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                <title>बिजनेस - Khabarchhe Hindi</title>
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                            <item>
                <title>RBI रिपोर्ट: भारत का विदेशी कर्ज ₹72 लाख करोड़ के पार, फिर भी क्यों घबराने की जरूरत नहीं? जानिए...</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। हालांकि, RBI के हालिया आंकड़ों ने देश की विदेशी देनदारियों की नई तस्वीर पेश की है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, देश का कुल विदेशी कर्ज बढ़कर 762.8 अरब डॉलर यानी लगभग ₹72.15 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। मार्च 2026 के अंत तक भारत का विदेशी कर्ज पिछले वर्ष की तुलना में 26.3 अरब डॉलर बढ़ा था। हालांकि, इस बढ़ोतरी की वास्तविक तस्वीर इससे भी बड़ी है।</p>
<p>RBI के अनुसार, अमेरिकी डॉलर के मज़बूत होने से विदेशी कर्ज में वास्तविक बढ़ोतरी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/business/rbi-report-indias-foreign-debt-crosses-%E2%82%B972-lakh-crore-still/article-2495"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/foreign-debt2.webp" alt=""></a><br /><p>भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। हालांकि, RBI के हालिया आंकड़ों ने देश की विदेशी देनदारियों की नई तस्वीर पेश की है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, देश का कुल विदेशी कर्ज बढ़कर 762.8 अरब डॉलर यानी लगभग ₹72.15 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। मार्च 2026 के अंत तक भारत का विदेशी कर्ज पिछले वर्ष की तुलना में 26.3 अरब डॉलर बढ़ा था। हालांकि, इस बढ़ोतरी की वास्तविक तस्वीर इससे भी बड़ी है।</p>
<p>RBI के अनुसार, अमेरिकी डॉलर के मज़बूत होने से विदेशी कर्ज में वास्तविक बढ़ोतरी आंशिक रूप से छिप गई है। यदि मूल्यांकन प्रभाव (वैल्यूएशन इफ़ेक्ट) को हटा दिया जाए, तो विदेशी कर्ज में बढ़ोतरी 26.3 अरब डॉलर के बजाय 51 अरब डॉलर होती। दूसरे शब्दों में कहें तो, डॉलर के मुकाबले अन्य प्रमुख मुद्राओं के कमज़ोर पड़ने से उन मुद्राओं में लिए गए ऋणों का डॉलर आधारित मूल्य घट गया, जिससे कुल विदेशी कर्ज का आंकड़ा अपेक्षाकृत कम दिखाई देता है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/foreign-debt4.webp" alt="foreign-debt4" width="1280" height="720"></img>
aajtak.in

<p>किसी भी देश के लिए केवल कुल कर्ज की राशि ही महत्वपूर्ण नहीं होती; यह भी देखा जाता है कि अर्थव्यवस्था की तुलना में कर्ज कितना है। इस पैमाने पर भारत का विदेशी कर्ज-GDP अनुपात बढ़कर 20.8 प्रतिशत हो गया है, जो एक वर्ष पहले 19.8 प्रतिशत था। यानी आर्थिक विस्तार के साथ-साथ विदेशी कर्ज का अनुपात भी बढ़ रहा है। हालांकि, राहत की बात यह है कि यह अनुपात अभी भी कई अन्य उभरती और विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में नियंत्रित दायरे में माना जाता है।</p>
<p>RBI की रिपोर्ट में एक दिलचस्प बात यह भी सामने आई है कि सरकारी विदेशी कर्ज घटा है, जबकि निजी क्षेत्र की विदेशी उधारी बढ़ी है। यानी हालिया बढ़ोतरी में निजी क्षेत्र ने प्रमुख भूमिका निभाई है। कुल विदेशी कर्ज का 36.4 प्रतिशत हिस्सा अकेले गैर-वित्तीय कॉर्पोरेट संस्थाओं का है। कंपनियां विदेशी बाज़ारों से अपेक्षाकृत कम लागत पर पूंजी जुटाने के लिए विदेशी उधार पर लगातार अधिक निर्भर होती जा रही हैं।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, एक वर्ष या उससे कम अवधि वाले अल्पकालिक (शॉर्ट टर्म) विदेशी कर्ज का हिस्सा बढ़कर 19.6 प्रतिशत हो गया है, जो एक वर्ष पहले 18.3 प्रतिशत था। अल्पकालिक कर्ज को अधिक संवेदनशील माना जाता है क्योंकि उसका भुगतान कम समय में करना पड़ता है। यदि वैश्विक परिस्थितियां बिगड़ती हैं, डॉलर और मज़बूत होता है, या विदेशी फंडिंग महंगी हो जाती है, तो ऐसे कर्ज का दबाव तेज़ी से बढ़ सकता है। वहीं, अल्पकालिक कर्ज और विदेशी मुद्रा भंडार का अनुपात भी पिछले वर्ष के 20.1 प्रतिशत की तुलना में बढ़कर 21.6 प्रतिशत हो गया है।</p>
<p>भारत के कुल विदेशी कर्ज का सबसे बड़ा हिस्सा अमेरिकी डॉलर में है। मार्च 2026 तक 55.5 प्रतिशत बाहरी कर्ज डॉलर में था। इसके बाद भारतीय रुपये की हिस्सेदारी 29.4 प्रतिशत रही। जापानी येन में 6.4 प्रतिशत, स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) में 4.3 प्रतिशत और यूरो में 3.7 प्रतिशत हिस्सा था। इसका मतलब है कि डॉलर के मूल्य में उल्लेखनीय उतार-चढ़ाव भारत की विदेशी देनदारियों पर सीधा असर डाल सकता है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/foreign-debt1.webp" alt="foreign-debt1" width="1280" height="720"></img>
moneycontrol.com

<p>विदेशी कर्ज में बढ़ोतरी के बावजूद कुछ संकेत ऐसे हैं जो थोड़ी राहत देते हैं। RBI के अनुसार, मार्च 2026 के अंत में दीर्घकालिक (लॉन्ग टर्म) कर्ज 613.5 अरब डॉलर था। कुल विदेशी कर्ज का बड़ा हिस्सा दीर्घकालिक होने के कारण तत्काल भुगतान का दबाव कुछ हद तक कम रहता है। इसके अलावा, डेट सर्विस अनुपात में भी सुधार देखा गया है; विदेशी कर्ज पर मूलधन और ब्याज भुगतान का अनुपात एक वर्ष पहले के 6.6 प्रतिशत से घटकर 5.8 प्रतिशत हो गया है, जो कर्ज चुकाने के बोझ में कुछ कमी दर्शाता है। सबसे राहत की बात यह है कि भारत के पास मज़बूत विदेशी मुद्रा भंडार है, जो वैश्विक अनिश्चितताओं और बाहरी झटकों के खिलाफ सुरक्षा कवच का काम करता है।</p>
<p>विदेशी कर्ज में बढ़ोतरी का मतलब यह नहीं है कि देश कर्ज संकट की ओर बढ़ रहा है। हालांकि, यह निश्चित रूप से एक ऐसा संकेत है जिस पर कड़ी नज़र रखने की ज़रूरत है। यदि डॉलर मज़बूत होता है, वैश्विक ब्याज दरें ऊंची बनी रहती हैं, या विदेशी बाज़ारों से पूंजी जुटाना महंगा हो जाता है, तो इसका असर कॉर्पोरेट लागत पर पड़ सकता है। आगे चलकर यह दबाव निवेश, रोज़गार और आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल भारत की बाहरी स्थिति मज़बूत मानी जाती है और विदेशी मुद्रा भंडार पर्याप्त स्तर पर है। हालांकि, RBI के आंकड़े संकेत देते हैं कि भविष्य में विदेशी उधारी की गति और प्रकृति पर कड़ी नज़र रखने की आवश्यकता होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 14:25:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
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                <title>कच्चे तेल की कीमतें आधी हो गईं, फिर भी सरकार पेट्रोल-डीज़ल के दाम क्यों नहीं घटा रही? निजी कंपनी ने भी कीमतें कम कीं!</title>
                                    <description><![CDATA[<p>1 जुलाई को भारत की सबसे बड़ी निजी रिटेलर, नायरा एनर्जी ने पेट्रोल की कीमत में ₹5 और डीज़ल की कीमत में ₹3 की कटौती की। दूसरी ओर, भारत की सरकारी तेल कंपनियों ने वाणिज्यिक गैस सिलेंडर की कीमत में ₹183 की कमी की। खाड़ी युद्ध शुरू होने के बाद तेल और गैस की कीमतों में यह पहली राहत थी। हालांकि, यह राहत सीमित थी, क्योंकि सरकारी तेल कंपनियों, जिनका घरेलू गैस सिलेंडर बाज़ार और देश के स्थानीय बाज़ार में 90 प्रतिशत हिस्सा है, ने पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें कम नहीं कीं। इसका मतलब यह हुआ कि 90 प्रतिशत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/business/crude-oil-prices-halved-still-why-is-the-government-not/article-2490"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/petrol-diesel-price.webp" alt=""></a><br /><p>1 जुलाई को भारत की सबसे बड़ी निजी रिटेलर, नायरा एनर्जी ने पेट्रोल की कीमत में ₹5 और डीज़ल की कीमत में ₹3 की कटौती की। दूसरी ओर, भारत की सरकारी तेल कंपनियों ने वाणिज्यिक गैस सिलेंडर की कीमत में ₹183 की कमी की। खाड़ी युद्ध शुरू होने के बाद तेल और गैस की कीमतों में यह पहली राहत थी। हालांकि, यह राहत सीमित थी, क्योंकि सरकारी तेल कंपनियों, जिनका घरेलू गैस सिलेंडर बाज़ार और देश के स्थानीय बाज़ार में 90 प्रतिशत हिस्सा है, ने पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें कम नहीं कीं। इसका मतलब यह हुआ कि 90 प्रतिशत पेट्रोल पंप अभी भी बढ़ी हुई कीमतों पर पेट्रोल और डीज़ल बेचेंगे। सवाल यह है कि तेल कंपनियाँ पेट्रोल और डीज़ल के दाम कब कम करेंगी?</p>
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jagran.com

