोष' लिखा हुआ था। संदूक पर पेटीएम का QR कोड भी चिपका मिला। इस कार्रवाई का वीडियो सामने आने के बाद हंगामा मच गया है। बताया जा रहा है कि इसी परिसर से पहले दान गबन से जुड़े करीब पांच लाख रुपये भी बरामद किए गए थे।</p>
<p>मामले की जांच कर रही एसआईटी (SIT) को अब 15 दिन का अतिरिक्त समय दिया गया है। वहीं, एसआईटी ने फैजाबाद जेल पहुंचकर मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों से पूछताछ की। इनमें सबसे लंबी पूछताछ अविनाश शुक्ला से हुई। करीब दो घंटे चली पूछताछ में उससे 5 जून को बरामद 20 लाख रुपये नकद और आभूषणों के संबंध में विस्तार से सवाल किए गए।</p>
<p>अविनाश शुक्ला प्रतापगढ़ जिले का रहने वाला है। पुलिस इससे पहले उसके पैतृक घर पर भी छापेमारी कर चुकी है। जांच में सामने आया है कि वह राम मंदिर के नाम पर इस्तेमाल होने वाले दान बक्से में ही कथित गबन की रकम रखता था। पुलिस ने 5 जून की शाम करीब 7:30 बजे अयोध्या में उसके किराए के मकान पर छापा मारकर 20 लाख रुपये नकद बरामद किए थे। इसी कार्रवाई में कुछ आभूषण भी मिले थे।</p>
<p><strong>अविनाश शुक्ला डेढ़ साल पहले ही अयोध्या आया था</strong></p>
<p>जानकारी के अनुसार, अविनाश करीब डेढ़ साल पहले अयोध्या आया था। वह अपने बड़े भाई अभिषेक शुक्ला के साथ श्याम साधनालय में रहता था। बताया जाता है कि अभिषेक ने ही उसकी राम मंदिर ट्रस्ट में नौकरी लगवाने में मदद की थी। जांच एजेंसियों का कहना है कि अविनाश मंदिर के निमित्त दान में इस्तेमाल होने वाले बक्से में कथित गबन की रकम छिपाकर रखता था। 5 जून को बरामद किए गए 20 लाख रुपये से अधिक की नकदी इसी तरह के एक दान बक्से से मिलने की बात सामने आई थी।</p>
<p><strong>जांच के दायरे में अब मंदिर में तैनात 400 निजी सुरक्षाकर्मी भी</strong></p>
<p>जांच का दायरा अब राम मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था तक भी पहुंच गया है। मंदिर में तैनात करीब 400 निजी सुरक्षाकर्मियों की ड्यूटी, रोस्टर, सीसीटीवी फुटेज और एंट्री-एग्जिट रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, मंदिर की सुरक्षा का जिम्मा जिस निजी सुरक्षा कंपनी के पास था, वह बिहार के एक पूर्व सांसद से जुड़ी बताई जा रही है। ट्रस्ट इस सुरक्षा व्यवस्था पर हर महीने लगभग एक करोड़ रुपये खर्च करता था, यानी सालाना करीब 12 करोड़ रुपये निजी सुरक्षा पर खर्च किए जा रहे थे।</p>
<p><strong>पूरे मामले की रिपोर्ट अब आरएसएस प्रमुख भागवत तक पहुंची</strong></p>
<p>उधर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत को भी पूरे मामले की रिपोर्ट भेजी गई है। यह रिपोर्ट पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र प्रचारक अनिल कुमार ने तैयार की है। बताया गया है कि संघ प्रमुख के निर्देश पर उन्होंने अयोध्या में तीन दिन तक रहकर मंदिर की व्यवस्थाओं, ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और चढ़ावा गबन प्रकरण का अध्ययन किया। सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में पूरे घटनाक्रम का विस्तृत विवरण शामिल किया गया है। 6 जुलाई को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की प्रस्तावित बैठक में इस रिपोर्ट के आधार पर महत्वपूर्ण फैसले लिए जाने की संभावना जताई जा रही है।</p>
<p><strong>अविनाश शांत रहता था, कभी उसके व्यवहार से किसी को शक नहीं हुआ</strong></p>
<p>योग केंद्र में कार्यरत शिवसुंदर लाल ने बताया कि अभिषेक शुक्ला पिछले लगभग दस वर्षों से संस्थान से जुड़ा हुआ था और गुरुजी के समय से सेवा कार्य करता था। करीब डेढ़ साल पहले उसका भाई अविनाश भी वहीं रहने आ गया था। उन्होंने कहा कि जब पता चला कि अविनाश की नौकरी राम मंदिर में लग गई है तो सभी लोग खुश थे। वह रोज समय पर ड्यूटी के लिए जाता था और शाम को लौट आता था। उसका व्यवहार सामान्य और शांत था, इसलिए किसी को उस पर कभी संदेह नहीं हुआ।</p>
<p>शिवसुंदर लाल ने बताया कि 5 जून को पुलिस जब योग केंद्र पहुंची और तलाशी के दौरान वहां से पैसों से भरे बैग बरामद होने की बात सामने आई तो सभी लोग हैरान रह गए। घटना सार्वजनिक होने के बाद संस्थान ने अगले ही दिन उसके परिवार से साफ कह दिया कि वे वहां से दूसरी जगह रहने की व्यवस्था कर लें। उन्होंने कहा कि जो भी दोषी है, उसे कानून के अनुसार कड़ी सजा मिलनी चाहिए और संस्थान जांच में पूरा सहयोग कर रहा है।</p>
<p><strong>अविनाश और उसके भाई ने गांव में बनाया नया पक्का मकान</strong></p>
<p>प्रतापगढ़ जिले के महेशगंज थाना क्षेत्र के बाबूपुर नारियावा गांव के रहने वाले अविनाश शुक्ला के परिवार के बारे में भी नई जानकारी सामने आई है। उसके पिता राम सजीवन शुक्ला किसान हैं। गांव वालों के अनुसार परिवार का पुराना मकान कच्चा है, जहां माता-पिता रहते हैं। हालांकि कुछ महीने पहले अविनाश और उसके भाई अभिषेक ने गांव में नया पक्का मकान बनवाया था। दोनों भाई गांव आने पर उसी नए मकान में ठहरते थे।</p>
<p><strong>चंपत राय से तीन घंटे तक पूछताछ, आरएमओ का भी तबादला</strong></p>
<p>इस मामले में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से भी पुलिस लगभग तीन घंटे तक पूछताछ कर चुकी है। उनसे पूछा गया कि चढ़ावा गबन की जानकारी उन्हें पहली बार कब मिली और उसके बाद उन्होंने क्या कदम उठाए। वहीं, कोर्ट ने गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों की न्यायिक हिरासत 14 दिन के लिए बढ़ा दी है। जांच के दौरान एक और प्रशासनिक कार्रवाई भी हुई है। राम मंदिर में पिछले 17 वर्षों से तैनात रेडियो ऑपरेशन अधिकारी (RMO) अर्जुन देव का तबादला गोरखपुर कर दिया गया है। एसआईटी उनकी भूमिका की भी जांच कर रही है। मंदिर परिसर में लगे करीब 1600 सीसीटीवी कैमरों और चढ़ावे की गिनती वाले काउंटिंग रूम की निगरानी की जिम्मेदारी उनके पास थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 13:52:19 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>आषाढ़ मास शुरू: कब से लगेगा मांगलिक कार्यों पर ब्रेक, यह चार महीने तक क्यों रहता है? जानिए इसके पीछे मुख्य कारण क्या है?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>आषाढ़ मास की शुरुआत हो चुकी है। इसी माह से चातुर्मास की शुरुआत भी हो जाएगी। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से इसकी शुरुआत होती है। यह 25 जुलाई को है। इसके बाद से मांगलिक कार्यों पर ब्रेक लग जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन से भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और देवउठनी एकादशी तक विश्राम करते हैं। इसलिए हिंदू धर्म में इन चार महीनों को पूजा-पाठ, जप, तप, व्रत, सत्संग और आत्मचिंतन का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इसलिए चातुर्मास की अवधि में विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन, सगाई और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/religion-astrology/when-will-the-month-of-ashadh-start-there-will-be/article-2481"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/123.jpg" alt=""></a><br /><p>आषाढ़ मास की शुरुआत हो चुकी है। इसी माह से चातुर्मास की शुरुआत भी हो जाएगी। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से इसकी शुरुआत होती है। यह 25 जुलाई को है। इसके बाद से मांगलिक कार्यों पर ब्रेक लग जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन से भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और देवउठनी एकादशी तक विश्राम करते हैं। इसलिए हिंदू धर्म में इन चार महीनों को पूजा-पाठ, जप, तप, व्रत, सत्संग और आत्मचिंतन का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इसलिए चातुर्मास की अवधि में विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन, सगाई और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। चातुर्मास 25 जुलाई से शुरू होकर 20 नवंबर तक रहेगा। </p>
<p>वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल एकादशी तिथि 24 जुलाई को सुबह 9:12 बजे से प्रारंभ होकर 25 जुलाई को सुबह 11:34 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी मनाई जाएगी और इसी दिन से चातुर्मास का आरंभ होगा। चार माह बाद कार्तिक शुक्ल एकादशी यानी देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु के जागरण के साथ चातुर्मास का समापन होगा। इस वर्ष देवउठनी एकादशी 20 नवंबर को है।</p>
<p>धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं। उनके विश्राम काल के दौरान देवी-देवताओं की सक्रियता भी कम मानी जाती है। इसलिए इस अवधि में नए शुभ और मांगलिक कार्यों को टालने की परंपरा है। देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु के जागने के बाद ही विवाह, गृहप्रवेश, यज्ञोपवीत, मुंडन और अन्य शुभ संस्कारों के लिए फिर से शुभ मुहूर्त शुरू होते हैं।</p>
