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                <title>Dr. Dinky Gajiwala - Khabarchhe Hindi</title>
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                <description>Dr. Dinky Gajiwala RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पिता की कैंसर से मौत के बाद सूरत के बेटे ने छोड़ी रासायनिक खेती, प्राकृतिक खेती से बन गए मिसाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>आज के समय में कैंसर जैसी बीमारियों के पीछे रासायनिक खाद और खाने में पहुंचने वाले जहरीले तत्वों को भी एक बड़ा कारण माना जाता है। हालांकि अभी तक इसका पूरी तरह समाधान नहीं मिल पाया है। देश की बढ़ती आबादी को देखते हुए पूरी तरह रासायनिक खेती बंद करना आसान नहीं है, लेकिन छोटे-छोटे प्रयासों से बदलाव जरूर लाया जा सकता है। सूरत से एक ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहां पिता की कैंसर से मौत के बाद बेटे ने अपनी खेती में रासायनिक खाद का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दिया।</p>
<p>यह मामला सूरत जिले के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/charcha-patra/surats-son-left-chemical-farming-after-his-fathers-death-from/article-2305"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-05/dinky.webp" alt=""></a><br /><p>आज के समय में कैंसर जैसी बीमारियों के पीछे रासायनिक खाद और खाने में पहुंचने वाले जहरीले तत्वों को भी एक बड़ा कारण माना जाता है। हालांकि अभी तक इसका पूरी तरह समाधान नहीं मिल पाया है। देश की बढ़ती आबादी को देखते हुए पूरी तरह रासायनिक खेती बंद करना आसान नहीं है, लेकिन छोटे-छोटे प्रयासों से बदलाव जरूर लाया जा सकता है। सूरत से एक ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहां पिता की कैंसर से मौत के बाद बेटे ने अपनी खेती में रासायनिक खाद का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दिया।</p>
<p>यह मामला सूरत जिले के ओलपाड तहसील के सरस गांव के किसान कल्पेश पटेल का है। उन्होंने अपने निजी दुख को समाज के लिए प्रेरणा बना दिया। पिता की कैंसर से मौत के बाद उन्होंने रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती अपनाई। आज वह गुजरात के सफल प्राकृतिक किसानों में गिने जाते हैं।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-05/0332.webp" alt="0332" width="1280" height="720"></img></p>
<p>कल्पेश पटेल के पिता रमणभाई पटेल कई वर्षों तक खेतों में रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल करते थे। कल्पेश बताते हैं कि उनके पिता के शरीर से हमेशा कीटनाशकों जैसी गंध आती थी। जब उनके पिता को कैंसर हुआ, तब उन्हें एहसास हुआ कि रासायनिक खेती का स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। पिता के निधन के बाद उन्होंने फैसला किया कि अब खेती में जहरीले रसायनों का इस्तेमाल नहीं करेंगे।<br />साल 2019 में कल्पेश ने अपनी जमीन पर प्राकृतिक खेती का प्रयोग शुरू किया। सूरत की एक निजी कंपनी में केमिकल ऑपरेटर की नौकरी के साथ-साथ उन्होंने गुजरात कृषि विभाग द्वारा आयोजित प्रशिक्षण में हिस्सा लिया और जीवामृत जैसी प्राकृतिक खेती की तकनीकें सीखीं।<br />आज वह करीब साढ़े तीन बीघा जमीन में 50 से ज्यादा किस्म के केले उगा रहे हैं। इनमें पूवन, रस्ताली, बसराई, लाल केला, इलायची और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय ब्लू जावा जैसी किस्में शामिल हैं। उनके खेत में पैदा होने वाले केले के गुच्छे आमतौर पर 30 किलो से ज्यादा वजन के होते हैं। साल 2025 में उनके खेत में 73 किलो वजन का केले का गुच्छा पैदा हुआ था, जिसने कृषि वैज्ञानिकों और देशभर के किसानों का ध्यान खींचा।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-05/0235.webp" alt="0235" width="1280" height="720"></img></p>
<p>कल्पेश पटेल के मुताबिक प्राकृतिक खेती अपनाने के बाद वह हर साल प्रति बीघा 15 से 20 हजार रुपये तक की बचत कर रहे हैं। जमीन की गुणवत्ता सुधरने से उत्पादन में भी बड़ा इजाफा हुआ है। फिलहाल वह साढ़े तीन बीघा जमीन से हर साल करीब 10 से 12 लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं।</p>
<p>इसके अलावा वह बचे हुए केलों से वेफर्स, बनाना पाउडर और ड्राय बनाना फिग जैसी चीजें भी तैयार करते हैं।<br />कल्पेश पटेल की यह कहानी समाज के लिए प्रेरणा है। उन्होंने साबित कर दिया कि सिर्फ रासायनिक खाद से ही सफल खेती संभव नहीं है, प्राकृतिक खेती से भी अच्छी कमाई और बेहतर जीवन पाया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चर्चा पत्र</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 13:30:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dr. Dinky Gajiwala]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अक्षय कुमार ने अपने पिता को खोया, पुरुषों को PSA टेस्ट करवाने की सलाह दी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>जाने-माने फिल्म अभिनेता और स्वास्थ्य कार्यकर्ता अक्षय कुमार ने अपने पिता का उदाहरण देते हुए सभी पुरुषों से नियमित रूप से PSA टेस्ट करवाने की अपील की है। भारत में प्रोस्टेट कैंसर के बारे में जागरूकता की कमी अभी भी एक गंभीर समस्या है। हाल ही में बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार ने अपने पिता की मृत्यु का ज़िक्र करते हुए पुरुषों से नियमित रूप से PSA टेस्ट करवाने की अपील की है। उनका कहना है कि सही समय पर टेस्ट न करवाने के कारण उनके परिवार को भारी नुकसान उठाना पड़ा।</p>
<p><strong>PSA टेस्ट क्या है और यह क्यों ज़रूरी है?</strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/charcha-patra/akshay-kumar-urges-men-to-get-regular-psa-tests-after-losing-his-father/article-2012"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-04/01.jpg" alt=""></a><br /><p>जाने-माने फिल्म अभिनेता और स्वास्थ्य कार्यकर्ता अक्षय कुमार ने अपने पिता का उदाहरण देते हुए सभी पुरुषों से नियमित रूप से PSA टेस्ट करवाने की अपील की है। भारत में प्रोस्टेट कैंसर के बारे में जागरूकता की कमी अभी भी एक गंभीर समस्या है। हाल ही में बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार ने अपने पिता की मृत्यु का ज़िक्र करते हुए पुरुषों से नियमित रूप से PSA टेस्ट करवाने की अपील की है। उनका कहना है कि सही समय पर टेस्ट न करवाने के कारण उनके परिवार को भारी नुकसान उठाना पड़ा।</p>
<p><strong>PSA टेस्ट क्या है और यह क्यों ज़रूरी है?</strong></p>
<p>PSA (प्रोस्टेट-स्पेसिफिक एंटीजन) एक तरह का प्रोटीन है जो प्रोस्टेट ग्रंथि द्वारा बनाया जाता है। इसका स्तर एक साधारण ब्लड टेस्ट के ज़रिए मापा जा सकता है। इस टेस्ट से प्रोस्टेट कैंसर का शुरुआती चरणों में ही पता लगाना संभव हो जाता है। अगर शुरुआती चरणों में ही इसका पता चल जाए, तो इसको ठीक किया जा सकता है। एक कैंसर विशेषज्ञ के तौर पर, मेरा मानना ​​है कि प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती दौर में अक्सर कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। इसलिए, लक्षण दिखने से पहले ही स्क्रीनिंग करवा लेने से जान बचाई जा सकती है।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-04/02.jpg" alt="02" width="1280" height="720"></img></p>
<p><strong>50 साल की उम्र के बाद खास ध्यान देने की क्यों ज़रूरत है?</strong></p>
<p>अध्ययन और क्लिनिकल अनुभव बताते हैं कि 50 साल से ज़्यादा उम्र के पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। अक्षय कुमार ने भी इसी बात पर ज़ोर दिया है कि इस उम्र के बाद हर साल PSA टेस्ट करवाना ज़रूरी है। अगर परिवार में किसी को कैंसर हुआ हो, तो कम उम्र में ही जांच शुरू कर देना ज़रूरी है।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-04/03.jpg" alt="03" width="1280" height="720"></img></p>
<p><strong>जागरूकता की कमी सबसे बड़ा खतरा</strong></p>
<p>भारत में पुरुष आमतौर पर अपने स्वास्थ्य को वह महत्व नहीं देते जिसके वे हकदार हैं। खासकर प्रोस्टेट जैसी समस्याओं में, शर्म, अज्ञानता और "कुछ नहीं होगा" जैसी सोच के कारण उनका पता देर से चल पाता है।</p>
<p>अक्षय कुमार ने कहा है कि अगर उन्हें समय पर PSA टेस्ट के बारे में पता होता, तो शायद वे अपने पिता को बचा पाते।</p>
<p>इसलिए एक कैंसर विशेषज्ञ के तौर पर मैं साफ तौर पर कहता हूं कि:</p>
<p>50 साल की उम्र के बाद नियमित रूप से PSA टेस्ट करवाएं</p>
<p>अगर परिवार में कैंसर का इतिहास रहा हो, तो कम उम्र में ही स्क्रीनिंग शुरू कर दें</p>
<p>पेशाब से जुड़े लक्षणों (बार-बार पेशाब आना, दर्द होना) को नज़रअंदाज़ न करें</p>