<p>भारत की कई बड़ी तेल कंपनियां, जैसे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), ONGC, हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL), और भारत पेट्रोलियम (BPCL) ने अभी तक पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें कम नहीं की हैं। ये कंपनियां भारत के 90 प्रतिशत बाज़ार को नियंत्रित करती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर से घटकर 70 डॉलर से 73 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। ईरान युद्ध के बाद पहली बार भारत का क्रूड बास्केट भी 68.86 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया है। अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद यह पहली बार है जब कच्चा तेल इस स्तर पर पहुँचा है। यह कीमत 23 मार्च को दर्ज किए गए 157.04 डॉलर प्रति बैरल के सर्वकालिक उच्च स्तर से 56 प्रतिशत से भी अधिक कम है, लेकिन फिलहाल पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में कमी की उम्मीद नहीं है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/petrol-diesel-price2.webp" alt="petrol-diesel-price2" width="1280" height="720"></img>
tv9hindi.com

<p>कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत के आयात बिल में कमी आई है और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम हुआ है। सरकार का राजकोषीय घाटा भी कम हुआ है। लेकिन, यदि आप उम्मीद कर रहे हैं कि पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें घटाकर आम लोगों को राहत मिलेगी, तो इसके लिए आपको थोड़ा और इंतज़ार करना होगा। सरकार और तेल कंपनियां फिलहाल अपने नुकसान की भरपाई करने में लगी हुई हैं। वे अपने नुकसान की भरपाई करने के बाद ही ग्राहकों को यह राहत देंगी।</p>
<p>हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद होने के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर तक पहुंच गईं और शिपिंग लागत बढ़ गई, जिससे तेल कंपनियों को बहुत बड़ा नुकसान हुआ। उन्हें पेट्रोल पर प्रति लीटर लगभग ₹5.5 और डीज़ल पर प्रति लीटर ₹4.5 की अंडर-रिकवरी का सामना करना पड़ा। LPG सिलेंडरों के कारण प्रति सिलेंडर ₹650 से ₹720 तक का नुकसान हुआ। तेल कंपनियों पर बोझ कम करने के लिए सरकार ने पेट्रोल और डीज़ल पर विशेष उत्पाद शुल्क (एक्साइज़ ड्यूटी) में ₹10 की कटौती की, जिसके परिणामस्वरूप चालू वित्तीय वर्ष में सरकारी खजाने पर लगभग ₹30,000 करोड़ का सीधा बोझ पड़ा। अब जब वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें घट गई हैं, तो सरकार और सरकारी स्वामित्व वाली तेल कंपनियाँ इस नुकसान की भरपाई कर रही हैं।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/petrol-diesel-price4.webp" alt="petrol-diesel-price4" width="1200" height="675"></img>
jagran.com

<p>रेडोक्यू के CEO दीपल दत्ता का मानना है कि सस्ता कच्चा तेल निश्चित रूप से भारत की अर्थव्यवस्था को राहत देगा, लेकिन यह राहत तुरंत आम जनता तक नहीं पहुँचेगी। सरकारी स्वामित्व वाली तेल विपणन कंपनियां (OMCs) पहले अपने पिछले नुकसान की भरपाई करेंगी और अपने मुनाफे को मज़बूत करेंगी। आम जनता को राहत देने से पहले तेल कंपनियां फिलहाल अपनी वित्तीय स्थिति को मज़बूत बनाने को प्राथमिकता दे रही हैं। इसलिए, आने वाले दिनों या हफ्तों में भारत में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में कमी आने की संभावना कम है। इसके अलावा, भू-राजनीतिक तनाव अभी भी बना हुआ है और ऊर्जा एक संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर से बढ़ सकता है। इस अनिश्चितता को देखते हुए तेल कंपनियां पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में जल्दबाज़ी में कटौती करने से बच रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 15:49:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>AG स्वयं सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, तत्काल सुनवाई की मांग... एथेनॉल को लेकर क्या अड़चन है?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करते हुए अटॉर्नी जनरल ने एथेनॉल आवंटन को लेकर कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ तत्काल सुनवाई की मांग की है। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने सुप्रीम कोर्ट की वेकेशन बेंच को जानकारी दी कि इस मामले पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है, नहीं तो हाई कोर्ट का फैसला राष्ट्रीय नीति को प्रभावित करेगा। वेंकटरमणि की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया।</p>
<p>कोर्ट ने कहा कि मामले को जल्द ही सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा, तब तक यथास्थिति बनाए रखना आवश्यक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/business/ag-himself-reached-the-supreme-court-demanding-immediate-hearing-what/article-2483"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/supreme-court.webp" alt=""></a><br /><p>केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करते हुए अटॉर्नी जनरल ने एथेनॉल आवंटन को लेकर कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ तत्काल सुनवाई की मांग की है। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने सुप्रीम कोर्ट की वेकेशन बेंच को जानकारी दी कि इस मामले पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है, नहीं तो हाई कोर्ट का फैसला राष्ट्रीय नीति को प्रभावित करेगा। वेंकटरमणि की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया।</p>
<p>कोर्ट ने कहा कि मामले को जल्द ही सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा, तब तक यथास्थिति बनाए रखना आवश्यक है। यह याचिका ऑयल रिफाइनरी कंपनियों की ओर से दायर की गई थी। इस याचिका में हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें तेल कंपनियों को VINP नामक कंपनी के लिए एथेनॉल आवंटन बढ़ाने का निर्देश दिया गया था।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/supreme-court11.webp" alt="supreme-court1" width="1280" height="720"></img>
facebook.com/SupremeCourtOfIndia

<p>पिछले सप्ताह, कर्नाटक हाई कोर्ट ने VINP की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि तेल कंपनियों को VINP से अधिक एथेनॉल खरीदना चाहिए, अर्थात उसके आवंटन को बढ़ाने की आवश्यकता है। कंपनी का कहना था कि उसकी एथेनॉल खरीद कम की जा रही है, जबकि वह एथेनॉल आपूर्ति के सभी मानकों पर खरी उतरती है।</p>
<p>हाई कोर्ट की कार्यवाही में केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता उपस्थित हुए थे। वहीं, एथेनॉल बेचने वाली कंपनी VINP ने इस मामले में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को प्रतिवादी बनाया है। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में OMCs को 99 मिलियन (9.9 करोड़) लीटर एथेनॉल खरीदने का निर्देश दिया था।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/e20-petrol21.webp" alt="e20-petrol21" width="1280" height="720"></img>
spinny.com

<p><strong>सुप्रीम कोर्ट में एजी ने क्या कहा?</strong></p>
<p>1. आर. वेंकटरमणि ने जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की पीठ को बताया कि तत्काल सुनवाई आवश्यक है क्योंकि यह फैसला एथेनॉल पर राष्ट्रीय नीति को प्रभावित करेगा।</p>
<p>2. वेंकटरमणि ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी कि एथेनॉल आवंटन प्रक्रिया अक्टूबर 2025 में पूरी हो गई थी। इस प्रक्रिया के तहत, 378 आपूर्तिकर्ताओं को कुल 1,050 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति के लिए आवंटन की सूचना दी गई थी। इनमें से, हमारे पास पहले ही 680 लीटर की आपूर्ति हो चुकी है।</p>
<p>3. वेंकटरमणि ने कोर्ट में कहा कि यदि एक कंपनी के लिए आवंटन बढ़ाया जाता है, तो दूसरी कंपनियां भी इस प्रकार के दावे करेंगी। इससे जो नीतियां बनाई गई हैं, वे टूट जाएंगी। यह राष्ट्रीय महत्व का मामला है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 21:27:22 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार को HDFC बैंक ने दिया बड़ा पद</title>
                                    <description><![CDATA[<p>HDFC बैंक ने अपने चेयरमैन की नियुक्ति को लेकर बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेला है। बैंक के बोर्ड ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार को नया चेयरमैन नियुक्त करने की घोषणा की है, अब केवल भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मंज़ूरी बाकी है। एक नियामक फाइलिंग में HDFC बैंक ने बताया कि बोर्ड ने 30 जून, 2026 से प्रभावी चार वर्ष के कार्यकाल के लिए राजीव कुमार की स्वतंत्र निदेशक के रूप में नियुक्ति को मंज़ूरी दे दी है। बैंक ने कहा कि यह नियुक्ति RBI की मंज़ूरी के अधीन है। केंद्रीय बैंक से मंज़ूरी मिलने के बाद कुमार को तीन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/business/hdfc-bank-gave-big-post-to-former-chief-election-commissioner/article-2477"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/rajiv-kumar.webp" alt=""></a><br /><p>HDFC बैंक ने अपने चेयरमैन की नियुक्ति को लेकर बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेला है। बैंक के बोर्ड ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार को नया चेयरमैन नियुक्त करने की घोषणा की है, अब केवल भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मंज़ूरी बाकी है। एक नियामक फाइलिंग में HDFC बैंक ने बताया कि बोर्ड ने 30 जून, 2026 से प्रभावी चार वर्ष के कार्यकाल के लिए राजीव कुमार की स्वतंत्र निदेशक के रूप में नियुक्ति को मंज़ूरी दे दी है। बैंक ने कहा कि यह नियुक्ति RBI की मंज़ूरी के अधीन है। केंद्रीय बैंक से मंज़ूरी मिलने के बाद कुमार को तीन वर्ष के लिए बैंक का पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त किया जाएगा, जिसका कार्यकाल RBI की मंज़ूरी की तारीख से शुरू होगा। कुमार इससे पहले भारत के 25वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में सेवा दे चुके हैं।</p>
<p>पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार अतनु चक्रवर्ती का स्थान लेंगे, जिन्होंने मार्च में नैतिक चिंताओं का हवाला देते हुए अचानक इस्तीफ़ा दे दिया था। बैंक ने कहा कि वित्तीय सेवा विभाग के सचिव के रूप में अपने कार्यकाल (2017-2020) के दौरान राजीव कुमार ने ऐसे समय में कार्यभार संभाला था जब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कई चुनौतियों का सामना कर रहे थे। इनमें बड़ी मात्रा में छिपी हुई गैर-निष्पादित परिसंपत्तियाँ (NPA), पूंजी की कमी और इक्विटी एवं ऋण के दुरुपयोग जैसे मुद्दे शामिल थे। बैंक ने कहा कि मजबूत नीति निर्माण और उसके प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से कुमार ने बैंकों की बैलेंस शीट को साफ़ और मज़बूत बनाने का कार्य किया।</p>
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navbharattimes.indiatimes.com