<p><strong>चातुर्मास आत्मसंयम और आध्यात्मिक साधना का भी पर्व</strong></p>
<p>चातुर्मास केवल धार्मिक नियमों का समय नहीं, बल्कि आत्मसंयम और आध्यात्मिक साधना का भी पर्व माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु नियमित पूजा, मंत्र जाप, कथा श्रवण, दान-पुण्य और सेवा कार्यों में अधिक समय देते हैं। कई लोग चार महीने तक किसी एक भोजन का त्याग, उपवास या विशेष नियम का पालन करते हैं। संत-महात्मा भी इस अवधि में एक ही स्थान पर रहकर प्रवचन, सत्संग और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। प्राचीन समय में वर्षा ऋतु के कारण यात्रा कठिन होती थी, इसलिए साधु-संत एक स्थान पर ठहरकर लोगों को धर्म और अध्यात्म का संदेश देते थे। यही परंपरा आज भी चातुर्मास के रूप में निभाई जाती है।</p>
<p><strong>देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की विशेष पूजा</strong></p>
<p>देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा का विधान है। श्रद्धालु व्रत रखते हैं और भगवान को पीले वस्त्र, तुलसी दल, पंचामृत तथा मौसमी फल अर्पित करते हैं। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। शाम के समय तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाने और विष्णु सहस्रनाम या विष्णु मंत्र का जाप करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।</p>
<p><strong>चातुर्मास यानी जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का अवसर</strong></p>
<p>धर्मशास्त्रों में चातुर्मास को मन और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का अवसर माना गया है। इस दौरान क्रोध, लोभ और अहंकार जैसी बुराइयों से दूर रहने, सात्विक भोजन करने, संयमित जीवन अपनाने और अधिक से अधिक समय ईश्वर भक्ति में लगाने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इन चार महीनों में किए गए जप, तप, दान और सेवा का फल सामान्य दिनों की तुलना में अधिक प्राप्त होता है।</p>
<p><strong>देवउठनी एकादशी पर होगा चातुर्मास का समापन</strong></p>
<p>चातुर्मास का समापन देवउठनी एकादशी पर होता है। इस दिन भगवान विष्णु के जागरण के साथ ही मंदिरों और घरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इसके बाद विवाह सहित सभी मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त फिर से शुरू हो जाते हैं। यही कारण है कि हिंदू धर्म में चातुर्मास को केवल चार महीनों का धार्मिक काल नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम, सेवा और भक्ति का विशेष पर्व माना जाता है।</p>
<p><strong>भक्ति और ध्यान का महीना है आषाढ़ मास</strong></p>
<p>चातुर्मास की शुरुआत आषाढ़ मास में होती है, जिसे भक्ति और ध्यान का महीना माना जाता है। वर्षा ऋतु के आगमन के साथ प्रकृति में नई ऊर्जा का संचार होता है और धार्मिक दृष्टि से भी यह समय साधना के लिए अनुकूल माना जाता है। इसी महीने में योगिनी एकादशी, गुप्त नवरात्रि, देवशयनी एकादशी और गुरु पूर्णिमा जैसे महत्वपूर्ण पर्व आते हैं।</p>
<p><strong>आषाढ़ पूर्णिमा का विशेष म</strong><strong>हत्व क्यों हैं? जानिए</strong></p>
<p>आषाढ़ पूर्णिमा को मनाई जाने वाली गुरु पूर्णिमा इस वर्ष 29 जुलाई को होगी। इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। उन्होंने वेदों का संकलन किया तथा महाभारत और श्रीमद्भागवत जैसे महान ग्रंथों की रचना की। इस अवसर पर गुरु, शिक्षक और जीवन में मार्गदर्शन देने वाले व्यक्तियों का सम्मान किया जाता है। आश्रमों, मंदिरों और धार्मिक संस्थानों में विशेष पूजा, सत्संग और भंडारों का आयोजन होता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 14:03:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला: छोटे कर्मचारियों की गिरफ्तारी, बड़े लोगों का बचाव, जनता के बीच क्या संदेश जाएगा?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>अयोध्या।</strong> राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी के मामले में पुलिस ने मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इन सभी आरोपियों को अदालत में पेश कर उनका रिमांड मांगा जाएगा। लेकिन इस गिरफ्तारी के बाद सियासत गरमा गई है। दरअसल, चंपत राय समेत ट्रस्ट के किसी भी सदस्य को आरोपी नहीं बनाया गया है। इसको लेकर बयानबाजी अब तेज हो गई है। विपक्ष का कहना है कि सरकार निष्पक्ष जांच नहीं कर रही है। बड़े मोहरों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। चंपत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/religion-astrology/case-of-theft-of-offerings-in-ram-temple-arrest-of/article-2460"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/118.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>अयोध्या।</strong> राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी के मामले में पुलिस ने मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इन सभी आरोपियों को अदालत में पेश कर उनका रिमांड मांगा जाएगा। लेकिन इस गिरफ्तारी के बाद सियासत गरमा गई है। दरअसल, चंपत राय समेत ट्रस्ट के किसी भी सदस्य को आरोपी नहीं बनाया गया है। इसको लेकर बयानबाजी अब तेज हो गई है। विपक्ष का कहना है कि सरकार निष्पक्ष जांच नहीं कर रही है। बड़े मोहरों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। चंपत राय का एफआईआर में नाम नहीं होना इस बात को पुख्ता करती है कि सरकार कुछ लोगों को बचा रही है। बता दें कि गिरफ्तारी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर दर्ज एफआईआर के बाद की गई। </p>
<p>एफआईआर में रमाशंकर यादव (टिन्नू), लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, मनीष यादव, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव और रमाशंकर मिश्रा को नामजद किया गया है। इनमें अधिकांश लोग मंदिर में चढ़ावे की गिनती और दान प्रबंधन से जुड़े रहे हैं। हालांकि, एफआईआर में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा सहित अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों के नाम शामिल नहीं किए गए हैं। </p>
<p><strong>7 जून को आया था मामला, 13 जून को एसआईटी गठित</strong></p>
<p>मामला पहली बार 7 जून को सामने आया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। एसआईटी ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट प्रदेश सरकार को सौंपी थी। रिपोर्ट के आधार पर ट्रस्ट की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरू की। इस बीच दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल शुक्रवार सुबह अयोध्या पहुंचे। उन्होंने रामलला के दर्शन-पूजन किए और इसके बाद हनुमानगढ़ी मंदिर में भी पूजा-अर्चना की। उन्होंने बताया कि शाम चार बजे इस मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।</p>
<p><strong>वीएचपी के अध्यक्ष बोले- कोई भी जांच के दायरे से बाहर नहीं</strong></p>
<p>उधर, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अध्यक्ष आलोक कुमार ने स्पष्ट किया कि जांच किसी भी स्तर पर सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में आवश्यकता हुई तो चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा सहित किसी भी व्यक्ति की भूमिका की जांच की जाएगी। कोई भी जांच के दायरे से बाहर नहीं है। सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच के दौरान यह माना जा रहा था कि एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और निर्माण प्रभारी गोपाल राव समेत 17 लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की है। हालांकि, फिलहाल दर्ज एफआईआर में केवल आठ लोगों को नामजद किया गया है।</p>
<p><strong>150 लोगों की जांच, इनकी आर्थिक स्थिति में अचानक बड़ा बदलाव आया</strong></p>
<p>एसआईटी की जांच में दानपात्रों की चाबियां टिन्नू यादव के पास मिलने की बात सामने आई थी। जांच एजेंसी ने ऐसे लगभग 150 सेवादारों और कर्मचारियों की भी पहचान की, जिनकी आर्थिक स्थिति 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद उल्लेखनीय रूप से बदली थी। इन सभी पहलुओं की जांच अभी जारी है।</p>
<p><strong>अब तक जांच में क्या-क्या सामने आया</strong></p>
<ul>
<li>7 जून को चढ़ावे में कथित हेराफेरी का मामला सामने आया।</li>
<li>13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी गठित की।</li>
<li>23 जून को एसआईटी ने प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपी।</li>
<li>ट्रस्ट सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर एफआईआर दर्ज हुई।</li>
<li>आठ लोगों को नामजद कर गिरफ्तार किया गया।</li>
<li>पुलिस सभी आरोपियों की 14 दिन की रिमांड मांगने की तैयारी में है।</li>
</ul>
<p><strong>चढ़ावा मामले में किस नेता ने क्या कहा-</strong><br /><strong>अरविंद केजरीवाल: महापाप करने वालों को कठोर दंड मिले</strong></p>
