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                <title>विश्व - Khabarchhe Hindi</title>
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                            <item>
                <title>लंदन में खुला हल्दीराम का रेस्तरां, सिर्फ 3 महीनों में क्यों हो गया बंद? जानिए वजह</title>
                                    <description><![CDATA[<p>प्रसिद्ध फूड आउटलेट हल्दीराम ने हाल ही में लंदन के लीसेस्टर स्क्वायर में अपना पहला रेस्तरां खोला था। लंदन में खुले इस पहले रेस्तरां में भारी भीड़ और लंबी कतारें देखने को मिलीं। भारतीय भोजन का स्वाद लेने के लिए विदेशी लोग भी हल्दीराम में उमड़ पड़े थे, और इसके कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। इसी बीच, एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है।</p>
<p>लंदन के लीसेस्टर स्क्वायर में स्थित हल्दीराम UK रेस्तरां को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। इस खबर से कई लोग निराश हुए हैं, क्योंकि पहले रेस्तरां में लंबी कतारें देखने को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/world/why-haldirams-restaurant-opened-in-london-closed-in-just-3/article-2671"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-08/301.webp" alt=""></a><br /><p>प्रसिद्ध फूड आउटलेट हल्दीराम ने हाल ही में लंदन के लीसेस्टर स्क्वायर में अपना पहला रेस्तरां खोला था। लंदन में खुले इस पहले रेस्तरां में भारी भीड़ और लंबी कतारें देखने को मिलीं। भारतीय भोजन का स्वाद लेने के लिए विदेशी लोग भी हल्दीराम में उमड़ पड़े थे, और इसके कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। इसी बीच, एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है।</p>
<p>लंदन के लीसेस्टर स्क्वायर में स्थित हल्दीराम UK रेस्तरां को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। इस खबर से कई लोग निराश हुए हैं, क्योंकि पहले रेस्तरां में लंबी कतारें देखने को मिल रही थीं। लोग वहां खाना-पीना बहुत पसंद कर रहे थे।</p>
<p>ब्रांड ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस रेस्तरां को अस्थायी रूप से बंद करने की घोषणा की थी। ब्रांड ने पुष्टि की थी कि UK पावर नेटवर्क्स (UKPN) द्वारा किए जा रहे विद्युत कार्य के कारण 21 जुलाई से आउटलेट को अस्थायी रूप से बंद किया जा रहा है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/311.webp" alt="311" width="1280" height="720"></img>
firstpost.com

<p>अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट @haldiramsuk.restaurants पर एक पोस्ट में, रेस्तरां ने कहा, 'हम जल्द ही वापस आएंगे। हमारे साथ जुड़े रहें।' कंपनी ने एक बयान में यह भी कहा कि इस क्षेत्र में UKPN द्वारा विद्युत कार्य चल रहा है, इसलिए रेस्तरां बंद है। कंपनी ने असुविधा के लिए माफी भी मांगी है।</p>
<p>गौरतलब है कि रेस्तरां केवल कुछ दिनों के लिए बंद किया गया है। ब्रांड निकट भविष्य में फिर से संचालन शुरू करेगा। यहां आपको बता दें कि जून में ही ब्रांड ने लंदन के लीसेस्टर स्क्वायर में 19-20 इरविंग स्ट्रीट पर अपना पहला आउटलेट खोला था।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/321.webp" alt="321" width="1280" height="720"></img>
zeenews.india.com

<p>लगभग 3,000 वर्ग फुट के इस आउटलेट में 120 मेहमानों के लिए इनडोर बैठने की व्यवस्था और अतिरिक्त 20 आउटडोर सीटें हैं। यहां आपको बता दें कि ब्रांड के पारंपरिक क्विक-सर्विस मॉडल के विपरीत, यह लंदन रेस्तरां अधिक प्रीमियम, कैज़ुअल डाइनिंग अनुभव प्रदान करता है।</p>
<p>हैरानी की बात यह है कि रेस्तरां खुलते ही लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं, जो जल्द ही लंदन के भारतीय समुदाय में चर्चा का विषय बन गईं। रेस्तरां के कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए। लोग अब इसके दोबारा खुलने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। यहां आपको बता दें कि हल्दीराम UK ने दोबारा खोलने की तारीख की घोषणा नहीं की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विश्व</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 21:49:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रैंकिंग में 10 वर्षों के सबसे निचले स्तर पर अमेरिकी पासपोर्ट; जानिए भारत किस स्थान पर?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>दुनिया के सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट की रैंकिंग बताने वाले हेनली पासपोर्ट इंडेक्स 2026 में अमेरिका को बड़ा झटका लगा है। इस बार अमेरिकी पासपोर्ट पिछले एक दशक में अपने सबसे निचले स्थान पर पहुंच गया है। अब 30 से अधिक देशों के पासपोर्ट अमेरिका से आगे निकल गए हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिकी पासपोर्ट कमजोर हो गया है। वास्तविक कारण यह है कि कई अन्य देशों ने अपने नागरिकों के लिए अधिक देशों में वीज़ा-मुक्त या वीज़ा-ऑन-अराइवल की सुविधा हासिल कर ली है।</p>
<p>अगर भारत की बात करें, तो वह हेनली पासपोर्ट इंडेक्स 2026 में 81वें</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/world/american-passport-at-lowest-level-in-10-years-in-ranking/article-2660"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-08/8.webp" alt=""></a><br /><p>दुनिया के सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट की रैंकिंग बताने वाले हेनली पासपोर्ट इंडेक्स 2026 में अमेरिका को बड़ा झटका लगा है। इस बार अमेरिकी पासपोर्ट पिछले एक दशक में अपने सबसे निचले स्थान पर पहुंच गया है। अब 30 से अधिक देशों के पासपोर्ट अमेरिका से आगे निकल गए हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिकी पासपोर्ट कमजोर हो गया है। वास्तविक कारण यह है कि कई अन्य देशों ने अपने नागरिकों के लिए अधिक देशों में वीज़ा-मुक्त या वीज़ा-ऑन-अराइवल की सुविधा हासिल कर ली है।</p>
<p>अगर भारत की बात करें, तो वह हेनली पासपोर्ट इंडेक्स 2026 में 81वें स्थान पर है। भारतीय पासपोर्ट धारक 55 देशों में बिना वीज़ा के पहले से ही यात्रा कर सकते हैं। पिछले वर्ष भारत 85वें स्थान पर था, यानी इस बार उसकी रैंकिंग में सुधार हुआ है। हालांकि, वीज़ा-मुक्त गंतव्यों की संख्या 57 से घटकर 55 हो गई है; इसका कारण कुछ देशों की वीज़ा नीतियों में हुए बदलाव हैं।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/9'.webp" alt="9'" width="1280" height="720"></img></p>
<p>हेनली पासपोर्ट इंडेक्स दुनिया की सबसे प्रमुख पासपोर्ट रैंकिंग में से एक है। यह 199 देशों और 227 यात्रा गंतव्यों के पासपोर्ट का मूल्यांकन करता है। यह रैंकिंग इस आधार पर तय होती है कि किसी देश के नागरिक बिना वीज़ा या वीज़ा-ऑन-अराइवल सुविधाओं के साथ कितने देशों में जा सकते हैं।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, हाल के वर्षों में कई देशों ने नए समझौते किए हैं और अन्य देशों के साथ संबंध मजबूत किए हैं। इसके कारण उनके नागरिक अधिक देशों में वीज़ा-मुक्त यात्रा का आनंद ले रहे हैं। इसी वजह से कई देश अमेरिका को पीछे छोड़कर आगे निकल गए हैं। अमेरिकी नागरिकों को अब पहले की तुलना में अधिक स्थानों के लिए पहले से वीज़ा या यात्रा प्राधिकरण लेने की आवश्यकता पड़ती है। यह रैंकिंग किसी देश की आर्थिक शक्ति या राजनीतिक प्रभाव के बजाय यात्रा की स्वतंत्रता को दर्शाती है।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-08/10.webp" alt="10" width="1280" height="720"></img></p>
<p>सिंगापुर इस वर्ष भी दुनिया का सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट है। जापान, दक्षिण कोरिया और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर हैं, जबकि स्वीडन तीसरे स्थान पर है। इसके अलावा, बेल्जियम, डेनमार्क, फ़िनलैंड, जर्मनी, आयरलैंड, इटली, लक्ज़मबर्ग, नीदरलैंड, नॉर्वे और स्पेन सबसे मजबूत पासपोर्ट वाले देशों में शामिल हैं। वहीं, ब्रिटेन, न्यूज़ीलैंड, कनाडा, स्विट्ज़रलैंड, ऑस्ट्रिया और ग्रीस भी शीर्ष-10 देशों में हैं।</p>
<p>हेनली पासपोर्ट इंडेक्स 2026 दर्शाता है कि आज के समय में किसी देश के नागरिक कितने देशों में आसानी से यात्रा कर सकते हैं, यह उसकी वैश्विक पहुंच का प्रमुख मानदंड बन गया है। अमेरिकी पासपोर्ट अभी भी दुनिया के सबसे शक्तिशाली पासपोर्टों में से एक है, लेकिन अन्य देशों ने वीज़ा-मुक्त यात्रा के विस्तार में अधिक तेज़ी से प्रगति की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विश्व</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Aug 2026 12:31:15 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>‘नीरव मोदी को अब तक भारतीय जेल में होना चाहिए था...’ ब्रिटेन की पूर्व गृह मंत्री अपने ही देश की व्यवस्था पर भड़कीं</title>
                                    <description><![CDATA[<p>ब्रिटेन की पूर्व गृह मंत्री प्रीति पटेल ने फरार भारतीय हीरा व्यापारी नीरव मोदी के प्रत्यर्पण में हो रही देरी पर निराशा व्यक्त की है। उन्होंने अपनी सरकार और कानूनी प्रक्रिया पर तीखे प्रहार किए हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में देरी से भारत और ब्रिटेन के बीच संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इतनी लंबी देरी से भारत का विश्वास कम हुआ है।</p>
<p>द डेली टेलीग्राफ के पॉडकास्ट 'द डायमंड किंग' में बातचीत करते हुए प्रीति पटेल ने कहा, “मुझे यह देखकर हैरानी और निराशा होती है कि प्रत्यर्पण आदेश पर हस्ताक्षर हुए वर्षों बीत जाने के बाद</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/world/6a6871d1564c9/article-2644"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/priti-patel11.webp" alt=""></a><br /><p>ब्रिटेन की पूर्व गृह मंत्री प्रीति पटेल ने फरार भारतीय हीरा व्यापारी नीरव मोदी के प्रत्यर्पण में हो रही देरी पर निराशा व्यक्त की है। उन्होंने अपनी सरकार और कानूनी प्रक्रिया पर तीखे प्रहार किए हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में देरी से भारत और ब्रिटेन के बीच संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इतनी लंबी देरी से भारत का विश्वास कम हुआ है।</p>
<p>द डेली टेलीग्राफ के पॉडकास्ट 'द डायमंड किंग' में बातचीत करते हुए प्रीति पटेल ने कहा, “मुझे यह देखकर हैरानी और निराशा होती है कि प्रत्यर्पण आदेश पर हस्ताक्षर हुए वर्षों बीत जाने के बाद भी नीरव मोदी ब्रिटेन में है।” प्रीति पटेल ने अप्रैल 2021 में फरार हीरा व्यापारी नीरव मोदी के प्रत्यर्पण आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इससे पहले ब्रिटिश अदालतों ने माना था कि भारत में उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार हैं। उन्होंने इस बात पर गहरा आश्चर्य और निराशा जताई कि नीरव मोदी अभी भी ब्रिटेन में है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/priti-patel2.webp" alt="priti-patel2" width="1280" height="720"></img>
facebook.com/pritipatelmp