<p>उन्होंने NPA की स्पष्ट पहचान और उनके लिए आवश्यक प्रावधान करना अनिवार्य बनाया, साथ ही दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) के तहत उधारकर्ताओं की जवाबदेही भी सुनिश्चित की। एक्सचेंज फाइलिंग में बैंक ने बताया कि 1984 बैच के पूर्व IAS अधिकारी और भारत के पूर्व वित्त सचिव (फ़रवरी 2020) 66 वर्षीय कुमार को 30 जून, 2026 से प्रभावी चार वर्षों के लिए अतिरिक्त निदेशक (स्वतंत्र) के रूप में भी नियुक्त किया गया है। इस बीच, HDFC बैंक के प्रबंध निदेशक (MD) और CEO शशिधर जगदीशन का वर्तमान कार्यकाल 26 अक्टूबर, 2026 को समाप्त होने वाला है। उन्होंने 27 अक्टूबर, 2020 को यह पद संभाला था। RBI ने 2023 में उनके वर्तमान तीन वर्षीय कार्यकाल (27 अक्टूबर, 2023 से 26 अक्टूबर, 2026 तक) को मंज़ूरी दी थी। उम्मीद की जा रही है कि बोर्ड RBI की मंज़ूरी के अधीन MD और CEO के रूप में तीसरे कार्यकाल के लिए जगदीशन के नाम की सिफारिश करेगा। बाहरी कानूनी समीक्षा के कारण रुकी हुई पुनर्नियुक्ति प्रक्रिया अब आगे बढ़ सकती है क्योंकि कानूनी फर्मों ने बैंक को क्लीन चिट देते हुए अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।</p>
<p>कुमार ने कुछ समय के लिए पब्लिक एंटरप्राइज़ सेलेक्शन बोर्ड (PESB) के चेयरमैन के रूप में भी सेवा दी थी। उन्होंने 2017 से 2020 तक वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव के रूप में कार्यभार संभाला, जब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कई चुनौतियों का सामना कर रहे थे। इनमें बड़ी मात्रा में छिपी हुई गैर-निष्पादित परिसंपत्तियाँ (NPA), पूंजी की कमी, नए ऋण वितरण में बाधाएँ तथा नए ऋणों के लिए इक्विटी और कर्ज़ का दुरुपयोग (जैसे 'गोल्ड-प्लेटिंग' और धन का डायवर्जन) शामिल थे। यह क्षेत्र बड़े ऋण कंसोर्टियम, नोटबंदी के बाद माइक्रो-क्रेडिट की मांग पूरी करने के लिए संघर्ष कर रही NBFCs और धोखाधड़ी वाली पोंजी योजनाओं से जुड़े प्रशासनिक मुद्दों का भी सामना कर रहा था।</p>
<p>DFS में शामिल होने के केवल दो सप्ताह के भीतर लगभग 3.38 लाख शेल कंपनियों (डमी फर्मों) के खाते फ्रीज़ कर दिए गए थे। इसके बाद, 'अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध' कानून, 2019 लागू करके पोंजी योजनाओं पर अंकुश लगाया गया। मजबूत नीति निर्माण और प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की बैलेंस शीट के स्वास्थ्य को बहाल करने का कार्य किया। इसके लिए उन्होंने गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) की पारदर्शी पहचान और उनके लिए प्रावधान करना अनिवार्य बनाया तथा दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता के तहत उधारकर्ताओं की जवाबदेही स्थापित की।</p>
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rajiv kumar

<p>उन्होंने देश की वित्तीय संरचना को आकार देने वाली कई प्रमुख संस्थाओं का नेतृत्व किया, जिनमें रिज़र्व बैंक का केंद्रीय बोर्ड, वित्तीय स्थिरता एवं विकास परिषद, वित्तीय क्षेत्र के नियामकीय पदों के लिए सर्च कमेटी, मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (सचिव के रूप में), पब्लिक एंटरप्राइज़ सेलेक्शन बोर्ड, बैंक बोर्ड ब्यूरो तथा SBI और NABARD के बोर्ड शामिल हैं। वे केंद्रीय बैंक के आर्थिक पूंजी ढाँचे पर विशेषज्ञ समिति और नीति आयोग के पुनर्गठन पर समिति के सदस्य भी रहे हैं।</p>
<p>कुमार ने बैंकिंग क्षेत्र को साफ़-सुथरा बनाने के लिए कई कदम उठाए—जैसे अवैध वित्तीय गतिविधियों पर कड़ी कार्रवाई, सहकारी बैंकों की नियामकीय निगरानी को मज़बूत करना और बड़े डिफॉल्ट मामलों में जवाबदेही लागू करना। ₹50 करोड़ और उससे अधिक के ऋण के लिए पासपोर्ट विवरण देना अनिवार्य कर दिया गया, ताकि बड़े उधारकर्ता किसी कार्रवाई से पहले देश छोड़कर भाग न सकें।</p>
<p>धोखाधड़ी की जांच, ₹250 करोड़ से अधिक के ऋणों पर निगरानी बढ़ाना और 34 से अधिक कारकों पर आधारित IT-संचालित जोखिम स्कोरिंग जैसे उपायों ने उन कमजोर संकेतों और ढीले नियंत्रणों की जगह ली, जो अक्सर बड़े बैंकिंग कंसोर्टियम (कभी-कभी 25 बैंकों तक को शामिल करने वाले) की ऋण प्रक्रिया की विशेषता थे। ऋणदाता-उधारकर्ता संबंध को पूरी तरह से फिर से परिभाषित किया गया, जिसमें स्पष्ट संदेश दिया गया कि ऋण विवेकपूर्ण ढंग से दिए जाने चाहिए और उधारकर्ताओं का उन्हें चुकाना अनिवार्य है।</p>
<p>इस परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) का पुनर्पूंजीकरण था, जिसमें ₹3 लाख करोड़ से अधिक का निवेश शामिल था, ताकि उनकी वित्तीय मजबूती और ऋण देने की क्षमता को फिर से बहाल किया जा सके। इसके साथ ही, एक बड़े विलय अभियान के तहत 27 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को मिलाकर 12 मज़बूत संस्थानों में परिवर्तित किया गया। साथ ही, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) का पुनर्गठन करके उन्हें अधिक कुशल 'एक राज्य–एक RRB' ढाँचे में लाया गया। उन्होंने PSB विलय की इस पूरी प्रक्रिया का नेतृत्व किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 12:43:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>120 डॉलर से 76 डॉलर तक पहुंच गया कच्चे तेल का भाव; पेट्रोल और डीजल कब सस्ते होंगे?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अमेरिका-ईरान युद्ध समाप्त हो गया है। अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार गिर रही हैं। हालिया गिरावट के बाद कच्चे तेल के दाम पिछले 4 महीनों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं, और युद्ध के दौरान प्रति बैरल 120 डॉलर तक पहुंचकर दुनिया को डराने वाला तेल अब 77 डॉलर से भी नीचे आ गया है।</p>
<p>तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के दौरान पाकिस्तान और बांग्लादेश से लेकर ब्रिटेन और भारत तक कई देशों में गंभीर तेल और गैस संकट देखने को मिला था। भारत में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/business/price-of-crude-oil-reached-from-120-to-76-when/article-2448"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/oil-price-crash1.webp" alt=""></a><br /><p>अमेरिका-ईरान युद्ध समाप्त हो गया है। अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार गिर रही हैं। हालिया गिरावट के बाद कच्चे तेल के दाम पिछले 4 महीनों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं, और युद्ध के दौरान प्रति बैरल 120 डॉलर तक पहुंचकर दुनिया को डराने वाला तेल अब 77 डॉलर से भी नीचे आ गया है।</p>
<p>तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के दौरान पाकिस्तान और बांग्लादेश से लेकर ब्रिटेन और भारत तक कई देशों में गंभीर तेल और गैस संकट देखने को मिला था। भारत में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण सरकारी स्वामित्व वाली तेल कंपनियों को लगभग 4 वर्षों में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाने पड़े थे। ऐसा केवल एक-दो बार नहीं, बल्कि 4 बार करना पड़ा। अब जब कच्चे तेल की कीमतें टूट गई हैं, तो पेट्रोल और डीजल के दाम घटने की उम्मीद भी बढ़ रही है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/oil-price-crash2.webp" alt="oil-price-crash2" width="1280" height="720"></img>
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<p>28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर अपना पहला हमला किया था, जिसके जवाब में ईरान ने बदला लिया और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद कर दिया। यह एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जो दुनिया की तेल और गैस की जरूरतों का लगभग 20 प्रतिशत पूरा करता है। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद होने के बाद अप्रैल में कच्चा तेल अचानक 120 डॉलर के आसपास कारोबार करने लगा था।</p>
<p>इसके परिणामस्वरूप कई देशों में ईंधन और गैस की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई, जिससे महंगाई बढ़ गई, और इसका असर अमेरिका पर भी पड़ा। अब अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति बनने के बाद तेल की कीमतों में अचानक गिरावट शुरू हुई, जो आज भी जारी है। यह खबर लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड 76.47 डॉलर प्रति बैरल, WTI क्रूड ऑयल 72.63 डॉलर प्रति बैरल और मुर्बन क्रूड ऑयल 69.63 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। ये पिछले 4 महीनों में कच्चे तेल की सबसे निचली कीमतें हैं।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/oil-price-crash.webp" alt="oil-price-crash" width="1280" height="720"></img>
energy.economictimes.indiatimes.com