<p>सही समय पर पता चलना इलाज के बेहतर नतीजे</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चर्चा पत्र</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 15:50:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dr. Dinky Gajiwala]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कैंसर की mRNA वैक्सीन के बारे में अफवाहें क्यों फैलती हैं?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><span lang="hi" xml:lang="hi">कैंसर वैक्सीन ऐसी चिकित्सा पद्धति है जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) को कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और नष्ट करने के लिए प्रशिक्षित करती है। </span>mRNA <span lang="hi" xml:lang="hi">वैक्सीन तकनीक शरीर में एक प्रकार का संदेश (</span>mRNA) <span lang="hi" xml:lang="hi">भेजती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे शरीर प्रोटीन बनाता है और फिर रोग के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार हो जाता है। यह तकनीक </span>COVID-19<span lang="hi" xml:lang="hi"> के दौरान सफल रही थी और अब इसका उपयोग कैंसर उपचार में किया जा रहा है।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">साधारण भाषा में समझें तो जैसे घर बनाने से पहले उसका एक नक्शा तैयार किया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी प्रकार हमारे शरीर में </span>DNA </p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/charcha-patra/why-do-rumors-spread-about-cancer-mrna-vaccine/article-1995"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-03/0111.jpg" alt=""></a><br /><p><span lang="hi" xml:lang="hi">कैंसर वैक्सीन ऐसी चिकित्सा पद्धति है जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) को कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और नष्ट करने के लिए प्रशिक्षित करती है। </span>mRNA <span lang="hi" xml:lang="hi">वैक्सीन तकनीक शरीर में एक प्रकार का संदेश (</span>mRNA) <span lang="hi" xml:lang="hi">भेजती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे शरीर प्रोटीन बनाता है और फिर रोग के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार हो जाता है। यह तकनीक </span>COVID-19<span lang="hi" xml:lang="hi"> के दौरान सफल रही थी और अब इसका उपयोग कैंसर उपचार में किया जा रहा है।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">साधारण भाषा में समझें तो जैसे घर बनाने से पहले उसका एक नक्शा तैयार किया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी प्रकार हमारे शरीर में </span>DNA <span lang="hi" xml:lang="hi">होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो एक नक्शे की तरह काम करता है। इस नक्शे की जानकारी शरीर तक एक संदेशवाहक के माध्यम से पहुंचती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे </span>RNA <span lang="hi" xml:lang="hi">कहा जाता है। यह संदेशवाहक जो जानकारी देता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके आधार पर शरीर नई कोशिकाएं बनाता है। अब यदि बाहर से इस संदेशवाहक में कोई विशेष संदेश डालकर शरीर में भेजा जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो शरीर उसी के अनुसार काम करने लगता है। कैंसर की स्थिति में कुछ कोशिकाएं नियंत्रण से बाहर हो जाती हैं। ऐसे में </span>mRNA <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीक शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को फिर से सक्रिय कर उन्हें लड़ने के लिए तैयार करती है। इस प्रकार यह तकनीक बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।</span></p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-03/0211.jpg" alt="02" width="1280" height="720"></img></p>
<p><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">क्यों ला सकती है क्रांति</span>?</strong></p>
<p>mRNA <span lang="hi" xml:lang="hi">वैक्सीन व्यक्तिगत (पर्सनलाइज्ड) उपचार प्रदान कर सकती है। यह शरीर को सीधे कैंसर कोशिकाओं से लड़ने के लिए तैयार करती है। भविष्य में यह कैंसर को होने से पहले रोकने की संभावना भी पैदा कर सकती है। इसी कारण इसे चिकित्सा विज्ञान में एक बड़ा बदलाव (गेम-चेंजर) माना जा रहा है।</span></p>
<p><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अफवाहें क्यों फैलती हैं</span>?</strong></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">कैंसर उपचार की इस नई तकनीक के साथ एक बड़ी चुनौती भी सामने आई है—अफवाहें (</span>misinformation)<span lang="hi" xml:lang="hi">। लोगों में </span>mRNA <span lang="hi" xml:lang="hi">वैक्सीन को लेकर डर और भ्रम बढ़ रहा है।</span></p>
<p><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">विषय नया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन डर पुराना है</span></strong></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">नई तकनीक होने के कारण लोगों में स्वाभाविक रूप से शंका और डर पैदा होता है।</span></p>
<p><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया का प्रभाव</span></strong></p>
<p>WhatsApp, Facebook <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>YouTube <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे प्लेटफॉर्म पर अधूरी या भ्रामक जानकारी तेजी से फैलती है।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-03/0312.jpg" alt="03" width="1280" height="720"></img></span></p>
<p><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">विज्ञान की जटिलता</span></strong></p>
<p>mRNA <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसी तकनीक को समझना आसान नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे गलत जानकारी ज्यादा विश्वसनीय लगने लगती है।</span></p>
<p><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">विश्वास का संकट</span></strong></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार और दवा कंपनियों के प्रति अविश्वास भी अफवाहों को बढ़ावा देता है।</span></p>
<p><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वार्थ के लिए फैलती अफवाहें</span></strong></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ लोग लाभ के लिए डर फैलाते हैं।</span></p>
<p><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक मान्यताएं</span></strong></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">लोग अक्सर सुनी-सुनाई बातों पर भरोसा करते हैं।</span></p>
<p><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">विज्ञान बनाम गति</span></strong></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">जहां विज्ञान को समय लगता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं अफवाहें तेजी से फैलती हैं।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">अफवाहों का मुख्य कारण डर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जानकारी की कमी और तेज संचार है। इसका समाधान है—सही और सरल जानकारी का प्रसार।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"> मेरी लोगों को सलाह है कि किसी भी जानकारी को स्वीकार करने से पहले यह जांचें कि:</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"> क्या स्रोत विश्वसनीय है</span>?</p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"> क्या उसमें किसी का स्वार्थ है</span>?</p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"> क्या यह जनहित में है</span>?</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चर्चा पत्र</category>
                                    

                <link>https://hindi.khabarchhe.com/charcha-patra/why-do-rumors-spread-about-cancer-mrna-vaccine/article-1995</link>
