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                <title>विश्व - Khabarchhe Hindi</title>
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                <title>कोरोना महामारी दुनिया में कैसे फैला… इस पर हुआ सबसे बड़ा खुलासा, दावा- अमेरिकी वैज्ञानिक ने ही इसके लिए की थी फंडिंग</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन।</strong> अमेरिका की पूर्व राष्ट्रीय खुफिया प्रमुख तुलसी गबार्ड ने अपने कार्यकाल के आखिरी दिनों में कोरोना महामारी की उत्पत्ति को लेकर बड़ा दावा किया है। गबार्ड ने कुछ गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक करते हुए आरोप लगाया कि अमेरिका के चर्चित वैज्ञानिक डॉ. एंथनी फॉसी ने चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में ऐसी रिसर्च के लिए सरकारी फंडिंग उपलब्ध कराई थी, जिसमें कोरोना वायरस को अधिक खतरनाक बनाने पर काम किया जा रहा था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महामारी फैलने के बाद वायरस की संभावित लैब उत्पत्ति से जुड़े तथ्यों को छिपाने की कोशिश की गई और फॉसी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/world/the-biggest-revelation-on-how-the-corona-epidemic-spread-in/article-2424"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/corona.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>वाशिंगटन।</strong> अमेरिका की पूर्व राष्ट्रीय खुफिया प्रमुख तुलसी गबार्ड ने अपने कार्यकाल के आखिरी दिनों में कोरोना महामारी की उत्पत्ति को लेकर बड़ा दावा किया है। गबार्ड ने कुछ गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक करते हुए आरोप लगाया कि अमेरिका के चर्चित वैज्ञानिक डॉ. एंथनी फॉसी ने चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में ऐसी रिसर्च के लिए सरकारी फंडिंग उपलब्ध कराई थी, जिसमें कोरोना वायरस को अधिक खतरनाक बनाने पर काम किया जा रहा था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महामारी फैलने के बाद वायरस की संभावित लैब उत्पत्ति से जुड़े तथ्यों को छिपाने की कोशिश की गई और फॉसी ने अमेरिकी संसद के सामने शपथ लेकर भी गलत बयान दिया।</p>
<p>कोरोना महामारी के दौरान डॉ. एंथनी फॉसी अमेरिका में सबसे प्रमुख स्वास्थ्य सलाहकारों में शामिल थे। 2020 में जब अमेरिका में कोविड-19 के मामले तेजी से बढ़े, तब तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने महामारी से निपटने में फॉसी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी। हालांकि महामारी के शुरुआती दौर से ही कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर कई सवाल उठते रहे हैं।</p>
<p><strong>वायरस को अधिक ताकतवर बनाने का चल रहा था काम</strong></p>
<p>गबार्ड का आरोप है कि फॉसी ने जिस रिसर्च को फंडिंग दिलाई, वह ‘गेन-ऑफ-फंक्शन रिसर्च’ से जुड़ी थी। यह ऐसी वैज्ञानिक प्रक्रिया होती है, जिसमें किसी वायरस की विशेषताओं में बदलाव कर उसे अधिक संक्रामक या खतरनाक बनाया जाता है। वैज्ञानिकों का तर्क है कि ऐसी रिसर्च से भविष्य में संभावित महामारियों को समझने और वैक्सीन या इलाज विकसित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि इस तरह की रिसर्च को लेकर लंबे समय से विवाद रहा है, क्योंकि यदि सुरक्षा में चूक हो जाए तो संशोधित वायरस के लैब से बाहर निकलने का खतरा भी रहता है। इसी कारण कई देशों में इस तरह के प्रयोगों पर सख्त निगरानी रखी जाती है।</p>
<p>चम<strong>गादड़ों में पाए जाने वाले कोरोना वायरस पर रिसर्च चल रहा था</strong></p>
<p>गबार्ड के मुताबिक, चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में चमगादड़ों में पाए जाने वाले कोरोना वायरस पर इसी तरह की रिसर्च चल रही थी। उनका दावा है कि कोविड-19 महामारी की शुरुआत भी संभवतः इसी लैब से वायरस के दुर्घटनावश बाहर आने के कारण हुई। बता दें कि कोरोना की उत्पत्ति को लेकर दुनिया भर में दो प्रमुख थ्योरी सामने आती रही हैं। पहली, वायरस प्राकृतिक रूप से जानवरों से इंसानों में पहुंचा। दूसरी, वायरस किसी लैब से गलती से बाहर निकला। अब तक किसी भी थ्योरी को अंतिम रूप से साबित नहीं किया जा सका है और कई अमेरिकी एजेंसियां अलग-अलग आकलन पेश कर चुकी हैं।</p>
<p><strong>सवाल तो पहले भी उठाए गए, लेकिन दबा दिये गए</strong></p>
<p>गबार्ड के कार्यालय की ओर से कहा गया है कि महामारी के शुरुआती दौर में कुछ वैज्ञानिकों को आगे कर ऐसी रिपोर्ट तैयार करवाई गई, जिसमें वायरस की प्राकृतिक उत्पत्ति की संभावना को प्रमुखता दी गई। आरोप है कि इससे लैब-लीक थ्योरी को कमजोर दिखाने की कोशिश हुई। गबार्ड का कहना है कि खुफिया एजेंसियों और वैज्ञानिक समुदाय के कुछ लोगों ने इस निष्कर्ष पर सवाल उठाए थे, लेकिन उनकी बातों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। उन्होंने दावा किया कि कई विश्लेषकों पर दबाव बनाया गया और उन्हें किनारे कर दिया गया।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/corona1.jpg" alt="corona1" width="1280" height="720"></img>
blogs.biomedcentral.com

<p><strong>सच्चाई सामने लाने वालों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा</strong></p>
<p>गबार्ड ने कहा कि व्हिसलब्लोअर्स की गवाही और हाल में सामने आए दस्तावेज इन आरोपों की ओर इशारा करते हैं। उनके अनुसार, ऐसे कई लोग सामने आए जिन्होंने दावा किया कि कोरोना की उत्पत्ति से जुड़े कुछ पहलुओं पर स्वतंत्र रूप से जांच करने वालों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष निकलना अभी बाकी है और इस मामले को लेकर अमेरिका में राजनीतिक बहस लगातार जारी है।</p>
<p><strong>डॉ. फॉसी पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल</strong></p>
<p>डॉ. फॉसी पर इससे पहले भी आरोप लगते रहे हैं कि अमेरिकी सरकार से मिले कुछ शोध अनुदान गैर-लाभकारी संस्था ‘ईकोहेल्थ एलायंस’ के जरिए वुहान लैब तक पहुंचे थे। यह संस्था चमगादड़ों में पाए जाने वाले कोरोना वायरस पर शोध परियोजनाओं से जुड़ी रही है। वहीं, 2021 में अमेरिकी कांग्रेस की सुनवाई के दौरान फॉसी ने कहा था कि उनकी एजेंसी ने वुहान लैब में वायरस को अधिक खतरनाक बनाने वाली रिसर्च के लिए फंडिंग नहीं दी। बाद में सामने आए कुछ दस्तावेजों और कांग्रेस की जांच के आधार पर रिपब्लिकन नेताओं ने उनके इस बयान पर सवाल उठाए।<br />हाल के वर्षों में अमेरिकी कांग्रेस की विभिन्न समितियों और खुफिया एजेंसियों ने भी कोविड-19 की उत्पत्ति से जुड़े कई दस्तावेजों की समीक्षा की है। हालांकि अब तक ऐसा कोई सर्वसम्मत निष्कर्ष सामने नहीं आया है, जिसे सभी एजेंसियां स्वीकार करती हों।</p>
<p><strong>अमेरिकी वैज्ञा</strong><strong>निक लगातार आरोपों से इनकार करते रहे हैं</strong></p>
<p>वहीं, फॉसी लगातार इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं। उनका कहना है कि कोविड-19 की उत्पत्ति को लेकर अभी तक कोई अंतिम और ठोस वैज्ञानिक निष्कर्ष नहीं निकला है। उन्होंने कई बार कहा है कि उपलब्ध सबूतों के आधार पर किसी एक थ्योरी को पूरी तरह सही या गलत नहीं ठहराया जा सकता। बता दें कि तुलसी गबार्ड ट्रम्प प्रशासन में डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस (DNI) के पद पर कार्यरत थीं। उनके अधीन अमेरिका की 18 खुफिया एजेंसियां काम करती थीं। उन्होंने 22 मई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विश्व</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 14:27:01 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>300 अरब डॉलर का फंड, 60 दिन टोल-फ्री होर्मुज़... अमेरिका-ईरान शांति समझौते के 14 बिंदुओं में क्या-क्या है</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अमेरिका ने हाल ही में ईरान के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे। दोनों देशों के बीच लगभग चार महीनों से चल रहे युद्ध को समाप्त करने के लिए कई मुद्दों पर सहमति बनी। अंतिम समझौते पर 19 जून को हस्ताक्षर होने हैं, ऐसे में अमेरिका ने इस ड्राफ्ट समझौते को उस घटना से पहले सार्वजनिक किया है। अमेरिका सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस 14-बिंदुओं वाले ड्राफ्ट समझौते में होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने से लेकर ईरान को आर्थिक प्रतिबंधों से राहत देने तक के कई प्रमुख प्रावधान शामिल हैं।</p>
<p><strong>अमेरिका-ईरान MoU</strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/world/300-billion-fund-60-days-toll-free-hormuz-what-are-the/article-2409"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/us-iran-mou.webp" alt=""></a><br /><p>अमेरिका ने हाल ही में ईरान के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे। दोनों देशों के बीच लगभग चार महीनों से चल रहे युद्ध को समाप्त करने के लिए कई मुद्दों पर सहमति बनी। अंतिम समझौते पर 19 जून को हस्ताक्षर होने हैं, ऐसे में अमेरिका ने इस ड्राफ्ट समझौते को उस घटना से पहले सार्वजनिक किया है। अमेरिका सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस 14-बिंदुओं वाले ड्राफ्ट समझौते में होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने से लेकर ईरान को आर्थिक प्रतिबंधों से राहत देने तक के कई प्रमुख प्रावधान शामिल हैं।</p>
<p><strong>अमेरिका-ईरान MoU के 14 बिंदु</strong></p>
<p>1. इस MoU के पहले बिंदु में कहा गया है कि अमेरिका और ईरान इस समझौते पर हस्ताक्षर करके सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई को तत्काल और स्थायी रूप से बंद करने की घोषणा करते हैं। दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ किसी भी प्रकार का युद्ध या सैन्य अभियान शुरू नहीं करेंगे। साथ ही, लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान किया जाएगा।</p>
<p>2. MoU का दूसरा बिंदु यह भी है कि अमेरिका और ईरान एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करेंगे और एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे।</p>
<p>3. दोनों देश 60 दिनों के भीतर एक निश्चित समझौते को वार्ताओं के माध्यम से अंतिम रूप देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यदि दोनों पक्ष सहमत हों तो इस समयसीमा को बढ़ाया जा सकता है।</p>
<p>4. इस MoU पर हस्ताक्षर होते ही अमेरिका ईरान पर लगाए गए नौसैनिक नाकाबंदी और अन्य प्रतिबंधों को हटाना शुरू करेगा, जिसमें 30 दिनों के भीतर नाकाबंदी पूरी तरह समाप्त कर दी जाएगी। इस दौरान ईरान धीरे-धीरे युद्ध-पूर्व स्तर पर जहाजों की आवाजाही बहाल करेगा।</p>
<p>5. अमेरिका ने कहा है कि वह अंतिम समझौता पूरा होने के 30 दिनों के भीतर ईरान से सटे क्षेत्रों से अपनी सैन्य उपस्थिति और बलों को वापस बुला लेगा। इस MoU पर हस्ताक्षर होने के बाद, ईरान फारस की खाड़ी और ओमान सागर के बीच यात्रा करने वाले वाणिज्यिक जहाजों को 60 दिनों की अवधि के लिए मुफ्त और सुरक्षित मार्ग प्रदान करेगा। वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही तत्काल शुरू होगी। होर्मुज़ जलडमरूमध्य में निर्बाध समुद्री सेवाओं की व्यवस्था करने के लिए ईरान ओमान के साथ चर्चा करेगा।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/us-iran-mou1.webp" alt="us-iran-mou1" width="1280" height="720"></img>
republicworld.com