<p>रामलला के दर्शन के बाद अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने भगवान से प्रार्थना की है कि इस "महापाप" के दोषियों को कठोर से कठोर दंड मिले। उन्होंने आरोप लगाया कि दर्ज की गई एफआईआर केवल दिखावा है और इसमें केवल छोटे कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है। उनके अनुसार, इतने बड़े स्तर की कथित हेराफेरी छोटे कर्मचारियों के स्तर पर संभव नहीं है और इसके तार ऊपर तक जुड़े हो सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े लोगों को बचाने और छोटे कर्मचारियों पर जिम्मेदारी डालने की कोशिश की जा रही है।</p>
<p><strong>VHP अध्यक्ष: जांच निष्पक्ष तरीके से हो रही है</strong></p>
<p>आलोक कुमार ने कहा कि जांच निष्पक्ष ढंग से आगे बढ़ रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा या कोई अन्य पदाधिकारी जांच के दायरे से बाहर नहीं है। यदि जांच में किसी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।</p>
<p><strong>भाजपा सांसद दिनेश शर्मा: जिसके खिलाफ भी साक्ष्य मिलेंगे, कार्रवाई होगी</strong></p>
<p>दिनेश शर्मा ने कहा कि विपक्ष लगातार श्रीराम जन्मभूमि मंदिर को बदनाम करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने स्वयं एसआईटी गठित की, जांच कराई और रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की गई। उनके अनुसार, जिसके खिलाफ भी साक्ष्य मिलेंगे, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।</p>
<p><strong>जदयू सांसद संजय झा: राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र</strong></p>
<p>संजय झा ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। यह घटना दुखद है, लेकिन सरकार ने एसआईटी बनाकर जांच कराई और रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई शुरू हो चुकी है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।</p>
<p><strong>भाजपा नेता आरपी सिंह: योगी ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है</strong></p>
<p>आरपी सिंह ने कहा कि मामले में कोई भी व्यक्ति कितना भी बड़ा अधिकारी या कर्मचारी क्यों न हो, यदि वह दोषी पाया जाता है तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निष्पक्ष जांच का जो भरोसा दिया था, उसी के अनुरूप कार्रवाई हो रही है। रमेशदास महाराज ने एसआईटी की जांच के लिए राज्य और केंद्र सरकार का आभार जताया। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट आने के बाद भी अनावश्यक आरोप लगाए जा रहे हैं। उनके अनुसार, जिसने भी अपराध किया है, उसे न्यायालय से उचित सजा मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 13:22:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
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            <item>
                <title> सीतापुर: अब्दुल्ला बना 'दारोगा सिंह', 8 साल बाद बेटे के साथ हिंदू धर्म में लौटा; बताया कि उसने इस्लाम धर्म क्यों अपनाया था</title>
                                    <description><![CDATA[<p>उत्तर प्रदेश के सीतापुर में बुधवार को पिता-पुत्र ने हिंदू धर्म अपना लिया। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में उन्होंने इस्लाम का त्याग किया और देवी मंदिर में धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-पाठ करके हिंदू धर्म अपनाया। धर्म में वापसी के बाद पिता अब्दुल्ला ने अपना नाम दारोगा सिंह और पुत्र खालिद ने नीतिश सिंह रख लिया। दारोगा सिंह ने आरोप लगाया कि शुरुआत में उन्हें झूठे मामले में फँसाया गया और बाद में इस्लाम धर्म स्वीकार करने के लिए दबाव डाला गया था। उन्होंने अन्य लोगों से सतर्क रहने की अपील की।</p>
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indiatv.in

<p>गौरतलब है कि घर वापसी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/religion-astrology/abdullah-became-inspector-singh-returned-to-hinduism-with-his-son/article-2451"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/abdullah31.webp" alt=""></a><br /><p>उत्तर प्रदेश के सीतापुर में बुधवार को पिता-पुत्र ने हिंदू धर्म अपना लिया। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में उन्होंने इस्लाम का त्याग किया और देवी मंदिर में धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-पाठ करके हिंदू धर्म अपनाया। धर्म में वापसी के बाद पिता अब्दुल्ला ने अपना नाम दारोगा सिंह और पुत्र खालिद ने नीतिश सिंह रख लिया। दारोगा सिंह ने आरोप लगाया कि शुरुआत में उन्हें झूठे मामले में फँसाया गया और बाद में इस्लाम धर्म स्वीकार करने के लिए दबाव डाला गया था। उन्होंने अन्य लोगों से सतर्क रहने की अपील की।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/abdullah.webp" alt="abdullah" width="1280" height="720"></img>
indiatv.in

<p>गौरतलब है कि घर वापसी करने वाले दारोगा सिंह की पत्नी और उनके दो अन्य बच्चे अभी भी इस्लाम का पालन करते हैं। दारोगा सिंह के अनुसार, उन्होंने लगभग आठ साल पहले इस्लाम धर्म स्वीकार किया था। उनका आरोप है कि स्थानीय मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने पहले उन्हें झूठे मामले में फँसाया और फिर मदद का आश्वासन देकर इस्लाम धर्म स्वीकार करने के लिए समझाया। दारोगा सिंह का कहना है कि धर्म परिवर्तन के बाद भी उन्हें कोई मदद नहीं मिली।</p>
<p>दारोगा सिंह ने कहा कि बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के सहयोग से ही उनकी धर्म में वापसी संभव हो सकी। मंदिर में हवन-पूजन और प्रार्थना के बाद पिता-पुत्र दोनों को जनेऊ पहनाया गया और सनातन धर्म में उनकी वापसी कराई गई। इस दौरान बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/abdullah1.webp" alt="abdullah1" width="1280" height="720"></img>
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<p>धर्म में वापसी के बाद दारोगा सिंह ने अन्य लोगों से अपील की कि वे किसी के प्रभाव या समझाने-बुझाने के आधार पर अपना धर्म न बदलें। पुलिस ने बताया है कि दोनों ने स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन किया है और किसी प्रकार का दबाव नहीं था। इसके बावजूद एहतियात के तौर पर क्षेत्र में शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थिति पर नजर रखी जा रही है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि 'घर वापसी' का मुद्दा समय-समय पर विवाद का कारण बनता रहा है। प्रशासन का कहना है कि कानून की सीमा में रहकर स्वैच्छिक धर्म परिवर्तन पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन जबरन धर्म परिवर्तन या लालच देकर कराया गया धर्म परिवर्तन अवैध है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 20:36:33 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावे मामले में SIT की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे, किस पर गिरेगी गाज? क्या बदल जाएगा मंदिर का कामकाज?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में कथित अनियमितताओं के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट में मंदिर प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने, संदिग्ध कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने और ट्रस्ट के पुनर्गठन जैसे महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, जांच अभी पूरी नहीं हुई है और विस्तृत पड़ताल के लिए एसआईटी ने अतिरिक्त समय भी मांगा है। लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय एसआईटी ने करीब एक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/religion-astrology/there-are-many-shocking-revelations-in-the-sit-report-in/article-2444"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/ram-mandir1.jpg" alt=""></a><br /><p>अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में कथित अनियमितताओं के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट में मंदिर प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने, संदिग्ध कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने और ट्रस्ट के पुनर्गठन जैसे महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, जांच अभी पूरी नहीं हुई है और विस्तृत पड़ताल के लिए एसआईटी ने अतिरिक्त समय भी मांगा है। लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय एसआईटी ने करीब एक सप्ताह तक अयोध्या में रहकर जांच की। टीम ने मंदिर प्रशासन, कर्मचारियों, सुरक्षा कर्मियों और चढ़ावा प्रबंधन से जुड़े लोगों से पूछताछ की। रिपोर्ट में लगभग 150 लोगों से पूछताछ का उल्लेख किया गया है। इससे पहले भी जांच टीम ने रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, दान पेटियों की गिनती और बैंक में जमा करने की प्रक्रिया का अध्ययन किया था। </p>