<p>उन्होंने कहा कि पंजाब नेशनल बैंक (PNB) से जुड़े 2 अरब डॉलर के कथित धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में वांछित उद्योगपति का प्रत्यर्पण न कर पाने के कारण भारत सरकार बेहद नाराज़ है। यदि हमारी व्यवस्था प्रक्रियाओं और बहानों में उलझने के बजाय समझदारी से काम करती और उचित कदम उठाती, तो आज नीरव मोदी देश में नहीं होता और उसे अब तक भारत भेज दिया गया होता। इस देरी से भारत को ब्रिटेन के साथ सहयोग को लेकर काफी निराशा हुई है।</p>
<p>प्रीति पटेल ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद नीरव मोदी को भारत में अपनी सज़ा भुगतनी चाहिए थी। उसे भारतीय जेल में अपनी सज़ा काटनी चाहिए थी, और यह सब कानूनी प्रक्रिया के तहत होना चाहिए था; ब्रिटेन के प्रत्यर्पण कानूनों और संधियों का यही उद्देश्य है। उन्होंने इस लंबे विलंब को ब्रिटिश व्यवस्था का स्पष्ट दुरुपयोग और ब्रिटिश करदाताओं का अपमान बताया।</p>
<p>उन्होंने दावा किया कि 2019 से 2022 तक गृह मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान इस मामले ने राजनयिक चुनौतियाँ भी पैदा कीं। उन्होंने कहा कि जब तक प्रत्यर्पण का मामला हल नहीं हुआ, तब तक भारत उन लोगों को वापस लेने में सहयोग करने के लिए तैयार नहीं था जिनके शरण आवेदन खारिज कर दिए गए थे।</p>
<p>उन्होंने कहा, “भारत को शरण आवेदन खारिज होने वाले लोगों को वापस स्वीकार करने के लिए मनाना मेरे लिए एक बड़ी चुनौती थी। मेरा मानना है कि इसकी सबसे बड़ी वजह यह हाई-प्रोफाइल मामला (नीरव मोदी का) था। उस समय एक और हाई-प्रोफाइल मामला भी था। जब तक उन्होंने (भारत ने) उन मामलों में कार्रवाई या प्रगति नहीं देखी, तब तक उनके पास हम पर दबाव बनाने का एक माध्यम था, जो बेहद निराशाजनक था।”</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/nirav-modi.webp" alt="nirav-modi" width="1280" height="720"></img>
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<p>नीरव मोदी ब्रिटेन में सभी कानूनी विकल्प अपना चुका है, और रिपोर्टों के अनुसार यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय में उसकी अंतिम अपील भी खारिज कर दी गई है। मानवाधिकार के आधार पर दायर अपीलों और गुप्त शरण दावों सहित वर्षों तक चले कानूनी संघर्ष के बाद अब उसका भारत प्रत्यर्पण लगभग तय माना जा रहा है।</p>
<p>55 वर्षीय नीरव मोदी फिलहाल लंदन की पेंटनविल जेल में बंद है। भारत में उसके खिलाफ तीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें पंजाब नेशनल बैंक (PNB) से जुड़े लगभग 2 अरब डॉलर की कथित धोखाधड़ी से संबंधित CBI का मामला, प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग का मामला तथा सबूतों और गवाहों से छेड़छाड़ से संबंधित मामला शामिल है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विश्व</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 14:45:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वाराणसी: लाखों रुपये वेतन के बावजूद महिला GST डिप्टी कमिश्नर रिश्वत लेते पकड़ी गई; भागने की कोशिश में विजिलेंस टीम से हुई हाथापाई</title>
                                    <description><![CDATA[<p>उत्तर प्रदेश के वाराणसी में विजिलेंस टीम ने राज्य GST विभाग की डिप्टी कमिश्नर अंबिका सिंह को ₹50,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के दौरान उन्होंने घटनास्थल से भागने की कोशिश की और महिला पुलिसकर्मियों के साथ हाथापाई की। इसके बाद विजिलेंस टीम ने उन्हें हिरासत में लेकर पुलिस स्टेशन पहुंचाया। इस कार्रवाई से विभाग में हड़कंप मच गया है।</p>
<p>रिपोर्टों के अनुसार, बजरडीहा निवासी अजय कुमार मौर्य 'ब्लैकस्मिथ इंडस्ट्रीज़ प्राइवेट लिमिटेड' के निदेशक हैं। उन्होंने फरवरी 2023 का GST रिटर्न समय पर दाखिल किया था, लेकिन कुछ आपत्तियों के कारण उनकी फाइल दोबारा जांच के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/world/6a588c8a41bb0/article-2565"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/gst-deputy-commissioner1.webp" alt=""></a><br /><p>उत्तर प्रदेश के वाराणसी में विजिलेंस टीम ने राज्य GST विभाग की डिप्टी कमिश्नर अंबिका सिंह को ₹50,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के दौरान उन्होंने घटनास्थल से भागने की कोशिश की और महिला पुलिसकर्मियों के साथ हाथापाई की। इसके बाद विजिलेंस टीम ने उन्हें हिरासत में लेकर पुलिस स्टेशन पहुंचाया। इस कार्रवाई से विभाग में हड़कंप मच गया है।</p>
<p>रिपोर्टों के अनुसार, बजरडीहा निवासी अजय कुमार मौर्य 'ब्लैकस्मिथ इंडस्ट्रीज़ प्राइवेट लिमिटेड' के निदेशक हैं। उन्होंने फरवरी 2023 का GST रिटर्न समय पर दाखिल किया था, लेकिन कुछ आपत्तियों के कारण उनकी फाइल दोबारा जांच के लिए GST कार्यालय पहुंची थी। आरोप है कि डिप्टी कमिश्नर अंबिका सिंह ने फाइल क्लियर करने और कर संबंधी मामले को मंजूरी देने के बदले ₹50,000 की रिश्वत मांगी थी।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/gst-deputy-commissioner2.webp" alt="gst-deputy-commissioner2" width="1280" height="720"></img>
tv9hindi.com