<p>6. इसके अलावा, अमेरिका ने अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान के पुनर्वास और आर्थिक विकास के लिए एक व्यापक योजना बनाने की बात कही है, जिस पर दोनों पक्ष सहमत हों। अमेरिका कम से कम 300 अरब डॉलर के फंड की व्यवस्था सुनिश्चित करेगा। अंतिम समझौते के हिस्से के रूप में इस योजना के लिए कार्यान्वयन रणनीति को 60 दिनों के भीतर अंतिम रूप दिया जाएगा।</p>
<p>7. अमेरिका ईरान पर लगाए गए सभी प्रतिबंधों को हटाने का वादा करता है। इसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्तावों के तहत लगाए गए प्रतिबंध, IAEA बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के प्रस्तावों से जुड़े प्रतिबंध और अमेरिका द्वारा लगाए गए सभी एकपक्षीय प्राथमिक और द्वितीयक प्रतिबंध शामिल हैं।</p>
<p>8. ईरान और अमेरिका दोनों स्वीकार करते हैं कि प्रतिबंध हटाने का मुद्दा अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए वे इस विषय पर तत्काल वार्ता शुरू करने और पारस्परिक समझौते तक पहुँचने के लिए गंभीर प्रयास करने की इच्छा व्यक्त करते हैं।</p>
<p>9. समझौते में कहा गया है कि ईरान पुष्टि करता है कि वह परमाणु हथियारों का उत्पादन नहीं करेगा। अमेरिका और ईरान इस बात पर सहमत हुए हैं कि ईरान के समृद्ध परमाणु सामग्री के मौजूदा भंडार के भविष्य के प्रबंधन और निपटान का समाधान दोनों पक्षों द्वारा पारस्परिक सहमति से तय की गई प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा।</p>
<p>10. दोनों पक्ष यूरेनियम संवर्धन और ईरान की शांतिपूर्ण परमाणु आवश्यकताओं से जुड़े अन्य मुद्दों पर चर्चा करने के लिए भी सहमत हुए हैं। ये चर्चाएँ उस रूपरेखा के आधार पर होंगी, जिस पर अंतिम समझौते में सहमति बनेगी। दोनों देशों के बीच अंतिम समझौते तक की अंतरिम अवधि के दौरान अमेरिका और ईरान यथास्थिति बनाए रखने पर सहमत हुए हैं; ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम की वर्तमान स्थिति बनाए रखेगा, जबकि अमेरिका न तो नए प्रतिबंध लगाएगा और न ही क्षेत्र में अतिरिक्त सैन्य बल तैनात करेगा।</p>
<p>11. अमेरिका ने वादा किया है कि इस MoU पर हस्ताक्षर होने के बाद और जब तक ईरान पर लगे प्रतिबंध पूरी तरह नहीं हट जाते, तब तक अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ईरानी कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और संबंधित सामानों के निर्यात के लिए आवश्यक छूट प्रदान करेगा। इसके साथ ही, वह इस निर्यात से जुड़ी सभी सेवाओं, जैसे बैंकिंग लेनदेन, बीमा और परिवहन को भी मंजूरी देगा।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/photo-(2)81.webp" alt="photo-(2)8" width="1280" height="720"></img></p>
<p>12. अमेरिका ने कहा कि MoU के कार्यान्वयन के बाद ईरान की स्थिर या प्रतिबंधित संपत्तियाँ पूरी तरह मुक्त कर दी जाएँगी। अमेरिका और ईरान संयुक्त रूप से इन फ्रीज की गई संपत्तियों को मुक्त करने की प्रक्रिया पर वार्ता के दौरान पारस्परिक सहमति से निर्णय लेंगे।</p>
<p>13. अमेरिका और ईरान इस बात पर सहमत हैं कि इस MoU के सफल कार्यान्वयन और भविष्य के अंतिम समझौते के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए एक कार्यकारी तंत्र स्थापित किया जाएगा।</p>
<p>14. अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की मंजूरी प्राप्त होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विश्व</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 13:30:33 +0530</pubDate>
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                <title>ईरान ने ट्रम्प को दिए ऐसे ज़ख्म, जिन्हें अमेरिका पूरी ज़िंदगी तक नहीं भूल पाएगा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध का आखिरकार अंत हो गया है। लंबे संघर्ष के बाद, दोनों देश एक समझौते पर पहुंचे हैं, और शुक्रवार तक जिनेवा में इसे अंतिम रूप दिया जा सकता है। महीनों तक चले युद्ध के दौरान, संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़रायल ने संयुक्त रूप से ईरान पर सैकड़ों हवाई हमले किए। स्पष्ट उद्देश्य ईरान की सैन्य शक्ति को तोड़ना, उसके परमाणु कार्यक्रम को नष्ट करना, उसके क्षेत्रीय प्रभाव को कमजोर करना और इस्लामिक रिपब्लिक को उखाड़ फेंकना था।</p>
<p>उस समय व्हाइट हाउस में ऐसा माहौल था कि ईरान कुछ ही हफ्तों में आत्मसमर्पण</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/world/iran-gave-such-wounds-to-trump-that-america-will-not/article-2408"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/photo-(2)8.webp" alt=""></a><br /><p>संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध का आखिरकार अंत हो गया है। लंबे संघर्ष के बाद, दोनों देश एक समझौते पर पहुंचे हैं, और शुक्रवार तक जिनेवा में इसे अंतिम रूप दिया जा सकता है। महीनों तक चले युद्ध के दौरान, संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़रायल ने संयुक्त रूप से ईरान पर सैकड़ों हवाई हमले किए। स्पष्ट उद्देश्य ईरान की सैन्य शक्ति को तोड़ना, उसके परमाणु कार्यक्रम को नष्ट करना, उसके क्षेत्रीय प्रभाव को कमजोर करना और इस्लामिक रिपब्लिक को उखाड़ फेंकना था।</p>
<p>उस समय व्हाइट हाउस में ऐसा माहौल था कि ईरान कुछ ही हफ्तों में आत्मसमर्पण कर देगा। लेकिन लगभग साढ़े तीन महीने बाद, तस्वीर कुछ अलग ही दिखाई दे रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की थी कि ईरान के साथ प्रारंभिक शांति समझौता हो गया है। पाकिस्तान और कतर द्वारा मध्यस्थता किए गए इस समझौते ने युद्ध टालने का रास्ता खोल दिया।</p>
<p>लेकिन जब इस समझौते और युद्ध के परिणाम को ध्यान से देखा जाता है, तो एक बड़ा सवाल उठता है, क्या संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने वास्तविक लक्ष्य हासिल किए हैं? कई विश्लेषकों का मानना है कि ट्रम्प प्रशासन कम से कम 7 प्रमुख मोर्चों पर अपेक्षित सफलता हासिल करने में विफल रहा, और ईरान ने अमेरिका को बड़ा नुकसान पहुंचाया।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/347.webp" alt="347" width="1280" height="720"></img>
hindi.oneindia.com

<p>युद्ध के शुरुआती घंटों में, अमेरिका और इज़रायल ने तेहरान पर बड़े पैमाने पर हमले शुरू किए। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मारे गए। ट्रम्प प्रशासन को उम्मीद थी कि शीर्ष नेतृत्व को हटाने से पूरी व्यवस्था ढह जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।</p>
<p>कुछ ही दिनों में, संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से नया नेतृत्व उभर आया, जबकि सत्ता का ढांचा जस का तस बना रहा। यह भी कहा जा रहा है कि इस्लामिक शासन और मजबूत हुआ है तथा सत्ता पर उसकी पकड़ और मजबूत हो गई है। आखिरकार, अमेरिका को उसी शासन के साथ शांति समझौते के लिए बातचीत करनी पड़ी जिसे वह उखाड़ फेंकना चाहता था। इसका मतलब यह हुआ कि ट्रम्प प्रशासन का लक्ष्य अधूरा रह गया।</p>
<p>युद्ध से पहले, ईरान आर्थिक संकट, महंगाई और बेरोजगारी का सामना कर रहा था। देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। अमेरिका को उम्मीद थी कि सैन्य दबाव बढ़ने से जनता सरकार के खिलाफ हो जाएगी। लेकिन हुआ इसके विपरीत। गलती से मीनाब शहर में एक कन्या विद्यालय के पास मिसाइल हमला हो गया, जिसमें बड़ी संख्या में नागरिक मारे गए। इस घटना ने पूरे देश में गुस्सा फैला दिया। सरकार विरोधी आवाजें अचानक कम हो गईं, और राष्ट्रीय भावना मजबूत हो गई। पहले सरकार की आलोचना करने वाले लोग भी विदेशी हमलों के खिलाफ एकजुट हो गए।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/365.webp" alt="365" width="1280" height="720"></img>
lokmatnews.in