<p>सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने कुछ कर्मचारियों और संबंधित लोगों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे समेत कुछ अन्य कर्मचारियों की संलिप्तता की आशंका जताई गई है। जांच एजेंसियों द्वारा पहले ही कुछ आरोपियों की निशानदेही पर नकदी बरामद की जा चुकी है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। </p>
<p><strong>रिपोर्ट में ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में सुधार की जरूरत बताई</strong></p>
<p>एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में सुधार की जरूरत बताई है। टीम का मानना है कि मंदिर में आने वाले चढ़ावे, नकदी, सोने-चांदी के आभूषण और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं की निगरानी के लिए अधिक जवाबदेह और पारदर्शी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। इसी कारण ट्रस्ट के पुनर्गठन की सिफारिश की गई है। साथ ही किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को मंदिर का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करने का सुझाव भी दिया गया है, ताकि वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से हो सके। </p>
<p><strong>पिछले वर्षों के चढ़ावे और दान का ऑडिट कराने की भी सिफारिश</strong></p>
<p>रिपोर्ट में पिछले वर्षों के चढ़ावे और दान का विशेष ऑडिट कराने की भी सिफारिश की गई है। अधिकारियों का मानना है कि नियमित और स्वतंत्र ऑडिट से भविष्य में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता को रोका जा सकता है। कुछ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एसआईटी ने मंदिर में साप्ताहिक ऑडिट और नकद चढ़ावे का दैनिक रिकॉर्ड रखने जैसी व्यवस्थाओं पर भी जोर दिया है। </p>
<p><strong>पीएमओ तक पहुंची एसआईटी की रिपोर्ट</strong></p>
<p>सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार ने रिपोर्ट का अध्ययन शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से चर्चा के बाद रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और गृह मंत्रालय तक भेजे जाने की भी जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि ट्रस्ट के पुनर्गठन और संभावित नए सदस्यों को शामिल करने जैसे मुद्दों पर आगे निर्णय लिया जा सकता है। हालांकि सरकार या ट्रस्ट की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है। </p>
<p><strong>सियासत भी गरमा गई है…विपक्ष हो रहा आक्रामक</strong></p>
<p>इस मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की है। वहीं उत्तर प्रदेश युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष शरद शुक्ला ने देश के चारों शंकराचार्यों को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर हस्तक्षेप और मार्गदर्शन की अपील की है। उनका कहना है कि यह केवल धनराशि का मामला नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है।</p>
<p><strong>दोषियों के खिलाफ नार्को टेस्ट जैसी कार्रवाई की मांग</strong></p>
<p>उधर, श्रीराम सेना ने भी राम जन्मभूमि थाने में ज्ञापन देकर दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, निष्पक्ष जांच कराने और नार्को टेस्ट जैसी कार्रवाई की मांग की है। संगठन का कहना है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई से ही श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहेगा। गौरतलब है कि यह पूरा मामला मंदिर में आने वाले चढ़ावे और दान राशि में कथित गड़बड़ियों के आरोपों के बाद सामने आया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने ट्रस्ट के अनुरोध पर 13 जून को एसआईटी का गठन किया था। जांच अभी जारी है और विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित अनियमितताओं की वास्तविक सीमा क्या थी और किन लोगों की जिम्मेदारी तय होगी। फिलहाल सरकार और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 13:25:36 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अयोध्या: रामलला का मुकुट गायब, जमीन पर सवाल, अब चढ़ावा चोरी... 2 साल में राम मंदिर के 4 बड़े विवाद</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े चढ़ावा चोरी मामले ने अब बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन लिया है। प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद पिछले दो वर्षों में राम मंदिर से जुड़े चार बड़े विवाद सामने आ चुके हैं, जिनके चलते मंदिर ट्रस्ट और प्रबंधन की कार्यशैली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। ताजा चढ़ावा चोरी मामले को लेकर जिम्मेदार लोगों पर सख्त से सख्त कार्रवाई करने की मांग हो रही है।</p>
<p>प्राप्त जानकारी के अनुसार, 22 जनवरी 2024 को हुए प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के कुछ महीनों बाद रामलला के मुकुट के गायब होने का मामला सामने आया था।  इस</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/religion-astrology/ram-temple-offering-theft-controversy-4-big-cases-surfaced-in/article-2439"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/ram-mandi3.jpg" alt=""></a><br /><p>अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े चढ़ावा चोरी मामले ने अब बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन लिया है। प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद पिछले दो वर्षों में राम मंदिर से जुड़े चार बड़े विवाद सामने आ चुके हैं, जिनके चलते मंदिर ट्रस्ट और प्रबंधन की कार्यशैली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। ताजा चढ़ावा चोरी मामले को लेकर जिम्मेदार लोगों पर सख्त से सख्त कार्रवाई करने की मांग हो रही है।</p>
<p>प्राप्त जानकारी के अनुसार, 22 जनवरी 2024 को हुए प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के कुछ महीनों बाद रामलला के मुकुट के गायब होने का मामला सामने आया था।  इस मामले को दबाने की कोशिश की गई, लेकिन बाद में यह सार्वजनिक हो गया। बताया गया कि मुकुट ट्रस्ट के एक पदाधिकारी के करीबी व्यक्ति के पास से बरामद हुआ था और वह कारसेवकपुरम क्षेत्र में मिला था।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/ram-mandi1.jpg" alt="ram-mandi" width="1280" height="720"></img>
hindi.news18.com

<p>इसके बाद राम मंदिर से जुड़ी जमीन खरीद को लेकर भी विवाद खड़ा हुआ। जमीनों की खरीद-फरोख्त में गड़बड़ी और कीमतों को लेकर कई सवाल उठाए गए थे। हालांकि इस मामले में कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन यह मुद्दा आज भी समय-समय पर चर्चा में बना रहता है।</p>
<p>वहीं, पिछले साल दर्शन पास घोटाला हुआ था।  जांच में पता चला कि कुछ लोग फर्जी पास बनाकर श्रद्धालुओं को दर्शन कराने के नाम पर पैसे वसूल रहे थे। इस मामले में कुछ पुलिसकर्मियों की भूमिका भी सामने आई थी। विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की और व्यवस्था में सुधार करते हुए क्यूआर कोड आधारित पास जारी किए गए, जिससे फर्जीवाड़े पर काफी हद तक रोक लगाई गई।</p>
<p>अब चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया है। आरोप है कि इस मामले में केवल निचले स्तर के कर्मचारी ही नहीं, बल्कि ट्रस्ट और प्रबंधन से जुड़े कुछ लोग भी सवालों के घेरे में हैं। लगातार सामने आ रहे विवादों के कारण मंदिर की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और निगरानी तंत्र को लेकर सवाल उठ रहे हैं।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/ram-mandi.jpg" alt="ram-mandi" width="1280" height="720"></img>
amarujala.com

<p>इस बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अयोध्या में चढ़ावे से जुड़े कथित घोटाले पर भाजपा के पास कोई जवाब नहीं है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भगवान राम के चढ़ावे में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है और मामले से जुड़े सीसीटीवी फुटेज भी गायब बताए जा रहे हैं। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                    

                <link>https://hindi.khabarchhe.com/religion-astrology/ram-temple-offering-theft-controversy-4-big-cases-surfaced-in/article-2439</link>
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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 14:40:50 +0530</pubDate>
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                <title>क्या आप जानते हैं…जून के अंतिम सप्ताह में दो ऐसे व्रत जो जल की कीमत, प्रकृति का सम्मान और संरक्षण, पारिवारिक मूल्यों का संदेश देते हैं </title>
