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                <title>राजनीति - Khabarchhe Hindi</title>
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                <title>सोनम वांगचुक ने ऐसा क्यों कहा- 2047 तक विकसित भारत का सपना मौजूदा व्यवस्था में मुश्किल, उन्होंने किन अहम बदलावों की बात की…</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> एक्टिविस्ट और शिक्षा सुधार के मुद्दों पर लगातार आवाज उठाने वाले सोनम वांगचुक ने भारत के विकास को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि अगर देश में मौजूदा व्यवस्था इसी तरह चलती रही तो 2047 तक भारत के विकसित देश बनने का लक्ष्य पूरा करना मुश्किल होगा। वांगचुक ने भारत की प्रति व्यक्ति आय को चिंता का विषय बताते हुए कहा कि कई ऐसे देश, जो कभी भारत से पीछे या बराबरी पर थे, आज उससे काफी आगे निकल चुके हैं।<br />दरअसल, सोनम वांगचुक ने एक वीडियो जारी किया है। इसमें उन्होंने देश की मौजूद</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/why-did-sonam-wangchuk-say-this-%E2%80%93-the-dream-of/article-2734"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-08/112.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> एक्टिविस्ट और शिक्षा सुधार के मुद्दों पर लगातार आवाज उठाने वाले सोनम वांगचुक ने भारत के विकास को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि अगर देश में मौजूदा व्यवस्था इसी तरह चलती रही तो 2047 तक भारत के विकसित देश बनने का लक्ष्य पूरा करना मुश्किल होगा। वांगचुक ने भारत की प्रति व्यक्ति आय को चिंता का विषय बताते हुए कहा कि कई ऐसे देश, जो कभी भारत से पीछे या बराबरी पर थे, आज उससे काफी आगे निकल चुके हैं।<br />दरअसल, सोनम वांगचुक ने एक वीडियो जारी किया है। इसमें उन्होंने देश की मौजूद व्यवस्था और कुछ अहम सुधारों के बारे में बताया है। वांगचुक ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत ठीक नहीं थी। इसी दौरान उन्होंने देश, उसकी व्यवस्था और भविष्य को लेकर काफी विचार किया। इसके बाद उन्होंने लोगों के सामने अपनी चिंताएं और कुछ सुझाव रखे। उनका जोर केवल सरकार बदलने पर नहीं, बल्कि शिक्षा, राजनीतिक नेतृत्व और व्यवस्था में व्यापक बदलाव पर रहा।</p>
<p><strong>भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती शिक्षा</strong></p>
<p>वांगचुक के मुताबिक देश की प्रगति का सीधा संबंध उसकी शिक्षा व्यवस्था से है। जब तक शिक्षा का स्तर नहीं सुधरेगा, तब तक आर्थिक और सामाजिक विकास को स्थायी गति देना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि देश में ऐसी ठोस शिक्षा नीति और व्यवस्था की जरूरत है, जो बच्चों और युवाओं को बेहतर भविष्य दे सके।<br />उन्होंने शिक्षा को केवल डिग्री या रोजगार तक सीमित करने के बजाय देश की सामर्थ्य बढ़ाने का आधार बताया। उनका कहना है कि अच्छे शिक्षक, बेहतर शिक्षा व्यवस्था और दूरदर्शी नीति ही आने वाली पीढ़ी को मजबूत बना सकती है। शिक्षा पीछे रहेगी तो देश का भविष्य भी पीछे रह जाएगा। वांगचुक ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद भी नए नेतृत्व से बड़े बदलाव की उम्मीद को लेकर सवाल उठाया। उनका संकेत था कि केवल मंत्री या सरकार बदलने से समस्या का समाधान नहीं होगा, जब तक शिक्षा व्यवस्था की बुनियादी खामियों को दूर नहीं किया जाता।</p>
<p><strong>पड़ोसी देशों का उदाहरण देकर जताई चिंता</strong></p>
<p>वांगचुक ने भारत की प्रति व्यक्ति आय का जिक्र करते हुए कहा कि करीब 50 साल पहले भारत से पीछे या बराबर रहने वाले कई पड़ोसी और एशियाई देश अब काफी आगे निकल चुके हैं। उन्होंने थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, श्रीलंका और बांग्लादेश का उदाहरण दिया। उनका कहना है कि अगर भारत को 2047 तक दुनिया में सम्मानित और विकसित देश के रूप में स्थापित होना है तो केवल आर्थिक आंकड़ों पर ध्यान देने से काम नहीं चलेगा। देश की शिक्षा, शासन व्यवस्था और नेतृत्व के तरीके में बड़े बदलाव करने होंगे।</p>
<p><strong>भ्रष्टाचार अब नए रूप में पैर पसार रहा है</strong></p>
<p>वांगचुक ने देश की शासन व्यवस्था की समस्याओं को किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित करने से भी इनकार किया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग पार्टियों की सरकारों के दौरान भी विरोध की आवाजों को दबाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। उन्होंने 2012-13 के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि उस आंदोलन के बाद राजनीतिक बदलाव जरूर आया, लेकिन सरकार बदलने के बावजूद भ्रष्टाचार और अन्याय पूरी तरह खत्म नहीं हुए। उनके मुताबिक समय के साथ ये समस्याएं खत्म होने के बजाय नए रूप में और गंभीर होती गईं। इसलिए उन्होंने राजनीतिक बदलाव से आगे बढ़कर व्यवस्था में बदलाव की जरूरत बताई।</p>
<p><strong>‘दूसरा स्वतंत्रता आंदोलन’ शुरू करने की अपील</strong></p>
<p>वांगचुक ने देशवासियों से दूसरे स्वतंत्रता आंदोलन की दिशा में सोचने की अपील की। उनके लिए इसका मतलब किसी हिंसक संघर्ष से नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से देश के लिए बेहतर नेतृत्व और व्यवस्था तैयार करना है। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसी शांतिपूर्ण क्रांति की जरूरत है, जिसके जरिए देश के लिए सही नेतृत्व सामने आए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे केवल राजनीतिक दलों या स्थापित चेहरों पर निर्भर रहने के बजाय अपने आसपास ऐसे लोगों की पहचान करें, जो निस्वार्थ, निडर, चरित्रवान और सक्षम हों। वांगचुक ने देशभर के लोगों से अपने क्षेत्र और देश से कम से कम एक ऐसे व्यक्ति का नाम सुझाने को कहा है। उन्होंने कहा कि इन लोगों के नाम उनके लिए स्वतंत्रता दिवस का तोहफा होंगे। वह ऐसे लोगों से मिलना चाहते हैं, जो देश के भविष्य का नया नक्शा तैयार करने में योगदान दे सकें।</p>
<p><strong>बदलाव की शुरुआत आम लोगों से करने की बात</strong></p>
<p>वांगचुक का संदेश केवल सरकार या नेताओं के लिए नहीं था। उन्होंने नागरिकों से भी अपनी भूमिका तय करने की अपील की। उनका कहना है कि अगर देश के लोग अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर काम करने का फैसला करें तो बदलाव संभव है। उन्होंने अच्छे शिक्षकों, नेताओं और विचारकों को आगे लाने की जरूरत बताई। उनके मुताबिक देश में प्रतिभा और ईमानदार लोग मौजूद हैं, लेकिन जरूरत उन्हें पहचानने और नेतृत्व की भूमिका तक पहुंचाने की है।</p>
<p><strong>नीट पेपर लीक को लेकर आंदोलन कर चुके हैं सोनम वांगचुक</strong></p>
<p>इससे पहले शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली के मुद्दे पर उनके आंदोलन ने भी इसी सोच को सामने रखा था। 28 जून को उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। यह कदम NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों के खिलाफ छात्रों के समर्थन में उठाया गया था। लंबी भूख हड़ताल के दौरान तबीयत बिगड़ने पर 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस उन्हें जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले गई थी। बाद में उन्हें मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया। सरकार से आश्वासन मिलने के बाद 24 जुलाई को उन्होंने 26 दिन का अनशन खत्म किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 13:45:43 +0530</pubDate>
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                <title>AAP ने दिल्ली में भाजपा सरकार द्वारा छात्राओं को वितरित की जा रही साइकिलों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठाए</title>
                                    <description><![CDATA[<p>आम आदमी पार्टी (AAP) ने दिल्ली में भाजपा सरकार द्वारा छात्राओं को वितरित की जा रही साइकिलों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। बुधवार को, AAP दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने खुले बाजार से खरीदी गई साइकिल के साथ सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई साइकिल रखकर उनके टायर, ब्रेक, रिम और क्रैंक की तुलना की। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने लगभग 1.30 लाख साइकिल ₹6,957 की दर से खरीदी हैं, जबकि AAP ने बाजार से ₹4,200 में साइकिल खरीदी थी। भारद्वाज ने आरोप लगाया कि अधिक कीमत चुकाए जाने के बावजूद सरकारी साइकिल में कई हिस्सों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/aap-raised-serious-questions-about-the-quality-of-bicycles-being/article-2726"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-08/aap.webp" alt=""></a><br /><p>आम आदमी पार्टी (AAP) ने दिल्ली में भाजपा सरकार द्वारा छात्राओं को वितरित की जा रही साइकिलों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। बुधवार को, AAP दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने खुले बाजार से खरीदी गई साइकिल के साथ सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई साइकिल रखकर उनके टायर, ब्रेक, रिम और क्रैंक की तुलना की। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने लगभग 1.30 लाख साइकिल ₹6,957 की दर से खरीदी हैं, जबकि AAP ने बाजार से ₹4,200 में साइकिल खरीदी थी। भारद्वाज ने आरोप लगाया कि अधिक कीमत चुकाए जाने के बावजूद सरकारी साइकिल में कई हिस्सों की गुणवत्ता निम्न स्तर की है, और पूरे मामले की जांच की मांग की।</p>
