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                <title>राजनीति - Khabarchhe Hindi</title>
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                <description>राजनीति RSS Feed</description>
                
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                <title>'केरल में SIR से मतदाता सूची साफ हो गई और कांग्रेस को फायदा हुआ, बंगाल में...' शशि थरूर ने समझाया वोटों का गणित</title>
                                    <description><![CDATA[<p>कांग्रेस नेता शशि थरूर मानते हैं कि मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से कांग्रेस को फायदा हुआ। थरूर ने कहा कि केरल में पहले एक ही व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में कई बार दिखना असामान्य नहीं था। उनके मुताबिक, कुछ लोगों के नाम दो बार, तीन बार या चार बार भी सूचीबद्ध थे। उन्होंने दावा किया कि ऐसे डुप्लिकेट नाम हटाने से मतदाता सूची साफ हो गई और शायद कांग्रेस को फायदा हुआ।</p>
<p>मीडिया सूत्रों की रिपोर्ट के अनुसार, शशि थरूर ने ये टिप्पणियां अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में आयोजित स्टैनफोर्ड इंडिया कॉन्फ्रेंस के दौरान की थीं।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/-%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%B2-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-sir-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A4%A4%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%9A%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%AB-%E0%A4%B9%E0%A5%8B-%E0%A4%97%E0%A4%88-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AB%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A6%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%86--%E0%A4%AC%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-----%E0%A4%B6%E0%A4%B6%E0%A4%BF-%E0%A4%A5%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%9D%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A5%8B%E0%A4%9F%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%97%E0%A4%A3%E0%A4%BF%E0%A4%A4/article-2228"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-05/57.webp" alt=""></a><br /><p>कांग्रेस नेता शशि थरूर मानते हैं कि मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से कांग्रेस को फायदा हुआ। थरूर ने कहा कि केरल में पहले एक ही व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में कई बार दिखना असामान्य नहीं था। उनके मुताबिक, कुछ लोगों के नाम दो बार, तीन बार या चार बार भी सूचीबद्ध थे। उन्होंने दावा किया कि ऐसे डुप्लिकेट नाम हटाने से मतदाता सूची साफ हो गई और शायद कांग्रेस को फायदा हुआ।</p>
<p>मीडिया सूत्रों की रिपोर्ट के अनुसार, शशि थरूर ने ये टिप्पणियां अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में आयोजित स्टैनफोर्ड इंडिया कॉन्फ्रेंस के दौरान की थीं। 'इंडिया, दैट इज़ भारत' शीर्षक वाली राउंड टेबल में बोलते हुए थरूर ने केरल और पश्चिम बंगाल दोनों के उदाहरण दिए थे।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-05/541.webp" alt="541" width="1200" height="675"></img>
tv9hindi.com

<p>केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर ने कहा, 'खासतौर पर केरल में, मुझे लगता है कि नाम हटाए जाने से कांग्रेस को फायदा हुआ, क्योंकि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (CPI-M) लंबे समय से दो बार पंजीकरण, तीन बार पंजीकरण, चार बार पंजीकरण में माहिर थी। यानी चार अलग-अलग बूथों पर एक ही व्यक्ति का नाम होता था। और इसलिए SIR ने उन्हें हटा दिया, और जैसा आपने कहा, केरल और तमिलनाडु में बहुत कम अपीलें थीं। लेकिन बंगाल में, इसमें कोई शक नहीं कि 34 लाख अपीलें थीं। और इन 34 लाख लोगों ने 34 लाख फॉर्म भरे थे। और उनमें से केवल कुछ ही मामलों की सुनवाई हुई है।'</p>
<p>दूसरे शब्दों में कहें तो, शशि थरूर तर्क दे रहे थे कि नकली या एक से अधिक बार पंजीकृत नाम हटाने से चुनाव अधिक साफ-सुथरे बने। उनका मानना है कि इससे कांग्रेस को फायदा हुआ। शशि थरूर ने दावा किया था कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से लगभग 91 लाख नाम हटा दिए गए थे। इनमें से लगभग 34 लाख लोगों ने अपील की थी, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि वे असली, जीवित और मतदान के योग्य हैं। उन्होंने बताया था कि नियमों के अनुसार, हर अपील की व्यक्तिगत रूप से जांच होनी थी। हालांकि, मतदान से पहले केवल कुछ सौ मामलों का ही समाधान हुआ था। नतीजतन, लाखों लोग मतदान नहीं कर सके थे।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-05/551.webp" alt="551" width="1280" height="720"></img>
x.com

<p>शशि थरूर ने कहा, 'पश्चिम बंगाल का मामला देखिए। 91 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे। इनमें से 34 लाख लोगों ने अपील की थी, और दावा किया था कि वे वैध मतदाता हैं। जीवित हैं और वोट देने के योग्य हैं। नियम था कि हर मामले को अलग-अलग सुना जाए। लेकिन मतदान से पहले केवल कुछ सौ मामलों का समाधान हुआ था।'</p>
<p>उन्होंने आगे कहा, 'आज भी, लगभग 31-32 लाख लोगों के मामले लंबित हैं। संभव है कि आने वाले समय में उन्हें सही मतदाता माना जाए, लेकिन उन्होंने इस चुनाव में मतदान करने का मौका खो दिया है।'</p>
<p>इसके बाद शशि थरूर ने सबसे बड़ा सवाल उठाया। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जीत के मार्जिन और लंबित अपीलों की संख्या की तुलना की। उन्होंने कहा, 'बंगाल में BJP लगभग 30 लाख वोटों के मार्जिन से जीती। अब मुझे बताइए, क्या यह पूरी तरह न्यायसंगत और लोकतांत्रिक है? यही सवाल मैं पूछ रहा हूं।'</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-05/561.webp" alt="561" width="1280" height="720"></img>
jagran.com

<p>थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें नकली मतदाताओं के नाम हटाने पर कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा, 'मुझे नकली, मृतक या स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं के नाम हटाने में कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन अगर असली मतदाताओं को ही वोट डालने से रोका जाए तो सवाल उठेंगे।' पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित किए गए थे। BJP ने 294 सीटों वाली विधानसभा में 207 सीटें जीतकर भारी जीत हासिल की थी। जबकि ममता बनर्जी की पार्टी, तृणमूल कांग्रेस (TMC) केवल 80 सीटों पर सिमट गई थी। एक सीट फलता पर 21 मई को दोबारा चुनाव कराया जाएगा।</p>
<p>केरल विधानसभा चुनाव में, कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने भारी जीत हासिल की थी और 140 में से 102 सीटें जीती थीं। CPI-M के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) ने 35 सीटें जीती थीं, जबकि BJP को केवल 3 सीटें मिली थीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 20:35:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'या राजनीति छोड़ूंगा या 100 सीटें लाऊंगा'; कसम पूरी कर केरल के 'किंग' बने वीडी सतीशन, जानें वकील से सीएम बनने का सफर</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>तिरुवनंतपुरम।</strong> केरल की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत हो गई है। कांग्रेस आलाकमान ने तमाम कयासों और 10 दिनों तक चले मन्थन के बाद वीडी सतीशन के नाम पर मुहर लगा दी है। वे केरल के अगले मुख्यमंत्री होंगे। वीडी सतीशन का मुख्यमंत्री चुना जाना न केवल कांग्रेस के लिए एक बड़ा बदलाव है, बल्कि यह एक ऐसे नेता की जीत है जिसने अपनी राजनीति को दांव पर लगा दिया था।</p>
<p><strong>100 सीटों की कसम और ऐतिहासिक जीत</strong></p>
<p>2026 के विधानसभा चुनाव सतीशन के लिए महज एक चुनाव नहीं, बल्कि उनकी साख की परीक्षा थी। चुनाव अभियान के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/-draft--add-your-title/article-2227"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-05/25.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>तिरुवनंतपुरम।</strong> केरल की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत हो गई है। कांग्रेस आलाकमान ने तमाम कयासों और 10 दिनों तक चले मन्थन के बाद वीडी सतीशन के नाम पर मुहर लगा दी है। वे केरल के अगले मुख्यमंत्री होंगे। वीडी सतीशन का मुख्यमंत्री चुना जाना न केवल कांग्रेस के लिए एक बड़ा बदलाव है, बल्कि यह एक ऐसे नेता की जीत है जिसने अपनी राजनीति को दांव पर लगा दिया था।</p>
<p><strong>100 सीटों की कसम और ऐतिहासिक जीत</strong></p>
<p>2026 के विधानसभा चुनाव सतीशन के लिए महज एक चुनाव नहीं, बल्कि उनकी साख की परीक्षा थी। चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने एक साहसी और जोखिम भरी घोषणा की थी। 'अगर कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF को 140 में से 100 से कम सीटें मिलीं, तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा।' परिणाम आए तो सतीशन का यह मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ। यूडीएफ ने 102 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया और सतीशन ने खुद अपने गढ़ 'परवूर' से लगातार छठी बार 20,600 मतों के भारी अंतर से जीत दर्ज की। इसी जीत ने उनके लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी का रास्ता साफ कर दिया।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-05/17.jpg" alt="1" width="1280" height="720"></img>
amarujala.com

<p><strong>कितने पढ़े-लिखे हैं वीडी सतीशन?</strong></p>
<p>वीडी. सतीशन जिनका पूरा नाम वदस्सेरी दामोदरन सतीशन का जन्म 31 मई 1964 को केरल के कोच्चि स्थित नेट्टूर में एक नायर परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम के. दामोदरा मेनन और मां का नाम वी. विलासिनी अम्मा है। सतीशन पढ़ने में बहुत अच्छे थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा पनांगड हाईस्कूल से हुई, जो कि क्षेत्र का नामी स्कूल है। इसके बाद उन्होंने सैक्रेड हार्ट कॉलेज, थेवारा से स्नातक की पढ़ाई की। सतीशन ने राजगिरी कॉलेज ऑफ सोशल साइंसेज, कोच्चि से मास्टर ऑफ सोशल वर्क की डिग्री हासिल की। </p>
<p>राजनीति में आने से पहले उन्होंने कानून की गहरी पढ़ाई की। उन्होंने केरल लॉ एकेडमी लॉ कॉलेज से एलएलबी की और गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, तिरुवनंतपुरम से मास्टर ऑफ लॉ (एलएलएम) की डिग्री भी हासिल की। वीडी सतीशन को जानने वाले उन्हें एक किताबी कीड़ा (बुकवर्म) नेता मानते हैं, जिनकी अध्ययन में बहुत गहरी रुचि है। </p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-05/32.jpg" alt="3" width="1280" height="720"></img>
awazthevoice.in