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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 17:43:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dr. Dinky Gajiwala]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत में कैंसर की स्थिति क्या है, सरकार क्या कर रही है?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में कैंसर के मामलों में पिछले कुछ वर्षों में चिंताजनक वृद्धि देखी जा रही है। हाल ही में संसद में दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष </span>2021<span lang="hi" xml:lang="hi"> के बाद से हर साल औसतन लगभग </span>28,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> नए कैंसर के मामले और लगभग </span>15,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> अतिरिक्त मौतें दर्ज हो रही हैं। ये आंकड़े देश की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती को दर्शाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसके साथ ही केंद्र सरकार और स्वास्थ्य तंत्र कैंसर से लड़ने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम भी उठा रहे हैं।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे कई कारण बताए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/charcha-patra/what-is-the-status-of-cancer-in-india--and-what-is-the-government-doing/article-1898"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-03/014.jpg" alt=""></a><br /><p><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में कैंसर के मामलों में पिछले कुछ वर्षों में चिंताजनक वृद्धि देखी जा रही है। हाल ही में संसद में दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष </span>2021<span lang="hi" xml:lang="hi"> के बाद से हर साल औसतन लगभग </span>28,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> नए कैंसर के मामले और लगभग </span>15,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> अतिरिक्त मौतें दर्ज हो रही हैं। ये आंकड़े देश की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती को दर्शाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसके साथ ही केंद्र सरकार और स्वास्थ्य तंत्र कैंसर से लड़ने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम भी उठा रहे हैं।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे कई कारण बताए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार लोगों की औसत आयु बढ़ना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बुजुर्ग आबादी का बढ़ना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेहतर जांच तकनीकों का उपलब्ध होना और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ना भी इन आंकड़ों में वृद्धि का कारण है। इसका अर्थ यह भी है कि अब पहले की तुलना में अधिक मामलों की समय पर पहचान हो पा रही है।</span></p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-03/024.jpg" alt="02" width="1280" height="720"></img></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष </span>2019<span lang="hi" xml:lang="hi"> में भारत में लगभग </span>13.5<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख कैंसर के मामले दर्ज किए गए थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो </span>2024<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक बढ़कर लगभग </span>15.3<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख से अधिक हो गए हैं। इसी तरह कैंसर से होने वाली मौतों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। वर्ष </span>2023<span lang="hi" xml:lang="hi"> में करीब </span>8.2<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख लोगों की मौत कैंसर के कारण होने का अनुमान है।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">इस बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने कई स्वास्थ्य कार्यक्रम और योजनाएं शुरू की हैं। इनमें प्रमुख कार्यक्रम **नेशनल प्रोग्राम फॉर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ कैंसर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डायबिटीज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कार्डियोवैस्कुलर डिजीज एंड स्ट्रोक (</span>NPCDCS) <span lang="hi" xml:lang="hi">है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य कैंसर सहित गैर-संचारी रोगों की रोकथाम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समय पर जांच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उपचार और जागरूकता बढ़ाना है।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार के अनुसार इस योजना के तहत देशभर में </span>700<span lang="hi" xml:lang="hi"> से अधिक जिला स्तरीय </span>NCD <span lang="hi" xml:lang="hi">क्लीनिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लगभग </span>268<span lang="hi" xml:lang="hi"> डे-केयर सेंटर और हजारों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेष क्लीनिक स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों पर लोगों को कैंसर सहित विभिन्न रोगों की जांच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परामर्श और उपचार के लिए मार्गदर्शन दिया जाता है।</span></p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-03/034.jpg" alt="03" width="1280" height="720"></img></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">कैंसर की समय पर पहचान सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कई स्क्रीनिंग कार्यक्रम भी शुरू किए हैं। विशेष रूप से महिलाओं में पाए जाने वाले स्तन कैंसर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सर्वाइकल कैंसर और मुंह के कैंसर की जांच के लिए गांव और शहर दोनों स्तरों पर अभियान चलाए जा रहे हैं। यह कार्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत किया जा रहा है ताकि आम लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से पहुंच सकें।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके अलावा आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के माध्यम से गरीब और कमजोर वर्गों को मुफ्त या कम लागत में इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इस योजना के जरिए लाखों मरीजों को महंगे अस्पतालों में उपचार मिल पाया है।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार देशभर में आधुनिक कैंसर उपचार सुविधाओं का विस्तार भी कर रही है। कई सरकारी मेडिकल कॉलेजों और सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में रेडियोथेरेपी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कीमोथेरेपी और अन्य आधुनिक उपचार सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">विशेष रूप से महिलाओं में स्तन कैंसर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सर्वाइकल कैंसर और ओवेरियन कैंसर के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है। इसे देखते हुए सरकार ने महिलाओं के लिए विशेष जांच कार्यक्रम भी शुरू किए हैं।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">कैंसर के खिलाफ लड़ाई में शोध और आंकड़ों का भी महत्वपूर्ण योगदान है। भारत सरकार इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (</span>ICMR)  <span lang="hi" xml:lang="hi">के माध्यम से नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्रा  चला रही है। इसके तहत देशभर में कैंसर से जुड़े मामलों का डेटा एकत्र किया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे स्वास्थ्य नीतियों और योजनाओं के निर्माण में मदद मिलती है।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कैंसर से लड़ाई में तीन बातें सबसे महत्वपूर्ण हैं — समय पर जांच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सही उपचार और लोगों में जागरूकता। सरकार इन तीनों क्षेत्रों में प्रयास बढ़ा रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन बढ़ती आबादी और बदलती जीवनशैली के कारण चुनौतियां भी लगातार बढ़ रही हैं।</span></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चर्चा पत्र</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Mar 2026 15:09:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dr. Dinky Gajiwala]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकार लड़कियों को मुफ़्त एंटी-कैंसर HPV वैक्सीन देगी, PM मोदी 28 को लॉन्च करेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 फरवरी को अजमेर से HPV (ह्यूमन पैपिलोमावायरस) के खिलाफ़ देश भर में वैक्सीनेशन कैंपेन शुरू करने वाले हैं। इसका मुख्य मकसद महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर को कम करना है। सर्वाइकल कैंसर भारत में महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है और इसके लगभग 90% मामले HPV इन्फेक्शन की वजह से होते हैं। यह वैक्सीन न सिर्फ़ सर्वाइकल कैंसर बल्कि एनल कैंसर, पेनाइल कैंसर, वैजाइनल कैंसर, वल्वर कैंसर, गले के कैंसर में भी असरदार है। HPV एक आम तौर पर फैलने वाला वायरस है, जो ज़्यादातर फिजिकल कॉन्टैक्ट से फैलता है।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-02/024.jpg" alt="02" width="1200" height="720" /></p>
<p><strong>कैंपेन की खास बातें</strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/charcha-patra/pm-narendra-modi-to-launch-hpv-vaccination-drive/article-1829"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-02/013.jpg" alt=""></a><br /><p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 फरवरी को अजमेर से HPV (ह्यूमन पैपिलोमावायरस) के खिलाफ़ देश भर में वैक्सीनेशन कैंपेन शुरू करने वाले हैं। इसका मुख्य मकसद महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर को कम करना है। सर्वाइकल कैंसर भारत में महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है और इसके लगभग 90% मामले HPV इन्फेक्शन की वजह से होते हैं। यह वैक्सीन न सिर्फ़ सर्वाइकल कैंसर बल्कि एनल कैंसर, पेनाइल कैंसर, वैजाइनल कैंसर, वल्वर कैंसर, गले के कैंसर में भी असरदार है। HPV एक आम तौर पर फैलने वाला वायरस है, जो ज़्यादातर फिजिकल कॉन्टैक्ट से फैलता है।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-02/024.jpg" alt="02" width="1280" height="720"></img></p>