<p>सौरभ भारद्वाज ने बताया कि, जब दोनों साइकिल लगभग एक जैसी दिखती हैं, लेकिन उनके अलग-अलग हिस्सों में महत्वपूर्ण अंतर है। सरकारी साइकिल के टायर को लोकल बताते हुए, उन्होंने दावा किया कि दूसरी साइकिल में ब्रांडेड टायर लगाया गया है। भारद्वाज ने कहा कि बाजार से खरीदी गई साइकिल के टायर की कीमत ₹350 से ₹500 के बीच है, जबकि सरकारी साइकिल के टायर की कीमत लगभग ₹150 है। उन्होंने रिम की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकारी साइकिल पर रिम घटिया है। ब्रेक की तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि बाजार से खरीदी गई साइकिल में एल्युमिनियम के ब्रेक लगे हैं, जबकि सरकारी साइकिल में प्लास्टिक के ब्रेक का इस्तेमाल किया गया है। इन अंतरों की जांच मौके पर मौजूद एक साइकिल मैकेनिक से कराई गई थी।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/aap1.webp" alt="aap1" width="1280" height="720"></img>
etvbharat.com

<p>प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, साइकिल मैकेनिक ने दोनों साइकिलों के विभिन्न घटकों की तुलना की। मैकेनिक के अनुसार, एक साइकिल में एल्युमिनियम के घटक थे, जबकि दूसरी में प्लास्टिक के घटक लगाए गए हैं। उन्होंने दोनों साइकिलों के टायरों के बीच के अंतर पर भी प्रकाश डाला। मैकेनिक ने दावा किया कि एक साइकिल में ब्रांडेड टायर लगाया गया था जबकि दूसरी में लोकल टायर है। इसके अलावा, उन्होंने सरकारी साइकिल पर क्रैंक को घटिया गुणवत्ता का बताया।</p>
<p>सौरभ भारद्वाज ने बताया कि AAP नेता साइकिल विशेषज्ञ नहीं हैं; इसलिए, तकनीकी अंतर समझाने के लिए एक साइकिल मैकेनिक को मौके पर बुलाया गया था। दिल्ली सरकार ने प्रति यूनिट ₹6,957 की दर से लगभग 1.30 लाख साइकिल खरीदी हैं। इसके विपरीत, AAP ने खुदरा बाजार से ₹4,200 में साइकिल खरीदने का दावा किया था। उन्होंने कहा कि ₹4,200 की साइकिल की खरीद की रसीद उनके नाम पर है और इसे सार्वजनिक किया जाएगा। AAP का सवाल है कि सरकार ने इतनी बड़ी संख्या में साइकिल लगभग ₹7,000 में क्यों खरीदीं जबकि वे बाजार में लगभग ₹4,200 में उपलब्ध हैं।</p>
<p>AAP विधायक संजीव झा ने भी साइकिल पर 'स्कायलर' ब्रांडिंग को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 'स्कायलर' मॉडल की जो स्पेसिफिकेशन्स टेंडर में दी गई थीं, उनमें सात गियर, सस्पेंशन और डिस्क ब्रेक शामिल हैं। झा ने बताया कि छात्राओं को वितरित की गई साइकिलों में न तो सात गियर हैं, न सस्पेंशन और न डिस्क ब्रेक हैं। उन्होंने सवाल किया कि अगर टेंडर में विशेष मॉडल और स्पेसिफिकेशन्स तय की गई थीं तो आपूर्ति की गई साइकिल उन स्पेसिफिकेशन्स से मेल क्यों नहीं खाती। उन्होंने बताया कि 'स्कायलर' संबंधित मॉडल बाजार में उपलब्ध नहीं है और इस ब्रांड नाम के इस्तेमाल की जांच की मांग की थी।</p>
<p>संजीव झा ने बताया कि AAP विधानसभा के अंदर और बाहर इस मुद्दे को उठाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया था कि इस मामले पर चर्चा नहीं होने दी जा रही है। अगर सरकार पूरे मामले पर कोई जवाब नहीं देती है, तो AAP भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) और CBI से शिकायत करेगी। उन्होंने इस मामले की जांच की मांग की और शिक्षा मंत्री आशीष सूद को चुनौती दी थी कि वे दोनों साइकिलों की गुणवत्ता और विशिष्टताओं की जांच करने के लिए उनके साथ-साथ तुलना करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 13:00:20 +0530</pubDate>
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                <title>शिक्षा मंत्री पद से क्यों दिया इस्तीफा? धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार तोड़ी चुप्पी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>शिक्षा मंत्री पद छोड़ने को लेकर धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ी है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और संबलपुर के सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को बताया कि NEET पेपर लीक मुद्दे को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान 'Gen-Z' को गुमराह करने का प्रयास किया गया था, जिसके कारण उन्हें केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद छोड़ना पड़ा।</p>
<p>दिल्ली के जंतर मंतर पर भारी विरोध प्रदर्शनों के बीच इस्तीफा देने के लगभग दो सप्ताह बाद प्रधान ने GM यूनिवर्सिटी में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए अपने इस्तीफे के बारे में बात की थी। इस्तीफे के बाद यह</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/why-did-dharmendra-pradhan-resign-from-the-post-of-education/article-2703"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-08/dharmendra-pradhan1.webp" alt=""></a><br /><p>शिक्षा मंत्री पद छोड़ने को लेकर धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ी है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और संबलपुर के सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को बताया कि NEET पेपर लीक मुद्दे को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान 'Gen-Z' को गुमराह करने का प्रयास किया गया था, जिसके कारण उन्हें केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद छोड़ना पड़ा।</p>
<p>दिल्ली के जंतर मंतर पर भारी विरोध प्रदर्शनों के बीच इस्तीफा देने के लगभग दो सप्ताह बाद प्रधान ने GM यूनिवर्सिटी में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए अपने इस्तीफे के बारे में बात की थी। इस्तीफे के बाद यह उनका पहला सार्वजनिक बयान है।</p>
<p>प्रधान ने कहा कि, Gen-Z हमारे बच्चे हैं। कुछ लोगों ने उन्हें गुमराह करने का प्रयास किया। यह मेरे लिए कोई व्यक्तिगत मुद्दा नहीं था। भारत में हर साल कम से कम दो करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं; पिछले 10 वर्षों में 20 करोड़ बच्चों का जन्म हुआ है। उनकी अपनी आकांक्षाएं हैं और वे भारत को 'विश्व गुरु' बनाएंगे। यह पद मेरे लिए महत्वपूर्ण नहीं था। उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संपर्क किया था और इस्तीफा देने की पेशकश की थी।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/dharmendra-pradhan3.webp" alt="dharmendra-pradhan3" width="1280" height="720"></img>
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<p>गौरतलब है कि धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। रायराखोल में एक अन्य सभा में प्रधान ने ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और BJD प्रमुख नवीन पटनायक पर निशाना साधते हुए कहा कि, वे BJD कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए विरोध और 'वापस जाओ' के नारों से परेशान नहीं हैं। एयरपोर्ट के पास BJD युवा और छात्र शाखा के कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए, जहां ‘धर्मेंद्र प्रधान वापस जाओ’ जैसे नारे लगाए गए थे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि, मैं किसान का बेटा हूं। भले ही आप मुझे वापस जाने के लिए कहें, फिर भी मैं वापस आऊंगा।’ BJD प्रमुख पर युवाओं को उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में शामिल करने का आरोप लगाते हुए प्रधान ने कहा कि, नवीन बाबू मुझे ओडिशा के लोगों के लिए शर्म की बात और बुरा व्यक्ति भी कहते हैं। उन्होंने पूछा, क्या मैंने कभी ऐसा कुछ किया है जिससे ओडिशा के लोगों को शर्म आए? जवाब में, सभा ने जोरदार ‘नहीं’ का नारा लगाया। उन्होंने कहा, मैं ऐसे कार्य कभी नहीं करूंगा, जिससे राज्य की प्रतिष्ठा धूमिल हो।’</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/dharmendra-pradhan.webp" alt="dharmendra-pradhan" width="1280" height="720"></img>
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<p>प्रधान ने बताया कि वे 12 साल पहले भगवान जगन्नाथ और संबलपुर की प्रमुख देवी मां समलेश्वरी के आशीर्वाद से केंद्रीय मंत्री बने थे। पटनायक के खिलाफ उनकी टिप्पणी एक मंच पर की गई थी, जहां BJD विधायक और ओडिशा विधानसभा में उपनेता प्रसन्ना आचार्य भी मौजूद थे। प्रधान ने कहा कि, BJD के विरोध को ध्यान में रखते हुए, मैंने प्रसन्ना-भाई से सलाह ली कि मुझे उपस्थित होना चाहिए या नहीं। प्रसन्ना बाबू ने मुझे आने के लिए कहा और आश्वासन दिया कि मेरा स्वागत किया जाएगा। मैं उनकी अनुमति से ही यहां आया हूं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Aug 2026 14:54:55 +0530</pubDate>
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                <title>क्या है ‘गोबरधन’ योजना? जिसके लिए 23,731 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मोदी मंत्रिमंडल ने आज ₹32,701 करोड़ के कुल खर्च के साथ दो बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। गोबरधन योजना के तहत बायोगैस उत्पादन और वितरण को बढ़ावा देने के लिए ₹23,731 करोड़ मंजूर किए गए हैं। इस योजना का उद्देश्य जैविक कचरे और पशुओं के गोबर से बायोगैस/CBG का उत्पादन बढ़ाना और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना है। इतना ही नहीं, ₹8,970 करोड़ के खर्च से बिहाटा चरियाली से असम के तेजपुर तक 4-लेन राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के लिए मंजूरी दी गई है।</p>
