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                <title>राजनीति - Khabarchhe Hindi</title>
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                <title> पश्चिम बंगाल: क्या ममता बनर्जी का 36 साल पुराना रिकॉर्ड फिर होगा ताज़ा? आखिर क्या था 1990 का वो किस्सा जो आज बन गया हथियार?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर पथराव और अंडे फेंकने की घटना के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। TMC इसे राजनीतिक हमला बताते हुए इसे संगठनात्मक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है। ममता बनर्जी खुद अस्पताल गई थीं और इस घटना को गंभीरता से लेते हुए विपक्ष पर हमला बोला था। लेकिन सवाल यह है कि क्या 36 साल पहले हाजरा मोड़ के पास अपनी बुआ ममता बनर्जी पर हुए हमले की तरह अभिषेक भी इस घटना का इस्तेमाल अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाने के लिए कर पाएंगे?</p>
<p>दरअसल, 1990 में कांग्रेस</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/%C2%A0%E0%A4%AA%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%AE-%E0%A4%AC%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%B2--%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A4%AE%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-36-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%89%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A1-%E0%A4%AB%E0%A4%BF%E0%A4%B0-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A5%9B%E0%A4%BE--%E0%A4%86%E0%A4%96%E0%A4%BF%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%A5%E0%A4%BE-1990-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A5%8B-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A5%8B-%E0%A4%86%E0%A4%9C-%E0%A4%AC%E0%A4%A8-%E0%A4%97%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A4%A5%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B0/article-2487"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/001.webp" alt=""></a><br /><p>तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर पथराव और अंडे फेंकने की घटना के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। TMC इसे राजनीतिक हमला बताते हुए इसे संगठनात्मक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है। ममता बनर्जी खुद अस्पताल गई थीं और इस घटना को गंभीरता से लेते हुए विपक्ष पर हमला बोला था। लेकिन सवाल यह है कि क्या 36 साल पहले हाजरा मोड़ के पास अपनी बुआ ममता बनर्जी पर हुए हमले की तरह अभिषेक भी इस घटना का इस्तेमाल अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाने के लिए कर पाएंगे?</p>
<p>दरअसल, 1990 में कांग्रेस की नेता के रूप में आंदोलन कर रहीं युवा ममता बनर्जी पर कोलकाता के हाजरा मोड़ के पास हमला किया गया था। उस घटना ने उन्हें सत्ता के खिलाफ डटकर मुकाबला करने वाली एक बेहद आक्रामक नेता की पहचान दिलाई थी। उस हमले की तस्वीरें आज भी TMC कार्यालय की दीवारों पर इस तरह लगी हैं कि हर किसी की नजर उन पर पड़े। इस हमले के बाद कांग्रेस से समर्थन न मिलने पर ममता अलग हो गईं और तृणमूल कांग्रेस का गठन किया, और आगे का इतिहास सबके सामने है। व्यक्तिगत चोट को राजनीतिक लाभ में बदलने की यह रणनीति ममता बनर्जी के राजनीतिक करियर का अहम हिस्सा रही है। 2021 के विधानसभा चुनाव में व्हीलचेयर पर प्रचार करना और BJP पर जानलेवा हमले का आरोप लगाना भी उनके लिए प्रभावी साबित हुआ था।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/0239.webp" alt="0239" width="1280" height="720"></img></p>
<p>ऐसी खबर है कि शनिवार की घटना के बाद TMC इस बार भी वही फॉर्मूला आजमाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक इसे 1990 जितना आसान नहीं मानते। इसकी वजह भी साफ है...</p>
<p>सत्ता में रहने के बाद संघर्ष की छवि बनाना मुश्किल: कुछ समय पहले तक ममता बनर्जी मुख्यमंत्री थीं और TMC डेढ़ दशक से राज्य की सत्ता में थी। अब विपक्षी नेता की तरह सड़क पर संघर्ष करने वाली छवि बनाना लोगों को विश्वसनीय नहीं लगता।</p>
<p>अभिषेक की छवि अलग है: ममता बनर्जी ने आंदोलनों और जनसंघर्षों के जरिए अपनी पहचान बनाई, जबकि विपक्ष लगातार अभिषेक बनर्जी पर वंशवाद की राजनीति, परिवारवाद और भ्रष्टाचार के आरोप लगाता रहा है। इन आरोपों ने उनकी सार्वजनिक छवि को काफी नुकसान पहुंचाया है। उन्हें अक्सर घमंडी व्यक्ति के रूप में देखा जाता है, जिसके कारण 1990 जैसी जनसहानुभूति फिर से हासिल करना चुनौतीपूर्ण लगता है।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/0335.webp" alt="0335" width="1280" height="720"></img></p>
<p>राजनीतिक परिदृश्य बदल चुका है: 1990 में बंगाल की राजनीति कांग्रेस और वाम मोर्चे के बीच द्विध्रुवीय थी। तीसरे विकल्प के लिए जगह थी, जिसका फायदा ममता बनर्जी ने उठाया। 2026 में BJP एक मजबूत राष्ट्रीय पार्टी के रूप में प्रभावशाली मौजूदगी रखती है, जिसके पास संसाधन और संगठन दोनों हैं। वामपंथी दल अब पहले जितने प्रभावशाली नहीं रहे हैं।</p>
<p>ममता बनर्जी अभिषेक बनर्जी को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी स्थापित करने की कोशिश कर रही हैं। अस्पताल जाकर उन्होंने इस घटना का इस्तेमाल पार्टी के भविष्य के नेतृत्व पर चर्चा को आगे बढ़ाने के लिए करने की कोशिश की है। INDIA ब्लॉक के समर्थन के साथ वे इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाना चाहती हैं। लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि अभिषेक, ममता नहीं हैं, और 2026 का बंगाल अब 1990 के बंगाल जैसा बिल्कुल नहीं रहा है।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/0513.webp" alt="0513" width="1280" height="720"></img></p>
<p>दूसरी ओर, BJP ने पहले ही इस तुलना को खारिज कर दिया है और इसे TMC की पुरानी चाल बताया है। अब देखना यह है कि बंगाल के लोग इस 'हमले की राजनीति' पर कितना भरोसा करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 13:08:50 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मध्य प्रदेश: मंत्री बनने के बाद नेता ही नहीं, परिवार के सदस्य भी नहीं कर सकते ये काम! जानिए सरकारी नियम</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="flex max-w-full flex-col gap-4 grow">
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<p>मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ज़मीन के सौदों को लेकर चर्चा में हैं। एक अंग्रेज़ी अख़बार ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार के सदस्यों ने सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए बड़े पैमाने पर ज़मीन खरीदी थी। इसके बाद मंत्रियों की संपत्ति से जुड़े नियमों पर चर्चा चल रही है। आइए देखते हैं कि मंत्री बनने के बाद राजनेताओं को किन नियमों का पालन करना चाहिए और अपने व्यवसाय में उन्हें किन सावधानियों का ध्यान रखना चाहिए।</p>
<p>सरकार की आचार संहिता के अनुसार, सभी राज्य मंत्रियों को हर वर्ष मुख्यमंत्री को और केंद्रीय</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/after-becoming-a-minister-not-only-the-leaders-but-even/article-2479"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/photo-(2)16.webp" alt=""></a><br /><div class="flex max-w-full flex-col gap-4 grow">
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<p>मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ज़मीन के सौदों को लेकर चर्चा में हैं। एक अंग्रेज़ी अख़बार ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार के सदस्यों ने सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए बड़े पैमाने पर ज़मीन खरीदी थी। इसके बाद मंत्रियों की संपत्ति से जुड़े नियमों पर चर्चा चल रही है। आइए देखते हैं कि मंत्री बनने के बाद राजनेताओं को किन नियमों का पालन करना चाहिए और अपने व्यवसाय में उन्हें किन सावधानियों का ध्यान रखना चाहिए।</p>
<p>सरकार की आचार संहिता के अनुसार, सभी राज्य मंत्रियों को हर वर्ष मुख्यमंत्री को और केंद्रीय मंत्रियों को प्रधानमंत्री को अपनी संपत्ति की जानकारी देना आवश्यक है। वहीं, मुख्यमंत्री को अपनी संपत्ति की जानकारी प्रधानमंत्री या गृह मंत्री को देना आवश्यक है। मंत्रियों को अचल संपत्ति, शेयर और डिबेंचर, नकद और आभूषणों का अनुमानित विवरण देना अनिवार्य है। इसके अलावा, मंत्री बनने के बाद उन्हें अपने व्यवसायों के संचालन और प्रबंधन से जुड़े सभी संबंध समाप्त कर देने चाहिए। जब तक वे मंत्री पद पर रहें, उन्हें हर वर्ष 31 अगस्त तक प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री को अपनी संपत्ति और पिछले वित्तीय वर्ष की देनदारियों की जानकारी देना अनिवार्य है।</p>
<p>मंत्री को अपने प्रबंधन में हिस्सेदारी भी हस्तांतरित करनी होगी, लेकिन उसे अपने जीवनसाथी के नाम नहीं करना चाहिए। किसी भी ऐसे व्यवसाय से स्वयं को अलग करना होगा जिसमें सरकार के साथ काम करना पड़ता हो, जैसे लाइसेंस, परमिट, लीज़, कोटा या टेंडर आदि।</p>
<p>इसके अलावा, उन्हें सरकार से किसी भी अचल संपत्ति की खरीद या बिक्री से दूर रहना होगा। यदि संपत्ति सामान्य प्रक्रिया के तहत प्राप्त की गई हो, तो वह अलग बात है। साथ ही, मंत्री बनने के बाद उन्हें कोई नया व्यवसाय शुरू करने या किसी नए व्यवसाय से जुड़ने से भी बचना होगा।</p>
<p>उनके परिवार के सदस्य भी ऐसा कोई व्यवसाय नहीं कर सकते जो सरकार या परमिट, लाइसेंस, लीज़ आदि से संबंधित हो। यदि परिवार का कोई सदस्य कोई नया व्यवसाय स्थापित करता है या उसके संचालन और प्रबंधन में भाग लेता है, तो मंत्री को इसकी जानकारी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को देनी होगी।</p>
<p>उन्हें किसी भी उद्देश्य के लिए, चाहे वह राजनीतिक हो, परोपकारी हो या कोई अन्य, स्वयं या अपने परिवार के किसी सदस्य के माध्यम से किसी भी प्रकार का योगदान (दान) स्वीकार नहीं करना चाहिए। यदि किसी पंजीकृत संस्था, परोपकारी संस्था, सार्वजनिक प्राधिकरण द्वारा मान्यता प्राप्त संस्था या राजनीतिक दल के लिए उन्हें कोई धनराशि या चेक दिया जाता है, तो उसे संबंधित संस्था को भेज देना चाहिए, जिसके उद्देश्य से वह राशि दी गई है। उन्हें किसी भी प्रकार की धन संग्रह गतिविधि में स्वयं को शामिल नहीं करना चाहिए।</p>
<p>इसके अलावा, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री और राज्य सरकार के मंत्री तथा उनके सहयोगी प्रधानमंत्री की अनुमति के बिना भारत या विदेश में किसी भी विदेशी सरकार या विदेशी संस्था के अधीन कार्य नहीं कर सकते। यदि ऐसा कोई संबंध पहले से मौजूद हो, तो उसका खुलासा करना चाहिए। किसी भी विदेशी मिशन में रोजगार पर सख्त प्रतिबंध होना चाहिए।</p>
<p>मंत्री को निकट संबंधियों से प्राप्त उपहारों को छोड़कर कोई भी मूल्यवान उपहार स्वीकार नहीं करना चाहिए। साथ ही, उनके परिवार के किसी भी सदस्य को भी ऐसे किसी व्यक्ति से उपहार स्वीकार नहीं करना चाहिए जिसका मंत्री के साथ आधिकारिक संबंध या लेन-देन हो। मंत्री या उनके परिवार के किसी भी सदस्य को ऐसी कोई ऋण नहीं लेना चाहिए और न ही लेने की अनुमति देनी चाहिए, जिससे उनके आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में असुविधा हो या पक्षपात की आशंका उत्पन्न हो।</p>
<p>मंत्री विदेश यात्रा पर हों या भारत में, वे विदेशी गणमान्य व्यक्तियों से उपहार प्राप्त कर सकते हैं। ऐसे उपहार दो श्रेणियों में आते हैं। पहली श्रेणी में वे उपहार शामिल हैं जो प्रतीकात्मक प्रकृति के होते हैं, जैसे तलवारें, पारंपरिक पोशाक आदि, जिन्हें वे अपने पास रख सकते हैं। दूसरी श्रेणी में वे उपहार शामिल हैं जो प्रतीकात्मक प्रकृति के नहीं होते। यदि ऐसे उपहार का मूल्य ₹5,000 से कम हो, तो मंत्री उसे अपने पास रख सकते हैं। यदि उसका मूल्य इससे अधिक हो, तो मंत्री को उसे सरकार को सौंपना होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 19:55:38 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>केंद्रीय मंत्री ने अपने ही विभाग से 1 करोड़ रुपये की सब्सिडी ली, कहा- सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ था</title>
                                    <description><![CDATA[<p>केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी पर अपने ही विभाग से लगभग 1 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्राप्त करने के आरोपों ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। इस मुद्दे पर विपक्ष लगातार उन पर हमला कर रहा है। अब केंद्रीय मंत्री भगिरथ चौधरी ने स्वयं खुलकर इस विषय पर बात की है और विपक्ष के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।</p>
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satyahindi.com

