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                <title>बिजनेस - Khabarchhe Hindi</title>
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                            <item>
                <title>नितिन गडकरी की नई योजना, वाहन 'बात' करेंगे, 2028 से V2V सिस्टम अनिवार्य बन सकता है</title>
                                    <description><![CDATA[<p>केंद्र सरकार देश में सड़क सुरक्षा सुधारने और स्मार्ट परिवहन प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठा रही है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 1 अक्टूबर, 2028 से निर्मित सभी नए टू-व्हीलर, कार और वाणिज्यिक वाहनों में वाहन-से-वाहन (V2V) संचार प्रणाली को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए, मंत्रालय ने सेंट्रल मोटर वाहन नियमों (CMVR), 1989 में संशोधन करने वाला ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। फिलहाल 30 दिनों के लिए इस प्रस्ताव पर सार्वजनिक टिप्पणियां मांगी जा रही हैं। सुझावों की समीक्षा करने के बाद अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी।</p>
<p>मंत्रालय के प्रस्ताव के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/business/nitin-gadkaris-new-plan-vehicles-will-talk-v2v-system-may/article-2694"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-08/253.webp" alt=""></a><br /><p>केंद्र सरकार देश में सड़क सुरक्षा सुधारने और स्मार्ट परिवहन प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठा रही है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 1 अक्टूबर, 2028 से निर्मित सभी नए टू-व्हीलर, कार और वाणिज्यिक वाहनों में वाहन-से-वाहन (V2V) संचार प्रणाली को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए, मंत्रालय ने सेंट्रल मोटर वाहन नियमों (CMVR), 1989 में संशोधन करने वाला ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। फिलहाल 30 दिनों के लिए इस प्रस्ताव पर सार्वजनिक टिप्पणियां मांगी जा रही हैं। सुझावों की समीक्षा करने के बाद अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी।</p>
<p>मंत्रालय के प्रस्ताव के अनुसार, V2V सिस्टम दो चरणों में लागू किया जाएगा। पहले चरण में, 1 अक्टूबर, 2027 से, स्वेच्छा से V2V तकनीक प्रदान करने वाले किसी भी वाहन निर्माता को AIS-230 मानक का पालन करना होगा। दूसरे चरण में, 1 अक्टूबर, 2028 से शुरू होकर, यह तकनीक सभी नए L, M और N श्रेणी के वाहनों के लिए अनिवार्य हो जाएगी। इन श्रेणियों में टू-व्हीलर, पैसेंजर कार, SUV, बस, ट्रक और अन्य कमर्शियल वाहन शामिल हैं।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/264.webp" alt="264" width="1280" height="720"></img></p>
<p>सरकार ने V2V सिस्टम्स के लिए AIS-230 (ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड) विकसित किया है। इस मानक में न्यूनतम तकनीकी मानक, सिस्टम कार्यक्षमता, साइबर सुरक्षा, रेडियो प्रदर्शन, GNSS (ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम), इलेक्ट्रोमैग्नेटिक अनुकूलता, पावर सप्लाई आवश्यकताएं और सड़क सुरक्षा प्रदर्शन के लिए आवश्यकताएं शामिल की गई हैं।</p>
<p>व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) तकनीक एक ऐसी प्रणाली है, जिसमें वाहन वायरलेस तरीके से रियल-टाइम जानकारी साझा करते हैं। इसके अंदर वाहन एक-दूसरे को वाहन की गति, लोकेशन, दिशा, एक्सीलरेशन और ब्रेक लगाने जैसी जानकारी भेजते हैं। यह तकनीक सेल्युलर व्हीकल टू एवरीथिंग (C-V2X) पर आधारित होगी।</p>
<p>इसके लिए, फैक्टरी-फिटेड ऑन-बोर्ड यूनिट (OBU) इंस्टॉल की जाएगी, जो 5.875GHz से 5.925GHz फ्रीक्वेंसी बैंड में कार्यरत होगी। जून 2026 में दूरसंचार विभाग ने इस स्पेक्ट्रम के लाइसेंस-मुक्त उपयोग को मंजूरी दी थी।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/274.webp" alt="274" width="1280" height="720"></img></p>
<p>V2V सिस्टम सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए विभिन्न सुरक्षा चेतावनियां प्रदान करेंगे। इनमें इमरजेंसी ब्रेक अलर्ट, आगे टक्कर होने की चेतावनियां, गलत दिशा में ड्राइविंग करने की चेतावनियां, इमरजेंसी वाहन की चेतावनियां और असुरक्षित लेन बदलने की चेतावनियां शामिल हैं। इसके कारण ड्राइवरों को तुरंत दिखाई न देने वाले खतरों की चेतावनी के बारे में पहले से जानकारी प्रदान करेगा।</p>
<p>कई आधुनिक कारों में वर्तमान में ADAS (एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम्स) दिए जाते हैं। ADAS मुख्य रूप से कैमरा, रडार, सेंसर और ड्राइवर इनपुट पर निर्भर करता है। दूसरी ओर, V2V तकनीक वाहन को दूसरे वाहन के साथ सीधे बातचीत करने की अनुमति देती है। यह संभावित दुर्घटनाओं का पहले से पता लगाने और समय पर चेतावनियां प्रदान करने में मदद कर सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, V2V तकनीक ADAS का विकल्प नहीं बल्कि इसे पूरक बनाएगी।</p>
<p>हालांकि, यह तकनीक सड़क सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है, लेकिन इसके सामने कई चुनौतियां भी हैं, जिनमें विभिन्न निर्माताओं के वाहनों के बीच निर्बाध संचार सुनिश्चित करना, सभी मॉडलों में तकनीक को सफलतापूर्वक एकीकृत करना, साइबर सुरक्षा को मजबूत करना, उपयोगकर्ता डेटा और गोपनीयता की रक्षा करना और सिस्टम की विश्वसनीयता बनाए रखना शामिल है।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/284.webp" alt="284" width="1280" height="720"></img></p>
<p>पहले के अनुमान बताते हैं कि, V2V के लिए स्थापित ऑन-बोर्ड यूनिट (OBU) की कीमत लगभग रु. 5,000 से रु. 7,000 हो सकती है। हालांकि, वर्तमान ड्राफ्ट अधिसूचना वाहन की कीमतों पर संभावित प्रभाव का कोई आधिकारिक अनुमान प्रदान नहीं करती।</p>
<p>केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस साल V2V तकनीक की घोषणा करते समय कहा था कि, यह ड्राइवरों को 'पायलटों की तरह एक-दूसरे से बात करने' में सक्षम बनाएगी।</p>
<p>सरकार का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में कनेक्टेड मोबिलिटी, बुद्धिमान परिवहन प्रणालियों और सक्रिय दुर्घटना रोकथाम को बढ़ावा देगी।</p>
<p><strong>क्या है V2V सिस्टम...</strong></p>
<p>वाहन-से-वाहन (V2V) सिस्टम वायरलेस तकनीक का उपयोग करते हैं ताकि कार और अन्य वाहन एक-दूसरे के साथ "बातचीत" कर सकें। यह लगातार स्पीड, लोकेशन (स्थान), दिशा और ब्रेकिंग जैसा लाइव डेटा साझा करता है। इससे अंधेरे मोड़ों (ब्लाइंड कॉर्नर्स) पर या घने कोहरे में भी ड्राइवरों को आगे के छिपे खतरों या दुर्घटनाओं के बारे में चेतावनी देने में मदद मिलती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 12:52:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>क्या बिना बीमा के पेट्रोल-डीजल नहीं मिलेगा? देश में 56% वाहन बिना बीमा के चल रहे हैं</title>
                                    <description><![CDATA[<p>देश की सड़कों पर थर्ड पार्टी इंश्योरेंस (बीमा) के बिना चल रहे वाहनों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सड़कों पर बड़ी संख्या में बिना बीमा वाले वाहनों को लेकर गंभीर चिंता जताई। अदालत ने केंद्र सरकार को एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने का निर्देश दिया है, जिसके तहत वैध बीमा न रखने वाले वाहनों को पेट्रोल पंप पर ईंधन (पेट्रोल-डीजल) देने से इनकार किया जा सकता है।</p>
<p>इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क दुर्घटनाओं की संख्या और टोल प्लाजा पर लगने वाली वाहनों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/business/6a730344d1565/article-2680"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-08/012.webp" alt=""></a><br /><p>देश की सड़कों पर थर्ड पार्टी इंश्योरेंस (बीमा) के बिना चल रहे वाहनों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सड़कों पर बड़ी संख्या में बिना बीमा वाले वाहनों को लेकर गंभीर चिंता जताई। अदालत ने केंद्र सरकार को एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने का निर्देश दिया है, जिसके तहत वैध बीमा न रखने वाले वाहनों को पेट्रोल पंप पर ईंधन (पेट्रोल-डीजल) देने से इनकार किया जा सकता है।</p>
<p>इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क दुर्घटनाओं की संख्या और टोल प्लाजा पर लगने वाली वाहनों की लंबी कतारों पर भी ध्यान दिया। कोर्ट ने केंद्र सरकार से चयनित 5 कॉरिडोर पर ऐसी पायलट योजनाएँ लागू करने को कहा है, जिनसे टोल प्लाजा पर वाहनों को रोके बिना वहाँ से गुजरने वाले वाहनों की स्वचालित पहचान की जा सके।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/023.webp" alt="023" width="1280" height="720"></img></p>