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firstpost.com

<p><strong>गोबरधन योजना क्यों खास है?</strong></p>
<p>गोबरधन योजना वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लागू की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/what-is-gobardhan-scheme-for-which-rs-23731-crore-will/article-2700"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-08/modi-cabinet-(1).webp" alt=""></a><br /><p>मोदी मंत्रिमंडल ने आज ₹32,701 करोड़ के कुल खर्च के साथ दो बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। गोबरधन योजना के तहत बायोगैस उत्पादन और वितरण को बढ़ावा देने के लिए ₹23,731 करोड़ मंजूर किए गए हैं। इस योजना का उद्देश्य जैविक कचरे और पशुओं के गोबर से बायोगैस/CBG का उत्पादन बढ़ाना और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना है। इतना ही नहीं, ₹8,970 करोड़ के खर्च से बिहाटा चरियाली से असम के तेजपुर तक 4-लेन राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के लिए मंजूरी दी गई है।</p>
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firstpost.com

<p><strong>गोबरधन योजना क्यों खास है?</strong></p>
<p>गोबरधन योजना वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लागू की जाएगी। इस पहल के तहत कृषि अवशेषों, पशुओं के गोबर, गन्ने के बचे हुए कचरे, गीले कचरे और अन्य जैव-कचरे को स्वच्छ ईंधन और जैव-खाद में परिवर्तित किया जाएगा। इससे ग्रामीण निवासियों की आय बढ़ेगी और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। गोबरधन योजना से बायोगैस क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा। इसके लिए सरकार ने कई बड़े फैसले लिए हैं। गैस की सुनिश्चित मांग और उचित कीमत सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। सरकार गैस वितरण के लिए प्लांट स्थापित करने और पाइपलाइन बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए वित्तीय सहायता भी प्रदान करेगी। सरकार आसानी से ऋण उपलब्ध कराएगी। इस योजना से प्रदूषण भी घटेगा और गांव के लोगों को रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे।</p>
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thehindu.com

<p>मोदी कैबिनेट ने गुवाहाटी-तेजपुर NH-15 कॉरिडोर प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दी है, जो असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच कनेक्टिविटी में सुधार करेगा। यह चार-लेन, एक्सेस-नियंत्रित हाईवे 'बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर' (BOT) टोल मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। गुवाहाटी-तेजपुर NH-15 कॉरिडोर प्रोजेक्ट के हिस्से के रूप में, भारतीय वायुसेना के सहयोग से तेजपुर बाईपास पर 4.9 किलोमीटर की इमरजेंसी लैंडिंग सुविधा बनाई जाएगी। इससे NH-27 पर ट्रैफिक की भीड़ कम होगी। भारी भीड़ वाले क्षेत्रों में ट्रैफिक का प्रबंधन करने के लिए पांच प्रमुख बाईपास भी बनाए जाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Aug 2026 12:25:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पहले ममता बनर्जी को छोड़ा, अब भाजपा से बनाई दूरी... बंगाल के 3 बागी सांसदों की क्या मजबूरी है?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>विधानसभा चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में ट्विस्ट और टर्न अभी भी बंद नहीं हुए हैं। अब, मुर्शिदाबाद के तीन सांसदों अबू ताहिर खान, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान ने हलचल मचा रखी है। शुरुआत में, तीनों ममता बनर्जी की TMC से अलग होकर 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में शामिल हुए। अब, उन्होंने सत्तारूढ़ भाजपा की अगुवाई वाले केंद्रीय गठबंधन के साथ औपचारिक रूप से न जुड़ने का फैसला लिया है, जिसके पीछे गहरी रणनीतिक सोच है।</p>
<p>केंद्रीय गठबंधन में शामिल होने के बजाय, तीनों ने सोच-समझकर अलगाव का रुख अपनाया है। वे नई दिल्ली में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/first-left-mamata-banerjee-now-distanced-herself-from-bjp-what/article-2695"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-08/tmc-mps2.webp" alt=""></a><br /><p>विधानसभा चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में ट्विस्ट और टर्न अभी भी बंद नहीं हुए हैं। अब, मुर्शिदाबाद के तीन सांसदों अबू ताहिर खान, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान ने हलचल मचा रखी है। शुरुआत में, तीनों ममता बनर्जी की TMC से अलग होकर 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में शामिल हुए। अब, उन्होंने सत्तारूढ़ भाजपा की अगुवाई वाले केंद्रीय गठबंधन के साथ औपचारिक रूप से न जुड़ने का फैसला लिया है, जिसके पीछे गहरी रणनीतिक सोच है।</p>
<p>केंद्रीय गठबंधन में शामिल होने के बजाय, तीनों ने सोच-समझकर अलगाव का रुख अपनाया है। वे नई दिल्ली में उच्च स्तरीय NDA संसदीय बैठकों से दूर रहते हैं, जबकि राज्य और केंद्रीय नेतृत्व के साथ सिर्फ प्रशासनिक मामलों पर ही बातचीत करते हैं। जब नेताओं से उनके भविष्य के राजनीतिक रास्ते के बारे में पूछा गया तो जानबूझकर चुप्पी साधने की यह रणनीति स्पष्ट दिखाई दी थी।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/tmc-mps1.webp" alt="tmc-mps1" width="1280" height="720"></img>
indianexpress.com

<p>जंगीपुर के सांसद खलीलुर रहमान ने बताया कि, ‘हमें गृह मंत्री के साथ दो विषयों पर चर्चा करनी थी; हम किसी अन्य मुद्दे पर कुछ भी नहीं कह सकते।’ यह संकेत देता है कि वे गठबंधन बनाने के बजाय मुद्दों पर बातचीत को प्राथमिकता दे रहे हैं। NCPI के 3 सांसदों ने पश्चिम बंगाल में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के मुद्दे को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी।</p>
<p>चर्चा को केवल विकास और निर्वाचन क्षेत्र से जुड़े मामलों, जैसे मतदाता सूची सुधार और स्थानीय प्रशासन तक सीमित करके, ये सांसद वैचारिक गठजोड़ या समझौते के आरोपों से खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। केंद्रीय गठबंधन में पूरी तरह शामिल होने से इन तीनों सांसदों का इनकार राज्य के राजनीतिक भविष्य को लेकर विभिन्न संकेत देता है।</p>
<p><strong>क्या मुर्शिदाबाद</strong><strong> की डेमोग्राफी है कारण?</strong></p>
<p>मुर्शिदाबाद बंगाल के सबसे जनसांख्यिकीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में से एक है। तीनों यहीं की सीटों जंगीपुर (खलीलुर रहमान), बहरामपुर (यूसुफ पठान) और मुर्शिदाबाद (अबू ताहिर खान) से सांसद हैं।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/tmc-mps.webp" alt="tmc-mps" width="1280" height="720"></img>
aajtak.in

<p>अल्पसंख्यक-बहुल निर्वाचन क्षेत्र के प्रतिनिधियों के लिए, औपचारिक रूप से भाजपा को अपनाने से जमीनी स्तर पर मतदाताओं से पूरी तरह दूर होने का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि, इन तीनों ने अलग रुख अपनाया है, यह तथ्य 20 सदस्यों वाले NCPI समूह के लिए भी चिंता का कारण है। इससे स्पष्ट होता है कि जब ये सांसद TMC से अलग हो गए हैं, लेकिन इसमें भी विभाजन की संभावना है।</p>
<p>तो भाजपा के सामने भी यहां चुनौती होगी; क्योंकि जहां राष्ट्रीय दल अक्सर अलग हुए समूहों को एकीकृत 'वोट बैंक' में बदलने की कोशिश करते हैं, वहीं ये सांसद पार्टी के सामूहिक फैसलों से ज्यादा अपने संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में अपनी स्थिति बनाए रखने को प्राथमिकता दे रहे हैं।</p>
<p>पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों की तैयारियों के बीच मुर्शिदाबाद की तीनों लोकसभा सीटों का राजनीतिक संदेश महत्वपूर्ण माना जाता है। यह स्पष्ट है कि जिन क्षेत्रों में स्थानीय मुद्दे और जनसांख्यिकीय समीकरण प्रमुख भूमिका निभाते हैं, वहां सिर्फ बड़े राजनीतिक गठबंधन पर्याप्त नहीं होते। ऐसे क्षेत्रों में चुनाव जीतने के लिए एक मजबूत स्थानीय पकड़ और जमीनी संगठन सबसे बड़ी ताकत होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 19:57:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>PM मोदी ने IIT दिल्ली के छात्रों से क्यों कहा, 'मैं बाबा बागेश्वर तो नहीं लेकिन...'</title>
                                    <description><![CDATA[<p>PM नरेंद्र मोदी ने शनिवार को IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में हिस्सा लिया था. उन्होंने छात्रों को उनकी नई शुरुआत के लिए बधाई दी थी और उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी थीं.</p>