                                    <description><![CDATA[<p>जून के अंतिम सप्ताह में दो ऐसे महत्वपूर्ण व्रत पड़ रहे हैं, जो केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं बल्कि समाज को जल संरक्षण, सेवा, प्रकृति और पारिवारिक मूल्यों का संदेश भी देते हैं। 25 जून को निर्जला एकादशी और 29 जून को वट पूर्णिमा व्रत मनाया जाएगा। एक ओर निर्जला एकादशी संयम और जल के महत्व को समझाने वाला पर्व है, तो दूसरी ओर वट पूर्णिमा प्रकृति, पेड़ों और वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि से जुड़ी परंपराओं को आगे बढ़ाती है। इन दोनों व्रतों में पूजा-पाठ के साथ दान, सेवा और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भी विशेष महत्व</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/religion-astrology/do-you-know%E2%80%A6-in-the-last-week-of-june-two/article-2438"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/116.jpg" alt=""></a><br /><p>जून के अंतिम सप्ताह में दो ऐसे महत्वपूर्ण व्रत पड़ रहे हैं, जो केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं बल्कि समाज को जल संरक्षण, सेवा, प्रकृति और पारिवारिक मूल्यों का संदेश भी देते हैं। 25 जून को निर्जला एकादशी और 29 जून को वट पूर्णिमा व्रत मनाया जाएगा। एक ओर निर्जला एकादशी संयम और जल के महत्व को समझाने वाला पर्व है, तो दूसरी ओर वट पूर्णिमा प्रकृति, पेड़ों और वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि से जुड़ी परंपराओं को आगे बढ़ाती है। इन दोनों व्रतों में पूजा-पाठ के साथ दान, सेवा और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भी विशेष महत्व बताया गया है।</p>
<p>हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी के दिन निर्जला एकादशी का व्रत किया जाता है। इसे वर्ष की सबसे कठिन एकादशियों में गिना जाता है, क्योंकि इस दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालु सूर्योदय से लेकर अगले दिन द्वादशी तक अन्न और जल दोनों का त्याग करते हैं। इसी कारण इस एकादशी को "निर्जला" कहा जाता है।</p>
<p><strong>निर्जला एकादशी पर भगवान विष्णु की विशेष पूजा</strong></p>
<p>इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है। श्रद्धालु विष्णु भगवान को पीले फूल, तुलसी, फल और मिठाई अर्पित करते हैं तथा ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करते हैं। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है और घरों में भी भक्त पूरे श्रद्धाभाव से व्रत रखते हैं।</p>
<p><strong>ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी के व्रत का पुण्य सभी एकादशियों के समान</strong></p>
<p>ब्रह्मवैवर्त पुराण में निर्जला एकादशी की कथा का उल्लेख मिलता है। कथा के अनुसार पांडवों में भीमसेन को भूख अधिक लगती थी और उनके लिए हर महीने आने वाली एकादशी का व्रत करना कठिन था। उन्होंने महर्षि वेदव्यास से इसका उपाय पूछा। तब वेदव्यास ने उन्हें ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी के दिन निर्जला व्रत रखने की सलाह दी। मान्यता है कि इस एक व्रत का पुण्य सभी एकादशियों के समान प्राप्त होता है। इसी कारण इसे भीमसेनी एकादशी और पांडव एकादशी भी कहा जाता है।</p>
<p><strong>निर्जला जल का महत्व समझाने वाला भी पर्व</strong></p>
<p>निर्जला एकादशी केवल उपवास का पर्व नहीं है, बल्कि यह जल की आवश्यकता और उसके महत्व का भी संदेश देता है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु स्वयं जल का त्याग करते हैं और दूसरों की प्यास बुझाने का संकल्प लेते हैं। इस दिन जल से भरा घड़ा, हाथ का पंखा, छाता, चप्पल, सत्तू और फल दान करने की परंपरा है। कई स्थानों पर प्याऊ लगवाए जाते हैं और राहगीरों को ठंडा पानी पिलाया जाता है। मंदिरों, बस स्टैंडों, बाजारों और घरों के बाहर पानी की व्यवस्था करना पुण्य का कार्य माना जाता है। इसके अलावा पक्षियों के लिए पानी रखना और जरूरतमंद लोगों को फल एवं सत्तू वितरित करना भी शुभ माना गया है। गर्मी के मौसम में ऐसे सेवा कार्यों को धर्म और मानवता दोनों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। यही कारण है कि निर्जला एकादशी को जल संरक्षण और जनसेवा से जुड़ा विशेष पर्व भी कहा जाता है।</p>
<p><strong>निर्जला एकादशी के बाद मनाई जाएगी वट पूर्णिमा</strong></p>
<p>निर्जला एकादशी के कुछ दिन बाद 29 जून को वट पूर्णिमा व्रत रखा जाएगा। उत्तर भारत में ज्येष्ठ अमावस्या के दिन वट सावित्री व्रत मनाने की परंपरा है, जबकि गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कई क्षेत्रों में ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा को वट पूर्णिमा व्रत किया जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 29 जून को सुबह 3 बजकर 6 मिनट से शुरू होगी और 30 जून को सुबह 5 बजकर 26 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर वट पूर्णिमा का व्रत 29 जून को रखा जाएगा।</p>
<p><strong>जान लीजिए पूजा कब करना उत्तम रहेगा</strong></p>
<p>वट पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 6 मिनट से 4 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा सुबह 6 बजे से 8 बजकर 30 मिनट तक का समय भी पूजा के लिए शुभ माना गया है। इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 57 मिनट से दोपहर 12 बजकर 52 मिनट तक रहेगा। श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार इन शुभ समयों में पूजा कर सकते हैं।</p>
<p><strong>सुहागिन महिलाओं के लिए वट वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व</strong></p>
<p>वट पूर्णिमा के दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं। इस दिन वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वट वृक्ष में त्रिदेव का वास माना गया है। इसकी जड़ों में भगवान ब्रह्मा, तने में भगवान विष्णु और शाखाओं तथा पत्तियों में भगवान शिव का निवास बताया गया है। इसी वजह से इस वृक्ष को अत्यंत पवित्र माना जाता है। व्रत रखने वाली महिलाएं वट वृक्ष के चारों ओर सूत का धागा लपेटकर परिक्रमा करती हैं और परिवार के सुख, शांति तथा अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। मान्यता है कि इस पूजा से वैवाहिक जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।</p>
<p><strong>इस व्रत को मनाने की पीछे क्या है मान्यता</strong></p>
<p>वट पूर्णिमा और वट सावित्री व्रत के अवसर पर सावित्री और सत्यवान की कथा सुनने और सुनाने की परंपरा है। स्कंदपुराण में वर्णित कथा के अनुसार सावित्री का विवाह सत्यवान से हुआ था। दोनों एक-दूसरे के प्रति समर्पित थे। एक दिन सत्यवान जंगल में लकड़ी काटने गए, जहां वे अचानक अचेत होकर गिर पड़े। जब यमराज उनके प्राण लेने पहुंचे, तब सावित्री ने उनका पीछा किया और अपने दृढ़ संकल्प, बुद्धिमत्ता तथा पति के प्रति अटूट समर्पण से यमराज को प्रसन्न कर लिया। अंततः यमराज ने सत्यवान को पुनर्जीवन प्रदान किया। मान्यता है कि वट वृक्ष के पास सत्यवान के प्राण वापस आए थे, इसी कारण इस वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।</p>
<p><strong>सेवा, प्रकृति और परिवार का संदेश</strong></p>
<p>निर्जला एकादशी और वट पूर्णिमा, दोनों व्रत अपने-अपने तरीके से समाज को महत्वपूर्ण संदेश देते हैं। निर्जला एकादशी जल की कीमत और जरूरतमंदों की सेवा का महत्व बताती है, जबकि वट पूर्णिमा पेड़ों के संरक्षण, प्रकृति के सम्मान और परिवार की खुशहाली की भावना को मजबूत करती है। यही वजह है कि ये दोनों पर्व धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक और पर्यावरणीय चेतना के भी प्रतीक माने जाते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 13:30:10 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अयोध्या: SIT की रडार पर चंपत राय और अनिल मिश्रा! 150 संदिग्धों के नाम आए सामने, राम मंदिर चोरी मामले में बड़ी कार्रवाई के संकेत</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="isSelectedEnd">अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में चल रही SIT की जांच अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, जांच के दौरान करीब 150 संदिग्धों के नाम सामने आए हैं, जिनमें से लगभग 25 लोगों पर कार्रवाई करने की तैयारी की जा रही है। माना जा रहा है कि मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के खिलाफ भी बड़ा फैसला लिया जा सकता है। दोनों को उनके पदों से हटाए जाने की चर्चा तेज हो गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">  जांच के छठे दिन SIT की टीम एक बार फिर</p>