<p><strong>छात्र राजनीति से मुख्यमंत्री की कुर्सी तक</strong></p>
<p>सतीशन का राजनीतिक सफर केरल स्टूडेंट्स यूनियन (KSU) से शुरू हुआ। वे महात्मा गांधी विश्वविद्यालय संघ के अध्यक्ष और एनएसयूआई के राष्ट्रीय सचिव रहे। चुनावी राजनीति में उनकी शुरुआत 1996 में हार के साथ हुई थी, लेकिन 2001 में पहली बार विधायक बनने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वे परवूर सीट से लगातार 6 बार विधायक चुने गए हैं। उन्होंने पन्नियन रवींद्रन जैसे वामपंथी दिग्गजों को धूल चटाई। 2021 में जब वे विपक्ष के नेता बने, तो उन्होंने पिनरई विजयन की सरकार को सदन में अपने तर्कों और आक्रामकता से कई बार बैकफुट पर धकेला।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-05/41.jpg" alt="4" width="1280" height="720"></img>
amarujala.com

<p><strong>बागी तेवर और साफ-सुथरी छवि</strong></p>
<p>सतीशन को पार्टी के भीतर एक 'बागी' और 'ईमानदार' आवाज के रूप में जाना जाता है। उन्होंने हमेशा 'हरित राजनीति' का समर्थन किया और जातिगत समीकरणों के आगे झुकने के बजाय योग्यता के आधार पर टिकट बांटने की वकालत की। उनके पास भले ही पूर्व में कोई मंत्री पद नहीं रहा, लेकिन बतौर विपक्ष के नेता उनके शानदार प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि वे राज्य चलाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 14:11:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
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            <item>
                <title> पश्चिम बंगाल : क्या है ममता का 'अंतिम दांव'? SIR को लेकर बंगाल की वो 'अनंत कथा' जो नतीजों के बाद भी थमने का नाम नहीं ले रही!</title>
                                    <description><![CDATA[<p>2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव पूरे हो चुके हैं। नतीजे आ चुके हैं। BJP पहली बार सत्ता में आई है। CM सुवेंदु अधिकारी ने शपथ ले ली है, और तृणमूल कांग्रेस को 15 साल बाद विपक्ष में बैठने की मजबूरी झेलनी पड़ी है। लेकिन चुनाव खत्म हो जाने के बाद भी, एक सवाल का जवाब अब तक नहीं मिला है, क्या मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) ने चुनाव परिणामों को प्रभावित किया था?</p>
<p>यह सवाल अब कोर्ट, चुनाव आयोग और तृणमूल कांग्रेस के बीच सबसे बड़ा विवाद बन गया है। तृणमूल का आरोप है कि लाखों मतदाताओं</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/what-is-mamatas-last-bet-sir-that-endless-story-of/article-2226"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-05/mamata-banerjee5.webp" alt=""></a><br /><p>2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव पूरे हो चुके हैं। नतीजे आ चुके हैं। BJP पहली बार सत्ता में आई है। CM सुवेंदु अधिकारी ने शपथ ले ली है, और तृणमूल कांग्रेस को 15 साल बाद विपक्ष में बैठने की मजबूरी झेलनी पड़ी है। लेकिन चुनाव खत्म हो जाने के बाद भी, एक सवाल का जवाब अब तक नहीं मिला है, क्या मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) ने चुनाव परिणामों को प्रभावित किया था?</p>
<p>यह सवाल अब कोर्ट, चुनाव आयोग और तृणमूल कांग्रेस के बीच सबसे बड़ा विवाद बन गया है। तृणमूल का आरोप है कि लाखों मतदाताओं को मतदाता सूची से हटा दिया गया था, और कई सीटों पर हटाए गए मतदाताओं की संख्या जीत के अंतर से ज्यादा थी। दूसरी ओर, चुनाव आयोग और BJP इसे 'सिस्टम को साफ करने' और 'फर्जी मतदाताओं की पहचान करने' की प्रक्रिया बता रहे हैं। यानी चुनाव खत्म हो चुके हैं, लेकिन कोर्ट, आंकड़ों और राजनीति के बीच SIR की कहानी अब भी जारी है।</p>
<p>यह लड़ाई तृणमूल कांग्रेस के लिए अस्तित्व की जंग बन चुकी है। क्योंकि राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेता उनकी हार के बाद उन्हें सांत्वना देने के लिए अपनी भावनाएं व्यक्त कर रहे होंगे, लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान यही राहुल गांधी ममता बनर्जी के सत्ता से बाहर होने की भविष्यवाणी कर रहे थे, TMC के ध्रुवीकरण और कुशासन की आलोचना कर रहे थे। ममता जानती हैं कि अपने बयान को मजबूती देने के लिए उन्हें कोर्ट की लड़ाई जीतनी ही होगी। कोर्ट ही उनकी डूबती हुई नाव को किनारे लगाएगा।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-05/mamata-banerjee.webp" alt="mamata-banerjee" width="1280" height="720"></img>
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<p>चुनाव से पहले बंगाल SIR विवाद पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। ममता बनर्जी खुद अपना केस लड़ने के लिए सुप्रीम कोर्ट में पेश हो चुकी हैं। सोमवार की सुनवाई के दौरान, TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने, अपनी पार्टी के वकील के रूप में, दलील दी थी कि कई विधानसभा सीटों पर हटाए गए मतदाताओं की संख्या जीत के अंतर से ज्यादा थी।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने पहले कहा था कि जब तक 'बहुत बड़ी संख्या में' मतदाताओं को हटाए जाने का प्रमाण न मिले, तब तक चुनाव परिणामों में हस्तक्षेप करना मुश्किल होगा। हालांकि, कोर्ट ने अब स्पष्ट किया है कि यदि चुनाव परिणामों पर प्रभाव का मुद्दा उठाना है, तो एक अलग याचिका दाखिल करना आवश्यक होगा।</p>
<p>सुनवाई के दौरान, न्यायाधीश बागची ने कहा कि चुनाव परिणाम और मतदाताओं को हटाने से जुड़े सवाल 'स्वतंत्र IA' यानी अलग आवेदन का विषय हैं। इसका स्पष्ट मतलब यह है कि कोर्ट ने अभी तक SIR को अवैध घोषित नहीं किया है, लेकिन यदि पर्याप्त डेटा उपलब्ध हो तो उसने अलग सुनवाई का रास्ता भी बंद नहीं किया है।</p>
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<p>चुनाव आयोग ने कोर्ट में कहा था कि यदि कोई उम्मीदवार या पार्टी मानती है कि मतदाताओं को हटाने से चुनाव प्रभावित हुआ है, तो उनके पास केवल एक ही रास्ता है, 'चुनाव याचिका'। पूरी चुनाव प्रक्रिया को सीधे चुनौती नहीं दी जा सकती।</p>
<p>आयोग का तर्क है कि SIR प्रक्रिया कानून के अनुसार की गई थी। जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए थे, उन्हें नोटिस और अपील का अवसर दिया गया था। इसका मतलब यह है कि आयोग यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि यह कोई अचानक की गई राजनीतिक कार्रवाई नहीं थी, बल्कि एक प्रशासनिक प्रक्रिया थी।</p>
<p>BJP ने भी लगातार यही रुख अपनाया है। पार्टी नेताओं का दावा है कि बंगाल में वर्षों से 'फर्जी मतदान नेटवर्क' मौजूद था, और SIR ने उसे खत्म कर दिया। BJP प्रवक्ताओं ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि SIR पर चुनाव हार का आरोप लगाना TMC की राजनीतिक रणनीति है।</p>
<p>यहीं से असली लड़ाई शुरू होती है। क्योंकि राजनीति में आंकड़े आरोपों से ज्यादा असर डालते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में चुनाव आयोग के डेटा का विश्लेषण सामने आया है। उन्होंने कई सीटों पर मतदाताओं को हटाने और जीत के अंतर की तुलना की। कुछ सीटों पर हटाए गए मतदाताओं की संख्या जीत के अंतर से कई गुना ज्यादा थी। यही TMC का सबसे बड़ा हथियार बन गया।</p>
<p>मीडिया सूत्रों की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 50 विधानसभा सीटों पर 'अयोग्य' या विवादित मतदाताओं की संख्या जीत के अंतर से ज्यादा थी। इनमें से लगभग 25 सीटें BJP को मिलीं।</p>
<p>एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट में कहा गया है कि 123 सीटों के जीत के अंतर का विश्लेषण किया गया, जिसमें 49 सीटों पर विशेष ध्यान दिया गया क्योंकि मुकाबले बेहद करीबी थे। इसका मतलब यह है कि सवाल सिर्फ यह नहीं है कि मतदाताओं को हटाया गया था या नहीं। सवाल यह है कि क्या हटाए गए वोट इतने महत्वपूर्ण थे कि उनके कारण परिणाम बदल सकता था?</p>
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<p>यहीं मामला जटिल हो जाता है। मान लीजिए किसी सीट पर जीत का अंतर 5,000 वोट था और 8,000 मतदाताओं को हटा दिया गया था। इससे अपने आप यह साबित नहीं होता कि चुनाव परिणाम बदल गया होता। क्योंकि यह पता नहीं है कि हटाए गए मतदाता किस पार्टी को वोट देने वाले थे।</p>
<p>उनका कहना है कि हटाए गए वोटों को सीधे किसी पार्टी के वोट बैंक से जोड़ना सांख्यिकीय रूप से गलत है। हालांकि, TMC का जवाब भी उतना ही राजनीतिक है। पार्टी का कहना है कि मुस्लिम, दलित और बंगाली भाषी गरीब आबादी वाले इलाकों में बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए थे। इसलिए यह सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं थी।</p>
<p>SIR विवाद सबसे ज्यादा सीमावर्ती जिलों और मुस्लिम बहुल इलाकों पर केंद्रित था। TMC लगातार आरोप लगाती रही कि 'घुसपैठियों' और 'फर्जी मतदाताओं' के नाम पर असली मतदाताओं को हटाया गया। दूसरी ओर, BJP ने अपने चुनाव प्रचार में इस मुद्दे का इस्तेमाल किया। इसका मतलब यह हुआ कि SIR सिर्फ चुनाव आयोग की तकनीकी प्रक्रिया नहीं रह गई। यह हिंदुत्व, नागरिकता, बांग्लादेश सीमा और पहचान की राजनीति से सीधे जुड़ गई।</p>
<p>एक अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि लगभग 27 लाख मतदाताओं को हटाया गया था, और इसका असर अल्पसंख्यक इलाकों में सबसे ज्यादा महसूस किया गया। हालांकि, चुनाव आयोग ने औपचारिक रूप से इस दावे को स्वीकार नहीं किया है।</p>
<p>यह शायद सबसे बड़ा सवाल है। राजनीतिक विश्लेषकों का एक बड़ा वर्ग मानता है कि हार का पूरा श्रेय केवल SIR को देना अधूरा विश्लेषण होगा।</p>
<p>BJP लंबे समय से बंगाल में अपना संगठन खड़ा कर रही थी। उसे केंद्र सरकार की योजनाओं, हिंदुत्व के माहौल, महिला मतदाताओं में पैठ और TMC के खिलाफ सत्ता विरोधी भावना का फायदा मिला।</p>
<p>एक समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, BJP ने 294 में से 207 से ज्यादा सीटें जीतकर प्रचंड विजय हासिल की। TMC केवल 80 सीटों तक सिमट गई। इतनी बड़ी हार सिर्फ मतदाताओं के नाम हटाने से हुई है, यह समझाना मुश्किल है।</p>
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<p>लेकिन दूसरी तरफ, यह भी सच है कि यदि मतदाताओं को हटाने की प्रक्रिया 20-30 करीबी सीटों पर निर्णायक साबित हुई हो, तो उसने सत्ता परिवर्तन को तेज जरूर किया होगा। इसका मतलब यह है कि SIR शायद पूरी कहानी न हो, लेकिन यह निश्चित रूप से कहानी का एक महत्वपूर्ण अध्याय बन चुका है।</p>
<p>यह लड़ाई अब तीन क्षेत्रों में आगे बढ़ेगी- कोर्ट, राजनीति और डेटा विश्लेषण। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल अलग-अलग याचिकाएं दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसका मतलब यह है कि आने वाले दिनों में एक-एक सीट को चुनौती दी जा सकती है।</p>
<p>यदि TMC कुछ सीटों पर यह दिखा सके कि हटाए गए मतदाताओं की संख्या और चुनाव परिणामों के बीच सीधा संबंध था, तो मामला और गंभीर हो सकता है।</p>
<p>दूसरी ओर, चुनाव आयोग के सामने भी एक चुनौती है। उसे केवल कानूनी ही नहीं बल्कि नैतिक विश्वास भी बहाल करना होगा। क्योंकि लोकतंत्र में यदि मतदाता सूचियों पर भरोसा टूटता है, तो चुनाव परिणाम विवादास्पद हो जाते हैं।</p>
<p>2026 के बंगाल चुनाव की राजनीति में, SIR अब सिर्फ एक प्रशासनिक शब्द नहीं रह गया है। यह एक नए युग का प्रतीक बन चुका है जहां चुनाव सिर्फ रैलियों और वोटिंग मशीनों से नहीं लड़े जाते, बल्कि डेटा, दस्तावेज, पहचान और मतदाता सूचियों से भी तय होते हैं।</p>
<p>TMC इसे मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने की कार्रवाई बता रही है। BJP इसे 'लोकतांत्रिक सफाई' कह रही है। कोर्ट फिलहाल दोनों पक्षों की दलीलें सुन रही है।</p>
<p>लेकिन एक बात साफ है, बंगाल के चुनाव खत्म होने के बाद भी, SIR की 'अनंत कथा' अब तक खत्म नहीं हुई है। असल में, असली लड़ाई शायद अब शुरू हुई है। जो TMC के लिए अस्तित्व की लड़ाई भी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 13:07:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
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                <title>राहुल गांधी ने नए CBI डायरेक्टर के सिलेक्शन प्रोसेस पर एतराज़ जताया, कहा- 'विपक्षी पार्टी का नेता रबर स्टैम्प नहीं होता'</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मंगलवार को सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) के नए डायरेक्टर को अपॉइंट करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑफिशियल घर 7 लोक कल्याण मार्ग पर सिलेक्शन कमिटी की मीटिंग हुई। इस कमिटी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया (CJI) और लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, CJI सूर्यकांत और LOP राहुल गांधी की कमिटी ने नए CBI डायरेक्टर के नाम पर चर्चा की।</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी ने सिलेक्शन प्रोसेस से अपनी असहमति जताई। मीटिंग के बाद उन्होंने असहमति का लेटर सौंपा। राहुल गांधी ने अपने X हैंडल से एक पोस्ट में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/rahul-gandhi-expressed-objection-to-the-selection-process-of-the/article-2220"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-05/rahul.webp" alt=""></a><br /><p>मंगलवार को सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) के नए डायरेक्टर को अपॉइंट करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑफिशियल घर 7 लोक कल्याण मार्ग पर सिलेक्शन कमिटी की मीटिंग हुई। इस कमिटी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया (CJI) और लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, CJI सूर्यकांत और LOP राहुल गांधी की कमिटी ने नए CBI डायरेक्टर के नाम पर चर्चा की।</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी ने सिलेक्शन प्रोसेस से अपनी असहमति जताई। मीटिंग के बाद उन्होंने असहमति का लेटर सौंपा। राहुल गांधी ने अपने X हैंडल से एक पोस्ट में लिखा, 'मैंने प्रधानमंत्री को एक लेटर लिखकर CBI डायरेक्टर के सिलेक्शन प्रोसेस से अपनी असहमति जताई है। मैं एकतरफ़ा प्रोसेस में हिस्सा लेकर अपने संवैधानिक कर्तव्य का उल्लंघन नहीं कर सकता। विपक्ष का नेता रबर स्टैम्प नहीं होता।'</p>
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<p>नए CBI डायरेक्टर के लिए करीब 6 सीनियर IPS अधिकारियों के नामों पर विचार किया जा रहा है। CBI के मौजूदा डायरेक्टर प्रवीण सूद का कार्यकाल 25 मई, 2026 को खत्म हो रहा है। केंद्र सरकार ने उन्हें 2025 में एक साल का एक्सटेंशन दिया था। हरियाणा कैडर के 1990 बैच के IPS ऑफिसर शत्रुजीत सिंह कपूर को CBI डायरेक्टर पद की रेस में सबसे आगे माना जा रहा है। वे हरियाणा के DGP रह चुके हैं और अभी इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) के डायरेक्टर हैं।</p>
<p>इसके अलावा, रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) के मौजूदा हेड पराग जैन के नाम पर भी चर्चा हो रही है। वे पंजाब कैडर के 1989 बैच के IPS ऑफिसर हैं। मध्य प्रदेश कैडर के 1989 बैच के IPS ऑफिसर अजय कुमार शर्मा भी नए CBI डायरेक्टर के संभावित दावेदार हैं। वे अभी मध्य प्रदेश पुलिस हाउसिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के चेयरमैन हैं। इससे पहले, वे इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) के DG और इंदौर जोन के ADG जैसे अहम पदों पर रह चुके हैं।</p>
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facebook.com/rahulgandhi