<p>PM नरेंद्र मोदी ने मजाक में छात्रों से कहा था कि, आज दीक्षांत समारोह में सभी मौजूद हैं, तो वे अपने भविष्य के बारे में सोच रहे होंगे. हंसते हुए उन्होंने कहा था कि, 'मैं बाबा बागेश्वर तो नहीं, लेकिन कुछ तो चल रहा होगा.' PM मोदी ने कहा था कि हर छात्र का कल के प्रति दृष्टिकोण अलग होता है.</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/162.webp" alt="162" width="1200" height="720" /></p>
<p>भविष्य के लिए छात्रों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/why-did-pm-modi-tell-the-students-of-iit-delhi/article-2698"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-08/105.webp" alt=""></a><br /><p>PM नरेंद्र मोदी ने शनिवार को IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में हिस्सा लिया था. उन्होंने छात्रों को उनकी नई शुरुआत के लिए बधाई दी थी और उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी थीं.</p>
<p>PM नरेंद्र मोदी ने मजाक में छात्रों से कहा था कि, आज दीक्षांत समारोह में सभी मौजूद हैं, तो वे अपने भविष्य के बारे में सोच रहे होंगे. हंसते हुए उन्होंने कहा था कि, 'मैं बाबा बागेश्वर तो नहीं, लेकिन कुछ तो चल रहा होगा.' PM मोदी ने कहा था कि हर छात्र का कल के प्रति दृष्टिकोण अलग होता है.</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/162.webp" alt="162" width="1280" height="720"></img></p>
<p>भविष्य के लिए छात्रों के सपनों का जिक्र करते हुए, PM नरेंद्र मोदी ने कहा कि, कुछ छात्र अपनी पहली नौकरी और वेतन का इंतजार कर रहे होंगे, जबकि कोई स्टार्टअप शुरू करने का सपना देख रहा होगा. कुछ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने का लक्ष्य रख रहे होंगे. उन्होंने कहा कि हर छात्र का सपना और लक्ष्य अलग होता है, लेकिन आज वे सभी एक जैसा उत्साह रखते हैं.</p>
<p>उन्होंने छात्रों से IIT दिल्ली में अपना पहला दिन याद करने को कहा. PM नरेंद्र मोदी ने कहा कि ऐसा लगा जैसे कल ही ओरिएंटेशन हुआ था, और अचानक आज दीक्षांत समारोह का दिन आ गया. उन्होंने कहा कि आज सभी छात्रों के जीवन में एक नए अध्याय की शुरुआत हो रही है.</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/92.webp" alt="92" width="1280" height="720"></img></p>
<p>PM मोदी ने कहा कि आज की वैश्विक व्यवस्था तेजी से बदल रही है, और इसके पीछे टेक्नोलॉजी एक प्रमुख कारण है. अगले 20-30 वर्षों में दुनिया कैसी होगी, इसका अनुमान लगाना मुश्किल है. उन्होंने कहा कि, टेक्नोलॉजी बदलेगी, दुनिया बदलेगी, लेकिन इस बदलती दुनिया में, जो लोग सीखते रहते हैं वे ही आगे बढ़ेंगे.</p>
<p>आप सभी को हार्दिक बधाई देता हूं. हालांकि, अगर उनके बीच और अधिक लड़कियां होतीं तो यह और बेहतर होता. सिर्फ एक या दो ही क्यों? अधिक होनी चाहिए थीं.'</p>
<p>PM नरेंद्र मोदी ने गुलामी के दौर और उस पीढ़ी के संघर्ष को भी याद किया. उन्होंने कहा कि, हर पीढ़ी की अपनी राष्ट्रीय जिम्मेदारी होती है. आजादी से पहले, लोगों का लक्ष्य देश को आजाद कराना था. इसके लिए, उन्होंने लंबे समय तक संघर्ष किया और बलिदान दिए.</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/82.webp" alt="82" width="1280" height="720"></img></p>
<p>PM नरेंद्र मोदी ने कहा कि, आज हम स्वतंत्र भारत में सांस ले रहे हैं, यह पिछली पीढ़ी की मेहनत और बलिदान के कारण है. आज की चुनौतियां अलग हैं, और हमारी जिम्मेदारियां भी अलग हैं. उन्होंने छात्रों से कहा कि, अगले 30-35 वर्षों में वे जो कुछ भी करेंगे, वह भारत की विकसित देश की ओर यात्रा को प्रभावित करेगा. इसलिए, हर निर्णय लेते समय, उन्हें सोचना चाहिए कि इससे देश को कैसे लाभ होगा और यह किन जरूरतों को पूरा करेगा.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://hindi.khabarchhe.com/politics/why-did-pm-modi-tell-the-students-of-iit-delhi/article-2698</link>
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                <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 17:30:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बांग्लादेश में जो हुआ वह भारत के लिए चेतावनी... CJP प्रदर्शन पर तसलीमा नसरीन का सरकार को संदेश</title>
                                    <description><![CDATA[<p>निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन लगभग 19 साल बाद कोलकाता पहुंची थीं। उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) विरोध प्रदर्शन पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने इस विरोध प्रदर्शन को बांग्लादेश में 2024 के छात्र आंदोलन से जोड़ा। तसलीमा नसरीन ने कहा कि CJP विरोध प्रदर्शन और बांग्लादेश में छात्रों के नेतृत्व वाला आंदोलन एक जैसे हैं। उन्होंने भारतीयों को बांग्लादेश में हुई घटनाओं से सीख लेने की सलाह दी।</p>
<p>कोलकाता में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए तसलीमा नसरीन ने टिप्पणी की कि बांग्लादेश की स्थिति को चेतावनी के रूप में देखा जाना चाहिए।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/what-happened-in-bangladesh-is-a-warning-to-india-taslima/article-2675"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-08/taslima-nasreen1.webp" alt=""></a><br /><p>निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन लगभग 19 साल बाद कोलकाता पहुंची थीं। उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) विरोध प्रदर्शन पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने इस विरोध प्रदर्शन को बांग्लादेश में 2024 के छात्र आंदोलन से जोड़ा। तसलीमा नसरीन ने कहा कि CJP विरोध प्रदर्शन और बांग्लादेश में छात्रों के नेतृत्व वाला आंदोलन एक जैसे हैं। उन्होंने भारतीयों को बांग्लादेश में हुई घटनाओं से सीख लेने की सलाह दी।</p>
<p>कोलकाता में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए तसलीमा नसरीन ने टिप्पणी की कि बांग्लादेश की स्थिति को चेतावनी के रूप में देखा जाना चाहिए। बांग्लादेश में 2024 का छात्र आंदोलन सत्ता-विरोधी प्रदर्शन में बदल गया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को बांग्लादेश छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी थी। इसके बाद बांग्लादेश में मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार का गठन हुआ।</p>
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theprint.in

<p>एक दिन पहले, 1 अगस्त को कोलकाता के रवींद्र भवन में तसलीमा नसरीन का सम्मान समारोह आयोजित किया गया था। कुछ व्यक्तियों के कारण इस कार्यक्रम में कुछ समय के लिए व्यवधान पड़ा था।</p>
<p><strong>तसलीमा नसरीन</strong><strong> ने क्या कहा?</strong></p>
<p>इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को तसलीमा नसरीन ने भारत में छात्र आंदोलन और बांग्लादेश में हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि, मुझे लगा कि यहाँ जो हुआ (CJP विरोध प्रदर्शन) वह जुलाई 2024 में बांग्लादेश में हुए छात्र आंदोलन जैसा ही है। लोगों को गुमराह किया गया था। बांग्लादेश में इसका परिणाम अच्छा नहीं रहा। जिहादियों ने वहां सत्ता पर कब्ज़ा कर लिया है।</p>
<p>तसलीमा नसरीन पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी बांग्लादेश अवामी लीग की आलोचक हैं। इसके बावजूद उन्होंने स्वीकार किया कि आज के बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी की बजाय अवामी लीग ही मुख्य विपक्षी दल होना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि वर्तमान में भारत में निर्वासन का जीवन बिता रहीं शेख हसीना को सुरक्षित रूप से बांग्लादेश लौटने की अनुमति दी जाए।</p>
<p>तसलीमा ने कहा कि शेख हसीना के कार्यकाल के दौरान भी बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार होते थे। लेकिन उनका दावा है कि मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के दौरान हिंदुओं पर अत्याचार उल्लेखनीय रूप से बढ़ गए हैं। उन्होंने इसके लिए शिक्षा की कमी और धार्मिक संस्थाओं के बढ़ते प्रभाव को जिम्मेदार ठहराया।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/taslima-nasreen3.webp" alt="taslima-nasreen3" width="1280" height="720"></img>
ndtv.com

<p>बांग्लादेशी लेखिका ने सामाजिक परिवर्तन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने सरकार को धर्म से अलग रखने की वकालत की। इसके अलावा, उन्होंने मदरसा शिक्षा की आलोचना की। आरोप लगाया कि इससे सांप्रदायिक मानसिकता को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने बांग्लादेश से धर्मनिरपेक्ष शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करने को कहा।</p>
<p>पश्चिम बंगाल में विभिन्न पार्टियों के शासनकाल के दौरान अपने निर्वासन पर विचार करते हुए तसलीमा नसरीन ने कहा कि, एक सरकार ने मुझ पर प्रतिबंध लगाए, एक सरकार ने मुझे बाहर निकाल दिया, और एक सरकार ने मुझे बुलाया। उनके बयान में स्पष्ट रूप से वाम मोर्चा, तृणमूल कांग्रेस और भाजपा का उल्लेख था। इस दौरान उन्होंने कोलकाता यात्रा के समय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और सुवेंदु अधिकारी का भी धन्यवाद किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 21:44:09 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मोदीजी! आपके चुने हुए वलसाड के उच्च शिक्षित युवा सांसद धवल पटेल भी दिखावे में पड़ गए!</title>