<p class="isSelectedEnd">जांच</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/religion-astrology/champat-rai-and-anil-mishra-names-of-150-suspects-appear/article-2426"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/ram.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में चल रही SIT की जांच अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, जांच के दौरान करीब 150 संदिग्धों के नाम सामने आए हैं, जिनमें से लगभग 25 लोगों पर कार्रवाई करने की तैयारी की जा रही है। माना जा रहा है कि मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के खिलाफ भी बड़ा फैसला लिया जा सकता है। दोनों को उनके पदों से हटाए जाने की चर्चा तेज हो गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd"> जांच के छठे दिन SIT की टीम एक बार फिर राम मंदिर परिसर पहुंची। टीम जांच पूरी करने के बाद आज ही लखनऊ लौटने वाली है। उम्मीद जताई जा रही है कि सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पूरी जांच रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">जांच के दौरान SIT ने चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव से अलग-अलग पूछताछ की। इसके अलावा भारतीय स्टेट बैंक के मैनेजर और कैशियर से भी जानकारी ली गई। सूत्रों का कहना है कि मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव को भी जिम्मेदार मानते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">SIT राम मंदिर कर्मचारी सोमेश आनंद से भी पूछताछ करना चाहती थी, लेकिन वह जांच टीम के सामने पेश नहीं हुए। बताया जा रहा है कि उनका मोबाइल फोन भी बंद है। सोमेश आनंद, गोपाल राव के भतीजे बताए जाते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस घोटाले में अब तक 2 करोड़ रुपये की नकद रिकवरी की जा चुकी है। यह बरामदगी लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर उर्फ टिन्नू जैसे आरोपियों की निशानदेही पर हुई है। ये सभी आरोपी मंदिर में दान राशि की गिनती की ड्यूटी में तैनात थे। जांच के दौरान मंदिर कर्मचारी टिन्नू के घर से सोना भी बरामद हुआ है, जिसकी मात्रा का आकलन किया जा रहा है।</p>
<p>इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब समाजवादी पार्टी सरकार में मंत्री रहे पवन पांडेय ने दावा किया कि राम मंदिर से 5 से 7.5 करोड़ रुपये तक की चोरी हुई है। इसके बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए और मामले की न्यायिक जांच की मांग की। दूसरी ओर, चंपत राय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि अब तक चोरी की कोई पुष्टि नहीं हुई है। विवाद बढ़ने पर भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर CBI जांच की मांग की थी, जिसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने मंदिर ट्रस्ट से विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                    

                <link>https://hindi.khabarchhe.com/religion-astrology/champat-rai-and-anil-mishra-names-of-150-suspects-appear/article-2426</link>
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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 15:20:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर योगी बोले- 15 दिनों में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा; क्या सच सामने आएगा? जानें अब तक क्या हुआ?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>अयोध्या। </strong>अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर उठे विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कहा है कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से होगी और अगर किसी ने गड़बड़ी की है तो उसे किसी भी हाल में छोड़ा नहीं जाएगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि जांच पूरी होने तक किसी तरह की अफवाह या अनावश्यक बयानबाजी से बचें, क्योंकि इससे जांच प्रभावित हो सकती है।</p>
<p>अयोध्या पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि राम मंदिर देश की आस्था का केंद्र है और इसके बारे में बिना</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/religion-astrology/yogi-said-on-ram-temple-offering-controversy-in-15/article-2418"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/25.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>अयोध्या। </strong>अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर उठे विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कहा है कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से होगी और अगर किसी ने गड़बड़ी की है तो उसे किसी भी हाल में छोड़ा नहीं जाएगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि जांच पूरी होने तक किसी तरह की अफवाह या अनावश्यक बयानबाजी से बचें, क्योंकि इससे जांच प्रभावित हो सकती है।</p>
<p>अयोध्या पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि राम मंदिर देश की आस्था का केंद्र है और इसके बारे में बिना तथ्यों के टिप्पणी करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर राज्य सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है और यह टीम अगले 15 दिनों के भीतर पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने का काम करेगी।</p>
<p>वहीं, मुख्यमंत्री ने कहा, ‘अगर किसी के पास कोई सबूत या जानकारी है तो वह उसे जांच टीम को सौंपे। बिना सबूत के आरोप लगाने से केवल भ्रम की स्थिति पैदा होती है। एसआईटी दूध का दूध और पानी का पानी कर देगी।’</p>
<p><strong>बोले- रामभक्तों पर गोली चलवाने वाले आज उपदेश दे रहे हैं</strong></p>
<p>योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में विपक्षी दलों, खासकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो लोग आज रामभक्तों और राम मंदिर की चिंता जताने की बात कर रहे हैं, उनका पुराना रिकॉर्ड सबके सामने है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कारसेवकों और रामभक्तों पर गोली चलवाने वाले लोग आज राम मंदिर को लेकर उपदेश दे रहे हैं। उन्होंने समाजवादी पार्टी के नेताओं के बयानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे लोगों को आत्ममंथन करना चाहिए।<br />वहीं, कांग्रेस पर हमला बोलते हुए योगी ने कहा कि राम मंदिर निर्माण का रास्ता रोकने के लिए कांग्रेस ने हर संभव कोशिश की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने अदालत में भगवान राम के अस्तित्व पर भी सवाल उठाए थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि वही लोग अब अयोध्या और राम मंदिर के मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं।</p>
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navbharattimes.indiatimes.com

<p><strong>अयोध्या को बदनाम करने की साजिश नहीं होगी सफल</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोग अयोध्या की बढ़ती पहचान और विकास को पचा नहीं पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले अयोध्या बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष कर रही थी, लेकिन आज यह दुनिया के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों में शामिल हो रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी भी तरह के दुष्प्रचार या अफवाहों के बहकावे में न आएं। योगी ने कहा कि राम मंदिर और अयोध्या की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘रामभक्तों ने 500 वर्षों तक संघर्ष किया है। ऐसे में कुछ दिनों का और इंतजार कर लें। जांच पूरी होने दीजिए। अगर कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।‘</p>
<p><strong>आइए जानते हैं कैसे शुरू हुआ चढ़ावा चोरी का विवाद?</strong></p>
<p>राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का मामला तब चर्चा में आया जब समाजवादी पार्टी सरकार में मंत्री रह चुके पवन पांडेय ने आरोप लगाया कि मंदिर के चढ़ावे से 5 करोड़ से लेकर 7.5 करोड़ रुपए तक की रकम गायब हुई है। इसके बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे को उठाया और कहा कि सरकार की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की थी।</p>
<p>हालांकि, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि ट्रस्ट के पास ऐसी किसी चोरी की पुष्टि नहीं हुई है। मामले ने राजनीतिक रूप लिया तो भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सीबीआई जांच की मांग की। इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी मंदिर ट्रस्ट से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी थी।</p>
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hanumanchalisalyric.in

<p><strong>अब तक इस मामले में क्या-क्या कार्रवाई हुई</strong></p>