<p>महाराष्ट्र के मौजूदा डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (DGP) और 1990 बैच के IPS ऑफिसर सदानंद वसंत दाते भी CBI डायरेक्टर पोस्ट की रेस में हैं। दाते पहले नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) के हेड थे और 26/11 के मुंबई टेरर अटैक के दौरान उनके काम की बहुत तारीफ़ हुई थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 19:35:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
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                <title>PM मोदी की अपील का असर, डिप्टी CM हर्ष सांघवी ने रद्द किया अमेरिका दौरा, 2 मंत्री पायलट वाली कार इस्तेमाल नहीं करेंगे, गवर्नर...</title>
                                    <description><![CDATA[<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्क फ्रॉम होम (WFH) और पेट्रोल-डीज़ल की खपत पर बयान के बाद गुजरात के बड़े नेताओं और अधिकारियों ने बड़े फैसले लिए हैं। हर्ष सांघवी ने अपनी अमेरिका दौरा कैंसिल कर दी है, जबकि पाटिल और पैनसेरिया पायलट वाली कार इस्तेमाल नहीं करेंगे। आइए आगे जानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद दूसरे बड़े नेताओं या अधिकारियों ने क्या फैसले लिए हैं।</p>
<p>इस महीने के आखिरी हफ्ते में, डिप्टी चीफ मिनिस्टर हर्ष सांघवी को फेडरेशन ऑफ गुजराती एसोसिएशन्स ऑफ USA (FOGAUSA) द्वारा आयोजित दूसरे गुजराती कन्वेंशन में शामिल होना था। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/pm-modis-appeal-affected-deputy-cm-harsh-sanghvi-canceled-america/article-2219"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-05/bjp-leaders.webp" alt=""></a><br /><p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्क फ्रॉम होम (WFH) और पेट्रोल-डीज़ल की खपत पर बयान के बाद गुजरात के बड़े नेताओं और अधिकारियों ने बड़े फैसले लिए हैं। हर्ष सांघवी ने अपनी अमेरिका दौरा कैंसिल कर दी है, जबकि पाटिल और पैनसेरिया पायलट वाली कार इस्तेमाल नहीं करेंगे। आइए आगे जानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद दूसरे बड़े नेताओं या अधिकारियों ने क्या फैसले लिए हैं।</p>
<p>इस महीने के आखिरी हफ्ते में, डिप्टी चीफ मिनिस्टर हर्ष सांघवी को फेडरेशन ऑफ गुजराती एसोसिएशन्स ऑफ USA (FOGAUSA) द्वारा आयोजित दूसरे गुजराती कन्वेंशन में शामिल होना था। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक साल के लिए विदेश यात्राओं को टालने की अपील के बाद उन्होंने यह दौरा रद्द कर दी है। हर्ष सांघवी ने कहा कि गुजरात के नागरिकों को देश की आर्थिक सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभी अपीलों में सहयोग करना चाहिए।</p>
<p>गुजरात के गवर्नर आचार्य देवव्रत ने पर्यावरण को बचाने और फ्यूल बचाने के लिए हेलीकॉप्टर या प्लेन सर्विस के बजाय ST बस और ट्रेन से यात्रा करने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फ्यूल बचाने की अपील पर गवर्नर ने भी अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या कम करने का फैसला किया है। इसके साथ ही, उन्होंने लोगों से खास तौर पर रिक्वेस्ट की है कि वे प्रदूषण कम करने के लिए साइकिल और इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EV) का ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल करें।</p>
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<p>राज्य के हेल्थ मिनिस्टर प्रफुल्ल पंसेरिया ने पायलटिंग कार का इस्तेमाल न करने का फैसला किया है। मोरबी से MLA और लेबर, स्किल डेवलपमेंट और एम्प्लॉयमेंट राज्य मंत्री कांति अमृतिया ने अब पायलटिंग सर्विस का इस्तेमाल न करने का फैसला किया है। उन्होंने यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेट्रोल और डीज़ल बचाने की अपील के बाद उठाया है।</p>
<p>इसके अलावा, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री पाटिल ने भी पायलटिंग कार का इस्तेमाल न करने का फैसला किया है। पाटिल ने कहा कि जब तक पेट्रोल की कीमत स्थिर नहीं हो जाती, वह अपनी सिक्योरिटी के लिए दी गई 'पायलटिंग कार' का इस्तेमाल नहीं करेंगे। आमतौर पर, केंद्रीय मंत्रियों को सिक्योरिटी प्रोटोकॉल के तहत गाड़ियों को पायलट करने की सुविधा मिलती है, लेकिन बढ़ती कीमतों और फ्यूल की खपत को कम करने के नेक इरादे से उन्होंने यह सुविधा छोड़ने का फैसला किया है।</p>
<p>गुजरात यूनिवर्सिटी ने कारों को पूल करने का फैसला किया है। इस फैसले से फ्यूल बचेगा। गुजरात यूनिवर्सिटी में अभी वर्क फ्रॉम होम की कोई व्यवस्था नहीं है। लेकिन कारों को पूल करने का फैसला है, इस बारे में एक ऑफिशियल सर्कुलर भी जारी किया गया है।</p>
<p>इस बारे में गुजरात यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर नीरजा गुप्ता ने कहा कि जो भी कर्मचारी या अधिकारी कार लेकर आते हैं, वे अपने साथ आस-पास या पास में रहने वाले किसी कर्मचारी या अधिकारी को लाएं, जिससे गाड़ियों की खपत कम होगी, जिससे फ्यूल की भी बचत होगी। गुजरात यूनिवर्सिटी में वर्क फ्रॉम होम पर फिलहाल कोई फैसला नहीं हुआ है क्योंकि टीचिंग स्टाफ अभी छुट्टी पर है। यूनिवर्सिटी के फाइनल एग्जाम चल रहे हैं, जिसकी वजह से नॉन-टीचिंग स्टाफ को वर्क फ्रॉम होम नहीं दिया जा सकता है। वर्क फ्रॉम होम पर फैसला एग्जाम के बाद की स्थिति को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-05/65.webp" alt="65" width="1280" height="720"></img>
moneycontrol.com