<p>युद्ध का मुख्य सैन्य उद्देश्य ईरान की मिसाइल शक्ति को समाप्त करना था। अमेरिका और इज़रायल का मानना था कि शुरुआती 900 हवाई हमले ईरान की मिसाइल क्षमता को नष्ट कर देंगे। हालांकि, ईरान का भूमिगत 'मिसाइल शहर' अक्षुण्ण रहा। इसके बाद ईरान ने जवाबी हमले शुरू किए, जिनमें इज़रायल, इराक, कतर और खाड़ी क्षेत्र में अनेक लक्ष्यों को निशाना बनाया गया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शांति समझौते में ईरान को अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट करने की शर्त स्वीकार नहीं करनी पड़ी। इसका अर्थ यह हुआ कि जिन हथियारों को युद्ध के माध्यम से नष्ट करना था वे आज भी मौजूद हैं।</p>
<p>अमेरिका चाहता था कि दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्ति रेखा पूरी तरह सुरक्षित रहे। हालांकि, युद्ध शुरू होते ही ईरान ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर दिया, जिससे तेल टैंकरों की आवाजाही रुक गई। वैश्विक बाजार में घबराहट फैल गई। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने लगीं। अमेरिका ने नौसैनिक नाकाबंदी लगाकर प्रतिक्रिया दी। परिणामस्वरूप, दोनों पक्ष महंगे और लंबे समुद्री गतिरोध में फंस गए। आखिरकार, जलडमरूमध्य सैन्य कार्रवाई से नहीं बल्कि राजनयिक समझौते के माध्यम से खोला जा रहा है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/376.webp" alt="376" width="1280" height="720"></img>
aajtak.in

<p>अमेरिका ने सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और कतर सहित अपने सहयोगी देशों को आश्वासन दिया था कि यह कार्रवाई उन्हें सुरक्षित रखेगी। लेकिन युद्ध शुरू होते ही ईरान ने जवाबी हमले शुरू कर दिए। कई महत्वपूर्ण स्थानों को निशाना बनाया गया, और उनके ऊर्जा ढांचे को खतरे में डाल दिया गया। खाड़ी देशों को पहली बार एहसास हुआ कि अमेरिकी सुरक्षा छत्र उन्हें पूरी तरह सुरक्षित नहीं रख सकेगा। इसी कारण कतर और पाकिस्तान जैसे देशों ने युद्ध समाप्त कराने के लिए सक्रिय रूप से मध्यस्थता की।</p>
<p>जब युद्ध शुरू हुआ, तब अमेरिका को उम्मीद थी कि यह एक छोटा और कम खर्चीला अभियान होगा। लेकिन परिस्थितियां धीरे-धीरे बदलती गईं। तेल की कीमतें बढ़ीं, वैश्विक बाजार प्रभावित हुए, और अमेरिकी सैनिकों तथा सैन्य ठिकानों के लिए खतरा बढ़ गया। फिर, शांति समझौते के हिस्से के रूप में, ईरान के लिए 300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण और निवेश ढांचे पर चर्चा सामने आई। ईरान ने शुरुआत में 400 अरब डॉलर के मुआवजे की मांग की थी। हालांकि अमेरिका सीधे तौर पर मुआवजा नहीं दे रहा है, लेकिन 300 अरब डॉलर का निवेश कोष यह संकेत देता है कि युद्ध का आर्थिक बोझ केवल ईरान ने ही नहीं उठाया।</p>
<p>युद्ध का प्राथमिक औचित्य ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना था। हालांकि, युद्ध के दौरान ईरान ने अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण प्रणाली पर सवाल उठाए। कई निरीक्षण प्रक्रियाएं प्रभावित हुईं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिका को ईरान के समृद्ध यूरेनियम का एक हिस्सा भी नहीं मिला। नई शांति प्रक्रिया में भी परमाणु मुद्दे को अगले 60 दिनों में अलग वार्ताओं के लिए छोड़ दिया गया है। इसका अर्थ यह हुआ कि जिस मुद्दे पर युद्ध शुरू हुआ था उसका अंतिम समाधान अभी तक नहीं मिला है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/387.webp" alt="387" width="1280" height="720"></img>
hindi.news18.com

<p>इस पूरे युद्ध का सबसे दिलचस्प सवाल यही है। सैन्य दृष्टिकोण से देखें तो अमेरिका और इज़रायल ने ईरान को भारी नुकसान पहुंचाया। कई ईरानी ठिकाने नष्ट हुए, शीर्ष नेतृत्व को क्षति पहुंची और अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा। हालांकि, रणनीतिक रूप से ईरान अपनी शक्ति बनाए रखने, अपने मिसाइल कार्यक्रम को सुरक्षित रखने, क्षेत्रीय प्रभाव बनाए रखने और अरबों डॉलर के पुनर्निर्माण निवेश प्राप्त करने में सफल रहा।</p>
<p>यही कारण है कि दुनिया भर के विश्लेषक अब इस युद्ध को 'पूर्ण विजय' या 'पूर्ण हार' नहीं, बल्कि थकान से जन्मी शांति कह रहे हैं। एक बात स्पष्ट है, जब ट्रम्प ने फरवरी में युद्ध शुरू किया था तब व्हाइट हाउस जिस परिणाम की उम्मीद कर रहा था, जून में हुआ समझौता उससे बिल्कुल विपरीत है। और शायद यही कारण है कि, कई लोग इस युद्ध को '7 ज़ख्मों' की कहानी कह रहे हैं, जिन्हें अमेरिका और डोनाल्ड ट्रम्प लंबे समय तक नहीं भूल पाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विश्व</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 12:21:20 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>ब्रिटेन में 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया जाएगा, PM की घोषणा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>ब्रिटेन सरकार 16 वर्ष से कम आयु के किशोरों के लिए कई सोशल मीडिया एप्लिकेशनों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाएगी। सोमवार को इसकी घोषणा करते हुए ब्रिटिश PM कीर स्टारमर ने इस निर्णय को ‘देश के लिए एक ऐतिहासिक और बड़ा क्षण’ बताया। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए PM स्टारमर ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि इस निर्णय के खिलाफ कोई प्रौद्योगिकी कंपनी बाधा खड़ी करेगी, तो सरकार उनके खिलाफ कड़ा रुख अपनाएगी। उन्होंने कहा, ‘मैं हमारे बच्चों की सुरक्षा और उनकी खुशियों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता करने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/world/social-media-apps-will-be-banned-for-children-under-16/article-2398"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/0122.webp" alt=""></a><br /><p>ब्रिटेन सरकार 16 वर्ष से कम आयु के किशोरों के लिए कई सोशल मीडिया एप्लिकेशनों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाएगी। सोमवार को इसकी घोषणा करते हुए ब्रिटिश PM कीर स्टारमर ने इस निर्णय को ‘देश के लिए एक ऐतिहासिक और बड़ा क्षण’ बताया। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए PM स्टारमर ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि इस निर्णय के खिलाफ कोई प्रौद्योगिकी कंपनी बाधा खड़ी करेगी, तो सरकार उनके खिलाफ कड़ा रुख अपनाएगी। उन्होंने कहा, ‘मैं हमारे बच्चों की सुरक्षा और उनकी खुशियों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता करने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं हूं।’ सरकार का यह निर्णय बच्चों को इंटरनेट पर उपलब्ध हानिकारक सामग्री और अत्यधिक स्क्रीन समय (Excessive Screen Time) से बचाने के लिए लिया गया है।</p>
<p>ब्रिटेन का यह कदम बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत करने के वैश्विक अभियान का हिस्सा है। वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्राज़ील और इंडोनेशिया जैसे देश या तो इस संबंध में कानून बना चुके हैं या बच्चों के लिए सोशल मीडिया एक्सेस पर आयु-आधारित प्रतिबंध लागू कर चुके हैं। इसके अलावा फ्रांस, स्पेन, डेनमार्क, थाईलैंड और दक्षिण कोरिया जैसे देश भी इस प्रकार के कानून लाने के लिए अध्ययन और तैयारी कर रहे हैं।</p>
<p>PM स्टारमर ने कहा कि ब्रिटेन जो कदम उठाने जा रहा है, वह ऑस्ट्रेलिया के प्रतिबंध से भी ‘कुछ अधिक सख्त’ हो सकता है। उल्लेखनीय है कि ऑस्ट्रेलिया में 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट रखने पर प्रतिबंध है और यदि टेक कंपनियां ऐसे अकाउंट नहीं हटाती हैं, तो उन पर करोड़ों डॉलर का जुर्माना लगाया जा सकता है।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/0121.webp" alt="0121" width="1280" height="720"></img></p>
<p>ब्रिटेन सरकार के अनुसार, यह प्रतिबंध स्नैपचैट (Snapchat), टिकटॉक (TikTok), यूट्यूब (YouTube), इंस्टाग्राम (Instagram), फेसबुक (Facebook) और एक्स (X - पूर्व में ट्विटर) जैसे प्लेटफॉर्मों पर लागू होगा। हालांकि, व्हाट्सऐप (WhatsApp) और सिग्नल (Signal) जैसी मैसेजिंग सेवाओं को इससे बाहर रखा गया है।</p>
<p>इसके साथ ही PM ने कहा कि गेमिंग और लाइव-स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्मों पर अजनबी लोग बच्चों से संपर्क न कर सकें, इसके लिए भी सरकार कड़े कदम उठाएगी। यह कानून अगले वर्ष की शुरुआत में ही लागू हो जाएगा।</p>
<p>लगभग दो वर्ष पहले ही सत्ता में आए PM कीर स्टारमर इस समय अपनी ही पार्टी के सदस्यों के भारी दबाव का सामना कर रहे हैं। पार्टी के कुछ नेता उनके कमजोर नेतृत्व से नाराज़ हैं और आने वाले दिनों या हफ्तों में उनके नेतृत्व को चुनौती दी जा सकती है। ऐसी स्थिति के बीच वे एक ऐसा बड़ा और निर्णायक कानून लाना चाहते हैं जो उनकी स्थायी पहचान (Legacy) बन सके।</p>
<p>अपने दो किशोर बच्चों के पिता होने का उल्लेख करते हुए PM ने कहा कि इस प्रतिबंध की सफलता तभी मानी जाएगी जब ‘सोशल मीडिया पर बच्चों की संख्या में बड़ा कमी आए’ और समाज में ऐसा ‘सांस्कृतिक परिवर्तन हो कि बच्चे सोशल मीडिया के बिना भी अलग तरीके से बड़े हो सकें।’</p>
<p>कुछ बाल अधिकार कार्यकर्ताओं की शंकाओं के बावजूद, स्टारमर ने दृढ़ता से कहा कि सरकार को पूरा विश्वास है कि यह प्रतिबंध प्रभावी साबित होगा।</p>
<p>यह निर्णय लेने से पहले सरकार ने जनता से राय मांगी थी, जिसमें अभिभावकों, टेक इंडस्ट्री और बच्चों की ओर से लगभग 1,16,000 प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुई थीं। ब्रिटेन के इतिहास में वर्ष 2012 में समलैंगिक विवाह के संबंध में मांगी गई राय के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा जनप्रतिसाद है।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/0220.webp" alt="0220" width="1280" height="720"></img></p>
<p>सरकार ने घोषणा की है कि राय देने वालों में से 90% से अधिक लोग 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए इस प्रतिबंध के पक्ष में थे।</p>
<p><strong>पीड़ित परिवार का स्वागत, लेकिन अन्य सुविधाओं की भी मांग</strong></p>
<p>वर्ष 2023 में ऑनलाइन हानिकारक सामग्री देखकर उकसाए गए दो किशोरों के हाथों जान गंवाने वाली 16 वर्षीय ब्रिआना घे की मां, एस्थर घे ने इस निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इस प्रतिबंध से ‘संभवतः कई निर्दोष बच्चों की जान बचाई जा सकेगी,’ लेकिन इसके साथ अन्य पूरक कदम भी आवश्यक हैं।</p>
<p>BBC से बातचीत में उन्होंने खुशी व्यक्त करते हुए कहा, ‘यह अच्छी बात है कि सरकार अब स्कूल के बाद की अन्य गतिविधियों (After-school Clubs) में निवेश कर रही है, क्योंकि हम बच्चों से केवल चीजें छीन नहीं सकते, उन्हें विकल्प भी देने होंगे।’</p>
<p>इस कानून के कारण ब्रिटेन और अमेरिका के बीच राजनयिक संबंधों में तनाव बढ़ सकता है। लंदन स्थित अमेरिकी दूतावास ने एक बयान में चेतावनी दी है कि ऐसे नियम सीमित होने चाहिए ताकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर आंच न आए। अमेरिका ने यह चिंता भी व्यक्त की है कि इन नियमों से अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों पर आर्थिक और प्रशासनिक बोझ बढ़ेगा।</p>
<p>हालांकि, PM स्टारमर ने कहा कि वे सोमवार से फ्रांस में शुरू हो रहे G7 शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और अन्य वैश्विक नेताओं के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा, ‘मैं सचमुच मानता हूं कि दुनिया के सभी नेताओं में यह स्वीकार्यता है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए कदम उठाए जाने चाहिए। इसमें कोई विवाद नहीं है। हां, इसकी सीमाएं क्या हों और नियम कैसे हों, इस पर चर्चा अवश्य हो सकती है, लेकिन मैं इसे कोई बड़ी समस्या नहीं मानता।’</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/0320.webp" alt="0320" width="1280" height="720"></img></p>
<p>दूसरी ओर, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के कम्युनिकेशन सिस्टम्स के प्रोफेसर जॉन क्रॉक्रॉफ्ट का मानना है कि सोशल मीडिया पर प्रतिबंध का समर्थन करने वालों का उद्देश्य अच्छा हो सकता है, लेकिन यह दृष्टिकोण शायद गलत है। ऐसे बदलावों के कारण बच्चे अपने काम या आवश्यक वेबसाइटों से भी वंचित हो सकते हैं।</p>
<p>प्रोफेसर क्रॉक्रॉफ्ट ने चेतावनी देते हुए कहा, ‘इस प्रतिबंध के कारण यह बड़ा जोखिम पैदा होगा कि उपयोगकर्ता और भी खराब या डार्क साइट्स की ओर चले जाएंगे। इसके अलावा, बच्चों के व्यक्तिगत उपकरणों (मोबाइल-टैबलेट) पर निगरानी रखना तकनीकी रूप से लगभग असंभव है। इसके बजाय प्लेटफॉर्मों पर नियंत्रण लागू करना अधिक आसान है, यदि नियामक थोड़ी मेहनत करने को तैयार हों।’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विश्व</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 20:24:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>समझौते से नाराज़ इज़रायल! शांति समझौते के बाद अमेरिका के खिलाफ लिए दो बड़े फैसले</title>
                                    <description><![CDATA[<p>लंबी बातचीत के बाद अमेरिका और ईरान युद्ध को समाप्त करने के लिए एक फ्रेमवर्क समझौते पर पहुंच गए हैं; इस समझौते पर 19 जून को जिनेवा में हस्ताक्षर होने वाले हैं, जिसमें पाकिस्तान की मध्यस्थता में हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस फ्रेमवर्क पर सहमति बनने के बाद खाड़ी देशों और दुनिया भर के नेता दोनों देशों को बधाई दे रहे हैं और भविष्य में शांति की उम्मीद जता रहे हैं। लेकिन युद्ध का केंद्र और कारण रहे देश इज़रायल के प्रधानमंत्री की ओर से अब तक कोई बयान नहीं आया है।</p>
<p>इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने X पर राष्ट्रपति डोनाल्ड</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/world/israel-angry-with-the-agreement-took-two-big-decisions-against/article-2399"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/netanyahu11.webp" alt=""></a><br /><p>लंबी बातचीत के बाद अमेरिका और ईरान युद्ध को समाप्त करने के लिए एक फ्रेमवर्क समझौते पर पहुंच गए हैं; इस समझौते पर 19 जून को जिनेवा में हस्ताक्षर होने वाले हैं, जिसमें पाकिस्तान की मध्यस्थता में हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस फ्रेमवर्क पर सहमति बनने के बाद खाड़ी देशों और दुनिया भर के नेता दोनों देशों को बधाई दे रहे हैं और भविष्य में शांति की उम्मीद जता रहे हैं। लेकिन युद्ध का केंद्र और कारण रहे देश इज़रायल के प्रधानमंत्री की ओर से अब तक कोई बयान नहीं आया है।</p>
<p>इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने X पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बारे में एक संदेश पोस्ट किया। उसका ईरान के साथ हो रहे युद्धविराम समझौते या लेबनान में चल रहे संघर्ष से कोई संबंध नहीं था; उन्होंने रविवार को केवल ट्रंप को उनके 80वें जन्मदिन की शुभकामनाएं देने वाला संदेश लिखा था।</p>
<p>नेतन्याहू ने इस समझौते (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है। हालांकि, उनकी सरकार के अन्य सदस्यों ने इस समझौते की आलोचना करते हुए कहा है कि यह इज़रायल और स्वतंत्र विश्व के लिए हानिकारक है तथा इससे हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/netanyahu.webp" alt="netanyahu" width="1280" height="720"></img>
bbc.com