<p>जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम के उन प्रावधानों का उचित पालन नहीं हो रहा है, जिनके तहत सभी वाहनों के लिए 'थर्ड पार्टी' जोखिम को कवर करने वाला वैध बीमा अनिवार्य है। वित्त मंत्रालय से संबंधित संसदीय स्थायी समिति की 2024-25 की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सड़कों पर चलने वाले लगभग 56 प्रतिशत वाहन बिना बीमा के हैं, जो अत्यंत चिंताजनक है।</p>
<p>कोर्ट ने कहा कि अदालत में हुई चर्चा के अनुसार 'इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया' (IRDAI) को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के साथ विचार-विमर्श करके ऐसा पायलट प्रोजेक्ट तैयार करना चाहिए, जिसमें वाहनों को ईंधन देने की प्रक्रिया को उनके वैध बीमा की स्थिति से जोड़ा जाए। यदि वाहन का वैध बीमा नहीं होगा, तो जब तक वह बीमा नहीं करवा लेता, तब तक उसे पेट्रोल पंप से ईंधन नहीं मिलेगा।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/supreme-court.webp" alt="supreme-court" width="1280" height="720"></img></p>
<p>सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, इस व्यवस्था से दोहरा लाभ होगा—एक तो बिना बीमा या बिना पंजीकरण वाले वाहनों की पहचान होगी और दूसरा, वाहन मालिकों को कानूनी रूप से बीमा कराने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। यह योजना मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के प्रावधानों का जमीनी स्तर पर पालन सुनिश्चित करेगी, जिसके लिए ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरों का उपयोग किया जा सकेगा। अदालत ने यह भी कहा कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय को भी सिद्धांततः इस पर कोई आपत्ति नहीं है।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने याद दिलाया कि 2018 में उसने नए चार-पहिया वाहनों के लिए खरीद या पंजीकरण के समय 3 वर्ष और दो-पहिया वाहनों के लिए 5 वर्ष की 'थर्ड पार्टी' बीमा पॉलिसी अनिवार्य की थी। उस आदेश के 8 वर्ष बाद भी बड़ी संख्या में वाहन बिना बीमा के हैं। हालांकि IRDAI और जनरल इंश्योरेंस काउंसिल ने इस अवधि को न बढ़ाने की सिफारिश की थी, लेकिन कोर्ट का मानना है कि सड़क सुरक्षा के हित में इस अवधि को 1 वर्ष बढ़ाया जाना चाहिए।</p>
<p>अब नए चार-पहिया वाहनों के लिए 4 वर्ष और नए दो-पहिया वाहनों के लिए 6 वर्ष की 'थर्ड पार्टी' बीमा पॉलिसी खरीदना अनिवार्य होगा। इस संबंध में IRDAI को तत्काल आवश्यक निर्देश जारी करने के लिए कहा गया है।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने आँकड़े देते हुए कहा कि देश के कुल 30.48 करोड़ वाहनों में से 16.54 करोड़ वाहनों के पास बीमा ही नहीं है। इसके परिणामस्वरूप सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को मुआवजा देने वाला कानूनी संरक्षण या तो देर से मिलता है या फिर विफल हो जाता है। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के तहत अनिवार्य बीमा का उद्देश्य केवल दुर्घटना पीड़ितों को मुआवजा दिलाना नहीं है, बल्कि उन्हें लंबी कानूनी लड़ाई से बचाना भी है। बीमा न होने के कारण पीड़ितों और उनके परिवारों को समय पर उचित मुआवजा नहीं मिल पाता और लंबे समय तक अदालत में मामला चलने से मृत्यु या स्थायी दिव्यांगता के मामलों में परिवार पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता है।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/2311.webp" alt="2311" width="1280" height="720"></img></p>
<p>कोर्ट ने IRDAI और सड़क परिवहन मंत्रालय को कुछ राज्यों में 'इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो' और 'वाहन' (VAHAN) पोर्टल के डेटा से जुड़े ANPR कैमरे लगाने का निर्देश दिया है, ताकि बिना बीमा वाले वाहनों के स्वतः ई-चालान जारी किए जा सकें।</p>
<p>फिलहाल राज्य पुलिस के पास मौके पर बीमा की स्थिति की जांच करने के लिए कोई समान व्यवस्था नहीं है। इसलिए पुलिस को हैंडहेल्ड डिवाइस या डाउनलोड की जा सकने वाली ऐप उपलब्ध कराई जाएगी। इससे रियल-टाइम निगरानी संभव होगी और नियम उल्लंघन पर तुरंत चालान काटा जा सकेगा। इसके अलावा, IRDAI को निजी वाहन मालिकों के लिए बेसिक पॉलिसी के साथ ऐड-ऑन, पर्सनल एक्सीडेंट कवर और ओन-डैमेज कवर जैसे विकल्प उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 19:02:52 +0530</pubDate>
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                <title>50 वर्षों की ₹31,005 करोड़ की ब्याजमुक्त ऋण; किस योजना के तहत, किसे मिला? वित्त मंत्री ने दिया जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[<p>केंद्र सरकार के पास 'स्कीम फॉर स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट' (SASCI) नाम की एक योजना है। इस योजना के तहत केंद्र सरकार राज्य सरकारों को 50 वर्षों के लिए ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराती है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्यों के पास सड़कों, पुलों, स्कूलों, अस्पतालों या बुनियादी ढांचा परियोजनाओं जैसे बड़े विकास कार्यों के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध हो। इस संबंध में संसद में एक प्रश्न उठाया गया था। लोकसभा में YSRCP सांसद पी. वी. मिथुन रेड्डी ने सरकार से पूछा, 'SASCI के तहत आंध्र प्रदेश को अब तक कितनी राशि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/business/6a718efcd07aa/article-2669"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-08/4311.webp" alt=""></a><br /><p>केंद्र सरकार के पास 'स्कीम फॉर स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट' (SASCI) नाम की एक योजना है। इस योजना के तहत केंद्र सरकार राज्य सरकारों को 50 वर्षों के लिए ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराती है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्यों के पास सड़कों, पुलों, स्कूलों, अस्पतालों या बुनियादी ढांचा परियोजनाओं जैसे बड़े विकास कार्यों के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध हो। इस संबंध में संसद में एक प्रश्न उठाया गया था। लोकसभा में YSRCP सांसद पी. वी. मिथुन रेड्डी ने सरकार से पूछा, 'SASCI के तहत आंध्र प्रदेश को अब तक कितनी राशि मिली है, क्या केंद्र की शर्तों के कारण धनराशि जारी करने में देरी हुई है, क्या अमरावती राजधानी परियोजना के लिए कोई अलग राशि निर्धारित की गई है, और क्या केंद्र 2014 में राज्य के विभाजन के बाद हुए बुनियादी ढांचे के नुकसान की भरपाई के लिए अतिरिक्त सहायता देने पर विचार कर रहा है।'</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/451.webp" alt="451" width="1280" height="720"></img>
economictimes.indiatimes.com

<p>वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस प्रश्न का उत्तर दिया। उन्होंने सोमवार को लोकसभा में जानकारी दी कि केंद्र सरकार की SASCI योजना के तहत 50 वर्षों की अवधि वाले ब्याजमुक्त पूंजी ऋण के रूप में आंध्र प्रदेश को अब तक ₹31,005.47 करोड़ दिए गए हैं। अपने उत्तर में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि, '2020-21 से 1 अगस्त, 2026 तक आंध्र प्रदेश को कुल ₹31,005.47 करोड़ दिए गए हैं। इनमें सबसे अधिक राशि ₹8,289.61 करोड़ 2025-26 में और ₹7,901.56 करोड़ 2024-25 में जारी की गई थी। जबकि 2026-27 में 1 अगस्त तक ₹3,428.14 करोड़ जारी किए जा चुके हैं।'</p>
<p>देरी के संबंध में वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि SASCI योजना के तहत ऋण राज्य सरकार से प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद ही दिए जाते हैं। यदि प्रस्ताव सभी दिशानिर्देशों का पालन करता है और पूरी तरह से वैध होता है, तो धनराशि बिना अनावश्यक देरी के जारी कर दी जाती है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/441.webp" alt="441" width="1280" height="720"></img>
hindi.news18.com

<p>अमरावती के लिए अलग से धनराशि निर्धारित करने के प्रश्न पर निर्मला सीतारमण ने कहा कि इस योजना के तहत अमरावती राजधानी के निर्माण के लिए कोई अलग राशि निर्धारित नहीं की गई है। हालांकि, राज्य सरकार अपने आवंटन के तहत अमरावती सहित किसी भी पूंजी परियोजना के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकती है।</p>