                                    <description><![CDATA[<p>हम अभी देख रहे हैं कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार के खिलाफ Gen-Z ने आंदोलन किया। सरकार ने उनकी मांगें सुनीं। PM नरेंद्र मोदी खुद अब उनसे जुड़ने के प्रयास कर रहे हैं। लेकिन क्या PM मोदी ने जिन युवा नेताओं को युवा समझकर, अनुभव न होने के बावजूद मौका दिया, वे Gen-Z को स्वीकार्य लगे ऐसा व्यवहार करते हैं?</p>
<p>वलसाड-डांग के युवा सांसद सूरत में रहते हैं। उनकी गाड़ी सूरत की सड़कों पर घूम रही थी। एक पाठक ने हमें उसकी तस्वीर भेजी। पाठक शायद उन्हें पहचानता नहीं था। लेकिन उसका सवाल था कि क्या कोई सांसद अपनी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/modiji-your-chosen-highly-educated-young-mp-from-valsad-dhawal/article-2673"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-08/081.webp" alt=""></a><br /><p>हम अभी देख रहे हैं कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार के खिलाफ Gen-Z ने आंदोलन किया। सरकार ने उनकी मांगें सुनीं। PM नरेंद्र मोदी खुद अब उनसे जुड़ने के प्रयास कर रहे हैं। लेकिन क्या PM मोदी ने जिन युवा नेताओं को युवा समझकर, अनुभव न होने के बावजूद मौका दिया, वे Gen-Z को स्वीकार्य लगे ऐसा व्यवहार करते हैं?</p>
<p>वलसाड-डांग के युवा सांसद सूरत में रहते हैं। उनकी गाड़ी सूरत की सड़कों पर घूम रही थी। एक पाठक ने हमें उसकी तस्वीर भेजी। पाठक शायद उन्हें पहचानता नहीं था। लेकिन उसका सवाल था कि क्या कोई सांसद अपनी निजी गाड़ी के पीछे इतने बड़े अक्षरों में दो-दो बार 'Member of Parliament' और 'सांसद आहवा डांग' लिखवा सकता है? पाठक का दूसरा सवाल था कि उन्हें ऐसा लिखवाने की क्या जरूरत है? ऐसा लिखवाकर वे किसे और क्या संदेश देना चाहते हैं?</p>
<p>वैसे तो यह सामान्य बात है। Gen-Z के आंदोलन से पहले ऐसे सवाल कोई नहीं पूछता था। लेकिन अब पूछे जाने लगे हैं। पाठक के सवालों के दो पहलू हैं।</p>
<p>एक पहलू यह है कि क्या कानूनी रूप से ऐसा लिखवाया जा सकता है। दूसरा पहलू यह है कि इसकी जरूरत ही क्या है। इसलिए हमने इसका जवाब तलाशना शुरू किया। इंटरनेट पर खोज की। मोटर व्हीकल एक्ट की धाराएं देखीं।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/102.webp" alt="102" width="1280" height="720"></img></p>
<p>कानूनी रूप से हमें यह पता चला कि गुजरात का कानून कहता है कि मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 111 के अनुसार किसी भी सांसद को अपनी निजी कार पर इस तरह का कोई भी लेखन करवाने की अनुमति नहीं है। प्रशासन इस संबंध में उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। यदि उन्होंने अनुमति लेकर ऐसा किया हो तो वे ऐसा कर सकते हैं। पाठक का दावा था कि उनकी कार के शीशे भी काले थे। यदि ऐसा है तो वे कार के शीशे काले नहीं रख सकते।</p>
<p>शायद आपको यह बात छोटी लगे, लेकिन सांसद धवल पटेल के लिए यह छोटी बात नहीं होनी चाहिए। इसके पीछे निश्चित कारण और तर्क हैं।</p>
<p>धवल पटेल युवा सांसद हैं। कहा जाता है कि उनका चयन सीधे PM नरेंद्र मोदी द्वारा एक विशेष उद्देश्य के साथ किया गया था। उनके चयन का कारण उनकी शिक्षा और करियर था। उन्हें मात्र 37 वर्ष की उम्र में सांसद बनने का अवसर दिया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वे वर्ष 2021 में भारतीय जनता पार्टी से जुड़े और वर्ष 2024 में सांसद बनने का अवसर मिला। राजनीति में इतनी तेजी से किसी को मौका नहीं मिलता, इसलिए उन पर जिम्मेदारी भी बड़ी है। उन्हें भाजपा की अगली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनना है।</p>
<p>धवल पटेल ने सूरत स्थित देश के प्रतिष्ठित सरदार वल्लभभाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से बीटेक किया है। इस संस्थान में प्रवेश पाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है। बहुत कम लोगों को प्रवेश मिलता है। धवल पटेल इतने बड़े संस्थान से इंजीनियर बने हैं। इसके बाद उन्होंने प्रबंधन की पढ़ाई भी देश के अग्रणी माने जाने वाले सिम्बायोसिस कॉलेज से एमबीए करके पूरी की। इस तरह बीटेक और एमबीए करने के बाद उन्होंने IBM, Accenture Strategy और Capgemini जैसी दुनिया की प्रसिद्ध बहुराष्ट्रीय कंपनियों में भी काम किया है। संपत्ति की बात करें तो उन्होंने 6.78 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की है। संसद में उनकी उपस्थिति भी लगभग 93 प्रतिशत दर्ज की गई है। समय-समय पर वे स्थानीय मुद्दों के लिए भी मेहनत करते हैं। कुल मिलाकर धवल पटेल के नाम कोई विवाद नहीं है। उनकी प्रोफाइल एक युवा नेता के अनुरूप है।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/091.webp" alt="091" width="1280" height="720"></img></p>
<p>लेकिन यहां सवाल यह उठता है कि इतनी अच्छी प्रोफाइल होने के बावजूद एक युवा नेता को ऐसा क्यों करना पड़ता है? क्या वे भी दूसरे नेताओं जैसे ही हो गए हैं या हो जाएंगे? क्या उनकी पढ़ाई-लिखाई से कोई फर्क नहीं पड़ता? वे भी दूसरे अशिक्षित और अनजान नेताओं की तरह कैसे व्यवहार कर सकते हैं? सबसे बड़ा सवाल तो पाठक ने यही किया कि उन्हें ऐसा करने की जरूरत ही क्या है। कार पर बड़े अक्षरों में "सांसद" लिखवाकर वे क्या साबित करना चाहते हैं? क्या वे यह दिखाना चाहते हैं कि मैं तुमसे अलग हूं? मैं तुमसे ज्यादा शक्तिशाली हूं? अगर ऐसा लिखा होगा तो कोई पुलिसवाला मुझे नहीं रोकेगा? मुझे कहीं भी पार्किंग करने की छूट मिल जाएगी? यदि सांसद इन सभी कारणों से अपनी कार पर ऐसा लिखवाते हैं, तो शायद उनके चयन में PM मोदी से चूक हुई है। उनके जैसे शिक्षित व्यक्ति से ऐसी उम्मीद PM मोदी को तो नहीं ही होगी, लेकिन एक सामान्य मतदाता भी शायद इस बात को पसंद नहीं करेगा। शायद पहले सवाल नहीं पूछे जाते थे। लेकिन अब पूछे जाने लगे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 15:21:38 +0530</pubDate>
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                <title>तीन राज्य तीन उपचुनाव...भाजपा की हार के चर्चे ज्यादा; बिहार का बांकीपुर जहां भाजपा का 31 साल पुराना किला ढह गया</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>पटना/भोपाल/अहमदाबाद। </strong>तीन राज्यों के विधानसभा उपचुनावों के नतीजों ने अलग-अलग राजनीतिक संदेश दिए हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा बिहार के बांकीपुर की है। यहां भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा जाने से खाली हुई सीट पर जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने 19,324 वोटों से जीत दर्ज कर भाजपा का तीन दशक पुराना वर्चस्व खत्म कर दिया। यह सिर्फ एक सीट की हार नहीं मानी जा रही, बल्कि भाजपा की स्थानीय रणनीति, उम्मीदवार चयन और संगठनात्मक पकड़ पर भी सवाल खड़े कर रही है। दूसरी ओर, मध्य प्रदेश के दतिया में कांग्रेस ने लगातार दूसरी बार</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/three-states-three-by-elections-more-discussion-about-bjps-defeat-bihars/article-2670"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-08/13.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>पटना/भोपाल/अहमदाबाद। </strong>तीन राज्यों के विधानसभा उपचुनावों के नतीजों ने अलग-अलग राजनीतिक संदेश दिए हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा बिहार के बांकीपुर की है। यहां भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा जाने से खाली हुई सीट पर जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने 19,324 वोटों से जीत दर्ज कर भाजपा का तीन दशक पुराना वर्चस्व खत्म कर दिया। यह सिर्फ एक सीट की हार नहीं मानी जा रही, बल्कि भाजपा की स्थानीय रणनीति, उम्मीदवार चयन और संगठनात्मक पकड़ पर भी सवाल खड़े कर रही है। दूसरी ओर, मध्य प्रदेश के दतिया में कांग्रेस ने लगातार दूसरी बार भाजपा को हराया, जबकि गुजरात के मांजलपुर में भाजपा ने 30,630 वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर अपनी पकड़ बरकरार रखी। हालांकि तीन राज्यों के उपचुनाव में भाजपा को केवल एक सीट मिली। दो सीटों पर उसे हार का सामना करना पड़ा। लेकिन गुजरात में जीत के बावजूद भाजपा की हार के चर्चे राजनीतिक गलियारों में ज्यादा है। ये समझने का प्रयास करते हैं कि जिन बिहार और मध्य प्रदेश की दो सीटों पर भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी थी, उन्हें वहां हार का सामना क्यों करना पड़ा।</p>
<p><strong>बांकीपुर: तीन दशक से इस सीट पर भाजपा का राज था…</strong></p>
<p>बांकीपुर लंबे समय से भाजपा का सबसे सुरक्षित शहरी गढ़ माना जाता रहा है। 1995 से यह सीट लगातार भाजपा के पास रही और नितिन नवीन यहां से लगातार पांच बार विधायक चुने गए। उपचुनाव में पार्टी ने नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया, लेकिन चुनाव के दौरान स्थानीय स्तर पर बदलाव की इच्छा और प्रशांत किशोर की आक्रामक जमीनी रणनीति भाजपा पर भारी पड़ गई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा इस चुनाव को आसान मानकर चल रही थी, जबकि जन सुराज ने इसे प्रतिष्ठा का मुकाबला बना दिया। </p>