<p>गौरतलब है कि 11 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वडोदरा में पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण पैदा हुए ग्लोबल संकट पर बात की थी और देशवासियों से पेट्रोल-डीजल का इस्तेमाल कम करने और सोना न खरीदने की अपील की थी। सरदार धाम-3 के उद्घाटन कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था, 'पहले कोरोना संकट, फिर ग्लोबल आर्थिक चुनौतियां और अब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने दुनिया को प्रभावित किया है। भारत भी इससे अलग नहीं है। कोरोना महामारी इस सदी का सबसे बड़ा संकट था। इसलिए पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति इस दशक के सबसे बड़े संकटों में से एक है। जब हम मिलकर कोरोना का सामना करेंगे, तो हम इस संकट से भी उबर जाएंगे।’</p>
<p>भारत के इम्पोर्ट का एक बड़ा हिस्सा क्रूड ऑयल है। जिस क्षेत्र से दुनिया को क्रूड ऑयल मिलता है, वह अभी युद्ध की स्थिति में है। इसलिए, जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, हम सभी को मिलकर छोटे-छोटे संकल्प लेने होंगे। मैं अपने देश के हर नागरिक से अपील करता हूं कि जहां तक ​​हो सके पेट्रोल-डीजल का इस्तेमाल कम करें। मेट्रो, इलेक्ट्रिक बसों, पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें। जिनके पास कार है, वे दूसरों को भी साथ ले जाएं। यह ज़रूरी है कि सरकारी और प्राइवेट ऑफिस में वर्चुअल मीटिंग और वर्क फ्रॉम होम को प्राथमिकता दी जाए। मैं स्कूलों से भी आग्रह करता हूं कि वे कुछ समय के लिए ऑनलाइन क्लास का इंतज़ाम करें।’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://hindi.khabarchhe.com/politics/pm-modis-appeal-affected-deputy-cm-harsh-sanghvi-canceled-america/article-2219</link>
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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 17:30:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल: आयुष्मान भारत योजना लागू करना और BSF के लिए ज़मीन... सुवेंदु अधिकारी ने पहली कैबिनेट मीटिंग में लिए 6 बड़े फ़ैसले</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पश्चिम बंगाल में BJP सरकार बनने के बाद, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में हुई पहली कैबिनेट मीटिंग में 6 ज़रूरी फ़ैसले लिए गए। इन फ़ैसलों में आयुष्मान भारत योजना को लागू करना और 45 दिनों के अंदर BSF को ज़मीन देने का टारगेट शामिल है। इस मौके पर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने चुनाव आयोग को भी धन्यवाद दिया। कैबिनेट ने राज्य में हिंसा-मुक्त और सफल चुनाव कराने के लिए सभी वोटरों और भारत के चुनाव आयोग को धन्यवाद दिया।</p>
<p><strong>चुनाव आयोग को धन्यवाद</strong></p>
<p>पश्चिम बंगाल की नई सरकार की पहली कैबिनेट मीटिंग में राज्य में हिंसा-मुक्त और सफल चुनाव</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/%E0%A4%86%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A5%82-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%94%E0%A4%B0-bsf-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%9C%E0%A4%BC%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%A8----%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%81-%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%9F-%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%9F%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%97-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F-6-%E0%A4%AC%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A5%87-%E0%A4%AB%E0%A4%BC%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A4%B2%E0%A5%87/article-2213"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-05/241.webp" alt=""></a><br /><p>पश्चिम बंगाल में BJP सरकार बनने के बाद, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में हुई पहली कैबिनेट मीटिंग में 6 ज़रूरी फ़ैसले लिए गए। इन फ़ैसलों में आयुष्मान भारत योजना को लागू करना और 45 दिनों के अंदर BSF को ज़मीन देने का टारगेट शामिल है। इस मौके पर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने चुनाव आयोग को भी धन्यवाद दिया। कैबिनेट ने राज्य में हिंसा-मुक्त और सफल चुनाव कराने के लिए सभी वोटरों और भारत के चुनाव आयोग को धन्यवाद दिया।</p>
<p><strong>चुनाव आयोग को धन्यवाद</strong></p>
<p>पश्चिम बंगाल की नई सरकार की पहली कैबिनेट मीटिंग में राज्य में हिंसा-मुक्त और सफल चुनाव कराने के लिए सभी वोटरों और भारत के चुनाव आयोग को धन्यवाद दिया गया। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा, ‘चुनाव के दौरान इलेक्शन कमीशन का काम तारीफ़ के काबिल था।’</p>
<p><strong>321 शहीद कार्यकर्ताओं को सम्मान</strong></p>
<p>कैबिनेट मीटिंग के दौरान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा, ‘आज BJP सरकार बनाने के लिए अपनी जान कुर्बान करने वाले 321 पार्टी कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि दी गई है। उन्होंने कहा, हम उनके परिवारों को इंसाफ दिलाएंगे। इन BJP कार्यकर्ताओं का बलिदान बेकार नहीं गया है। इन लोगों को किसी भी कीमत पर इंसाफ मिलेगा।’</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-05/232.webp" alt="232" width="1200" height="675"></img>
indianexpress.com

<p><strong>BSF के लिए ज़मीन का बंटवारा</strong></p>
<p>सुवेंदु अधिकारी ने बताया कि, ‘नेशनल सिक्योरिटी और बॉर्डर इलाकों में डेमोग्राफिक बदलावों को ध्यान में रखते हुए, बॉर्डर फेंसिंग के लिए BSF को ज़मीन देने का प्रोसेस शुरू कर दिया गया है। इस काम को 45 दिनों के अंदर पूरा करने का टारगेट है।’</p>
<p><strong>आयुष्मान भारत लागू</strong></p>
<p>बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान BJP ने वादा किया था कि सत्ता में आने के बाद राज्य में ‘आयुष्मान भारत’ स्कीम लागू की जाएगी। यह वादा अब पूरा हो रहा है। सुवेंदु अधिकारी ने घोषणा की, ‘राज्य ने केंद्र की हेल्थ स्कीम ‘आयुष्मान भारत’ में शामिल होने का ऑफिशियली फैसला किया है। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘प्रधानमंत्री की सभी स्कीम अब बंगाल में लागू होंगी।’</p>
<p><strong>ब्यूरोक्रेट्स के लिए सेंट्रल ट्रेनिंग और BNS लागू करना</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने घोषणा की कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा रखे गए ब्यूरोक्रेट्स के लिए सेंट्रल ट्रेनिंग और पोस्टिंग को अब मंजूरी दे दी गई है। साथ ही, अब तक लागू इंडियन पीनल कोड (BNS) आज से बंगाल में लागू हो गया है। अब से सभी नए केस इसी नए कानून के तहत रजिस्टर किए जाएंगे।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-05/223.webp" alt="223" width="1280" height="720"></img>
facebook.com/SuvenduWB