<p>राज्य के विभाजन के बाद हुए वित्तीय नुकसान के संबंध में सरकार ने बताया कि 2014-15 के लिए ₹16,078.76 करोड़ की पूरी ऑडिटेड राजस्व घाटा अनुदान राशि आंध्र प्रदेश को पहले ही जारी की जा चुकी है। इसके अलावा, 14वें वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित ₹22,112 करोड़ और 15वें वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित ₹36,394 करोड़ की राजस्व घाटा अनुदान राशि भी राज्य को पूरी तरह से जारी की जा चुकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 13:11:12 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सरकार ने माना- ई-20 से पुरानी गाड़ियों के कुछ पार्ट्स में खराबी आ सकती है; कितना खर्च आएगा, क्या इंजन को भी नुकसान होगा?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> देशभर में ई-20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल को लेकर बहस चल रही है। लंबे समय से चल रही बहस के बीच केंद्र सरकार ने पहली बार स्पष्ट किया है कि कुछ पुरानी बीएस-3 (BS-III) मानक वाली गाड़ियों में ई-20 के उपयोग से फ्यूल सिस्टम के कुछ रबर पार्ट्स और गैस्केट समय के साथ प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि सरकार का कहना है कि इससे इंजन बदलने की आवश्यकता नहीं होगी और नियमित सर्विसिंग के दौरान ऐसे पार्ट्स आसानी से बदले जा सकते हैं। </p>
<p>केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में लिखित उत्तर में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/business/the-government-admitted-that-e-20-may-cause-damage-to-some/article-2655"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-08/1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> देशभर में ई-20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल को लेकर बहस चल रही है। लंबे समय से चल रही बहस के बीच केंद्र सरकार ने पहली बार स्पष्ट किया है कि कुछ पुरानी बीएस-3 (BS-III) मानक वाली गाड़ियों में ई-20 के उपयोग से फ्यूल सिस्टम के कुछ रबर पार्ट्स और गैस्केट समय के साथ प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि सरकार का कहना है कि इससे इंजन बदलने की आवश्यकता नहीं होगी और नियमित सर्विसिंग के दौरान ऐसे पार्ट्स आसानी से बदले जा सकते हैं। </p>
<p>केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में लिखित उत्तर में बताया कि यह स्थिति मुख्य रूप से 1 अप्रैल 2005 से लागू बीएस-3 मानक के तहत बने और वर्ष 2016 से पहले निर्मित कुछ वाहनों में सामने आ सकती है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों में ई-20 ईंधन से इन वाहनों का परफॉर्मेंस या टिकाऊपन पर कोई बड़ा प्रतिकूल प्रभाव नहीं पाया गया है और इंजन में किसी प्रकार के संशोधन की जरूरत भी नहीं है। </p>
<p><strong>ई-20 पर इन-इन संस्थानों ने किए अध्ययन</strong></p>
<p>सरकार के अनुसार ई-20 पर अध्ययन इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया और सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चरर्स सहित कई संस्थानों ने किए हैं। इन अध्ययनों में दोपहिया और चारपहिया वाहनों के इंजन, ईंधन प्रणाली, उत्सर्जन, टिकाऊपन और अन्य तकनीकी पहलुओं का परीक्षण किया गया। </p>
<p><strong>गडकरी बोले- माइलेज केवल ईंधन से प्रभावित नहीं होता, ये भी कारण हैं</strong></p>
<p>गडकरी ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी वाहन का माइलेज केवल ईंधन के प्रकार पर निर्भर नहीं करता। ड्राइविंग शैली, सड़क की स्थिति, वाहन की देखभाल, टायर प्रेशर, ट्रैफिक और अन्य कई कारक भी ईंधन दक्षता को प्रभावित करते हैं। उन्होंने कहा कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग दुनिया के कई देशों में लंबे समय से किया जा रहा है।</p>
<p><strong>सरकार बोली- इन पार्ट्स पर पड़ सकता है असर</strong></p>
<p>सरकार के मुताबिक जिन वाहनों में असर की संभावना है, उनमें इंजन के बजाय फ्यूल सिस्टम से जुड़े कुछ रबर कंपोनेंट प्रभावित हो सकते हैं। इनमें फ्यूल होज, रबर पाइप, ओ-रिंग, गैस्केट, रबर सील, फ्यूल पंप के रबर हिस्से और इंजेक्टर सील शामिल हैं। ये सभी ऐसे पार्ट्स हैं जो लंबे समय तक एथेनॉल मिश्रित ईंधन के संपर्क में रहने पर अपनी मूल संरचना में बदलाव दिखा सकते हैं।</p>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार पुराने समय में प्रयुक्त कुछ रबर सामग्री को लंबे समय तक अधिक एथेनॉल वाले ईंधन के लिए डिजाइन नहीं किया गया था। ऐसे में समय के साथ रबर कठोर, मुलायम या फूला हुआ हो सकता है, जिससे रिसाव जैसी समस्या उत्पन्न होने की संभावना रहती है। यही कारण है कि जरूरत पड़ने पर इन पार्ट्स को बदलने की सलाह दी जाती है। </p>
<p><strong>क्या इंजन भी प्रभावित हो सकते हैं… </strong></p>
<p>सरकार ने स्पष्ट किया है कि बीएस-3 वाहनों के इंजन में किसी प्रकार का बदलाव कराने की आवश्यकता नहीं है। यदि नियमित सर्विसिंग के दौरान किसी रबर पार्ट में घिसावट, रिसाव या खराबी मिलती है तो उसे बदला जा सकता है। इसका कोई निश्चित समय या किलोमीटर तय नहीं है। यह पूरी तरह वाहन की स्थिति और उपयोग पर निर्भर करेगा। </p>
<p><strong>कितना खर्च आ सकता है पार्ट्स बदलने में</strong></p>
<p>वाहन और मॉडल के अनुसार ऐसे पार्ट्स बदलने का खर्च अलग-अलग हो सकता है। सामान्य तौर पर दोपहिया वाहनों में यह खर्च लगभग 500 से 1,500 रुपये तथा चारपहिया वाहनों में लगभग 2,000 से 8,000 रुपये तक हो सकता है। लग्जरी वाहनों में यह लागत अधिक हो सकती है।</p>
<p><strong>किन वाहनों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत</strong></p>
<p>संसद में दिए गए जवाब के अनुसार मुख्य रूप से बीएस-3 श्रेणी के वे वाहन, जो 2005 से 2016 के बीच बने हैं, इस श्रेणी में आते हैं। सरकार का कहना है कि नई पीढ़ी के वाहनों में ई-20 को ध्यान में रखकर सामग्री और तकनीक विकसित की गई है, जबकि पुराने वाहनों में कुछ रबर कंपोनेंट बदलने की जरूरत पड़ सकती है। </p>
<p><strong>सरकार बार-बार कह रही- परीक्षण के बाद लागू हुआ ई-20</strong></p>
<p>सरकार ने हाल ही में संसद में एक अन्य लिखित उत्तर में भी कहा था कि ई-20 कार्यक्रम चरणबद्ध और वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद लागू किया गया है। सरकार के अनुसार प्रयोगशाला परीक्षणों और फील्ड ट्रायल में ई-20 से इंजन की टिकाऊ क्षमता, ड्राइवेबिलिटी, उत्सर्जन, फ्यूल सिस्टम और सामग्री की अनुकूलता की जांच की गई थी। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भी हाल में कहा था कि सरकार को वाहन निर्माताओं, उपभोक्ता संगठनों या ऑटोमोबाइल एसोसिएशनों से ई-20 के कारण बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने या असामान्य घिसावट की कोई पुष्ट शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। मंत्रालय के अनुसार उपलब्ध परीक्षणों में पुराने वाहनों की कार्यक्षमता में भी कोई उल्लेखनीय गिरावट नहीं मिली।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 13:59:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रक्षाबंधन से पहले भारतीय डाक ने नए नियम जारी किए, स्पीड पोस्ट की दरों में किया बदलाव</title>
                                    <description><![CDATA[<p>त्योहारी सीज़न, खासकर रक्षाबंधन से पहले, भारतीय डाक विभाग ने लाखों ग्राहकों के लिए अपनी स्पीड पोस्ट सेवाओं से जुड़े नियमों और दरों में बड़े बदलाव किए हैं। विभाग ने अब स्पष्ट किया है कि किन वस्तुओं को 'दस्तावेज़' माना जाएगा और किन्हें 'पार्सल' श्रेणी में रखा जाएगा। इसके साथ ही, स्पीड पोस्ट सेवाओं के लिए नई रेट लिस्ट (टैरिफ संरचना) भी अधिसूचित की गई है। यदि आप अक्सर डाक के माध्यम से पत्र, आधिकारिक दस्तावेज़ या सामान भेजते हैं, तो शिपमेंट बुक करने से पहले इन नए नियमों को समझना बहुत ज़रूरी है। आइए आपको बताते हैं कि आखिर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/business/before-rakshabandhan-indian-post-issued-new-rules-and-changed-the/article-2646"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/india-post1.webp" alt=""></a><br /><p>त्योहारी सीज़न, खासकर रक्षाबंधन से पहले, भारतीय डाक विभाग ने लाखों ग्राहकों के लिए अपनी स्पीड पोस्ट सेवाओं से जुड़े नियमों और दरों में बड़े बदलाव किए हैं। विभाग ने अब स्पष्ट किया है कि किन वस्तुओं को 'दस्तावेज़' माना जाएगा और किन्हें 'पार्सल' श्रेणी में रखा जाएगा। इसके साथ ही, स्पीड पोस्ट सेवाओं के लिए नई रेट लिस्ट (टैरिफ संरचना) भी अधिसूचित की गई है। यदि आप अक्सर डाक के माध्यम से पत्र, आधिकारिक दस्तावेज़ या सामान भेजते हैं, तो शिपमेंट बुक करने से पहले इन नए नियमों को समझना बहुत ज़रूरी है। आइए आपको बताते हैं कि आखिर भारतीय डाक ने किस प्रकार की जानकारी जारी की है।</p>