<p>पिछले महीने, इज़रायल एयरपोर्ट अथॉरिटी ने चेतावनी दी थी कि बेन-गुरियन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अमेरिकी रीफ्यूलिंग विमानों की लगातार मौजूदगी के कारण 24 लाख से अधिक फ्लाइट टिकट रद्द हो सकते हैं। लेकिन परिवहन मंत्री मिरी रेगेव ने रविवार को फ्रेमवर्क समझौते की खबर आते ही प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से इन विमानों को हटाने के लिए कहा था।</p>
<p>इज़रायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर ने सबसे पहले इस मामले पर टिप्पणी की थी। उन्होंने अपने टेलीग्राम चैनल पर लिखा कि ट्रंप का समझौता हमें बाध्यकारी नहीं है... हम इस समझौते का हिस्सा नहीं हैं। यह हमारी सुरक्षा की गारंटी नहीं देता। हमें हिज़्बुल्लाह के पूर्ण खात्मे से कम किसी भी बात पर समझौता नहीं करना चाहिए। हमारे सैनिकों ने जिन क्षेत्रों पर कब्ज़ा किया है और जिन्हें आतंकवादी ढांचे से मुक्त कराया है, उनसे हमें एक इंच भी पीछे नहीं हटना चाहिए।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/war.webp" alt="war" width="1280" height="720"></img>
themedialine.org

<p>नेतन्याहू सरकार के इन दो मंत्रियों के बयानों से संकेत मिलता है कि इज़रायल ट्रंप के फैसले की अनदेखी करते हुए विद्रोही रुख अपना रहा है। यदि इज़रायल लेबनान पर अपने हमले बंद नहीं करता और अपने सैनिकों को वापस नहीं बुलाता, तो युद्धविराम का कोई अर्थ नहीं रहेगा, क्योंकि ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह हिज़्बुल्लाह का साथ नहीं छोड़ेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विश्व</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 13:42:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>107 दिन की जंग में भारी नुकसान, लेकिन अमेरिका से शांति समझौते ने ईरान को दिए 7 बड़े फायदे</title>
                                    <description><![CDATA[<p>संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच 107 दिनों तक चले भीषण युद्ध का अंत आखिरकार एक ऐतिहासिक शांति समझौते के साथ हुआ है। 28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध में ईरान ने सैन्य, आर्थिक और रणनीतिक मोर्चों पर भारी कीमत चुकाई थी। उसके कई बड़े सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान हुआ था, शीर्ष नेतृत्व के कई नेता घायल हुए थे और देश की अर्थव्यवस्था पर बहुत अधिक दबाव बढ़ गया था। इसके बावजूद, ईरान ने अमेरिका के साथ हुए नए समझौते से 7 प्रमुख लाभ हासिल किए हैं, जिन्हें वह एक बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में देखता</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/world/heavy-loss-in-107-day-war-but-peace-agreement-with/article-2396"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/364.webp" alt=""></a><br /><p>संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच 107 दिनों तक चले भीषण युद्ध का अंत आखिरकार एक ऐतिहासिक शांति समझौते के साथ हुआ है। 28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध में ईरान ने सैन्य, आर्थिक और रणनीतिक मोर्चों पर भारी कीमत चुकाई थी। उसके कई बड़े सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान हुआ था, शीर्ष नेतृत्व के कई नेता घायल हुए थे और देश की अर्थव्यवस्था पर बहुत अधिक दबाव बढ़ गया था। इसके बावजूद, ईरान ने अमेरिका के साथ हुए नए समझौते से 7 प्रमुख लाभ हासिल किए हैं, जिन्हें वह एक बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में देखता है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/386.webp" alt="386" width="1280" height="720"></img>
ndtv.in

<p>संघर्ष के शुरुआती दिनों में ईरान को सबसे बड़ा रणनीतिक झटका लगा था। अमेरिकी और इज़रायली हमलों में उसके सर्वोच्च नेता खामेनेई और कई शीर्ष सैन्य कमांडरों की जान चली गई थी, साथ ही देश के कई प्रमुख परमाणु केंद्रों को भी भारी नुकसान हुआ था। हालांकि, संयुक्त राज्य अमेरिका को भी अरबों डॉलर के हथियारों के नुकसान और गंभीर आर्थिक मंदी का सामना करना पड़ा था। ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य की नाकाबंदी कर दी थी, जिसके कारण वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हो गई थी और वैश्विक बाजार में महंगाई का दबाव बहुत बढ़ गया था।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/375.webp" alt="375" width="1280" height="720"></img>
navbharattimes.indiatimes.com