<p>उद्योगपति ने शुरुआत में रिश्वत देने से इनकार कर दिया था, लेकिन दबाव बढ़ने पर उन्होंने विजिलेंस विभाग से संपर्क किया। शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस विभाग की टीम ने प्रारंभिक जांच की, जिसमें आरोप सही पाए जाने पर ट्रैप की योजना बनाई गई।</p>
<p>बुधवार शाम शिकायतकर्ता ने अंबिका सिंह को भेलूपुर क्षेत्र के 'दादा रेस्टोरेंट' में पैसे लेने के लिए बुलाया। आरोप है कि जैसे ही उन्होंने ₹50,000 से भरा लिफाफा स्वीकार किया, पहले से मौजूद विजिलेंस टीम ने उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया।</p>
<p>विजिलेंस टीम के अनुसार, गिरफ्तारी के दौरान अंबिका सिंह ने भागने की कोशिश की। इस दौरान उन्हें रोकने पहुंची महिला पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की और हाथापाई भी हुई। घटनास्थल पर भीड़ जमा हो गई। बाद में विजिलेंस टीम उन्हें सरकारी वाहन से पुलिस स्टेशन ले गई।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/gst-deputy-commissioner3.webp" alt="gst-deputy-commissioner3" width="1280" height="720"></img>
instagram.com

<p>गिरफ्तारी के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत विजिलेंस पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि अब डिप्टी कमिश्नर द्वारा पहले निपटाई गई अन्य फाइलों की भी जांच की जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि अन्य मामलों में भी कोई अनियमितता हुई है या नहीं।</p>
<p>विजिलेंस विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी सरकारी काम के बदले रिश्वत मांगता है, तो विभाग के हेल्पलाइन नंबर 9454401866 और 9454401222 पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विश्व</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 13:29:16 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>भारत पर 500% टैरिफ लगाने से अमेरिका पीछे क्यों हटा? अमेरिकी राष्ट्रपति की 'मजबूरी' का हुआ खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत पर 500% टैरिफ लगाने पर विचार कर रहे थे। उनकी योजना रूस से तेल खरीदने के लिए भारत को दंडित करने की थी। अब यह सामने आया है कि वे इस फैसले से पीछे हट गए हैं। ट्रंप की टीम ने टैरिफ को लेकर व्यापक चर्चा की और आपस में सलाह-मशविरा किया। निष्कर्ष यह निकला कि 500% टैरिफ लगाना उचित नहीं होगा। इसे घटाकर 100% किया जाना चाहिए। रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500% टैरिफ लगाने वाला विधेयक ट्रंप के करीबी सहयोगी रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा पेश किया गया था। उनका शनिवार,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/world/why-did-america-step-back-from-imposing-500-tariffs-on/article-2560"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/us-tariff-india-china1.webp" alt=""></a><br /><p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत पर 500% टैरिफ लगाने पर विचार कर रहे थे। उनकी योजना रूस से तेल खरीदने के लिए भारत को दंडित करने की थी। अब यह सामने आया है कि वे इस फैसले से पीछे हट गए हैं। ट्रंप की टीम ने टैरिफ को लेकर व्यापक चर्चा की और आपस में सलाह-मशविरा किया। निष्कर्ष यह निकला कि 500% टैरिफ लगाना उचित नहीं होगा। इसे घटाकर 100% किया जाना चाहिए। रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500% टैरिफ लगाने वाला विधेयक ट्रंप के करीबी सहयोगी रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा पेश किया गया था। उनका शनिवार, 11 जुलाई को निधन हो गया था।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/us-tariff-india-china4.webp" alt="us-tariff-india-china4" width="1280" height="720"></img>
timesofindia.indiatimes.com

<p>यह विधेयक रूसी तेल और गैस की बिक्री रोकने के उद्देश्य से लाया जा रहा है। अमेरिका इसे यूक्रेन के खिलाफ युद्ध लड़ रहे रूस पर दबाव बनाने की नीति के रूप में देखता है। यदि यह विधेयक कानून बन जाता है, तो इसे 'रूस प्रतिबंध कानून' के रूप में जाना जाएगा।</p>
<p>डोनाल्ड ट्रंप के अलावा, सत्तारूढ़ रिपब्लिकन सीनेटर और विपक्षी डेमोक्रेटिक सीनेटर भी इस विधेयक का समर्थन कर रहे हैं। इस कानून से न केवल रूस पर दबाव पड़ेगा, बल्कि यदि भारत और चीन जैसे देशों पर भारी टैरिफ लगाया जाता है, तो ये देश भी रूस से तेल और गैस खरीदने से पीछे हट सकते हैं।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/us-tariff-india-china.webp" alt="us-tariff-india-china" width="1280" height="720"></img>
BusinessToday.com

<p>एक समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, लिंडसे ग्राहम के मूल विधेयक में रूसी तेल और गैस खरीदने वालों पर 500% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था। नए संस्करण में अब रूसी तेल और गैस के शीर्ष 5 खरीदारों पर 100% तक टैरिफ लगाने की मांग की गई है। सीनेट के सहायकों ने बताया कि रूसी कच्चे तेल के शीर्ष पाँच खरीदार देश चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अज़रबैजान हैं। वहीं, रूसी प्राकृतिक गैस के शीर्ष 5 खरीदार चीन, फ्रांस, जापान, हंगरी और बेल्जियम हैं।</p>
<p>सीनेट के एक सहायक ने दावा किया कि इस समझौते पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ कई महीनों से चर्चा चल रही है। उन्होंने आगे कहा, "फिलहाल यही एकमात्र ऐसी चीज़ है जिसे सर्वसम्मति से मंजूरी मिली है, और संभवतः यही एकमात्र चीज़ है जो आगे बढ़ेगी और रूस पर उस तरह का दबाव बनाएगी जैसा हम सभी चाहते हैं।"</p>
<p>सहायक ने कहा कि विधेयक से संबंधित चर्चाएँ पूरी तरह गोपनीय हैं। मंगलवार, 14 जुलाई को, डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से कहा कि इस विधेयक में ईरान और हिज़्बुल्लाह पर प्रतिबंध भी जोड़े जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि ये कदम जोड़े जाते हैं तो यह "बहुत बड़ी बात" होगी।</p>
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indiatoday.in