<p>मीडिया सूत्रों के साथ एक बातचीत में भागीरथ चौधरी ने कहा कि वे बचपन से ही खेती से जुड़े हुए हैं और किसान समुदाय से आते हैं। उन्होंने कहा कि खेती उनका पैतृक व्यवसाय है। राजस्थान</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/union-minister-took-subsidy-of-rs-1-crore-from-his/article-2468"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/711.webp" alt=""></a><br /><p>केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी पर अपने ही विभाग से लगभग 1 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्राप्त करने के आरोपों ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। इस मुद्दे पर विपक्ष लगातार उन पर हमला कर रहा है। अब केंद्रीय मंत्री भगिरथ चौधरी ने स्वयं खुलकर इस विषय पर बात की है और विपक्ष के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/523.webp" alt="523" width="1200" height="675"></img>
satyahindi.com

<p>मीडिया सूत्रों के साथ एक बातचीत में भागीरथ चौधरी ने कहा कि वे बचपन से ही खेती से जुड़े हुए हैं और किसान समुदाय से आते हैं। उन्होंने कहा कि खेती उनका पैतृक व्यवसाय है। राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के पेह गांव में उनकी जमीन है। वहां पानी की बहुत अधिक कमी है और भूजल लगभग समाप्त हो चुका है। इसके परिणामस्वरूप उन्होंने वर्षा जल संचयन के लिए 20 मिलियन लीटर क्षमता वाला कृषि तालाब और एक पॉलीहाउस बनवाया।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/616.webp" alt="616" width="1280" height="720"></img>
ndtv.in

<p>सब्सिडी के मुद्दे पर स्पष्टीकरण देते हुए कृषि राज्य मंत्री ने कहा कि उन्हें यह लाभ किसी विशेष छूट के तहत नहीं, बल्कि सरकारी नियमों के अनुसार मिला है। उन्होंने बताया कि पॉलीहाउस की कुल लागत पर 50 प्रतिशत सब्सिडी देने का प्रावधान है, जिसका लाभ देशभर के हजारों किसानों को मिलता है। उन्होंने वर्ष 2018 में इसके लिए आवेदन किया था, और उचित फोटोग्राफी तथा सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद, पॉलीहाउस स्थापित होने और फसल कटाई के 6 महीने बाद, वर्ष 2025 में उन्हें सब्सिडी प्रदान की गई।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/914.webp" alt="914" width="1280" height="720"></img>
aajtak.in

<p>चौधरी ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा, 'विपक्ष के पास मेरे खिलाफ कोई मुद्दा ही नहीं है। मेरे राजनीतिक जीवन में आज तक मुझ पर एक रुपये के भी भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगाया जा सका है। मैंने अपने खेत में एक बड़ा बोर्ड लगाया हुआ है, जिसमें ऋण और सब्सिडी का पूरा विवरण दिया गया है। यदि मेरी कोई गलत मंशा होती, तो मैं वहां बोर्ड क्यों लगाता?'</p>
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indiatv.in