<p>डाक विभाग ने पहली बार 'दस्तावेज़' की परिभाषा अधिसूचित की है, जिसमें पत्र, मुद्रित सामग्री और ऐसी सहायक वस्तुएं शामिल हैं जिनका कोई पुनर्विक्रय मूल्य नहीं है। ऐसी वस्तुओं पर कम डाक शुल्क लगेगा, जबकि अन्य सभी वस्तुएं 'पार्सल' श्रेणी के अंतर्गत आएँगी। इसके साथ ही विभाग ने खुदरा और थोक ग्राहकों के लिए ‘स्पीड पोस्ट 24’ और ‘स्पीड पोस्ट 48’ सेवाओं की दरें भी अधिसूचित की हैं। ये सेवाएँ क्रमशः 24 घंटे और 48 घंटे के भीतर डिलीवरी का वादा करती हैं।</p>
<p>अधिसूचना के अनुसार, बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा (BFSI) क्षेत्र से जुड़े उत्पाद—जैसे वेलकम किट, पत्र, पासबुक, चेकबुक, बैंक स्टेटमेंट, प्लास्टिक कार्ड और डेबिट/क्रेडिट कार्ड—को दस्तावेज़ के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा। इसके अलावा PAN कार्ड, आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे सरकारी दस्तावेज़ भी इसी श्रेणी में आएँगे। राखी के लिफाफे, पैकेट और शुभकामना कार्ड जैसे 500 ग्राम तक के गैर-व्यावसायिक पैकेटों को भी दस्तावेज़ माना जाएगा। अधिसूचना के अनुसार, ‘नोट-1’ में उल्लिखित वस्तुओं के अलावा सभी वस्तुएँ पार्सल श्रेणी के अंतर्गत भेजी जाएँगी।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/india-post2.webp" alt="india-post2" width="1280" height="720"></img>
businesstoday.in

<p><strong>शुल्क में किया गया बदलाव</strong></p>
<p>खुदरा ग्राहकों के लिए वर्तमान दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है; हालांकि, ‘दस्तावेज़’ श्रेणी में थोक बुकिंग के लिए नई दरें अधिसूचित की गई हैं।</p>
<p>1 अगस्त से, खुदरा ग्राहकों के लिए '24 घंटे स्पीड पोस्ट' सेवा का शुल्क वजन और दूरी के आधार पर प्रति पैकेट ₹38 से ₹186 तक होगा।</p>
<p>50 ग्राम से कम वजन वाले पैकेट के लिए स्थानीय डाक शुल्क ₹38 होगा, जबकि देशभर में भेजने के लिए यह ₹94 (GST अतिरिक्त) होगा।</p>
<p>अधिसूचना के अनुसार, 51–250 ग्राम के लिए प्रति पैकेट ₹118–₹154 और 251–500 ग्राम के लिए प्रति पैकेट ₹140–₹186 डाक शुल्क निर्धारित किया गया है।</p>
<p>वहीं, थोक ग्राहकों के लिए 24 घंटे स्पीड पोस्ट सेवा का शुल्क ₹38 से ₹100 और 48 घंटे की सेवा के लिए ₹48 से ₹72 तक रहेगा।</p>
<p>डाक विभाग ने बताया कि '48 घंटे स्पीड पोस्ट' सेवा के तहत खुदरा ग्राहकों से वजन और गंतव्य के आधार पर प्रति पैकेट ₹61 से ₹121 तक शुल्क लिया जाएगा।</p>
<p>वर्तमान में 24 घंटे और 48 घंटे की स्पीड पोस्ट सेवाएँ देश के केवल छह शहरों—दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद—में ही उपलब्ध हैं।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/india-post.webp" alt="india-post" width="1280" height="720"></img>
english.mathrubhumi.com

<p><strong>भारतीय डाक का उद्देश्य</strong></p>
<p>डाक विभाग की इस पहल का उद्देश्य स्पीड पोस्ट सेवा को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और कुशल बनाना है। अब, जब भी आप स्पीड पोस्ट के माध्यम से कोई डाक भेजें, तो यह ध्यान रखें कि यदि लिफाफे में कागज़ के अलावा कोई भी वस्तु होगी, तो उसकी बुकिंग पार्सल के रूप में की जाएगी। सही जानकारी और उचित श्रेणी के साथ बुकिंग कराने से आपकी डाक बिना किसी बाधा के समय पर अपने गंतव्य तक पहुँच जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 12:14:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लिस्टिंग होते ही इस कंपनी के शेयर में 500% की उछाल, चीन से है संबंध</title>
                                    <description><![CDATA[<p>जब भारतीय IPO बाज़ार में एक के बाद एक इश्यू लॉन्च हो रहे हैं, वहीं विदेशों में भी सभी IPO शेयर बाज़ार में निवेशकों को मालामाल कर रहे हैं। इसी बीच, एक IPO चर्चा में है, जो सोमवार को शंघाई स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध हुआ, और मज़बूत शुरुआत के बाद कंपनी के शेयर की कीमत में अचानक लगभग 500% की बढ़ोतरी हो गई। इस रॉकेट जैसी तेज़ी के कारण चीनी कंपनी में निवेश करने वाले निवेशकों की संपत्ति में एक झटके में भारी बढ़ोतरी हुई है।</p>
<p>रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी चिप निर्माता कंपनी CXMT Corp ने अपने IPO</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/business/this-companys-shares-jumped-by-rs-500-as-soon-as/article-2639"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/cxmt5.webp" alt=""></a><br /><p>जब भारतीय IPO बाज़ार में एक के बाद एक इश्यू लॉन्च हो रहे हैं, वहीं विदेशों में भी सभी IPO शेयर बाज़ार में निवेशकों को मालामाल कर रहे हैं। इसी बीच, एक IPO चर्चा में है, जो सोमवार को शंघाई स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध हुआ, और मज़बूत शुरुआत के बाद कंपनी के शेयर की कीमत में अचानक लगभग 500% की बढ़ोतरी हो गई। इस रॉकेट जैसी तेज़ी के कारण चीनी कंपनी में निवेश करने वाले निवेशकों की संपत्ति में एक झटके में भारी बढ़ोतरी हुई है।</p>
<p>रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी चिप निर्माता कंपनी CXMT Corp ने अपने IPO के लिए 8.66 युआन का प्राइस बैंड तय किया था, और शंघाई स्टॉक एक्सचेंज में इसकी लिस्टिंग ज़बरदस्त प्रीमियम पर हुई। इतना ही नहीं, बल्कि लिस्टिंग के बाद CXMT के शेयर रॉकेट की तरह उछले और तेज़ी से बढ़ते हुए लगभग 500% की छलांग के साथ 55.02 युआन के उच्च स्तर तक पहुँच गए। अंत में रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ने के बावजूद, चिप कंपनी का शेयर 465.82% की बढ़त के साथ 49 युआन पर बंद हुआ।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/cxmt4.webp" alt="cxmt4" width="1280" height="720"></img>
bbc.com

<p>चांगशिन मेमोरी टेक्नोलॉजीज़ (CXMT) की लिस्टिंग के साथ इसमें निवेश करने वालों पर मानो पैसों की बारिश हो गई। इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि चीन के सबसे बड़े मेमोरी चिप निर्माता का बाज़ार मूल्यांकन लगभग 3.3 ट्रिलियन युआन ($487 बिलियन) तक पहुँच गया है। इसके साथ ही यह मुख्य भूमि चीन की सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनी बन गई है। खास बात यह है कि पिछले कुछ दिनों में दुनिया भर में IT कंपनियों के शेयरों में अस्थिरता देखने को मिली है, फिर भी CXMT को शानदार शुरुआत मिली है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/cxmt1.webp" alt="cxmt1" width="1280" height="720"></img>
news.cgtn.com

<p>CXMT की स्थापना 2016 में झू यिमिंग द्वारा की गई थी और इसका मुख्यालय पूर्वी चीन के आनहुई प्रांत के हेफ़ेई में स्थित है। कंपनी डायनेमिक रैंडम-एक्सेस मेमोरी (DRAM) चिप्स का निर्माण करती है, जिनका उपयोग AI डेटा सेंटर, मोबाइल फोन, PC, टैबलेट और अन्य उपकरणों में किया जाता है। विश्लेषकों का कहना है कि स्टॉक की मांग आपूर्ति से अधिक होने के कारण यह ज़बरदस्त उछाल आया है। मज़बूत लिस्टिंग और उसके बाद शेयर की कीमत में तेज़ बढ़ोतरी के कारण यिमिंग की संपत्ति में भी भारी इज़ाफ़ा हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 17:31:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बदल रहा है हमारा भारत… देश में पांच साल में चार गुना बढ़ गए अरबपति, अब 576 लोग अमीर; सरकार यह कैसे पता करती है?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> टैक्स के मोर्चे पर देश के लिए एक अच्छी खबर आई है। दरअसल, अति-उच्च आय वर्ग के करदाताओं की संख्या पिछले पांच वर्षों में तेजी से बढ़ी है। इससे यह पता चलता है कि देश में लोग टैक्स भरने के मामले में ज्यादा जागरूक हुए हैं। देश की प्रगति और उन्नति के लिए यह जरूरी है। संसद में सरकार ने बताया कि असेसमेंट ईयर 2025-26 के लिए दाखिल आयकर रिटर्न यानी आईटीआर में 576 व्यक्तियों ने अपनी ग्रॉस टोटल इनकम 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक घोषित की है। पांच वर्ष पहले यानी वित्तीय वर्ष 2021-22 में ऐसे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/business/our-india-is-changing%E2%80%A6-billionaires-in-the-country-have-increased/article-2640"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/116.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> टैक्स के मोर्चे पर देश के लिए एक अच्छी खबर आई है। दरअसल, अति-उच्च आय वर्ग के करदाताओं की संख्या पिछले पांच वर्षों में तेजी से बढ़ी है। इससे यह पता चलता है कि देश में लोग टैक्स भरने के मामले में ज्यादा जागरूक हुए हैं। देश की प्रगति और उन्नति के लिए यह जरूरी है। संसद में सरकार ने बताया कि असेसमेंट ईयर 2025-26 के लिए दाखिल आयकर रिटर्न यानी आईटीआर में 576 व्यक्तियों ने अपनी ग्रॉस टोटल इनकम 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक घोषित की है। पांच वर्ष पहले यानी वित्तीय वर्ष 2021-22 में ऐसे करदाताओं की संख्या केवल 142 थी। इस तरह देखा जाए तो इस श्रेणी में आने वाले लोगों की संख्या लगभग चार गुना हो गई है। यह देश की मजबूत आर्थिक स्थिति के लिए जरूरी है।</p>