<p>जांच के दौरान पांच लोगों के नाम सामने आए हैं। इनमें लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर शामिल बताए जा रहे हैं। ये सभी किसी न किसी रूप में मंदिर की दान राशि की गिनती या उससे जुड़ी प्रक्रिया में शामिल रहे हैं। जांच एजेंसियों की कार्रवाई में अब तक लगभग दो करोड़ रुपए की रिकवरी होने की बात सामने आई है। वहीं मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कर्मचारी रामशंकर यादव के घर से सोना मिलने की भी जानकारी सामने आई है। हालांकि बरामद सोने की मात्रा और उसकी वास्तविक स्थिति को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।</p>
<p><strong>एसआईटी ने अब तक किन-किन लोगों से पूछताछ की</strong></p>
<p>एसआईटी ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और आमंत्रित सदस्य गोपाल राव से पूछताछ की है। साथ ही उन कर्मचारियों से भी पूछताछ की गई जिन पर शुरुआती स्तर पर संदेह जताया गया था। वहीं, जांच अधिकारियों ने बैंक प्रतिनिधियों और नोटों की गिनती से जुड़ी निजी एजेंसी के अधिकारियों से पूछताछ की। बैंक रिकॉर्ड और लेन-देन से जुड़े दस्तावेज भी खंगाले गए। एसआईटी ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र से भी विस्तार से पूछताछ की। टीम ने दान राशि की गिनती, उसके रखरखाव और बैंक में जमा करने की प्रक्रिया को समझा। इसके अलावा कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया और उनकी जिम्मेदारियों को लेकर भी जानकारी जुटाई गई। अब पूरे मामले की नजर एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।</p>
<p><strong>इस मामले से जुड़े कुछ अहम बातें</strong></p>
<ul>
<li>श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि वह जांच में पूरा सहयोग कर रहा है।</li>
<li>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया है कि जांच किसी दबाव में नहीं होगी और दोषी चाहे कोई भी हो, कार्रवाई तय है।</li>
<li>विपक्ष लगातार मामले में पारदर्शिता की मांग कर रहा है, जबकि ट्रस्ट का कहना है कि अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 13:57:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अयोध्या: सोना-चांदी और हीरा-माणिक्य की वो 1250 शिलाएं आखिर कहां गईं? मंदिर ट्रस्ट पर उठे सवाल; 'गायब' होने के दावे से प्रशासन के उड़े होश</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अयोध्या राम मंदिर में दान के 7 करोड़ रुपये की चोरी के दावे का मामला और अधिक गरमा रहा है। प्रशासन ने आरोपों की जांच के लिए 3 सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है। इसी बीच, चोरी के दावों के बीच सेवादार कृष्ण देव तिवारी उर्फ केडी ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि मेरे खिलाफ डेढ़ करोड़ रुपये की जमीन खरीदने के लगाए जा रहे आरोप झूठे हैं। अब यह दावा किया जा रहा है कि राम मंदिर से 1250 शिलाएं भी 'गायब' हो गई हैं।</p>
<p>अयोध्या के श्रीराम</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/religion-astrology/ayodhya-where-did-those-1250-stones-of-gold-silver-and/article-2401"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/ram-mandir5.webp" alt=""></a><br /><p>अयोध्या राम मंदिर में दान के 7 करोड़ रुपये की चोरी के दावे का मामला और अधिक गरमा रहा है। प्रशासन ने आरोपों की जांच के लिए 3 सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है। इसी बीच, चोरी के दावों के बीच सेवादार कृष्ण देव तिवारी उर्फ केडी ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि मेरे खिलाफ डेढ़ करोड़ रुपये की जमीन खरीदने के लगाए जा रहे आरोप झूठे हैं। अब यह दावा किया जा रहा है कि राम मंदिर से 1250 शिलाएं भी 'गायब' हो गई हैं।</p>
<p>अयोध्या के श्रीराम मंदिर में दान चोरी की बात नई नहीं है। धर्मसेना के संस्थापक संतोष दुबे का दावा है कि 1989 में गांव-गांव, शहर-शहर और देश-विदेश से पूजित होकर अयोध्या आई सोना-चांदी, हीरा-माणिक्य और अष्टधातु की 1250 शिलाएं अब 'गायब' हो गई हैं। ये शिलाएं 2002 तक कारसेवकपुरम में थीं। मिट्टी की पूजित शिलाएं आज भी कारसेवकपुरम में रखी हुई हैं, लेकिन धातु की शिलाएं कहीं दिखाई नहीं देतीं। संतोष दुबे के अनुसार, सोना-चांदी की शिलाओं की देखरेख की जिम्मेदारी भी ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के पास थी।</p>
<p>इन शिलाओं को कारसेवकपुरम में जहाँ सुरक्षित रखा गया था, वहां 3 ताले लगाए गए थे। फिर ये शिलाएं कहां गायब हो गईं, इसकी किसी को जानकारी नहीं है।  श्रीराम मंदिर आंदोलन से जुड़े संतोष दुबे ने बताया कि, 'श्रीराम मंदिर के लिए 1985 में "श्रीराम जन्मभूमि न्यास" बना था। इसके अध्यक्ष परमहंस रामचंद्र दास थे। न्यास में विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अशोक सिंघल, गिरिराज, रामविलास वेदांती, चंपत राय सहित कई लोग थे।</p>
<p>श्रीराम मंदिर आंदोलन को गति देने के लिए 1989 में वीएचपी ने पहला बड़ा अभियान शुरू किया। नारा दिया गया था- ‘सवा रुपया दे दे भाई रामशिला के नाम का, राम के घर में लग जाएगा पत्थर तेरे नाम का।’ इस अभियान में वीएचपी ने प्रत्येक व्यक्ति से सवा रुपया, यानी एक घर से 5 से 10 रुपये का दान देने को कहा था। साथ ही घर-घर से पूजित शिलाएं भी मंगाई गई थीं। वीएचपी ने कहा था कि श्रीराम मंदिर के निर्माण में इन शिलाओं का उपयोग किया जाएगा। इस अभियान ने पूरे देश में श्रीराम मंदिर आंदोलन को गति दी। लोगों ने खुलकर दान दिया।'</p>
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x.com/ShriRamTeerth

<p>उन्होंने कहा, 'मैं तो अयोध्या में ही रहता हूँ। उस समय कारसेवकपुरम से जुड़ गया था। मेरा काम उन शिलाओं का हिसाब तैयार करना था, जो सोना-चांदी, हीरा, माणिक्य, अष्टधातु सहित अन्य कीमती धातुओं से बनाकर भेजी जा रही थीं। उस समय मेरी उम्र 22-23 वर्ष रही होगी। इस गणना में मेरे साथ संघ के एक प्रचारक डॉ. रामविलास वेदांती और परमहंस रामचंद्र दास भी शामिल थे। डॉ. रामविलास वेदांती और परमहंस रामचंद्र दास आज इस दुनिया में नहीं हैं।'</p>
<p>संतोष दुबे का दावा है, 'सोना-चांदी और अष्टधातु की इन शिलाओं की कुल संख्या 1250 थी। परमहंस रामचंद्र दासजी बताते थे कि इनमें सबसे महंगी शिला मॉरीशस वाली थी। मुंबई के एक व्यापारी ने जो शिला भेजी थी, उस पर हीरे जड़े हुए थे। सबसे अधिक चांदी की, उसके बाद सोने की शिलाएं थीं।'</p>
<p>इन शिलाओं को ट्रस्ट के अध्यक्ष परमहंस रामचंद्र दास के निर्देश पर वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय की देखरेख में रखा गया था। सुरक्षा के लिए जहां शिलाएं रखी गई थीं, वहां 3 ताले लगाए गए थे। 2002 तक ये शिलाएं मौजूद थीं। उसके बाद से उनका कोई पता नहीं चला। संतोष दुबे का कहना है, 'इसके पीछे चंपत राय की भूमिका रही है।' उनका दावा है कि परमहंस रामचंद्र दास इसी आघात में बीमार रहने लगे और 2 साल बाद उनका निधन हो गया। डॉ. रामविलास वेदांती डर के कारण कुछ बोल नहीं सके। इससे स्पष्ट है कि श्रीराम मंदिर के नाम पर मिलने वाले दान के सोना-चांदी की चोरी आज नहीं, बल्कि 1989 से ही शुरू हो गई थी।'</p>
<p>संतोष दुबे ने कहा है, 'कारसेवकपुरम में वीएचपी ने श्रीराम मंदिर का मॉडल रखा था। उसके सामने एक दानपेटी रखी गई थी। उसमें भी देशभर से आने वाले श्रद्धालु दान करते थे। इस दानपेटी में 50 रुपये से अधिक दान देने वालों को रसीद दी जाती थी। यानी इससे कम राशि का कोई हिसाब-किताब नहीं था। इस दानपेटी में हर महीने 5 से 7 लाख रुपये जमा होते थे। दान देने वाले व्यक्ति को बदले में श्रीराम मंदिर मॉडल का एक फोटो दिया जाता था। तब भी वीएचपी की ओर से दान में मिली राशि कभी सार्वजनिक नहीं की गई थी।'</p>
<p>उन्होंने आगे कहा, '5 फरवरी 2020 को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट बना। उस समय न्यास को उसमें समाहित कर लिया गया। उस समय न्यास के खाते में केवल 8.50 करोड़ रुपये दिखाए गए थे। तब भी सोना-चांदी की शिलाओं का कोई उल्लेख नहीं किया गया था। इसके बाद ट्रस्ट ने समर्पण और सहयोग राशि अभियान चलाया। ऑनलाइन भी दान लिया गया। घर-घर चलाए गए समर्पण राशि अभियान के लिए रसीद भी दी गई। हालांकि, रसीद और दान में मिली राशि को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। पहले न्यास और अब ट्रस्ट में चंपत राय ही सर्वेसर्वा की भूमिका में हैं। आरोप है कि उनकी ओर से कभी पारदर्शिता दिखाने का प्रयास नहीं किया गया।'</p>
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divyabhaskar.co.in

<p>श्रीराम मंदिर में दर्शन करने 2022 से अब तक साढ़े चार वर्षों में 61.53 करोड़ लोग पहुंचे। सूत्रों के अनुसार, दर्शन करने जाने वाला सामान्य व्यक्ति भी श्रद्धा से कम से कम 10 रुपये अवश्य चढ़ाता है। इस हिसाब से केवल दानपेटियों में ही लोगों ने 600 करोड़ रुपये दान किए। इसमें महिलाओं द्वारा दान किए गए सोना-चांदी के आभूषणों की बात शामिल नहीं है।</p>