<p>मंत्री ने कहा कि वे आधुनिक और उन्नत तकनीकों का उपयोग करके खेती कैसे की जाए, यह सीखने के लिए अन्य किसानों को भी अपने खेत पर आमंत्रित करते हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में इस पॉलीहाउस में खीरा, टमाटर, शिमला मिर्च और धनिया जैसी फसलें उगाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सब्सिडी के बिना पॉलीहाउस स्थापित करना किसी भी सामान्य किसान के लिए घाटे का सौदा है, इसलिए सरकार यह सहायता प्रदान करती है ताकि किसान आत्मनिर्भर और समृद्ध बन सकें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 12:11:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बोलो, बांग्लादेश के सांसद कहते हैं, 'भारत को बंगाल के CM शुभेंदु बाबू को रोकना चाहिए...'</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बांग्लादेश की संसद में सत्तारूढ़ BNP के एक सांसद ने अपने देश के स्पीकर के समक्ष एक बेहद विचित्र मांग रखी है। बांग्लादेश के सांसद GM सिराज ने संसद में कहा कि पश्चिम बंगाल के CM शुभेंदु अधिकारी के बयानों पर रोक लगाई जानी चाहिए, क्योंकि उनके बयान भारत-बांग्लादेश की मित्रता के हित में नहीं हैं।</p>
<p>सिराज ने यह बयान बांग्लादेश की संसद में वित्त वर्ष 2026-27 के प्रस्तावित बजट पर चर्चा के दौरान दिया। उन्होंने भारत-बांग्लादेश सीमा पार से भारत की ओर से होने वाली कथित घुसपैठ को रोकने की भी मांग की।</p>
<p>संसदीय कार्यवाही के दौरान BNP सांसद</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/say-bangladesh-mp-says-india-should-stop-bengal-cm-shubhendu/article-2458"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/bnp-lawmaker1.webp" alt=""></a><br /><p>बांग्लादेश की संसद में सत्तारूढ़ BNP के एक सांसद ने अपने देश के स्पीकर के समक्ष एक बेहद विचित्र मांग रखी है। बांग्लादेश के सांसद GM सिराज ने संसद में कहा कि पश्चिम बंगाल के CM शुभेंदु अधिकारी के बयानों पर रोक लगाई जानी चाहिए, क्योंकि उनके बयान भारत-बांग्लादेश की मित्रता के हित में नहीं हैं।</p>
<p>सिराज ने यह बयान बांग्लादेश की संसद में वित्त वर्ष 2026-27 के प्रस्तावित बजट पर चर्चा के दौरान दिया। उन्होंने भारत-बांग्लादेश सीमा पार से भारत की ओर से होने वाली कथित घुसपैठ को रोकने की भी मांग की।</p>
<p>संसदीय कार्यवाही के दौरान BNP सांसद ने कहा, 'माननीय स्पीकर, मैं आपके माध्यम से भारत की मोदी सरकार से कहना चाहता हूँ कि पश्चिम बंगाल के नेता CM शुभेंदु बाबू को रोका जाना चाहिए। बांग्लादेश के खिलाफ उनके सभी बयान, जो वे समय-समय पर देते रहते हैं, दोनों देशों के बीच की मित्रता में बाधा बन गए हैं।'</p>
<p>उन्होंने कहा, 'शेख हसीना का इससे कोई संबंध नहीं है। हमें शेख हसीना की कोई चिंता नहीं है। वह अब बांग्लादेश में नहीं हैं। वह अब राजनीतिक परिदृश्य से बाहर हैं।' इस बात पर ज़ोर देते हुए कि शेख हसीना अब बांग्लादेश की राजनीति में महत्वपूर्ण व्यक्ति नहीं हैं, GM सिराज ने आगे कहा, 'हम सभी बांग्लादेश-भारत की मित्रता को सौहार्दपूर्ण और सम्मानजनक तरीके से बनाए रखना चाहते हैं।'</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/bnp-lawmaker.webp" alt="bnp-lawmaker" width="1280" height="720"></img>
tbsnews.net

<p>GM सिराज ने कहा कि कोई भी अपने पड़ोसी से मुँह नहीं मोड़ सकता। उन्होंने कहा, 'दो दोस्तों के बीच की दोस्ती कुछ समय की हो सकती है, पति-पत्नी के बीच का संबंध भी कुछ समय का हो सकता है। पति-पत्नी तलाक ले सकते हैं। लेकिन भारत और बांग्लादेश के बीच का यह पड़ोसी संबंध कभी तलाक नहीं ले सकता।'</p>
<p>बांग्लादेश में भारत के नए उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी द्वारा बांग्लादेश पहुँचने के बाद दोनों देशों के संबंधों पर दिए गए बयानों का उल्लेख करते हुए GM सिराज ने कहा कि उन बयानों ने सोशल मीडिया पर चर्चा छेड़ दी थी।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/cm-suvendu-adhikari.webp" alt="cm-suvendu-adhikari" width="1280" height="720"></img>
indianexpress.com

<p>सांसद ने भारत से लोगों का दिल जीतने की अपील करते हुए कहा, 'हम भारत विरोधी या बांग्लादेश विरोधी भावनाएँ नहीं चाहते। ऐसी बातें नहीं होनी चाहिए। हम शांतिपूर्ण माहौल में रहना चाहते हैं। इस संदर्भ में मेरी वर्तमान भारत सरकार से विनम्र प्रार्थना है कि कृपया लोगों को जबरन बांग्लादेश में घुसपैठ कराने की कार्रवाई बंद करें।'</p>
<p>यहाँ आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल और भारत के अन्य हिस्सों में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। सरकार ऐसे बांग्लादेशियों को पकड़कर देश से निष्कासित कर रही है। हालांकि, बांग्लादेश इन कदमों का विरोध कर रहा है और दावा कर रहा है कि भारत उन्हें जबरन बांग्लादेश की ओर धकेल रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 17:34:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>उद्धव ठाकरे BJP और DyCM शिंदे से तो ठीक हैं, लेकिन कांग्रेस-शरद पवार से क्यों नाराज़ हैं?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र की राजनीति में, शिवसेना (UBT) के प्रमुख उद्धव ठाकरे सिर्फ BJP और DyCM एकनाथ शिंदे से ही नहीं, बल्कि अपने महा विकास आघाड़ी के सहयोगियों से भी नाराज़ हैं। उनके 6 सांसदों के विद्रोह के बाद, उद्धव ने महा विकास आघाड़ी के विधायकों की बैठक बुलाई थी, लेकिन कांग्रेस या शरद पवार की पार्टी NCP के सभी विधायक तो दूर, वरिष्ठ नेता भी उसमें शामिल नहीं हुए।</p>
<p>महा विकास आघाड़ी के विधायकों की बैठक में उद्धव ठाकरे ने सवाल किया, "हम कहते तो हैं कि हम साथ हैं, लेकिन क्या वास्तव में हम साथ हैं? महा विकास आघाड़ी की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/uddhav-thackeray-is-fine-with-bjp-and-dycm-shinde-but/article-2457"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/uddhav-thackeray1.webp" alt=""></a><br /><p>महाराष्ट्र की राजनीति में, शिवसेना (UBT) के प्रमुख उद्धव ठाकरे सिर्फ BJP और DyCM एकनाथ शिंदे से ही नहीं, बल्कि अपने महा विकास आघाड़ी के सहयोगियों से भी नाराज़ हैं। उनके 6 सांसदों के विद्रोह के बाद, उद्धव ने महा विकास आघाड़ी के विधायकों की बैठक बुलाई थी, लेकिन कांग्रेस या शरद पवार की पार्टी NCP के सभी विधायक तो दूर, वरिष्ठ नेता भी उसमें शामिल नहीं हुए।</p>
<p>महा विकास आघाड़ी के विधायकों की बैठक में उद्धव ठाकरे ने सवाल किया, "हम कहते तो हैं कि हम साथ हैं, लेकिन क्या वास्तव में हम साथ हैं? महा विकास आघाड़ी की एकता सिर्फ बैठकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। अगर गठबंधन सचमुच एक है, तो यह सड़कों पर और सदन में भी दिखाई देना चाहिए।"</p>
<p>उद्धव ठाकरे ने महा विकास आघाड़ी की एकता को लेकर जिस तरह संदेह जताया है, उससे साफ़ पता चलता है कि वे कांग्रेस और शरद पवार की पार्टी NCP (SP) के रवैये से असंतुष्ट हैं। उद्धव ठाकरे का मानना है कि संकट के समय महा विकास आघाड़ी का कोई भी सहयोगी उनके साथ नहीं था।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/uddhav-thackeray11.webp" alt="uddhav-thackeray11" width="1280" height="720"></img>
aajtak.in