<p>नए विधेयक में रूसी टैंकरों के उस "शैडो फ्लीट" पर भी प्रतिबंध लगाया जाएगा जो पश्चिमी समुद्री सेवाओं पर निर्भर नहीं है। इसके अलावा, रूसी संघ के केंद्रीय बैंक सहित रूसी वित्तीय संस्थानों और रूस की सबसे बड़ी सरकारी स्वामित्व वाली ऊर्जा परियोजनाओं (जैसे यमल एलएनजी और आर्कटिक एलएनजी 1, 2 और 3) पर भी प्रतिबंध लगाए जाएंगे।</p>
<p>यह विधेयक उन देशों को छूट देता है जो रूस के प्राकृतिक गैस निर्यात का 15% से कम आयात करते हैं और उस आयात को कम करने के लिए आवश्यक कदम उठा रहे हैं। जापान, फ्रांस, हंगरी और बेल्जियम इस छूट का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विश्व</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 11:01:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारतीयों के पीछे क्यों पड़ गया है थाईलैंड, 11 नई यात्रा शर्तें लागू</title>
                                    <description><![CDATA[<p>वीज़ा ऑन अराइवल बंद किए जाने के एक महीने बाद, थाईलैंड ने भारतीय यात्रियों के लिए नई ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। इसके तहत, थाईलैंड की यात्रा करने वाले भारतीयों के लिए 11 आवश्यक शर्तों का पालन करना अनिवार्य है। अगर आप भी बीच और रोमांच के शौकीन हैं और थाईलैंड घूमने की योजना बना रहे हैं, तो ज़रा रुक जाइए! थाई सरकार ने हाल ही में भारतीय यात्रियों के लिए अपने नियमों में बड़ा बदलाव किया है। बैंकॉक में अचानक भारतीय दूतावास की इस 11-सूत्रीय सलाह से कई यात्री चिंतित हो गए हैं।</p>
<p>आइए, बहुत ही सरल शब्दों में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/world/why-is-thailand-lagging-behind-indians-11-new-travel-conditions/article-2510"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/thailand-travel-guidelines.webp" alt=""></a><br /><p>वीज़ा ऑन अराइवल बंद किए जाने के एक महीने बाद, थाईलैंड ने भारतीय यात्रियों के लिए नई ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। इसके तहत, थाईलैंड की यात्रा करने वाले भारतीयों के लिए 11 आवश्यक शर्तों का पालन करना अनिवार्य है। अगर आप भी बीच और रोमांच के शौकीन हैं और थाईलैंड घूमने की योजना बना रहे हैं, तो ज़रा रुक जाइए! थाई सरकार ने हाल ही में भारतीय यात्रियों के लिए अपने नियमों में बड़ा बदलाव किया है। बैंकॉक में अचानक भारतीय दूतावास की इस 11-सूत्रीय सलाह से कई यात्री चिंतित हो गए हैं।</p>
<p>आइए, बहुत ही सरल शब्दों में समझते हैं कि थाईलैंड का रवैया अचानक क्यों बदल गया है और अब आपको किन बातों का ध्यान रखने की ज़रूरत है।</p>
<p>थाईलैंड ने यह कदम किसी दुश्मनी की वजह से नहीं, बल्कि अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए उठाया है। इसके पीछे 3 मुख्य कारण हैं...</p>
<p><strong><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/thailand-travel-guidelines-2.webp" alt="thailand-travel-guidelines-2" width="1280" height="720"></img></strong></p>
<p><strong>फर्जी पर्यटकों और 'नौकरी घोटालों' पर सख्त कार्रवाई: </strong>हाल के समय में, म्यांमार और कंबोडिया की सीमा से लगे थाईलैंड के इलाकों में अवैध साइबर सिंडिकेट (फर्जी कॉल सेंटर) का नेटवर्क फैल गया है। कई लोग टूरिस्ट वीज़ा या वीज़ा छूट का फायदा उठाकर वहां यात्रा करते हैं, अवैध रूप से काम करने लगते हैं या इन घोटालों का शिकार बन जाते हैं। सरकार मानव तस्करी और अवैध रोजगार को रोकना चाहती है।</p>
<p><strong>ओवरस्टे की समस्या: </strong>कई लोग घूमने के बहाने वहां जाते हैं और तय समय सीमा समाप्त होने के बाद भी छिपकर वहीं रहते हैं।</p>
<p><strong>सिस्टम का डिजिटलीकरण: </strong>थाईलैंड अब हर आगंतुक का सटीक रिकॉर्ड रखने के लिए पुराने कागज़ी फॉर्म (TM6) को पूरी तरह हटाकर सुरक्षा जांच को स्वचालित और डिजिटल बना रहा है। नई दिल्ली स्थित थाई दूतावास द्वारा जारी नई गाइडलाइंस के अनुसार, भारतीय यात्रियों को थाईलैंड पहुंचने से पहले ये 6 आवश्यक शर्तें पूरी करनी होंगी।</p>
<p><strong>6 महीने तक वैध पासपोर्ट: </strong>आपका पासपोर्ट भारत से प्रस्थान की तारीख से कम से कम 6 महीने तक वैध होना चाहिए।</p>
<p><strong>कन्फर्म रिटर्न टिकट और होटल बुकिंग</strong>: आपको इमिग्रेशन काउंटर पर अपनी कन्फर्म रिटर्न फ्लाइट टिकट और अपने ठहरने (होटल/रिसॉर्ट) के वैध दस्तावेज़ दिखाना अनिवार्य होगा। फर्जी या 'ओपन टिकट' अब स्वीकार नहीं किए जाएंगे।</p>
<p><strong>20,000 बाहत नकद (THB): </strong>मीडिया सूत्रों के अनुसार, यदि आप वीज़ा ऑन अराइवल (VOA) या वीज़ा वेवर के तहत यात्रा कर रहे हैं, तो आपके पास प्रति यात्री कम से कम 20,000 थाई बाहत (या उसके बराबर विदेशी मुद्रा) नकद होना चाहिए। इसका उद्देश्य आपकी वित्तीय क्षमता का आकलन करना है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/thailand-travel-guidelines-4-(1).webp" alt="thailand-travel-guidelines-4 (1)" width="1280" height="720"></img>
hindi.business-standard.com

<p><strong>व्यक्तिगत दस्तावेज़:</strong> यदि आप परिवार या समूह के साथ यात्रा कर रहे हैं, तब भी प्रत्येक सदस्य (बच्चों सहित) के पास अपने दस्तावेज़ों की अलग प्रति होना आवश्यक है।</p>
<p>इस नए नियम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा TDAC है। अब प्रत्येक भारतीय को थाईलैंड पहुंचने से 72 घंटे पहले ऑनलाइन पोर्टल (tdac.immigration.go.th) के माध्यम से अपनी पूरी जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज करनी होगी।</p>
<p><strong>TDAC कैसे काम करता है?:</strong> फॉर्म भरने के बाद आपको एक QR कोड मिलेगा। इस QR कोड को अपने फोन में सुरक्षित रखें या उसका प्रिंट निकाल लें। थाई एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन अधिकारी इस कोड को स्कैन करेंगे। इसके बिना आपकी बोर्डिंग अस्वीकार की जा सकती है।</p>
<p>आगे बढ़ने से पहले, आपको याद दिला दें कि इसी वर्ष मई महीने में थाईलैंड ने भारतीय यात्रियों के लिए वीज़ा अनिवार्य कर दिया था।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/thailand-travel-guidelines-3.webp" alt="thailand-travel-guidelines-3" width="1280" height="720"></img></p>
<p>एडवाइजरी में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि आपके पास थाईलैंड में नौकरी का प्रस्ताव है, तो पर्यटक मार्ग या वीज़ा छूट का उपयोग न करें। यदि पकड़े गए, तो आपको भारी जुर्माना, जेल और थाईलैंड से स्थायी निर्वासन का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p>मुख्य बात यह है कि यदि आप वास्तव में घूमने के लिए ही जा रहे हैं और आपके सभी दस्तावेज़ सही हैं, तो चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है। डिजिटल प्रणाली के साथ, वैध दस्तावेज़ रखने वाले लोगों के लिए इमिग्रेशन क्लियरेंस अब काफी तेज़ हो गया है। बस आप इस अनुसार पूरी तैयारी करें और बिना चिंता के अपनी यात्रा का आनंद लें!</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विश्व</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 20:18:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भूटान ने भारत के E20 फ्यूल के प्रस्ताव को ठुकराया, क्या है इसका कारण</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">भारत में इथेनॉल मिश्रित ईंधन (E20 पेट्रोल) को बढ़ावा देने की नीति के बीच पड़ोसी देश भूटान ने भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) की ओर से दिए गए E20 पेट्रोल आपूर्ति प्रस्ताव को फिलहाल स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। भूटान का कहना है कि उसके मौजूदा ईंधन भंडारण ढांचे और भौगोलिक परिस्थितियों में E20 पेट्रोल का सुरक्षित उपयोग और भंडारण संभव नहीं है।</p>
<p>भूटान के व्यापार विभाग के अनुसार, देश फिलहाल भारत से पारंपरिक (सामान्य) पेट्रोल की आपूर्ति जारी रखना चाहता है। अधिकारियों ने भारतीय कंपनियों से अनुरोध किया है कि जब तक भारत में सामान्य पेट्रोल उपलब्ध</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/world/bhutan-rejected-indias-e20-fuel-proposal-what-is-the-reason/article-2506"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/cover-photo-e20.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">भारत में इथेनॉल मिश्रित ईंधन (E20 पेट्रोल) को बढ़ावा देने की नीति के बीच पड़ोसी देश भूटान ने भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) की ओर से दिए गए E20 पेट्रोल आपूर्ति प्रस्ताव को फिलहाल स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। भूटान का कहना है कि उसके मौजूदा ईंधन भंडारण ढांचे और भौगोलिक परिस्थितियों में E20 पेट्रोल का सुरक्षित उपयोग और भंडारण संभव नहीं है।</p>
<p>भूटान के व्यापार विभाग के अनुसार, देश फिलहाल भारत से पारंपरिक (सामान्य) पेट्रोल की आपूर्ति जारी रखना चाहता है। अधिकारियों ने भारतीय कंपनियों से अनुरोध किया है कि जब तक भारत में सामान्य पेट्रोल उपलब्ध है, तब तक भूटान को उसी की आपूर्ति की जाए।</p>
<p><span><strong>क्या है भूटान की सबसे बड़ी चिंता?</strong></span></p>
<p>भूटान का कहना है कि E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल होता है और इथेनॉल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह वातावरण से नमी (पानी) आसानी से सोख लेता है। इसे वैज्ञानिक भाषा में <strong>हाइग्रोस्कोपिक (Hygroscopic)</strong> गुण कहा जाता है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/e20-2.jpg" alt="E20 2" width="1280" height="720"></img>
hindustan.com