<p>2024 में जब चंपत राय ने चढ़ावे का विवरण दिया था, तब उन्होंने 13 क्विंटल चांदी और 20 किलो सोने का उल्लेख किया था। 2025 में लगभग 30 करोड़ लोगों ने दर्शन किए। इस हिसाब से 2025 में लगभग 300 करोड़ रुपये का चढ़ावा आना चाहिए था। जबकि 1 अप्रैल 2025 से 28 फरवरी 2026 तक का जो रिकॉर्ड ट्रस्ट ने 21 मार्च की बैठक में प्रस्तुत किया था, उसमें केवल 54 करोड़ रुपये दिखाए गए थे। अब यदि 2026 की बात करें, तो जनवरी से 15 जून तक लगभग 7 करोड़ लोग दर्शन कर चुके हैं।</p>
<p>संतोष दुबे के आरोपों पर चंपत राय का पक्ष जानने के लिए टीम राम मंदिर ट्रस्ट कार्यालय पहुंची थी। यहाँ एक कमरे में तोड़फोड़ का काम चल रहा था। अंदर ईंटों के टुकड़ों की सफाई की जा रही थी। उसी कमरे में एक कुर्सी पर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय बैठे थे। टीम ने ट्रस्ट के कर्मचारियों को अपनी पहचान बताई और कहा कि चंपत राय से बात करनी है। इसके बाद ट्रस्ट के कर्मचारियों ने टीम को अधिक समय तक रुकने नहीं दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 15:30:25 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>राम मंदिर के कर्मचारी के घर से 10 लाख मिलना, सीएम योगी का SIT गठित करना, क्या मंदिर में वाकई सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है!</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>अयोध्या। </strong>अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की रकम में कथित गड़बड़ी और करोड़ों रुपये की चोरी के आरोपों ने नया मोड़ ले लिया है। मामले को लेकर बढ़ते विवाद के बीच मंदिर ट्रस्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से स्वतंत्र जांच की मांग की, जिसके बाद राज्य सरकार ने तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया। इसी बीच मंदिर से जुड़े एक कर्मचारी के घर से 10 लाख रुपये बरामद होने की जानकारी सामने आई है, जिससे पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।<br />जानकारी के अनुसार, राम मंदिर के कर्मचारी लवकुश मिश्रा के घर से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/religion-astrology/getting-rs-10-lakh-from-the-house-of-ram-mandir/article-2391"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/ram-mandir.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>अयोध्या। </strong>अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की रकम में कथित गड़बड़ी और करोड़ों रुपये की चोरी के आरोपों ने नया मोड़ ले लिया है। मामले को लेकर बढ़ते विवाद के बीच मंदिर ट्रस्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से स्वतंत्र जांच की मांग की, जिसके बाद राज्य सरकार ने तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया। इसी बीच मंदिर से जुड़े एक कर्मचारी के घर से 10 लाख रुपये बरामद होने की जानकारी सामने आई है, जिससे पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।<br />जानकारी के अनुसार, राम मंदिर के कर्मचारी लवकुश मिश्रा के घर से करीब 10 लाख रुपये मिले हैं। बताया गया है कि कुछ रकम घर में रखे बक्सों में थी, जबकि कुछ पैसे गोबर के ढेर में दबाकर छिपाए गए थे। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि बरामद की गई राशि किसकी है और उसका स्रोत क्या है। सूत्रों का कहना है कि लवकुश मंदिर में चढ़ावे की रकम गिनने का काम करता था। </p>
<p>बताया जा रहा है कि लवकुश की नौकरी मंदिर में उसके ससुर की सिफारिश पर लगी थी। उसका साला अनुकल्प मिश्रा पहले से ही मंदिर में कार्यरत था। सूत्रों के अनुसार, लवकुश और अनुकल्प दोनों फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं और उनसे पूछताछ की जा रही है।</p>
<p><strong>कैसे शुरू हुआ यह विवाद, जानें पूरा मामला</strong></p>
<p>राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब समाजवादी पार्टी सरकार में मंत्री रह चुके पवन पांडे ने दावा किया कि मंदिर से 5 से 7.5 करोड़ रुपये तक की चोरी हुई है। इसके बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी मामले में सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसकी न्यायिक जांच होनी चाहिए। हालांकि राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि अब तक ऐसी कोई बात सामने नहीं आई है।<br />विवाद बढ़ने के बाद भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने 9 जून को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मामले की सीबीआई जांच की मांग की। इसके अगले दिन प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने मंदिर ट्रस्ट से इस संबंध में रिपोर्ट तलब कर ली।</p>
<p>वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए मंदिर ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से SIT जांच की मांग की। इसके कुछ घंटों बाद ही शासन ने तीन सदस्यीय SIT गठित कर दी। इस टीम में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज किरन शिवकुमार और वित्त विभाग के विशेष सचिव नीलरतन को शामिल किया गया है।</p>
<p>विजय विश्वास को SIT का अध्यक्ष बनाया गया है। वे मंदिर में चढ़ावे और दान की पूरी व्यवस्था का अध्ययन करेंगे और उसमें सुधार के सुझाव देंगे। वहीं, आईजी किरन एस. को अपराध जांच का लंबा अनुभव है। वे पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) में डीआईजी के पद पर भी रह चुके हैं। SIT में उनकी भूमिका कथित चोरी और उससे जुड़े आरोपों की जांच करना होगी। वित्त विभाग के विशेष सचिव नीलरतन मंदिर के वित्तीय रिकॉर्ड, दान और लेखा-जोखा की समीक्षा करेंगे। वे ऑडिट और वित्तीय लेन-देन की जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।</p>
<p><strong>गोबर के ढेर से मिले पैसे, अब पिता क्या बोल रहे हैं</strong></p>
<p>इस बीच लवकुश मिश्रा के पिता बच्चूलाल ने भी उनके घर से रकम मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि उनका बेटा पिछले चार-पांच महीने से राम मंदिर में नौकरी कर रहा था। चोरी की घटना के बाद जांच के सिलसिले में कुछ लोग घर आए और तलाशी के दौरान 10 लाख रुपये बरामद हुए। उन्होंने यह भी कहा कि फैजाबाद में बन रहे मकान से उनके बेटे का कोई संबंध नहीं है। मकान निर्माण के लिए उन्होंने अपनी 10 से 12 बीघा जमीन गिरवी रखी है। वहीं,  ग्रामीणों का कहना है कि कुछ पैसे अलमारी और बक्सों में रखे थे, जबकि कुछ रकम गोबर में छिपाई गई थी।</p>
<p><strong>नौकरी लगते ही लवकुश की आर्थिक स्थिति तेजी से बदलने लगी</strong></p>
<p>ग्रामीणों ने बताया कि मंदिर में नौकरी मिलने से पहले लवकुश कार मैकेनिक का काम करता था। नौकरी मिलने के बाद उसकी आर्थिक स्थिति में तेजी से बदलाव देखा गया। गांव आने पर वह खुलकर खर्च करता था। लवकुश के पिता गाजियाबाद की लोहा मंडी में काम करते हैं।</p>
<p><strong>विवादों के बीच मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा अयोध्या पहुंचे</strong></p>
<p>राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा भी अयोध्या पहुंचे। पांच दिनों के भीतर यह उनका दूसरा दौरा था। बैठक से पहले जब उनसे चढ़ावा विवाद पर सवाल पूछे गए तो उन्होंने कहा कि वह मंदिर निर्माण संबंधी जानकारी लेने आए हैं और निर्माण समिति की बैठक में निर्माण कार्यों पर ही चर्चा होगी। इससे पहले 9 जून को भी उन्होंने ट्रस्ट सदस्यों के साथ बैठक कर चढ़ावे की राशि और उसके उपयोग सहित कई विषयों पर चर्चा की थी।</p>
<p><strong>जनहित याचिक दाखिल, अगले हफ्ते सुनवाई संभव</strong></p>
<p>उधर, पवन पांडे ने कहा है कि संघ से जुड़े रहे महिपाल सिंह ने चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं, इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के नाम आरोपों में सामने आए हैं, उन्हें नैतिक आधार पर पद छोड़कर जांच का सामना करना चाहिए। मामले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में भी एक जनहित याचिका दाखिल की गई है। स्थानीय अधिवक्ता मोहित अशोक ने याचिका दायर कर मामले की सीबीआई जांच और मंदिर के चढ़ावे का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से ऑडिट कराने की मांग की है। इस याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई हो सकती है।</p>
<p><strong>भाजपा नेता विनय कटियार ने भी </strong><strong>मामले को गंभीर बताया</strong></p>
<p>राम मंदिर आंदोलन से जुड़े भाजपा नेता विनय कटियार ने भी मामले को गंभीर बताया है। उनका कहना है कि यह कोई सामान्य विषय नहीं है, क्योंकि मंदिर निर्माण के लिए लंबे समय तक संघर्ष हुआ है और अनेक लोगों ने इसके लिए त्याग और बलिदान दिए हैं। ऐसे में सभी आरोपों की निष्पक्ष और गहन जांच जरूरी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 14:36:28 +0530</pubDate>
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