<p>शिवसेना (UBT) के 6 लोकसभा सांसदों के विद्रोह के बाद, उद्धव ठाकरे ने बुधवार देर शाम महा विकास आघाड़ी के विधायकों की बैठक बुलाई थी। उन्होंने सहयोगी दलों के वरिष्ठ नेताओं को भी आमंत्रित किया था। महा विकास आघाड़ी के 60 विधायकों में से केवल 37 विधायक उपस्थित हुए, जबकि 23 विधायक बैठक में नहीं आए।</p>
<p>महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान उद्धव ठाकरे ने यह बैठक बुलाई थी, लेकिन सभी विधायक उपस्थित नहीं रहे। इसके अलावा, गठबंधन का कोई भी शीर्ष नेता बैठक में शामिल नहीं हुआ। NCP (SP) के नेता जयंत पाटिल भी नहीं आए और शरद पवार भी अनुपस्थित रहे। उद्धव ठाकरे की नाराज़गी अब खुलकर सामने आ गई है और उन्होंने महा विकास आघाड़ी की एकता पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>
<p>उद्धव ठाकरे अब ज़ोर देकर कह रहे हैं कि महा विकास आघाड़ी की एकता सिर्फ बैठकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यदि गठबंधन वास्तव में एक है, तो यह सदन के भीतर और पूरे राज्य में दिखाई देना चाहिए। उन्होंने कहा, "महा विकास आघाड़ी के रूप में हम राज्य में एक प्रमुख शक्ति हैं। हमें अपने बीच समन्वय बनाए रखना चाहिए और भविष्य में तीनों दल संयुक्त बैठकें और रैलियां करेंगे।"</p>
<p>शिवसेना (UBT) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा, "हम कह रहे हैं कि हम साथ हैं, लेकिन क्या हम वास्तव में एक हैं? क्या हम सदन में महा विकास आघाड़ी के रूप में एक हैं? क्या हम मिलकर मुद्दे उठाते हैं? हमें संयुक्त विपक्ष के रूप में काम करना चाहिए। इसके अलावा, तीनों दलों को संयुक्त रूप से पूरे राज्य में सभाओं, रैलियों और विरोध प्रदर्शनों का आयोजन करना चाहिए, ताकि हमारी एकता का संदेश पूरे महाराष्ट्र तक पहुंचे।"</p>
<p>उद्धव ठाकरे अपने दोनों सहयोगी दलों से नाराज़ हैं, क्योंकि उन्होंने यह सवाल ऐसे समय उठाया है जब उनके समूह के 6 सांसद पहले ही अलग हो चुके हैं। महा विकास आघाड़ी (MVA) के 23 विधायक विधानसभा सत्र के दौरान बैठक में शामिल नहीं हुए। इसलिए उनका मानना है कि MVA केवल एकता की बातें करता है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर एकता की कमी है। उनकी इस खुली नाराज़गी ने शरद पवार की NCP (SP) में मतभेदों को भी सतह पर ला दिया है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/uddhav-thackeray2.webp" alt="uddhav-thackeray2" width="1280" height="720"></img>
abplive.com

<p>महाराष्ट्र की राजनीति में उद्धव ठाकरे BJP और DyCM एकनाथ शिंदे से नाराज़ हैं। यह नाराज़गी समझी जा सकती है, क्योंकि DyCM एकनाथ शिंदे ने न केवल उनसे सत्ता छीन ली, बल्कि शिवसेना भी उनसे अलग कर ली। 2022 में DyCM शिंदे ने उद्धव ठाकरे के 40 विधायकों को अपने साथ मिला लिया था, और अब शिवसेना (UBT) के 6 लोकसभा सांसद भी विद्रोह कर फिर से DyCM शिंदे के साथ जुड़ गए हैं। इस तरह DyCM शिंदे ने उद्धव ठाकरे को दो बार बड़ा राजनीतिक झटका दिया और उनके राजनीतिक भविष्य को भी हिला दिया।</p>
<p>उद्धव ठाकरे का मानना है कि उनके दल में विद्रोह के पीछे BJP का हाथ है। BJP की मदद से ही DyCM एकनाथ शिंदे ने सत्ता पर कब्ज़ा किया और पार्टी का विभाजन कराया। यही कारण है कि उद्धव ठाकरे BJP और DyCM शिंदे से नाराज़ हैं। लेकिन फिलहाल उन्होंने महा विकास आघाड़ी (MVA) पर जो सवाल उठाए हैं, उनके पीछे क्या वजह है?</p>
<p>शिवसेना (UBT) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद BJP के साथ अपना 25 साल पुराना गठबंधन तोड़ दिया था और कांग्रेस तथा NCP के साथ गठबंधन किया था। वैचारिक मतभेदों के बावजूद, उन्होंने कांग्रेस और NCP के साथ मिलकर सरकार बनाई, लेकिन जब उनकी पार्टी में विद्रोह हुआ, तब महा विकास आघाड़ी उनके साथ खड़ी नहीं रही।</p>
<p>DyCM एकनाथ शिंदे के विद्रोह के दौरान उद्धव ठाकरे अकेले पड़ गए थे। कांग्रेस और शरद पवार उनके साथ दिखाई नहीं दिए। जब शिवसेना (UBT) के लोकसभा सांसदों ने फिर से विद्रोह किया और DyCM शिंदे का साथ दिया, तब भी कांग्रेस और शरद पवार उद्धव का बचाव करते नज़र नहीं आए। शिवसेना (UBT) में यह भावना है कि उनके दल के राजनीतिक हितों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/uddhav-thackeray3.webp" alt="uddhav-thackeray3" width="1280" height="720"></img>
indiatv.in

<p>उद्धव ठाकरे गुट का तर्क है कि कांग्रेस और शिवसेना (UBT) ही BJP के खिलाफ सबसे स्पष्ट लड़ाई लड़ रहे हैं। उद्धव ठाकरे खेमे के लिए दूसरी बड़ी चिंता भरोसे की है। शिवसेना (UBT) के कई नेताओं को डर है कि भविष्य में महाराष्ट्र की राजनीति में नए राजनीतिक समीकरण उभर सकते हैं।</p>
<p>पार्टी के भीतर यह चर्चा भी चल रही है कि राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार NCP (SP) अलग रुख अपना सकती है। यही वजह है कि उद्धव ठाकरे की बैठक में शरद पवार और उनके दल के नेताओं की अनुपस्थिति से नाराज़गी और बढ़ गई।</p>
<p>यह गुस्सा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उद्धव ठाकरे पहले से ही कई मोर्चों पर दबाव का सामना कर रहे हैं। एक ओर DyCM एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना में हुए विभाजन का असर अभी भी दिखाई दे रहा है, तो दूसरी ओर पार्टी के कुछ सांसदों के बाग़ी रुख ने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। उद्धव ठाकरे की लड़ाई अब सिर्फ BJP या DyCM शिंदे गुट से नहीं है, बल्कि उन्हें अपने सहयोगी दलों के बीच अपनी राजनीतिक जगह और सम्मान बनाए रखने की चुनौती का भी सामना करना पड़ रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://hindi.khabarchhe.com/politics/uddhav-thackeray-is-fine-with-bjp-and-dycm-shinde-but/article-2457</link>
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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 16:27:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुमुल डेयरी के चुनाव में भाजपा समर्थित पैनल के सामने भाजपा के ही बागी नेता उतर पड़े</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सुमुल डेयरी के आगामी चुनाव से पहले ही राजनीतिक माहौल गर्म होता दिखाई दे रहा है। भाजपा प्रेरित पैनल के आधिकारिक 16 उम्मीदवारों के मुकाबले पार्टी के ही बागी नेताओं और कांग्रेस ने मोर्चा खोलते हुए कुल 32 नामांकन पत्र दाखिल किए हैं, जिससे यह मुकाबला अब आंतरिक गुटबाजी का शिकार बन गया है। इस बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी पकड़ मजबूत करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। डेयरी की कुल 16 सीटों में से 5 सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार निर्विरोध घोषित हो गए हैं, जिससे राजनीतिक हलकों में आश्चर्य और उत्साह का माहौल है।</p>
<p>सूरत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/rebel-leaders-of-bjp-faced-bjp-supported-panel-in-sumul/article-2453"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/sumul-dairy-elections21.webp" alt=""></a><br /><p>सुमुल डेयरी के आगामी चुनाव से पहले ही राजनीतिक माहौल गर्म होता दिखाई दे रहा है। भाजपा प्रेरित पैनल के आधिकारिक 16 उम्मीदवारों के मुकाबले पार्टी के ही बागी नेताओं और कांग्रेस ने मोर्चा खोलते हुए कुल 32 नामांकन पत्र दाखिल किए हैं, जिससे यह मुकाबला अब आंतरिक गुटबाजी का शिकार बन गया है। इस बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी पकड़ मजबूत करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। डेयरी की कुल 16 सीटों में से 5 सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार निर्विरोध घोषित हो गए हैं, जिससे राजनीतिक हलकों में आश्चर्य और उत्साह का माहौल है।</p>
<p>सूरत कलेक्टर के आदेश पर चुनाव अधिकारी एन.एन. सवाणी द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार आगामी 15 जुलाई को 15 मतदान केंद्रों पर मतदान प्रक्रिया आयोजित की जाएगी। हालांकि, नामांकन प्रक्रिया पूरी होते ही भाजपा प्रेरित पैनल के 5 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं और अब केवल शेष 11 सीटों के लिए ही बड़ा मुकाबला होगा।</p>
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divyabhaskar.co.in