<p><strong>कैंपेन की खास बातें</strong></p>
<p>इस नेशनल कैंपेन के तहत, 14 साल की लड़कियों को HPV वैक्सीन की एक डोज़ दी जाएगी। हर साल लगभग 1.15 करोड़ लड़कियों को यह वैक्सीन देने का टारगेट है। अगर यह वैक्सीन टीनएज में दी जाए, तो ज़्यादा मज़बूत और लंबे समय तक चलने वाली सुरक्षा मिलती है।</p>
<p><strong>कौन सी वैक्सीन दी जाएगी?</strong></p>
<p>अभी के नेशनल कैंपेन में गार्डासिल वैक्सीन का इस्तेमाल किया जाएगा। भारत में बनाया गया Cervavac (Serum Institute) अभी इस्तेमाल नहीं हो रहा है क्योंकि इसे अभी WHO की मंज़ूरी का इंतज़ार है। मंज़ूरी के बाद इसे भविष्य में शामिल किया जा सकता है। GAVI वैक्सीन अलायंस भारत को 26 मिलियन डोज़ देगा, जिसमें से 10 मिलियन डोज़ पहले ही आ चुकी हैं।</p>
<p><strong>क्या एक डोज़ काफ़ी है?</strong></p>
<p>हाँ। WHO के एक्सपर्ट्स के मुताबिक, 9 से 20 साल की लड़कियों को एक डोज़ भी असरदार सुरक्षा देती है।<br />जबकि 21 साल से ज़्यादा उम्र की महिलाओं के लिए 2 डोज़ रिकमेंड की जाती हैं। कम इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए 3 डोज़ की सलाह दी जाती है।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-02/036.jpg" alt="03" width="1280" height="720"></img></p>
<p><strong>क्या यह भारत में पहली बार हो रहा है, क्या यह किसी और देश में दिया जा रहा है?</strong></p>
<p>ऑस्ट्रेलिया में HPV वैक्सीनेशन शुरू होने के बाद, जवान महिलाओं में HPV का फैलाव 22.7% से घटकर 1.5% हो गया। भारत में कुछ राज्यों ने पहले ही शुरू कर दिया है। सिक्किम ने 2018 में शुरू किया, जिसमें 95% से ज़्यादा लड़कियों को कवर किया गया। जबकि पंजाब ने 2016 में शुरू किया और 97% को वैक्सीन लगाई गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चर्चा पत्र</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 15:09:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dr. Dinky Gajiwala]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्या है मल्टीपल मायलोमा? जिसके कारण एक्ट्रेस प्रवीणा देशपांडे का 61 वर्ष की उम्र में निधन हुआ</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बॉलीवुड और टीवी की वरिष्ठ अभिनेत्री प्रवीणा देशपांडे का </span><span lang="gu" style="font-family:Shruti, sans-serif;" xml:lang="gu">61</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> वर्ष की उम्र में मंगलवार को निधन हो गया। यह जानकारी उनके परिवार ने उनके आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट के माध्यम से दी। मंगलवार दोपहर मुंबई के अंधेरी स्थित श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया। अभिनेत्री लंबे समय से कैंसर से जूझ रही थीं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">साल </span><span lang="gu" style="font-family:Shruti, sans-serif;" xml:lang="gu">2019</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> में उन्हें मल्टीपल मायलोमा का निदान हुआ था। बोन मैरो ट्रांसप्लांट के दौरान वे </span><span lang="gu" style="font-family:Shruti, sans-serif;" xml:lang="gu">17</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> दिनों तक आइसोलेशन में रहीं। कैंसर का पता चलने के बाद भी वे सक्रिय रहीं</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन उन्होंने बताया था कि उनकी ताकत लगातार कम हो रही थी</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/charcha-patra/what-is-multiple-myeloma/article-1777"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2026-02/dinky.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बॉलीवुड और टीवी की वरिष्ठ अभिनेत्री प्रवीणा देशपांडे का </span><span lang="gu" style="font-family:Shruti, sans-serif;" xml:lang="gu">61</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> वर्ष की उम्र में मंगलवार को निधन हो गया। यह जानकारी उनके परिवार ने उनके आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट के माध्यम से दी। मंगलवार दोपहर मुंबई के अंधेरी स्थित श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया। अभिनेत्री लंबे समय से कैंसर से जूझ रही थीं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">साल </span><span lang="gu" style="font-family:Shruti, sans-serif;" xml:lang="gu">2019</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> में उन्हें मल्टीपल मायलोमा का निदान हुआ था। बोन मैरो ट्रांसप्लांट के दौरान वे </span><span lang="gu" style="font-family:Shruti, sans-serif;" xml:lang="gu">17</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> दिनों तक आइसोलेशन में रहीं। कैंसर का पता चलने के बाद भी वे सक्रिय रहीं</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन उन्होंने बताया था कि उनकी ताकत लगातार कम हो रही थी और काम करने की क्षमता घटती जा रही थी। अंततः </span><span lang="gu" style="font-family:Shruti, sans-serif;" xml:lang="gu">17</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> फरवरी को उनका निधन हो गया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-02/021.jpg" alt="02" width="1280" height="720"></img></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रवीणा देशपांडे ने </span>Ready <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">में शालिनी चौधरी की भूमिका निभाई थी। इसके अलावा उन्होंने </span>Ek Villain,Gabbar Is Back <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">और </span>Parmanu: The Story of Pokhran <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जैसी फिल्मों में भी काम किया था। हाल ही में वे इमरान हाशमी की वेब सीरीज़ ‘तस्करी: द स्मगलर्स वेब’ में कैमियो रोल में नजर आई थीं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">क्या है मल्टीपल मायलोमा</span>?</p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मल्टीपल मायलोमा एक प्रकार का ब्लड कैंसर है। यह बोन मैरो की प्लाज़्मा कोशिकाओं में शुरू होता है। यह सामान्य रक्त कोशिकाओं को नष्ट करता है और असामान्य प्रोटीन बनाता है। इससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और किडनी को नुकसान हो सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2026-02/033.jpg" alt="03" width="1280" height="720"></img></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यह एक गंभीर लेकिन उपचार योग्य बीमारी है। कीमोथेरेपी और स्टेम सेल ट्रांसप्लांट के माध्यम से इसका इलाज किया जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लक्षण:</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><span> </span>रीढ़</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">छाती या कूल्हे में हड्डियों का दर्द</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><span> </span>थकान</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><span> </span>बार-बार संक्रमण</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><span> </span>किडनी की समस्या</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><span> </span>वजन कम होना</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कारण और जोखिम:</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सटीक कारण अज्ञात है</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन यह </span><span lang="gu" style="font-family:Shruti, sans-serif;" xml:lang="gu">60</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> वर्ष से अधिक उम्र के लोगों और पुरुषों में अधिक पाया जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">निदान:</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><span> </span>ब्लड और यूरिन टेस्ट (</span>M-spike <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">की जांच)</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><span> </span>बोन मैरो बायोप्सी</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><span> </span>हड्डियों का स्कैन</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">समय पर निदान और विशेषज्ञ ऑन्कोलॉजिस्ट की सलाह से इस रोग का प्रभावी प्रबंधन संभव है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चर्चा पत्र</category>
                                    