<p>भूटान के अधिकांश भूमिगत ईंधन टैंक काफी पुराने हैं और पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां भूजल के रिसाव की संभावना बनी रहती है। यदि ऐसे टैंकों में E20 पेट्रोल रखा गया तो इथेनॉल पानी को अवशोषित कर लेगा, जिससे ईंधन की गुणवत्ता खराब हो सकती है और उसका रासायनिक संतुलन बदल सकता है। इससे वाहनों के इंजन में खराबी आने या वाहन के ठीक से न चलने का खतरा बढ़ सकता है।</p>
<p><span><strong>पहाड़ी भूगोल भी बना बड़ी वजह</strong></span></p>
<p>भूटान के अधिकारियों का कहना है कि देश का अधिकांश हिस्सा पहाड़ी है, जहां वाहनों को अधिक शक्ति और भरोसेमंद प्रदर्शन की जरूरत होती है। ऐसे इलाकों में नमी और भूजल रिसाव की समस्या भी अधिक रहती है, जिससे E20 पेट्रोल के दूषित होने का खतरा बढ़ जाता है। यही कारण है कि मौजूदा परिस्थितियों में इस ईंधन को अपनाना व्यावहारिक नहीं माना गया है।</p>
<p><span><strong>स्थायी इनकार नहीं, पहले चाहिए तैयारी</strong></span></p>
<p>भूटान ने स्पष्ट किया है कि वह हमेशा के लिए E20 पेट्रोल का विरोध नहीं कर रहा है। यदि भविष्य में भारत पूरी तरह इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल अपनाता है, तो भूटान चाहता है कि उसे पहले से सूचना दी जाए ताकि वह अपने ईंधन भंडारण टैंक, डिपो, परिवहन व्यवस्था और लीक-प्रूफ स्टोरेज सिस्टम को आधुनिक बना सके। साथ ही उसने भारतीय ऑयल कंपनियों से इस बदलाव में तकनीकी सहयोग की भी अपेक्षा जताई है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/e20-3.jpg" alt="E20 3" width="1280" height="720"></img>
navbharattimes

<p><span><strong>भारत में क्यों लागू किया जा रहा है E20 पेट्रोल?</strong></span></p>
<p>भारत सरकार ने कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने, विदेशी मुद्रा की बचत, प्रदूषण में कमी और गन्ना व मक्का जैसे फसलों से बनने वाले इथेनॉल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से E20 पेट्रोल कार्यक्रम शुरू किया है। देश के अधिकांश हिस्सों में अब E20 पेट्रोल उपलब्ध कराया जा चुका है और सरकार इसे स्वच्छ ईंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानती है।</p>
<p>हालांकि भूटान के इस फैसले ने यह भी दिखाया है कि स्वच्छ ईंधन अपनाने के लिए केवल नई नीति ही नहीं, बल्कि मजबूत भंडारण व्यवस्था और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप बुनियादी ढांचा भी उतना ही जरूरी है</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विश्व</category>
                                    

                <link>https://hindi.khabarchhe.com/world/bhutan-rejected-indias-e20-fuel-proposal-what-is-the-reason/article-2506</link>
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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 19:00:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका में पुजारी कितना कमाते हैं? जानिए एक पूजा के लिए उन्हें कितने डॉलर मिलते हैं</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अमेरिका में रहने वाले भारतीय समुदाय में धार्मिक परंपराओं और धार्मिक अनुष्ठानों को आज भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है जितना भारत में। यही कारण है कि मंदिरों और धार्मिक कार्यक्रमों में पंडितों की मांग लगातार बढ़ रही है। कई लोगों के मन में यह सवाल भी आता है कि अमेरिका में पूजा कराने वाले पंडित कितनी कमाई करते हैं और वे वहां कैसे पहुंचते हैं।</p>
<p>दरअसल, अमेरिका में पंडितों को किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के लिए काफी बड़ी फीस मिलती है। उदाहरण के तौर पर, भगवान सत्यनारायण की कथा और पूजा कराने के लिए आमतौर पर 300 डॉलर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/world/how-much-do-priests-earn-in-america-know-how-many/article-2486"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/hindu-priests-america1.webp" alt=""></a><br /><p>अमेरिका में रहने वाले भारतीय समुदाय में धार्मिक परंपराओं और धार्मिक अनुष्ठानों को आज भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है जितना भारत में। यही कारण है कि मंदिरों और धार्मिक कार्यक्रमों में पंडितों की मांग लगातार बढ़ रही है। कई लोगों के मन में यह सवाल भी आता है कि अमेरिका में पूजा कराने वाले पंडित कितनी कमाई करते हैं और वे वहां कैसे पहुंचते हैं।</p>
<p>दरअसल, अमेरिका में पंडितों को किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के लिए काफी बड़ी फीस मिलती है। उदाहरण के तौर पर, भगवान सत्यनारायण की कथा और पूजा कराने के लिए आमतौर पर 300 डॉलर से 350 डॉलर के बीच शुल्क लिया जाता है। इसके अलावा, कई मंदिरों में पूजा कराने के लिए 100 डॉलर से 150 डॉलर तक का मंदिर शुल्क अलग से देना पड़ सकता है। श्रद्धालु अपनी पूजा सामग्री (फल, फूल, प्रसाद, कलश आदि) स्वयं ला सकते हैं, या फिर पंडित अथवा मंदिर प्रबंधन अतिरिक्त शुल्क लेकर इसकी व्यवस्था भी कर देता है।</p>
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<p>जब अमेरिका में रहने वाले भारतीय नई कार, नया घर खरीदते हैं या नया व्यवसाय शुरू करते हैं, तो वे शुभ शुरुआत के लिए पूजा करवाना पसंद करते हैं। नई कार की पूजा, गृह प्रवेश, नामकरण संस्कार, विवाह, मुंडन संस्कार और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पंडितों को अलग-अलग शुल्क दिया जाता है। गृह प्रवेश पूजा जैसे धार्मिक अनुष्ठानों का खर्च कभी-कभी सैकड़ों डॉलर तक हो सकता है। वहीं विवाह जैसे बड़े कार्यक्रमों के लिए यह शुल्क इससे भी अधिक हो सकता है।</p>
<p>नवरात्रि, श्रावण, जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी, राम नवमी और दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान अमेरिका में पुजारियों की मांग काफी बढ़ जाती है। इस समय मंदिरों में विशेष पूजा, हवन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। पंडितों को अक्सर एक ही दिन में कई कार्यक्रमों में शामिल होना पड़ता है। बढ़ते भारतीय समुदाय के कारण धार्मिक सेवाओं की आवश्यकता भी बढ़ रही है, जिसके चलते कई मंदिरों और धार्मिक संस्थाओं को प्रशिक्षित पुजारियों की जरूरत पड़ती है।</p>
<p>पंडित आमतौर पर R-1 वीज़ा पर धार्मिक सेवाएं देने के लिए अमेरिका जाते हैं। यह वीज़ा उन लोगों के लिए बनाया गया है जो किसी मान्यता प्राप्त धार्मिक संगठन के लिए धार्मिक सेवाएं देने या धार्मिक कर्तव्यों का पालन करने के उद्देश्य से संयुक्त राज्य अमेरिका की यात्रा करते हैं। R-1 वीज़ा प्राप्त करने के लिए आवेदक को यह साबित करना आवश्यक होता है कि वे किसी धार्मिक संगठन से जुड़े हुए हैं और उनके पास पर्याप्त धार्मिक शिक्षा, प्रशिक्षण तथा अनुभव है। कई मामलों में, संबंधित धार्मिक संगठन या मंदिर को यह भी साबित करना पड़ता है कि उन्हें उस व्यक्ति की सेवाओं की आवश्यकता है।</p>
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hindi.news18.com