<p><strong>2015 से बंद भर्ती प्रोसेस फिर से शुरू</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा, ‘सरकार ने माना है कि 2015 से राज्य में कोई बड़ी भर्ती नहीं हुई है। अपना वादा पूरा करते हुए मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि जल्द ही नई भर्ती प्रोसेस शुरू की जाएगी। कैबिनेट मीटिंग के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि ये फैसले ‘नए बंगाल’ के लिए दिशा तय करेंगे। विपक्षी पार्टियों की प्रतिक्रिया का इंतज़ार है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 17:37:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ममता बनर्जी का साथ... अब अपनों को ही नहीं मंजूर! सत्ता जाते ही शुरू हुई 'जुबानी जंग', क्या खत्म हो जाएगा TMC का वजूद</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पश्चिम बंगाल में सत्ता गंवाने के बाद पार्टी के कई नेताओं ने ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कैंपेन शुरू कर दिया है। पार्टी ने ऐसे बयानों के खिलाफ एक्शन लेते हुए 3 प्रवक्ताओं को 6 साल के लिए पार्टी से निकाल दिया और कई दूसरे नेताओं को कारण बताओ नोटिस भेजा। हालांकि, नाराजगी की आवाज अभी भी शांत नहीं हुई है।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-05/322.webp" alt="322" width="1200" height="720" /></p>
<p>तृणमूल कांग्रेस से निकाले गए नेताओं में सबसे खास नाम पूर्व प्रवक्ता रिजु दत्ता का है, जो अक्सर टीवी डिबेट में पार्टी का पक्ष रखते नजर आते थे। चुनाव के दौरान रिजु दत्ता का IPS</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/%E0%A4%AE%E0%A4%AE%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A5----%E0%A4%85%E0%A4%AC-%E0%A4%85%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A5%82%E0%A4%B0--%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%82-%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%88--%E0%A4%9C%E0%A5%81%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A4%82%E0%A4%97---%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%96%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AE-%E0%A4%B9%E0%A5%8B-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%97%E0%A4%BE-tmc-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%9C%E0%A5%82%E0%A4%A6/article-2212"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-05/312.webp" alt=""></a><br /><p>पश्चिम बंगाल में सत्ता गंवाने के बाद पार्टी के कई नेताओं ने ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कैंपेन शुरू कर दिया है। पार्टी ने ऐसे बयानों के खिलाफ एक्शन लेते हुए 3 प्रवक्ताओं को 6 साल के लिए पार्टी से निकाल दिया और कई दूसरे नेताओं को कारण बताओ नोटिस भेजा। हालांकि, नाराजगी की आवाज अभी भी शांत नहीं हुई है।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-05/322.webp" alt="322" width="1280" height="720"></img></p>
<p>तृणमूल कांग्रेस से निकाले गए नेताओं में सबसे खास नाम पूर्व प्रवक्ता रिजु दत्ता का है, जो अक्सर टीवी डिबेट में पार्टी का पक्ष रखते नजर आते थे। चुनाव के दौरान रिजु दत्ता का IPS ऑफिसर अजय पाल शर्मा की बेइज्जती करते हुए एक वीडियो वायरल हुआ था। चुनाव के नतीजे आने के बाद रिजु ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने CM शुभेंदु अधिकारी और दूसरे BJP नेताओं से अपने पिछले बेइज्जती वाले बर्ताव के लिए माफी मांगी। उन्होंने दावा किया कि जब अधिकारी विपक्ष के नेता थे, तो उन पर TMC के अंदर से ऐसे बयान देने का बहुत दबाव और धमकियां थीं। दत्ता ने उन्हें सुरक्षा और सपोर्ट देने के लिए BJP की तारीफ भी की। TMC ने दत्ता को डिसिप्लिनरी कमिटी के सामने पेश होने को कहा था, लेकिन वह पेश नहीं हुए।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-05/352.webp" alt="352" width="1280" height="720"></img></p>
<p>रिजू ने हाल ही में हार के लिए ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को दोषी ठहराते हुए कहा था कि इन नेताओं ने पूरे पार्टी संगठन के बजाय एक प्राइवेट कंपनी (I-PAC) को प्राथमिकता दी। उन्होंने शुभेंदु अधिकारी की भी तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने सिर्फ दो दिनों में करीब 5,000 TMC कार्यकर्ताओं की जान बचाई है। रिजू ने कहा, 'शुवेंदु अधिकारी को CM बने दो दिन हुए हैं, फिर भी उन्होंने करीब 5,000 TMC कार्यकर्ताओं की जान बचाई है। उनके पर्सनल असिस्टेंट की 6 मई को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अगर CM शुभेंदु ने कहा होता कि वह बदला लेना चाहते हैं, तो उस रात करीब 5,000 TMC कार्यकर्ता मारे गए होते। लेकिन CM शुभेंदु ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने कहा, किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की जरूरत नहीं है। सभी को शांति बनाए रखनी चाहिए। मैं इसके लिए उनका सम्मान करता हूं।'</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-05/3331.webp" alt="333" width="1280" height="720"></img></p>
<p>रिजू से पहले, पूर्व भारतीय क्रिकेटर और ममता बनर्जी सरकार में पूर्व मंत्री मनोज तिवारी ने भी ममता बनर्जी के खिलाफ कैंपेन शुरू किया था। उन्होंने दावा किया था कि पार्टी ने टिकट के बदले सभी MLA से 5 करोड़ रुपये मांगे थे। जब उन्होंने मना किया, तो पार्टी ने उनका टिकट कैंसिल कर दिया। इतना ही नहीं, तिवारी ने दावा किया कि उनके कार्यकाल के दौरान, TMC नेता अरूप बिस्वास ने उन्हें कोई भी काम करने से रोका। एक बार, जब वह अपने चुनाव क्षेत्र के बारे में बात करने के लिए ममता बनर्जी से मिलने गए, तो उनके साथ मारपीट की गई।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-05/342.webp" alt="342" width="1280" height="720"></img></p>
<p>रिजू और मनोज तिवारी के अलावा, TMC के प्रवक्ता कोहिनूर मजूमदार और कार्तिक घोष को भी पार्टी से निकाल दिया गया है। कोहिनूर ने चुनाव में हार के लिए पार्टी के टॉप लीडरशिप को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि उन्हें पार्टी नेताओं और अभिषेक बनर्जी से मिलने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। इन नेताओं के अलावा, कृष्णेंदु नारायण चौधरी और पापिया घोष ने भी अभिषेक बनर्जी से खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। इसके बाद, इन नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 14:20:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
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                <title>चुनाव खत्म होते ही सरकार को याद आया ‘संकट’, अखिलेश यादव का तीखा प्रहार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया संपन्न होते ही देश की राजनीति में जुबानी जंग तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई सात सूत्रीय अपील को लेकर केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है। यादव ने इस अपील को सरकार की <strong>‘विफलता की स्वीकारोक्ति’</strong>  करार देते हुए कहा कि जैसे ही वोटिंग खत्म हुई, भाजपा का ‘खोट’ सामने आ गया है।</p>
<p>अखिलेश यादव ने पीएम मोदी की अपील के समय पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पूरी चुनाव प्रक्रिया के दौरान सरकार को किसी संकट की आहट नहीं हुई,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/impact-of-pm-modis-appeal-employees-organization-demands-mandatory-work/article-2206"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-05/akhilesh-cover-photo.jpg" alt=""></a><br /><p>लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया संपन्न होते ही देश की राजनीति में जुबानी जंग तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई सात सूत्रीय अपील को लेकर केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है। यादव ने इस अपील को सरकार की <strong>‘विफलता की स्वीकारोक्ति’</strong> करार देते हुए कहा कि जैसे ही वोटिंग खत्म हुई, भाजपा का ‘खोट’ सामने आ गया है।</p>
<p>अखिलेश यादव ने पीएम मोदी की अपील के समय पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पूरी चुनाव प्रक्रिया के दौरान सरकार को किसी संकट की आहट नहीं हुई, लेकिन चुनाव खत्म होते ही उन्हें ‘संकट’ याद आ गया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि असल में देश के लिए सबसे बड़ा संकट भाजपा खुद है। सपा प्रमुख ने पूछा कि यदि इतनी सारी पाबंदियां लगानी पड़ रही हैं, तो फिर <strong>‘5 ट्रिलियन डॉलर की जुमलाई अर्थव्यवस्था’</strong> का सपना कैसे पूरा होगा?</p>
<p>अखिलेश यादव ने गिरते रुपये और महंगाई को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि डॉलर आसमान छू रहा है और देश का रुपया पाताल की ओर जा रहा है। सरकार के हाथ से नियंत्रण पूरी तरह छूट चुका है। जनता से सोना न खरीदने की अपील पर उन्होंने कहा कि भाजपा को यह नसीहत अपने भ्रष्ट नेताओं को देनी चाहिए। जनता तो पहले से ही 1.5 लाख रुपये तोला सोना खरीदने की स्थिति में नहीं है। भाजपा के लोग ही अपनी काली कमाई को सोने में बदलकर निवेश कर रहे हैं। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि इसकी सच्चाई लखनऊ से गोरखपुर और अहमदाबाद से गुवाहाटी तक कहीं भी पता की जा सकती है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-05/gold.jpg" alt="gold" width="1280" height="720"></img>
business-standard.com

<p>अखिलेश यादव ने भाजपा की कथनी और करनी में अंतर बताते हुए पूछा कि चुनाव के दौरान जो हजारों चार्टर विमान उड़ाए गए, क्या वे पानी से चल रहे थे?</p>
<p>क्या भाजपा नेता होटलों में नहीं रुक रहे थे या सिलेंडर की फोटो लगाकर खाना बना रहे थे? चुनाव में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से प्रचार क्यों नहीं किया गया? क्या सारी पाबंदियां और त्याग सिर्फ जनता के लिए ही हैं?</p>
<p>उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार की इस तरह की अपीलों से बाजार में मंदी, महंगाई का डर और घबराहट फैल जाएगी, जिससे व्यापार जगत में निराशा पैदा होगी। सपा प्रमुख ने देश की वर्तमान आर्थिक स्थिति के लिए भाजपा की विदेश नीति को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि भारत की पारंपरिक <strong>‘गुट-निरपेक्षता’ (Non-Alignment)</strong> की नीति को त्यागकर कुछ खास गुटों के दबाव में काम करने का खामियाजा आज देश भुगत रहा है। इसकी मार किसान, मजदूर, युवा, गृहणी और व्यापारी समेत हर वर्ग पर पड़ रही है।</p>
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news18marathi.com