<p>बुधवार को नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिन भाजपा प्रेरित पैनल के प्रमुख विधायक संदीप देसाई सहित 15 उम्मीदवारों ने और उससे पहले मंगलवार को राजू पाठक ने नामांकन दाखिल किया था, जिससे आधिकारिक पैनल के कुल 16 उम्मीदवार मैदान में हैं। इसके मुकाबले सूरत डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव बैंक के पूर्व अध्यक्ष नरेश पटेल सहित भाजपा के ही बागी नेताओं ने पार्टी के निर्देशों की अनदेखी करते हुए 16 सीटों पर नामांकन भरकर चुनावी बिगुल फूंक दिया है। विशेष रूप से वालोड सीट पर भाजपा के आधिकारिक उम्मीदवार राजू आहिर के खिलाफ पूर्व निदेशक नरेश पटेल ने मोर्चा खोल दिया है।</p>
<p>दिव्य भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, आधिकारिक मतदान से पहले ही भाजपा प्रेरित पैनल ने 5 सीटों पर पूरी तरह निर्विरोध जीत हासिल कर ली है। इनमें चोर्यासी सीट से विधायक संदीप देसाई, कामरेज सीट से बलवंत पटेल, मांगरोल सीट से वर्तमान उपाध्यक्ष राजू पाठक, बारडोली सीट से अजयभाई और पलसाणा सीट से भरतभाई डाभी निर्विरोध चुने गए हैं।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/sumul-dairy-elections1.webp" alt="sumul-dairy-elections" width="1280" height="720"></img>
gujaratfirst.com

<p>इस चुनाव में 1000 करोड़ रुपये के कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों का सामना कर रहे राजू पाठक समूह का दबदबा बरकरार रहा है, जबकि उनके खिलाफ आवाज उठाने वाले पूर्व अध्यक्ष मानसिंह पटेल को पूरी तरह किनारे कर दिया गया है।</p>
<p>चुनाव प्रक्रिया और मतदान की महत्वपूर्ण तिथियां</p>
<p><strong>26 जून: </strong>नामांकन पत्रों की विस्तृत जांच की जाएगी।</p>
<p><strong>6 जुलाई:</strong> नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि (इसके बाद ही अंतिम तस्वीर स्पष्ट होगी)।</p>
<p><strong>15 जुलाई:</strong> सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक ओलपाड, व्यारा, बारडोली, सोनगढ़ सहित 15 तालुका मुख्यालयों पर मतदान होगा। (चोर्यासी और ओलपाड सीट के लिए सुमुल डेयरी परिसर के बैंक्वेट हॉल में मतदान केंद्र रखा जाएगा।)</p>
<p><strong>17 जुलाई:</strong> सुमुल डेयरी के बैंक्वेट हॉल में ही मतगणना की जाएगी और परिणाम घोषित किए जाएंगे।</p>
<p>सूरत जिला भाजपा अध्यक्ष भरत राठौड़ और विधायक संदीप देसाई ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि आधिकारिक जनादेश के खिलाफ बगावत करने वाले उम्मीदवार यदि अपने नामांकन वापस नहीं लेते हैं, तो उन्हें किसी भी परिस्थिति में नहीं समझाया जाएगा और पार्टी से तत्काल निलंबन तक की कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://hindi.khabarchhe.com/politics/rebel-leaders-of-bjp-faced-bjp-supported-panel-in-sumul/article-2453</link>
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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 22:13:46 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल: दीदी के खिलाफ बगावत का चेहरा बने अरूप रॉय कौन हैं? TMC के बागी गुट के अध्यक्ष चुने गए</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक ऐतिहासिक उलटफेर हुआ है, जिसकी हाल तक किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। 1998 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की स्थापना करने वाली ममता बनर्जी को उनकी ही पार्टी में एक बागी गुट द्वारा उनके पद से हटा दिया गया है। विधानसभा चुनाव में करारी हार के लगभग 6 सप्ताह बाद, विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में यह पार्टी का सबसे बड़ा विद्रोह माना जा रहा है।</p>
<p>कोलकाता के न्यू टाउन स्थित एक होटल में आयोजित बागी गुट के विशेष राष्ट्रीय सम्मेलन की बैठक में, शक्तिशाली नेता और पूर्व मंत्री अरूप रॉय</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/%E0%A4%A6%E0%A5%80%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%96%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AB-%E0%A4%AC%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%9A%E0%A5%87%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%85%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%AA-%E0%A4%B0%E0%A5%89%E0%A4%AF--tmc-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%9F-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7-%E0%A4%9A%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%97%E0%A4%8F/article-2441"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/arup-roy1.webp" alt=""></a><br /><p>पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक ऐतिहासिक उलटफेर हुआ है, जिसकी हाल तक किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। 1998 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की स्थापना करने वाली ममता बनर्जी को उनकी ही पार्टी में एक बागी गुट द्वारा उनके पद से हटा दिया गया है। विधानसभा चुनाव में करारी हार के लगभग 6 सप्ताह बाद, विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में यह पार्टी का सबसे बड़ा विद्रोह माना जा रहा है।</p>
<p>कोलकाता के न्यू टाउन स्थित एक होटल में आयोजित बागी गुट के विशेष राष्ट्रीय सम्मेलन की बैठक में, शक्तिशाली नेता और पूर्व मंत्री अरूप रॉय को सर्वसम्मति से मूल TMC का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया, जिन्होंने ममता बनर्जी का स्थान लिया। बागी गुट का दावा है कि उन्हें 80 में से 65 विधायकों और बड़ी संख्या में पार्षदों का समर्थन प्राप्त है। इस विद्रोह ने TMC की आधिकारिक पंक्तियों में हलचल मचा दी है, और पार्टी पर नियंत्रण की लड़ाई अब देश के सबसे बड़े राजनीतिक संघर्षों में से एक बन गई है।</p>
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livehindustan.com

<p>70 वर्षीय अरूप रॉय को पश्चिम बंगाल की राजनीति में, विशेष रूप से हावड़ा जिले में सबसे प्रभावशाली और जमीनी नेताओं में से एक माना जाता है। पेशे से वकील, रॉय का राजनीतिक करियर लंबा रहा है। 1998 में, जब ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर TMC का गठन किया था, तब वे कांग्रेस छोड़कर 'दीदी' के साथ मजबूती से खड़े होने वाले पहले नेताओं में से एक थे। रॉय ने लगातार हावड़ा सेंट्रल विधानसभा सीट जीती है, जिसे उन्होंने 2011, 2016, 2021 और हाल ही में संपन्न 2026 के विधानसभा चुनाव में भी बड़े अंतर से जीता है। उन्होंने 2011 से 2026 तक ममता बनर्जी सरकार में सहकारिता विभाग के कैबिनेट मंत्री के रूप में सेवा दी थी। अरूप रॉय के चुनावी शपथपत्र के अनुसार, उनकी कुल संपत्ति 4.9 करोड़ रुपये है, जबकि उन पर 22.8 लाख रुपये का कर्ज है। उनकी घोषित वार्षिक आय 31.2 लाख रुपये है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/arup-roy2.webp" alt="arup-roy2" width="1280" height="720"></img>
aajtak.in

<p>ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाली नई 30 सदस्यीय तृणमूल राष्ट्रीय कार्यकारी समिति ने पार्टी के पूरे ढांचे में बदलाव कर दिया है। इस नई समिति के गठन के साथ ही ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने राष्ट्रीय महासचिव पद से स्वतः इस्तीफा दे दिया है। बागी गुट ने ममता बनर्जी के प्रति कुछ उदारता दिखाते हुए उन्हें नई पार्टी में मुख्य सलाहकार का पद देने की पेशकश की है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/arup-roy3.webp" alt="arup-roy3" width="1280" height="720"></img>
aajtak.in

<p>नई समिति में प्रमुख पदों पर नियुक्तियां इस प्रकार हैं: अध्यक्ष - अरूप रॉय, उपाध्यक्ष - फिरहाद हकीम, अरूप विश्वास, रथीन घोष और सबीना यास्मीन, महासचिव - ऋतब्रत बनर्जी, जावेद खान और संदीपन साहा, कोषाध्यक्ष - अखरुज़मान अंसारी।</p>
<p>बागी गुट ने स्पष्ट किया है कि वे जल्द ही भारतीय चुनाव आयोग (ECI) से संपर्क कर स्वयं को असली ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के रूप में मान्यता दिलाने और पार्टी के चुनाव चिह्न पर दावा करने की कोशिश करेंगे। उन्होंने पार्टी के बैंक खातों और फंड की ऑडिट कराने के लिए एक ऑडिटर नियुक्त करने का भी निर्णय लिया है।</p>
<p>इस ऐतिहासिक विद्रोह के बीच ममता बनर्जी शांत बैठने के मूड में नहीं हैं। उन्होंने तुरंत न्यू टाउन के ही एक अन्य होटल में अपने वफादार विधायकों और पार्षदों के साथ एक आपात बैठक बुलाई। इसके कुछ ही समय बाद, ममता बनर्जी ने दिल्ली में चुनाव आयोग (ECI) को एक पत्र भेजकर पदाधिकारियों की नई 24 सदस्यीय सूची सौंपते हुए स्वयं को TMC का आधिकारिक अध्यक्ष घोषित किया।</p>
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hindi.opindia.com