<p>धार्मिक सेवाओं के लिए यात्रा करने वाले लोगों को अपनी योग्यता और प्रशिक्षण की पुष्टि करने वाले दस्तावेज़ जमा करने होते हैं। कई संस्थाएं उम्मीदवार के ज्ञान, संस्कृत उच्चारण, वेदपाठ, धार्मिक अनुष्ठानों और धार्मिक प्रक्रियाओं की भी जांच करती हैं। इसके बाद वीज़ा प्रक्रिया पूरी की जाती है। हालांकि, यह प्रक्रिया प्रत्येक संस्था और परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। अमेरिका जाने वाले पुजारियों के लिए धार्मिक ज्ञान के साथ-साथ अंग्रेज़ी का ज्ञान और स्थानीय संस्कृति की समझ भी लाभदायक साबित होती है।</p>
<p>कमाई इस बात पर निर्भर करती है कि वे किसी मंदिर में कार्यरत हैं या स्वतंत्र रूप से सेवाएं देते हैं। बड़े शहरों और अधिक भारतीय आबादी वाले क्षेत्रों में नियमित पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों के कारण उनकी आय काफी अधिक हो सकती है। कई पुजारी मंदिर से मिलने वाले वेतन के अलावा निजी पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों से भी अतिरिक्त आय अर्जित करते हैं।</p>
<p>संयुक्त राज्य अमेरिका में भारतीय समुदाय के बीच धार्मिक परंपराओं को बनाए रखने में पंडित महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सत्यनारायण कथा से लेकर गृह प्रवेश, विवाह और त्योहारों तक, उनकी सेवाओं की काफी मांग रहती है। R-1 वीज़ा पर अमेरिका आने वाले ये पंडित अपने धार्मिक ज्ञान और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से भारतीय प्रवासियों को उनकी संस्कृति और परंपराओं से जोड़े रखने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विश्व</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 19:30:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चाइल्ड इन्वेस्टमेंट अकाउंट में ताइवान सरकार बच्चों के लिए निवेश खाते खोलेगी, सरकार खुद 5,000 डॉलर जमा करेगी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>ताइवान सरकार ने एक बड़ी घोषणा की है कि 6 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए निवेश खाते खोले जाएंगे। ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने इस नीति पैकेज की घोषणा की है। इस योजना के तहत सरकार प्रत्येक बच्चे को मासिक 5,000 ताइवानी डॉलर (लगभग 15,000 भारतीय रुपये) का भत्ता देगी। आइए जानते हैं कि आखिर ताइवान सरकार को ऐसा निर्णय क्यों लेना पड़ा।</p>
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aajtak.in

<p>एक समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, यह पहल राष्ट्रपति लाई चिंग-ते और उनके प्रशासन द्वारा बुधवार को घोषित 18-सूत्रीय नीति पैकेज का एक हिस्सा है। इसका उद्देश्य ताइवान में घटती</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/world/taiwan-government-will-open-investment-accounts-for-children-in-child/article-2485"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-07/taiwan-child-investment-plan.webp" alt=""></a><br /><p>ताइवान सरकार ने एक बड़ी घोषणा की है कि 6 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए निवेश खाते खोले जाएंगे। ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने इस नीति पैकेज की घोषणा की है। इस योजना के तहत सरकार प्रत्येक बच्चे को मासिक 5,000 ताइवानी डॉलर (लगभग 15,000 भारतीय रुपये) का भत्ता देगी। आइए जानते हैं कि आखिर ताइवान सरकार को ऐसा निर्णय क्यों लेना पड़ा।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/taiwan-child-investment-plan4.webp" alt="taiwan-child-investment-plan4" width="1280" height="720"></img>
aajtak.in

<p>एक समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, यह पहल राष्ट्रपति लाई चिंग-ते और उनके प्रशासन द्वारा बुधवार को घोषित 18-सूत्रीय नीति पैकेज का एक हिस्सा है। इसका उद्देश्य ताइवान में घटती जन्म दर पर नियंत्रण पाकर परिवारों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। हालांकि, अब तक ताइवान में बचत खाते केवल निम्न और मध्यम वर्ग के परिवारों के बच्चों के लिए ही उपलब्ध थे, लेकिन नए कार्यक्रम के तहत यह सुविधा 18 वर्ष से कम आयु के सभी बच्चों तक विस्तारित कर दी गई है।</p>
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<p>ताइवान सरकार की चाइल्ड इन्वेस्टमेंट अकाउंट योजना के तहत, 18 वर्ष से कम आयु के नाबालिगों को मासिक 5,000 नए ताइवानी डॉलर (ताइवान मासिक बाल भत्ता) का बाल भत्ता मिलेगा। रिपोर्ट के अनुसार, 6 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए खोले जाने वाले निवेश खातों में 2,500 ताइवानी डॉलर सीधे जमा किए जाएंगे, और यह प्रक्रिया स्वतः होगी।</p>
<p>सरकार इन निवेश खातों के संचालन के लिए पेशेवर लोगों की नियुक्ति करेगी, जिनकी निगरानी फंड मैनेजरों द्वारा की जाएगी। इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि ये खाते दो वर्ष की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर मिलने वाली ब्याज दरों के बराबर गारंटीकृत ब्याज दर प्रदान करेंगे, जो बच्चों के भविष्य के लिए लाभदायक होगी।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/taiwan-child-investment-plan2.webp" alt="taiwan-child-investment-plan2" width="1280" height="720"></img>
taipeitimes.com

<p>ताइवान में घटती जन्म दर सरकार के लिए एक बड़ी चिंता बनती जा रही है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में देश की प्रजनन दर केवल 0.86 थी, जिससे ताइवान दुनिया के सबसे कम प्रजनन दर वाले देशों में शामिल हो सकता है। राष्ट्रपति द्वारा की गई घोषणा के अनुसार, यह चाइल्ड इन्वेस्टमेंट अकाउंट योजना नवंबर 2026 में होने वाले चुनावों से पहले लागू की जाएगी।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-07/taiwan-child-investment-plan3.webp" alt="taiwan-child-investment-plan3" width="1280" height="720"></img>
taipeitimes.com

<p>भारत में भी ऐसी योजनाएं शुरू करने को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि, सुकन्या समृद्धि योजना और सार्वजनिक भविष्य निधि (PPF) जैसी बचत योजनाएं पहले से मौजूद हैं, लेकिन सरकार द्वारा सीधे निवेश पर आधारित बाल निधि मॉडल अभी तक व्यापक रूप से लागू नहीं किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत जैसे बड़े देश में बच्चों के भविष्य के लिए ऐसे मॉडल को लागू किया जाए, तो यह मध्यम वर्ग और निम्न-मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए एक बड़ा सहारा साबित हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विश्व</category>
                                    

                <link>https://hindi.khabarchhe.com/world/taiwan-government-will-open-investment-accounts-for-children-in-child/article-2485</link>
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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 17:43:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इस यूरोपीय देश में अज़ान पर लग सकती है रोक, नमाज़ को लेकर बड़ा फैसला!</title>
                                    <description><![CDATA[<p>यूरोप में बढ़ते आव्रजन और इस्लामीकरण पर चल रही बहस के बीच, डेनमार्क अब एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। देश की सरकार मस्जिदों से लाउडस्पीकर के माध्यम से नमाज़ के लिए दी जाने वाली अज़ान पर कानूनी प्रतिबंध लगाने की संभावना पर विचार कर रही है। डेनमार्क के आव्रजन मंत्री मॉर्टन बोडस्कोव ने कहा कि नमाज़ के लिए दी जाने वाली अज़ान की आवाज़ डेनमार्क की पहचान का हिस्सा नहीं है और लोगों को ऐसा महसूस नहीं होना चाहिए कि वे किसी यूरोपीय शहर के बजाय इस्लामाबाद के किसी शहर में पहुंच गए हैं।</p>
<p>बोडस्कोव ने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/world/this-european-country-is-preparing-to-ban-azaan-for-prayers/article-2462"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/1615.webp" alt=""></a><br /><p>यूरोप में बढ़ते आव्रजन और इस्लामीकरण पर चल रही बहस के बीच, डेनमार्क अब एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। देश की सरकार मस्जिदों से लाउडस्पीकर के माध्यम से नमाज़ के लिए दी जाने वाली अज़ान पर कानूनी प्रतिबंध लगाने की संभावना पर विचार कर रही है। डेनमार्क के आव्रजन मंत्री मॉर्टन बोडस्कोव ने कहा कि नमाज़ के लिए दी जाने वाली अज़ान की आवाज़ डेनमार्क की पहचान का हिस्सा नहीं है और लोगों को ऐसा महसूस नहीं होना चाहिए कि वे किसी यूरोपीय शहर के बजाय इस्लामाबाद के किसी शहर में पहुंच गए हैं।</p>
<p>बोडस्कोव ने डेनिश समाचार एजेंसी से कहा, 'नमाज़ के लिए दी जाने वाली अज़ान डेनमार्क की छतों के ऊपर सुनाई नहीं देनी चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि सरकार यह तय करने के लिए कानूनी समीक्षा कर रही है कि ऐसा प्रतिबंध देश के संविधान के दायरे में आता है या नहीं।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/17142.webp" alt="1714" width="1280" height="720"></img>
inextlive.com