<p>अब सवाल यह है कि जब कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही थीं और तेल कंपनियों को नुकसान के कारण पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाने पड़े थे, तो क्या अब तेल सस्ता होने पर ईंधन की कीमतें भी कम की जाएंगी?</p>
<p>कोटक सिक्योरिटीज में कमोडिटी रिसर्च की AVP कायनत चैनवाला ने कहा कि अमेरिका-ईरान समझौते से वैश्विक तनाव कम हुआ है और अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा 60 दिनों के लिए ईरानी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री की अनुमति दिए जाने से वैश्विक सप्लाई चेन में सुधार की उम्मीद मजबूत हुई है। टैंकर ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, पिछले सप्ताह 30 मिलियन बैरल से अधिक कच्चा तेल एशिया भेजा गया था।</p>
<p>चैनवाला के अनुसार, ईरान एशियाई खरीदारों को भारी छूट दे रहा है, जबकि खाड़ी क्षेत्र के उत्पादकों ने अपने प्रमुख संयंत्रों में परिचालन फिर से शुरू कर दिया है। यदि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से यातायात सामान्य बना रहता है, तो तेल जल्द ही बाजारों तक पहुंच जाएगा। हालांकि, मांग में सुधार होने तक ईंधन की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना कम है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/38.webp" alt="38" width="1280" height="720"></img>
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<p>मोतीलाल ओसवाल वेल्थ मैनेजमेंट द्वारा किए गए शोध से पता चलता है कि सस्ता तेल देश के आयात बिल को कम करने, रुपये को मजबूत बनाने और महंगाई के दबाव को घटाने में मदद करता है। हालांकि, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तत्काल कटौती की उम्मीद करने वाले उपभोक्ताओं को शायद अभी इंतजार करना पड़े। इन कीमतों में तुरंत कमी आने की संभावना कम है।</p>
<p>इसका कारण यह है कि भारत में ईंधन की कीमतें केवल कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर नहीं करतीं, बल्कि करों, रिफाइनिंग मार्जिन और मार्केटिंग लागत जैसे कई अन्य कारकों पर भी आधारित होती हैं। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में आई इस गिरावट से भारत के आयात बिल में कुछ राहत जरूर मिल सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 22:19:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
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                <title>पेट्रोल-डीजल की कीमतें न बढ़ें, इसलिए सरकार ने तेल कंपनियों पर बढ़ाया एक्सपोर्ट टैक्स</title>
                                    <description><![CDATA[<p>वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की ऊंची कीमतों और लगातार अस्थिरता के बीच केंद्र सरकार ने ईंधन बाजार को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स बढ़ा दिया है। यह नया निर्णय आज यानी 16 जून से लागू हो गया है। इस बीच राहत की बात यह है कि सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया है और इसे पहले के स्तर पर ही बनाए रखा है। वित्त मंत्रालय के अधीन राजस्व विभाग द्वारा जारी एक अधिसूचना के बाद नई दरें पूरे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/business/to-prevent-petrol-and-diesel-prices-from-increasing-the-government/article-2400"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/diesel3.webp" alt=""></a><br /><p>वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की ऊंची कीमतों और लगातार अस्थिरता के बीच केंद्र सरकार ने ईंधन बाजार को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स बढ़ा दिया है। यह नया निर्णय आज यानी 16 जून से लागू हो गया है। इस बीच राहत की बात यह है कि सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया है और इसे पहले के स्तर पर ही बनाए रखा है। वित्त मंत्रालय के अधीन राजस्व विभाग द्वारा जारी एक अधिसूचना के बाद नई दरें पूरे देश में लागू कर दी गई हैं।</p>
<p>सरकार की अधिसूचना के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए डीजल के निर्यात पर लगने वाले शुल्क को ₹13.5 प्रति लीटर से बढ़ाकर ₹14 प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं, ATF पर निर्यात शुल्क में और भी बड़ा इजाफा किया गया है। इस पर लगने वाले टैक्स को ₹9.5 प्रति लीटर से बढ़ाकर ₹12.5 प्रति लीटर कर दिया गया है। इसके विपरीत, पेट्रोल पर लगने वाला निर्यात शुल्क ₹1.5 प्रति लीटर पर यथावत रखा गया है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/diesel4.webp" alt="diesel4" width="1200" height="675"></img>
jagran.com

<p>नई दरें 16 जून से शुरू होने वाली आगामी दो सप्ताह की अवधि के लिए लागू रहेंगी। मध्य-पूर्व में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव पर करीबी नजर रखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है। इस क्षेत्रीय तनाव के कारण कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की वैश्विक कीमतों में भारी अस्थिरता देखी गई है। इस स्थिति से निपटने और देश में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) के तहत निर्यात शुल्क बढ़ाया है। इससे कंपनियां स्थानीय बाजार को छोड़कर विदेशों में तेल नहीं बेच सकेंगी।</p>
<p>नई कर संरचना के तहत डीजल निर्यात पर प्रति लीटर ₹14 और ATF निर्यात पर प्रति लीटर ₹12.5 की स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी लगाई जाएगी। पेट्रोल पर ड्यूटी वर्तमान स्तर ₹1.50 प्रति लीटर पर बरकरार रहेगी। उल्लेखनीय है कि इस बदलाव के तहत इन तीनों पर किसी भी प्रकार का 'रोड और इंफ्रास्ट्रक्चर सेस' नहीं लगाया गया है। सरकार हर 15 दिन में कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और ATF की औसत अंतरराष्ट्रीय कीमतों की समीक्षा करती है और उसी के अनुसार इस शुल्क को समायोजित करती है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/diesel5.webp" alt="diesel5" width="1280" height="720"></img>
a1tyreservices.co.uk