<p>अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा ने हर मोर्चे पर देश को नुकसान पहुँचाया है:<br /><strong>सांस्कृतिक और सामाजिक:</strong> नफरत फैलाकर सामाजिक सौहार्द और संस्कृति को प्रदूषित किया।<br /><strong>धार्मिक:</strong> साधु-संतों पर प्रहार और आरोप लगाकर धर्म तक को नहीं छोड़ा।<br /><strong>राजनीतिक:</strong> चुनावी धांधलियों से राजनीति को गंदा कर दिया।</p>
<p><strong>नहीं चाहिए भाजपा</strong></p>
<p>अखिलेश यादव ने अंत में कहा कि सरकार का काम संसाधनों का सही उपयोग कर आपदा से उबारना होता है, न कि जनता के बीच भय फैलाना। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अपील के बाद जनता में जो आक्रोश पैदा हुआ है, उसे भाजपा अपने किसी भी ‘चुनावी जुगाड़’ से मैनेज नहीं कर पाएगी। अब देश एक ही सुर में कह रहा है– <strong>नहीं चाहिए भाजपा!</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 18:11:18 +0530</pubDate>
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                <title>'आप अभी तक कुंवारे क्यों हैं...' जब CM सुवेंदु अधिकारी ने शादी न करने की वजह बताई</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से उभरते व्यक्तित्व वाले सुवेंदु अधिकारी अब अपने राजनीतिक करियर के शिखर पर पहुंच गए हैं। शनिवार (9 मई) सुबह 11 बजे उन्होंने राज्य के पहले BJP मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली है। इसे बंगाल की राजनीति में केवल सत्ता परिवर्तन ही नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक युग का अंत और एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। आज उन्होंने CM के रूप में शपथ ले ली है, ऐसे में उनकी राजनीतिक यात्रा केवल खबरों में ही नहीं है, बल्कि उनके निजी जीवन के बारे में जानने के लिए</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/why-are-you-still-single-when-cm-suvendu-adhikari-gave/article-2204"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-05/photo-(2)13.webp" alt=""></a><br /><p>पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से उभरते व्यक्तित्व वाले सुवेंदु अधिकारी अब अपने राजनीतिक करियर के शिखर पर पहुंच गए हैं। शनिवार (9 मई) सुबह 11 बजे उन्होंने राज्य के पहले BJP मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली है। इसे बंगाल की राजनीति में केवल सत्ता परिवर्तन ही नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक युग का अंत और एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। आज उन्होंने CM के रूप में शपथ ले ली है, ऐसे में उनकी राजनीतिक यात्रा केवल खबरों में ही नहीं है, बल्कि उनके निजी जीवन के बारे में जानने के लिए भी लोगों में उत्सुकता बढ़ गई है। लोग जानना चाहते हैं कि सुवेंदु के परिवार में और कौन है और वे क्या करते हैं।</p>
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aajtak.in

<p>CM सुवेंदु कुंवारे हैं। उन्होंने खुद बताया कि उन्होंने शादी क्यों नहीं की। राजनीतिक परिवार से आने वाले CM सुवेंदु के पिता शिशिर अधिकारी भी बंगाल की राजनीति में एक प्रमुख व्यक्ति रहे हैं। पूर्व मिदनापुर में इस परिवार का लंबे समय से मजबूत प्रभाव रहा है, जो CM सुवेंदु के राजनीतिक प्रभाव को और मजबूत बनाता है। पिछली दो चुनावों में CM सुवेंदु अधिकारी ने जिस तरह ममता बनर्जी को हराया, वह उनकी रणनीति, संगठनात्मक नियंत्रण और आक्रामक प्रचार को दर्शाता है। CM सुवेंदु ने बंगाल में BJP को मजबूत आधार दिया। यही वजह है कि अब उन्हें राजनीतिक गलियारों में 'जायंट किलर' का नया उपनाम दिया गया है।</p>
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amarujala.com

<p>पश्चिम बंगाल की राजनीति में अपने आक्रामक रवैये और तीखे बयानों के लिए अक्सर खबरों में रहने वाले CM सुवेंदु अधिकारी अपने निजी जीवन को लेकर भी लोगों में जिज्ञासा का विषय रहे हैं। खासकर एक सवाल बार-बार पूछा जाता है कि वे 55 साल की उम्र तक कुंवारे क्यों रहे। दिसंबर 2020 में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए CM सुवेंदु अधिकारी ने खुद बताया था कि लोग अक्सर उनसे पूछते हैं कि उनके भाइयों ने शादी कर ली है, तो उन्होंने शादी क्यों नहीं की। उन्होंने जवाब दिया, 'बहुत लोग पूछते हैं, सुवेंदु, आप कुंवारे क्यों हैं? आपके भाई तो शादीशुदा हैं। मैं उन्हें कहता हूं कि आज की राजनीति में, मैं खुद को कुंवारा नहीं मानता।</p>
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navbharattimes.indiatimes.com

<p>सुवेंदु अधिकारी ने समझाया कि वे 1987 में छात्र राजनीति से जुड़े। धीरे-धीरे राजनीति उनके जीवन का केंद्र बन गई और फिर उन्होंने खुद को पूरी तरह सार्वजनिक जीवन के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने खास तौर पर अपने इलाके के तीन प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों का उल्लेख किया-सतीश सामंत, सुशील धारा और अजय मुखर्जी। CM सुवेंदु के मुताबिक, इन तीन नेताओं के जीवन से उन्हें हमेशा प्रेरणा मिली है। उन्होंने बताया कि ये तीनों स्वतंत्रता सेनानी कुंवारे थे और उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज और देश की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। CM सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि उनसे प्रेरित होकर उन्होंने भी कुंवारे रहकर राजनीति और जनसेवा का रास्ता चुना। उनके शब्दों में, 'मैं कुंवारा रहकर काम कर रहा हूं, इन तीनों का अनुसरण करते हुए।' इस बयान के जरिए CM सुवेंदु ने यह दिखाने की कोशिश की कि उनकी राजनीति केवल सत्ता तक सीमित नहीं है, बल्कि वे इसे एक मिशन और लोगों की सेवा के रूप में देखते हैं।</p>
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abplive.com