<p>हालांकि, फिलहाल यह केवल एक प्रस्ताव है और इसे अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। डेनिश संविधान सार्वजनिक रूप से धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता की गारंटी देता है, इसलिए सरकार को ऐसे कानून की संवैधानिक वैधता का भी आकलन करना होगा।</p>
<p>डेनमार्क में यह बहस नई नहीं है। स्थानीय शोर-नियंत्रण नियम पहले से ही राजधानी कोपेनहेगन सहित कई क्षेत्रों में लाउडस्पीकर पर अज़ान के उपयोग पर प्रतिबंध लगाते हैं। इसके अलावा, 2023 में सरकार ने धार्मिक ग्रंथों के अपमान पर प्रतिबंध लगाने वाला कानून बनाया था। क़ुरान जलाने की घटनाओं के बाद कई मुस्लिम देशों ने तीखी नाराज़गी जताई थी, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया था।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/1814.webp" alt="1814" width="1280" height="720"></img>
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<p>डेनमार्क में लगभग 2,70,000 मुसलमान रहते हैं और पूरे देश में लगभग 100 मस्जिदें हैं। ऐसे में अज़ान पर संभावित प्रतिबंध को मुस्लिम समुदाय के लिए एक बड़े निर्णय के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p>हाल के वर्षों में कई यूरोपीय देशों में आव्रजन, हिजाब, धार्मिक पहचान और सार्वजनिक धार्मिक गतिविधियों को लेकर बहस तेज़ हुई है। कई देशों में दक्षिणपंथी और आव्रजन-विरोधी समूहों ने दावा किया है कि बड़े पैमाने पर आव्रजन यूरोपीय सांस्कृतिक पहचान को प्रभावित कर रहा है।</p>
<p>बोडस्कोव ने हाल ही में एक सोशल मीडिया पोस्ट में भी कहा था कि डेनमार्क में रहने का कानूनी अधिकार न रखने वाले विदेशियों को चरणबद्ध तरीके से देश से निष्कासित किया जाएगा। उन्होंने इसे सरकार की सख्त आव्रजन नीति का हिस्सा बताया।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/1912.webp" alt="1912" width="1280" height="720"></img>
prabhatkhabar.com