<p>बता दें कि लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने स्पष्ट किया कि आयकर अधिनियम, 2025 तथा पूर्ववर्ती आयकर अधिनियम, 1961 में  अरबपति शब्द की कोई कानूनी परिभाषा नहीं है। इसलिए सरकार करदाताओं को अरबपति की श्रेणी में वर्गीकृत नहीं करती, बल्कि आयकर रिटर्न में घोषित आय के आधार पर ही आंकड़े उपलब्ध हैं। सरकार के अनुसार, 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक आय घोषित करने वालों की संख्या में हर वर्ष उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला। वित्तीय वर्ष 2022-23 में यह संख्या 301 रही, जो 2023-24 में घटकर 284 हो गई। इसके बाद वित्तीय 2024-25 में यह बढ़कर 415 और 2025-26 में 576 तक पहुंच गई। यानी पिछले एक वर्ष में ही इस श्रेणी में 161 नए करदाता जुड़े हैं। </p>
<p><strong>क्या सरकार के पास अरबपतियों की संपत्ति का आधिकारिक रिकॉर्ड रहता है</strong></p>
<p>इसका जवाब है नहीं। केंद्र सरकार ने भी स्पष्ट किया कि उसके पास देश के उच्च आय वर्ग या करदाताओं की कुल संपत्ति (नेटवर्थ) का कोई आधिकारिक या समेकित डेटा उपलब्ध नहीं है। इसका कारण यह बताया गया कि संपत्ति कर अधिनियम, 1957 को 1 अप्रैल 2016 से समाप्त कर दिया गया था। इसके बाद से सरकार करदाताओं की कुल संपत्ति का अलग से रिकॉर्ड नहीं रखती। इसलिए संसद में उपलब्ध जानकारी केवल आयकर रिटर्न में घोषित आय तक सीमित है। </p>
<p><strong>अमीर बढ़े लेकिन देश में बेरोजगारी की स्थिति क्या है</strong></p>
<p>सरकार ने इसी संदर्भ में उच्च आय वर्ग की बढ़ती संख्या के साथ अन्य आर्थिक संकेतकों का भी उल्लेख किया। वित्त राज्य मंत्री के अनुसार, पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे के आंकड़ों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की बेरोजगारी दर 2022 के 3.6% से घटकर 2025 में 3.1% रह गई है। सरकार का दावा है कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों का श्रम बाजार कोविड-पूर्व स्तर से बेहतर स्थिति में पहुंच चुका है। </p>
<p>इसी प्रकार, घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण 2023-24 का हवाला देते हुए सरकार ने कहा कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच उपभोग असमानता में कमी आई है। सर्वे के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों का गिनी गुणांक 0.237 और शहरी क्षेत्रों का 0.284 दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में कम है। गिनी गुणांक में कमी को आय और उपभोग संबंधी असमानता घटने का संकेत माना जाता है। </p>
<p><strong>सरकार का दावा- 13.5 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले</strong></p>
<p>वहीं, सरकार ने नीति आयोग के राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक का हवाला देते हुए कहा कि 2015-16 से 2019-21 के बीच देश में बहुआयामी गरीबी का अनुपात 24.85% से घटकर 14.96% रह गया। इस अवधि में करीब 13.5 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आए। साथ ही सरकार ने कहा कि आय असमानता कम करने के लिए अधिक आय वाले व्यक्तियों पर सामान्य आयकर के अतिरिक्त सरचार्ज लगाया जाता है तथा रोजगार सृजन और समावेशी विकास के लिए विभिन्न सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 12:57:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब E20 के खिलाफ आने वाला है एक बड़ा आंदोलन! टैक्सी यूनियनें 4 अगस्त को संसद का घेराव करने की तैयारी में</title>
                                    <description><![CDATA[<p>जंतर-मंतर पर 36 दिनों से चल रहे छात्रों और GenZ के विरोध प्रदर्शन के बाद, अब इथेनॉल के खिलाफ एक बड़े आंदोलन की तैयारियां चल रही हैं। देश में 20 प्रतिशत इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल (E20 ईंधन) के उपयोग को लेकर ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट (AITP) टैक्सी ड्राइवरों और ट्रांसपोर्टरों की नाराज़गी अब सड़कों पर उतर रही है। दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एंड टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ने E20 पेट्रोल नीति, वाहनों के माइलेज में कमी और कड़े नियमों के विरोध में 4 अगस्त को संसद की ओर मार्च करने की घोषणा की है।</p>
<p>शुक्रवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एसोसिएशन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/business/now-a-big-movement-is-going-to-come-against-e20/article-2630"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/0420.webp" alt=""></a><br /><p>जंतर-मंतर पर 36 दिनों से चल रहे छात्रों और GenZ के विरोध प्रदर्शन के बाद, अब इथेनॉल के खिलाफ एक बड़े आंदोलन की तैयारियां चल रही हैं। देश में 20 प्रतिशत इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल (E20 ईंधन) के उपयोग को लेकर ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट (AITP) टैक्सी ड्राइवरों और ट्रांसपोर्टरों की नाराज़गी अब सड़कों पर उतर रही है। दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एंड टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ने E20 पेट्रोल नीति, वाहनों के माइलेज में कमी और कड़े नियमों के विरोध में 4 अगस्त को संसद की ओर मार्च करने की घोषणा की है।</p>
<p>शुक्रवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सम्राट और अन्य सदस्यों ने ट्रांसपोर्टरों के सामने आने वाली समस्याओं को मीडिया के सामने रखा। उन्होंने विरोध के प्रतीक के रूप में गन्ना हाथ में पकड़ रखा था।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/05131.webp" alt="0513" width="1280" height="720"></img></p>
<p>प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सम्राट ने E20 ईंधन को लेकर वाहन मालिकों और ड्राइवरों की मुख्य शिकायतों की सूची पेश की।</p>
<p><strong>माइलेज में कमी और रखरखाव खर्च में वृद्धि:</strong> देशभर के ड्राइवरों ने शिकायत की है कि 20 प्रतिशत इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहनों का माइलेज कम हुआ है और इंजन के रखरखाव का खर्च बढ़ गया है।</p>
<p><strong>2015 से पुराने वाहनों के लिए अनुपयुक्त:</strong> उन्होंने कहा, "2015 से पहले निर्मित अधिकांश वाहन 20 प्रतिशत इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल के साथ अनुकूल नहीं हैं। यह ईंधन मुख्य रूप से केवल नए मॉडलों के लिए उपयुक्त है। जब लोग पेट्रोल की पूरी कीमत चुका रहे हैं और ईंधन महंगा होता जा रहा है, तो उन्हें मिलावटी पेट्रोल क्यों दिया जा रहा है?"</p>
<p>एसोसिएशन ने वाहन मालिकों, उपभोक्ता अधिकार समूहों, वाहन निर्माताओं और तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल करते हुए इस नीति की निष्पक्ष और स्वतंत्र वैज्ञानिक समीक्षा की मांग की है।</p>
<p>एसोसिएशन के सदस्य जितेंद्र बॉबी ने भी वाणिज्यिक पर्यटन वाहनों के लिए 80 Km/h की गति सीमा पर कड़ा विरोध जताया।</p>
<p>उन्होंने कहा, "एक ओर जहां निजी वाहनों को आधुनिक एक्सप्रेसवे और हाईवे पर अधिक गति से चलने की अनुमति है, वहीं ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट (AITP) वाली वाणिज्यिक टैक्सियों और बसों पर 80 Km/h की सीमा लागू की गई है। इससे हमारे व्यवसाय, समय और ग्राहक संतुष्टि पर असर पड़ रहा है।"</p>
<p><strong><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/068.webp" alt="068" width="1280" height="720"></img></strong></p>
<p><strong>ट्रांसपोर्टरों की 6 प्रमुख मांगें</strong></p>
<ul>
<li><strong>E20 नीति की निष्पक्ष समीक्षा:</strong> इथेनॉल मिश्रण नीति की स्वतंत्र तकनीकी और वैज्ञानिक जांच।</li>
<li><strong> पैनिक बटन और VLTD की जांच: </strong>अनिवार्य पैनिक बटन और वाहन लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) के कार्यान्वयन तथा उसमें हुई अनियमितताओं का ऑडिट/जांच की जाए।</li>