                <link>https://hindi.khabarchhe.com/charcha-patra/what-is-multiple-myeloma/article-1777</link>
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                <pubDate>Wed, 18 Feb 2026 16:11:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dr. Dinky Gajiwala]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रात को मोबाईल देखना आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को नुकसान पहुँचाता है!</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तेज़ रफ़्तार वाली जीवनशैली में लोग अक्सर देर रात तक मोबाइल चलाते हैं या </span>OTT <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पर ‘एक एपिसोड और’ देखने की आदत से नींद से समझौता करते हैं। यह आदत भले ही मामूली लगे</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन लगातार कम नींद शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को गंभीर रूप से कमजोर कर देती है। इससे थकान</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तनाव</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूजन और डायबिटीज़ जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गहरी नींद के दौरान शरीर में मेलाटोनिन जैसे जरूरी हार्मोन बनते हैं और प्रतिरक्षा प्रणाली की मरम्मत व मजबूती की प्रक्रिया सक्रिय रहती है। नींद का पैटर्न बिगड़ने पर शरीर को “रीचार्ज” होने का</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/charcha-patra/watching-mobile-at-night-can-sabotage-your-immunity/article-1375"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2025-12/011.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तेज़ रफ़्तार वाली जीवनशैली में लोग अक्सर देर रात तक मोबाइल चलाते हैं या </span>OTT <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पर ‘एक एपिसोड और’ देखने की आदत से नींद से समझौता करते हैं। यह आदत भले ही मामूली लगे</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन लगातार कम नींद शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को गंभीर रूप से कमजोर कर देती है। इससे थकान</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तनाव</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूजन और डायबिटीज़ जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गहरी नींद के दौरान शरीर में मेलाटोनिन जैसे जरूरी हार्मोन बनते हैं और प्रतिरक्षा प्रणाली की मरम्मत व मजबूती की प्रक्रिया सक्रिय रहती है। नींद का पैटर्न बिगड़ने पर शरीर को “रीचार्ज” होने का समय नहीं मिलता और रोगों तथा कैंसर जैसी गंभीर स्थितियों से बचाव करने वाली कोशिकाएँ कमज़ोर पड़ जाती हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2025-12/031.jpg" alt="03" width="1280" height="720"></img></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नींद को चिकित्सा प्राथमिकता बनाइए</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लंबे समय तक स्वस्थ रहना है — चाहे कैंसर का ख़तरा कम करना हो या अन्य बीमारियाँ टालनी हों — अच्छी नींद बेहद ज़रूरी है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मेरी सलाह:</span></strong></p>
<p class="MsoNormal">-<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हर रात </span>7–8<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> घंटे भरपूर और बिना बाधा की नींद लें</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ताकि प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत रहे।</span></p>
<p class="MsoNormal">- <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल/स्क्रीन का उपयोग बंद करें</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">क्योंकि ब्लू लाइट मेलाटोनिन को बाधित करती है।</span></p>
<p class="MsoNormal">-<span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नींद को अपनी दैनिक ज़रूरत और आदत बनाइये —बिल्कुल दवाओं और हेल्थ चेकअप की तरह।</span></p>
<p class="MsoNormal"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2025-12/021.jpg" alt="02" width="1280" height="720"></img></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">संपूर्ण स्वास्थ्य की चाभी: पर्याप्त नींद</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कैंसर विशेषज्ञों के अनुसार</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आहार</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">व्यायाम और तनाव प्रबंधन जितना महत्वपूर्ण है — वैसी ही प्राथमिकता नींद को भी मिलनी चाहिए। लगातार कम सोने की आदत चुपचाप हमारे शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा को खोखला करती है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यदि आप अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मज़बूत रखना चाहते हैं</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जल्दी स्वस्थ होना चाहते हैं और लंबे समय तक फिट रहना चाहते हैं — रात की क़द्र कीजिए</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नींद को प्राथमिकता दीजिए।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चर्चा पत्र</category>
                                    

                <link>https://hindi.khabarchhe.com/charcha-patra/watching-mobile-at-night-can-sabotage-your-immunity/article-1375</link>
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                <pubDate>Mon, 08 Dec 2025 14:40:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dr. Dinky Gajiwala]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>युवा भारत में कैंसर तेजी से बढ़ रहा है — क्यों?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><span lang="hi" xml:lang="hi">पहले कैंसर को बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था। लेकिन आज भारत में </span>20–40<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्ष के युवा तेजी से कैंसर की चपेट में आ रहे हैं — कई ऐसे कैंसर भी जो पहले </span>50<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्ष की उम्र के बाद ही मिलते थे। एक चिकित्सक के रूप में यह बदलाव मरीजों और स्वास्थ्य-तंत्र दोनों के लिए चेतावनी है।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">कैंसर का बदलता रूप</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">पहले माना जाता था कि कैंसर दशकों में धीरे-धीरे विकसित होता है। लेकिन देश के प्रमुख कैंसर अस्पतालों में डॉक्टर अर्ली-ऑनसेट कैंसर के मामलों में तेज वृद्धि बता रहे हैं।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">दिल्ली के एक ऑन्कोलॉजिस्ट के अनुसार</span>, 20<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/charcha-patra/cancer-catching-young-indians/article-1244"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2025-11/12.jpg" alt=""></a><br /><p><span lang="hi" xml:lang="hi">पहले कैंसर को बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था। लेकिन आज भारत में </span>20–40<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्ष के युवा तेजी से कैंसर की चपेट में आ रहे हैं — कई ऐसे कैंसर भी जो पहले </span>50<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्ष की उम्र के बाद ही मिलते थे। एक चिकित्सक के रूप में यह बदलाव मरीजों और स्वास्थ्य-तंत्र दोनों के लिए चेतावनी है।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">कैंसर का बदलता रूप</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">पहले माना जाता था कि कैंसर दशकों में धीरे-धीरे विकसित होता है। लेकिन देश के प्रमुख कैंसर अस्पतालों में डॉक्टर अर्ली-ऑनसेट कैंसर के मामलों में तेज वृद्धि बता रहे हैं।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">दिल्ली के एक ऑन्कोलॉजिस्ट के अनुसार</span>, 20<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल की उम्र में कैंसर-मरीज देखना कभी-कभार ही होता था — अब यह लगभग हर हफ्ते होता है।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में स्तन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोलन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फेफड़े</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">थायरॉइड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यूटेरस और प्रोस्टेट कैंसर अब पहले की तुलना में काफी कम उम्र में मिल रहे हैं — कभी-कभी तो टीनएज में भी।</span></p>
<p> <img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2025-11/04-(2).jpg" alt="04 (2)" width="1280" height="720"></img></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसा क्यों हो रहा है</span>?</p>