<p>उन्होंने आगे कहा कि उनका परिवार केवल कुछ लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरा बंगाली समाज उनका परिवार है। CM सुवेंदु के मुताबिक, समाज और लोगों की सेवा करने के लिए कई व्यक्तिगत इच्छाओं और सुखों का त्याग करना पड़ता है। अपनी राजनीतिक और वैचारिक प्रेरणाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी और सामाजिक कार्यकर्ता सतीश सामंत और सुशील धारा हमेशा समाज के प्रति समर्पण की बात करते थे। उनके विचारों से प्रेरित होकर उन्होंने जीवनभर कुंवारे रहने का फैसला किया। CM सुवेंदु अधिकारी के इस बयान की उस समय व्यापक चर्चा हुई थी।</p>
<p>नंदीग्राम में अपनी पहचान बनाने वाले CM सुवेंदु एक समय ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद नेताओं में माने जाते थे। हालांकि, TMC छोड़कर BJP में शामिल होने के बाद उन्होंने बंगाल में पार्टी के सबसे प्रमुख चेहरों में खुद को स्थापित किया। खास बात यह है कि उन्होंने केवल विपक्ष की राजनीति ही नहीं की, बल्कि ममता सरकार के खिलाफ लगातार जमीनी स्तर पर माहौल भी बनाया। अपनी शांत लेकिन आक्रामक राजनीतिक शैली के लिए पहचाने जाने वाले CM सुवेंदु अधिकारी हमेशा खुद को जमीनी नेता के रूप में पेश करते रहे हैं। चाहे किसान आंदोलन हो, नंदीग्राम संघर्ष हो या बंगाल में BJP का विस्तार, उन्होंने हर मोड़ पर खुद को अलग साबित किया। अब सबकी नजर इस पर है कि CM बनने के बाद सुवेंदु अधिकारी बंगाल की राजनीति और प्रशासन को किस दिशा में ले जाते हैं। BJP इसे 'नए बंगाल' की शुरुआत बता रही है, जबकि विपक्ष के लिए यह आने वाले दिनों की सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती बन गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 May 2026 20:15:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल: मैं वकील हूं और अब खुलकर लड़ूंगी’; भाजपा के खिलाफ ममता बनर्जी की बड़ी घोषणा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी ने एक बार फिर केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है। रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए ममता बनर्जी ने हुंकार भरते हुए कहा कि, ‘मैं खुद एक वकील हूं, और अब भाजपा के खिलाफ यह कानूनी और राजनीतिक लड़ाई खुलकर लड़ी जाएगी।’ ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बंगाल में तानाशाही का दौर शुरू हो गया है, जहां उन्हें प्रतिष्ठित व्यक्तियों की जयंती मनाने की भी अनुमति नहीं दी जा रही है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि उन्होंने कालीघाट मोड़ और फायर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/i-am-a-lawyer-and-now-i-will-fight-openly/article-2203"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-05/mamata11.webp" alt=""></a><br /><p>पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी ने एक बार फिर केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है। रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए ममता बनर्जी ने हुंकार भरते हुए कहा कि, ‘मैं खुद एक वकील हूं, और अब भाजपा के खिलाफ यह कानूनी और राजनीतिक लड़ाई खुलकर लड़ी जाएगी।’ ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बंगाल में तानाशाही का दौर शुरू हो गया है, जहां उन्हें प्रतिष्ठित व्यक्तियों की जयंती मनाने की भी अनुमति नहीं दी जा रही है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि उन्होंने कालीघाट मोड़ और फायर ब्रिगेड स्टेशन जैसे स्थानों पर टैगोर की जयंती मनाने की अनुमति मांगी थी, लेकिन प्रशासन ने तीनों स्थानों के लिए अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसे लोकतंत्र की ह*त्या बताते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि TMC को चुप कराने की कोशिशें हो रही हैं, लेकिन निडर नागरिक अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए एकजुट होकर जवाब देंगे।</p>
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<p>ममता ने बेहद भावुक होकर आरोप लगाया कि भाजपा बंगाल में आतंक फैला रही है। उन्होंने 92 वर्षीय दलित महिला और नवविवाहित दुल्हन को अपना घर खाली करने का उल्लेख करते हुए पुलिस की चुप्पी पर सवाल उठाए। अपनी सुरक्षा हटाए जाने पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि जब वे 2011 में सत्ता में आई थीं, तब उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा था; हालांकि, भाजपा ने सत्ता संभालते ही उनकी सुरक्षा तुरंत हटा दी थी।</p>
<p>ममता बनर्जी ने दावा किया कि देशभर के कई बड़े विपक्षी नेता उनके संपर्क में हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और खड़गे से बात की है। उद्धव ठाकरे, तेजस्वी यादव, अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल जैसे नेता भी उनके साथ हैं।</p>
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<p>उन्होंने आगे कहा कि कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी जैसे अनुभवी वकील इस कानूनी लड़ाई में अपना समर्थन देंगे। सांसद महुआ मोइत्रा का उल्लेख करते हुए ममता ने आरोप लगाया कि दिल्ली जाने वाली फ्लाइट में यात्रा करते समय उन्हें परेशान किया गया था। ममता के अनुसार, उनके पास इस घटना के ठोस सबूत और वीडियो फुटेज हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वे और उनकी पार्टी के वकील-नेता, जैसे कल्याण बनर्जी, इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 May 2026 15:08:20 +0530</pubDate>
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                <title>तमिलनाडु: बेटे का कोर्ट केस और जुदा हुई राहें: जानिए विजय को 'थलपति' बनाने वाले पिता एस.ए. चंद्रशेखर की कहानी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>जब तमिल सिनेमा के सुपरस्टार विजय ने 1992 में अपने पिता और प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक S.A. चंद्रशेखर के साथ फिल्म 'नालैया थीरपु' से हीरो के रूप में डेब्यू किया था, तब किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि फिल्म का नाम एक दिन उनके राजनीतिक भविष्य का निर्णायक प्रतीक बन जाएगा। 'नालैया थीरपु' का अर्थ होता है 'आने वाले कल का फैसला'।</p>
<p>फिल्म का यह शीर्षक लगभग तीन दशक बाद सच साबित हुआ है। लेकिन इस बार फैसला बॉक्स ऑफिस से नहीं, बल्कि मतपेटी से आया है। विजय की पार्टी, तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने तमिलनाडु की राजनीति में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/sons-court-case-and-parted-ways-know-the-story-of/article-2202"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-05/vijay-thalapathy-father.webp" alt=""></a><br /><p>जब तमिल सिनेमा के सुपरस्टार विजय ने 1992 में अपने पिता और प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक S.A. चंद्रशेखर के साथ फिल्म 'नालैया थीरपु' से हीरो के रूप में डेब्यू किया था, तब किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि फिल्म का नाम एक दिन उनके राजनीतिक भविष्य का निर्णायक प्रतीक बन जाएगा। 'नालैया थीरपु' का अर्थ होता है 'आने वाले कल का फैसला'।</p>
<p>फिल्म का यह शीर्षक लगभग तीन दशक बाद सच साबित हुआ है। लेकिन इस बार फैसला बॉक्स ऑफिस से नहीं, बल्कि मतपेटी से आया है। विजय की पार्टी, तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने तमिलनाडु की राजनीति में शानदार प्रवेश किया है, जो उनकी राजनीतिक शुरुआत में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है।</p>
<p>विजय की राजनीतिक सफलता के पीछे सिर्फ एक स्टार की कहानी नहीं है। यह एक पिता और बेटे की कहानी भी है। संघर्ष, महत्वाकांक्षा, दिल टूटने, कानूनी लड़ाइयों और आखिरकार पुनर्मिलन की भावनात्मक परतों से भरा रिश्ता। यही वजह है कि विजय और उनके पिता S.A. चंद्रशेखर की कहानी आज तमिल सिनेमा और राजनीति के सबसे दिलचस्प अध्यायों में से एक मानी जाती है।</p>
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<p>S.A. चंद्रशेखर का जन्म 2 जुलाई 1945 को तमिलनाडु के रामेश्वरम के थगाचीमदम में हुआ था। उन्होंने फिल्म उद्योग में किसी बड़े फिल्मी परिवार के सहारे नहीं, बल्कि अपने संघर्ष से पहचान बनाई थी। 1978 में उन्होंने फिल्म 'अवल ओरु पचई कुजहंथई' से निर्देशक के रूप में शुरुआत की। शुरुआत से ही उनकी फिल्मों में आम आदमी के किरदार, सामाजिक संघर्ष और व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई को दिखाया जाता था।</p>
<p>1981 में आई फिल्म 'सट्टम ओरु इरुत्तराय' उनके जीवन का बड़ा मोड़ साबित हुई। यह एक एक्शन फिल्म थी जिसमें कानून-व्यवस्था और गरीबों के संघर्ष को दिखाया गया था। कहानी उनकी पत्नी शोभा ने लिखी थी। दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म को लगभग 20 निर्माताओं ने ठुकरा दिया था। हालांकि, अंततः यह बनी और रिलीज के बाद 100 दिनों से अधिक समय तक चली।</p>
<p>इस फिल्म ने अभिनेता विजयकांत को बड़ा स्टार बना दिया और S.A. चंद्रशेखर को तमिल सिनेमा में पहचान दिलाई। फिल्म इतनी सफल रही कि इसका रीमेक तेलुगु, मलयालम, कन्नड़ और हिंदी में भी बना। इसकी हिंदी रीमेक 'अंधा कानून' थी, जिसमें रजनीकांत और अमिताभ बच्चन ने अभिनय किया था।</p>
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<p>इसके बाद S.A. चंद्रशेखर और विजयकांत की जोड़ी तमिल सिनेमा की सबसे सफल जोड़ियों में से एक बन गई। उनकी फिल्मों में आम आदमी का गुस्सा, न्याय की मांग और सिस्टम के खिलाफ लड़ाई साफ दिखाई देती थी। कई लोगों को उनकी फिल्मों में M.G. रामचंद्रन की छवि नजर आती थी।</p>
<p>S.A. चंद्रशेखर ने तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और हिंदी में 70 से अधिक फिल्मों का निर्देशन किया। उनकी फिल्में सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं थीं बल्कि सामाजिक मुद्दों को भी छूती थीं। खास बात यह है कि शंकर, M. राजेश और पोनराम जैसे आज के प्रसिद्ध निर्देशकों ने उनके सहायक के रूप में काम किया था। इसका मतलब यह है कि उनका प्रभाव सिर्फ उनकी फिल्मों तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरे तमिल फिल्म उद्योग तक फैला हुआ था।</p>
<p>1990 के दशक की शुरुआत में S.A. चंद्रशेखर के बेटे, जोसेफ विजय चंद्रशेखर, फिल्म उद्योग में प्रवेश करने के लिए तैयार थे। विजय बचपन में अपने पिता की फिल्मों में छोटी भूमिकाएं निभा चुके थे। जब उन्हें हीरो के रूप में लॉन्च करने का समय आया, तब S.A. चंद्रशेखर ने जिम्मेदारी संभाली। 'नालैया थीरपु' 1992 में रिलीज हुई। उस समय विजय केवल 18 साल के थे। हालांकि, यह फिल्म फ्लॉप हो गई। आमतौर पर ऐसा डेब्यू किसी नए अभिनेता के करियर का अंत माना जाता है, लेकिन S.A. चंद्रशेखर डटे रहे। उन्होंने अपने बेटे को फिल्मों में मौके देना जारी रखा।</p>