<p>ममता बनर्जी खेमे के वरिष्ठ नेताओं कुणाल घोष और सौगत रॉय ने बागी गुट की बैठक को सिरे से खारिज कर दिया है और इसे एक कॉमेडी शो बताया है। घोष ने कहा कि TMC और ममता बनर्जी एक-दूसरे के पूरक हैं। बागियों को ऐसा करने का कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है। इसके अलावा, ममता समर्थक खेमे ने फिरहाद हकीम, अरूप विश्वास, अरूप रॉय और जावेद खान जैसे प्रमुख बागी नेताओं को पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है और कानूनी कार्रवाई की धमकी दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 18:08:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गुजरात बीजेपी के लिए सिरदर्द: कुछ अधिकारियों और नेताओं में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>गुजरात राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार दशकों से सत्ता में है। इस दौरान राज्य ने औद्योगिक विकास, बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि के क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। गुजरात पूरे देश में एक मॉडल के तौर पर चर्चा में रहा है। इन सभी उपलब्धियों के पीछे लोगों का अटूट भरोसा और सरकार की विकास-उन्मुख नीतियां अहम भूमिका निभाती हैं। लेकिन किसी भी बड़े सिस्टम में, कुछ तत्वों की वजह से होने वाली कमियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। खासकर जब भ्रष्टाचार जैसी समस्या बड़े पैमाने पर फैल जाती है, तो यह विकास की नींव को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/headache-for-gujarat-bjp-rampant-corruption-among-officials-and-leaders/article-2442"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/kerala-bjp1.webp" alt=""></a><br /><p>गुजरात राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार दशकों से सत्ता में है। इस दौरान राज्य ने औद्योगिक विकास, बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि के क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। गुजरात पूरे देश में एक मॉडल के तौर पर चर्चा में रहा है। इन सभी उपलब्धियों के पीछे लोगों का अटूट भरोसा और सरकार की विकास-उन्मुख नीतियां अहम भूमिका निभाती हैं। लेकिन किसी भी बड़े सिस्टम में, कुछ तत्वों की वजह से होने वाली कमियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। खासकर जब भ्रष्टाचार जैसी समस्या बड़े पैमाने पर फैल जाती है, तो यह विकास की नींव को अंदर से कमजोर कर सकती है। ऐसे में, लोगों के हित और सिस्टम की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए भ्रष्ट तत्वों पर लगाम लगाने की जरूरत बढ़ जाती है।</p>
<p>बीजेपी में गुजरात की जनता का भरोसा और गुजरात में बीजेपी सरकार द्वारा किए गए विकास कार्यों से इनकार नहीं किया जा सकता। गुजरात की जनता लंबे समय से भारी संख्या में वोट देकर बीजेपी की तारीफ करती रही है और राज्य में हर क्षेत्र में बीजेपी के कामों से लोग संतुष्ट भी दिखते हैं। लेकिन कहीं न कहीं कुछ कमी भी है; अच्छा काम अच्छा है और उसका स्वागत है, लेकिन बाकी बची गलतियों या कमियों पर भी ध्यान देना जरूरी है। इस विषय पर चर्चा होनी चाहिए और लोगों के हित में इसका समाधान निकाला जाना चाहिए।</p>
<p>पिछले कुछ वर्षों में गुजरात में भ्रष्टाचार बड़े पैमाने पर बढ़ा है। यहां सवाल भ्रष्टाचार को पूरी तरह खत्म करने का नहीं, बल्कि इसके बढ़ते स्तर का है, क्योंकि भारत में और खासकर हमारे गुजरात में भ्रष्टाचार का पूरी तरह खत्म होना एक दिवास्वप्न जैसा है। गुजरात में भ्रष्टाचार में शामिल मुख्य रूप से दो वर्ग हैं। एक तो सरकार में बैठे कुछ उच्च अधिकारी और दूसरे चुने हुए कुछ राजनेता।</p>
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x.com/DeshGujarat

<p>सरकार में बैठे कुछ उच्च अधिकारियों से लेकर चपरासियों तक के भ्रष्टाचार में लिप्त होने की खबरें अक्सर प्रेस और सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी रहती हैं। दूसरी ओर, नागरिकों द्वारा चुने गए सरपंच, जिला पंचायत सदस्य, नगर निगम पार्षद, विधायक और सांसद हैं, जो टेंडर, ग्रांट और लाइसेंसिंग में भ्रष्टाचार करके खुलेआम लूट-खसोट करते हैं। चुने जाने के बाद अचानक इन नेताओं की जीवनशैली आलीशान हो जाती है और उनके व उनके परिवारों की इनकम टैक्स की जानकारी में बढ़ोतरी दिखती है; अब वे करोड़ों के बंगलों और करोड़ों की गाड़ियों में घूमते हैं! जो व्यक्ति चौबीसों घंटे समाज सेवा करता है, वह अपने बिज़नेस पर ध्यान नहीं दे पाता। और अगर बिज़नेस पर ध्यान न दिया जाए, तो बिज़नेस कमज़ोर पड़ जाता है और आमदनी घट जाती है। लेकिन यहाँ तो नेताओं की आमदनी, दौलत और संपत्ति बढ़ रही है! ऐसा क्यों है?</p>
<p>अब सरकारी अधिकारियों और नेताओं द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार पर काफी चर्चा हो रही है और इसका दायरा दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी ये चर्चाएँ बढ़ गई हैं और इसका असर बीजेपी सरकार पर भी पड़ने लगा है, जो गुजरात की बीजेपी सरकार के लिए न केवल चिंता का विषय है, बल्कि सिरदर्द भी बन गया है। अगर गुजरात सरकार सरकारी अधिकारियों पर लगाम नहीं लगाती और बीजेपी अपने चुने हुए भ्रष्ट और अहंकारी नेताओं पर नियंत्रण नहीं रखती, तो अंततः नुकसान गुजरात बीजेपी का ही होगा।</p>
<p>भ्रष्टाचार की यह समस्या केवल आर्थिक नुकसान तक ही सीमित नहीं है। यह धीरे-धीरे लोगों का भरोसा कमज़ोर करती है। जब आम नागरिक को सरकारी काम के लिए अतिरिक्त पैसे देने पड़ते हैं या बुनियादी ढाँचे की परियोजनाओं की गुणवत्ता गिरती है, तो इसका सीधा असर जनता की सोच पर पड़ता है। विकास कार्यों में देरी होती है और जनता के पैसे का दुरुपयोग होता है। ऐसी स्थिति में, ज़्यादातर ईमानदार अधिकारियों और नेताओं की छवि भी धूमिल हो जाती है। भ्रष्ट तत्व पूरे सिस्टम को बदनाम करते हैं। इसीलिए गुजरात में ऐसे तत्वों को अलग-थलग करने और उन पर नियंत्रण रखने की ज़रूरत और भी महत्वपूर्ण हो गई है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/261.webp" alt="26" width="1280" height="720"></img>
hindi.news18.com

<p>गुजरात की जनता विकास के साथ-साथ ईमानदारी भी चाहती है। जब कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और नेताओं पर लगाम कसी जाएगी, तो लोगों का भरोसा मज़बूत होगा और विकास की गति बनी रहेगी। अगर इस दिशा में समय रहते और ईमानदारी से कदम उठाए जाते हैं, तो गुजरात का विकास मॉडल और अधिक विश्वसनीय बनेगा और बीजेपी में गुजरात की जनता का भरोसा भी बना रहेगा। अब यह देखना बाकी है कि जनता के हित में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए गुजरात सरकार और गुजरात बीजेपी आने वाले समय में क्या कदम उठाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 12:45:04 +0530</pubDate>
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                <title>महाराष्ट्र: क्या उद्धव गुट में बढ़ रही है नाराजगी? अब 3 विधायक और 1 MLC बैठक से गायब</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की मुश्किलें कम होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। सोमवार को छह सांसदों ने औपचारिक रूप से पार्टी को अलविदा कह दिया, और अब तीन विधायकों तथा एक MLC के सोमवार की बैठक से गायब रहने की खबरें हैं। शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सोमवार को पार्टी के विधायकों और सांसदों की बैठक बुलाई थी।</p>
<p>शिवसेना (UBT) के 6 सांसदों के प्रतिद्वंद्वी शिवसेना गुट में शामिल होने से पैदा हुए राजनीतिक संकट के बीच, पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सोमवार को अपने विधायकों के साथ बैठक की। इस बैठक का उद्देश्य महाराष्ट्र विधानसभा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0--%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%89%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%B5-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%9F-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AC%E0%A4%A2%E0%A4%BC-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A5%80--%E0%A4%85%E0%A4%AC-3-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%95-%E0%A4%94%E0%A4%B0-1-mlc-%E0%A4%AC%E0%A5%88%E0%A4%A0%E0%A4%95-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%AC/article-2436"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/shiv-sena-ubt.webp" alt=""></a><br /><p>महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की मुश्किलें कम होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। सोमवार को छह सांसदों ने औपचारिक रूप से पार्टी को अलविदा कह दिया, और अब तीन विधायकों तथा एक MLC के सोमवार की बैठक से गायब रहने की खबरें हैं। शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सोमवार को पार्टी के विधायकों और सांसदों की बैठक बुलाई थी।</p>
<p>शिवसेना (UBT) के 6 सांसदों के प्रतिद्वंद्वी शिवसेना गुट में शामिल होने से पैदा हुए राजनीतिक संकट के बीच, पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सोमवार को अपने विधायकों के साथ बैठक की। इस बैठक का उद्देश्य महाराष्ट्र विधानसभा के चल रहे मानसून सत्र के दौरान महायुति सरकार को घेरने की रणनीति तैयार करना था।</p>
<p>मानसून सत्र के पहले दिन पार्टी के ‘शिवालय’ कार्यालय में बैठक आयोजित की गई थी। दिलचस्प बात यह है कि उसी समय मात्र 500 मीटर दूर यशवंतराव चव्हाण प्रतिष्ठान में 6 शिवसेना (UBT) सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी गुट में शामिल हो रहे थे।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/shiv-sena-ubt2.webp" alt="shiv-sena-ubt2" width="1280" height="720"></img>
freepressjournal.in