<p>प्रशांत किशोर को 64,151 वोट (49.23%) मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी नीरज कुमार को 44,827 वोट (34.40%) हासिल हुए। राजद की रेखा कुमारी 14,273 वोट (10.95%) के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। खास बात यह रही कि भाजपा और राजद के कुल वोट 59,100 रहे, जो अकेले प्रशांत किशोर के वोटों से 5,051 कम हैं। इस तरह कुल 1,30,313 मतों में लगभग हर दूसरा वोट जन सुराज उम्मीदवार के पक्ष में गया। </p>
<p><strong>ये प्रशांत किशोर के लिए बड़ी जीत क्यों है?</strong></p>
<p>राजनीतिक दृष्टि से यह परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नवंबर 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज पार्टी ने 238 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन 236 सीटों पर उसकी जमानत जब्त हो गई थी। उस समय कई राजनीतिक विश्लेषकों ने प्रशांत किशोर की सक्रिय राजनीति पर सवाल उठाए थे। कइयों ने तो यहां तक कह दिया कि अब प्रशांत किशोर बिहार छोड़कर चले जाएंगे उनका राजनीतिक करियर पर विराम लग चुका है। लेकिन करीब नौ महीने बाद उसी नेता ने भाजपा के सबसे मजबूत गढ़ों में शामिल बांकीपुर में जीत दर्ज कर उन्होंने बताया कि वे बिहार छोड़कर नहीं जाने वाले हैं। बिहार के विकास के लिए वे काम करते रहेंगे।</p>
<p><strong>प्रशांत किशोर ने विकास-रोजगार जैसे मुद्दों को ज्यादा तरजीह दी</strong></p>
<p>विश्लेषकों के अनुसार भाजपा की हार के पीछे कई कारण रहे। पहला, चुनाव पूरी तरह स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित हो गया और भाजपा अपने परंपरागत वोट बैंक से आगे नए मतदाताओं को जोड़ने में सफल नहीं दिखी। दूसरा, प्रशांत किशोर ने विकास, रोजगार और बेहतर प्रशासन जैसे मुद्दों पर लगातार अभियान चलाया, जिससे उन्हें पारंपरिक दलों से अलग विकल्प के रूप में स्वीकार्यता मिली। तीसरा, भाजपा के उम्मीदवार चयन और स्थानीय चुनाव प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठे। चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी ने पूरी ताकत झोंकी, लेकिन उसका लाभ मतदान में नहीं दिखा। </p>
<p><strong>जीत के बाद प्रशांत किशोर का तंज- बिहार बेहतर मुख्यमंत्री का दावेदार है</strong></p>
<p>जीत के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि "सारा फायदा गुजरात को ही क्यों मिलना चाहिए? बिहारी सिर्फ मजदूर बनने के लिए पैदा नहीं हुए हैं। बिहार बेहतर मुख्यमंत्री का हकदार है।" उन्होंने यह भी कहा कि उनके विधायक बनने से बांकीपुर रातों-रात बेंगलुरु नहीं बन जाएगा, लेकिन अगले दो-तीन महीनों में लोग बदलाव महसूस करेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि बांकीपुर की जनता ने भाजपा नेतृत्व को स्पष्ट संदेश दिया है कि बिहार के लिए बेहतर नेतृत्व की जरूरत है।</p>
<p><strong>मध्य प्रदेश: दतिया सीट फिर हार गई भाजपा</strong></p>
<p>मध्य प्रदेश के दतिया में कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने 66,757 वोट (42.39%) हासिल कर भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6,016 वोटों से हराया। आशुतोष को 60,741 वोट (38.57%) मिले, जबकि आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के दामोदर यादव 'मंडल' को 22,527 वोट (14.30%) प्राप्त हुए। यह लगातार दूसरा चुनाव है, जिसमें कांग्रेस ने इस सीट पर भाजपा को हराया। 2023 में भी कांग्रेस ने तत्कालीन गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को पराजित किया था। इस बार भी भाजपा द्वारा ऐन वक्त पर टिकट बदलने के फैसले को हार की बड़ी वजह माना जा रहा है। नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों की नाराजगी मतदान तक बनी रही और उनके पोलिंग बूथ पर भी भाजपा पीछे रह गई। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि टिकट बदलने से पहले नरोत्तम मिश्रा को विश्वास में लेना चाहिए था और उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए थी।</p>
<p><strong>गुजरात में भाजपा ने अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी</strong></p>
<p>गुजरात के मांजलपुर में हालांकि भाजपा ने अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी। भाजपा उम्मीदवार सतीश पटेल ने कांग्रेस के भिखाभाई रबारी को 30,630 वोटों के अंतर से हराकर सीट अपने पास बरकरार रखी। हालांकि रिपोर्टों के अनुसार पिछली बार की तुलना में जीत का अंतर कुछ कम रहा, जिसका एक कारण अपेक्षाकृत कम मतदान भी माना गया। </p>
<p><strong>तीनों सीटों पर भाजपा की जीत-हार एक नजर में…</strong></p>
<p>तीनों राज्यों के उपचुनावों के नतीजे बताते हैं कि स्थानीय नेतृत्व, उम्मीदवार चयन और क्षेत्रीय मुद्दे अब भी उपचुनावों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। बिहार में भाजपा को अपने सबसे मजबूत गढ़ में मिली हार ने भविष्य की रणनीति पर नए सवाल खड़े किए हैं, जबकि दतिया ने मध्य प्रदेश में कांग्रेस को मनोवैज्ञानिक बढ़त दी है। दूसरी ओर, गुजरात में भाजपा ने जीत के साथ यह संदेश भी दिया कि उसके पारंपरिक शहरी क्षेत्रों में संगठन अभी भी मजबूत बना हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 14:05:05 +0530</pubDate>
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                <title>प्रशांत किशोर विदेश में लाखो डॉलर की नौकरी छोड़ कैसे बने भारत के सबसे चर्चित चुनावी रणनीतिकार?</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">प्रशांत किशोर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। बिहार की बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में उनकी सक्रिय भूमिका और जन सुराज पार्टी के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव के बीच लोग उनके जीवन, शिक्षा और करियर के बारे में जानना चाहते हैं। कभी संयुक्त राष्ट्र (UN) से जुड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ रहे प्रशांत किशोर आज देश के सबसे चर्चित राजनीतिक रणनीतिकारों में गिने जाते हैं।</p>
<p><span><strong>बिहार से शुरू हुई पढ़ाई की यात्रा</strong></span></p>
<p>प्रशांत किशोर का जन्म बिहार में हुआ और उनकी शुरुआती शिक्षा भी यहीं हुई। उन्होंने बक्सर के सरकारी स्कूल से दसवीं की पढ़ाई पूरी की, जबकि इंटरमीडिएट की शिक्षा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/how-prashant-kishor-left-his-multi-million-dollar-job-abroad-and/article-2666"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-08/6305602175329046949.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">प्रशांत किशोर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। बिहार की बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में उनकी सक्रिय भूमिका और जन सुराज पार्टी के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव के बीच लोग उनके जीवन, शिक्षा और करियर के बारे में जानना चाहते हैं। कभी संयुक्त राष्ट्र (UN) से जुड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ रहे प्रशांत किशोर आज देश के सबसे चर्चित राजनीतिक रणनीतिकारों में गिने जाते हैं।</p>
<p><span><strong>बिहार से शुरू हुई पढ़ाई की यात्रा</strong></span></p>
<p>प्रशांत किशोर का जन्म बिहार में हुआ और उनकी शुरुआती शिक्षा भी यहीं हुई। उन्होंने बक्सर के सरकारी स्कूल से दसवीं की पढ़ाई पूरी की, जबकि इंटरमीडिएट की शिक्षा पटना साइंस कॉलेज से हासिल की। पढ़ाई के दौरान वे विशेष रूप से गणित में बेहद मेधावी छात्र माने जाते थे। इसके बाद उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और आगे चलकर सार्वजनिक स्वास्थ्य (पब्लिक हेल्थ) के क्षेत्र में अपना करियर बनाया।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/prashant-kishore-2.jpg" alt="Prashant Kishore 2" width="2048" height="1152"></img>
bbc.com

<p><span>इसके बाद उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से 'बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन' (BBA) की डिग्री हासिल की। आगे चलकर उन्होंने हैदराबाद स्थित 'एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया' (ASCI) से मास्टर ऑफ हेल्थकेयर मैनेजमेंट (MHM) का डिप्लोमा/स्नातकोत्तर प्रबंधन कार्यक्रम पूरा किया</span></p>
<p><span><strong>अमेरिका और अफ्रीका में किया महत्वपूर्ण काम</strong></span></p>
<p>इंजीनियरिंग के बाद प्रशांत किशोर ने सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में काम शुरू किया। वे संयुक्त राष्ट्र (UN) से वित्तपोषित कार्यक्रमों से जुड़े और करीब आठ वर्षों तक अफ्रीका के कई देशों में स्वास्थ्य और सामाजिक विकास से संबंधित परियोजनाओं पर कार्य किया। इस दौरान उन्होंने बच्चों के स्वास्थ्य, कुपोषण और सामाजिक नीतियों पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उनका कार्यक्षेत्र अमेरिका सहित अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से भी जुड़ा रहा, जहां विकास और स्वास्थ्य नीतियों पर काम करने का अनुभव मिला।</p>
<p><span><strong>एक रिपोर्ट ने बदल दी जिंदगी</strong></span></p>