<p>इतनी बड़ी तबाही और अपने शीर्ष नेताओं को खोने के बावजूद, ईरान कूटनीतिक वार्ताओं के माध्यम से संयुक्त राज्य अमेरिका से 7 बड़ी रियायतें हासिल करने में सफल रहा।</p>
<ul>
<li>मुख्य वार्ताएं शुरू होने से पहले, संयुक्त राज्य अमेरिका ईरान के जब्त किए गए 24 अरब डॉलर के जमे हुए फंड में से आधी राशि तुरंत जारी करेगा।</li>
<li>अमेरिकी नौसेना अगले 30 दिनों के भीतर ईरान के समुद्री मार्गों पर लगी नाकाबंदी पूरी तरह हटा लेगी।</li>
<li>ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की बिक्री पर लगे सभी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध जल्द ही निलंबित कर दिए जाएंगे।</li>
<li>संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान के पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता प्रदान करेंगे।</li>
<li>वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य केवल ईरानी सुरक्षा नियंत्रण के तहत ही फिर से खोला जाएगा।</li>
<li>संयुक्त राज्य अमेरिका ने लिखित प्रतिबद्धता दी है कि वह इस क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति का और विस्तार नहीं करेगा और न ही ईरान पर कोई नए प्रतिबंध लगाएगा।</li>
<li>अमेरिकी सरकार ने पूर्ण गारंटी दी है कि वह भविष्य में ईरान के आंतरिक और राजनीतिक मामलों में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करेगी।</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विश्व</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 12:46:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ब्रिटेन में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया यूज़ पर लगेगा प्रतिबंध, PM बड़ी घोषणा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>ब्रिटेन सरकार 16 वर्ष से कम उम्र के किशोरों के लिए कई सोशल मीडिया एप्लिकेशन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाएगी। सोमवार को इस बात की घोषणा करते हुए ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने इसे "देश के लिए एक ऐतिहासिक और बड़ा क्षण" बताया है।</p>
<p>एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री स्टारमर ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि कोई टेक कंपनियां इस कदम का विरोध करेंगी, तो सरकार उनसे कड़ाई से निपटेगी। उन्होंने आगे कहा, "मैं अपने बच्चों की सुरक्षा और उनकी खुशियों के साथ किसी भी तरह का समझौता करने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं हूं।"</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/world/there-will-be-a-ban-on-social-media-use-for/article-2395"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/matter-cover1.jpg" alt=""></a><br /><p>ब्रिटेन सरकार 16 वर्ष से कम उम्र के किशोरों के लिए कई सोशल मीडिया एप्लिकेशन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाएगी। सोमवार को इस बात की घोषणा करते हुए ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने इसे "देश के लिए एक ऐतिहासिक और बड़ा क्षण" बताया है।</p>
<p>एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री स्टारमर ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि कोई टेक कंपनियां इस कदम का विरोध करेंगी, तो सरकार उनसे कड़ाई से निपटेगी। उन्होंने आगे कहा, "मैं अपने बच्चों की सुरक्षा और उनकी खुशियों के साथ किसी भी तरह का समझौता करने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं हूं।" सरकार का यह फैसला बच्चों को इंटरनेट पर मौजूद हानिकारक कंटेंट और स्क्रीन के अत्यधिक इस्तेमाल (Excessive screen time) से बचाने के लिए लिया गया है।</p>
<p><strong>वैश्विक स्तर पर कड़े होते नियम</strong></p>
<p>ब्रिटेन का यह कदम बच्चों के लिए ऑनलाइन सुरक्षा मजबूत करने के वैश्विक अभियान का एक हिस्सा है। वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्राजील और इंडोनेशिया जैसे देश या तो इस संबंध में कानून ला चुके हैं या बच्चों के लिए सोशल मीडिया एक्सेस पर उम्र-आधारित प्रतिबंधों की घोषणा कर चुके हैं। इसके अलावा फ्रांस, स्पेन, डेनमार्क, थाईलैंड और दक्षिण कोरिया जैसे देश भी इस तरह के नियमों को लागू करने के लिए अध्ययन और तैयारी कर रहे हैं।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/image-2026-06-15t154833.743.jpg" alt="image-2026-06-15T154833.743" width="1280" height="720"></img>
bhaskardigital.com

<p>प्रधानमंत्री स्टारमर ने कहा कि ब्रिटेन जो कदम उठाने जा रहा है, वे ऑस्ट्रेलिया के प्रतिबंध की तुलना में "थोड़े अधिक कड़े" हो सकते हैं। गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट रखने पर रोक है और यदि टेक कंपनियां इन अकाउंट्स को नहीं हटाती हैं, तो उन पर करोड़ों डॉलर का जुर्माना लगाने का प्रावधान है।</p>
<p><strong>किन ऐप्स पर लगेगा प्रतिबंध और कौन से रहेंगे मुक्त?</strong></p>
<p>ब्रिटेन सरकार के अनुसार, यह प्रतिबंध स्नैपचैट (Snapchat), टिकटॉक (TikTok), यूट्यूब (YouTube), इंस्टाग्राम (Instagram), फेसबुक (Facebook) और एक्स (X - पूर्व में ट्विटर) जैसे प्लेटफॉर्म्स पर लागू होगा। हालांकि, इस दायरे से व्हाट्सएप (WhatsApp) और सिग्नल (Signal) जैसी मैसेजिंग सेवाओं को बाहर रखा गया है।</p>
<p>इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने कहा कि गेमिंग और लाइव-स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर अनजान लोग बच्चों से संपर्क न कर सकें, इसके लिए भी सरकार सख्त कदम उठाएगी। यह कानून अगले साल की शुरुआत में ही लागू हो जाएगा।</p>
<p><strong>राजनीतिक दबाव के बीच 'विरासत' छोड़ने का प्रयास</strong></p>
<p>करीब दो साल पहले ही सत्ता में आए प्रधानमंत्री कीर स्टारमर इस समय अपनी ही पार्टी के सदस्यों की ओर से भारी दबाव का सामना कर रहे हैं। पार्टी के कुछ नेता उनके कमजोर नेतृत्व से नाराज हैं और आने वाले दिनों या हफ्तों में उनके नेतृत्व को चुनौती दी जा सकती है। ऐसे हालातों के बीच, वे एक ऐसा बड़ा और दूरगामी कानून लाना चाहते हैं जो उनकी स्थायी पहचान बन सके।</p>
<p>खुद दो टीनएजर  बच्चों के पिता होने का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस प्रतिबंध की सफलता तब मानी जाएगी जब "सोशल मीडिया पर बच्चों की संख्या में भारी गिरावट आए" और समाज में एक ऐसा "सांस्कृतिक बदलाव आए कि बच्चे सोशल मीडिया के बिना भी अलग तरह से बड़े हो सकें।"<br />कुछ बाल अधिकार कार्यकर्ताओं के संदेह के बावजूद, स्टारमर ने दृढ़ता से कहा कि सरकार को पूरा भरोसा है कि यह प्रतिबंध प्रभावी साबित होगा।</p>
<p><strong>जनता का अभूतपूर्व समर्थन: 90% लोग प्रतिबंध के पक्ष में</strong></p>
<p>यह फैसला लेने से पहले सरकार ने जनता से राय मांगी थी, जिसमें अभिभावकों, टेक इंडस्ट्री और बच्चों की तरफ से लगभग 1,16,000 प्रतिक्रियाएं मिलीं। ब्रिटेन के इतिहास में वर्ष 2012 में समलैंगिक विवाह पर मांगी गई राय के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा लोक-प्रतिसाद है।<br />सरकार ने साफ किया है कि राय देने वालों में से भारी बहुमत, यानी 90% से अधिक लोग 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए इस प्रतिबंध के पक्ष में थे।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/6161286287726416126.jpg" alt="6161286287726416126" width="1280" height="720"></img>
aajtak.in