<p>1. <span lang="hi" xml:lang="hi">वायु और पर्यावरण प्रदूषण</span></p>
<p>PM2.5<span lang="hi" xml:lang="hi"> जैसे सूक्ष्म कण फेफड़ों में गहराई तक जाकर </span>DNA <span lang="hi" xml:lang="hi">को नुकसान पहुंचाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सूजन उत्पन्न करते हैं और कैंसर की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं — वह भी बिना धूम्रपान करने वालों में।</span></p>
<p>2. <span lang="hi" xml:lang="hi">जीवनशैली और तनाव</span> </p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">युवा प्रोफेशनल्स का जीवन भागदौड़ से भरा होता है — देर रात तक काम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनियमित दिनचर्या</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नींद की कमी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फास्ट फूड।</span></p>
<p>Chronic stress <span lang="hi" xml:lang="hi">इम्युनिटी को कमज़ोर करता है और </span>DNA <span lang="hi" xml:lang="hi">की रिपेयर प्रक्रिया बाधित करके कैंसर के लिए अनुकूल वातावरण बनाता है।</span></p>
<p>3. <span lang="hi" xml:lang="hi">आहार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बायलॉजिकल क्लॉक और प्रजनन से जुड़े कारक</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">देर से मातृत्व</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कम या न के बराबर स्तनपान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोसेस्ड फूड का बढ़ता उपयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यायाम की कमी और नींद में गड़बड़ी — यह सब </span>Hormone-sensitive cancers (<span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे ब्रेस्ट कैंसर) को युवाओं में बढ़ा सकता है।</span></p>
<p>4. <span lang="hi" xml:lang="hi">जेनेटिक्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">माइक्रोबायोम और छिपे हुए टॉक्सिन</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">नए शोध बताते हैं कि युवा उम्र में होने वाले कैंसर जैविक रूप से अलग हो सकते हैं।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">जीन-म्यूटेशन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आंतों के माइक्रोबायोम का असंतुलन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">माइक्रोप्लास्टिक या रसायनों के संपर्क का भी योगदान हो सकता है।</span></p>
<p>5. <span lang="hi" xml:lang="hi">बेहतर जाँच और रिपोर्टिंग</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">बेहतर डायग्नोस्टिक्स से अधिक केस मिलते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सिर्फ यही उम्र में इतना बड़ा बदलाव समझाने के लिए पर्याप्त नहीं है।</span></p>
<p> <img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2025-11/034.jpg" alt="03" width="1280" height="720"></img></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">युवा उम्र में कैंसर क्यों गंभीर है</span>?</p>
<p>20–30<span lang="hi" xml:lang="hi"> की उम्र जीवन का सबसे प्रोडक्टिव चरण होता है — करियर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिवार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक योगदान।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">इस अवधि में कैंसर का निदान व्यक्ति ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सम्पूर्ण परिवार और समाज को प्रभावित करता है।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">क्या किया जा सकता है</span>? — <span lang="hi" xml:lang="hi">एक ठोस कार्ययोजना</span></p>
<p>1. <span lang="hi" xml:lang="hi">जागरूकता और स्क्रिनिंग</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">युवा यह न मानें कि कैंसर उनसे दूर है।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि  लगातार थकान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गांठ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मल-मूत्र में बदलाव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वज़न घटना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लगातार एसिडिटी जैसे लक्षण सतत दिख रहें हों तो जांच कराना आवश्यक है।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">शुरुआती निदान उपचार को बहुत अधिक प्रभावी बनाता है।</span></p>
<p>2. <span lang="hi" xml:lang="hi">जीवनशैली में सुधार</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"> तंबाकू पूरी तरह छोड़ें</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"> स्वच्छ हवा के लिए पहल</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"> फल-सब्जियों से भरपूर आहार</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रोसेस्ड फूड कम करें</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"> नियमित व्यायाम</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"> पर्याप्त नींद</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"> तनाव में कमी</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"> महिलाओं के लिए समय पर प्रजनन और गाइनैकोलॉजिकल हेल्थ चेकअप</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2025-11/025.jpg" alt="02" width="1280" height="720"></img></span></p>
<p>3. <span lang="hi" xml:lang="hi">पर्यावरण नीति में सुधार</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">यह केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि सार्वजनिक-स्वास्थ्य का मुद्दा है। स्वच्छ हवा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षित खाद्य पदार्थ (प्रिज़रवेटिव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कलर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">माइक्रोप्लास्टिक पर नियंत्रण)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षित कार्यस्थल — अत्यंत आवश्यक हैं।</span></p>
<p>4. <span lang="hi" xml:lang="hi">युवा कैंसर-मरीजों के लिए विशेष सहायता-प्रणाली</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मानसिक परामर्श</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक मार्गदर्शन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लंबी अवधि की </span>Survivor care — <span lang="hi" xml:lang="hi">इन सबके लिए एक अलग फ्रेमवर्क चाहिए।</span></p>
<p>5. <span lang="hi" xml:lang="hi">शोध और रजिस्ट्री</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में युवा उम्र में होने वाले कैंसर को समझना — </span>molecular level <span lang="hi" xml:lang="hi">पर — भविष्य में बेहतर स्क्रिनिंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोकथाम और उपचार का मार्ग प्रशस्त करेगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चर्चा पत्र</category>
                                    

                <link>https://hindi.khabarchhe.com/charcha-patra/cancer-catching-young-indians/article-1244</link>
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                <pubDate>Fri, 14 Nov 2025 17:56:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dr. Dinky Gajiwala]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत में युवा महिलाओं में बढ़ता स्तन कैंसर — 5 प्रमुख कारण</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पहले स्तन कैंसर को मध्य वय की महिलाओं की बीमारी माना जाता था। लेकिन अब यह 45 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं में तेजी से बढ़ रहा है, जिससे डॉक्टरों और परिवारों में चिंता बढ़ी है। इस वृद्धि के पीछे कई कारण हैं — आनुवंशिकता, जीवनशैली, प्रजनन संबंधी बदलाव और पर्यावरणीय प्रभाव एवं अन्य। आइए इन पाँच प्रमुख कारणों को समझें।</p>
<p><strong>1. आनुवंशिक कारण और सीमित जाँच</strong></p>
<p>युवा महिलाओं में स्तन कैंसर के मामलों में BRCA1 और BRCA2 जैसे जीन म्यूटेशन का योगदान अधिक पाया गया है। भारतीय अध्ययनों में इन म्यूटेशन का अनुपात अपेक्षा से ज्यादा देखा गया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/charcha-patra/breast-cancer-rising-among-young-women-in-india/article-1169"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2025-10/011.jpg" alt=""></a><br /><p>पहले स्तन कैंसर को मध्य वय की महिलाओं की बीमारी माना जाता था। लेकिन अब यह 45 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं में तेजी से बढ़ रहा है, जिससे डॉक्टरों और परिवारों में चिंता बढ़ी है। इस वृद्धि के पीछे कई कारण हैं — आनुवंशिकता, जीवनशैली, प्रजनन संबंधी बदलाव और पर्यावरणीय प्रभाव एवं अन्य। आइए इन पाँच प्रमुख कारणों को समझें।</p>