<p>शिवसेना (UBT) की इस महत्वपूर्ण बैठक में 3 विधायकों और एक MLC की अनुपस्थिति ने नई अटकलों को जन्म दे दिया है। हालांकि, इन विधायकों ने पहले ही पार्टी को सूचित कर दिया था कि वे बैठक में उपस्थित नहीं हो पाएंगे। उन्होंने MLC चुनाव, खराब स्वास्थ्य और व्यक्तिगत प्रतिबद्धताओं जैसे कारण बताए थे।</p>
<p>विधायक संजय देरकर, राहुल पाटील और संजय पोटनीस तथा MLC सुनील शिंदे भी बैठक में मौजूद नहीं थे। उल्लेखनीय है कि सुनील शिंदे ने ही आदित्य ठाकरे के लिए अपनी वर्ली विधानसभा सीट खाली की थी। उन्होंने भी बैठक में भाग नहीं लिया। संजय पाटील ने बताया कि वे विधान परिषद चुनाव की मतगणना प्रक्रिया में व्यस्त थे और ठाकरे की आगामी परभणी यात्रा की तैयारियों का निरीक्षण कर रहे थे।</p>
<p>सुनील शिंदे ने कहा कि वे अपने गृह नगर चिपलून में थे और मुंबई लौट रहे थे। पोटनीस ने बैठक में अनुपस्थिति का कारण स्पष्ट नहीं किया, लेकिन जोर देकर कहा कि वे शिवसेना (UBT) के साथ ही बने रहेंगे। महाराष्ट्र विधानसभा में सेना (UBT) के 20 विधायक और 6 MLC हैं। यह बैठक एक घंटे तक चली, और सभी विधायकों ने उद्धव के साथ समूह फोटो खिंचवाया ताकि वे अपनी ताकत का प्रदर्शन कर सकें।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/shiv-sena-ubt3.webp" alt="shiv-sena-ubt3" width="1280" height="720"></img>
lokmat.com

<p>सेना (UBT) के MLC अंबादास दानवे ने कहा कि यह शिवसेना (UBT) विधायक दल की बैठक थी। हमने किसानों, आम जनता और मुंबई जैसे मुद्दों के साथ-साथ विदर्भ और मराठवाड़ा जैसे क्षेत्रों तथा वहां पानी की कमी के मुद्दों को उठाने पर चर्चा की। सेना (UBT) विधानसभा में सबसे बड़ा विपक्षी दल है; इसलिए हमें आक्रामक और संगठित तरीके से काम करना चाहिए। बुधवार को महा विकास आघाड़ी (MVA) की बैठक भी बुलाई गई है। हम विपक्ष के नेता (LoP) के पद के लिए अपना दावा पेश कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 14:36:04 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बेंगलुरु: 'चुप रहो, बेकार लोगों..' अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं पर क्यों भड़क गए कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बेंगलुरु में ‘संकल्प समावेश’ कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पार्टी के कार्यकर्ताओं पर नाराज़ हो गए थे। उनकी नाराज़गी का अंदाज़ा आप इस बात से लगा सकते हैं कि उन्होंने मंच से कार्यकर्ताओं को यूज़लेस फेलो यानी बेकार लोग तक कह दिया और उन्हें कड़े शब्दों में फटकार लगाई। आइए उनके गुस्से के पीछे की वजह जानते हैं।</p>
<p>खड़गे ‘संकल्प समावेश’ कार्यक्रम में पार्टी नेताओं और जनता को संबोधित कर रहे थे, तभी कुछ कार्यकर्ताओं ने कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के समर्थन में ‘DK-DK’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। नारेबाज़ी से नाराज़ होकर खड़गे ने मंच</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/shut-up-you-useless-people-why-did-congress-president-kharge/article-2434"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/99-(1).webp" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु में ‘संकल्प समावेश’ कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पार्टी के कार्यकर्ताओं पर नाराज़ हो गए थे। उनकी नाराज़गी का अंदाज़ा आप इस बात से लगा सकते हैं कि उन्होंने मंच से कार्यकर्ताओं को यूज़लेस फेलो यानी बेकार लोग तक कह दिया और उन्हें कड़े शब्दों में फटकार लगाई। आइए उनके गुस्से के पीछे की वजह जानते हैं।</p>
<p>खड़गे ‘संकल्प समावेश’ कार्यक्रम में पार्टी नेताओं और जनता को संबोधित कर रहे थे, तभी कुछ कार्यकर्ताओं ने कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के समर्थन में ‘DK-DK’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। नारेबाज़ी से नाराज़ होकर खड़गे ने मंच से ही कार्यकर्ताओं को फटकार लगाई और उन्हें बेकार लोग तक कह दिया।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/810.webp" alt="810" width="1280" height="720"></img>
apcc.assam.org

<p>इस घटना का एक वीडियो सामने आया है, जो साफ़ तौर पर दिखाता है कि नारेबाज़ी से खड़गे कितने नाराज़ हो गए थे; उनका गुस्सा उनके चेहरे के हावभाव में साफ़ दिखाई दे रहा था। कार्यक्रम में मौजूद मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने भीड़ को शांत करने की कोशिश की। यहाँ तक कि शिवकुमार खड़े होकर शांत रहने का इशारा भी करते दिखाई दिए, लेकिन खड़गे का गुस्सा चरम पर पहुँच चुका था।</p>
<p>नारेबाज़ी से चिढ़कर गुस्से में भरे खड़गे ने कार्यकर्ताओं को याद दिलाया कि यह कार्यक्रम पार्टी का है, किसी एक नेता का नहीं। क्या यहाँ नारे लगाने से पूरा देश प्रभावित हो जाएगा? यह किसी एक व्यक्ति का कार्यक्रम नहीं है; यह एक पार्टी का कार्यक्रम है। तुम बेकार लोग हो। हम यहाँ व्यक्तियों की पूजा नहीं करते; हम यहाँ एक ऐसी पार्टी के कार्यक्रम के लिए हैं जो हम सभी को एक साथ लाती है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि कांग्रेस में संगठन व्यक्ति से बड़ा है और कार्यकर्ताओं को अनुशासन बनाए रखना चाहिए।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/1016.webp" alt="1016" width="1280" height="720"></img>
ndtv.com

<p>कार्यक्रम में व्यवधान पर अपनी नाराज़गी जताते हुए खड़गे ने सवाल उठाया कि यदि मुट्ठीभर लोग अपने नारों से कार्यक्रम को बाधित करने वाले थे, तो अन्य लोगों के कार्यक्रम में शामिल होने का उद्देश्य क्या है। अगर एक व्यक्ति एक नारा लगाता है और दूसरा कुछ और कहता है, तो बाकी लोग यहाँ क्यों आए हैं? क्या वे यहाँ फर्श साफ़ करने आए हैं? कुछ व्यक्तियों की नारेबाज़ी से कार्यक्रम का उद्देश्य समाप्त हो रहा है।</p>
<p>अपने दशकों लंबे राजनीतिक करियर पर प्रकाश डालते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने सभा को याद दिलाया कि उनकी पहचान कांग्रेस पार्टी से जुड़ी है, जो उनकी नींव है। मेरे पास 58 वर्षों का राजनीतिक अनुभव है। यहाँ कई नेता आए हैं; जबकि पार्टी में उनका योगदान कम है, पार्टी ने उनके लिए बहुत अधिक योगदान दिया है। उन्होंने याद दिलाया कि पार्टी कार्यकर्ताओं की पहचान कांग्रेस से है, किसी एक नेता से नहीं।</p>
<p>खड़गे ने हंगामा करने वालों को चेतावनी दी कि व्यवधान के लिए ज़िम्मेदार लोगों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। दोषियों की पहचान के लिए घटना के फुटेज की समीक्षा की जाएगी। याद रखिए, पार्टी के लिए अनुशासन हमेशा आवश्यक है। यहाँ जो भी नारे लगा रहा है, उसका फुटेज उपलब्ध रहेगा। फुटेज की समीक्षा करने के बाद मैं अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करूँगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 12:20:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>‘आपका वेतन 2 लाख है, आपके ड्राइवर का 20 हजार...’, जब परिसीमन पर शशि थरूर ने CM नायडू को समझाया गणित!</title>
                                    <description><![CDATA[<p>कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बुधवार को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू द्वारा दिए गए बयान का विरोध किया, जिसमें नायडू ने केंद्र के प्रस्तावित परिसीमन ढांचे का बचाव किया था। थरूर ने तर्क दिया कि यदि सभी राज्यों में लोकसभा सीटें समान रूप से बढ़ाई जाती हैं, तब भी राजनीतिक प्रभाव बड़े राज्यों की ओर झुकेगा। थरूर ने यह प्रतिक्रिया तब दी, जब नायडू ने संसद में संविधान संशोधन विधेयक को रोकने के लिए विपक्ष की आलोचना की थी और कहा था कि परिसीमन को लेकर चिंताएं निराधार हैं।</p>
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thefederal.com