<p><strong>पीड़ित परिवार ने किया स्वागत, लेकिन अन्य सुविधाओं की मांग</strong></p>
<p>साल 2023 में ऑनलाइन हानिकारक कंटेंट देखकर उग्र हुए दो किशोरों के हाथों अपनी जान गंवाने वाली 16 वर्षीय ब्रियाना घे की मां, एस्थर घे ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इस प्रतिबंध से "संभावित रूप से कई मासूम बच्चों की जान बच सकेगी," लेकिन इसके साथ अन्य कदम भी जरूरी हैं।<br />बीबीसी से बातचीत में उन्होंने खुशी जताते हुए कहा, "सरकार अब स्कूल के समय के बाद की अन्य गतिविधियों  में निवेश कर रही है, यह अच्छी बात है क्योंकि हम बच्चों से सिर्फ चीजें छीन नहीं सकते, हमें उन्हें विकल्प देना होगा।"</p>
<p><strong>अमेरिका के साथ तनाव बढ़ने की आशंका</strong></p>
<div class="content-inner">
<div class="text-content clearfix with-meta">इस कानून के कारण ब्रिटेन और अमेरिका के बीच राजनयिक संबंधों में तनाव बढ़ सकता है। लंदन स्थित अमेरिकी दूतावास ने एक बयान में चेतावनी दी है कि ऐसे नियम संकीर्ण  होने चाहिए ताकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता  का उल्लंघन न हो। अमेरिका ने यह चिंता भी जताई है कि इन नियमों के कारण अमेरिकी टेक कंपनियों पर आर्थिक और प्रशासनिक बोझ बढ़ेगा।</div>
<div class="text-content clearfix with-meta"> </div>
<div class="text-content clearfix with-meta">हालांकि, प्रधानमंत्री स्टारमर ने कहा कि वे सोमवार से फ्रांस में शुरू हो रहे 'ग्रुप ऑफ सेवन' (G7) शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य वैश्विक नेताओं के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा, "मैं सच में मानता हूं कि दुनिया के सभी नेताओं में हमेशा से यह स्वीकार्यता रही है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए कदम उठाए जाने चाहिए। यह कोई विवादास्पद मुद्दा नहीं है। हां, इसकी सीमाएं कितनी होनी चाहिए और नियम कैसे होने चाहिए, इस पर बहस जरूर हो सकती है, लेकिन मैं इसे किसी बड़ी समस्या के रूप में नहीं देखता।"</div>
<div class="text-content clearfix with-meta"> </div>
<div class="text-content clearfix with-meta"><strong>विशेषज्ञों के अनुसार कानून अव्यावहारिक?</strong></div>
<div class="text-content clearfix with-meta"> </div>
<div class="text-content clearfix with-meta">दूसरी ओर, कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में कम्युनिकेशन सिस्टम्स के प्रोफेसर जॉन क्रॉफ्ट का मानना है कि सोशल मीडिया पर प्रतिबंध का समर्थन करने वाले लोगों की मंशा अच्छी हो सकती है, लेकिन यह तरीका शायद गलत है। ऐसे बदलावों के कारण बच्चे अपनी जरूरत की वेबसाइट्स तक पहुंचने से भी वंचित हो सकते हैं।<br />प्रोफेसर क्रॉफ्ट ने सचेत करते हुए कहा, "इस प्रतिबंध के कारण एक बड़ा जोखिम यह होगा कि यूजर्स और भी खराब या डार्क साइट्स की तरफ रुख कर लेंगे। साथ ही, बच्चों के पर्सनल डिवाइसेज पर नजर रखना तकनीकी रूप से लगभग असंभव है। इसके बजाय प्लेटफॉर्म्स पर नकेल कसना कहीं अधिक आसान है, बशर्ते रेगुलेटर्स थोड़ी मेहनत करने को तैयार हों।"</div>
</div>
<div class="message-action-buttons-container"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विश्व</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 17:57:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एक व्यक्ति ने 34वीं मंज़िल पर फ्लैट खरीदा, लेकिन इमारत निकली सिर्फ 32 मंज़िला! बिल्डर ने झूठ बोलकर बेच दिया घर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>आज के समय में अपना घर होना हर किसी का सपना होता है। लोग वर्षों तक बचत करते हैं, लोन लेते हैं, और तभी वे आखिरकार अपना घर खरीदने का सपना पूरा कर पाते हैं। लेकिन घर खरीदने के बाद अगर उन्हें पता चले कि जिस मंज़िल के लिए उन्होंने पैसे चुकाए थे, उस अपार्टमेंट में उतनी मंज़िलें हैं ही नहीं, तो सोचिए उस व्यक्ति पर क्या बीती होगी।</p>
<p>चीन के शान्शी प्रांत में रहने वाले एक व्यक्ति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उसने एक नए आवासीय प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक कराया। कीमत बाज़ार दर से काफी कम</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/world/a-person-bought-a-flat-on-the-34th-floor-but/article-2376"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/man-buys-34th-floor-flat2.webp" alt=""></a><br /><p>आज के समय में अपना घर होना हर किसी का सपना होता है। लोग वर्षों तक बचत करते हैं, लोन लेते हैं, और तभी वे आखिरकार अपना घर खरीदने का सपना पूरा कर पाते हैं। लेकिन घर खरीदने के बाद अगर उन्हें पता चले कि जिस मंज़िल के लिए उन्होंने पैसे चुकाए थे, उस अपार्टमेंट में उतनी मंज़िलें हैं ही नहीं, तो सोचिए उस व्यक्ति पर क्या बीती होगी।</p>
<p>चीन के शान्शी प्रांत में रहने वाले एक व्यक्ति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उसने एक नए आवासीय प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक कराया। कीमत बाज़ार दर से काफी कम थी, इसलिए उसे लगा कि यह एक अच्छा सौदा है। आमतौर पर लोग घर खरीदने से पहले दस्तावेज़ों, स्थान और बिल्डर के बारे में जांच-पड़ताल करते हैं। हालांकि, एक चीनी व्यक्ति ने अनजाने में एक बहुमंज़िला इमारत की 34वीं मंज़िल पर फ्लैट खरीद लिया, जबकि पूरी इमारत में केवल 32 मंज़िलें ही थीं। कुछ वर्षों बाद जब उसे सच्चाई का पता चला, तो उसके पैरों तले ज़मीन खिसक गई।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/man-buys-34th-floor-flat.webp" alt="man-buys-34th-floor-flat" width="1280" height="720"></img>
aajtak.in

<p>चीन के एक स्थानीय अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, शेन नाम के एक व्यक्ति ने 2013 में शियान के पास एक नए हाउसिंग प्रोजेक्ट में एक फ्लैट खरीदा था। फ्लैट का क्षेत्रफल लगभग 90 वर्ग मीटर था, और उसे बताया गया था कि उसका घर 34वीं मंज़िल पर होगा। उस समय इस प्रोजेक्ट में फ्लैट की कीमत बाज़ार भाव से लगभग एक-तिहाई थी। कम कीमत देखकर शेन ने मौका हाथ से नहीं जाने दिया और डेवलपर को डाउन पेमेंट के रूप में 117,700 युआन जमा करा दिए। डेवलपर ने उसे भरोसा दिलाया कि बाकी कागज़ी कार्रवाई बाद में पूरी कर ली जाएगी और समय पर उसे फ्लैट का कब्ज़ा भी मिल जाएगा।</p>
<p>फ्लैट खरीदने के बाद शेन अपने काम के लिए बीजिंग लौट गया। अनुबंध के अनुसार, उसे 2015 में फ्लैट मिल जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जब उसने डेवलपर से संपर्क किया, तो उन्होंने तरह-तरह के बहाने बनाए। आखिरकार 2017 में कंपनी ने दावा किया कि इमारत पूरी हो चुकी है और वह बाकी राशि चुकाकर फ्लैट ले सकता है। शेन ने ज़ोर देकर कहा कि पहले उसे फ्लैट की चाबी दी जाए, उसके बाद वह बाकी रकम चुकाएगा। यहीं से कहानी में बड़ा मोड़ आया।</p>
<p>कुछ समय बाद डेवलपर ने शेन को बताया कि जिस इमारत में उसका फ्लैट था, उसमें केवल 32 मंज़िलें ही थीं। इसका मतलब यह था कि जिस 34वीं मंज़िल पर उसने अपार्टमेंट खरीदा था, वह वास्तव में अस्तित्व में ही नहीं थी। यह सुनकर शेन स्तब्ध रह गया। शुरुआत में डेवलपर ने उसे 32वीं मंज़िल पर दूसरा फ्लैट देने की पेशकश की। हालांकि उस समय शेन के पास बाकी राशि चुकाने का समय नहीं था। जब उसने दो महीने बाद फिर संपर्क किया, तो डेवलपर ने बताया कि वह फ्लैट किसी और को दे दिया गया है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/man-buys-34th-floor-flat1.webp" alt="man-buys-34th-floor-flat1" width="1280" height="720"></img>
india.com

<p>फ्लैट न मिलने के बाद शेन ने अपने पैसे वापस मांगे। लेकिन डेवलपर ने यह कहकर इंकार कर दिया कि उनके पास फिलहाल पैसे नहीं हैं। कई वर्षों तक इंतज़ार करने के बाद 2020 में उसे केवल 20,000 युआन वापस मिले। फिर 2022 में उसे और 50,000 युआन मिले। इसके बाद कंपनी ने लगभग उससे संपर्क करना बंद कर दिया। शेन अपनी बाकी रकम के लिए लगातार अनुरोध करता रहा, लेकिन कंपनी की ओर से उसे कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।</p>
<p>जब डेवलपर इस मामले को सुलझाने में असफल रहा, तो शेन ने स्थानीय प्रशासन और मध्यस्थता आयोग (आर्बिट्रेशन कमिशन) से संपर्क किया। जांच के बाद आयोग ने डेवलपर को शेष 47,700 युआन और उस राशि पर ब्याज लौटाने का आदेश दिया। साथ ही यह भी शर्त रखी गई कि यदि कंपनी समय पर भुगतान करने में विफल रहती है, तो उसे अतिरिक्त मुआवज़ा भी देना होगा। हालांकि आदेश जारी होने के बाद भी शेन को उसकी पूरी राशि नहीं मिली। उसे यह मामला अदालत में ले जाना पड़ा।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/man-buys-34th-floor-flat3.webp" alt="man-buys-34th-floor-flat3" width="1280" height="720"></img>
moneycontrol.com

<p>सुनवाई के दौरान अदालत ने डेवलपर पर कई प्रतिबंध लगा दिए। लेकिन जांच में पता चला कि कंपनी या उसके सहयोगियों के पास ऐसी कोई संपत्ति या बचत नहीं है, जिससे पैसा वसूला जा सके। यही कारण है कि कानूनी लड़ाई जीतने के बावजूद शेन आज भी अपनी पूरी रकम मिलने का इंतज़ार कर रहा है।</p>
<p>यह घटना सामने आने के बाद लोगों ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं दीं। कई लोगों ने कहा कि इस तरह के कम कीमत वाले प्रोजेक्ट अक्सर जोखिम भरे होते हैं और लोगों को निवेश करने से पहले पूरी तरह जांच-पड़ताल कर लेनी चाहिए। कुछ उपयोगकर्ताओं ने शेन के प्रति सहानुभूति जताई, जबकि कई लोगों ने माना कि सस्ते घर के लालच में लोग कभी-कभी ऐसे प्रोजेक्ट्स में निवेश कर देते हैं जिनकी कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं होती।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विश्व</category>
                                    

                <link>https://hindi.khabarchhe.com/world/a-person-bought-a-flat-on-the-34th-floor-but/article-2376</link>
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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 21:19:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Hindi Khabarchhe]]></dc:creator>
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                <title>एंकर ने ऐसा सवाल पूछा कि गुस्से में ट्रम्प ने माइक फेंकते हुए बोले- ‘आप बेईमान हैं’, इंटरव्यू छोड़कर चले गए</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का एक टीवी इंटरव्यू तीखी बहस में बदल गया। इंटरव्यू के दौरान ट्रम्प ने ऊंची आवाज़ में प्रतिक्रिया दी और उसके बाद बीच में ही इंटरव्यू छोड़कर चले गए। यह इंटरव्यू सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई है, जिसके कारण उनके समर्थकों और विरोधियों दोनों की ओर से विभिन्न प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।</p>
<p>यह घटना अमेरिकी टीवी कार्यक्रम ‘मीट द प्रेस’ के दौरान हुई थी। पत्रकार क्रिस्टन वेल्कर ट्रम्प से उनके नए एंटी-वेपनाइज्ड फंड और 6 जनवरी, 2021 को हुए कैपिटोल हिल दंगों से जुड़े दावों के बारे में सवाल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/world/the-anchor-asked-such-a-question-that-in-anger-trump/article-2370"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-06/394.webp" alt=""></a><br /><p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का एक टीवी इंटरव्यू तीखी बहस में बदल गया। इंटरव्यू के दौरान ट्रम्प ने ऊंची आवाज़ में प्रतिक्रिया दी और उसके बाद बीच में ही इंटरव्यू छोड़कर चले गए। यह इंटरव्यू सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई है, जिसके कारण उनके समर्थकों और विरोधियों दोनों की ओर से विभिन्न प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।</p>
<p>यह घटना अमेरिकी टीवी कार्यक्रम ‘मीट द प्रेस’ के दौरान हुई थी। पत्रकार क्रिस्टन वेल्कर ट्रम्प से उनके नए एंटी-वेपनाइज्ड फंड और 6 जनवरी, 2021 को हुए कैपिटोल हिल दंगों से जुड़े दावों के बारे में सवाल कर रही थीं। ट्रम्प ने जवाब दिया कि या तो आप बेईमान हैं या मूर्ख, और ‘मीट द प्रेस’ भी बेईमान है। ABC, CBS और CNN भी बेईमान हैं।</p>
<p>यह प्रतिक्रिया उस सवाल के जवाब में दी गई, जब वेल्कर ने ट्रम्प पर इस बात को लेकर दबाव बनाया कि क्या वे अपने 1.8 अरब डॉलर के एंटी-वेपनाइजेशन फंड को आगे बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। इस फंड का उद्देश्य उन लोगों की मदद करना है जो सरकार द्वारा उत्पीड़न का दावा करते हैं, जिनमें 6 जनवरी को कैपिटोल में घुसे लोगों को भी शामिल किया गया है।</p>
<p>बहस तब और तेज हो गई, जब ट्रम्प ने दावा किया कि 6 जनवरी की घटनाओं में शामिल कुछ लोगों को गलत तरीके से निशाना बनाया गया था। FBI एजेंट उस दिन प्रदर्शनकारियों को इमारत के अंदर ले जा रहे थे। वेल्कर ने तुरंत इस दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसके समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-06/384.webp" alt="384" width="1280" height="720"></img>
x.com/sentdefender