<p>बताया जाता है कि भारत में कुपोषण और आर्थिक विकास से जुड़ी उनकी एक रिपोर्ट ने तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद दोनों की मुलाकात हुई और यहीं से प्रशांत किशोर के राजनीतिक सफर की शुरुआत मानी जाती है। वर्ष 2011 में उन्होंने चुनावी रणनीति के क्षेत्र में कदम रखा और नरेंद्र मोदी के चुनाव अभियान से जुड़ गए।</p>
<p><span><strong>देश के बड़े चुनावी रणनीतिकार बने</strong></span></p>
<p>प्रशांत किशोर ने बाद में कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के लिए चुनावी रणनीति तैयार की। उन्होंने विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनावों और लोकसभा चुनावों में कई दलों के साथ काम किया। चुनावी प्रबंधन, डेटा विश्लेषण, जनसंपर्क अभियान और बूथ स्तर की रणनीति तैयार करने में उनकी टीम की अहम भूमिका मानी जाती रही है। इसी वजह से उन्हें भारतीय राजनीति का सबसे प्रभावशाली चुनावी रणनीतिकार भी कहा जाता है।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/prashant-kishore.jpg" alt="Prashant Kishore" width="1280" height="720"></img></p>
<p><span><strong>रणनीतिकार से नेता बनने तक का सफर</strong></span></p>
<p>लंबे समय तक पर्दे के पीछे रहकर चुनावी रणनीति बनाने के बाद प्रशांत किशोर ने सक्रिय राजनीति में उतरने का फैसला किया। उन्होंने जन सुराज अभियान की शुरुआत की, जिसे बाद में राजनीतिक दल का रूप दिया गया। अब वे सीधे जनता के बीच जाकर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। बिहार की राजनीति में उनकी भूमिका लगातार बढ़ रही है और बांकीपुर उपचुनाव को उनके राजनीतिक करियर की बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।</p>
<p><span><strong>क्यों चर्चा में हैं प्रशांत किशोर?</strong></span></p>
<p>बांकीपुर उपचुनाव में उनकी दावेदारी और जन सुराज की बढ़ती सक्रियता ने एक बार फिर प्रशांत किशोर को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया है। वर्षों तक दूसरों को चुनाव जिताने की रणनीति बनाने वाले प्रशांत किशोर अब खुद जनता के बीच अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता साबित करने की चुनौती का सामना कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 18:00:00 +0530</pubDate>
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                <title>मुझे और मेरी मां को गाली देने वाले बच्चों को मैं माफ़ करना चाहता हूं और..., जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन पर बोले पीएम मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार देर रात एक बार फिर बड़ा संदेश दिया है। लगभग रात 11 बजे के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंस्टाग्राम पर लाइव आए और Gen-Z को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि मैं बच्चों को माफ़ करना चाहता हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'दोस्तों। आज मन करता है कि बस तुमसे ही बात करूं। जंतर-मंतर पर जो कुछ हुआ, उसे देश और दुनिया ने देखा है। कुछ शरारती बच्चों ने अश्लील गालियां दीं, जो किसी भी सभ्य समाज को शोभा नहीं देतीं। मुझे गाली दी गई, मेरी दिवंगत मां को भी गाली दी गई।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/i-want-to-forgive-the-children-who-abused-me-and/article-2657"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-08/7.webp" alt=""></a><br /><p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार देर रात एक बार फिर बड़ा संदेश दिया है। लगभग रात 11 बजे के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंस्टाग्राम पर लाइव आए और Gen-Z को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि मैं बच्चों को माफ़ करना चाहता हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'दोस्तों। आज मन करता है कि बस तुमसे ही बात करूं। जंतर-मंतर पर जो कुछ हुआ, उसे देश और दुनिया ने देखा है। कुछ शरारती बच्चों ने अश्लील गालियां दीं, जो किसी भी सभ्य समाज को शोभा नहीं देतीं। मुझे गाली दी गई, मेरी दिवंगत मां को भी गाली दी गई।</p>
<p>पता नहीं यह कितना निम्न स्तर का रूप था। लेकिन, आज मुझे यह कहना है कि बचपन में गलतियां होती हैं और बचपन में हुई गलतियों से सुधरने का अवसर भी होता है, और यही बचपन है। इसलिए, मैं समाज के भीतर जो गुस्सा है, उसे अच्छी तरह समझ सकता हूं और उसे अच्छी तरह समझता हूं। यह एक सांस्कृतिक झटका है कि हमारी बेटियाँं इस तरह की भाषा कैसे बोल सकती हैं?</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/5.webp" alt="5" width="1280" height="720"></img></p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा, 'इन बच्चों को गले लगाकर उन्हें रास्ता दिखाने का समय आ गया है... ये भटके हुए बच्चे हैं, इन्हें रास्ता दिखाना हमारा काम है। इन्हें सज़ा देना, अदालतों के चक्कर लगवाना, समाज में परेशान करना—इससे हम स्थिति नहीं बदल पाएंगे। मैं इन्हें माफ़ करना चाहता हूं। समाज भी मेरी इस बात को स्वीकार करे, क्योंकि मेरे मन में केवल एक ही भावना है—कभी-कभी हमारी जीभ दांतों के नीचे आ जाती है और खून निकल आता है, लेकिन हम दांत नहीं तोड़ते क्योंकि दांत भी हमारे हैं और जीभ भी हमारी है।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ये बच्चे भी हमारे ही हैं, इन्हें रास्ता दिखाना हमारा काम है। भटके हुए लोगों को रास्ता दिखाना कठिन है, लेकिन कठिन काम करने ही पड़ेंगे। इसलिए, मैं इन बच्चों से कहता हूं कि बच्चों, आओ हम सब मिलकर देश के लिए आगे बढ़ें। कुछ नया सीखें। गलतियों से भी सीखें। अपने सपनों के साथ आगे बढ़ें। देश बहुत आगे बढ़ रहा है, आगे बढ़ना है और तुम भी निश्चित रूप से प्रगति करोगे। यही मेरा सपना है। मैं तुम्हारे लिए जीता हूं। मैं तुम्हारे उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना करता हूं। आओ, मिलकर देश को आगे ले चलें। बहुत-बहुत धन्यवाद दोस्तों। बस आओ, गलतियों से सीखो और आगे बढ़ो।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/6.webp" alt="6" width="1280" height="720"></img></p>
<p>आपको बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी के इस वीडियो संदेश को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई गाली-गलौज से जोड़कर देखा जा रहा है। इससे संबंधित मामले में, नोएडा में 25 वर्षीय लड़की रुचिका के खिलाफ ज़ीरो एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी हुई है।</p>
<p>यह मामला 23 जुलाई 2026 का है। उस दिन दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में छात्र और युवा NEET पेपर लीक का विरोध कर रहे थे। इस प्रदर्शन के दौरान रुचिका सिंह नाम की एक लड़की का वीडियो सामने आया था, जिसमें वह कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक और अभद्र टिप्पणी करती हुई दिखाई दी थी। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद कानूनी कार्रवाई की मांग उठने लगी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि युवती द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा प्रधानमंत्री के संवैधानिक पद की गरिमा के विरुद्ध है और इससे समाज में असंतोष फैलने तथा सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 15:24:08 +0530</pubDate>
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                <title>'किसी भी राजनीतिक दल में शामिल नहीं होऊंगा', अभिजीत दीपके का बड़ा बयान</title>
                                    <description><![CDATA[<p>कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने NEET पेपर लीक सुधार विधेयक, छात्र आंदोलन और सरकार की भूमिका पर एक साक्षात्कार में खुलकर बात की। यह बातचीत संसद के दोनों सदनों में पेपर लीक सुधार विधेयक पारित होने के बाद हुई थी और पीएम नरेंद्र मोदी ने इस पर एक वीडियो जारी किया था।</p>
<p>अभिजीत ने कहा कि यह विधेयक पेपर लीक रोकने के बजाय पेपर लीक होने के बाद उठाए जाने वाले कदमों पर केंद्रित है। उन्होंने प्रभावित परिवारों को मुआवजा न मिलने, नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति और सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/abhijeet-deepke-declared-future-strategy-not-to-join-any-political/article-2653"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-08/485.webp" alt=""></a><br /><p>कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने NEET पेपर लीक सुधार विधेयक, छात्र आंदोलन और सरकार की भूमिका पर एक साक्षात्कार में खुलकर बात की। यह बातचीत संसद के दोनों सदनों में पेपर लीक सुधार विधेयक पारित होने के बाद हुई थी और पीएम नरेंद्र मोदी ने इस पर एक वीडियो जारी किया था।</p>
<p>अभिजीत ने कहा कि यह विधेयक पेपर लीक रोकने के बजाय पेपर लीक होने के बाद उठाए जाने वाले कदमों पर केंद्रित है। उन्होंने प्रभावित परिवारों को मुआवजा न मिलने, नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति और सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक से मिलने की कोशिश करने के बावजूद उन्हें रोका गया था, और आंदोलन को किसी राजनीतिक दल से नहीं बल्कि आम लोगों से समर्थन मिला है। अभिजीत ने स्पष्ट किया कि वे कोई राजनीतिक दल नहीं बनाएंगे, बल्कि छात्र और युवाओं के मुद्दों को एक समूह के रूप में उठाते रहेंगे। उन्होंने मीडिया कवरेज में देरी पर भी नाराज़गी जताई और कहा कि आंदोलन का रास्ता हमेशा लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण रहेगा।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/496.webp" alt="496" width="1200" height="675"></img></p>