<p>सरकार प्रतिबंध की तैयारी कर रही है, लेकिन इसे लागू करना आसान नहीं होगा। संविधान धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है, और किसी भी नए कानून को अदालत में चुनौती दी जा सकती है। इसलिए सरकार फिलहाल कानूनी विशेषज्ञों की सलाह ले रही है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेट्टे फ्रेडरिक्सेन की सरकार पहले भी अपनी सख्त आव्रजन नीतियों को लेकर सुर्खियों में रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विश्व</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 12:23:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वेनेज़ुएला में 7.5 तीव्रता के भूकंप से चारों तरफ तबाही के दृश्य, हजारों मौतों की आशंका; भारत ने NDRF टीम भेजी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>वेनेज़ुएला में लगातार दो शक्तिशाली भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। बुधवार को देश के उत्तरी तट के पास एक शक्तिशाली भूकंप आया, जिसके कारण राजधानी कराकास में कई इमारतें ढह गईं। राजधानी में कुछ ही सेकंड के अंतराल में दो भूकंप के झटके महसूस किए गए। पहला भूकंप 7.2 तीव्रता का था, जबकि दूसरा 7.5 तीव्रता का था। यह भूकंप मोंटाल्बान से 28 किलोमीटर (17.3 मील) उत्तर-पश्चिम में आया था, जो देश की कुछ सबसे बड़ी रिफाइनरियों का केंद्र है। भूकंप के कारण पूरे वेनेज़ुएला में इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रभावित हो गई थी। देश में आपातकाल की स्थिति घोषित</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/world/scenes-of-devastation-all-around-due-to-75-magnitude-earthquake/article-2455"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/venezuela.webp" alt=""></a><br /><p>वेनेज़ुएला में लगातार दो शक्तिशाली भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। बुधवार को देश के उत्तरी तट के पास एक शक्तिशाली भूकंप आया, जिसके कारण राजधानी कराकास में कई इमारतें ढह गईं। राजधानी में कुछ ही सेकंड के अंतराल में दो भूकंप के झटके महसूस किए गए। पहला भूकंप 7.2 तीव्रता का था, जबकि दूसरा 7.5 तीव्रता का था। यह भूकंप मोंटाल्बान से 28 किलोमीटर (17.3 मील) उत्तर-पश्चिम में आया था, जो देश की कुछ सबसे बड़ी रिफाइनरियों का केंद्र है। भूकंप के कारण पूरे वेनेज़ुएला में इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रभावित हो गई थी। देश में आपातकाल की स्थिति घोषित कर दी गई है।</p>
<p>US जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के अनुसार, भूकंप की प्रारंभिक तीव्रता 7.5 मापी गई थी। यह मुख्य भूकंप 7.2 तीव्रता के फोरशॉक या पूर्व-झटके के केवल 40 सेकंड बाद आया था। इसके बाद, डरे हुए निवासी अपने परिवारों और पालतू जानवरों के साथ इमारतों को खाली करते और सड़कों पर एकत्र होते देखे गए।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/venezuela1.webp" alt="venezuela1" width="1280" height="720"></img>
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<p>US सुनामी चेतावनी केंद्रों ने कहा कि सुनामी का कोई खतरा नहीं है, और प्यूर्टो रिको तथा वर्जिन आइलैंड जैसे क्षेत्रों के लिए जारी खतरनाक लहरों की प्रारंभिक चेतावनियाँ वापस ले ली गई हैं। वेनेज़ुएला के कार्यकारी राष्ट्रपति ने भूकंप में घायल हुए लोगों के उपचार के लिए डॉक्टरों और नर्सों को स्थानीय अस्पतालों और आपातकालीन कक्षों में रिपोर्ट करने का निर्देश दिया है।</p>
<p>वेनेज़ुएला के समाचारपत्र 'एल नेसियोनाल' के अनुसार, रोड्रिग्ज़ ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा, 'मैं डॉक्टरों, नर्सों और सभी स्वास्थ्यकर्मियों से काम पर लौटने की अपील करता हूं, ताकि हम अस्पतालों और निजी स्वास्थ्य केंद्रों के आपातकालीन कक्षों में लाए जा रहे लोगों का उपचार कर सकें।'</p>
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<p>रोड्रिग्ज़ ने कहा कि राष्ट्रीय, राज्य और नगरपालिका अधिकारी आपात स्थिति से निपटने के लिए काम कर रहे हैं और सबसे अधिक प्रभावित राज्यों को प्राथमिक सहायता भेजी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वेनेज़ुएला में आए भीषण भूकंप से हुई तबाही पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इस घटना पर गहरी संवेदना व्यक्त की और इस कठिन समय में लोगों के साथ खड़े रहने का आश्वासन दिया।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, 'वेनेज़ुएला में आए भीषण भूकंप से हुई तबाही से मैं अत्यंत दुखी हूं। भारत की जनता की ओर से मैं वेनेज़ुएला की सरकार और जनता के प्रति, विशेष रूप से अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति, गहरी संवेदना व्यक्त करता हूँ। हम घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करते हैं और इस कठिन समय में प्रभावित सभी लोगों के साथ मजबूती से खड़े हैं। भारत हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है।'</p>
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<p>वेनेज़ुएला में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने राहत और बचाव कार्यों में सहायता के लिए तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। सूत्रों के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में भारी तबाही और व्यापक जन-धन हानि की आशंका के बीच भारत सरकार स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है। इसी संदर्भ में, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की एक विशेष टीम को वेनेज़ुएला भेजने की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।</p>
<p>रिपोर्टों के अनुसार, सरकार ने NDRF को सतर्क रहने और संभावित अंतरराष्ट्रीय राहत अभियान के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया है। भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य चल रहे हैं, और भारत शीघ्र मानवीय सहायता उपलब्ध कराने की संभावनाएं तलाश रहा है।</p>
<p>सूत्रों का कहना है कि यदि अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तो अत्याधुनिक खोज एवं बचाव उपकरणों, चिकित्सा सामग्री और प्रशिक्षित विशेषज्ञों से लैस एक विशेष NDRF टीम वेनेज़ुएला भेजी जा सकती है। टीम का मुख्य उद्देश्य मलबे में फँसे लोगों को बचाना, राहत पहुंचाना और स्थानीय एजेंसियों के साथ मिलकर बचाव कार्यों में सहायता करना होगा।</p>
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<p>भारत ने आपदाओं के दौरान वैश्विक मानवीय प्रतिक्रिया में लगातार सक्रिय भूमिका निभाई है। भारतीय बचाव दलों और विशेषज्ञ टीमों ने कई देशों में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत प्रयासों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। परिणामस्वरूप, वेनेज़ुएला में संभावित NDRF मिशन को भारत की मानवीय प्रतिबद्धता और आपदा प्रबंधन क्षमताओं के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p>हालांकि, अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों का संकेत है कि तैयारियों को तेज कर दिया गया है और स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। USGS के अनुसार, ये दोनों भूकंप कराकास के पश्चिम में स्थित याराकुय राज्य में आए थे। पहला भूकंप 7.2 तीव्रता का था और 22 किलोमीटर (14 मील) की गहराई पर आया था। एक मिनट से भी कम समय में दूसरा भूकंप 7.5 तीव्रता का आया, जिसकी गहराई लगभग 10 किलोमीटर (6 मील) थी।</p>
<p>भूकंप का केंद्र राजधानी के बाहर था, लेकिन कराकास तथा मध्य और पश्चिमी वेनेज़ुएला में इसके झटके महसूस किए गए, जिनमें काराबोबो, मिरांडा, ला गुएरा और त्रुजिलो राज्य शामिल हैं। पड़ोसी कोलंबिया और कराकास से 1,700 किलोमीटर (1,050 मील) दूर ब्राज़ील के अमेज़न क्षेत्र में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विश्व</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 15:39:29 +0530</pubDate>
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                <title>कोरोना महामारी दुनिया में कैसे फैला… इस पर हुआ सबसे बड़ा खुलासा, दावा- अमेरिकी वैज्ञानिक ने ही इसके लिए की थी फंडिंग</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन।</strong> अमेरिका की पूर्व राष्ट्रीय खुफिया प्रमुख तुलसी गबार्ड ने अपने कार्यकाल के आखिरी दिनों में कोरोना महामारी की उत्पत्ति को लेकर बड़ा दावा किया है। गबार्ड ने कुछ गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक करते हुए आरोप लगाया कि अमेरिका के चर्चित वैज्ञानिक डॉ. एंथनी फॉसी ने चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में ऐसी रिसर्च के लिए सरकारी फंडिंग उपलब्ध कराई थी, जिसमें कोरोना वायरस को अधिक खतरनाक बनाने पर काम किया जा रहा था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महामारी फैलने के बाद वायरस की संभावित लैब उत्पत्ति से जुड़े तथ्यों को छिपाने की कोशिश की गई और फॉसी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/world/the-biggest-revelation-on-how-the-corona-epidemic-spread-in/article-2424"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/corona.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>वाशिंगटन।</strong> अमेरिका की पूर्व राष्ट्रीय खुफिया प्रमुख तुलसी गबार्ड ने अपने कार्यकाल के आखिरी दिनों में कोरोना महामारी की उत्पत्ति को लेकर बड़ा दावा किया है। गबार्ड ने कुछ गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक करते हुए आरोप लगाया कि अमेरिका के चर्चित वैज्ञानिक डॉ. एंथनी फॉसी ने चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में ऐसी रिसर्च के लिए सरकारी फंडिंग उपलब्ध कराई थी, जिसमें कोरोना वायरस को अधिक खतरनाक बनाने पर काम किया जा रहा था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महामारी फैलने के बाद वायरस की संभावित लैब उत्पत्ति से जुड़े तथ्यों को छिपाने की कोशिश की गई और फॉसी ने अमेरिकी संसद के सामने शपथ लेकर भी गलत बयान दिया।</p>
<p>कोरोना महामारी के दौरान डॉ. एंथनी फॉसी अमेरिका में सबसे प्रमुख स्वास्थ्य सलाहकारों में शामिल थे। 2020 में जब अमेरिका में कोविड-19 के मामले तेजी से बढ़े, तब तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने महामारी से निपटने में फॉसी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी। हालांकि महामारी के शुरुआती दौर से ही कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर कई सवाल उठते रहे हैं।</p>
<p><strong>वायरस को अधिक ताकतवर बनाने का चल रहा था काम</strong></p>
<p>गबार्ड का आरोप है कि फॉसी ने जिस रिसर्च को फंडिंग दिलाई, वह ‘गेन-ऑफ-फंक्शन रिसर्च’ से जुड़ी थी। यह ऐसी वैज्ञानिक प्रक्रिया होती है, जिसमें किसी वायरस की विशेषताओं में बदलाव कर उसे अधिक संक्रामक या खतरनाक बनाया जाता है। वैज्ञानिकों का तर्क है कि ऐसी रिसर्च से भविष्य में संभावित महामारियों को समझने और वैक्सीन या इलाज विकसित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि इस तरह की रिसर्च को लेकर लंबे समय से विवाद रहा है, क्योंकि यदि सुरक्षा में चूक हो जाए तो संशोधित वायरस के लैब से बाहर निकलने का खतरा भी रहता है। इसी कारण कई देशों में इस तरह के प्रयोगों पर सख्त निगरानी रखी जाती है।</p>
<p>चम<strong>गादड़ों में पाए जाने वाले कोरोना वायरस पर रिसर्च चल रहा था</strong></p>
<p>गबार्ड के मुताबिक, चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में चमगादड़ों में पाए जाने वाले कोरोना वायरस पर इसी तरह की रिसर्च चल रही थी। उनका दावा है कि कोविड-19 महामारी की शुरुआत भी संभवतः इसी लैब से वायरस के दुर्घटनावश बाहर आने के कारण हुई। बता दें कि कोरोना की उत्पत्ति को लेकर दुनिया भर में दो प्रमुख थ्योरी सामने आती रही हैं। पहली, वायरस प्राकृतिक रूप से जानवरों से इंसानों में पहुंचा। दूसरी, वायरस किसी लैब से गलती से बाहर निकला। अब तक किसी भी थ्योरी को अंतिम रूप से साबित नहीं किया जा सका है और कई अमेरिकी एजेंसियां अलग-अलग आकलन पेश कर चुकी हैं।</p>
<p><strong>सवाल तो पहले भी उठाए गए, लेकिन दबा दिये गए</strong></p>
<p>गबार्ड के कार्यालय की ओर से कहा गया है कि महामारी के शुरुआती दौर में कुछ वैज्ञानिकों को आगे कर ऐसी रिपोर्ट तैयार करवाई गई, जिसमें वायरस की प्राकृतिक उत्पत्ति की संभावना को प्रमुखता दी गई। आरोप है कि इससे लैब-लीक थ्योरी को कमजोर दिखाने की कोशिश हुई। गबार्ड का कहना है कि खुफिया एजेंसियों और वैज्ञानिक समुदाय के कुछ लोगों ने इस निष्कर्ष पर सवाल उठाए थे, लेकिन उनकी बातों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। उन्होंने दावा किया कि कई विश्लेषकों पर दबाव बनाया गया और उन्हें किनारे कर दिया गया।</p>
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<p><strong>सच्चाई सामने लाने वालों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा</strong></p>
<p>गबार्ड ने कहा कि व्हिसलब्लोअर्स की गवाही और हाल में सामने आए दस्तावेज इन आरोपों की ओर इशारा करते हैं। उनके अनुसार, ऐसे कई लोग सामने आए जिन्होंने दावा किया कि कोरोना की उत्पत्ति से जुड़े कुछ पहलुओं पर स्वतंत्र रूप से जांच करने वालों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष निकलना अभी बाकी है और इस मामले को लेकर अमेरिका में राजनीतिक बहस लगातार जारी है।</p>
<p><strong>डॉ. फॉसी पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल</strong></p>
<p>डॉ. फॉसी पर इससे पहले भी आरोप लगते रहे हैं कि अमेरिकी सरकार से मिले कुछ शोध अनुदान गैर-लाभकारी संस्था ‘ईकोहेल्थ एलायंस’ के जरिए वुहान लैब तक पहुंचे थे। यह संस्था चमगादड़ों में पाए जाने वाले कोरोना वायरस पर शोध परियोजनाओं से जुड़ी रही है। वहीं, 2021 में अमेरिकी कांग्रेस की सुनवाई के दौरान फॉसी ने कहा था कि उनकी एजेंसी ने वुहान लैब में वायरस को अधिक खतरनाक बनाने वाली रिसर्च के लिए फंडिंग नहीं दी। बाद में सामने आए कुछ दस्तावेजों और कांग्रेस की जांच के आधार पर रिपब्लिकन नेताओं ने उनके इस बयान पर सवाल उठाए।<br />हाल के वर्षों में अमेरिकी कांग्रेस की विभिन्न समितियों और खुफिया एजेंसियों ने भी कोविड-19 की उत्पत्ति से जुड़े कई दस्तावेजों की समीक्षा की है। हालांकि अब तक ऐसा कोई सर्वसम्मत निष्कर्ष सामने नहीं आया है, जिसे सभी एजेंसियां स्वीकार करती हों।</p>
<p><strong>अमेरिकी वैज्ञा</strong><strong>निक लगातार आरोपों से इनकार करते रहे हैं</strong></p>
<p>वहीं, फॉसी लगातार इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं। उनका कहना है कि कोविड-19 की उत्पत्ति को लेकर अभी तक कोई अंतिम और ठोस वैज्ञानिक निष्कर्ष नहीं निकला है। उन्होंने कई बार कहा है कि उपलब्ध सबूतों के आधार पर किसी एक थ्योरी को पूरी तरह सही या गलत नहीं ठहराया जा सकता। बता दें कि तुलसी गबार्ड ट्रम्प प्रशासन में डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस (DNI) के पद पर कार्यरत थीं। उनके अधीन अमेरिका की 18 खुफिया एजेंसियां काम करती थीं। उन्होंने 22 मई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विश्व</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 14:27:01 +0530</pubDate>
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