<p><strong>1. आनुवंशिक कारण और सीमित जाँच</strong></p>
<p>युवा महिलाओं में स्तन कैंसर के मामलों में BRCA1 और BRCA2 जैसे जीन म्यूटेशन का योगदान अधिक पाया गया है। भारतीय अध्ययनों में इन म्यूटेशन का अनुपात अपेक्षा से ज्यादा देखा गया है। फिर भी, जीन परीक्षण महंगा और सीमित है। अधिक महिलाओं तक सस्ती और सुलभ आनुवंशिक जाँच पहुँचाने की आवश्यकता है, ताकि जोखिम पहले से पहचाना जा सके।</p>
<p><strong><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2025-10/011.jpg" alt="01" width="1280" height="720"></img></strong></p>
<p><strong>2. हानिकारक केमिकल्स </strong></p>
<p>आधुनिक जीवनशैली में एंडोक्राइन-डिसरप्टिंग केमिकल्स (EDCs) हर जगह मौजूद हैं — जैसे प्लास्टिक, कॉस्मेटिक उत्पाद, कीटनाशक और पैक्ड खाद्य पदार्थ। ये रसायन शरीर के हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ते हैं और स्तन कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह एक गंभीर उभरता हुआ खतरा है।</p>
<p><strong>3. जीवनशैली और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य</strong></p>
<p>मोटापा, खराब आहार, तनाव, प्रदूषण और नींद की कमी जैसे कारक भी स्तन कैंसर के जोखिम को बढ़ाते हैं। ये सभी हार्मोन जैसे कॉर्टिसोल और मेलाटोनिन को प्रभावित करते हैं, जो शरीर की रोग-प्रतिरोधक और कोशिका-नवीनीकरण प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2025-10/031.jpg" alt="03" width="1280" height="720"></img></p>
<p><strong>4. प्रजनन पैटर्न में बदलाव</strong></p>
<p>आधुनिक महिलाओं में देर से विवाह, देर से मातृत्व, कम गर्भधारण और कम स्तनपान अवधि जैसी प्रवृत्तियाँ बढ़ी हैं। ये सभी स्तन कैंसर के आजीवन जोखिम को बढ़ाने वाले ज्ञात कारक हैं।</p>
<p><strong>5. स्क्रीनिंग और प्रारंभिक पहचान की कमी</strong></p>
<p>भारत में अधिकांश स्क्रीनिंग कार्यक्रम 40 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं को शामिल नहीं करते। युवतियों में स्तन ऊतक अधिक घने होने के कारण मेमोग्राफी कम प्रभावी होती है। नतीजतन, कई मामलों का पता तब चलता है जब रोग काफी बढ़ चुका होता है।</p>
<p><strong><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2025-10/021.jpg" alt="02" width="1280" height="720"></img></strong></p>
<p><strong>क्या है उपाय?</strong></p>
<p>खास तौर पर, युवा महिलाओं में HER2-पॉजिटिव और ट्रिपल-नेगेटिव जैसे अधिक आक्रामक प्रकार के कैंसर तेजी से फैलते हैं और इलाज के सीमित विकल्प देते हैं।</p>
<p>इसलिए, कम लागत वाले अल्ट्रासाउंड और क्लिनिकल ब्रेस्ट एग्ज़ाम को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुँचाना जरूरी है। NPCDCS कार्यक्रम को अपडेट कर युवा महिलाओं को भी स्क्रीनिंग में शामिल करना होगा।</p>
<p>भारत को तुरंत बेहतर कैंसर रजिस्ट्री सिस्टम और व्यापक जनजागरूकता अभियान की आवश्यकता है। युवतियों को नियमित स्व-परीक्षण, शुरुआती लक्षणों पर ध्यान और तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।</p>
<p>समय पर जाँच ही जीवन बचाने की कुंजी है।इसके लिए जागरूकता, स्वास्थ्य सुविधाएँ और ठोस नीति-निर्माण की आवश्यकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चर्चा पत्र</category>
                                    

                <link>https://hindi.khabarchhe.com/charcha-patra/breast-cancer-rising-among-young-women-in-india/article-1169</link>
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                <pubDate>Thu, 30 Oct 2025 16:52:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dr. Dinky Gajiwala]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>युवाओं में कैंसर के केस बढ़ रहे हैं, लेकिन डरने की ज़रूरत नहीं!</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अमेरिका में JAMA Internal Medicine द्वारा किए गए लेटेस्ट अध्ययन की रिपोर्ट कुछ महत्वपूर्ण जानकारी देती है। रिपोर्ट दिखाती है कि युवाओं यानी 50 वर्ष से कम उम्र के लोगों में कैंसर के केस बढ़ रहे हैं। लेकिन इसके पीछे का कारण चौंकाने वाला है। यह अध्ययन बताता है कि केसों की संख्या बढ़ने का कारण आधुनिक डायग्नोसिस तकनीकें और लोगों में कैंसर को लेकर जागरूकता है। यह अच्छी बात है, क्योंकि अगर पहले से निदान हो जाए तो सही इलाज किया जा सकता है।</p>
<p>इस रिपोर्ट के अनुसार, केसों की संख्या बढ़ी है लेकिन इससे घबराने की ज़रूरत नहीं</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/charcha-patra/cancer-cases-are-increasing-among-young-people/article-1083"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2025-10/01.jpg" alt=""></a><br /><p>अमेरिका में JAMA Internal Medicine द्वारा किए गए लेटेस्ट अध्ययन की रिपोर्ट कुछ महत्वपूर्ण जानकारी देती है। रिपोर्ट दिखाती है कि युवाओं यानी 50 वर्ष से कम उम्र के लोगों में कैंसर के केस बढ़ रहे हैं। लेकिन इसके पीछे का कारण चौंकाने वाला है। यह अध्ययन बताता है कि केसों की संख्या बढ़ने का कारण आधुनिक डायग्नोसिस तकनीकें और लोगों में कैंसर को लेकर जागरूकता है। यह अच्छी बात है, क्योंकि अगर पहले से निदान हो जाए तो सही इलाज किया जा सकता है।</p>
<p>इस रिपोर्ट के अनुसार, केसों की संख्या बढ़ी है लेकिन इससे घबराने की ज़रूरत नहीं क्योंकि मृत्यु दर में कोई इज़ाफा नहीं हुआ है। कुछ मामलों में तो मृत्यु दर में कमी भी आई है।</p>
<p>कुल मिलाकर कहा जाए तो नए डायग्नोसिस तरीकों की वजह से केसों की संख्या बढ़ रही है। इससे सटीक और गहराई से जांच हो सकती है। यह अच्छी बात है। साथ ही, दूसरी अच्छी बात यह है कि मृत्यु दर में वृद्धि नहीं हुई है।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2025-10/01.jpg" alt="01" width="1280" height="720"></img></p>
<p><strong>तो आइए देखते हैं इस अध्ययन के मुख्य पॉइंट्स:</strong></p>
<p>1. नए केस बढ़ने का मुख्य कारण स्क्रींनिंग: अध्ययन बताता है कि 50 साल से कम उम्र के लोगों में कैंसर केस बढ़ने का सबसे बड़ा कारण बेहतर और नियमित स्क्रींनिंग तथा गहन जांच है।</p>
<p>2. मृत्यु दर स्थिर: ज्यादातर कैंसर (जैसे थायरॉयड, किडनी, गुदा, पैंक्रियाज़) में केस बढ़ने के बावजूद युवाओं में मृत्यु दर में कोई बदलाव नहीं हुआ या फिर उसमें कमी आई है।</p>
<p>3. ज्यादा जोखिम वाले कैंसर: अध्ययन में शामिल 8 कैंसर में से सिर्फ 2 – कोलोरेक्टल (आंत) और एंडोमेट्रियल – में मृत्यु दर में हल्का इज़ाफा देखा गया।</p>
<p>4. स्तन और कोलोरेक्टल कैंसर: इन दोनों कैंसरों के केस युवाओं में बढ़े हैं, लेकिन जल्दी निदान और उपचार (जैसे इम्यूनोथेरेपी) की वजह से मृत्यु दर लगभग आधी हो गई है।</p>
<p>5. जल्दी स्क्रींनिंग: जल्दी निदान को संभव बनाने के लिए अमेरिका में स्तन कैंसर की स्क्रींनिंग की उम्र 50 से घटाकर 40 और कोलन कैंसर की स्क्रींनिंग की उम्र 50 से घटाकर 45 कर दी गई है।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2025-10/02.jpg" alt="02" width="1280" height="720"></img></p>
<p>अमेरिकी डॉक्टरों का कहना है कि जैसे-जैसे अधिक शक्तिशाली जांच तकनीकें सामने आ रही हैं, वैसे-वैसे ऐसे कैंसर भी पकड़े जा रहे हैं जो शायद कभी मरीज के स्वास्थ्य को नुकसान ही न पहुंचाते। ऐसे कैंसर का इलाज करना जो "क्लीनिकली मायने रखने वाला" यानी खतरनाक नहीं है, युवा मरीजों पर आर्थिक बोझ और मानसिक तनाव डालता है। डॉक्टरों का मानना है कि हर कैंसर के लिए तुरंत इलाज करने के बजाय यह मूल्यांकन करना ज़रूरी है कि वह वाकई खतरनाक है या नहीं। अगर गांठ छोटी है, तो मरीज की सहमति से उसकी लगातार मॉनिटरिंग करना बेहतर रणनीति है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चर्चा पत्र</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Oct 2025 18:58:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dr. Dinky Gajiwala]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजकुमारी केट की कैंसर को हराने की संघर्षमय दास्तान</title>
                                    <description><![CDATA[<p>कैंसर किसी को भी हो सकता है फिर वो वेल्स की राजकुमारी केट मिडलटन भी क्यों न हो । और सभी को उसी दर्द से गुजरना पड़ता है। कैंसर और दर्द किसी को रियायत नहीं देते। किंतु इससे लड़ने की सबकी अपनी अपनी कहानी है।मार्च 2024 में, एक  पेट की सर्जरी के बाद इस बाद का खुलासा हुआ कि प्रिंसेस केट को कैंसर है। उन्होंने एक वीडियो संदेश के माध्यम से इस बात को साझा किया और यह भी कहा कि वह कीमोथेरेपी शुरू कर रही हैं । इस कठिन समय में उन्हे निजता की आवश्यकता है।</p>