<li><strong>गति सीमा में राहत:</strong> पर्यटन वाणिज्यिक वाहनों के लिए 80 Km/h की गति सीमा पर पुनर्विचार किया जाए।</li>
<li><strong>वाहन स्क्रैपेज नीति पर पुनर्विचार:</strong> पुराने वाहनों को जबरन स्क्रैप करने की नीति की समीक्षा की जाए।</li>
<li><strong>BS-IV डीज़ल वाहनों पर लगेप्रतिबंध हटाए जाएं:</strong> BS-IV डीज़ल पर्यटन वाहनों पर लगे प्रतिबंधों में सुधार किया जाए।</li>
<li><strong>टोल टैक्स में राहत:</strong> राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगाए जाने वाले अत्यधिक टोल टैक्स में कमी की जाए।</li>
</ul>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/0237.webp" alt="0237" width="1280" height="720"></img></p>
<p>संजय सम्राट ने स्पष्ट किया कि 4 अगस्त को होने वाला संसद मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण और गैर-राजनीतिक होगा।</p>
<p>उन्होंने कहा, 'हम किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं हैं। यह पूरी तरह वाणिज्यिक वाहन चालकों और मालिकों के अस्तित्व की लड़ाई है। हम केंद्र और राज्य सरकारों से अपील करते हैं कि वे सभी हितधारकों के साथ सकारात्मक संवाद शुरू करें और हमारी समस्याओं का समाधान खोजें।'</p>
<p>एसोसिएशन ने देश की अन्य टैक्सी, कैब और ट्रक यूनियनों से भी इस मार्च में शामिल होने की अपील की है, जिसमें हजारों ड्राइवरों के भाग लेने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 20:25:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एलआईसी ने 60 लाख रुपये का क्लेम किया खारिज, कोर्ट ने ब्याज सहित भुगतान का दिया आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को देश की सबसे विश्वसनीय संस्थाओं में से एक माना जाता है; लोग अपने जीवनकाल में और उसके बाद भी LIC को याद रखते हैं। हालांकि, मुंबई निवासी जयश्री गंभीर का LIC के साथ अनुभव अच्छा नहीं रहा। उनके पुत्र नितिन की हृदयाघात से मृत्यु हो गई, जिसके बाद LIC ने 60 लाख रुपये का क्लेम खारिज कर दिया। जयश्री को महाराष्ट्र राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का दरवाजा खटखटाना पड़ा, लेकिन उन्हें राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग से राहत मिली।</p>
<p>13 वर्षों तक चली कानूनी लड़ाई के बाद राष्ट्रीय उपभोक्ता मंच ने LIC को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/business/-draft--add-your-title/article-2616"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/lic.webp" alt=""></a><br /><p>भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को देश की सबसे विश्वसनीय संस्थाओं में से एक माना जाता है; लोग अपने जीवनकाल में और उसके बाद भी LIC को याद रखते हैं। हालांकि, मुंबई निवासी जयश्री गंभीर का LIC के साथ अनुभव अच्छा नहीं रहा। उनके पुत्र नितिन की हृदयाघात से मृत्यु हो गई, जिसके बाद LIC ने 60 लाख रुपये का क्लेम खारिज कर दिया। जयश्री को महाराष्ट्र राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का दरवाजा खटखटाना पड़ा, लेकिन उन्हें राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग से राहत मिली।</p>
<p>13 वर्षों तक चली कानूनी लड़ाई के बाद राष्ट्रीय उपभोक्ता मंच ने LIC को 60 लाख रुपये का क्लेम चुकाने का आदेश दिया है। मानसिक पीड़ा के लिए 1 लाख रुपये का मुआवजा और मुकदमे के खर्च के लिए 50,000 रुपये भी चुकाने होंगे। LIC को 12 वर्षों की अवधि के लिए क्लेम राशि पर 9% ब्याज भी देना होगा।</p>
<p>मुंबई निवासी नितिन सुरेश गंभीर ने जून 2010 में LIC के पास पाँच जीवन बीमा पॉलिसियों के लिए आवेदन किया था। LIC ने अपने पैनल डॉक्टरों से चिकित्सीय जांच कराने के बाद पाँचों पॉलिसियाँ जारी की थीं। इनमें से 10 लाख रुपये, 15 लाख रुपये और 15 लाख रुपये की तीन पॉलिसियाँ 26 अगस्त 2010 को जारी की गई थीं। शेष 10-10 लाख रुपये की दो पॉलिसियों के लिए उनके परिवार ने 7 सितंबर 2010 को पहला प्रीमियम जमा किया था। हालांकि, LIC का कहना था कि उसे पहला प्रीमियम 13 सितंबर को प्राप्त हुआ था, इसलिए उसी तारीख से जोखिम कवरेज शुरू हुई थी।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/lic1.webp" alt="lic1" width="1280" height="720"></img>
businesstoday.in

<p>इस बीच, नितिन को 11 सितंबर 2010 को पी.डी. हिंदुजा नेशनल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। वहाँ पता चला कि उन्हें पिछले दो महीनों से मधुमेह (डायबिटीज) था, जिसके कारण उनके पैर का घाव भर नहीं रहा था। उनका इलाज चला और 13 सितंबर 2010 को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अस्पताल से छुट्टी मिलने के लगभग तीन वर्ष बाद, 11 जून 2013 को नितिन की हृदयाघात के कारण मृत्यु हो गई। इसके बाद उनकी माँ जयश्री गंभीर ने पाँचों पॉलिसियों के तहत क्लेम किया। LIC ने सभी क्लेम खारिज कर दिए। कंपनी का कहना था कि नितिन ने आवेदन पत्र में यह जानकारी नहीं दी थी कि बीमा लेने से पहले उन्हें मधुमेह था।</p>
<p>क्लेम खारिज होने के बाद नितिन की माँ जयश्री सुरेश गंभीर ने महाराष्ट्र राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का दरवाजा खटखटाया। वहाँ अदालत ने कहा कि LIC को 26 अगस्त 2010 को तीन पॉलिसियों के लिए प्रारंभिक प्रीमियम प्राप्त हो गया था और उसी दिन से जोखिम कवरेज शुरू हो गई थी। जबकि नितिन को 13 सितंबर को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसलिए पहली तीन पॉलिसियों के तहत 40 लाख रुपये का क्लेम दिया जाना चाहिए। हालांकि, राज्य आयोग ने बाकी दो पॉलिसियों के क्लेम खारिज कर दिए।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/court.webp" alt="court" width="1280" height="720"></img>
wilsonllp.co.uk

<p>राज्य उपभोक्ता मंच के फैसले से LIC और जयश्री सुरेश गंभीर दोनों असंतुष्ट थे, इसलिए उन्होंने राष्ट्रीय उपभोक्ता मंच का रुख किया। अध्यक्ष सदस्य डॉ. इंद्रजीत सिंह और सदस्य शशि नंदकोयलकर की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने कहा कि LIC ऐसा कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सकी जिससे यह साबित हो सके कि नितिन को प्रस्ताव पत्र भरने से पहले मधुमेह था। साथ ही, उनके पैर के घाव का हृदयाघात से कोई संबंध नहीं था।</p>
<p>फोरम ने कहा कि बाद की दो पॉलिसियों के लिए पहली प्रीमियम रसीद पर भले ही 13 सितंबर 2010 की तारीख लिखी हो, लेकिन उसमें स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया गया है कि प्रीमियम की राशि उसी दिन प्राप्त हुई थी। आयोग ने LIC को पाँचों पॉलिसियों के तहत कुल 60 लाख रुपये की क्लेम राशि का भुगतान करने का आदेश दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 18:40:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इंजन खराब, माइलेज कम... क्या एथेनॉल का प्रतिशत बढ़ेगा? E20 पेट्रोल को लेकर संसद में सरकार ने दिया जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पिछले कुछ दिनों से E20 पेट्रोल को लेकर चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक, हर जगह एथेनॉल मिश्रण को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब यह मुद्दा संसद तक पहुंच गया है। किसी ने माइलेज कम होने की बात कही तो किसी ने वाहन के कंपोनेंट्स को नुकसान होने की शिकायत की है। अगर आप भी सोच रहे हैं कि क्या E20 पेट्रोल आपकी बाइक या कार के इंजन पर प्रतिकूल असर डाल सकता है, तो केंद्र सरकार ने इस पर बड़ा जवाब दिया है।</p>
<p>सरकार का कहना है कि ऐसा कोई ठोस सबूत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/business/%E0%A4%87%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%A8-%E0%A4%96%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AC--%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A4%AE----%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%8F%E0%A4%A5%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%89%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A4%A4-%E0%A4%AC%E0%A4%A2%E0%A4%BC%E0%A5%87%E0%A4%97%E0%A4%BE--e20-%E0%A4%AA%E0%A5%87%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A4%A6-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AC/article-2611"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/e20-petrol.webp" alt=""></a><br /><p>पिछले कुछ दिनों से E20 पेट्रोल को लेकर चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक, हर जगह एथेनॉल मिश्रण को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब यह मुद्दा संसद तक पहुंच गया है। किसी ने माइलेज कम होने की बात कही तो किसी ने वाहन के कंपोनेंट्स को नुकसान होने की शिकायत की है। अगर आप भी सोच रहे हैं कि क्या E20 पेट्रोल आपकी बाइक या कार के इंजन पर प्रतिकूल असर डाल सकता है, तो केंद्र सरकार ने इस पर बड़ा जवाब दिया है।</p>