<p>यह उल्लेखनीय है कि अप्रैल में संसद</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/your-salary-is-rs-2-lakh-your-drivers-salary-is/article-2428"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/shashi-tharoor2.webp" alt=""></a><br /><p>कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बुधवार को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू द्वारा दिए गए बयान का विरोध किया, जिसमें नायडू ने केंद्र के प्रस्तावित परिसीमन ढांचे का बचाव किया था। थरूर ने तर्क दिया कि यदि सभी राज्यों में लोकसभा सीटें समान रूप से बढ़ाई जाती हैं, तब भी राजनीतिक प्रभाव बड़े राज्यों की ओर झुकेगा। थरूर ने यह प्रतिक्रिया तब दी, जब नायडू ने संसद में संविधान संशोधन विधेयक को रोकने के लिए विपक्ष की आलोचना की थी और कहा था कि परिसीमन को लेकर चिंताएं निराधार हैं।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/shashi-tharoor1.webp" alt="shashi-tharoor1" width="1280" height="720"></img>
thefederal.com

<p>यह उल्लेखनीय है कि अप्रैल में संसद के विशेष सत्र के दौरान प्रस्तुत संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 में लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने और परिसीमन को 2011 की जनगणना से जोड़ने का प्रस्ताव रखता था। इसमें सभी राज्यों के लिए लोकसभा सीटों में आनुपातिक 50% वृद्धि का भी प्रस्ताव रखा गया था।</p>
<p>विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रहा था। मतदान करने वाले 528 सदस्यों में से 298 सदस्यों ने विधेयक का समर्थन किया, जबकि 230 सदस्यों ने इसका विरोध किया। इसे पारित करने के लिए कम से कम 352 मतों की आवश्यकता थी।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/shashi-tharoor.webp" alt="shashi-tharoor" width="1280" height="720"></img>
financialexpress.com

<p>थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि, ‘नायडू-जी, आइए एक विचार-प्रयोग करते हैं। मान लीजिए कि आपका वेतन 2 लाख है और आपके ड्राइवर का 20,000 है। आप दोनों के लिए 50% वृद्धि की घोषणा करते हैं। अब, आपका वेतन 3 लाख है और आपके ड्राइवर का 30,000 है। प्रतिशत या आनुपातिक वृद्धि समान है, लेकिन क्या आप पहले की तुलना में अपने ड्राइवर से कहीं बेहतर स्थिति में नहीं हैं?’</p>
<p>थरूर ने तर्क दिया कि दक्षिणी राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने चिंता व्यक्त की है कि, भले ही सीटों में वृद्धि आनुपातिक हो, लेकिन राजनीतिक संतुलन काफी बदल जाता है। एक उदाहरण देते हुए उन्होंने पूछा कि क्या वास्तव में कोई अंतर नहीं है, यदि उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व 80 से बढ़कर 120 सांसदों तक पहुंच जाए और केरल का 20 से बढ़कर 30 हो जाए। उन्होंने कहा कि यदि संख्यात्मक अनुपात समान भी रहेगा, तब भी राजनीतिक वजन में भारी अंतर एक गंभीर चिंता का विषय बना रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 12:21:00 +0530</pubDate>
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                <title>क्या महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल जैसा सियासी खेल अब यूपी में भी होगा? बगावत क्यों हो रही है?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कानपुर में मीडिया से बात करते हुए दावा किया था कि समाजवादी पार्टी के 25 से 26 सांसद फिलहाल पार्टी बदलने और पार्टी को तोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। टीएमसी और शिवसेना में हुए विभाजन का उल्लेख करते हुए भाजपा के नेता समाजवादी पार्टी में भी विभाजन का दावा कर रहे हैं। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने स्पष्ट किया था कि भाजपा फिलहाल उनके दल में खुद विभाजन नहीं करवा रही है, लेकिन ये नेता 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव तक स्वयं ही पार्टी छोड़ देंगे। इस राजनीतिक उथल-पुथल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%AE-%E0%A4%AC%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%9C%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%96%E0%A5%87%E0%A4%B2-%E0%A4%85%E0%A4%AC-%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%AA%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%BE--%E0%A4%AC%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A5%8B-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%88/article-2411"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/424.webp" alt=""></a><br /><p>उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कानपुर में मीडिया से बात करते हुए दावा किया था कि समाजवादी पार्टी के 25 से 26 सांसद फिलहाल पार्टी बदलने और पार्टी को तोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। टीएमसी और शिवसेना में हुए विभाजन का उल्लेख करते हुए भाजपा के नेता समाजवादी पार्टी में भी विभाजन का दावा कर रहे हैं। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने स्पष्ट किया था कि भाजपा फिलहाल उनके दल में खुद विभाजन नहीं करवा रही है, लेकिन ये नेता 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव तक स्वयं ही पार्टी छोड़ देंगे। इस राजनीतिक उथल-पुथल के बीच राम मंदिर मुद्दे पर भी बयान दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल में हाल ही में ममता बनर्जी की पार्टी में विभाजन हुआ है और उसके कुछ सांसदों ने बगावत कर एनडीए का समर्थन कर दिया है। वहीं आज महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की पार्टी टूटने के बाद उसके 6 सांसदों ने बगावत की है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह बगावत हो क्यों रही है और यह कहां जाकर रुकेगी?</p>
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abplive.com

<p>इससे पहले, राज्य सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर द्वारा किए गए एक सोशल मीडिया पोस्ट ने सनसनी मचा दी थी। राजभर ने लिखा था कि समाजवादी पार्टी में बड़ा विभाजन होगा और राम गोपाल यादव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र सौंपा है। खनन और गोमती रिवर फ्रंट घोटाले का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पूरा उत्तर प्रदेश इसके मुख्य सूत्रधारों को जानता है। शक की सुई अपनी ओर आती देख समाजवादी पार्टी चिंतित है और पूरी समाजवादी पार्टी भाजपा में शामिल होने के लिए तैयार है। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश के मंत्री मनोज पांडेय ने भी कहा कि सत्ता में रहते हुए लोगों को भगाने वाली समाजवादी पार्टी के साथ कोई भी रहना नहीं चाहता।</p>
<p>समाजवादी पार्टी के नेताओं ने इन दावों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। विधानसभा में विपक्ष के नेता और समाजवादी पार्टी के विधायक माता प्रसाद पांडेय ने लखनऊ में कहा कि ओम प्रकाश राजभर खुद एक घोटालेबाज हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में तानाशाही चल रही है और मुख्यमंत्री की भाषा-शैली अनुचित है। वहीं समाजवादी पार्टी के नेता रविदास मेहरोत्रा ने राजभर को दोहरे चेहरे वाला व्यक्ति बताते हुए कहा कि वे केवल अपना मंत्री पद बचाए रखने के लिए ऐसे बयान देते हैं। उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी का एक भी नेता भाजपा में शामिल नहीं होगा और 2027 में अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी की सरकार बनेगी।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/406.webp" alt="406" width="1280" height="720"></img>
jagran.com

<p>इस दौरान, कानपुर में राम मंदिर की दानपेटी से चोरी के मामले पर बोलते हुए उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि मामला जांच के अधीन है, तो फिर एफआईआर क्यों दर्ज की जाए? उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि जिसने भी दानपेटी के पैसे का गबन किया है, उसे न केवल कानूनी सजा मिलेगी बल्कि उसे जीवन में कभी सुख भी नहीं मिलेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि जांच पूरी होने के बाद सारा पैसा वापस मिल जाएगा और हनुमान जी सब ठीक कर देंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 19:04:25 +0530</pubDate>
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