<p>इसके बाद ट्रम्प ने कहा कि उनके पास सबूत हैं और फिर उन्होंने 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में धांधली के अपने लंबे समय से लगाए जा रहे आरोपों को दोहराया। वेल्कर लगातार उनसे सबूत मांगती रहीं, जबकि ट्रम्प अपने रुख पर अड़े रहे।</p>
<p>कुछ ही समय में माहौल और गर्म हो गया। ट्रम्प ने मीडिया पर हमला करते हुए कहा कि प्रेस बेईमान है; वेल्कर ने जवाब में कहा कि वे ईमानदारी से अपना काम कर रही हैं। बहस इतनी बढ़ गई कि ट्रम्प ने वेल्कर से कहा कि या तो आप बेईमान हैं या आपको जानकारी नहीं है। इसके बाद उन्होंने इंटरव्यू कार्यक्रम और नेटवर्क की कड़ी आलोचना की और इंटरव्यू छोड़ दिया।</p>
<p>जाने से पहले ट्रम्प ने कहा- ‘बस, अब बहुत हो गया। यहीं समाप्त करते हैं।’ इतना कहकर वे बातचीत के बीच में ही चले गए। शुक्रवार को विस्कॉन्सिन में रिकॉर्ड किया गया यह इंटरव्यू रविवार को प्रसारित हुआ। इसके बाद सोशल मीडिया पर इसकी खूब चर्चा होने लगी; समर्थकों ने ट्रम्प का बचाव किया, जबकि आलोचकों ने इसे कठिन सवालों से बचने की कोशिश बताया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विश्व</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 15:57:04 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सुनवाई के दौरान अपने चैंबर में पुलिसकर्मी के साथ संबंध बनाती थी जज; हुई कड़ी कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अमेरिका के अटलांटा से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें अदालत की सुनवाई के दौरान एक जज पुलिस अधिकारी के साथ अंतरंग हो जाती थी। इस दौरान उसे इतनी भी परवाह नहीं रहती थी कि बगल में अदालत की कार्यवाही चल रही है और बड़ी संख्या में लोग मौजूद हैं। चैंबर से आने वाली आवाजें लोगों को असहज कर देती थीं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, संघीय जज एलियानोर रॉस और एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के बीच लंबे समय से संबंध थे। दोनों पहले से विवाहित थे।</p>
<p>इस मामले से परिचित लोगों के अनुसार, केली कोलियर अटलांटा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/world/-draft--add-your-title/article-2322"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-05/judge2.webp" alt=""></a><br /><p>अमेरिका के अटलांटा से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें अदालत की सुनवाई के दौरान एक जज पुलिस अधिकारी के साथ अंतरंग हो जाती थी। इस दौरान उसे इतनी भी परवाह नहीं रहती थी कि बगल में अदालत की कार्यवाही चल रही है और बड़ी संख्या में लोग मौजूद हैं। चैंबर से आने वाली आवाजें लोगों को असहज कर देती थीं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, संघीय जज एलियानोर रॉस और एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के बीच लंबे समय से संबंध थे। दोनों पहले से विवाहित थे।</p>
<p>इस मामले से परिचित लोगों के अनुसार, केली कोलियर अटलांटा पुलिस विभाग में एक वरिष्ठ अधिकारी हैं। वहीं, पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन के दौरान रॉस की नियुक्ति की गई थी। 55 वर्षीय कोलियर वर्तमान में अटलांटा पुलिस विभाग में कम्युनिटी सर्विस डिवीजन के कमांडर के रूप में कार्यरत हैं। जज और पुलिस अधिकारी की हरकतों का खुलासा होने के बाद पुलिस विभाग ने जांच शुरू कर दी है।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-05/judge1-(1).webp" alt="judge1 (1)" width="1280" height="720"></img>
bhattandjoshiassociates.com

<p>न्यायिक समिति में दायर शिकायत में कहा गया है कि सुनवाई के दौरान भी जज रॉस और कोलियर अक्सर अकेले रहते थे, जिससे बाहर बैठे लोगों को असहजता महसूस होती थी। शुक्रवार शाम को कोलियर को इस मामले में नोटिस दिया गया था। हालांकि, उनके कार्यालय ने जवाब दिया कि वे फिलहाल शहर से बाहर हैं। अदालत के दस्तावेजों के अनुसार, रॉस पिछले दो वर्षों से अटलांटा अदालत में कार्यरत हैं और नियमित रूप से आपराधिक मामलों की सुनवाई करती हैं। उन पर विवाहेतर संबंधों के आरोप लगाए गए हैं।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-05/photo-(2)26.webp" alt="photo-(2)26" width="1280" height="720"></img></p>
<p>जांच समिति ने बताया कि कोलियर 1998 से अटलांटा में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कोलियर एनालिटिक्स, कंप्यूटर टेक्नोलॉजी और प्रबंधन से जुड़ी रणनीतियां तैयार करने के लिए जाने जाते हैं। रॉस को 2014 में जॉर्जिया के उत्तरी जिला न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था। उनका नाम पहले राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल होने को लेकर भी चर्चा में आया था, हालांकि उन्होंने इन आरोपों से इनकार किया था।</p>
<p>न्यायाधीश रॉस ने जॉर्जिया स्टेट कोर्ट के न्यायाधीश ब्रायन रॉस से विवाह किया था। शुरुआत में न्यायाधीश ने सभी आरोपों से इनकार किया था। हालांकि, जांच समिति द्वारा उनके खिलाफ सबूत इकट्ठा किए जाने के बाद न्यायाधीश पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए। उन्हें संघीय अदालत के मुख्य न्यायाधीश बनने और न्यायिक समितियों में सेवा देने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसके अलावा, न्यायाधीश को अपने कम से कम 6 कर्मचारियों से लिखित रूप में माफी मांगने का आदेश दिया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विश्व</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 21:38:54 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>ईरान को होर्मुज़ स्ट्रेट पर नियंत्रण क्यों नहीं मिलना चाहिए? विशेषज्ञ ने बताया सबसे बड़ा डर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर चल रहा तनाव दुनिया के लिए और अधिक मुश्किलें पैदा करता हुआ दिखाई दे रहा है। इस बीच, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है, जिसमें कहा गया है कि यदि ईरान को होर्मुज़ स्ट्रेट पर प्रभावी नियंत्रण मिल जाता है, तो दुनिया को लंबे समय तक आर्थिक और रणनीतिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p>जॉन बोल्टन ने कहा कि ईरान वर्षों से होर्मुज़ स्ट्रेट को बंद करने की धमकी देता रहा है, लेकिन दुनिया ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। अब</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/world/6a17e63bac399/article-2302"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-05/strait-of-hormuz1.webp" alt=""></a><br /><p>अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर चल रहा तनाव दुनिया के लिए और अधिक मुश्किलें पैदा करता हुआ दिखाई दे रहा है। इस बीच, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है, जिसमें कहा गया है कि यदि ईरान को होर्मुज़ स्ट्रेट पर प्रभावी नियंत्रण मिल जाता है, तो दुनिया को लंबे समय तक आर्थिक और रणनीतिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p>जॉन बोल्टन ने कहा कि ईरान वर्षों से होर्मुज़ स्ट्रेट को बंद करने की धमकी देता रहा है, लेकिन दुनिया ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। अब जब ईरान ने वास्तव में जलमार्ग बंद कर दिया है और बल प्रयोग की धमकी दी है, तब वैश्विक शक्तियों को इसकी गंभीरता समझ में आ रही है।</p>
<p>अमेरिकी विशेषज्ञ बोल्टन ने कहा कि ईरान की वर्तमान रणनीति केवल बातचीत के जरिए स्ट्रेट खोलने की नहीं है, बल्कि दुनिया को यह दिखाने की है कि स्ट्रेट पर उसका नियंत्रण है और खाड़ी देशों से तेल निकालने के लिए उससे बातचीत करनी पड़ेगी।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-05/strait-of-hormuz11.webp" alt="strait-of-hormuz11" width="1280" height="720"></img>
news.usni.org

<p>जॉन बोल्टन के अनुसार, यदि अमेरिका और पश्चिमी देश दबाव में आकर फिलहाल ईरान के साथ ऐसा समझौता कर लेते हैं, जिसमें तेहरान अपनी शर्तों पर होर्मुज़ स्ट्रेट खोलता है, तो भविष्य में ईरान इस समुद्री मार्ग का इस्तेमाल लाइट स्विच की तरह करेगा—जब चाहेगा तब इसे खोलेगा और जब चाहेगा तब बंद कर देगा।</p>
<p>जॉन बोल्टन ने कहा, “अगर दुनिया आज ताकत दिखाने के लिए तैयार नहीं है, तो भविष्य में कौन होगा?” यह केवल ईरान का मामला नहीं है; यह दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की व्यवस्था को बदल सकता है। बोल्टन ने चेतावनी दी कि यदि यह उदाहरण स्थापित हो जाता है, तो इसका असर केवल होर्मुज़ स्ट्रेट पर ही नहीं, बल्कि दुनिया के अन्य महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर भी पड़ेगा। उन्होंने तुर्की में डार्डानेल्स और बोस्फोरस स्ट्रेट तथा मलेशिया-इंडोनेशिया के बीच मलक्का स्ट्रेट का उदाहरण दिया।</p>
<img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-05/strait-of-hormuz2.webp" alt="strait-of-hormuz2" width="1280" height="720"></img>
iranintl.com