<p>सरकार का कहना है कि ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है जो यह दिखाता हो कि E20 पेट्रोल इंजन को नुकसान पहुंचाता है। इतना ही नहीं, फिलहाल पेट्रोल में एथेनॉल का प्रतिशत 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। सरकार का कहना है कि भविष्य में E20 से आगे बढ़ने पर विचार किया जाएगा तो वह केवल वैज्ञानिक जांच, वाहन कंपनियों से परामर्श और सभी आवश्यक परीक्षण पूरे होने के बाद ही किया जाएगा। इस प्रकार, सरकार ने E20 पेट्रोल को लेकर चल रही विभिन्न अटकलों पर अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है।</p>
<p>सोमवार को राज्यसभा में पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि देश में एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम को पूरी तरह वैज्ञानिक तरीके से और चरणबद्ध योजना के साथ लागू किया गया है। इस प्रक्रिया में नीति आयोग, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM), इंडियन ऑयल, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और वाहन निर्माताओं ने मिलकर काम किया है।</p>
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madhyamamonline.com

<p>सरकार का कहना है कि भारत ने निर्धारित समय से लगभग पांच वर्ष पहले 20 प्रतिशत एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य हासिल कर लिया है। इसके पीछे दो दशकों से अधिक की तैयारी, वैज्ञानिक अनुसंधान, सभी पक्षों से परामर्श और आवश्यक अवसंरचना तैयार करने की प्रक्रिया रही है।</p>
<p><strong>इंजन खराब होने पर सरकार ने क्या कहा</strong></p>
<p>सरकार के अनुसार, अब तक वाहन निर्माता कंपनियों, ऑटोमोबाइल संगठनों या उपभोक्ता संगठनों की ओर से E20 पेट्रोल के कारण इंजन खराब होने, ईंधन पंप में समस्या, जंग लगने, माइलेज में कमी, पानी मिलने या अन्य बड़ी तकनीकी समस्याओं के संबंध में कोई प्रमाणित या बड़े पैमाने की शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।</p>
<p>सुरेश गोपी ने बताया कि मीडिया और सोशल मीडिया पर उठाई गई इन सभी चिंताओं की वैज्ञानिक तरीके से जांच की गई। लैब टेस्ट, फील्ड ट्रायल और वास्तविक परिस्थितियों में यह पाया गया कि स्थापित मानकों के अनुसार उपयोग किए जाने पर E20 पेट्रोल पूरी तरह सुरक्षित है। पुराने वाहनों में भी इसके उपयोग से प्रदर्शन में कोई बड़ा बदलाव या कंपोनेंट्स को नुकसान नहीं देखा गया।</p>
<p>सरकार ने बताया है कि पिछले साढ़े तीन वर्षों से देश में 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से अधिक पेट्रोल कारें E15+ पेट्रोल पर चल रही हैं। वहीं, ढाई वर्ष से अधिक समय से E19 और E20 पेट्रोल का उपयोग हो रहा है। इसके बावजूद इंजन खराब होने या एथेनॉल के कारण बड़ी तकनीकी समस्याओं का कोई भी पुष्टि किया गया मामला सामने नहीं आया है। सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा कि ऐसी समस्याओं को लेकर राज्यवार शिकायतों का रिकॉर्ड शून्य है।</p>
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zeebiz.com

<p><strong>पानी की मिलावट पर सरकार का जवाब</strong></p>
<p>E20 पेट्रोल में पानी मिलने की चिंताओं पर सरकार ने कहा कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने इस संबंध में वाहन चालकों के लिए कोई सलाह जारी नहीं की है। इसका कारण यह है कि सभी पेट्रोल की आपूर्ति ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार की जाती है। सरकार के अनुसार, ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल की खरीद, एथेनॉल मिश्रण, भंडारण, परिवहन और पेट्रोल पंप तक आपूर्ति की पूरी प्रक्रिया में कड़े नियमों का पालन करती हैं। डिस्टिलरी, डिपो और पेट्रोल पंपों पर भी नियमित गुणवत्ता जांच की जाती है।</p>
<p>सरकार ने बताया कि पिछले 10 से 20 दिनों में मिली शिकायतों के आधार पर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने देशभर के पेट्रोल पंपों पर 30,000 से अधिक गुणवत्ता जांच की हैं। इसका उद्देश्य मिलावट रोकना और यह सुनिश्चित करना था कि केवल निर्धारित मानकों को पूरा करने वाला पेट्रोल ही ग्राहकों तक पहुंचे। इसके साथ ही राज्यों से ईंधन में मिलावट के संबंध में शून्य-सहिष्णुता नीति अपनाने को कहा गया है।</p>
<p>अगर सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले दशक में भारत में एथेनॉल मिश्रण तेजी से बढ़ा है। 2013-14 में पेट्रोल में औसत एथेनॉल मिश्रण केवल 1.53 प्रतिशत था। यह आंकड़ा 2020-21 में 8.2 प्रतिशत, 2021-22 में 10 प्रतिशत, 2022-23 में 12 प्रतिशत और 2023-24 में 14.6 प्रतिशत हो गया। इसके बाद 2024-25 में यह 19.2 प्रतिशत तक पहुंच गया। वहीं, 2025-26 की अवधि में नवंबर और जून के बीच देश ने 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल किया, जिसे सरकार ने निर्धारित समय से लगभग पांच वर्ष पहले प्राप्त करने का दावा किया है।</p>
<p>सरकार ने यह भी कहा कि एथेनॉल कोई नया ईंधन नहीं है; इसका उपयोग दुनिया के कई देशों में एक सदी से अधिक समय से किया जा रहा है। ब्राज़ील जैसे देशों में लंबे समय से अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन का उपयोग किया जा रहा है। भारत का एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम 2021 में एक पायलट परियोजना के रूप में शुरू हुआ था। E5 पेट्रोल 2006 में पेश किया गया था, और उसके बाद उत्पादन क्षमता, अवसंरचना और नियमों में धीरे-धीरे सुधार के माध्यम से देश E10, E15 और अब E20 तक पहुंचा है। सरकार का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया वैज्ञानिक अनुसंधान और लगातार निगरानी के आधार पर आगे बढ़ी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 21:42:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>13 साल पहले शुरू हुआ था एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल, तब केवल 1.5 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, आज बढ़कर 20 प्रतिशत पहुंच गया, आगे क्या?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> देशभर में E20 (20% एथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल को लेकर चल रही आशंकाओं के बीच एक बार फिर केंद्र सरकार ने संसद में स्पष्ट किया है कि अब तक ऐसा कोई प्रमाण या पुख्ता रिपोर्ट सामने नहीं आई है, जिससे यह साबित हो कि E20 पेट्रोल की वजह से वाहनों के इंजन खराब हो रहे हैं या बड़े पैमाने पर वाहन रास्ते में बंद पड़ रहे हैं। सरकार के अनुसार, 23 करोड़ से अधिक वाहनों के संचालन के अनुभव, ऑटोमोबाइल कंपनियों के सर्विस रिकॉर्ड और वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया है कि E20 ईंधन से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/business/ethanol-mixed-petrol-was-started-13-years-ago-then-the/article-2601"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/111.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> देशभर में E20 (20% एथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल को लेकर चल रही आशंकाओं के बीच एक बार फिर केंद्र सरकार ने संसद में स्पष्ट किया है कि अब तक ऐसा कोई प्रमाण या पुख्ता रिपोर्ट सामने नहीं आई है, जिससे यह साबित हो कि E20 पेट्रोल की वजह से वाहनों के इंजन खराब हो रहे हैं या बड़े पैमाने पर वाहन रास्ते में बंद पड़ रहे हैं। सरकार के अनुसार, 23 करोड़ से अधिक वाहनों के संचालन के अनुभव, ऑटोमोबाइल कंपनियों के सर्विस रिकॉर्ड और वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया है कि E20 ईंधन से व्यापक स्तर पर इंजन फेल होने जैसी समस्या नहीं देखी गई है। हालांकि, कुछ पुराने वाहनों में माइलेज 3 से 5 प्रतिशत तक कम हो सकता है।</p>
<p>राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि देश में 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें वर्तमान में E20 ईंधन का उपयोग कर रही हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे वाहनों की भी है, जिन्हें E20 मानक लागू होने से पहले बनाया गया था। इसके बावजूद उपलब्ध डेटा में एथेनॉल मिश्रण के कारण इंजन फेल होने, फ्यूल पंप खराब होने, जंग लगने या बड़े पैमाने पर वाहन ब्रेकडाउन की पुष्टि नहीं हुई है। </p>
<p><strong>E20 कोई अचानक लागू नहीं हुआ, 13 साल से चल रहा सिलसिला</strong></p>