<p>हालिया कर वृद्धि से यह स्पष्ट है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती कीमतों को लेकर चिंतित है। ऊंची वैश्विक कीमतें स्थानीय रिफाइनरियों को घरेलू बिक्री की बजाय निर्यात को प्राथमिकता देने के लिए प्रोत्साहित कर सकती हैं, जिससे देश में ईंधन की कमी का जोखिम पैदा हो सकता है। निर्यात शुल्क बढ़ाकर सरकार विदेशी बिक्री को कम आकर्षक बनाना चाहती है, ताकि तेल कंपनियां घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित हों।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 14:54:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>महंगाई और कितना रुलाएगी…उच्चतम स्तर पर खुदरा महंगाई दर, खाने-पीने की चीजें और परिवहन कर रहा जेबी ढीली, आगे भी राहत के आसार नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> अमेरिका-ईरान जंग की वजह से महंगाई का असर अब आम आदमी की जेब पर सीधे दिखने लगा है। रसोई का बजट बढ़ रहा है, सब्जियों और खाने-पीने की चीजों के दाम ऊंचे बने हुए हैं, जबकि आने-जाने का खर्च भी लगातार बढ़ रहा है। दरअसल, गैस और ऊर्जा की आपूर्ति बाधित होने से केंद्र सरकार सिलेंडर, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार इजाफा कर रही है। इस बीच आम आदमी के लिए एक और परेशानी बढ़ाने वाली खबर आई है। मई में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.93% पर पहुंच गई है, जो पिछले पांच महीनों का सबसे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/business/how-much-more-will-the-inflation-make-us-cry%E2%80%A6retail-inflation/article-2389"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/110.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> अमेरिका-ईरान जंग की वजह से महंगाई का असर अब आम आदमी की जेब पर सीधे दिखने लगा है। रसोई का बजट बढ़ रहा है, सब्जियों और खाने-पीने की चीजों के दाम ऊंचे बने हुए हैं, जबकि आने-जाने का खर्च भी लगातार बढ़ रहा है। दरअसल, गैस और ऊर्जा की आपूर्ति बाधित होने से केंद्र सरकार सिलेंडर, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार इजाफा कर रही है। इस बीच आम आदमी के लिए एक और परेशानी बढ़ाने वाली खबर आई है। मई में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.93% पर पहुंच गई है, जो पिछले पांच महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 4% लक्ष्य के बेहद करीब है। जनवरी में महंगाई 2.74% थी, जो हर महीने बढ़ते हुए मई तक 3.93% हो गई। खाद्य वस्तुओं, परिवहन और कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी ने महंगाई को ऊपर धकेला है, जिससे आने वाले महीनों में आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट पर और दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। </p>
<p><strong>महंगाई इसलिए तेजी से बढ़ रही है…</strong></p>
<p>मई में महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह खाद्य वस्तुओं और परिवहन लागत में तेजी रही। खाद्य महंगाई दर अप्रैल के 4.20% से बढ़कर 4.78% हो गई। वहीं ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी का असर परिवहन सेवाओं और अन्य वस्तुओं की लागत पर भी दिखाई देने लगा है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और मौसम संबंधी अनिश्चितताएं आने वाले महीनों में महंगाई को और बढ़ा सकती हैं। </p>
<p><strong>ग्रामीण इलाकों में भी महंगाई ने बढ़ाई परेशानी</strong></p>
<p>मई के आंकड़ों में एक अहम बात यह भी सामने आई कि ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई शहरी इलाकों की तुलना में अधिक रही। ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई 4.85% दर्ज की गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 4.66% रही। इससे संकेत मिलता है कि गांवों में रहने वाले परिवारों पर महंगाई का असर अपेक्षाकृत अधिक पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर निम्न और मध्यम आय वर्ग की घरेलू बचत तथा खर्च करने की क्षमता पर पड़ता है, क्योंकि उनकी आय का बड़ा हिस्सा भोजन पर खर्च होता है।</p>
<p><strong>सोना-चांदी और धातुओं की बढ़ती कीमतों ने भी बढ़ाया दबाव</strong></p>
<p>महंगाई के विभिन्न घटकों में सबसे तेज वृद्धि कीमती धातुओं और आभूषणों से जुड़ी श्रेणी में दर्ज की गई। सोने और अन्य बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में तेजी के कारण ज्वेलरी से जुड़ी वस्तुएं काफी महंगी हुई हैं। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ने से सोने की कीमतों में लगातार मजबूती बनी हुई है। </p>
<p><strong>आरबीआई के लिए बढ़ रही है चुनौती, अपना सकता है सख्त रुख</strong></p>
<p>महंगाई का बढ़ता रुझान RBI की मौद्रिक नीति समिति  के लिए चिंता का विषय बन सकता है। हालांकि मौजूदा महंगाई अभी भी RBI के 2% से 6% के दायरे के भीतर है, लेकिन लगातार बढ़ते आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि मूल्य दबाव मजबूत हो रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि खाद्य और ईंधन महंगाई इसी तरह बढ़ती रही तो केंद्रीय बैंक को आने वाले महीनों में ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाना पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल RBI ने रेपो दर को स्थिर रखा है और स्थिति पर नजर बनाए हुए है। </p>
<p><strong>मानसून और तेल कीमतों पर टिकी नजर</strong></p>
<p>आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले महीनों में महंगाई की दिशा काफी हद तक मानसून और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। यदि मानसून सामान्य से कमजोर रहता है या अल नीनो का असर बढ़ता है, तो कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसका सीधा असर खाद्यान्न कीमतों पर पड़ेगा।<br />वहीं यदि वैश्विक बाजार में कच्चा तेल महंगा बना रहता है, तो पेट्रोल, डीजल और परिवहन लागत बढ़ सकती है, जिससे महंगाई और ऊपर जा सकती है। कई विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि ऐसी स्थिति में खुदरा महंगाई 5% के स्तर को भी पार कर सकती है। </p>
<p><strong>महंगाई को इस तरह से समझा जा सकता है</strong></p>
<p>उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) वह पैमाना है जिससे यह मापा जाता है कि आम उपभोक्ता द्वारा खरीदी जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में कितनी बढ़ोतरी हुई है। इसमें भोजन, कपड़े, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन जैसी श्रेणियां शामिल होती हैं। इसी के आधार पर खुदरा महंगाई दर तय की जाती है। RBI का महंगाई लक्ष्य 4% है। सरकार ने केंद्रीय बैंक को 4% महंगाई बनाए रखने का लक्ष्य दिया है, जिसमें 2% ऊपर या नीचे की छूट है। यानी 2% से 6% के बीच की महंगाई RBI के टॉलरेंस बैंड में मानी जाती है। मई 2026 में 3.93% की महंगाई इस दायरे के भीतर है, लेकिन यह लक्ष्य के बेहद करीब पहुंच चुकी है। इसे ऐसे समझा जा सकता है…मान लीजिए कि यदि मई 2025 में कोई सामान 10 रुपये का था तो औसतन वही सामान मई 2026 में लगभग 13.93 रुपये का हो जाएगा। इसी तरह अलग-अलग वस्तुओं की कीमतों से यह आकलन किया जा सकता है कि महंगाई किस तरह से आपकी जेब ढीली कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 12:24:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इथेनॉल ब्लेंड ईंधन से बढ़ी चिंता, 43% लोगों ने नई गाड़ी खरीदने का फैसला टाल सकते हैं</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भारत में इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल को बढ़ावा देने की सरकार की पहल अब ग्राहकों पर असर डाल रही है। यह ईंधन केवल बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि वाहन खरीदने वालों की सोच को भी प्रभावित कर रहा है। हाल ही में किए गए एक सर्वे में सामने आया है कि इथेनॉल ब्लेंड ईंधन को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के कारण बड़ी संख्या में लोग नया वाहन खरीदने का फैसला टालने पर विचार कर रहे हैं।</p>
<p>लोकलसर्कल द्वारा किए गए एक सर्वे के अनुसार, अगले वर्ष वाहन खरीदने की योजना बना रहे 43 प्रतिशत संभावित खरीदार E20 पेट्रोल और भविष्य में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/business/%E0%A4%87%E0%A4%A5%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%89%E0%A4%B2-%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A1-%E0%A4%88%E0%A4%82%E0%A4%A7%E0%A4%A8-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A3--43-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A4%A4-%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%97-%E0%A4%A8%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%A8-%E0%A4%96%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%A6%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%9F%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%B8%E0%A4%95%E0%A4%A4%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%82/article-2387"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/120.webp" alt=""></a><br /><p>भारत में इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल को बढ़ावा देने की सरकार की पहल अब ग्राहकों पर असर डाल रही है। यह ईंधन केवल बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि वाहन खरीदने वालों की सोच को भी प्रभावित कर रहा है। हाल ही में किए गए एक सर्वे में सामने आया है कि इथेनॉल ब्लेंड ईंधन को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के कारण बड़ी संख्या में लोग नया वाहन खरीदने का फैसला टालने पर विचार कर रहे हैं।</p>
<p>लोकलसर्कल द्वारा किए गए एक सर्वे के अनुसार, अगले वर्ष वाहन खरीदने की योजना बना रहे 43 प्रतिशत संभावित खरीदार E20 पेट्रोल और भविष्य में E30 ईंधन के लागू होने को लेकर असमंजस में हैं। ऐसे में वे अपनी खरीद को टाल सकते हैं या अपने निर्णय पर पुनर्विचार कर सकते हैं।</p>
<p>यह सर्वे देशभर के 311 जिलों में किया गया था और इसमें 28,000 से अधिक संभावित वाहन खरीदारों की राय ली गई थी। सर्वे में पाया गया कि ग्राहक यह जानना चाहते हैं कि उनके वर्तमान या नए वाहन उच्च-इथेनॉल मिश्रित ईंधन के लिए कितने उपयुक्त होंगे और इसका वाहन के प्रदर्शन, रखरखाव तथा दीर्घकालिक लागत पर क्या प्रभाव पड़ेगा।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/217.webp" alt="217" width="1280" height="720"></img></p>
<p>भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में भले ही बिक्री मजबूत दिखाई दे रही हो, लेकिन इथेनॉल ब्लेंड ईंधन को लेकर ग्राहकों की बढ़ती चिंताएं ऑटोमोटिव उद्योग के लिए एक नई चुनौती बन रही हैं। सर्वे के परिणामों के अनुसार, कई लोग उपयुक्त ईंधन को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण नया वाहन खरीदने से बच रहे हैं।</p>
<p>सर्वेक्षणकर्ताओं ने बताया कि कम माइलेज, इंजन की टिकाऊपन और संभावित रूप से बढ़ा हुआ रखरखाव खर्च उनकी सबसे बड़ी चिंताएं हैं। यही कारण है कि कई संभावित खरीदार नए वाहन की खरीद का निर्णय टालने या उस पर पुनर्विचार करने का मन बना रहे हैं।</p>
<p>यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब केंद्र सरकार देश में इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ा रही है। E20 पेट्रोल, जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल होता है, पूरे देश में लागू किया जा चुका है। इसके अलावा ऊर्जा सुरक्षा और प्रदूषण में कमी की रणनीति के तहत सरकार ने E22, E25, E27 और E30 जैसे उच्च-इथेनॉल मिश्रित ईंधनों के लिए मानक भी प्रस्तावित किए हैं।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/317.webp" alt="317" width="1280" height="720"></img></p>
<p>इस बदलाव के जवाब में, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने अप्रैल 2026 से E20 पेट्रोल के लिए न्यूनतम रिसर्च ऑक्टेन नंबर (RON) 95 अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) को इंजन प्रदर्शन, माइलेज और दीर्घकालिक प्रदर्शन पर E25 जैसे उच्च-इथेनॉल मिश्रित ईंधनों के प्रभाव का अध्ययन करने का कार्य सौंपा गया है।</p>
<p>सर्वे में ये बातें सामने आईं: E20 और भविष्य के E30 ईंधन को लेकर बढ़ती अनिश्चितता वाहन खरीद के निर्णयों को प्रभावित कर रही है। 43 प्रतिशत संभावित खरीदार अगले 12 महीनों में नया वाहन खरीदना टाल सकते हैं या अपने निर्णय पर पुनर्विचार कर सकते हैं। सर्वे में शामिल लोगों ने कम माइलेज, इंजन की आयु और बढ़े हुए रखरखाव खर्च को अपनी प्रमुख चिंता बताया। केवल 6 प्रतिशत लोगों ने नई पेट्रोल कार खरीदने में रुचि दिखाई, जबकि 7 प्रतिशत लोगों ने इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और 7 प्रतिशत लोगों ने हाइब्रिड वाहन खरीदने में रुचि दिखाई। इसका अर्थ है कि EV और हाइब्रिड वाहनों की कुल हिस्सेदारी 14 प्रतिशत रही, जो पेट्रोल वाहनों की तुलना में दोगुने से भी अधिक है। 30 प्रतिशत लोगों ने फिलहाल वाहन खरीदने की कोई योजना नहीं बताई, जबकि 12 प्रतिशत खरीदार अभी भी निर्णय नहीं ले पाए हैं। हालांकि भारतीय ऑटो बाजार मजबूत बना हुआ है। FADA के अनुसार, मई 2026 में वाहन बिक्री 25 लाख यूनिट से अधिक रही, जबकि यात्री वाहन पंजीकरण पहली बार 4 लाख यूनिट से अधिक हो गया। 50,000 से अधिक लोगों पर किए गए एक अन्य सर्वे में, पेट्रोल वाहन मालिकों में से आधे ने बताया कि 2025 की शुरुआत के बाद उनकी माइलेज 10 प्रतिशत से अधिक घट गई है। लगभग 30 प्रतिशत वाहन मालिकों ने फ्यूल पंप, इंजेक्टर और इंजन सिस्टम में घिसाव बढ़ने या रखरखाव खर्च बढ़ने की शिकायत की। 2023 से पहले खरीदे गए वाहनों के मालिकों ने माइलेज में कमी और रखरखाव खर्च में वृद्धि के कारण 5,000 रुपये से 25,000 रुपये तक अतिरिक्त खर्च होने की जानकारी दी। कई ग्राहकों ने E0 या E10 जैसे कम-इथेनॉल मिश्रित ईंधन को जारी रखने की मांग की।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/414.webp" alt="414" width="1280" height="720"></img></p>
<p>E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है और इसे देशभर में मानक ईंधन के रूप में लागू किया गया है। यह मिश्रण भारत की आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने और कार्बन उत्सर्जन घटाने की रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।</p>
<p>वहीं, E30 ईंधन में 30 प्रतिशत इथेनॉल और 70 प्रतिशत पेट्रोल होता है। इसे भारत के इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के अगले संभावित चरण के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत बनाना तथा स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देना है।</p>
<p>देश में पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का उपयोग लगातार बढ़ रहा है, और सरकार इसे ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा प्रदूषण कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानती है। यही कारण है कि इथेनॉल उत्पादन और इथेनॉल मिश्रण दोनों तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। सरकार के अनुसार, 31 अक्टूबर 2025 तक भारत की इथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़कर 1,953 करोड़ लीटर प्रति वर्ष हो चुकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://hindi.khabarchhe.com/business/%E0%A4%87%E0%A4%A5%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%89%E0%A4%B2-%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A1-%E0%A4%88%E0%A4%82%E0%A4%A7%E0%A4%A8-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A3--43-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A4%A4-%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%97-%E0%A4%A8%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%A8-%E0%A4%96%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%A6%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%9F%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%B8%E0%A4%95%E0%A4%A4%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%82/article-2387</link>
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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 12:29:32 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>E22, E25, E27 और E30 एथेनॉल युक्त पेट्रोल पर सरकार ने एक्साइज ड्यूटी शून्य की</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की अस्थिर कीमतों के बीच, केंद्र सरकार ने भारतीय अर्थव्यवस्था और आम जनता को बड़ी राहत देने वाला एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। वित्त मंत्रालय ने एक नई अधिसूचना जारी कर अधिक एथेनॉल मिश्रण (22% से 30%) वाले पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी पूरी तरह समाप्त कर दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत कच्चे तेल के आयात पर अपनी निर्भरता कम करने और 'ग्रीन एनर्जी' की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।</p>
<p><strong>आइए समझते हैं कि सरकार के इस फैसले का</strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/business/government-reduced-excise-duty-to-zero-on-petrol-containing-e22/article-2384"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/photo-(2)4.webp" alt=""></a><br /><p>पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की अस्थिर कीमतों के बीच, केंद्र सरकार ने भारतीय अर्थव्यवस्था और आम जनता को बड़ी राहत देने वाला एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। वित्त मंत्रालय ने एक नई अधिसूचना जारी कर अधिक एथेनॉल मिश्रण (22% से 30%) वाले पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी पूरी तरह समाप्त कर दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत कच्चे तेल के आयात पर अपनी निर्भरता कम करने और 'ग्रीन एनर्जी' की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।</p>
<p><strong>आइए समझते हैं कि सरकार के इस फैसले का आप पर क्या असर होगा</strong></p>
<p>वित्त मंत्रालय की आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, 22 प्रतिशत से लेकर 30 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल (यानी E22, E25, E27 और E30) पर अब कोई एक्साइज ड्यूटी नहीं लगेगी। यह कर अब शून्य कर दिया गया है। भारत के महत्वाकांक्षी बायोफ्यूल कार्यक्रम के तहत E20 (20% एथेनॉल) से अधिक ब्लेंड पर दिया गया यह पहला बड़ा वित्तीय प्रोत्साहन है।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/047.webp" alt="047" width="1280" height="720"></img></p>
<p>बाजार की वर्तमान स्थिति पर नजर डालें तो मई महीने के दूसरे पखवाड़े में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर लगभग 7.50 रुपये की तेज बढ़ोतरी हुई थी। इससे पहले मार्च महीने में भी सरकार ने वार्षिक 1 लाख करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान को स्वीकार करते हुए पेट्रोल-डीजल पर ड्यूटी में प्रति लीटर 10 रुपये की कटौती की थी, ताकि जनता को वैश्विक बाजार की महंगाई से बचाया जा सके।</p>
<p>इसके अलावा तकनीकी मोर्चे पर 15 मई 2026 से ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स द्वारा E22 से E30 पेट्रोल मिश्रण के लिए नए गुणवत्ता मानक लागू कर दिए गए हैं। इन मानकों के तय होते ही एक्साइज ड्यूटी हटाना यह दर्शाता है कि सरकार इस क्षेत्र में योजनाबद्ध तैयारी के साथ आगे बढ़ रही है।</p>
<p>केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने स्पष्ट किया है कि भारत अपनी आवश्यकता का 87% जीवाश्म ईंधन आयात करता है। इस नीतिगत निर्णय से देश को कई लाभ होंगे। महंगे कच्चे तेल का आयात घटेगा, जिससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार की बड़ी बचत होगी। ईंधन आयात पर खर्च होने वाला धन देश में ही रहेगा, जिससे सीधे गन्ना उगाने वाले किसानों, ग्रामीण युवाओं और कृषि क्षेत्र को आर्थिक मजबूती मिलेगी। एथेनॉल एक स्वच्छ और 'ग्रीन फ्यूल' है, जिसके उपयोग से प्रदूषण के स्तर में बड़ा कमी आएगी।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/0310.webp" alt="0310" width="1280" height="720"></img></p>
<p>उपभोक्ताओं के मन में फिलहाल यह सबसे बड़ा सवाल है। पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, एथेनॉल की औसत खरीद कीमत (GST और परिवहन सहित) प्रति लीटर 71.32 रुपये है, जो परिष्कृत पेट्रोल की लागत से अधिक हो चुकी है। इसलिए अधिक मिश्रण होने के बावजूद खुदरा कीमतों में बड़ी कटौती करना कंपनियों के लिए एक चुनौती है।</p>
<p>हालांकि, सरकार ने हाल ही में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए 85% एथेनॉल युक्त 'E85' फ्यूल लॉन्च किया है, जो देश के 48 पेट्रोल पंपों पर E20 फ्यूल की तुलना में 20 रुपये प्रति लीटर सस्ता बेचा जा रहा है।</p>
<p>कई वाहन मालिकों को चिंता रहती है कि अधिक एथेनॉल युक्त पेट्रोल (E20 या उससे अधिक) के उपयोग से उनकी पुरानी गाड़ियों की माइलेज या इंजन के प्रदर्शन पर कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा या नहीं। इस संबंध में ऑटोमोबाइल निर्माताओं के संगठन (SIAM) ने स्पष्ट किया है कि पुरानी गाड़ियों की माइलेज में थोड़ी बहुत कमी आ सकती है, लेकिन इससे सुरक्षा संबंधी कोई जोखिम नहीं है।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी इन चिंताओं को खारिज करते हुए कहा है कि फ्लेक्स-फ्यूल मोटरसाइकिलों को पेट्रोल और एथेनॉल दोनों पर चलाया जा सकता है, और एथेनॉल का प्रदर्शन सामान्य पेट्रोल से किसी भी तरह कम नहीं है।</p>
<p>भारत का एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम निर्धारित समय से काफी आगे चल रहा है। पहले सरकार ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल (E20) मिलाने का लक्ष्य 2030 तक रखा था, जिसे बाद में घटाकर 2025-26 कर दिया गया। हालिया आंकड़ों के अनुसार, भारत ने वर्ष 2022-23 में 12.06% और 2023-24 में 14.60% एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लिया था।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/0210.webp" alt="0210" width="1280" height="720"></img></p>
<p>चालू वर्ष में 15 मई 2026 से ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) द्वारा E22, E25, E27 और E30 ब्लेंड के लिए नए गुणवत्ता मानक (IS 19850:2026) लागू कर दिए गए हैं। इन नए मानकों में एथेनॉल की मात्रा, ऑक्टेन रेटिंग, सल्फर की सीमा और सुरक्षा से जुड़े सभी नियम स्पष्ट रूप से निर्धारित किए गए हैं।</p>
<p>एथेनॉल युक्त पेट्रोल को लेकर शुरुआत में कुछ विवाद भी सामने आए थे। सितंबर 2025 में पूरे देश में E20 फ्यूल लागू करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दायर की गई थी, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया था। इसके अलावा कुछ लोगों ने यह भी मांग की थी कि पेट्रोल पंपों पर एथेनॉल युक्त पेट्रोल के साथ-साथ 'एथेनॉल रहित साधारण पेट्रोल' भी उपलब्ध कराया जाए। हालांकि, सरकार ने इस मांग को स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया और कहा कि यह फैसला व्यापक विचार-विमर्श और किसानों के आर्थिक हितों को ध्यान में रखकर लिया गया है।</p>
<p>भारत सरकार ने 2025-26 तक 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य रखा था और फरवरी 2025 तक ही 17.98% का बड़ा आंकड़ा हासिल कर लिया था। एक्साइज ड्यूटी में दी गई यह नई छूट दर्शाती है कि सरकार भविष्य (E30 और उससे आगे) के लिए पूरी तरह तैयार है। यह कदम न केवल ऑटोमोबाइल क्षेत्र को 'फ्लेक्स-फ्यूल' तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित करेगा, बल्कि भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक मजबूत रोडमैप भी प्रदान करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 17:24:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देश की सबसे बड़ी HDFC बैंक ने MCLR बढ़ाकर सबको चौंकाया; क्या अब आपका होम और कार लोन हो जाएगा महंगा?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>देश की सबसे बड़ी बैंक HDFC बैंक ने अपने ग्राहकों को झटका दिया है। बैंक ने अपने लोन महंगे कर दिए हैं। HDFC बैंक ने अपनी मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट यानी MCLR में बढ़ोतरी की है। बैंक की वेबसाइट के अनुसार, नई दरें सोमवार, 8 जून से लागू कर दी गई हैं। यानी MCLR से जुड़ी सभी तरह की लोन योजनाएं महंगी हो सकती हैं और EMI का बोझ बढ़ सकता है।</p>
<p>HDFC बैंक ने अपने MCLR दरों में 5-10 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की है। नई दरों पर नजर डालें तो ओवरनाइट लोन पर MCLR को 8.05 प्रतिशत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/business/the-countrys-largest-hdfc-bank-surprised-everyone-by-increasing-mclr/article-2369"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/hdfc-bank3.webp" alt=""></a><br /><p>देश की सबसे बड़ी बैंक HDFC बैंक ने अपने ग्राहकों को झटका दिया है। बैंक ने अपने लोन महंगे कर दिए हैं। HDFC बैंक ने अपनी मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट यानी MCLR में बढ़ोतरी की है। बैंक की वेबसाइट के अनुसार, नई दरें सोमवार, 8 जून से लागू कर दी गई हैं। यानी MCLR से जुड़ी सभी तरह की लोन योजनाएं महंगी हो सकती हैं और EMI का बोझ बढ़ सकता है।</p>
<p>HDFC बैंक ने अपने MCLR दरों में 5-10 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की है। नई दरों पर नजर डालें तो ओवरनाइट लोन पर MCLR को 8.05 प्रतिशत से बढ़ाकर 8.10 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके अलावा, 3 महीने की अवधि वाले लोन के लिए यह बढ़कर 8.20 प्रतिशत और 6 महीने के लिए 8.35 प्रतिशत हो गया है। 1 वर्ष की अवधि के लिए MCLR बढ़ाकर 8.40 प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं 2 वर्ष के लिए यह 8.55 प्रतिशत और 3 वर्ष के लिए अब 8.65 प्रतिशत हो गया है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/hdfc-bank2.webp" alt="hdfc-bank2" width="1280" height="720"></img>
aajtak.in