<p>अगले कुछ महीनों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/charcha-patra/how-princess-kate-fought-and-defeated-cancer-with-grace-and-grit/article-714"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2025-07/02.jpg" alt=""></a><br /><p>कैंसर किसी को भी हो सकता है फिर वो वेल्स की राजकुमारी केट मिडलटन भी क्यों न हो । और सभी को उसी दर्द से गुजरना पड़ता है। कैंसर और दर्द किसी को रियायत नहीं देते। किंतु इससे लड़ने की सबकी अपनी अपनी कहानी है।मार्च 2024 में, एक  पेट की सर्जरी के बाद इस बाद का खुलासा हुआ कि प्रिंसेस केट को कैंसर है। उन्होंने एक वीडियो संदेश के माध्यम से इस बात को साझा किया और यह भी कहा कि वह कीमोथेरेपी शुरू कर रही हैं । इस कठिन समय में उन्हे निजता की आवश्यकता है।</p>
<p>अगले कुछ महीनों में उन्होंने उपचार को चुपचाप लेकिन दृढ़ता के साथ अपनाया। उन्होंने सितंबर 2024 में कीमोथेरेपी पूरी की और जनवरी 2025 में अपने कैंसर-मुक्त होने की घोषणा की।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2025-07/02.jpg" alt="02" width="1280" height="720"></img></p>
<p>हालांकि उन्होंने चिकित्सा से ठीक हो जाने की बात कही, लेकिन उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ठीक होने की प्रक्रिया सरल नहीं होती। 2 जुलाई 2025 को कोलचेस्टर अस्पताल की यात्रा के दौरान उन्होंने कहा:</p>
<p>“आप एक बहादुरी का मुखौटा पहनते हैं… फिर लगता है कि अब सामान्य जीवन जी सकती हूं, लेकिन वास्तव में, इसके बाद का दौर बेहद कठिन होता है… यह एक रोलर कोस्टर जैसा है।”</p>
<p>उन्होंने इस दौर में मानसिक और इमोशनल समर्थन की जरूरत पर जोर दिया, जो कि केवल शारीरिक इलाज से अलग है। उन्होने कीमोथेरेपी के अलावा प्राकृतिक और वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों के बारे में भी कहा । उन्होंने कहा कि एक्यूपंक्चर और प्रकृति से जुड़कर मानसिक शांति पाई।</p>
<p>केट ने जिस ईमानदारी से अपनी संघर्ष की कहानी साझा की, उसने राजघरानों की पारंपरिक चुप्पी को तोड़ा। उन्होंने दिखाया कि कमजोरी स्वीकारना भी ताकत होती है।</p>
<p>वह सिर्फ अपनी लड़ाई ही नहीं लड़ रही थीं, बल्कि दूसरों के लिए जागरूकता और संवेदनशीलता का वातावरण भी तैयार कर रही थीं। एक कैंसर सर्वाइवर के रूप में, उन्होंने Royal Marsden Hospital और NHS Charities Together के माध्यम से कई रोगियों को सहायता पहुंचाई।</p>
<p>जून 2024 में Trooping the Colour कार्यक्रम में भाग लिया, विंबलडन में उपस्थित रहीं तथा 2 जुलाई 2025 को अस्पताल में गुलाब का पौधा लगाया, जो उनकी रीकवरी का प्रतीक था।</p>
<p>किंतु उन्होंने Royal Ascot में भाग नहीं लिया, ताकि अपनी मेन्टल हेल्थ की रीकवरी को प्राथमिकता दे सकें। यह दिखाता है कि अब वह अपने शरीर और मन की सुन रही हैं, दूसरों की अपेक्षाओं की नहीं।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2025-07/03.jpg" alt="03" width="1280" height="720"></img></p>
<p>प्रिंसेस केट की यह यात्रा सिर्फ कैंसर के उपचार से जुड़ी जीत नहीं है। यह संवेदना, आत्म-साक्षात्कार और नए जीवन की ओर लौटने की प्रेरणादायक कहानी है। उन्होंने न केवल खुद को ठीक किया, बल्कि दुनिया को यह दिखाया कि कैंसर के बाद का जीवन भी पूरी गरिमा और ताकत के साथ जिया जा सकता है।</p>
<p>साहस केवल जीवित रहना नहीं है — असली साहस है खुद को फिर से खोज पाना, और दूसरों को राह दिखा पाना।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चर्चा पत्र</category>
                                    

                <link>https://hindi.khabarchhe.com/charcha-patra/how-princess-kate-fought-and-defeated-cancer-with-grace-and-grit/article-714</link>
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                <pubDate>Tue, 22 Jul 2025 13:51:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dr. Dinky Gajiwala]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>#HaldiChallenge: क्या हल्दी से कैंसर का उपचार हो सकता है?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सोशल मीडिया के इस युग में स्वास्थ्य से जुड़ी सच्ची-जूठी बातें बहुत तेजी से फैलती हैं। ऐसा ही एक लोकप्रिय ट्रेंड — #HaldiChallenge— ने हल्दी को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। गोल्डन लाटे से लेकर घरेलू इम्यूनिटी शॉट्स तक, पूरी दुनिया हल्दी को एक “चमत्कारी मसाला” मान रही है।</p>
<p>एक कैंसर फिजि़शियन के रूप में मुझसे अक्सर पूछा जाता है: "क्या हल्दी जैसी जड़ी-बूटियाँ वास्तव में कैंसर से बचाव या इलाज में मदद करती हैं?"</p>
<p>इसका उत्तर सरल नहीं है, लेकिन प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के संगम में छिपा है।</p>
<p>वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यदि इस विषय</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://hindi.khabarchhe.com/charcha-patra/haldichallenge-can-turmeric-can-cause-cancer-treatment/article-671"><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/400/2025-06/012.jpg" alt=""></a><br /><p>सोशल मीडिया के इस युग में स्वास्थ्य से जुड़ी सच्ची-जूठी बातें बहुत तेजी से फैलती हैं। ऐसा ही एक लोकप्रिय ट्रेंड — #HaldiChallenge— ने हल्दी को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। गोल्डन लाटे से लेकर घरेलू इम्यूनिटी शॉट्स तक, पूरी दुनिया हल्दी को एक “चमत्कारी मसाला” मान रही है।</p>
<p>एक कैंसर फिजि़शियन के रूप में मुझसे अक्सर पूछा जाता है: "क्या हल्दी जैसी जड़ी-बूटियाँ वास्तव में कैंसर से बचाव या इलाज में मदद करती हैं?"</p>
<p>इसका उत्तर सरल नहीं है, लेकिन प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के संगम में छिपा है।</p>
<p>वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यदि इस विषय की चर्चा करें तो हल्दी में कर्क्यूमिन पाया जाता है जिसकी मेडिसिनल वेल्यू है-  </p>
<p>-सूजन रोकता है: क्रॉनिक इंफ्लेमेशन (दीर्घकालिक सूजन) कैंसर के रोगियों में पाई जाती है। लैब रिसर्च में यह पाया गया है कि कर्क्यूमिन सूजन को कम करने में मदद कर सकता है।<br />-एंटीऑक्सीडेंट गुण: कर्क्यूमिन हानिकारक फ्री रेडिकल्स को निष्क्रिय करता है, जो डीएनए को नुकसान पहुँचाकर कैंसर का कारण बन सकते हैं।<br />-कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करना: कुछ प्रयोगशालाओं में यह पाया गया है कि कर्क्यूमिन कैंसर कोशिकाओं में अपोप्टोसिस (प्रोग्राम्ड सेल डेथ) को बढ़ावा देता है, जबकि स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान नहीं पहुँचाता।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2025-06/023.jpg" alt="02" width="1280" height="720"></img></p>
<p><strong>लेकिन एक चुनौती है:</strong></p>
<p>कर्क्यूमिन की जैव उपलब्धता (bioavailability) बहुत कम है — यानी शरीर इसे सीमित मात्रा में ही सोख पाता है। इस बाधा को दूर करने के लिए वैज्ञानिक पिपरिन (काली मिर्च), लिपोसोमल कर्क्यूमिन, और नैनोफॉर्म्यूलेशन्स जैसी नई तकनीकों पर शोध कर रहे हैं।</p>
<p><strong>हल्दी जैसी जड़ी-बूटियाँ मुख्य इलाज का विकल्प नहीं, बल्कि पूरक हो सकती हैं। इनका कार्य है:</strong></p>
<p>- रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना<br />- कीमोथेरेपी या रेडिएशन के दुष्प्रभावों को कम करना<br />- जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना</p>
<p>लेकिन कोई भी हर्बल सप्लिमेंट शुरू करने से पहले अपने ऑन्कोलॉजिस्ट से सलाह अवश्य लें, ताकि दवाओं के साथ किसी भी हानिकारक प्रतिक्रिया से बचा जा सके।</p>
<p><img src="https://hindi.khabarchhe.com/media/2025-06/012.jpg" alt="01" width="1280" height="720"></img></p>
<p><strong>#HaldiChallenge से मिलने वाली सीख:</strong></p>
<p>यह ट्रेंड भले ही हल्का-फुल्का लगे, लेकिन यह हमें हमारी प्राकृतिक चिकित्सा परंपराओं से जुड़ने की याद दिलाता है। एक कैंसर चिकित्सक के रूप में मैं ऐसे ट्रेन्ड्स का स्वागत करती हूँ ताकि हम:</p>
<p>- परंपरागत ज्ञान पर वैज्ञानिक चर्चा करें<br />- प्रमाण-आधारित समग्र (integrative) देखभाल को बढ़ावा दें<br />- जीवनशैली और पोषण के माध्यम से कैंसर की रोकथाम करें</p>
<p>हल्दी और अन्य जड़ी-बूटियाँ कैंसर के खिलाफ हमारी मित्र हो सकती हैं — लेकिन इलाज नहीं। विज्ञान लगातार यह समझने की कोशिश कर रहा है कि इनका सही और सुरक्षित उपयोग कैसे किया जाए। आइए, प्रकृति के ज्ञान का सम्मान करते हुए, वैज्ञानिक साक्ष्य के साथ इलाज की दिशा में आगे बढ़े।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चर्चा पत्र</category>
                                    

                <link>https://hindi.khabarchhe.com/charcha-patra/haldichallenge-can-turmeric-can-cause-cancer-treatment/article-671</link>
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                <pubDate>Thu, 26 Jun 2025 16:54:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dr. Dinky Gajiwala]]></dc:creator>
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