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<p>इसके बाद 'सेंथुरापांडी', 'रासिगन', 'विष्णु' और 'देवा' जैसी फिल्में आईं, यानी चार वर्षों में पांच फिल्में। इन फिल्मों का उद्देश्य साफ था — विजय को लगातार दर्शकों की नजर में बनाए रखना। S.A. चंद्रशेखर मानते थे कि सितारे रातोंरात नहीं बनते, बल्कि लगातार मेहनत और दर्शकों से जुड़ाव के जरिए बनते हैं। फिर 1996 में निर्देशक विक्रमन की 'पूवे उनक्कागा' ने विजय को पहली बड़ी सफलता दिलाई। यही वह समय था जब विजय धीरे-धीरे 'थलपति' बने और तमिल सिनेमा पर राज करने लगे। इस पूरी इमारत की नींव उनके पिता ने रखी थी।</p>
<p>2009 में विजय ने अपने फैन क्लब को एक सामाजिक संगठन में बदल दिया और उसका नाम 'मक्कल इयक्कम' रखा। यह संगठन रक्तदान शिविरों, बाढ़ राहत और सामाजिक कार्यक्रमों में सक्रिय हो गया। बाद में विजय के सभी फैन क्लब इसी संगठन के अंतर्गत आ गए। 2011 में इस संगठन ने राजनीति में कदम रखा और AIADMK का समर्थन किया। AIADMK ने उस चुनाव में भारी जीत हासिल की। हालांकि उस समय S.A. चंद्रशेखर ने कहा था कि यह संगठन कोई राजनीतिक पार्टी नहीं बल्कि समाज के हित के लिए बदलाव चाहता है।</p>
<p>फिर 2020 में इस कहानी ने बड़ा मोड़ लिया। विजय को बताए बिना S.A. चंद्रशेखर ने 'ऑल इंडिया थलपति विजय मक्कल इयक्कम' नाम की राजनीतिक पार्टी पंजीकृत कराने की कोशिश की। उन्होंने खुद को महासचिव, अपनी पत्नी शोभा को कोषाध्यक्ष और एक रिश्तेदार को अध्यक्ष नियुक्त किया।</p>
<p>विजय इस कदम से बेहद नाराज हो गए। उन्होंने सार्वजनिक बयान जारी कर कहा कि उनके पिता की राजनीतिक गतिविधियों से उनका कोई संबंध नहीं है। इसके बाद जो हुआ उसने पूरे तमिलनाडु को चौंका दिया। विजय ने अपने नाम और छवि के राजनीतिक इस्तेमाल को रोकने के लिए अपने माता-पिता सहित कई लोगों के खिलाफ अदालत में केस दायर कर दिया।</p>
<p>तमिल सिनेमा में यह पहली बार था जब किसी बड़े स्टार ने अपने ही माता-पिता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की। पिता-पुत्र के रिश्तों में तनाव आ गया और उनके बीच बातचीत बंद हो गई। पूरे तमिलनाडु ने इस विवाद को हैरानी और बेचैनी के साथ देखा।</p>
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<p>S.A. चंद्रशेखर ने बाद में एक इंटरव्यू में कहा कि कुछ लोग विजय के साथ उनके रिश्ते को तोड़ने की कोशिश कर रहे थे। शोभा ने भी कहा कि वह इस राजनीतिक साजिश से अनजान थीं। आखिरकार पार्टी भंग हो गई, लेकिन विजय की राजनीति में आने की महत्वाकांक्षा खत्म नहीं हुई। फर्क सिर्फ इतना था कि विजय अब यह सब अपने तरीके से करना चाहते थे।</p>
<p>2023 तक रिश्तों में नरमी आने लगी। S.A. चंद्रशेखर ने एक इंटरव्यू में कहा कि पिता-पुत्र के रिश्तों में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन उनके बीच का प्यार कायम रहता है। उन्होंने यह भी बताया कि दोनों ने अपने परिवारों के साथ विजय की फिल्म 'वारिसु' देखी थी। भावुक होकर उन्होंने कहा कि बेटे आमतौर पर अपनी मां के करीब होते हैं, लेकिन विजय उन्हें ज्यादा प्यार करता था। हालांकि दोनों ने कभी खुलकर अपने प्यार का इजहार नहीं किया, लेकिन यह बयान तमिल परिवारों की भावनात्मक संस्कृति को दर्शाता है, जहां रिश्ते बेहद गहरे होते हैं, लेकिन भावनाएं कम शब्दों में व्यक्त की जाती हैं।</p>
<p>4 मई को जब विजय की पार्टी TVK ने ऐतिहासिक जीत हासिल की, तब S.A. चंद्रशेखर गर्व के साथ मीडिया के सामने आए। उन्होंने इसे ऐतिहासिक जीत बताया। उन्होंने कहा कि विजय ने बिना किसी बड़े गठबंधन के चुनाव लड़कर बड़ा जोखिम उठाया था और अब जनता ने उन्हें स्वीकार कर लिया है। यह सिर्फ राजनीतिक जीत नहीं थी, बल्कि उस पिता के लिए भी खास पल था जिसने पहली बार अपने बेटे को कैमरे के सामने पेश किया था। फर्क सिर्फ इतना था कि बेटे ने वह राजनीतिक सपना हासिल कर लिया, जिसे पिता अपने दम पर हासिल नहीं कर पाए थे।</p>
<p>1992 में S.A. चंद्रशेखर ने अपने बेटे के लिए 'नालैया थीरपु' बनाई थी, जिसका अर्थ था- 'आने वाले कल का फैसला'। तीन दशक बाद वह फैसला सचमुच आ चुका है। और इस बार जनता ने अपना फैसला सुना दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 May 2026 13:30:15 +0530</pubDate>
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                <title>पश्चिम बंगाल: मंच पर अचानक किसके पैर छूने लगे प्रधानमंत्री? आखिर कौन हैं माखनलाल; जिन्हें नमन करने के लिए मोदी खुद को रोक नहीं पाए</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के CM के रूप में शपथ ले ली है, इस समय PM नरेंद्र मोदी सहित BJP के वरिष्ठ नेता मंच पर मौजूद थे। इसके बाद PM नरेंद्र मोदी अचानक आगे आए और एक वृद्ध व्यक्ति के चरण स्पर्श किए। इस तस्वीर ने पूरे देश को आश्चर्यचकित कर दिया। हर व्यक्ति यह जानने के लिए उत्सुक था कि यह व्यक्ति कौन है, जिनके चरण PM नरेंद्र मोदी ने स्पर्श किए थे। तो आइए हम आपको बता दें कि PM नरेंद्र मोदी ने आशीर्वाद लेने के लिए जिनके चरण स्पर्श किए, वे वृद्ध व्यक्ति कौन थे।  </p>
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statemirror.com...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/politics/whose-feet-did-the-prime-minister-suddenly-start-touching-on/article-2199"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-05/pm-narendra-modi-makhanlal-sarkar1.jpg" alt=""></a><br /><p>सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के CM के रूप में शपथ ले ली है, इस समय PM नरेंद्र मोदी सहित BJP के वरिष्ठ नेता मंच पर मौजूद थे। इसके बाद PM नरेंद्र मोदी अचानक आगे आए और एक वृद्ध व्यक्ति के चरण स्पर्श किए। इस तस्वीर ने पूरे देश को आश्चर्यचकित कर दिया। हर व्यक्ति यह जानने के लिए उत्सुक था कि यह व्यक्ति कौन है, जिनके चरण PM नरेंद्र मोदी ने स्पर्श किए थे। तो आइए हम आपको बता दें कि PM नरेंद्र मोदी ने आशीर्वाद लेने के लिए जिनके चरण स्पर्श किए, वे वृद्ध व्यक्ति कौन थे।  </p>
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<p><br />लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक जीवन में सक्रिय रहे माखनलाल सरकार इन दिनों खबरों में छाए हुए हैं। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान PM नरेंद्र मोदी द्वारा उनके चरण स्पर्श किए जाने की तस्वीर सामने आने के बाद लोग यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि माखनलाल सरकार कौन हैं और उनका राजनीतिक एवं सामाजिक प्रभाव कितना व्यापक है। माखनलाल सरकार को बंगाल के सबसे सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ताओं में से एक माना जाता है। उनकी जड़ें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और जनसंघ युग से जुड़ी हुई हैं।  <br /><br /></p>
<p>PM नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के सबसे वरिष्ठ BJP कार्यकर्ताओं में से एक माखनलाल सरकार का सम्मान किया और उनका आशीर्वाद लिया। 1952 में कश्मीर आंदोलन के दौरान माखनलाल सरकार को गिरफ्तार किया गया था, जब वे श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ भारतीय तिरंगा फहराने गए थे। 98 वर्ष की आयु में भी सरकार स्वतंत्रता के बाद के भारत में राष्ट्रवादी आंदोलन के शुरुआती आधार स्तंभ नेताओं में से एक हैं।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-05/pm-narendra-modi-makhanlal-sarkar2.jpg" alt="PM-Narendra-Modi-Makhanlal-Sarkar2" width="1280" height="720"></img>
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<p>98 वर्ष की उम्र में भी सरकार को भारतीय जनसंघ और शुरुआती राष्ट्रवादी आंदोलन के प्रमुख व्यक्तियों में से एक माना जाता है, जिन्होंने स्वतंत्रता के बाद भारत की राजनीति को जमीनी स्तर पर आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 1952 में जब जम्मू-कश्मीर में तिरंगा फहराने का आंदोलन चल रहा था, तब वे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ वहां गए थे। इस आंदोलन के दौरान उन्हें कश्मीर में गिरफ्तार भी किया गया था। उस समय यह आंदोलन केवल एक राजनीतिक अभियान नहीं था, बल्कि राष्ट्रीय एकता और अखंडता का प्रतीक माना जाता था।  </p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-05/pm-narendra-modi-makhanlal-sarkar4.jpg" alt="PM-Narendra-Modi-Makhanlal-Sarkar4" width="1280" height="720"></img>
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<p>इसके बाद, 1980 में भारतीय जनता पार्टी की स्थापना के साथ माखनलाल सरकार को पश्चिम बंगाल के पश्चिम दिनाजपुर, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग जिलों की संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्होंने बहुत कम समय में हर गांव तक संगठन का विस्तार करने का काम किया। केवल एक वर्ष में उन्होंने पार्टी में लगभग 10,000 नए सदस्य जोड़े, जिसे उस समय एक बड़ी उपलब्धि माना गया। उन्होंने 1981 से लगातार 7 वर्षों तक जिला अध्यक्ष के रूप में सेवा दी। उस समय BJP में कोई भी नेता सामान्यतः दो वर्ष से अधिक समय तक एक ही संगठनात्मक पद पर नहीं रहता था। हालांकि, माखनलाल सरकार का 7 वर्षों का कार्यकाल उनके नेतृत्व, संगठनात्मक क्षमता और पार्टी कार्यकर्ताओं में मजबूत पकड़ को दर्शाता है।</p>
<p>ऐसा कहा जाता है कि माखनलाल ने लंबे समय तक संगठन के लिए जमीनी स्तर पर काम किया और बंगाल में राष्ट्रवादी विचारधारा को मजबूत बनाने में भूमिका निभाई। इस उम्र में भी उन्हें सार्वजनिक जीवन में सक्रिय माना जाता है, और कई नेता उन्हें मार्गदर्शक के रूप में सम्मान देते हैं। राजनीतिक हलकों में माखनलाल सरकार को ऐसे व्यक्ति के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने बिना किसी उच्च-प्रोफाइल पद या प्रचार के संगठनात्मक कार्य को प्राथमिकता दी। यही कारण है कि बंगाल BJP के कई वरिष्ठ नेता उनका बहुत सम्मान करते हैं। PM नरेंद्र मोदी द्वारा सार्वजनिक रूप से उनके चरण स्पर्श करना सम्मान और लंबे समय से चले आ रहे संबंध का प्रतीक माना जाता है।  </p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-05/pm-narendra-modi-makhanlal-sarkar5.jpg" alt="PM-Narendra-Modi-Makhanlal-Sarkar5" width="1280" height="720"></img>
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<p>सोशल मीडिया पर यह दृश्य वायरल होते ही लोगों में माखनलाल सरकार के बारे में जानने की उत्सुकता बढ़ गई। कई उपयोगकर्ताओं ने इसे भारतीय राजनीतिक संस्कृति में बड़ों के सम्मान की परंपरा से जोड़कर देखा। कुछ लोगों ने इसे BJP के लंबे समय से काम कर रहे कार्यकर्ताओं के प्रति सम्मान के संदेश के रूप में भी समझा। हालांकि माखनलाल सरकार अक्सर सुर्खियों से दूर रहते हैं, लेकिन संगठन और विचारधारा से जुड़े लोगों के बीच उनकी उपस्थिति बहुत मजबूत मानी जाती है। बंगाल की राजनीति को करीब से समझने वाले लोग उन्हें उन पुराने चेहरों में गिनते हैं जिन्होंने दशकों तक जमीनी स्तर पर काम किया और नेताओं की नई पीढ़ी के विकास में योगदान दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 15:43:17 +0530</pubDate>
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