<p>गौरतलब है कि अधिकांश होम लोन 1 वर्ष के MCLR से जुड़े होते हैं, इसलिए इसमें 5 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की गई है। खास बात यह है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले शुक्रवार MPC बैठक के नतीजे जारी किए थे और रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा था। इसके बावजूद HDFC बैंक ने यह फैसला लेते हुए नए ग्राहकों के लिए लोन लेना महंगा कर दिया है, साथ ही मौजूदा लोन ग्राहकों पर EMI का बोझ बढ़ाने का काम किया है।</p>
<p><strong>किस पर बढ़ेगा बोझ?</strong></p>
<p>MCLR से जुड़ा यह बदलाव उन ग्राहकों को प्रभावित करेगा जिनका लोन फ्लोटिंग रेट पर आधारित है और जिन्होंने MCLR-लिंक्ड लोन लिया है। बैंक के MCLR का सीधा असर आपकी EMI पर पड़ता है। MCLR बढ़ने पर लोन की ब्याज दर बढ़ जाती है, जिससे आपकी EMI भी बढ़ जाती है। वहीं इसके घटने पर लोन पर ब्याज कम हो जाता है, जिससे आपकी EMI सस्ती हो जाती है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/hdfc-bank.webp" alt="hdfc-bank" width="1280" height="720"></img>
aajtak.in