<p>सरकार ने संसद में कहा कि E20 कोई अचानक लागू किया गया ईंधन नहीं है। भारत में एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम की शुरुआत पायलट स्तर पर वर्ष 2001 में हुई थी और इसके बाद वैज्ञानिक परीक्षणों, तकनीकी मूल्यांकन तथा ऑटोमोबाइल उद्योग, तेल विपणन कंपनियों और अन्य हितधारकों से लगातार चर्चा के बाद इसे आगे बढ़ाया गया। वर्ष 2013-14 में पेट्रोल में एथेनॉल की हिस्सेदारी केवल 1.53 प्रतिशत थी, जिसे चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर 2025-26 में 20 प्रतिशत तक पहुंचाया गया। </p>
<p><strong>सरकार का दावा- सर्विस रिकॉर्ड में भी E20 से नुकसान का कोई जिक्र नहीं</strong></p>
<p>सरकार के मुताबिक, एक प्रमुख चारपहिया वाहन निर्माता कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की। इनमें लगभग 1.5 करोड़ वाहन ऐसे थे, जिन्हें E20 के अनुरूप डिजाइन नहीं किया गया था। इसके बावजूद कंपनी के रिकॉर्ड में E20 पेट्रोल के कारण इंजन या फ्यूल सिस्टम को नुकसान पहुंचने की कोई पुष्टि नहीं हुई। इसी तरह, एक बड़ी दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी के सर्विस डेटा का विश्लेषण करने पर भी E20 ईंधन इस्तेमाल करने वाले वाहनों में पहले की तुलना में किसी अलग तरह की खराबी या असामान्य तकनीकी समस्या दर्ज नहीं की गई। सरकार का कहना है कि यदि E20 से वास्तव में बड़े स्तर पर नुकसान हो रहा होता तो वारंटी क्लेम, सर्विस अभियान और उपभोक्ताओं की शिकायतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दिखाई देती, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।</p>
<p><strong>लेकिन सरकार ने यह मना- माइलेज में मामूली कमी संभव</strong></p>
<p>सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि जिन वाहनों को E10 (10 प्रतिशत एथेनॉल) के हिसाब से डिजाइन किया गया था, उनमें E20 ईंधन इस्तेमाल करने पर माइलेज में लगभग 3 से 5 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। हालांकि, सरकार का कहना है कि किसी भी वाहन की वास्तविक फ्यूल एफिशिएंसी ड्राइविंग स्टाइल, सड़क की स्थिति, ट्रैफिक और वाहन के रखरखाव पर भी निर्भर करती है। इसलिए हर वाहन में माइलेज पर समान असर नहीं पड़ता। <br />E20 पर सरकार का जोर क्यों, यह भी जानना जरूरी है<br />सरकार के अनुसार E20 ईंधन के कई तकनीकी और पर्यावरणीय लाभ भी हैं। इसमें ऑक्टेन रेटिंग अधिक होने से इंजन बेहतर प्रदर्शन करता है। इसकी एंटी-नॉक क्षमता इंजन में अनचाही नॉकिंग को कम करने में मदद करती है। एथेनॉल मिश्रित ईंधन अपेक्षाकृत साफ तरीके से जलता है, जिससे प्रदूषक उत्सर्जन कम होता है और इंजन का संचालन अधिक स्मूद महसूस होता है।</p>
<p><strong>कच्चे तेल पर निर्भरता कम होने से देश को बड़ा फायदा</strong></p>
<p>सरकार का यह भी कहना है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम का उद्देश्य केवल ईंधन बदलना नहीं, बल्कि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाना, किसानों के लिए एथेनॉल उत्पादन के नए अवसर तैयार करना और कार्बन उत्सर्जन कम करना भी है। हाल के वर्षों में एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के साथ-साथ मक्का, टूटे चावल और मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त खाद्यान्न जैसे वैकल्पिक स्रोतों का उपयोग भी बढ़ाया गया है, ताकि एक ही फसल पर निर्भरता कम रहे।</p>
<p><strong>20 प्रतिशत से अधिक ब्लेंडिंग पर फिलहाल कोई फैसला नहीं</strong></p>
<p>राज्यसभा में यह भी पूछा गया कि क्या सरकार भविष्य में पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से अधिक करने की योजना बना रही है। इस पर मंत्री सुरेश गोपी ने स्पष्ट किया कि फिलहाल ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में इस दिशा में कोई कदम उठाया जाता है तो उससे पहले विस्तृत वैज्ञानिक और तकनीकी अध्ययन किए जाएंगे तथा ऑटोमोबाइल कंपनियों, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और शोध संस्थानों सहित सभी संबंधित पक्षों से व्यापक परामर्श किया जाएगा। सरकार ने यह भी साफ किया कि अभी E20 से पीछे हटकर E10 या शुद्ध पेट्रोल पर लौटने की भी कोई योजना नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 13:37:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>SBI फंड के शेयर केवल 7% प्रीमियम पर लिस्ट हुए, लेकिन ब्रोकरेज ने दिया बड़ा टारगेट!</title>
                                    <description><![CDATA[<p>शेयर बाजार में अस्थिरता के बीच, SBI फंड्स मैनेजमेंट के शेयरों की लिस्टिंग उतनी अच्छी नहीं रही, जितनी उम्मीद की जा रही थी। लिस्टिंग से पहले कंपनी के शेयर ग्रे मार्केट में 16% से अधिक के प्रीमियम पर ट्रेड हो रहे थे; लेकिन अब कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग 7% के प्रीमियम पर हुई है।</p>
<p>SBI फंड्स मैनेजमेंट के शेयर NSE पर ₹613.30 प्रति शेयर के भाव पर खुले, जो IPO मूल्य ₹574 से 6.85% अधिक है। BSE पर शेयरों की शुरुआत ₹610 प्रति शेयर पर हुई। इस कमजोर लिस्टिंग के बावजूद कई ब्रोकरेज कंपनियों ने SBI फंड्स मैनेजमेंट पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/business/sbi-fund-shares-were-listed-only-at-7-premium-but/article-2593"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/911.webp" alt=""></a><br /><p>शेयर बाजार में अस्थिरता के बीच, SBI फंड्स मैनेजमेंट के शेयरों की लिस्टिंग उतनी अच्छी नहीं रही, जितनी उम्मीद की जा रही थी। लिस्टिंग से पहले कंपनी के शेयर ग्रे मार्केट में 16% से अधिक के प्रीमियम पर ट्रेड हो रहे थे; लेकिन अब कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग 7% के प्रीमियम पर हुई है।</p>
<p>SBI फंड्स मैनेजमेंट के शेयर NSE पर ₹613.30 प्रति शेयर के भाव पर खुले, जो IPO मूल्य ₹574 से 6.85% अधिक है। BSE पर शेयरों की शुरुआत ₹610 प्रति शेयर पर हुई। इस कमजोर लिस्टिंग के बावजूद कई ब्रोकरेज कंपनियों ने SBI फंड्स मैनेजमेंट पर कवरेज शुरू किया है और इन शेयरों में मजबूत तेजी की संभावना जताई है।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/711.webp" alt="711" width="1280" height="720"></img></p>
<p>विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी के मजबूत नेटवर्क और बाजार नेतृत्व के कारण शेयर में 30% तक की तेजी आ सकती है। Emkay ब्रोकरेज का कहना है कि कंपनी के तीन प्रमुख सकारात्मक कारक हैं: SBI ब्रांड और वितरण; SBI बैंक के भीतर SBI म्यूचुअल फंड उत्पादों की वर्तमान में कम पहुंच; तथा एक्टिविटी और वैकल्पिक निवेश जैसे एसेट्स में लगातार बदलाव से आय को गति मिल सकती है। साथ ही, FY26-29E अवधि के दौरान परिचालन दक्षता और स्केल की अर्थव्यवस्थाओं से 17% EBITDA CAGR हासिल होने की उम्मीद है।</p>
<p>ब्रोकरेज का कहना है कि भारतीयों की बदलती बचत और निवेश संबंधी जरूरतों के कारण मध्यम वर्ग तेजी से म्यूचुअल फंड को प्राथमिक निवेश विकल्प के रूप में अपना रहा है। SBI AMC के पास हर भारतीय का एसेट मैनेजर बनने की क्षमता है, जैसे उसकी मूल कंपनी 'हर भारतीय के लिए बैंकर' बन गई है। हम SBI AMC पर 'बाय' रेटिंग और ₹750 का लक्ष्य मूल्य देते हैं।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/812.webp" alt="812" width="1280" height="720"></img></p>
<p>गौरतलब है कि SBI फंड्स मैनेजमेंट का IPO 14 से 16 जुलाई के दौरान सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था, जिसमें शेयर का मूल्य ₹545–574 था और लॉट साइज 26 इक्विटी शेयर थी। कंपनी ने अपनी प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश के जरिए कुल ₹9,813 करोड़ जुटाए, जो पूरी तरह से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और अमुंडी द्वारा 170,956,631 इक्विटी शेयरों तक के ऑफर-फॉर-सेल (OFS) का हिस्सा था।</p>
<p>SBI फंड्स भारत की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) है, जिसके पास ₹12.6 लाख करोड़ का म्यूचुअल फंड क्वार्टरली एवरेज एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (QAAUM) और 15.1% बाजार हिस्सेदारी है। यह सक्रिय और निष्क्रिय निवेश रणनीतियों में अग्रणी स्थान रखती है। इक्विरस सिक्योरिटीज के अनुसार, कंपनी भारत के वित्तीय क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है। वित्त वर्ष 2021 से जून 2026 के बीच उसके इक्विटी QAAUM ने 33% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दर्ज की, जबकि उसकी बाजार हिस्सेदारी 10.2% से बढ़कर 12.7% हो गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 16:53:56 +0530</pubDate>
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