<p>जॉन बोल्टन ने कहा कि सदियों से इन जलमार्गों को अंतरराष्ट्रीय मार्ग माना जाता रहा है, जहां सभी देशों के जहाजों को स्वतंत्र रूप से गुजरने का अधिकार है। यदि यह सिद्धांत कमजोर पड़ता है, तो वैश्विक व्यापार और समुद्री सुरक्षा की पूरी व्यवस्था खतरे में पड़ जाएगी। बोल्टन ने “प्रोजेक्ट फ्रीडम” का उल्लेख करते हुए कहा कि अमेरिका ने कुछ समय तक सैन्य सुरक्षा प्रदान करके शिपिंग को फिर से बहाल करने की कोशिश की थी। इस दौरान, दुनिया की सबसे बड़ी शिपिंग कंपनी मार्स्क का एक जहाज स्ट्रेट से गुजरा था। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी युद्धपोतों पर ईरानी ड्रोन और स्पीडबोट से हमला किया गया था, लेकिन अमेरिकी नौसेना ने जवाबी कार्रवाई की थी।</p>
<p>हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि सैन्य समाधान आसान नहीं है, लेकिन ईरान को नियंत्रण सौंपना भविष्य में बड़ा खतरा पैदा कर सकता है। बोल्टन ने कहा कि होर्मुज़ स्ट्रेट का मुद्दा केवल तेल और गैस तक सीमित नहीं है। असली सवाल समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता का है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विश्व</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 16:22:43 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ लंबे समय तक न खुले तो क्या होगा? 1967 के इतिहास की पुनरावृत्ति वैश्विक आर्थिक महामंदी ला सकती है</title>
                                    <description><![CDATA[<p>जब 1967 में मिस्र और इज़रायल के बीच युद्ध छिड़ा और स्वेज नहर बंद हो गई, तब 15 जहाज़ उसजलमार्ग के भीतर फँस गए थे। युद्ध तो केवल छह दिनों में ही समाप्त हो गया (जिसे 'सिक्स-डे वॉर' कहा जाता है), लेकिन स्वेज नहर पूरे 8 वर्षों तक बंद रही। जब 1975 में इन जहाज़ों को बाहर निकालने की अनुमति मिली, तब उनमें से केवल 2 जहाज़ ही समुद्र में चलने लायक बचे थे, बाकी सभी जंग खा चुके थे और उन्हें 'येलो फ्लीट' (Yellow Fleet) नाम दिया गया था।</p>
<p>इतिहास शायद खुद को हूबहू दोहराता नहीं, लेकिन उसकी लय</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/world/what-will-happen-if-the-strait-of-hormuz-does-not/article-2283"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-05/strait-of-hormuz.jpg1.jpg2.jpg263.webp" alt=""></a><br /><p>जब 1967 में मिस्र और इज़रायल के बीच युद्ध छिड़ा और स्वेज नहर बंद हो गई, तब 15 जहाज़ उसजलमार्ग के भीतर फँस गए थे। युद्ध तो केवल छह दिनों में ही समाप्त हो गया (जिसे 'सिक्स-डे वॉर' कहा जाता है), लेकिन स्वेज नहर पूरे 8 वर्षों तक बंद रही। जब 1975 में इन जहाज़ों को बाहर निकालने की अनुमति मिली, तब उनमें से केवल 2 जहाज़ ही समुद्र में चलने लायक बचे थे, बाकी सभी जंग खा चुके थे और उन्हें 'येलो फ्लीट' (Yellow Fleet) नाम दिया गया था।</p>
<p>इतिहास शायद खुद को हूबहू दोहराता नहीं, लेकिन उसकी लय जरूर मिलती-जुलती होती है। आज अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच युद्ध के कारण तेल और गैस का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़' (Strait of Hormuz) बंद हुए लगभग 90 दिन होने जा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि स्वेज नहर जैसा इतिहास यहाँ भी दोहराया गया और यह मार्ग लंबे समय तक बंद रहा, तो क्या होगा?</p>
<p>फिलहाल पाकिस्तानी मध्यस्थों के जरिए वॉशिंगटन और तेहरान के बीच युद्ध रोकने और इस चोकपॉइंट (मार्ग) को फिर से खोलने के लिए बातचीत चल रही है। लेकिन, यदि शुरुआती समझौता केवल एक पन्ने के सामान्य करार (MoU) तक सीमित रहेगा, तो क्या यह मार्ग पूरी तरह सुरक्षित हो पाएगा?</p>
<p>इसी आशंका के बीच यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) ने होर्मुज़ मार्ग को बायपास करने वाली अपनी दूसरी पाइपलाइन का काम तेज कर दिया है, जिसे वह 2027 तक शुरू करना चाहता है। यह बात दर्शाती है कि अबू धाबी को आशंका है कि यह समुद्री संकट काफी लंबे समय तक खिंच सकता है।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-05/photo-(2)24.webp" alt="photo-(2)24" width="1280" height="720"></img></p>
<p>अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी और फाइनेंस जगत के विशेषज्ञ मानते हैं कि होर्मुज़ अगले महीने या अधिकतम जुलाई तक खुल जाएगा। उनकी इस उम्मीद के पीछे कारण यह है कि यदि यह मार्ग बंद रहा तो ऊर्जा की कीमतें आसमान छू लेंगी और वैश्विक अर्थव्यवस्था को इतना बड़ा नुकसान होगा जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है।</p>
<p>अमेरिकी अर्थशास्त्री हर्बर्ट स्टीन का एक प्रसिद्ध नियम है: ‘यदि कोई चीज हमेशा के लिए नहीं चल सकती, तो वह रुक जाएगी।’ आज वॉल स्ट्रीट इस नियम के बदले हुए संस्करण पर भरोसा करके बैठा है कि: ‘होर्मुज़ हमेशा के लिए बंद नहीं रह सकता क्योंकि उससे अत्यधिक आर्थिक नुकसान होगा, इसलिए वह खुल ही जाएगा।’</p>
<p>समस्या यह है कि इस नाकेबंदी से अभी तक दोनों में से किसी भी पक्ष को इतना आर्थिक नुकसान नहीं हुआ है कि वे झुकने के लिए मजबूर हों। ट्रंप के लिए यह युद्ध अभी तक सस्ता साबित हुआ है। अमेरिकी शेयर बाज़ार (S&amp;P 500 इंडेक्स) युद्ध शुरू होने के बाद लगभग 10% बढ़ा है और ऑल-टाइम हाई के करीब है। पेट्रोल के दाम बढ़े हैं लेकिन वे 2022 के रिकॉर्ड स्तर से नीचे हैं। अमेरिका की दूसरी तिमाही की GDP ग्रोथ रेट भी 4% से अधिक रहने का अनुमान है।</p>
<p>ईरान में बेरोज़गारी बढ़ रही है, खाद्य महंगाई चरम पर है और उसकी मुद्रा लगातार गिर रही है। अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी के कारण वह तेल निर्यात नहीं कर पा रहा और उत्पादन घटाना पड़ा है। लेकिन ईरान पहले भी ऐसे बड़े आर्थिक झटके झेल चुका है, खासकर जब अस्तित्व का सवाल हो।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-05/strait-of-hormuz.webp" alt="strait-of-hormuz" width="1280" height="720"></img></p>
<p>फिलहाल, UAE के वरिष्ठ राजनयिकों ने तत्काल डील होने की संभावना 50-50 बताई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी बातचीत में 'थोड़ी प्रगति' होने की बात स्वीकार की है। पाकिस्तानी मध्यस्थ इस्लामाबाद और तेहरान के बीच लगातार दौड़धूप कर रहे हैं।</p>
<p><strong>अब तक वैश्विक बाज़ार ने स्थिति को कैसे संभाला?</strong></p>
<p>होर्मुज़ बंद होने से प्रतिदिन 2 करोड़ (20 million) बैरल तेल बाज़ार से गायब हो गया है। इसके बावजूद अब तक ऊर्जा संकट क्यों नहीं हुआ? इसके पीछे कारण इस प्रकार हैं:</p>
<ul>
<li> युद्ध शुरू होने के समय वैश्विक बाज़ार में तेल की सप्लाई जरूरत से अधिक थी।</li>
<li>सऊदी अरब और UAE ने अपनी बायपास पाइपलाइनों के जरिए पर्शियन गल्फ का तेल बहता रखा है।</li>
<li>अमीर देशों ने अपने रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) से स्टॉक निकाला है और अमेरिका ने भी विदेशों में सप्लाई भेजी है।</li>
<li>चीन ने अचानक अपनी तेल आयात में बड़ा कटौती कर दी है।</li>
<li> कीमतें बढ़ने के कारण गरीब देशों की खरीद शक्ति घट गई है, जिससे मांग कम हुई है।</li>
</ul>
<p><strong><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-05/strait-of-hormuz.jpg1.jpg2.webp" alt="strait-of-hormuz.jpg1.jpg2" width="1280" height="720"></img></strong></p>
<p><strong>यदि होर्मुज़ 2026 के अंत तक या 2027 तक बंद रहे तो?</strong></p>
<p>यदि यह स्थिति लंबी चली तो वैश्विक स्तर पर तेल की ऊँची कीमतें उपभोक्ताओं को खरीदारी बंद करने के लिए मजबूर कर देंगी। शुरुआत में क्रूड ऑयल $200 प्रति बैरल होने की जो भविष्यवाणियाँ गलत साबित हुई थीं, वे सही साबित हो सकती हैं। यदि ईरान इस मार्ग पर आंशिक नियंत्रण बनाए रखेगा, तब भी कीमतें नीचे नहीं आएंगी।</p>
<p><strong>वैश्विक महामंदी का खतरा</strong></p>
<p>स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ दुनिया की कुल तेल सप्लाई के 10% से 15% हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। दुनिया इस हिस्से के बिना जी सकती है, लेकिन इसकी कीमत बहुत भारी चुकानी पड़ेगी। स्थायी रूप से इतना बड़ा उपभोग घटाने का सीधा अर्थ 1973 और 1979 जैसी वैश्विक आर्थिक महामंदी (Gloal Recession) का सामना करना होगा।</p>
<p>बायपास के लिए नई पाइपलाइन बनाने में वर्षों लगेंगे। 2027 तक UAE अपनी क्षमता दोगुनी कर लेगा, सऊदी अरब को अभी और समय लगेगा, जबकि कुवैत और इराक को उससे भी अधिक समय लगेगा। कतर के पास तो लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) निर्यात करने के लिए होर्मुज़ के अलावा कोई अन्य व्यावहारिक मार्ग ही नहीं है।</p>
<p>होर्मुज़ का लंबे समय तक बंद रहना इतना विनाशकारी है कि कोई उसके बारे में सोचने तक को तैयार नहीं है। इसी कारण सबसे अधिक संभावना इसी बात की है कि दोनों पक्षों के बीच कोई कामचलाऊ और समझौतापूर्ण शॉर्ट-टर्म डील हो जाए। लेकिन यदि ऐसा नहीं हुआ, तो भविष्य के दृश्य बेहद भयावह हो सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विश्व</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 May 2026 18:37:12 +0530</pubDate>
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