<p><strong>MCLR क्या है, यह कै</strong><strong>से तय होता है?</strong></p>
<p>MCLR वह न्यूनतम ब्याज दर है जिस पर बैंक अपने ग्राहकों को लोन देता है। इसे तय करने के लिए कई महत्वपूर्ण कारकों पर ध्यान दिया जाता है। इनमें बैंक की जमा दरें (डिपॉजिट रेट), रेपो रेट, परिचालन लागत (ऑपरेशनल कॉस्ट) और कैश रिजर्व रेशियो बनाए रखने की लागत शामिल होती है। आमतौर पर रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में बदलाव का असर MCLR पर भी पड़ता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 22:07:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>85% इथेनॉल वाला पेट्रोल लॉन्च हुआ, सामान्य पेट्रोल से 20 रुपये सस्ता, मंत्रीजी ने कहा- E20 मिलता रहेगा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>E85 ईंधन अब दिल्ली में आ गया है, जो भारत के वैकल्पिक ईंधन मिशन में एक महत्वपूर्ण कदम है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को दिल्ली के पूसा रोड स्थित इंडियन ऑयल आउटलेट पर राष्ट्रीय राजधानी के पहले E85 ईंधन स्टेशन का उद्घाटन किया। इसके साथ ही हाई-इथेनॉल ईंधन की आधिकारिक बिक्री शुरू हो गई है। केंद्रीय मंत्री ने गुरुवार को देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार (वैगन आर फ्लेक्स फ्यूल) के लॉन्च के दौरान बताया था कि नया E85 ईंधन नियमित पेट्रोल की तुलना में काफी सस्ता होगा।</p>
<p>दिल्ली में E85 ईंधन की कीमत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/business/petrol-with-85-ethanol-launched-20-rupees-cheaper-than-normal/article-2357"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/e85-fuel-pump1.webp" alt=""></a><br /><p>E85 ईंधन अब दिल्ली में आ गया है, जो भारत के वैकल्पिक ईंधन मिशन में एक महत्वपूर्ण कदम है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को दिल्ली के पूसा रोड स्थित इंडियन ऑयल आउटलेट पर राष्ट्रीय राजधानी के पहले E85 ईंधन स्टेशन का उद्घाटन किया। इसके साथ ही हाई-इथेनॉल ईंधन की आधिकारिक बिक्री शुरू हो गई है। केंद्रीय मंत्री ने गुरुवार को देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार (वैगन आर फ्लेक्स फ्यूल) के लॉन्च के दौरान बताया था कि नया E85 ईंधन नियमित पेट्रोल की तुलना में काफी सस्ता होगा।</p>
<p>दिल्ली में E85 ईंधन की कीमत ₹82.12 प्रति लीटर तय की गई है। यह वर्तमान E20 पेट्रोल की तुलना में लगभग ₹20 प्रति लीटर सस्ता है। पेट्रोल पंप पर किसी भी तरह की भ्रम की स्थिति से बचने के लिए E85 डिस्पेंसर को अलग ब्रांडिंग और विशेष लेबलिंग के साथ पेश किया गया है। इसकी कम कीमत के कारण यह ईंधन आम ग्राहकों के लिए एक बेहद आकर्षक विकल्प बन सकता है; हालांकि, इसका उपयोग केवल E85-अनुरूप वाहनों में ही किया जा सकता है, जिनकी संख्या फिलहाल बहुत कम है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/e85-fuel-pump.webp" alt="e85-fuel-pump" width="1280" height="720"></img>
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<p><strong>E85 ईंधन क्या है?</strong></p>
<p>वर्तमान में, देश में उपलब्ध E20 पेट्रोल में 20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल होता है। इसके विपरीत, E85 ईंधन में 85% तक इथेनॉल और केवल 15% पेट्रोल होता है। इथेनॉल के अधिक उपयोग से पेट्रोल की खपत कम होती है और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटती है। इथेनॉल का उत्पादन स्थानीय स्तर पर गन्ने, मक्का और चावल से किया जाता है, इसलिए यह ईंधन आर्थिक रूप से भी लाभदायक माना जाता है।</p>
<p>हालांकि दिल्ली का पूसा रोड आउटलेट राजधानी का पहला E85 स्टेशन है, लेकिन सरकार की योजनाएं इससे कहीं बड़ी हैं। प्रारंभिक चरण में दिल्ली-NCR और मुंबई-पुणे-नागपुर कॉरिडोर पर 50 से 100 E85 स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इसके बाद इस वर्ष के अंत तक लगभग 500 स्टेशनों का नेटवर्क स्थापित करने का लक्ष्य है। सरकार 2027 के अंत तक देश के प्रमुख शहरों में 5,000 से अधिक E85 फ्यूल स्टेशन शुरू करने की योजना बना रही है।</p>
<p><strong>किन वाहनों में E85 का उपयोग होगा?</strong></p>
<p>यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह नया E85 फ्यूल हर वाहन के लिए नहीं है; क्योंकि इसका उपयोग केवल E85-अनुरूप इंजन से लैस वाहनों में ही किया जा सकता है। इसके लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए या कैलिब्रेट किए गए फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की आवश्यकता होती है। वर्तमान में भारत में केवल कुछ ही फ्लेक्स-फ्यूल वाहन उपलब्ध हैं या लॉन्च की तैयारी में हैं।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/splendor.webp" alt="splendor" width="1280" height="720"></img>
aajtak.in