<p>इस साक्षात्कार में उनसे पूछा गया कि पेपर लीक सुधार विधेयक संसद में पारित हो चुका है। क्या आपको लगता है कि यह विधेयक आवश्यक था, और क्या सरकार के दावे के अनुसार यह सख्त कानून पेपर लीक रोकने में सफल होगा?</p>
<p>अभिजीत ने कहा कि इस विधेयक के बारे में मेरी समझ बिल्कुल स्पष्ट है कि यह पेपर लीक रोकने पर नहीं, बल्कि पेपर लीक होने के बाद क्या करना है, इस पर केंद्रित है। जेल की सजा 4 साल से बढ़ाकर 10 साल कर दी गई है, और जुर्माने में भी बढ़ोतरी की गई है, जिसका मतलब है कि सरकार मानकर चल रही है कि पेपर लीक होना अनिवार्य है। हमारी मांग और आंदोलन का उद्देश्य पेपर लीक रोकना था, लेकिन विधेयक का पूरा ध्यान बाद की कार्रवाई पर है।</p>
<p>मुझे सरकार की मंशा पर भी संदेह है। पीएम मोदी ने फास्ट-ट्रैक कोर्ट की बात की थी, और लोग खुश हुए थे, लेकिन CBI की दलील मजबूत न होने के कारण पहली सुनवाई स्थगित कर दी गई। जब तक मंशा मजबूत नहीं होगी, चाहे जितने कानून बना लिए जाएँ, कोई ठोस परिणाम नहीं आएगा। सरकार को पेपर लीक रोकने पर ध्यान देना चाहिए, न कि पेपर लीक के बाद के प्रबंधन पर।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/535.webp" alt="535" width="1280" height="720"></img></p>
<p>आगे उनसे पूछा गया कि क्या आपको लगता है कि सरकार दबाव के आगे झुकने की कोशिश कर रही है? इस पर उन्होंने कहा कि हाँ, मुझे खुशी है कि पिछले 10-12 वर्षों से केवल हिंदू-मुस्लिम राजनीति करने वाले पीएम को अब शिक्षा पर बात करनी पड़ रही है और इंस्टाग्राम रील्स पोस्ट करनी पड़ रही हैं। यह इस देश के छात्रों और युवाओं की बड़ी जीत है। हालांकि, नए शिक्षा मंत्री बिल्कीस बानो के दोषियों के स्वागत का समर्थन करते हुए दिखाई दिए थे। बलात्कार के आरोपी के समर्थक को शिक्षा मंत्री बनाकर देश के स्कूल और कॉलेज के छात्रों को क्या संदेश दिया जा रहा है, यह साफ दिखाई देता है। नए सचिव भी पहले भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे रहे हैं। यह एक बुरे व्यक्ति को हटाकर दूसरे को पुरस्कृत करने जैसा है।</p>
<p>इसके बाद सूत्रों ने पूछा कि संसद में पैलेट गन के इस्तेमाल और राहुल गांधी द्वारा गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग को लेकर अच्छी-खासी चर्चा हुई है। आपकी मांगों में मामले वापस लेने की भी बात शामिल है, क्या वह मांग पूरी हुई या फिर आप इसके लिए दूसरा विरोध शुरू करेंगे?</p>
<p>इस पर अभिजीत ने कड़े शब्दों में कहा कि सरकार को इस भ्रम में नहीं रहना चाहिए कि एक मंत्री के इस्तीफे से जनता का गुस्सा कम हो गया है। यह गुस्सा सिर्फ एक मंत्री के खिलाफ नहीं था, बल्कि पूरी सरकार के खिलाफ था, और जिस तरह की क्रूरता हुई है, उसके बाद यह और भी तीव्र हो गया है। यदि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे छात्रों पर दर्ज मामले वापस नहीं लिए गए और उन्हें परेशान किया जाता रहा, तो हमारे पास सड़क पर उतरने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा। सरकार को स्पष्ट बयान देना चाहिए कि शांतिपूर्ण विरोध कर रहे छात्रों पर दर्ज सभी मामले वापस लिए जाएंगे और पुलिस भविष्य में किसी को परेशान नहीं करेगी।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/5112.webp" alt="5112" width="1280" height="720"></img></p>
<p>अच्छी बात है, लेकिन आप यह बताइए कि सरकार ने सबसे पहले आपसे संपर्क कब किया था? दीपके ने बताया कि सरकार का पहला संपर्क 20 जुलाई से पहले ही हो गया था, शायद उन्हें लगा कि भीड़ लगातार बढ़ रही है। और यह संपर्क पुलिस के माध्यम से हुआ था। शुरुआत में हमें जिला मजिस्ट्रेट से बात करने के लिए कहा गया था, लेकिन हमने कहा था कि जब तक हम शीर्ष नेतृत्व से बात नहीं करेंगे, तब तक हम बातचीत नहीं करेंगे, क्योंकि जिला मजिस्ट्रेट शिक्षा मंत्री का इस्तीफा स्वीकार नहीं कर सकते।</p>
<p>यहाँ हम आपसे यह पूछना चाहते हैं कि राहुल गांधी ने अचानक पीएम आवास के सामने विरोध प्रदर्शन शुरू किया, तो आम आदमी पार्टी ने राहुल गांधी पर 'आंदोलन को विभाजित करने' का आरोप लगाया। इस पर आप क्या कहना चाहेंगे? उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल अपनी राजनीति करते रहें, हमें उससे कोई लेना-देना नहीं है। यह आंदोलन पूरी तरह जनता द्वारा चलाया गया था और स्वतंत्र था। देश में जब भी कोई आंदोलन खड़ा होता है, उसे बदनाम करने की कोशिश की जाती है। चाहे वह अन्ना आंदोलन हो, किसानों का आंदोलन (जिसे खालिस्तानी कहा गया), डॉक्टरों का विरोध (जिसे पाकिस्तान से जोड़ दिया गया), CAA विरोध हो या हाल का नोएडा मजदूर विरोध, लेकिन हमें याद रखना चाहिए कि यह देश आंदोलनों से ही बना है, और आपातकाल के बाद आंदोलनों के माध्यम से ही लोकतंत्र की पुनर्स्थापना हुई थी।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/507.webp" alt="507" width="1280" height="720"></img></p>
<p>अभिजीत से पूछा गया कि पेपर लीक देश में लंबे समय से चली आ रही समस्या है, और यह सिर्फ NEET का मामला नहीं है, बल्कि झारखंड, पंजाब, महाराष्ट्र और कर्नाटक में भी ऐसा हुआ है। फिर आप केवल केंद्र सरकार से ही इस्तीफे की मांग क्यों कर रहे हैं? इस पर उन्होंने कहा कि जहाँ भी परीक्षा सुधार की जरूरत होगी, हम वहाँ जाएंगे, क्योंकि अब लोगों को हमसे उम्मीदें हैं। हमारे साथी आशुतोष पिछले डेढ़ साल से राजस्थान में पेपर लीक के मुद्दे पर काम कर रहे हैं। मैंने पहले महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) से जुड़े विरोध प्रदर्शनों में व्यक्तिगत रूप से भाग लिया था। CJP को एक बड़ा मंच मिला है, और अब जहाँ भी शिक्षा व्यवस्था में अनियमितताएँ होंगी, हम आवाज उठाएँगे।</p>
<p>विरोध प्रदर्शन के दौरान पीएम के खिलाफ अभद्र भाषा और पोस्टरों को लेकर भी काफी चर्चा हुई थी। इस पर उनसे पूछा गया कि क्या आपको लगता है कि ऐसा नहीं होना चाहिए था? इस पर अपनी राय देते हुए उन्होंने कहा कि मैं गाली-गलौज का समर्थन नहीं करता, ऐसा नहीं होना चाहिए था। लेकिन व्यंग्य और मीम्स की अनुमति होनी चाहिए। वे इस देश के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति हैं, जो खुद को विश्व नेता बताते हैं, इसलिए उन्हें बच्चों के मजाक से डरना नहीं चाहिए। जब पुलिस लाठीचार्ज कर रही थी, तब भी बच्चे मीम्स के जरिए जवाब दे रहे थे। इससे अधिक सुंदर और क्या हो सकता है। क्रूरता का सामना हास्य और व्यंग्य से होना चाहिए, हिंसा से नहीं।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/544.webp" alt="544" width="1280" height="720"></img></p>
<p>उनसे उनके किए गए प्रदर्शन के बारे में पूछा गया कि आपने विरोध प्रदर्शन को 'सामान्य' बना दिया, जबकि पहले ऐसे प्रदर्शनों को निषिद्ध माना जाता था और 'आंदोलनकारी' जैसे शब्द गढ़े गए थे। आप इस बदलाव को कैसे देखते हैं? इस पर शांतिपूर्वक जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन का शांतिपूर्ण होना लोकतंत्र के लिए अच्छी बात है। संविधान में कहीं नहीं लिखा है कि केवल एक खास तरह के कपड़े पहनने वाले लोग ही विरोध कर सकते हैं। डॉ. आंबेडकर ने सभी को समान अधिकार दिए हैं।</p>
<p>उनकी भविष्य की योजनाओं और राजनीतिक दल बनाने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इस आंदोलन से मुझे यह एहसास हुआ है कि कोई भी राजनेता जनता की बात नहीं सुनता। लोगों की सबसे बड़ी शिकायत यही है कि उनकी बात नहीं सुनी जाती। इसलिए हमें पहले इन लोगों तक पहुँचना होगा और समझना होगा कि उन्हें वास्तव में क्या चाहिए, उनकी अपेक्षाएँ और चिंताएँ क्या हैं। फिलहाल तीन प्रमुख मुद्दे हैं—शिक्षा, जो पूरे देश को प्रभावित करती है; बेरोजगारी, जिसके कारण विरोध प्रदर्शनों में बुजुर्गों की मौजूदगी भी एक प्रमुख पहलू रही; और संस्थाओं तथा व्यवस्था पर लोगों का घटता विश्वास।</p>
<p>हम किसी भी राजनीतिक दल में शामिल नहीं होंगे। यह एक 'रिस्पॉन्स ग्रुप' है, जो अगले चुनाव तक विभिन्न मुद्दों पर काम करेगा और जनता तथा युवाओं की आवाज उठाएगा।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/5210.webp" alt="5210" width="1280" height="720"></img></p>
<p>मीडिया सूत्र ने पूछा कि अब राजनीतिक नेता आपके घर आने लगे हैं। क्या किसी दल ने आपको शामिल होने का निमंत्रण दिया है? दीपके ने साफ कहा कि नहीं, किसी ने हमें किसी दल में शामिल होने के लिए नहीं कहा है। जो लोग आ रहे हैं, वे सिर्फ हमें अच्छे काम करने और छात्रों को न्याय दिलाने के लिए बधाई दे रहे हैं।</p>
<p>सरकार ने कहा कि वह आपसे बातचीत करेगी और सुधारों का मसौदा तैयार करेगी, तो क्या वह बातचीत शुरू हो गई है? इस पर उन्होंने कहा कि बातचीत में कुछ कठिनाइयाँ आई हैं, लेकिन हम सरकार पर आगे बढ़ने के लिए दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। अपनी मांगों को आगे बढ़ाने के लिए सरकार के साथ जुड़े रहना महत्वपूर्ण है, अन्यथा यदि बात नहीं बनी तो हम फिर से सड़क पर उतरेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 12:37:25 +0530</pubDate>
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