<p>हाल ही में, हीरो मोटोकॉर्प ने फ्लेक्स-फ्यूल बाइक की अपनी पहली श्रृंखला स्प्लेंडर प्लस और HF डीलक्स लॉन्च की थी। इन बाइकों के इंजन और मैकेनिज्म में लगभग 39 बदलाव किए गए हैं। कंपनी का दावा है कि दोनों मॉडल E85 इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल पर आसानी से चल सकते हैं। दिलचस्प बात यह है कि इथेनॉल-अनुरूप इंजन होने के बावजूद दोनों बाइकों का पावर आउटपुट बढ़ा है।</p>
<p>इसके अलावा, मारुति सुज़ुकी ने भी अपनी पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार, वैगन आर फ्लेक्स फ्यूल का अनावरण किया है, हालांकि इसे अभी तक बिक्री के लिए लॉन्च नहीं किया गया है। शुरुआत में यह कार फ्लीट ऑपरेटरों (जैसे टैक्सी या कैब सेवाओं) के लिए उपलब्ध होगी। इसके बाद कंपनी निजी मालिकों के लिए भी यह वाहन लॉन्च कर सकती है। मारुति सुज़ुकी का दावा है कि यह कार E100 फ्यूल पर भी आसानी से चल सकती है।</p>
<p>पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा- E20 फ्यूल भी बाजार में मिलता रहेगा। E85 फ्यूल केवल E85 वाहनों के लिए है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 20:14:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>RBI ने नहीं बेचा 12 बिलियन डॉलर का सोना, खबरें झूठी हैं: सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>देश के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) को मजबूत करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 12 बिलियन अमेरिकी डॉलर (USD 12 billion) के स्वर्ण भंडार की बिक्री की है, ऐसी मीडिया रिपोर्टों को केंद्र सरकार और केंद्रीय बैंक ने कड़े शब्दों में खारिज कर दिया है। बुधवार को सरकार ने इस संबंध में स्पष्टीकरण जारी कर रिपोर्टों का खंडन किया।</p>
<p>अमेरिकी समाचार एजेंसी 'ब्लूमबर्ग' (Bloomberg) की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में चल रहे संघर्ष के प्रभावों से अपनी विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों की रक्षा करने के लिए RBI ने अपने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/business/rbi-did-not-sell-gold-worth-12-billion-dollars-the/article-2347"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/282.webp" alt=""></a><br /><p>देश के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) को मजबूत करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 12 बिलियन अमेरिकी डॉलर (USD 12 billion) के स्वर्ण भंडार की बिक्री की है, ऐसी मीडिया रिपोर्टों को केंद्र सरकार और केंद्रीय बैंक ने कड़े शब्दों में खारिज कर दिया है। बुधवार को सरकार ने इस संबंध में स्पष्टीकरण जारी कर रिपोर्टों का खंडन किया।</p>
<p>अमेरिकी समाचार एजेंसी 'ब्लूमबर्ग' (Bloomberg) की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में चल रहे संघर्ष के प्रभावों से अपनी विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों की रक्षा करने के लिए RBI ने अपने स्वर्ण भंडार का कुछ हिस्सा बेच दिया हो सकता है।</p>
<p><strong>RBI और PIB द्वारा फैक्ट-चेक (Fact-Check): रिपोर्टें 'फेक' साबित हुईं</strong></p>
<p>बुधवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में भारतीय रिजर्व बैंक ने लगभग 12 बिलियन डॉलर के सोने की बिक्री के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। RBI का स्पष्टीकरण: केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि, ‘ये रिपोर्टें बिल्कुल सही नहीं हैं।’ बैंक ने आगे कहा कि देश का भौतिक स्वर्ण भंडार (Physical Stock) आज भी 880.52 टन पर यथावत है, इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। RBI ने आम जनता से अपील की है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में केवल समय-समय पर जारी की जाने वाली आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।</p>
<p><strong>PIB फैक्ट-चेक: </strong>भारत सरकार की आधिकारिक एजेंसी पीआईबी (Press Information Bureau) ने भी इन रिपोर्टों का फैक्ट-चेक कर उन्हें पूरी तरह 'फेक' (नकली) बताया है।</p>
<p>PIB ने सोशल मीडिया पोस्ट में RBI के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी घटने के बजाय उल्टा बढ़ी है। सितंबर 2025 के अंत में यह हिस्सेदारी 13.92% थी, जो 31 मार्च 2026 को बढ़कर 16.70% हो गई। इतना ही नहीं, 22 मई 2026 तक यह हिस्सेदारी और बढ़कर 16.85% पर पहुंच गई। RBI अपने मासिक बुलेटिन में इस भौतिक भंडार का विवरण प्रकाशित करता है और यह अब तक अपरिवर्तित है।</p>
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<p><strong>ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में क्या दावा किया गया था?</strong></p>
<p>ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि 22 मई को समाप्त हुए दो सप्ताह के दौरान RBI ने लगभग 12 बिलियन डॉलर का सोना बेचा हो सकता है और इसके बदले 7.5 बिलियन डॉलर की विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियाँ (Foreign-currency assets) खरीदी हैं।</p>
<p>रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि विदेशी मुद्रा बाजार में RBI के इस कदम से भारतीय रुपये को समर्थन मिला था। इसके कारण 20 मई को रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने के बाद भी अन्य एशियाई मुद्राओं की तुलना में रुपये का प्रदर्शन बेहतर रहा था। मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 0.2% गिरकर 95.17 पर बंद हुआ था।</p>
<p><strong>सोने का भंडार कहाँ रखा जाता है?</strong></p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, मार्च के अंत तक RBI के पास कुल 880.52 मीट्रिक टन सोने का भंडार था, जिसमें से 77% हिस्सा भारत में ही सुरक्षित रखा गया है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि इससे छह महीने पहले तक केवल 66% सोना देश में रखा गया था। अप्रैल में जारी RBI की अर्धवार्षिक विदेशी मुद्रा रिपोर्ट के अनुसार, भारत का जो स्वर्ण भंडार विदेश में रखा गया है, वह मुख्य रूप से 'बैंक ऑफ इंग्लैंड' (Bank of England) और 'बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स' (Bank for International Settlements) के पास जमा है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 12:36:31 +0530</pubDate>
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